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Mosquito bite के बाद fever कब serious हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

शाम का समय है, आप बालकनी में आराम से चाय पी रहे हैं या पार्क में टहल रहे हैं। अचानक एक मच्छर काट लेता है। आप उस जगह को थोड़ा खुजलाते हैं और बात वहीं खत्म हो जाती है। हमारे देश में मच्छर का काटना इतनी आम बात है कि हम इस पर ध्यान भी नहीं देते। लेकिन कहानी तब बदलती है, जब इस मच्छर के काटने के कुछ दिनों बाद शरीर टूटने लगता है, सिर भारी हो जाता है और थर्मामीटर का पारा तेज़ी से ऊपर चढ़ने लगता है।

लोग अक्सर सोचते हैं, "अरे, मौसम बदल रहा है, उसी का वायरल होगा।" वे खुद से पैरासिटामोल खा लेते हैं या मेडिकल स्टोर से कोई भी पेनकिलर लेकर काम पर निकल जाते हैं। लेकिन कई बार यह 'आम सा लगने वाला बुखार' कुछ ही दिनों में इतना खतरनाक रूप ले लेता है कि अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ जाती है।

मच्छर का काटना और शरीर की जंग: आखिर बुखार आता क्यों है?

जब कोई संक्रमित मच्छर जैसे डेंगू, मलेरिया या चिकनगुनिया का मच्छर हमें काटता है, तो वह हमारा खून पीने के साथ-साथ अपनी लार के ज़रिए एक वायरस या पैरासाइट  हमारे खून में छोड़ देता है।

जैसे ही यह बाहरी वायरस हमारे खून में घुसता है, हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम तुरंत एक्टिव हो जाता है। शरीर का 'सिक्योरिटी अलार्म' बज उठता है और वह वायरस को मारने के लिए अपने शरीर का तापमान बढ़ा देता है। इसी बढ़े हुए तापमान को हम 'बुखार' कहते हैं। यानी बुखार कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि आपका शरीर अंदर घुसे हुए वायरस से लड़ रहा है।

खतरे की घंटी: मच्छर के काटने के बाद बुखार कब 'Serious' हो जाता है?

शुरुआती एक या दो दिन तक यह समझना मुश्किल होता है कि यह साधारण वायरल है या मच्छर से होने वाली कोई गंभीर बीमारी। लेकिन 48 से 72 घंटों के बाद शरीर कुछ ऐसे 'सिग्नल' देने लगता है, जिन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए

बुखार का न उतरना और शरीर का टूटना

अगर बुखार 102 से 104 डिग्री तक जा रहा है और पैरासिटामोल लेने के कुछ घंटों बाद फिर से चढ़ जाता है, तो यह खतरे का पहला संकेत है। इसके साथ ही हड्डियों और जोड़ों में ऐसा दर्द होता है जैसे किसी ने डंडों से पीटा हो। डेंगू को 'हड्डी तोड़ बुखार' कहा ही इसलिए जाता है।

प्लेटलेट्स का तेज़ी से गिरना

 हमारे खून में प्लेटलेट्स नाम की कोशिकाएं होती हैं। इनका काम होता है खून को बहने से रोकना यानी थक्का जमाना। एक स्वस्थ इंसान में प्लेटलेट्स की संख्या 1.5 लाख से 4 लाख के बीच होती है। डेंगू का वायरस सीधा इन प्लेटलेट्स पर हमला करता है। अगर प्लेटलेट्स 1 लाख से नीचे जाने लगें और लगातार गिरें, तो स्थिति गंभीर होने लगती है।

शरीर पर लाल चकत्ते 

बुखार आने के तीसरे या चौथे दिन अगर छाती, पेट, पीठ या हाथों पर लाल-लाल दाने या चकत्ते दिखने लगें और उनमें खुजली हो, तो यह डेंगू या चिकनगुनिया का पक्का लक्षण हो सकता है। यह दर्शाता है कि वायरस खून की नलियों पर असर डाल रहा है।

