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क्या Thyroid में Gluten बंद करना ज़रूरी है? आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

Information By Dr. Keshav Chauhan

आप रोज़ाना अपनी थायरॉइड की गोली खाती हैं, फिर भी आपका वज़न तेज़ी से बढ़ रहा है। बाल झड़ रहे हैं, और दिन भर भयानक थकान रहती है। जब आप इंटरनेट पर सर्च करती हैं, तो हर जगह एक ही सलाह मिलती है ग्लूटेन (Gluten) छोड़ दो! आप सोचती हैं कि क्या सच में गेहूँ खाने से मेरा थायरॉइड बिगड़ रहा है? हम अक्सर थायरॉइड का कारण सिर्फ आयोडीन की कमी को मानते हैं, लेकिन सबसे बड़े खामोश कारण खराब गट हेल्थ को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि स्ट्रेस, ग्लूटेन और थायरॉइड का संबंध क्या है, और आयुर्वेद इसे कैसे ठीक करता है।

ग्लूटेन (Gluten) आपके थायरॉइड को कैसे नुकसान पहुँचाता है?

ग्लूटेन एक प्रकार का प्रोटीन है जो गेहूँ, जौ और राई में पाया जाता है। जब आप थायरॉइड से पीड़ित होती हैं, तो ग्लूटेन शरीर में तीन बड़े नुकसान करता है:

  • मॉलिक्यूलर मिमिक्री (Molecular Mimicry): ग्लूटेन का प्रोटीन स्ट्रक्चर बिल्कुल आपके थायरॉइड ग्रंथि (Gland) के टिश्यू जैसा दिखता है। जब शरीर ग्लूटेन को पचा नहीं पाता, तो इम्यून सिस्टम उस पर हमला करता है, लेकिन वह गलती से आपके थायरॉइड ग्रंथि को भी दुश्मन समझकर उसे डैमेज करने लगता है।
  • लीकी गट (Leaky Gut): ग्लूटेन से आंतों की परत कमज़ोर हो जाती है। इसमें छोटे-छोटे छेद हो जाते हैं, जिससे बिना पचे हुए प्रोटीन और टॉक्सिन्स सीधे खून में चले जाते हैं।
  • इन्फ्लेमेशन (Inflammation): गट में हुई इस गड़बड़ी से पूरे शरीर में भयंकर सूजन (Inflammation) आ जाती है, जिससे थायरॉइड हॉर्मोन्स का बनना धीमा हो जाता है।

ऑटोइम्यून थायरॉइड (हाशिमोटो डिज़ीज़) और ग्लूटेन का खतरनाक कनेक्शन

यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आज के समय में ज़्यादातर महिलाओं को होने वाला हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) केवल ग्रंथि की कमज़ोरी नहीं है, बल्कि यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसे हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस (Hashimoto's Thyroiditis) कहते हैं।

इस स्थिति में आपका अपना ही इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) आपके थायरॉइड ग्रंथि को नष्ट करने लगता है। जब आप ग्लूटेन वाली चीज़ें खाती हैं, तो शरीर में एंटीबॉडीज़ (Antibodies) का स्तर तेज़ी से बढ़ जाता है। आप बाहर से चाहें कितनी भी थायरॉइड की हॉर्मोनल गोलियाँ खा लें, लेकिन जब तक आप ग्लूटेन खाकर अपने इम्यून सिस्टम को भड़काती रहेंगी, आपकी थायरॉइड ग्रंथि अंदर ही अंदर खत्म होती रहेगी और आपको कभी पूरी तरह आराम नहीं मिलेगा।

आयुर्वेद थायरॉइड और ग्लूटेन के संबंध को कैसे समझता है?

