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सर्दियों में यूरिक एसिड और गाउट क्यों बढ़ते हैं? आयुर्वेद से जानिए दर्द से राहत का प्राकृतिक तरीका

Information By Dr. Sapna Bhargava

सर्दियाँ आते ही बहुत-से लोग बताते हैं कि उनके घुटनों या पैरों में अचानक तेज़ दर्द शुरू हो जाता है, जैसे जोड़ अंदर से कसने लगे हों। अगर आपको भी ऐसा महसूस होता है, तो यह केवल ठंड की वजह नहीं है। भारत में किए गए एक हालिया अध्ययन के अनुसार लगभग 22.5% लोगों में हाई यूरिक एसिड पाया गया, ख़ासकर उन लोगों में जिनमें पहले से रक्तचाप या मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी दिक्कतें थीं। यह आँकड़ा आपको बताता है कि यह समस्या कितनी आम है और ठंड के दिनों में क्यों बढ़ जाती है।

सर्दियों में शरीर का तापमान गिरता है, पानी कम पिया जाता है, और जोड़ों में रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है—इन्हीं कारणों से यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमने लगते हैं और दर्द अचानक तेज़ हो जाता है। इस लेख में आप समझेंगे कि सर्दी क्यों यूरिक एसिड और गाउट को बढ़ाती है, और आप कैसे आयुर्वेद की मदद से रोज़मर्रा की ज़िंदगी में दर्द को नियंत्रित रख सकते हैं। अगर आप हर सर्दी दर्द सहकर गुज़ारते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है।

सर्दियों में यूरिक एसिड क्यों बढ़ जाता है और इसके लक्षण क्या दिखते हैं?

सर्दियों में शरीर का तापमान स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है। जब बाहर ठंड बढ़ती है, तो शरीर अपनी गर्मी बचाने के लिए रक्त को त्वचा की बजाय अंदरूनी अंगों की तरफ भेजता है। इसी वजह से जोड़ों में ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ जाता है। इस धीमे प्रवाह में यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स आसानी से जम सकते हैं, जिससे दर्द और सूजन बढ़ जाती है।

आपने भी महसूस किया होगा कि सर्दियों में चलना-फिरना भारी लगता है या सुबह उठते ही जोड़ों में खिंचाव, जकड़न और चुभन जैसी तकलीफ़ बढ़ जाती है। यह सब यूरिक एसिड के बढ़ने का संकेत हो सकता है।

सर्दियों में बढ़े यूरिक एसिड के आम लक्षण

आप इन लक्षणों को ध्यान से पहचानेंगे तो शुरुआती देखभाल करना आसान हो जाएगा:

  • जोड़ों में अचानक तेज़ दर्द

  • चलने-फिरने पर खिंचाव और जकड़न

  • प्रभावित जोड़ छूने पर गर्म या लाल दिखना

  • हल्का-सा दबाव डालने पर भी दर्द

  • सुबह उठते समय उँगलियों,घुटनों या टखनों में कसावट

  • रात के समय दर्द का बढ़ जाना

कई बार यह दर्द एक या दो दिनों में बहुत तीखा हो सकता है, जो आपको अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियों से रोक देता है। यदि आप पहले से हाई यूरिक एसिड से परेशान हैं, तो सर्दियाँ आपके लिए और चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।

सर्दियों में गाउट अटैक अचानक क्यों बढ़ जाते हैं?

