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Sedentary lifestyle से back pain क्यों बढ़ता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 03 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 03 Jul, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5007

अक्सर हम सोचते हैं कि कमर में दर्द भारी सामान उठाने या अचानक झुकने से होता है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि दिन भर कुर्सी पर बैठे रहने के बाद आपकी पीठ में जकड़न और दर्द होने लगता है? असल में हमारे शरीर की बनावट लगातार चलने फिरने के लिए हुई है। जब हम घंटों तक एक ही जगह जमे रहते हैं तो इसका सीधा असर हमारी रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है। सिर्फ दर्द निवारक गोली खा लेने से यह दिक्कत हमेशा के लिए खत्म नहीं होती। जब तक आप अपने शरीर को हरकत में नहीं लाते तब तक कमर का दर्द शांत नहीं होगा। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह कोई आम दर्द नहीं है बल्कि आपका शरीर यह बता रहा है कि उसे अब थोड़ी कसरत की ज़रूरत है।

कुर्सी पर जमे रहने से रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाला दबाव

हमारे शरीर में रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियाँ एक खास तालमेल के साथ काम करती हैं। जब आप लगातार कई घंटों तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं तो शरीर का पूरा भार आपकी कमर के निचले हिस्से पर आ जाता है। इस स्थिति में पीठ की मांसपेशियाँ कमज़ोर होने लगती हैं और उनका लचीलापन खत्म हो जाता है। जब रीढ़ की हड्डी पर लगातार दबाव पड़ता है तो वहाँ खून का बहाव एकदम धीमा हो जाता है। यही कारण है कि शाम तक हमें कमर में तेज़ दर्द भारीपन और जकड़न महसूस होने लगती है।

क्या हमेशा भारी सामान उठाना ही दर्द की वजह है

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार आप कोई मेहनत वाला काम नहीं करते फिर भी आपकी कमर अकड़ जाती है या भयानक दर्द होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि समस्या आपके काम में नहीं बल्कि आपके बैठने के तरीके में है। अगर आप कुर्सी पर गलत तरीके से टिक कर या आगे की तरफ झुक कर बैठे हैं तो वह आरामदेह स्थिति भी पीठ के लिए नुकसानदायक बन जाती है। गलत तरीके से बैठने से रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक आकार बिगड़ने लगता है और दर्द की परेशानी शुरू हो जाती है।

लगातार बैठे रहने से शरीर पर होने वाले नुकसान

जब हम घंटों तक बिना हिले डुले बैठे रहते हैं तो हमारे शरीर के अंदर बहुत सारे बदलाव होते हैं:

  • कमज़ोर मांसपेशियाँ: लगातार बैठे रहने से पेट और पीठ की मांसपेशियाँ काम करना बंद कर देती हैं और एकदम कमज़ोर हो जाती हैं।
  • नसों पर दबाव: गलत तरीके से बैठने के कारण रीढ़ की हड्डी के बीच की नसों पर भारी दबाव पड़ने लगता है जिससे सुन्नपन और दर्द होता है।
  • खून का बहाव रुकना: लंबे समय तक बैठे रहने से पैरों और कमर के हिस्से में खून का संचार ठीक से नहीं हो पाता है।
  • हड्डियों का घिसना: शरीर में हरकत न होने से जोड़ों और हड्डियों के बीच की चिकनाई कम होने लगती है जिससे वे आपस में रगड़ खाती हैं।

कमर के दर्द को अनदेखा करने के गंभीर परिणाम

अगर आपको रोज़ाना कमर में दर्द और जकड़न हो रही है तो इसे नज़रअंदाज़ बिल्कुल न करें। यह शरीर में चल रही किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है:

  • रीढ़ की गद्दी खिसकना: यह रीढ़ की हड्डी के बीच की गद्दी खिसक जाने की बीमारी है जो लंबे समय तक गलत तरीके से बैठने से होती है।
  • साइटिका: यह कमर से लेकर पैरों तक जाने वाली नस का दब जाना है जिससे पैरों में तेज़ दर्द और सुन्नपन महसूस होता है।
  • गठिया: शरीर में हिलडुल न होने से समय के साथ जोड़ों में सूजन और दर्द की समस्या पनपने लगती है।
  • सर्वाइकल: लगातार कंप्यूटर या फोन पर गर्दन झुकाकर काम करने से गर्दन और कंधों में भयंकर दर्द रहने लगता है।

