माँ बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास है। लेकिन इसके साथ ही महिला के शरीर में कई बड़े बदलाव भी होते हैं। अक्सर डिलीवरी के बाद थोड़ा वज़न तो अपने आप कम हो जाता है। फिर भी कई महिलाओं का 8 से 10 किलो वज़न कम होने का नाम ही नहीं लेता। शुरू में लगता है कि कुछ महीनों में सब ठीक हो जाएगा। लेकिन जब काफी समय बीत जाने पर भी सुई वहीं अटकी रहती है, तो चिंता होने लगती है।
अक्सर लोग सलाह देते हैं कि कम खाओ और कसरत शुरू कर दो। लेकिन सच्चाई इतनी आसान नहीं है। सिर्फ ज़्यादा खाना ही वज़न बढ़ने का कारण नहीं है। शरीर में हार्मोन्स का बदलना, नींद पूरी न होना, तनाव और कमजोर पाचन भी इसके बड़े कारण हैं। आपका शरीर अभी रिकवरी के एक बड़े दौर से गुजर रहा है। इसलिए वज़न घटाने के लिए कोई जादू की छड़ी या जल्दबाजी काम नहीं करेगी। इसके लिए एक सही और संतुलित प्लान की जरूरत है। ऐसा प्लान जो शरीर को कमजोर किए बिना, धीरे-धीरे उसे फिर से स्वस्थ और चुस्त बनाए।
डिलीवरी के बाद वज़न कम क्यों नहीं होता?
कई महिलाओं को लगता है कि प्रसव के कुछ महीनों बाद उनका वज़न अपने आप घट जाएगा। लेकिन अगर आपका 8 से 10 किलो वज़न लंबे समय से अटका है, तो इसके पीछे मुख्य रूप से ये कारण होते हैं:
- हार्मोन्स में बदलाव: गर्भावस्था और प्रसव के बाद शरीर में हार्मोन्स तेजी से बदलते हैं। इससे हमारा मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। नतीजा यह होता है कि वज़न घटने की रफ्तार भी काफी कम हो जाती है।
- नींद की कमी: छोटे बच्चे की देखभाल में माँ की नींद कभी पूरी नहीं हो पाती। ठीक से न सोने पर भूख को कंट्रोल करने वाले हार्मोन्स बिगड़ जाते हैं। इससे बार-बार कुछ खाने की इच्छा होने लगती है।
- शारीरिक गतिविधि कम होना: डिलीवरी के बाद शरीर को बहुत आराम चाहिए होता है। लेकिन लंबे समय तक एक ही जगह बैठे या लेटे रहने से कैलोरी बर्न नहीं हो पाती। इससे वज़न घटाना मुश्किल हो जाता है।
- तनाव और कमजोर पाचन: बच्चे की देखभाल में मां खुद पर ध्यान नहीं दे पाती। इससे तनाव बढ़ता है और खानपान का समय बिगड़ जाता है। कमजोर पाचन भी वज़न को एक जगह रोक देता है।
वज़न कम न होने से क्या परेशानियाँ हो सकती हैं?
- थकान और भारीपन: हर समय शरीर भारी-भारी लगता है। पहले जैसी फुर्ती महसूस नहीं होती। थोड़ा सा काम करते ही शरीर बहुत जल्दी थक जाता है।
- दर्द और जकड़न: शरीर का वज़न बढ़ने से कमर और घुटनों में दर्द रहने लगता है। बच्चे को गोद में उठाना, सीढ़ियाँ चढ़ना या घर के काम करना पहले से ज़्यादा मुश्किल लगने लगता है।
- मानसिक तनाव: बढ़ा हुआ वज़न सिर्फ शरीर पर नहीं, मन पर भी भारी पड़ता है। पुराने कपड़े फिट न आने पर निराशा होती है। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास भी धीरे-धीरे कम होने लगता है।
- बीमारियों का खतरा: अगर वज़न लंबे समय तक ऐसा ही रहे, तो आगे चलकर शुगर, ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
यही कारण है कि डिलीवरी के बाद वज़न कम करने का मतलब सिर्फ पतला दिखना नहीं होना चाहिए। इसका असली मकसद आपके शरीर को अंदर से फिर से मजबूत और स्वस्थ बनाना है।
अटका हुआ वज़न कैसे कम करें?
