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Weighted Walking 2026 का सबसे बड़ा Fitness Trend — पर Joint Pain वालों के लिए Safe है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 26 May, 2026
  • category-iconUpdated on 12 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5026

साल 2026 में फिटनेस लवर्स के बीच 'वेटेड वॉकिंग' या 'रकिंग' (Rucking) का क्रेज़ सिर चढ़कर बोल रहा है। जिम में भारी-भरकम कसरत करने के बजाय, लोग अब पीठ पर वजनदार बैग टांगकर या पैरों में एंकल वेट्स बांधकर पैदल चलना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। माना जाता है कि यह आम सैर के मुकाबले दोगुनी कैलोरी बर्न करता है, जिससे आपको एक ही समय में कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों का डबल फायदा मिल जाता है।

लेकिन फिटनेस के इस नए जुनून के बीच एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो अनजाने में अपने शरीर के साथ खिलवाड़ कर रहा है। जिन लोगों को पहले से ही घुटनों, टखनों या कमर में थोड़ी बहुत तकलीफ रहती है, उनके लिए शरीर पर अतिरिक्त वज़न लादकर चलना कोई फिटनेस मंत्र नहीं है। यह उनकी हड्डियों और कार्टिलेज (Cartilage) को अंदर ही अंदर पीसकर एक ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है जहाँ दर्द हमेशा के लिए उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाए।

वेटेड वॉकिंग (Weighted Walking) शरीर और कमज़ोर जोड़ों पर क्या असर डालती है?

जब आप अपने प्राकृतिक वज़न से अधिक भार उठाकर चलते हैं, तो शरीर के मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम (Musculoskeletal system) को एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ती है। यह अतिरिक्त दबाव जहाँ एक तरफ मांसपेशियों को मज़बूत कर सकता है, वहीं कमज़ोर जोड़ों के लिए यह एक आघात बन जाता है:

  • जोड़ों पर अत्यधिक दबाव (Joint Compression): चलते समय हमारे घुटनों और टखनों पर शरीर के वज़न का लगभग 2 से 3 गुना दबाव पड़ता है। जब आप इसमें अतिरिक्त वज़न (Weights) जोड़ लेते हैं, तो यह दबाव जोड़ों के बीच के कुशन यानी कार्टिलेज (Cartilage) को तेज़ी से घिसने लगता है।
  • मांसपेशियों की थकान (Muscle Fatigue): भारी वज़न के साथ चलने से पैर और कमर की मांसपेशियाँ जल्दी थक जाती हैं। जब मांसपेशियाँ थक जाती हैं, तो शरीर के झटके सहने का सारा काम सीधे हड्डियों और लिगामेंट्स (Ligaments) पर आ जाता है, जो दर्द का सबसे बड़ा कारण बनता है।
  • पोश्चर का बिगड़ना (Postural Imbalance): अक्सर भारी बैकपैक या वेट-जैकेट पहनने से इंसान आगे की तरफ झुकने लगता है। इस खराब पोश्चर से रीढ़ की हड्डी (Spine) और लोअर बैक पर खिंचाव आता है, जो स्लिप डिस्क का कारण बन सकता है।

2026 में वेटेड वॉकिंग के कौन-कौन से प्रकार सबसे ज़्यादा चलन में हैं?

लोग अपनी क्षमता और फिटनेस गोल्स के अनुसार अलग-अलग तरीकों से वज़न बांधकर चलना पसंद कर रहे हैं। इनमें से हर तरीका आपकी हड्डियों पर एक अलग तरह का प्रभाव डालता है:

  • रकिंग (Rucking): यह ट्रेंड सेना के जवानों की ट्रेनिंग से प्रेरित है। इसमें एक भारी बैकपैक (Backpack) में वज़न डालकर लंबा सफर तय किया जाता है। यह सीधे आपकी कमर (Lower back) और घुटनों पर दबाव डालता है।
  • एंकल और रिस्ट वेट्स (Ankle & Wrist Weights): पैरों के टखनों और कलाइयों पर 1-2 किलो का वज़न बांधकर चलना। यह टखनों के लिगामेंट्स को ज़बरदस्ती खींचता है और अगर चाल (Gait) सही न हो, तो घुटनों की बनावट बिगाड़ सकता है।
  • वेटेड वेस्ट (Weighted Vests): यह एक भारी जैकेट होती है जिसे पहनकर चला जाता है। यह वज़न को पूरे धड़ पर बाँटती है, लेकिन कमज़ोर कंधों और गर्दन और कंधों में जकड़न वाले लोगों के लिए यह नुकसानदायक साबित हो सकती है।

शरीर के किन खामोश संकेतों से पहचानें कि वेटेड वॉकिंग आपको डैमेज कर रही है?

फिटनेस का जोश अक्सर दर्द को मसल सोरनेस (Muscle soreness) समझकर नज़रअंदाज़ करवा देता है। लेकिन अगर आपको चलते समय या बाद में शरीर में ये अलार्म्स सुनाई दें, तो तुरंत रुक जाना ज़रूरी है:

  • घुटनों के अंदरूनी हिस्से में तेज़ चुभन: चलते समय या सीढ़ियाँ चढ़ते हुए अगर घुटने के ठीक अंदर एक सुई चुभने जैसा दर्द हो, तो यह कार्टिलेज के घिसने और जॉइंट के बीच की जगह कम होने का साफ संकेत है।
  • एड़ियों और पंजों का सुन्न होना: एंकल वेट्स बांधकर चलने के बाद अगर आपके पैरों के पंजों में भारीपन, झुनझुनी या सुन्नपन (Numbness) आ जाए, तो समझ लें कि वहाँ की नसें बुरी तरह दब रही हैं।
  • कमर के निचले हिस्से में जकड़न: बैकपैक पहनकर चलने (Rucking) के बाद अगर आपकी कमर इतनी कड़क हो जाए कि आपको सीधे खड़े होने में भी तकलीफ और क्रोनिक फटीग महसूस हो।
  • जोड़ों में सूजन और गर्माहट: वॉक खत्म करने के कुछ घंटों बाद अगर घुटने या टखने सूज जाएं और छूने पर गर्म (Heat) महसूस हों, जो अंदरूनी इन्फ्लेमेशन का स्पष्ट अलार्म है।

फिटनेस और वज़न घटाने के चक्कर में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

सोशल मीडिया के ट्रेंड्स को आँख बंद करके फॉलो करते हुए लोग अक्सर अपनी शारीरिक क्षमता को भूल जाते हैं और ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो उनके जोड़ों को जीवन भर के लिए अपाहिज कर सकते हैं:

  • शुरुआत में ही भारी वज़न उठाना: बिना किसी ट्रेनिंग के सीधे 10-15 किलो का बैकपैक लादकर चलना शुरू कर देना। इससे शरीर के कमज़ोर जोड़ों पर अचानक इतना भारी दबाव पड़ता है कि लिगामेंट्स फट (Tear) सकते हैं।
  • दर्द को इग्नोर करके पेनकिलर्स खाना: जॉइंट पेन होने पर लोग दर्द को फिटनेस का हिस्सा मान लेते हैं और पेनकिलर्स खाकर दोबारा वज़न बांधकर चलने लगते हैं। यह नर्वस सिस्टम को सुन्न कर देता है और अंदरूनी डैमेज बढ़ता रहता है।
  • गलत सतह (Hard Surface) पर भारी वज़न के साथ चलना: कंक्रीट या पक्की सड़क पर भारी वज़न के साथ चलना। इससे पैरों के टकराने का शॉक (Impact) सीधे घुटनों और स्पाइन तक पहुँचता है, जो कार्टिलेज को कुचल देता है।

आयुर्वेद वेटेड वॉकिंग और जोड़ों के दर्द (Joint Pain) को कैसे समझता है?