आयुर्वेद के अनुसार सुस्त जीवनशैली और दर्द का संबंध

आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में वात पित्त और कफ ये तीन मुख्य दोष होते हैं। जब आप बिल्कुल भी शारीरिक मेहनत नहीं करते और एक ही जगह बैठे रहते हैं तो शरीर में वात यानी हवा का तत्व बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ वात शरीर के जोड़ों और हड्डियों में जाकर जमने लगता है जिससे वहाँ रूखापन आ जाता है। इसी रूखेपन और वात के बिगड़ने की वजह से कमर में भयानक दर्द और जकड़न होती है। इसका सीधा मतलब है कि जब तक आप शरीर में हरकत लाकर वात को बाहर नहीं निकालेंगे तब तक आपकी कमर का दर्द शांत नहीं होगा।

पीठ को मज़बूत बनाने वाली प्राकृतिक जड़ी बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसी कई बेहतरीन चीज़ें दी हैं जो नसों और हड्डियों दोनों को मज़बूती देती हैं:

  • अश्वगंधा: यह शरीर की कमज़ोरी दूर करने और मांसपेशियों को अंदर से ताकत देने वाली बहुत असरदार जड़ी बूटी है।
  • निर्गुंडी: यह सूजन और किसी भी तरह के पुराने दर्द को खींचने में बहुत बढ़िया काम करती है।
  • हल्दी: इसमें दर्द निवारक गुण होते हैं जो रीढ़ की हड्डी के आसपास की सूजन को पूरी तरह खत्म कर देते हैं।
  • लहसुन: यह नसों में खून का बहाव तेज़ करता है और वात के असर को कम करके कमर को आराम देता है।

क्या शारीरिक सुस्ती से मानसिक थकान भी बढ़ती है

बिलकुल ऐसा ही होता है। आप जितना ज़्यादा समय बैठे बैठे गुज़ारते हैं आपका शरीर उतना ही ज़्यादा अंदर से सुस्त हो जाता है। शरीर में कोई हरकत न होने पर इंसान की साँसें भी उथली हो जाती हैं। इससे शरीर के हर हिस्से तक साफ ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती और खून का बहाव भी सुस्त पड़ जाता है। जब आपके दिमाग और मांसपेशियों को सही मात्रा में ऊर्जा ही नहीं मिलती तो वे थकने लगते हैं। इसी थकान की वजह से चिड़चिड़ापन बदन दर्द और आलस घेर लेता है।

रोज़मर्रा की गलतियाँ जो पीठ दर्द को और बिगाड़ती हैं

हम अक्सर जाने अनजाने में कुछ ऐसे काम करते हैं जो हमारी परेशानी को दोगुना कर देते हैं:

  • बहुत नर्म गद्दे पर सोना: इससे रीढ़ की हड्डी को सही सहारा नहीं मिलता और सोते समय कमर का दर्द बढ़ सकता है।
  • अचानक भारी वज़न उठाना: बिना घुटने मोड़े भारी सामान उठाने से कमर की नसों में तेज़ झटका आ सकता है।
  • लंबे समय तक ऊँची एड़ी के जूते पहनना: इससे शरीर का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है और कमर पर बहुत ज़्यादा ज़ोर पड़ता है।
  • एक पैर पर वज़न डालना: खड़े होते समय सिर्फ एक पैर पर ज़ोर देने से रीढ़ की हड्डी तिरछी होने लगती है।
  • लगातार फोन में घुसे रहना: गर्दन को घंटों नीचे झुकाए रखने से सर्वाइकल और ऊपरी पीठ का दर्द भयंकर रूप ले लेता है।
  • डेस्क पर झुक कर बैठना: कुर्सी पर आगे की ओर झुक कर काम करने से पीठ की नसों पर भयानक खिंचाव आता है।

शरीर की किन अन्य कमियों से कमर दर्द होता है

कई बार आप बैठने का तरीका सही रखते हैं फिर भी कुछ दूसरी कमियों की वजह से दर्द आपको परेशान कर सकता है:

    • विटामिन डी की कमी: इस विटामिन की कमी से हड्डियाँ एकदम खोखली और कमज़ोर हो जाती हैं जिससे हमेशा दर्द बना रहता है।
    • कैल्शियम की कमी: कैल्शियम कम होने पर मांसपेशियाँ और हड्डियाँ अपना काम ठीक से नहीं कर पाती हैं।
    • बढ़ता हुआ वज़न: शरीर का वज़न ज़्यादा होने से पेट बाहर निकल आता है जिसका पूरा भार सीधा रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है।
    • पानी कम पीना: रीढ़ की हड्डी की गद्दी में काफी मात्रा में पानी होता है और पानी की कमी से वह गद्दी सूखने लगती है।