अगर आपका वज़न भी लंबे समय से अटका हुआ है, तो बिल्कुल घबराएं नहीं। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि शरीर को रिकवर होने के लिए समय चाहिए। खुद पर जल्दी वज़न घटाने का दबाव न डालें। आप इन आसान बातों का ध्यान रख सकती हैं:
- भरपूर आराम और नींद लें: लगातार 7-8 घंटे सोना शायद मुमकिन न हो। लेकिन जब भी मौका मिले, छोटी सी झपकी जरूर ले लें। आराम करना वज़न घटाने की पहली सीढ़ी है।
- क्रैश डाइट कभी न करें: जल्दी वज़न घटाने के लिए भूखे रहने की गलती न करें। इससे शरीर कमजोर होगा और मेटाबॉलिज्म और धीमा हो जाएगा। अपने खाने में दालें, हरी सब्जियां, ताजे फल और प्रोटीन भरपूर मात्रा में लें।
- हल्की वॉक से शुरुआत करें: शरीर को एकदम से बहुत ज़्यादा न थकाएं। रोज थोड़ी-थोड़ी वॉक करने की आदत डालें। शुरुआत में कम चलें, फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। नियमित रहने से एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न होगी।
- पाचन को दुरुस्त रखें: आयुर्वेद भी मानता है कि डिलीवरी के बाद पाचन का मजबूत होना सबसे जरूरी है। हमेशा समय पर खाना खाएं। बाहर का, तला-भुना और डिब्बाबंद खाना खाने से पूरी तरह बचें।
आयुर्वेद का नजरिया: आहार में क्या बदलाव करें?
आयुर्वेद के अनुसार वज़न बढ़ने या अटकने की मुख्य वजह 'अग्नि' यानी हमारी पाचन शक्ति का कमजोर होना है। डिलीवरी के बाद शरीर में खाली जगह बनने से 'वात दोष' भी बहुत बढ़ जाता है। इसलिए आयुर्वेद सख्त डाइटिंग करने से मना करता है। ध्यान सिर्फ अपना पाचन सुधारने पर दें। जब खाना अच्छे से पचेगा, तो एक्स्ट्रा फैट अपने आप कम होने लगेगा।
- हल्का गुनगुना पानी पिएं: फ्रिज का ठंडा पानी पीना बिल्कुल बंद कर दें। दिन भर सिर्फ हल्का गुनगुना पानी ही पिएं। आप इसमें जीरा, सौंफ या अजवाइन भी उबाल सकती हैं। यह पानी शरीर की सूजन घटाता है।
- गरमा-गरम और ताजा खाना: हमेशा ताजा बना हुआ हल्का गर्म खाना ही खाएं। बासी या ठंडा खाना पचने में बहुत भारी होता है। इस समय मूंग दाल की खिचड़ी, सब्जियों का दलिया और लौकी-तोरई जैसी सब्जियां सबसे अच्छी रहती हैं।
- पाचक मसालों का इस्तेमाल: खाना बनाते समय जीरा, हींग, सोंठ (सूखा अदरक), अजवाइन और हल्दी जरूर डालें। ये मसाले बढ़े हुए 'वात' को शांत करते हैं। साथ ही भारी खाने को पचाने में भी मदद करते हैं।
- कच्ची चीजों से परहेज: इस दौरान कच्चा सलाद, अंकुरित अनाज (स्प्राउट्स) या ठंडी चीजें न खाएं। कमजोर पाचन के कारण इन्हें पचाना मुश्किल होता है। सब्जियों को अच्छे से पकाकर या उनका सूप बनाकर ही पिएं।
डिलीवरी के बाद के लिए एक संतुलित डाइट प्लान
| समय | क्या खाएं / पिएं | कुछ जरूरी बातें |
| सुबह उठते ही | हल्का गुनगुना पानी या सौंफ-जीरा-धनिया का पानी। | एकदम से बहुत ज़्यादा न पिएं। आराम से घूंट-घूंट करके पिएं। |
| नाश्ता | मूंग दाल का चीला, दलिया, ओट्स, पोहा या सब्जियों वाला उपमा। | हमेशा ताजा बनाकर ही खाएं। साथ में थोड़ी प्रोटीन जरूर लें। |
| दिन के बीच में | कोई भी मौसमी फल जैसे पपीता, सेब, अमरूद या नाशपाती। | जूस पीने के बजाय पूरा फल चबाकर खाना ज़्यादा अच्छा है। |
| दोपहर का खाना | 1-2 रोटी, दाल, हरी सब्जी, सलाद और थोड़ा सा दही। | जल्दबाजी न करें। आराम से बैठकर चबा-चबाकर खाएं। |
| शाम का नाश्ता | भुने हुए चने, मखाना, नारियल पानी या हर्बल चाय। | चाय के साथ तली हुई चीजें या बिस्कुट बिल्कुल न खाएं। |
| रात का खाना | हल्की सब्जी, दाल-रोटी या मूंग दाल की खिचड़ी। | सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले अपना भोजन कर लें। |
| सोने से पहले | हल्दी वाला दूध या साधारण गुनगुना दूध (अगर पचता हो)। | बहुत कम मात्रा में लें और पीकर तुरंत न सोएं। |
आयुर्वेद का मूल नियम
इस दौरान घी और तेल खाना पूरी तरह बंद न करें। जोड़ों की मजबूती और 'वात' को कंट्रोल करने के लिए थोड़ा सा गाय का घी खाना बेहद जरूरी है। सही मात्रा में खाया गया घी वज़न नहीं बढ़ाता, बल्कि शरीर को अंदर से ठीक करता है।