आधुनिक फिटनेस इसे कार्डियो और कैलोरी बर्न का बेहतरीन तरीका मानती है, लेकिन आयुर्वेद अत्यधिक भार उठाने और जोड़ों के दर्द को अति-व्यायाम, वात दोष के प्रकोप और अस्थि-मज्जा धातु के क्षय के रूप में बहुत गहराई से समझता है:

  • अति-व्यायाम और वात का भड़कना: आयुर्वेद के अनुसार, क्षमता से अधिक भार उठाना अति-व्यायाम है। यह शरीर में वात (रूखेपन) को तुरंत भड़का देता है। जब वात जोड़ों में पहुँचता है, तो वहाँ की प्राकृतिक नमी को सुखाकर दर्द पैदा करता है।
  • श्लेषक कफ (Synovial Fluid) का सूखना: हमारे जोड़ों के बीच श्लेषक कफ होता है जो चिकनाई देता है। वेटेड वॉकिंग के अत्यधिक दबाव और रगड़ (Friction) से यह कफ सूख जाता है, और हड्डियाँ आपस में टकराने लगती हैं।
  • आमवात (Toxins in Joints): जिन लोगों का पाचन तंत्र कमज़ोर होता है, उनके शरीर में आम (Toxins) बनता है। भारी कसरत के दौरान यह आम जोड़ों में फँस जाता है, जिससे वहाँ सूजन और लालिमा (Inflammation) आ जाती है।

जोड़ों की चिकनाई बढ़ाने और दर्द दूर करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

भारी वज़न उठाने से हुए डैमेज को भरने के लिए आपको अपनी डाइट से वात बढ़ाने वाले और रूखे पदार्थों को हटाना होगा। यह आयुर्वेदिक डाइट आपकी हड्डियों के लिए सीमेंट का काम करेगी:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - हड्डियों को चिकनाई देने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - वात और दर्द बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, गेहूं का दलिया, ओट्स (दूध के साथ), मूंग दाल। मैदा, वाइट ब्रेड, बासी और सूखे बिस्कुट, पैकेटबंद नूडल्स।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (जोड़ों की ग्रीस के लिए सबसे बड़ा अमृत), तिल का तेल। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा डीप-फ्राइड चीज़ें, ज़ीरो-फैट डाइट।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, पालक (हल्के घी में पकी हुई)। कच्चा सलाद भारी मात्रा में, राजमा, छोले, मटर, और गैस बनाने वाली सब्ज़ियाँ।
फल (Fruits) पपीता, उबला हुआ सेब, मीठे अनार, रात भर भीगी हुई मुनक्का। कच्चे या खट्टे फल, बिना मौसम के डिब्बाबंद कोल्ड स्टोरेज के फल।
पेय पदार्थ (Beverages) हल्दी वाला दूध (रात को घी के साथ), धनिया-जीरे का पानी, गुनगुना पानी। बर्फ का ठंडा पानी, डार्क कॉफी, शराब, कार्बोनेटेड एनर्जी ड्रिंक्स।

हड्डियों को बलवान बनाने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के जॉइंट पेन को खींच लेते हैं और घिस चुके कार्टिलेज को अंदर से रिपेयर करते हैं:

  • शल्लकी (Shallaki): यह आयुर्वेद का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक दर्द-निवारक है। शल्लकी जोड़ों के बीच की चिकनाई (Synovial fluid) को बढ़ाती है और डैमेज हुए कार्टिलेज को दोबारा रिपेयर करने में मदद करती है।
  • अश्वगंधा: भारी कसरत और वज़न के कारण जब मांसपेशियाँ और लिगामेंट्स थक जाते हैं, तो अश्वगंधा उन्हें फौलादी ताक़त देता है। यह मानसिक तनाव को कम करके शरीर को रिलैक्स करता है।
  • गिलोय: जब जोड़ों में आम जमा होने के कारण सूजन और लालिमा हो, तो गिलोय टॉक्सिन्स को पिघलाकर बाहर निकालती है और शरीर की इम्यूनिटी को सपोर्ट करती है।
  • बला (Bala): आयुर्वेद में इसे नसों और मांसपेशियों को ताक़त देने वाली सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है। यह वेटेड वॉकिंग से आई नसों की कमज़ोरी को बहुत तेज़ी से दूर करती है।