भयानक पेट दर्द और लगातार उल्टियां 

अगर बुखार के साथ-साथ पेट में तेज़ दर्द हो रहा है, कुछ भी खाने-पीने पर तुरंत उल्टी हो रही है, तो इसका मतलब है कि शरीर में पानी की भारी कमी हो रही है और लिवर पर सूजन आ रही है। यह स्थिति बहुत खतरनाक हो सकती है।

शरीर के किसी हिस्से से खून आना

यह सबसे क्रिटिकल स्टेज है। जब प्लेटलेट्स बहुत ज़्यादा गिर जाते हैं अक्सर 20,000 या उससे नीचे, तो खून पतला हो जाता है। ऐसे में मसूड़ों से खून आना, नाक से खून बहना, या मल का रंग काला होना शुरू हो सकता है। इसे मेडिकल भाषा में 'डेंगू हेमरेजिक फीवरr कहते हैं। इस स्थिति में तुरंत ICU और ब्लड ट्रांसफ्यूजन की ज़रूरत पड़ती है।

अचानक से ब्लड प्रेशर का गिर जाना

कई बार डेंगू में ऐसा होता है कि बुखार तो उतर जाता है, लेकिन मरीज की हालत और भी खराब होने लगती है। हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगते हैं, पसीना आता है, पल्स कमज़ोर हो जाती है और चक्कर आने लगते हैं। यह डेंगू शॉक सिंड्रोम है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया में कैसे करें अंतर?

लक्षण डेंगू मलेरिया चिकनगुनिया
बुखार का तरीका अचानक तेज़ बुखार, जो 4-5 दिन रहता है। ठंड लगकर बुखार आता है, पसीना आकर उतर जाता है। बहुत तेज़ बुखार के साथ आता है।
दर्द का मुख्य केंद्र आंखों के पीछे, सिर और पूरी हड्डियों में भयंकर दर्द। पूरे शरीर में थकावट और सिरदर्द। जोड़ों में बहुत भयंकर दर्द Joint Pain।
प्लेटलेट्स तेज़ी से गिरते हैं। हल्के गिर सकते हैं, पर मुख्य असर खून RBC पर होता है। आमतौर पर नॉर्मल रहते हैं या बहुत कम गिरते हैं।
शरीर पर चकत्ते अक्सर तीसरे-चौथे दिन लाल चकत्ते दिखते हैं। चकत्ते नहीं होते। चकत्ते आ सकते हैं।
बुखार के बाद की स्थिति बहुत ज्यादा कमजोरी Weakness होती है। खून की कमी Anemia हो सकती है। कई महीनों तक जोड़ों का दर्द परेशान करता है।

शुरुआत के 48 घंटों में क्या करें और क्या बिल्कुल न करें? 

अगर आपको तेज़ बुखार आया है और आपको मच्छर जनित बीमारी का शक है, तो तुरंत ये कदम उठाएं:

  • क्या करें: सिर्फ और सिर्फ 'पैरासिटामोल' लें। यह बुखार और दर्द को सुरक्षित तरीके से कम करती है। माथे पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें ताकि दिमाग पर बुखार न चढ़े। पानी, नारियल पानी, ORS और ताजे फलों का जूस लगातार पीते रहें। हाइड्रेशन ही आपको खतरे से बचाएगा।
  • क्या बिल्कुल न करें सबसे बड़ी गलती: भूलकर भी ब्रूफेन, एस्पिरिन कॉम्बिफ्लेम या डाइक्लोफेनाक जैसी दवाइयां न खाएं। ये दवाइयां खून को पतला करती हैं और अगर आपको डेंगू हुआ है, तो ये दवाइयां अंदरूनी ब्लीडिंग  का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं।

आयुर्वेद का नज़रिया: बुखार में शरीर के अंदर क्या होता है?