खाने के दौरान इन बातों का ध्यान रखें:
| क्या करें | क्या न करें |
| हमेशा तय समय पर ही भोजन करें। | खाना छोड़ना या लंबे समय तक भूखे रहना। |
| घर का बना हुआ साफ और ताजा खाना खाएं। | बाजार का डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड (पैकेटबंद) खाना। |
| दिनभर में शरीर को हाइड्रेटेड रखें, खूब पानी पिएं। | कोल्ड ड्रिंक या बहुत ज़्यादा मीठे पेय पदार्थ पीना। |
| अपने हर भोजन में थोड़ा प्रोटीन जरूर शामिल करें। | सिर्फ रोटी-चावल (कार्बोहाइड्रेट) पर ही निर्भर रहना। |
| खाना हमेशा धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं। | मोबाइल देखते हुए या बहुत जल्दी-जल्दी खाना खाना। |
अगर फिर भी वज़न अटका रहे, तो आयुर्वेद के ये गहरे उपाय अपनाएं
अगर अच्छी डाइट और वॉक के बाद भी वज़न कम नहीं हो रहा है, तो शरीर के ब्लॉकेज (टॉक्सिन्स) को खोलना जरूरी है। आप ये तरीके अपना सकती हैं:
शरीर के ब्लॉकेज खोलें (टॉक्सिन्स दूर करें)
- उद्वर्तन (सूखी हर्बल मालिश): घर पर त्रिफला पाउडर या बेसन में थोड़ी सी हल्दी और सोंठ मिला लें। इस सूखे पाउडर से शरीर पर, खासकर पेट और जांघों पर नीचे से ऊपर की तरफ हल्के हाथों से मालिश करें। यह बंद रोमछिद्रों को खोलता है और जिद्दी चर्बी को पिघलाता है।
- त्रिफला का सही इस्तेमाल: रात को सोने से पहले आधा चम्मच त्रिफला पाउडर गुनगुने पानी के साथ लें। यह न सिर्फ आपका पेट साफ रखेगा, बल्कि शरीर के अंदर जमा पुरानी गंदगी को भी बाहर निकालेगा।
हर्बल चाय और काढ़े का सहारा लें
- मेथी और दालचीनी का पानी: रात में एक चम्मच मेथी दाना और थोड़ा सा दालचीनी का टुकड़ा पानी में भिगो दें। सुबह इसे उबालकर छान लें और चाय की तरह घूंट-घूंट करके पिएं। यह इंसुलिन को ठीक करता है और पेट की चर्बी घटाता है।
- दशमूलारिष्ट: यह एक बहुत ही प्रसिद्ध आयुर्वेदिक सिरप है। डिलीवरी के बाद यह महिलाओं को खास तौर पर दिया जाता है। यह गर्भाशय (Uterus) को वापस उसके सही आकार में लाता है। साथ ही, यह कमजोरी दूर करके बढ़े हुए वात दोष को शांत करता है।
मानसिक तनाव और दोषों को संतुलित करें
- तनाव कम करें: नींद पूरी न होने और जिम्मेदारी बढ़ने से तनाव होना आम बात है। लेकिन तनाव से शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ता है, जो वज़न को कम नहीं होने देता। इसके लिए रोज सिर्फ 10 मिनट 'अनुलोम-विलोम' प्राणायाम जरूर करें।
- भारी चीजों से पूरी दूरी: अगर वज़न बिल्कुल नहीं हिल रहा है, तो कुछ समय के लिए उड़द की दाल, राजमा, छोले और मैदा खाना पूरी तरह बंद कर दें। सिर्फ आसानी से पचने वाला हल्का खाना ही खाएं।
एक जरूरी सलाह: अगर आप अभी बच्चे को स्तनपान (Breastfeeding) करा रही हैं, तो वज़न घटाने के लिए कोई भी बहुत सख्त उपाय या जड़ी-बूटी शुरू न करें। बच्चे को दूध पिलाने से रोज आपके शरीर की काफी कैलोरी अपने आप बर्न होती है।
निष्कर्ष
डिलीवरी के बाद 8 से 10 किलो वज़न का लंबे समय तक अटका रहना एक आम बात हो सकती है। आपके शरीर को पूरी तरह से ठीक होने और रिकवर होने में समय लगता है। हार्मोन्स का बदलना, तनाव, नींद की कमी और कमजोर पाचन शक्ति वज़न घटाने की रफ्तार को काफी धीमा कर देते हैं इसलिए जल्दबाजी में डाइटिंग करने के बजाय सही और संतुलित आहार लें। पूरा आराम करें, नियमित रूप से वॉक करें और एक स्वस्थ दिनचर्या अपनाएं। अगर लगातार कोशिश करने के बाद भी वज़न कम नहीं होता है, तो किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह जरूर लें। थोड़े से धैर्य और सही देखभाल से आपका शरीर धीरे-धीरे फिर से एकदम स्वस्थ, ऊर्जावान और फिट बन सकता है।
Reference
https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9392837/
https://www.nhs.uk/baby/support-and-services/keeping-fit-and-healthy-with-a-baby/