घुटनों और कमर का दर्द खींचने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और दर्द जोड़ों में बहुत गहराई तक जम चुका हो और केवल आराम करने से फायदा न हो रहा हो, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत डिकंप्रेस कर देती हैं:

  • जानु बस्ती (Janu Basti): अगर आपके घुटनों का कार्टिलेज घिस गया है, तो घुटनों पर उड़द की दाल का घेरा बनाकर उसमें गुनगुना औषधीय तेल भरा जाता है। यह सूखी हड्डियों को तुरंत चिकनाई देता है और दर्द खींच लेता है।
  • कटि बस्ती: भारी बैकपैक (Rucking) के कारण अगर आपकी कमर की डिस्क पर भारी दबाव आ गया है, तो कमर के निचले हिस्से पर तेल की सिकाई की जाती है, जो स्पाइन की जकड़न को रिलैक्स करती है।
  • अभ्यंग मालिश: वात दोष को शांत करने और मांसपेशियों की थकान को खोलने के लिए महानारायण या क्षीरबला जैसे शुद्ध औषधीय तेलों से पूरे शरीर की डीप-टिशू मालिश की जाती है।
  • पत्र पोटली स्वेद (Patra Potali Sweda): औषधीय पत्तों की पोटली को गर्म तेल में डुबोकर सूजे हुए जोड़ों की सिकाई की जाती है। यह जोड़ों की जकड़न (Stiffness) को तुरंत खोल देती है।

डैमेज हुए जोड़ों के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

क्षमता से अधिक भारी वज़न और वात के प्रकोप से डैमेज हुए कार्टिलेज और लिगामेंट्स को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और वात-नाशक डाइट से आपका भड़का हुआ वात शांत होगा। घुटनों और कमर में होने वाला दर्द और सुबह की जकड़न (Morning Stiffness) काफी हद तक कम हो जाएगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म (बस्ती और अभ्यंग) के प्रभाव से जोड़ों का ब्लड सर्कुलेशन बेहतरीन होगा। जोड़ों के बीच की चिकनाई बढ़ेगी और चलने पर आने वाली कट-कट की आवाज़ें (Crepitus) बंद होने लगेंगी।
  • 5-6 महीने: आपकी अस्थि धातु और मांसपेशियाँ पूरी तरह से रिपेयर और पोषित हो जाएंगी। आप बिना किसी पेनकिलर के, एक प्राकृतिक, सुरक्षित और दर्दरहित जीवन (Pain-free life) जीना शुरू कर देंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