आयुर्वेद में थायरॉइड की समस्या को मुख्य रूप से गलगंड (Galaganda) या ग्रंथि रोग और अग्निमांद्य (खराब पाचन) का परिणाम माना जाता है।

  • पाचन अग्नि का कमज़ोर होना: आयुर्वेद मानता है कि सभी बीमारियों की जड़ पेट में है। जब आपकी 'पाचन अग्नि' कमज़ोर होती है, तो शरीर भारी चीज़ों को नहीं पचा पाता।
  • ग्लूटेन पचने में भारी (गुरु) है: गेहूँ स्वभाव से भारी (गुरु), ठंडा और कफ बढ़ाने वाला होता है। जब कमज़ोर अग्नि में ग्लूटेन जाता है, तो वह पचने के बजाय आंतों में सड़ने लगता है।
  • आम (Toxins) का बनना और स्रोतस ब्लॉक होना: बिना पचा हुआ ग्लूटेन शरीर में आम (चिपचिपा टॉक्सिन) बनाता है। यह आम गले के पास मौजूद थायरॉइड ग्रंथि के बारीक रास्तों (स्रोतस) को ब्लॉक कर देता है, जिससे हॉर्मोन्स का स्राव रुक जाता है और कफ दोष वज़न बढ़ाने लगता है।

जीवा आयुर्वेद का समग्र प्रबंधन क्या है?

आधुनिक चिकित्सा आपको पूरी ज़िंदगी सुबह खाली पेट थायरॉइड की गोली खाने को कहती है, लेकिन यह कभी नहीं बताती कि ग्रंथि काम करना क्यों बंद कर रही है। जीवा आयुर्वेद में हम समस्या की जड़ पर वार करते हैं।

  • दीपन-पाचन चिकित्सा: सबसे पहले आपकी जठराग्नि (पाचन) को मज़बूत किया जाता है ताकि शरीर में जमा पुराना आम (टॉक्सिन्स) पच जाए और आंतें (Gut) ठीक हों।
  • कफ और वात का शमन: बढ़ी हुई सूजन और वज़न को कम करने के लिए कफ-नाशक जड़ी-बूटियाँ दी जाती हैं।
  • स्रोतस की सफाई: गले के हिस्से में रुकी हुई ऊर्जा और ब्लॉक हो चुकी नसों को खोलकर ग्रंथि को प्राकृतिक रूप से हॉर्मोन बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

थायरॉइड और पाचन को एक साथ सुधारने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

  • कांचनार गुग्गुल: यह थायरॉइड ग्रंथि की सूजन को उतारने और शरीर में कहीं भी रुकी हुई ग्रंथि (Gland) की कार्यक्षमता को दोबारा शुरू करने की सबसे शक्तिशाली औषधि है।
  • त्रिकटु (सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली): यह जड़ी-बूटी आपकी रुकी हुई पाचन अग्नि को भड़काती है। यह गले के कफ को काटती है और मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करके वज़न घटाने में मदद करती है।
  • अश्वगंधा: ऑटोइम्यून थायरॉइड (हाशिमोटो) में स्ट्रेस बहुत बड़ा कारण होता है। अश्वगंधा इम्यून सिस्टम को शांत करता है और हॉर्मोन्स को बैलेंस करता है।
  • पुनर्नवा: यह शरीर में जमा एक्स्ट्रा पानी (Water retention) को बाहर निकालता है और थायरॉइड के कारण आई चेहरे और पैरों की सूजन को कम करता है।

पंचकर्म थेरेपी: थायरॉइड और आंतों की डीप क्लीनिंग

जब शरीर में बहुत ज़्यादा टॉक्सिन्स जमा हो जाएँ और थायरॉइड की गोली की डोज़ हर साल बढ़ रही हो, तो पंचकर्म हार्ड रिसेट का काम करता है।

  • विरेचन (Virechana): आंतों में चिपके हुए पुराने ग्लूटेन और आम (Toxins) को दस्त के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है। इससे गट हेल्थ बिल्कुल नई हो जाती है और हॉर्मोन्स का स्राव सुधरता है।
  • नस्य (Nasya): नाक के रास्ते औषधीय तेल की बूँदें डाली जाती हैं, जो सीधे आपके दिमाग और गले (थायरॉइड ग्रंथि) तक पहुँचकर वहाँ की रुकावट को खोलती हैं।
  • उद्वर्तन (Udvartana): थायरॉइड के कारण बढ़े हुए ज़िद्दी वज़न और फैट को कम करने के लिए औषधीय चूर्ण (पाउडर) से पूरे शरीर की सूखी मालिश की जाती है।