गाउट एक ऐसी स्थिति है जिसमें यूरिक एसिड के तेज़ क्रिस्टल्स जोड़ के अंदर जमा हो जाते हैं। ठंड के दिनों में ये क्रिस्टल्स और जल्दी जमते हैं। इसी वजह से कई लोगों को सर्दियों में अचानक और तेज़ गाउट अटैक होने लगते हैं।

सर्दी की वजह से जोड़ों का तापमान कम हो जाता है। शरीर की प्राकृतिक गर्मी जब कम पड़ती है, तो यूरिक एसिड ठोस क्रिस्टल की तरह जमने लगता है। यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे ठंडे पानी में नमक जल्दी जम जाता है। इसी वजह से आप देखेंगे कि:

  • पैर के अंगूठे में अचानक तेज़ जलन-सा दर्द होता है

  • जोड़ लाल, सूजा हुआ और गर्म महसूस होता है

  • दर्द में हल्की-सी हरकत से भी राहत नहीं मिलती

  • रात या सुबह के समय अटैक ज़्यादा होता है

कई लोग पूछते हैं—अचानक ही अटैक क्यों होता है? क्योंकि सर्दी में शरीर का तापमान एकदम से गिर जाता है। इस बदलाव में यूरिक एसिड के क्रिस्टल तेज़ी से जमा होते हैं और कुछ ही घंटों में दर्द बढ़ जाता है। यदि आपने गर्म कपड़े कम पहने, पानी कम पिया या ठंडी चीज़ें खाई-पी, तो अटैक और जल्दी शुरू हो सकता है।

ठंड के मौसम में यूरिक एसिड और गाउट दर्द बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?

सर्दियों में आपकी दिनचर्या, खान-पान और शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रियाएँ—तीनों मिलकर यूरिक एसिड और गाउट को बढ़ा सकती हैं। नीचे आप मुख्य कारण आसानी से समझ पाएँगे:

1. शरीर का तापमान गिरना

जब ठंड बढ़ती है, जोड़ों का तापमान कम हो जाता है। कम तापमान में यूरिक एसिड जल्दी क्रिस्टल बनाता है और उसी वजह से दर्द बढ़ जाता है।

2. पानी कम पीना

सर्दियों में प्यास कम लगती है, इसलिए आप दिनभर में बहुत कम पानी पीते हैं। पानी कम होने पर शरीर में यूरिक एसिड जमा होने लगता है और बाहर नहीं निकल पाता।

3. कम धूप और कम शारीरिक गतिविधि

जाड़े में धूप कम मिलती है, बाहर निकलने का मन नहीं करता और शरीर निष्क्रिय हो जाता है। कम चलने-फिरने से जोड़ों में रक्त संचार धीमा पड़ता है और पुराने दर्द उभरने लगते हैं।

4. ठंडी और भारी चीज़ें ज़्यादा खाना

सर्दियों में आप अक्सर गरम-गरम, मसालेदार और भारी भोजन ज़्यादा खाते हैं। कई बार लाल मांस, दालें, तली-भुनी चीज़ें, या मीठी चीज़ें यूरिक एसिड को बढ़ा देती हैं। साथ ही कई लोग सर्दी में मिठाई, शराब या गर्म मसालेदार भोजन का सेवन भी बढ़ा देते हैं, जो यूरिक एसिड के लिए नुकसानदायक है।

5. मोटापा और कम मेटाबॉलिज़्म

ठंड के मौसम में मेटाबॉलिज़्म थोड़ा धीमा हो जाता है। यदि आपका वज़न पहले से अधिक है, तो सर्दियों में यह स्थिति और बिगड़ सकती है। मोटे लोगों में यूरिक एसिड बनने की मात्रा ज़्यादा होती है और शरीर इसे बाहर निकालने में कम सक्षम रहता है।

6. सर्दियों की दवाइयाँ और कमज़ोरी

कई बार ब्लड प्रेशर या सर्दी-ज़ुकाम की कुछ दवाइयाँ भी यूरिक एसिड बढ़ाती हैं। साथ ही, इम्युनिटी कम होने पर शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ती है, जिससे गाउट का दर्द और बढ़ सकता है।