दर्द निवारक गोलियों का रोज़ाना इस्तेमाल खतरनाक क्यों है

जब भी कमर में दर्द होता है हम तुरंत एक दर्द निवारक गोली खा लेते हैं। ये चीज़ें तुरंत आराम तो दे देती हैं लेकिन रोज़ाना इनका इस्तेमाल करना बहुत खतरनाक है। दर्द असल में एक संकेत है कि आपकी पीठ में कुछ गड़बड़ है। अगर आप रोज़ गोली खाकर दर्द के अहसास को दबा देंगे तो आपकी रीढ़ की हड्डी अंदर ही अंदर और खराब होती जाएगी। इसके अलावा इन गोलियों से किडनी और लिवर पर बहुत बुरा असर पड़ता है और शरीर प्राकृतिक रूप से दर्द सहना भूल जाता है।

बिना दवा के कमर दर्द से छुटकारा पाने के आसान तरीके

आप कुछ बहुत ही आसान तरीके अपनाकर इस परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं:

  • काम के बीच में हर एक घंटे बाद अपनी कुर्सी से उठें और दो मिनट के लिए थोड़ा टहल लें इससे नसों में खून दौड़ने लगेगा।
  • तिल के तेल को हल्का गर्म करके अपनी कमर की मालिश करें इससे रूखी पड़ी मांसपेशियों को बहुत आराम मिलता है।
  • कुर्सी पर बैठते समय अपनी कमर के पीछे एक छोटा तकिया लगा लें ताकि रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी रहे।
  • रात को सीधे सोते समय अपने घुटनों के नीचे एक तकिया रख लें ऐसा करने से कमर का सारा तनाव खत्म हो जाता है।

रीढ़ की हड्डी को तंदुरुस्त रखने की अच्छी आदतें

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ छोटे छोटे बदलाव करके आप बहुत बड़ा फायदा देख सकते हैं:

  • रोज़ाना शरीर को खींचें: सुबह उठकर शरीर को खींचने वाले आसान व्यायाम करें जिससे शरीर का सारा आलस दूर हो जाए।
  • अपनी कुर्सी सही चुनें: काम करने के लिए ऐसी कुर्सी लें जो आपकी पीठ को सीधा और मज़बूत सहारा दे।
  • योग की आदत डालें: आसान योग करने से रीढ़ की हड्डी बहुत लचीली और ताकतवर हो जाती है।
  • खाने में पोषण बढ़ाएँ: अपनी डाइट में दूध दही और हरी सब्ज़ियाँ शामिल करें ताकि हड्डियों को पूरा कैल्शियम मिले।

प्राकृतिक चिकित्सा इस दर्द को कैसे जड़ से मिटाती है

प्राकृतिक इलाज सिर्फ दर्द को नहीं दबाता बल्कि उसके जड़ तक जाता है। आयुर्वेद यह मानता है कि आपका कमर दर्द आपकी सुस्त जीवनशैली का ही नतीजा है। इसमें सबसे पहले डॉक्टर आपके शरीर के वात दोष को समझते हैं। फिर शरीर की अंदरूनी जकड़न खोलने के लिए गर्म तेल की मालिश और भाप जैसी थेरेपी दी जाती है। इसके साथ ही आपका डाइट प्लान और कसरत का रूटीन कुछ इस तरह सेट किया जाता है जो आपकी मांसपेशियों को ताकत दे। इससे शरीर खुद को अंदर से ठीक करना सीख जाता है।

पीठ के दर्द के लिए डॉक्टर से कब मिलना चाहिए

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे तो आपको डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए:

  • दर्द आपकी कमर से नीचे पैरों तक जाने लगे और आपको चलने में भी दिक्कत होने लगे।
  • आपके पैरों में एकदम से सुन्नपन आ जाए या चींटियाँ चलने जैसा महसूस होने लगे।
  • रात के समय सोते हुए दर्द इतना ज़्यादा बढ़ जाए कि आपकी नींद ही खुल जाए।
  • कमर दर्द के साथ-साथ आपको तेज़ बुखार आ जाए या अचानक आपका वज़न कम होने लगे।