थायराइड के रोगी के लिए शुद्ध आहार

जीवा आयुर्वेद और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, थायराइड (विशेषकर हाइपोथायरायडिज्म) में शरीर की 'पाचन अग्नि' (मेटाबॉलिज्म) कमज़ोर हो जाती है। ऐसे में भारी और पचने में मुश्किल ग्लूटेन युक्त आहार को कम करके हल्का, सुपाच्य और कफ-वात दोष को संतुलित करने वाला आहार चुनना महत्वपूर्ण है:

क्या खाएँ?

  • ग्लूटेन-फ्री और सुपाच्य अनाज: गेहूं की जगह ज्वार, बाजरा, रागी, या मूंग दाल की खिचड़ी का इस्तेमाल बढ़ाएँ, यह पचने में हल्के होते हैं और पाचन तंत्र पर भारी नहीं पड़ते।
  • थायराइड को पोषण देने वाले तत्व: धनिया, लौकी, और सहजन (Drumstick) का सेवन करें। सुबह खाली पेट धनिये के बीजों का उबला हुआ पानी थायराइड ग्रंथि के कार्य को सुधारने में बहुत मददगार है।
  • अदरक और काली मिर्च: थोड़ा सा अदरक और काली मिर्च का सेवन पाचन अग्नि को तेज़ करता है और कफ दोष को बैलेंस कर सुस्ती और वजन को नियंत्रित रखता है।

क्या न खाएँ?

  • ग्लूटेन और भारी अनाज: मैदा, गेहूं से बनी ब्रेड, बिस्कुट और पास्ता बिल्कुल न लें। ये पचने में भारी होते हैं और शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) बढ़ाकर सूजन पैदा करते हैं।
  • कच्ची गोभी परिवार की सब्ज़ियाँ: पत्तागोभी, फूलगोभी और ब्रोकली को कच्चा या ज़्यादा मात्रा में बिल्कुल न खाएँ, ये थायराइड के काम में रुकावट (Goitrogenic) पैदा करते हैं।
  • प्रोसेस्ड फूड और बहुत ज़्यादा सोया: पैकेटबंद खाना, सोयाबीन के प्रोडक्ट्स, और रिफाइंड चीनी बिल्कुल बंद कर दें, ये मेटाबॉलिज्म को धीमा करके थायराइड की समस्या को और बढ़ाते हैं।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

जब आप थायरॉइड की ब्लड रिपोर्ट लेकर आती हैं, तो हम केवल TSH का नंबर नहीं देखते, हम आपकी पूरी गट हेल्थ को पढ़ते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: पल्स चेक करके यह समझना कि क्या आपके अंदर आम (Toxins) बना हुआ है और कौन सा दोष आपके मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर रहा है।
  • गट हेल्थ और लाइफस्टाइल ऑडिट: आप दिन भर में कितनी रोटी या बेकरी की चीज़ें खाती हैं, आपका स्ट्रेस लेवल क्या है, इसका गहराई से विश्लेषण किया जाता है।
  • लक्षणों की जाँच: कब्ज़, रूखी त्वचा, बालों का झड़ना और डिप्रेशन के स्तर को देखकर बीमारी की गहराई जाँची जाती है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद केवल ब्लड रिपोर्ट में TSH को नहीं गिराता, बल्कि आपके थायरॉइड ग्रंथि को दोबारा काम करना सिखाता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: औषधियों और ग्लूटेन छोड़ने के प्रभाव से आपका भारीपन और थकान कम होने लगेगी। कब्ज़ दूर होगी।
  • 1 से 3 महीने तक: आपके शरीर का मेटाबॉलिज़्म तेज़ होगा। वज़न कम होना शुरू होगा और बालों का झड़ना रुकेगा।
  • 3 से 6 महीने तक: आपकी गट हेल्थ पूरी तरह सुधर जाएगी। थायरॉइड ग्रंथि के काम करने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से आपकी थायरॉइड की गोली की डोज़ कम हो सकती है।