यूरिक एसिड बढ़ने का सीधा असर: जोड़ों में दर्द, सूजन और जकड़न

जब आपके खून में यूरिक एसिड ज़्यादा बनने लगता है, तो यह घुलकर बाहर निकलने की बजाय क्रिस्टल की तरह जमने लगता है। ये छोटे-छोटे क्रिस्टल सबसे पहले उन जोड़ों में जमा होते हैं जहाँ ब्लड सर्कुलेशन थोड़ा धीमा होता है—जैसे पैर का अंगूठा, टखना, घुटना, उँगलियाँ या कलाई। यही कारण है कि आपको इन हिस्सों में सबसे ज़्यादा दर्द महसूस होता है।

जब क्रिस्टल जोड़ के अंदर जमा होते हैं, तो आपका शरीर इसे एक चोट की तरह समझकर वहाँ सूजन, गर्मी, लालिमा, और बहुत तीखा दर्द पैदा करता है। कई लोगों को लगता है कि जोड़ जैसे “जल रहा हो” या “अंदर चुभन हो रही हो”। सर्दियों में यह समस्या इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि जोड़ ठंडे रहते हैं, और ठंडे जोड़ में क्रिस्टल ज़्यादा तेजी से जमते हैं।

यदि आप सुबह उठते ही उँगलियों या घुटनों में कसावट, खिंचाव या जकड़न महसूस करते हैं, तो यह भी हाई यूरिक एसिड का संकेत हो सकता है। यह जकड़न इसलिए होती है क्योंकि रात भर में शरीर शांत रहता है और उस समय क्रिस्टल और आसानी से जमा हो जाते हैं।

सर्दियों में यूरिक एसिड कंट्रोल करने के लिए क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

सर्दियों में खाने-पीने की आदतें यूरिक एसिड को या तो बहुत अच्छा नियंत्रित कर सकती हैं या अचानक बढ़ा सकती हैं। इसलिए आप जो भी खाएँ, वह आपके शरीर में यूरिक एसिड के स्तर पर सीधा असर डालता है।

क्या खाएँ

आप सर्दियों में इन चीज़ों को अपनी थाली में ज़रूर शामिल करें:

  • उच्च फाइबर वाले फूड्स
    ओट्स, ज्वार, बाजरा, मूँग दाल, केले — यह आपका पाचन सुधारते हैं और यूरिक एसिड को शरीर से जल्दी बाहर निकालने में मदद करते हैं।

  • एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर फल
    चेरी, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, टमाटर और शिमला मिर्च — यह सूजन कम करते हैं और क्रिस्टल बनने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं।

  • पानी और हाइड्रेटिंग चीज़ें
    गर्म पानी, सूप, नारियल पानी, नींबू पानी — पानी की कमी यूरिक एसिड बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण है, इसलिए आप दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी ज़रूर पिएँ।

  • हल्का, ताज़ा और घर का बना खाना
    उबली सब्ज़ियाँ, दलिया, खिचड़ी, पोहा, रोटी-सब्ज़ी — यह शरीर पर हल्का बोझ डालते हैं।

  • हर्बल चाय
    अदरक, तुलसी, दालचीनी या हल्दी की चाय शरीर को गर्म रखती है और सूजन कम करती है।

क्या नहीं खाएँ

सर्दियों में कई ऐसे खाद्य पदार्थ अनजाने में खा लिए जाते हैं जो यूरिक एसिड बढ़ा देते हैं। इन्हें आप कम करें:

  • लाल मांस और अंग मांस
    इनका प्यूरिन स्तर बहुत ज़्यादा होता है, जिससे यूरिक एसिड तेजी से बढ़ता है।

  • सभी तरह की तली-भुनी और भारी चीज़ें
    पकौड़े, समोसे, चाट, भरपेट मसालेदार खाना — ये शरीर में सूजन बढ़ाते हैं।

  • मीठे पेय और फ्रक्टोज़ वाली चीज़ें
    कोल्ड ड्रिंक्स, पैक्ड जूस, मिठाइयाँ — यह यूरिक एसिड उत्पादन बढ़ाते हैं।