आयुर्वेद के अनुसार, किसी भी तरह का बुखार ज्वर शरीर में 'अग्नि' पाचन शक्ति के कमज़ोर होने और 'पित्त' दोष के भड़कने का परिणाम होता है। जब दूषित मच्छर काटता है, तो शरीर में 'आम' टॉक्सिन्स या ज़हर बनने लगता है। यह ज़हर हमारी Digestive Fire को बुझा देता है। इसीलिए बुखार के दौरान हमें भूख लगनी बंद हो जाती है और मुंह का स्वाद कड़वा हो जाता है।

आयुर्वेद कहता है कि बुखार में शरीर को ज़बरदस्ती भारी खाना नहीं खिलाना चाहिए। जब तक शरीर का 'आम' पचेगा नहीं, तब तक बुखार ठीक नहीं होगा। डेंगू और चिकनगुनिया में रक्त और पित्त बहुत ज़्यादा दूषित हो जाते हैं, जिससे प्लेटलेट्स गिरते हैं और लाल चकत्ते आते हैं।

रिकवरी और प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए खास डाइट और आयुर्वेदिक प्लान

अगर आप इस स्थिति से गुज़र रहे हैं, तो दवाइयों के साथ-साथ आपकी डाइट ही आपकी सबसे बड़ी दवा है। यहां एक डाइट प्लान है जो शरीर की ताकत वापस लाने और प्लेटलेट्स बढ़ाने में जादुई असर करता है

समय क्या खाएं/पिएं इसके क्या फायदे हैं?
सुबह उठते ही खाली पेट 1-2 चम्मच गिलोय का ताज़ा रस या काढ़ा। गिलोय को आयुर्वेद में 'अमृता' कहा गया है। यह प्लेटलेट्स को गिरने से रोकती है और इम्युनिटी बढ़ाती है।
नाश्ता 8:30 AM पपीते के पत्ते का रस 1 चम्मच और उसके बाद हल्का मूंग दाल का चीला या ओट्स। पपीते के पत्तों का रस डेंगू में संजीवनी है। यह प्लेटलेट्स को रॉकेट की स्पीड से बढ़ाता है।
मिड-मॉर्निंग 11:00 AM 1 ताज़ा नारियल पानी या कीवी का फल। शरीर में पानी की कमी दूर करता है और इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस करता है। कीवी विटामिन सी का खजाना है।
दोपहर का भोजन 1:00 PM बहुत पतली मूंग दाल की खिचड़ी, थोड़ा सा ताज़ा दही अगर गला खराब न हो तो। पचने में सबसे आसान है। पेट की अग्नि को शांत नहीं करती और ज़रूरी ऊर्जा देती है।
शाम का समय 4:00 PM गोट मिल्क बकरी का दूध आधा कप या अनार का ताज़ा जूस। बकरी का दूध डेंगू में बहुत फायदेमंद माना जाता है, यह आंतों की सूजन कम करता है। अनार खून की कमी पूरी करता है।
रात का भोजन 7:30 PM लौकी, तोरी का सूप या उबली हुई सब्जियां और एक हल्की रोटी। रात को शरीर रिकवरी मोड में होता है, भारी खाना खाने से लिवर पर ज़ोर पड़ता है, इसलिए डिनर हल्का रखें।
सोने से पहले आधा गिलास गुनगुना पानी। शरीर को हाइड्रेटेड रखता है।

क्या खाएं और किन चीज़ों से बिल्कुल बचें?

क्या खाएं? 

  • ताज़ा नारियल पानी दिन में कम से कम 2-3 बार
  • कीवी, पपीता, संतरा और अनार
  • पपीते के पत्तों का अर्क या रस
  • गिलोय और तुलसी का पानी
  • मूंग की दाल और दलिया
  • चुकंदर प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन के लिए

किन चीज़ों से बचें?

तली-भुनी चीज़ें समोसे, पकौड़े - लिवर पहले ही कमज़ोर होता है, ये उसे और खराब करेंगे।

  • लाल मिर्च और बहुत तीखा खाना - इससे पेट में जलन और उल्टियां बढ़ सकती हैं।
  • पैकेटबंद जूस - इनमें सिर्फ चीनी होती है, जो शरीर में सूजन बढ़ाती है।
  • चाय और कॉफी - कैफीन शरीर से पानी को बाहर निकालता है, जिससे डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है।
  • भारी दालें जैसे राजमा, छोले - इन्हें पचाने में शरीर की बहुत ऊर्जा खर्च होती है।

बुखार उतरने के बाद की असली लड़ाई: पोस्ट-वायरल कमजोरी 

अक्सर लोग सोचते हैं कि बुखार उतर गया, मतलब बीमारी खत्म। लेकिन डेंगू और चिकनगुनिया में असली चुनौती बुखार उतरने के बाद शुरू होती है।