मरीज़ों का भरोसा – रोग मुक्त जीवन का अनुभव

मैं फरीदाबाद से सुनील सिंह हूँ। कुछ समय पहले मेरा वजन अचानक बढ़ने लगा, जिसके बाद जांच कराने पर पता चला कि मुझे थायरॉइड की समस्या है। मैंने एलोपैथिक दवाइयाँ लीं, लेकिन उनसे मेरे वजन और स्वास्थ्य में कोई खास सुधार नहीं हुआ।इसके बाद मेरी हालत और बिगड़ गई और दोबारा जांच में पता चला कि मुझे फैटी लिवर (ग्रेड 3) और किडनी से जुड़ी कुछ समस्याएँ भी हैं। इस दौरान मैं बहुत तनाव में रहने लगा और मेरी नींद भी प्रभावित हो गई।फिर मैंने जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया। यहाँ डॉक्टरों ने मेरी पूरी जांच करके मेरी समस्या के मूल कारण को समझा और उसी के अनुसार इलाज शुरू किया।मुझे आयुर्वेदिक दवाइयों के साथ-साथ मेरे लिए विशेष डाइट प्लान भी दिया गया। धीरे-धीरे मेरी सेहत में सुधार हुआ और मेरा फैटी लिवर ग्रेड 3 से घटकर ग्रेड 1 हो गया।आज मैं पहले से काफी बेहतर महसूस करता हूँ और आयुर्वेदिक जीवनशैली को सभी को अपनाने की सलाह देता हूँ। 

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद चिकित्सा
इलाज का मुख्य लक्ष्य हॉर्मोन की गोली देकर TSH को नॉर्मल करना अग्नि सुधारकर और ग्रंथि की कार्यक्षमता बढ़ाकर थायरॉइड को प्राकृतिक रूप से सक्रिय करना
शरीर को देखने का नज़रिया केवल एक ग्रंथि (थायरॉइड) की समस्या मानना गट हेल्थ, पाचन और इम्यूनिटी के असंतुलन का परिणाम मानना
डाइट और जीवनशैली की भूमिका डाइट पर सीमित ध्यान अग्नि-वर्धक डाइट, ग्लूटेन से परहेज़ और योग को मुख्य आधार
लंबा असर समय के साथ दवा की मात्रा बढ़ती जाती है जड़ से सुधार होने पर हॉर्मोन संतुलन में दीर्घकालिक सुधार

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

थायरॉइड का असंतुलन आपके दिल और मेटाबॉलिज़्म पर भारी असर डालता है। अगर आपको ये संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • आपका वज़न बिना ज़्यादा खाए बहुत तेज़ी से बढ़ रहा हो और शरीर में भयंकर सूजन आ जाए।
  • आपको बहुत ज़्यादा ठंड लगे, यहाँ तक कि गर्मियों में भी हाथ-पैर ठंडे रहें।
  • आपके दिल की धड़कन अचानक बहुत तेज़ या बहुत धीमी महसूस होने लगे।
  • आपको गले में कोई बड़ी गाँठ या सूजन (Goiter) महसूस हो और खाना निगलने में दिक्कत हो।

निष्कर्ष

थायरॉइड केवल गले की बीमारी नहीं है, यह एक चेतावनी है कि आपका पेट और इम्यून सिस्टम संतुलन खो चुके हैं। जब हम कमज़ोर पाचन के बावजूद रोज़ाना ग्लूटेन (गेहूँ, बेकरी की चीज़ें) खाते रहते हैं, तो आंतें डैमेज हो जाती हैं और ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है, जो थायरॉइड ग्रंथि को नष्ट कर देती है। आप सिर्फ हर सुबह खाली पेट एक गोली खाकर इस बीमारी को नहीं हरा सकतीं। जब तक आपकी गट हेल्थ (Gut Health) नहीं सुधरेगी, आपका थायरॉइड नॉर्मल नहीं होगा। इन लक्षणों को केवल दवाओं से दबाकर आप असली समस्या को अंदर ही अंदर बढ़ा रही हैं। आयुर्वेद आपको इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने का सबसे तार्किक और प्राकृतिक रास्ता दिखाता है। कांचनार गुग्गुल और अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, पंचकर्म से अपने शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकालें और एक ग्लूटेन-फ्री, वात-कफ शामक डाइट अपनाएँ। अपनी जठराग्नि को मज़बूत करें, और जीवा आयुर्वेद के साथ थायरॉइड-मुक्त एक स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।