  • बीयर और शराब
    यह किडनी की क्षमता कम कर देते हैं और शरीर में जमा यूरिक एसिड बाहर नहीं निकल पाता।

  • अधिक दालें और चने
    सर्दियों में ये भारी हो जाते हैं और कई बार यूरिक एसिड बढ़ा सकते हैं, इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में लें।

सही आहार आपकी हालत को बदल सकता है। कई लोग केवल भोजन में थोड़े बदलाव करके ही गाउट अटैक को काफी हद तक रोक पाते हैं।

क्या जीवनशैली में छोटे बदलाव सर्दियों में गाउट को कम कर सकते हैं?

हाँ, बिल्कुल। आपकी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव भी गाउट को काबू में रखने में बहुत मदद करते हैं। सर्दियों में गाउट बढ़ने का सबसे बड़ा कारण शरीर का सुस्त हो जाना है। यदि आप कुछ सरल आदतें अपनाते हैं, तो आप दर्द को काफी हद तक रोक सकते हैं।

1. नियमित हल्का व्यायाम

आप सुबह या शाम 20–30 मिनट तेज़ चलना, हल्की स्ट्रेचिंग या योग कर सकते हैं। इससे जोड़ों में खून का प्रवाह बढ़ता है, सूजन कम होती है और जमाव रुकता है।

2. जोड़ोँ को गर्म रखें

सर्दियों में जोड़ों को ठंड लगने पर ही क्रिस्टल जमते हैं। गर्म मोज़े, दस्ताने, घुटने ढककर रखना और हल्का गर्म सेक — ये सब आपको बहुत राहत दे सकते हैं।

3. पानी कम न करें

ठंड में प्यास भले कम लगे, लेकिन आप हर 1–2 घंटे में थोड़ा-थोड़ा गर्म पानी पिएँ। पानी यूरिक एसिड को बाहर निकालने का सबसे आसान और सबसे असरदार तरीका है।

4. वज़न पर नियंत्रण

यदि आपका वज़न थोड़ा भी अधिक है, तो यूरिक एसिड बनने की प्रक्रिया और बढ़ जाती है। हल्का भोजन, वॉक और पानी के सहारे आप वज़न नियंत्रित कर सकते हैं और गाउट कम कर सकते हैं।

5. नींद और आराम का ध्यान

कम नींद या ज्यादा तनाव शरीर में सूजन बढ़ाते हैं। सर्दियों में अच्छी नींद आपको गाउट से लड़ने में मदद करती है।

6. ठंडी चीज़ों से दूरी

आइसक्रीम, ठंडा पानी, फ्रिज का खाना — यह सब शरीर का तापमान और गिराते हैं, जिससे क्रिस्टल और तेज़ी से जमा होते हैं।

इन छोटी-छोटी आदतों का असर बड़ा होता है। यदि आप इन्हें नियमित रूप से अपनाते हैं, तो सर्दियों में गाउट अटैक की संभावना बहुत कम हो सकती है और जोड़ों में जकड़न या सूजन भी काफी हद तक घट जाती है।

आयुर्वेद में यूरिक एसिड और गाउट दर्द कम करने के सर्वोत्तम घरेलू उपचार कौन-से हैं?

जब आप सर्दियों में दर्द, सूजन या जकड़न से परेशान होते हैं, तो कुछ आसान आयुर्वेदिक उपाय आपको राहत दे सकते हैं। ये उपाय आपके शरीर को गर्म, पाचन को बेहतर और रक्त प्रवाह को तेज़ रखते हैं, जिससे क्रिस्टल जमने की संभावना कम होती है।

1. हल्दी और सरसों के तेल का लेप

हल्दी प्राकृतिक रूप से सूजन कम करती है और सरसों का तेल जोड़ोँ में गर्मी पहुँचाता है।

कैसे करें: थोड़ी हल्दी सरसों के तेल में गर्म करें। गुनगुना होने पर जोड़ पर लगाएँ और हल्के हाथों से मलें। यह दर्द और सूजन दोनों को कम करता है।