एलोपैथी और आयुर्वेद के नज़रिए में बड़ा फर्क

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य दर्द कम करना और कारण के अनुसार उपचार करना। शरीर के संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाना।
उपचार का तरीका दर्द निवारक दवाइयाँ, फिजियोथेरेपी और अन्य आधुनिक उपचार। जड़ी-बूटियाँ, योग, तेल मालिश, पंचकर्म और प्राकृतिक उपाय।
असर होने की गति कई मामलों में अपेक्षाकृत जल्दी राहत मिल सकती है। धीरे-धीरे सुधार और दीर्घकालिक संतुलन पर ज़ोर।
जीवनशैली की भूमिका व्यायाम, सही मुद्रा और चिकित्सकीय सलाह का पालन महत्वपूर्ण। आहार-विहार, योग, दिनचर्या और प्राकृतिक जीवनशैली पर विशेष ध्यान।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण रोग नियंत्रण, पुनर्वास और दोबारा समस्या से बचाव पर ज़ोर। संतुलित जीवनशैली के माध्यम से लंबे समय तक स्वास्थ्य बनाए रखने का प्रयास।
उपयुक्त उपयोग तीव्र दर्द, चोट या आपातकालीन स्थितियों में विशेष रूप से उपयोगी। सामान्य स्वास्थ्य, रिकवरी और जीवनशैली सुधार के साथ सहायक भूमिका।

अंतिम और ज़रूरी बात

हमेशा याद रखें कि आपकी रीढ़ की हड्डी आपके शरीर का मुख्य खंभा है। शरीर में हरकत होना ही जीवन की निशानी है इसलिए लगातार एक जगह बैठे रहने की गलती न करें। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में खुद के लिए थोड़ा सा समय निकालें। अपने बैठने का तरीका सुधारें रोज़ थोड़ी कसरत करें और आलस को खुद पर हावी न होने दें। जब आपका शरीर लगातार सही तरीके से चलता फिरता रहेगा तो यकीनन आपकी कमर भी पूरी तरह से तंदुरुस्त और दर्द से मुक्त रहेगी।

References:

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/low-back-pain

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12232859/

https://www.who.int/news/item/07-12-2023-who-releases-guidelines-on-chronic-low-back-pain

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, हालांकि बैठने का गलत तरीका एक प्रमुख कारण है, लेकिन अन्य कारणों में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी, मांसपेशियों की कमजोरी, अनुचित गद्दे पर सोना, या शरीर का अधिक वजन होना भी शामिल हो सकते हैं।

सबसे पहले अपनी कुर्सी से उठें और 1-2 मिनट टहलें। अपनी मुद्रा (posture) ठीक करें—बैठते समय कमर के पीछे एक कुशन (lumbar support) का उपयोग करें और सुनिश्चित करें कि आपके कंधे झुके हुए न हों।

योग रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाने में बहुत प्रभावी है, लेकिन इसे संतुलित आहार और सही जीवनशैली के साथ जोड़ना आवश्यक है। यदि दर्द गंभीर है, तो पहले किसी विशेषज्ञ से सलाह लें।

दर्द निवारक दवाएं केवल तात्कालिक राहत के लिए हैं। इनका नियमित सेवन लिवर, किडनी और पाचन तंत्र को नुकसान पहुँचा सकता है। दर्द के मूल कारण को पहचाने बिना इन्हें बार-बार लेना खतरनाक हो सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में अधिक स्थिरता और शारीरिक गतिविधि की कमी से 'वात' दोष बढ़ जाता है। वात का गुण रूखापन और हल्कापन है, जो हड्डियों और जोड़ों में पहुंचकर जकड़न और दर्द पैदा करता है।

रीढ़ की हड्डी के कशेरुकों (vertebrae) के बीच मौजूद गद्दे (discs) मुख्य रूप से पानी से बने होते हैं। पर्याप्त पानी न पीने से ये गद्दे सूखने लगते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ता है और दर्द महसूस होता है।

अगर दर्द गर्दन से कंधों तक जा रहा है, तो यह सर्वाइकल के संकेत हो सकते हैं। यदि दर्द कमर से शुरू होकर पैर के नीचे तक जा रहा है और सुन्नपन महसूस हो रहा है, तो यह साइटिका का लक्षण हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर को दिखाना अनिवार्य है।

अगर आप पीठ के बल सोते हैं, तो घुटनों के नीचे एक छोटा तकिया रखने से कमर की मांसपेशियों को आराम मिलता है। लेकिन बहुत ऊँचे तकिए का उपयोग करने से गर्दन और पीठ पर दबाव पड़ सकता है।

हमेशा घुटनों को मोड़कर और पीठ को सीधा रखते हुए झुकें। कभी भी कमर को मोड़कर (झुकर) भारी वजन न उठाएं, क्योंकि इससे रीढ़ की डिस्क पर अचानक झटका लग सकता है।

यदि दर्द लगातार बना रहे, पैरों में कमजोरी या सुन्नपन आने लगे, रात में दर्द के कारण नींद खुले, या कमर दर्द के साथ बुखार महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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