FAQs

जी हाँ, खासकर अगर आपको हाशिमोटो (ऑटोइम्यून थायरॉइड) है। ग्लूटेन से आंतों में सूजन आती है और इम्यून सिस्टम भड़क जाता है, जो गलती से थायरॉइड ग्रंथि को नष्ट करने लगता है। ग्लूटेन बंद करने से सूजन कम होती है और ग्रंथि ठीक होने लगती है।

आयुर्वेद में थायरॉइड जैसी समस्याओं को गलगंड (Galaganda) या ग्रंथि रोग कहा जाता है। इसे मुख्य रूप से वात और कफ दोष के असंतुलन और कमज़ोर पाचन अग्नि (अग्निमांद्य) का परिणाम माना जाता है।

हाँ, कांचनार गुग्गुल आयुर्वेद की सबसे बेहतरीन ग्रंथि-नाशक औषधि है। यह गले की सूजन को कम करता है, कफ दोष को काटता है और थायरॉइड ग्रंथि को दोबारा सही तरीके से हॉर्मोन बनाने के लिए प्रेरित करता है।

आपको सिर्फ ग्लूटेन वाली चीज़ें जैसे गेहूँ, जौ और मैदा छोड़ना चाहिए। आप इनकी जगह ज्वार, रागी, बाजरा, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की रोटी खा सकती हैं जो पचने में हल्की और ग्लूटेन-फ्री होती हैं।

लीकी गट का मतलब है आंतों की परत में छोटे छेद हो जाना, जिससे टॉक्सिन्स सीधे खून में चले जाते हैं। आयुर्वेद इसे आम दोष के रक्त में मिलने जैसा मानता है, जो इम्यूनिटी को बिगाड़कर थायरॉइड पर हमला करवाता है।

विरेचन में औषधियों के ज़रिए आंतों की गहरी सफाई की जाती है। यह शरीर में जमे पुराने टॉक्सिन्स (आम) और पित्त को निकाल देता है, जिससे गट हेल्थ सुधरती है और थायरॉइड हॉर्मोन्स का स्राव नॉर्मल होने लगता है।

हाँ, बिल्कुल। जब आप ग्लूटेन छोड़कर अपनी पाचन अग्नि को मज़बूत करती हैं और त्रिकटु जैसी आयुर्वेदिक औषधियाँ लेती हैं, तो मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है और जमा हुआ फैट तथा पानी शरीर से बाहर निकल जाता है।

बिल्कुल। बहुत ज़्यादा तनाव लेने से कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है जो सीधे थायरॉइड के काम को धीमा कर देता है। इसीलिए आयुर्वेद में थायरॉइड के मरीज़ों को अश्वगंधा और मेध्य औषधियाँ दी जाती हैं।

नहीं। आयुर्वेदिक इलाज शुरू करते ही एलोपैथिक दवा एकदम से बंद नहीं करनी चाहिए। जैसे-जैसे आयुर्वेद से आपका पाचन सुधरेगा और थायरॉइड काम करने लगेगा, आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से आपकी एलोपैथिक डोज़ धीरे-धीरे कम की जाएगी।

सुबह उठकर हल्का गुनगुना पानी पिएँ। 15-20 मिनट उज्जायी प्राणायाम (Ujjayi Pranayama) ज़रूर करें, यह सीधे गले की नसों और थायरॉइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है। इसके बाद सिंथेटिक चीनी और कैफीन के बजाय हर्बल चाय या धनिया का पानी पिएँ।

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