2. गर्म और ठंडी सिंकाई

दोनों का असर अलग होता है। गर्म सेक दर्द कम करता है और जोड़ोँ को ढीला करता है, जबकि ठंडा सेक सूजन और जलन को शांत करता है। आप दर्द के अनुसार दोनों का उपयोग कर सकते हैं।

3. अजवाइन वाला गर्म पानी

अजवाइन पाचन ठीक करती है और शरीर से जमा आम बाहर निकालती है। सर्दियों में एक गिलास गर्म पानी में थोड़ी अजवाइन उबालकर पीना लाभकारी होता है।

4. त्रिफला रात में लेना

त्रिफला शरीर को डिटॉक्स करता है और मल त्याग को नियमित बनाता है। यदि आप रात में गुनगुने पानी के साथ लेते हैं, तो शरीर से विषैले तत्व आसानी से बाहर निकलते हैं और सूजन कम होती है।

5. गर्म पानी से पैर डुबोना

यदि टखनों या पैर के अंगूठे में गाउट अटैक होता है, तो पैर को गुनगुने पानी में 10–15 मिनट डुबोकर रखें। इससे रक्त प्रवाह बढ़ेगा और दर्द धीरे-धीरे कम होगा।

6. अदरक और तुलसी वाली चाय

यह चाय शरीर को अंदर से गर्म करती है और वाता को शांत करती है। सर्दियों में इसे रोज़ पीने से जकड़न और सूजन पर काफी असर पड़ता है।

इन उपायों से आपको घर पर ही शुरुआती राहत मिल सकती है, लेकिन यदि दर्द बार-बार हो, तो आपको विशेषज्ञ से ज़रूर मिलना चाहिए।

कौन-सी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ यूरिक एसिड कम करने में असर दिखाती हैं?

आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं जो शरीर को डिटॉक्स करती हैं, पाचन सुधारती हैं और जोड़ोँ की सूजन कम करती हैं। यदि आपका यूरिक एसिड बार-बार बढ़ता है, तो आप इन औषधियों का लाभ ले सकते हैं, परंतु इन्हें विशेषज्ञ की सलाह से ही लेना सबसे सुरक्षित होता है।

1. गुडूची (Tinospora cordifolia)

गुडूची को आयुर्वेद में अमृत कहा गया है। यह रक्त को शुद्ध करती है, सूजन कम करती है और किडनी की कार्यक्षमता बेहतर करती है। यदि आपके शरीर में यूरिक एसिड ज़्यादा बन रहा है, तो गुडूची उसे बाहर निकालने में मदद करती है।

2. त्रिफला

त्रिफला तीन फलों (अमलकी, हरितकी और बिभीतकी) से बना होता है। यह पाचन शक्ति को मज़बूत करता है और आम को साफ करता है। साथ ही यह शरीर में सूजन भी कम करता है, जो गाउट के दर्द में बहुत मददगार है।

3. नीम

नीम कड़वा होता है, इसलिए शरीर की गर्मी और सूजन दोनों को शांत करता है। यह रक्त साफ करता है और उन विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है जो गाउट को बढ़ाते हैं।

4. चेरी

चेरी में प्राकृतिक एंटी-ऑक्सीडेंट और एंथोसाइनिन होते हैं। यह यूरिक एसिड बनने की प्रक्रिया को धीमा करती है और तेज़ दर्द के समय सूजन कम करती है। गाउट के लिए चेरी को बहुत प्रभावी माना जाता है।

5. अजवाइन

अजवाइन पाचन में मदद करती है और शरीर में जमा गैस, आम और जलन को कम करती है। इसके द्रव्य गुण इसे किडनी की कार्यक्षमता सुधारने और यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मददगार बनाते हैं।

इन जड़ी-बूटियों का सही उपयोग आपके यूरिक एसिड को नियंत्रण में रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। लेकिन यदि आपको कोई दूसरी बीमारी है या दवाइयाँ चल रही हैं, तो आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।