  • प्लेटलेट्स का खेल: डेंगू में अक्सर देखा गया है कि बुखार उतरने के 24 से 48 घंटे बाद प्लेटलेट्स सबसे तेज़ी से गिरते हैं। इसलिए बुखार उतरने के बाद भी अगले 3-4 दिन तक रोज़ सीबीसी ब्लड टेस्ट कराना ज़रूरी है।
  • जोड़ों का दर्द चिकनगुनिया: चिकनगुनिया में बुखार तो 4 दिन में चला जाता है, लेकिन इसके बाद जोड़ों में इतना भयंकर दर्द होता है कि इंसान के लिए कुर्सी से उठना या उंगलियां मोड़ना भी मुश्किल हो जाता है। यह दर्द कई हफ्तों या महीनों तक रह सकता है।
  • अत्यधिक कमज़ोरी: शरीर इतना टूट चुका होता है कि सीढ़ियां चढ़ना तो दूर, बिस्तर से उठने में भी चक्कर आते हैं।

कमज़ोरी और जोड़ों के दर्द से कैसे निपटें?

  • बुखार उतरने के तुरंत बाद काम पर न भागें। शरीर को कम से कम 7 से 10 दिन का पूरा आराम दें।
  • जोड़ों के दर्द के लिए आयुर्वेद में 'महानारायण तेल' या 'तिल के तेल' की हल्की मालिश बिना दबाव दिए बहुत फायदेमंद बताई गई है।
  • अपनी डाइट में कैल्शियम और ओमेगा-3 जैसे अखरोट, चिया सीड्स शामिल करें।

निष्कर्ष

मच्छर के काटने के बाद आने वाला बुखार कोई आम बुखार नहीं है, यह एक चेतावनी है। यह सच है कि हर बुखार डेंगू या मलेरिया नहीं होता और हर डेंगू जानलेवा नहीं होता। ज़्यादातर लोग सही समय पर आराम करने और भरपूर मात्रा में Liquid diet लेने से घर पर ही 7 से 10 दिन में बिल्कुल ठीक हो जाते हैं।

लेकिन गलती हम तब करते हैं जब हम इसे 'मामूली बुखार' समझकर नज़रअंदाज़ करते हैं, खुद से पेनकिलर खाने लगते हैं और काम की भागदौड़ में शरीर को आराम नहीं देते। मच्छर से होने वाली बीमारियों में आपका सबसे बड़ा हथियार दवाइयों से ज़्यादा 'सही जानकारी और सही समय पर सही कदम' उठाना है।

References

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/dengue-and-severe-dengue

https://ncvbdc.mohfw.gov.in/index1.php?lang=1&level=1&sublinkid=5776&lid=3690

https://ncvbdc.mohfw.gov.in/index4.php?lang=1&level=0&linkid=431&lid=3715

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हल्का बुखार कभी-कभी हो सकता है, लेकिन लगातार या तेज बुखार होने पर जांच जरूरी है।

डेंगू, मलेरिया या चिकनगुनिया जैसी बीमारियों में बुखार आमतौर पर कुछ दिनों के भीतर शुरू हो सकता है।

यदि बुखार 102°F से अधिक हो, लगातार बना रहे या तेजी से बढ़े तो डॉक्टर से संपर्क करें।

हाँ, खासकर जब जोड़ों या मांसपेशियों में तेज दर्द भी महसूस हो रहा हो।

नहीं, केवल संक्रमित मच्छर के काटने से ही डेंगू या अन्य संक्रमण फैल सकते हैं।

हाँ, बच्चों में तेज बुखार, सुस्ती या पानी की कमी के संकेत तुरंत ध्यान मांगते हैं।

उल्टी, सांस लेने में कठिनाई, चक्कर या अत्यधिक कमजोरी गंभीर संकेत हो सकते हैं।

डेंगू में प्लेटलेट्स गिर सकते हैं, इसलिए समय पर जांच कराना महत्वपूर्ण है।

यदि बेहोशी, खून बहना या तेज कमजोरी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

हाँ, समय पर जांच और उपचार से कई गंभीर समस्याओं का जोखिम कम किया जा सकता है।

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