जोड़ों के दर्द और स्पोर्ट्स इंजरी के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के सिग्नल को रोकने के लिए भारी NSAIDs (पेनकिलर) या स्टेरॉयड इंजेक्शन (Steroid injections) देना। वात को अनुलोम करना, हड्डियों को मज़बूत करना और 'बस्ती' द्वारा प्राकृतिक रूप से जोड़ों की चिकनाई बढ़ाना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल ओवरयूज़ (Overuse) इंजरी और कार्टिलेज के घिसने की एक मैकेनिकल समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात दोष और दूषित 'अस्थि धातु' का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल आइस-पैक और आराम (Rest) की आम सलाह दी जाती है। डाइट में 'स्नेहन' (घी), वात-नाशक भोजन, और तनाव कम करने के लिए सात्विक दिनचर्या पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर पेनकिलर्स का असर खत्म होते ही दर्द फिर से भयंकर रूप में लौट आता है और जॉइंट रिप्लेसमेंट की नौबत आ सकती है। शरीर का मेटाबॉलिज़्म और जोड़ अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि दर्द प्राकृतिक रूप से हमेशा के लिए शांत हो जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद आपके वात को संतुलित कर कमज़ोर हड्डियों को फौलादी बना सकता है, लेकिन अगर आपको कसरत के दौरान शरीर में ये भयंकर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • जोड़ का पूरी तरह लॉक (Lock) हो जाना: अगर वज़न उठाकर चलते हुए अचानक आपका घुटना या कमर एक पोज़िशन में अटक जाए और आप उसे बिल्कुल भी सीधा न कर पाएं (यह लिगामेंट टियर या स्लिप डिस्क का संकेत है)।
  • अचानक और तेज़ी से बढ़ता सुन्नपन: अगर भारी बैकपैक के कारण आपके पैरों में अचानक सुन्नपन आ जाए और आप अपने पैरों पर खड़े न हो पाएं (यह नर्व डैमेज का बड़ा अलार्म है)।
  • असहनीय दर्द के साथ लालिमा: अगर कसरत के बाद किसी भी जोड़ में लालिमा आ जाए, वह गर्म हो जाए और उसे हल्का सा छूना भी दर्दनाक हो।
  • यूरिन या मल पर से कंट्रोल खोना: अगर कमर में झटका लगने के बाद आपको अचानक यूरिन पास करने का पता ही न चले (यह कॉडा इक्विना सिंड्रोम का संकेत है, जो एक इमरजेंसी है)।

निष्कर्ष

अपने शरीर को एक नाज़ुक और बेहतरीन तरीके से बैलेंस की गई मशीन की तरह समझें, कोई बोझा ढोने वाला जानवर नहीं। जब आप सोशल मीडिया के फिटनेस ट्रेंड्स को देखकर अपनी क्षमता से अधिक वज़न (Weighted vest/Backpack) लादकर चलने लगते हैं, तो आप कैलोरी तो बर्न कर रहे होते हैं, लेकिन साथ ही अपने घुटनों और रीढ़ की हड्डी के बीच की कीमती चिकनाई (Cartilage) को भी पीस रहे होते हैं। घुटनों से कट-कट की आवाज़ आना, एड़ियों का सुन्न हो जाना और सुबह उठते ही कमर में दर्द रहना, ये कोई फिटनेस की निशानी या मसल सोरनेस नहीं है; यह एक अलार्म है कि आपका वात दोष भड़क चुका है और आपकी हड्डियाँ अंदर से डैमेज हो रही हैं। केवल भारी पेनकिलर्स खाकर या लगातार दर्द को इग्नोर करके इस डैमेज को टालने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपके जोड़ों को हमेशा के लिए अपाहिज कर रहा है।

अंधी दौड़ वाले फिटनेस ट्रेंड्स और पेनकिलर्स के इस ज़हरीले चक्रव्यूह से बाहर निकलें। कसरत के साथ-साथ हमेशा गर्म, सुपाच्य और शुद्ध गाय के घी से बना भोजन खाएं। अपनी डाइट में मूंग दाल, पुराना चावल और हल्दी वाला दूध शामिल करें। शल्लकी, अश्वगंधा और गिलोय जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की जानु बस्ती व अभ्यंग मालिश से अपनी सूखी हुई हड्डियों और नसों को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। फिटनेस के नाम पर इस दर्द को अपनी किस्मत न बनने दें, आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं। अगर आपके जोड़ पूरी तरह से स्वस्थ हैं, आपकी बोन डेंसिटी (Bone density) अच्छी है और आप एक ट्रेनर की देखरेख में बहुत ही कम वज़न (कुल शरीर के वज़न का 5-10%) से शुरुआत करते हैं, तो यह फायदेमंद हो सकता है। लेकिन जिन लोगों को पहले से ही घुटनों या कमर में हल्का भी दर्द है, उनके लिए यह ज़हर के समान है।