निष्कर्ष

सर्दियों में बढ़ता यूरिक एसिड और गाउट आपको कई बार अचानक पकड़ लेता है, लेकिन अगर आप अपने शरीर के संकेत समझने लगें, तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। मौसम ठंडा हो सकता है, पर सही खान-पान, थोड़ी गर्माहट, नियमित पानी और सरल आयुर्वेदिक आदतें आपको दर्द से बचा सकती हैं। यदि आप अपनी दिनचर्या में छोटे बदलाव लाएँ, तो जोड़ों में जकड़न, सूजन और तेज़ दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है।

याद रखें, हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। इसलिए जो उपाय किसी और के लिए काम करते हैं, वही आपके लिए भी सही हों, यह ज़रूरी नहीं है। अपने लक्षणों को समझना और समय पर देखभाल करना ही सबसे अच्छा तरीका है।

अगर आप यूरिक एसिड या गाउट जैसी समस्या से परेशान हैं, तो हमारे प्रमाणित जीवा डॉक्टरों से आज ही अपने लिए व्यक्तिगत परामर्श लें। कॉल करें: 0129-4264323

FAQs

  1. यूरिक एसिड के लिए सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवा कौन सी है?

गुडूची, त्रिफला और नीम को प्रभावी माना जाता है। लेकिन आपके शरीर की प्रकृति अलग हो सकती है, इसलिए आप इन्हें विशेषज्ञ की सलाह से ही लें।

  1. गाउट का आयुर्वेदिक इलाज क्या है?

आयुर्वेद में वात-संतुलन, आम की सफाई, गर्म सेक, हल्का भोजन और जड़ी-बूटियाँ जैसे गुडूची और त्रिफला राहत देती हैं। सही इलाज आपकी स्थिति देखकर तय होता है।

  1. यूरिक एसिड बढ़ने के लिए कौन सी घरेलू दवा रामबाण है?

अजवाइन का काढ़ा, हल्दी-सरसों तेल का लेप और चेरी का सेवन कई लोगों को राहत देता है। लेकिन लगातार बढ़े स्तर पर डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है।

  1. यूरिक एसिड को जड़ से कैसे खत्म करें?

सही आहार, नियमित पानी, हल्का व्यायाम, डिटॉक्स जड़ी-बूटियाँ और पाचन मजबूत करने वाली आयुर्वेदिक आदतें मिलकर इसे जड़ से कम करने में मदद करती हैं।

  1. सुबह खाली पेट क्या पीना चाहिए जिससे यूरिक एसिड कम हो जाए?

आप गुनगुना पानी, नींबू-पानी, हल्का अजवाइन-पानी या त्रिफला-जल ले सकते हैं। यह शरीर की सफाई और पाचन को बेहतर करके यूरिक एसिड कम करने में मदद करता है।

  1. क्या सर्दियों में मसालेदार खाना यूरिक एसिड बढ़ा सकता है?

बहुत तैला, मसालेदार या भारी भोजन आम बढ़ाता है और इससे यूरिक एसिड नियंत्रित नहीं रहता। आप हल्का, घर का बना और गर्म भोजन ज्यादा लें।

  1. क्या रोज़ाना चेरी खाना यूरिक एसिड कम करने में मदद करता है?

हाँ, चेरी में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं जो सूजन और यूरिक एसिड बनने की प्रक्रिया दोनों को कम करते हैं। आप नियमित मात्रा में इन्हें खा सकते हैं।

  1. क्या लंबे समय तक बैठे रहने से गाउट का दर्द बढ़ सकता है?

हाँ, लंबे समय तक बैठने से जोड़ों में रक्त प्रवाह कम होता है, जिससे दर्द और जकड़न बढ़ती है। आप बीच-बीच में हल्की चाल या स्ट्रेचिंग करें।

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