शत-प्रतिशत। टखनों पर वज़न बांधकर दौड़ने या तेज़ चलने से पैरों की बायोमैकेनिक्स (Biomechanics) बिगड़ जाती है। इससे घुटनों के जोड़ों और लिगामेंट्स पर एक व्हिप-लैश (चाबुक जैसा) प्रभाव पड़ता है, जो कार्टिलेज को बहुत तेज़ी से घिस देता है और भयंकर दर्द पैदा करता है।

मांसपेशियों का दर्द (Soreness) आमतौर पर कसरत के 24-48 घंटे बाद होता है और यह पूरे हिस्से में एक भारीपन जैसा लगता है जो 2-3 दिन में अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन जॉइंट पेन (Joint pain) एक चुभने वाला (Sharp) दर्द होता है जो जोड़ के ठीक बीच में महसूस होता है और आराम करने के बावजूद हफ़्तों तक बना रहता है।

बिल्कुल। अगर बैकपैक का वज़न सही से नहीं बंटा है या आपका पोश्चर (Posture) आगे की तरफ झुका हुआ है, तो सारा एक्स्ट्रा वज़न आपकी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से (Lumber spine) पर आ जाता है। यह दबाव डिस्क को उसकी जगह से खिसका सकता है, जिससे साइटिका (Sciatica) का दर्द शुरू हो जाता है।

यह सच है कि भारी वज़न लेकर चलने से हार्ट रेट बढ़ता है और सामान्य वॉक के मुकाबले 30-40% ज़्यादा कैलोरी बर्न होती है। लेकिन अगर आप ओवरवेट (Overweight) हैं, तो आपका शरीर पहले ही प्राकृतिक रूप से वेटेड वॉकिंग कर रहा है। बाहर से और वज़न लादना केवल आपके जोड़ों को कुचलने का काम करेगा, वज़न घटाने का नहीं।

बिल्कुल नहीं। यह आवाज़ (Crepitus) बताती है कि आपके घुटनों के बीच की प्राकृतिक चिकनाई (Synovial fluid) कम हो चुकी है और हड्डियाँ रगड़ खा रही हैं (वात प्रकोप)। ऐसी स्थिति में वेटेड वॉकिंग करने से कार्टिलेज पूरी तरह डैमेज हो जाएगा और ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) का खतरा बढ़ जाएगा।

हाँ, बैकपैक की तुलना में एक फिटिंग वाली वेटेड वेस्ट ज़्यादा सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि यह वज़न को शरीर के आगे और पीछे समान रूप से बाँट देती है। इससे रीढ़ की हड्डी पर एकतरफा खिंचाव नहीं आता। फिर भी, कमज़ोर जोड़ों वालों को इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

अगर वेटेड वॉकिंग के तुरंत बाद जोड़ में सूजन, लालिमा या गर्माहट है (Acute inflammation), तो 10-15 मिनट के लिए आइस पैक लगाना चाहिए। लेकिन अगर आपको सुबह की जकड़न (Stiffness) या पुराना दर्द (Chronic pain) है, तो तिल के तेल की मालिश के बाद गर्म सिकाई (Heat) वात को शांत करने में मदद करती है।

ट्रेडमिल पर इंक्लाइन (ऊँचाई) बढ़ाकर चलना भी एक प्रकार से वेटेड वॉकिंग ही है क्योंकि इसमें गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के खिलाफ ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है। अगर आपके घुटनों में दर्द है, तो इंक्लाइन वॉक करने से घुटने के आगे वाले हिस्से (Patella) पर भयंकर दबाव पड़ता है, जिसे तुरंत रोक देना चाहिए।

शत-प्रतिशत। आयुर्वेद के अनुसार, देसी गाय का शुद्ध घी शरीर में स्नेहन (Lubrication) का सबसे बेहतरीन स्रोत है। यह भड़के हुए वात को शांत करता है, अस्थि धातु को पोषण देता है और जोड़ों के बीच के श्लेषक कफ (Synovial fluid) को प्राकृतिक रूप से रीस्टोर (Restore) करने में गज़ब की मदद करता है।

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