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AC में ज्यादा रहने से joint pain क्यों बढ़ता है — arthritis का risk समझिए

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 05 May, 2026
  • category-iconUpdated on 05 May, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5004

आजकल लंबे समय तक AC में रहने की आदत आम हो गई है, लेकिन इसका असर शरीर के जोड़ों पर भी पड़ सकता है। खासकर जिन लोगों में पहले से जकड़न या हल्का दर्द होता है, उन्हें ठंडी हवा में यह समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है। आयुर्वेद के अनुसार, ठंडा वातावरण शरीर में सूखापन और जकड़न बढ़ा सकता है, जिससे जोड़ों की प्राकृतिक लचीलापन कम हो जाता है। धीरे-धीरे यह स्थिति दर्द और असहजता को बढ़ा सकती है, खासकर घुटनों और पीठ जैसे हिस्सों में।

अर्थराइटिस क्या है?

अर्थराइटिस हमारे जोड़ों में होने वाली सूजन (Inflammation) है। हमारे जोड़ दो हड्डियों के मिलन स्थल होते हैं, जहाँ कुशन जैसा कार्टिलेज उन्हें रगड़ खाने से बचाता है। जब यह कार्टिलेज घिसने लगता है या शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता खुद के ही ऊतकों पर हमला करने लगती है, तो जोड़ों में दर्द, सूजन और चलने-फिरने में तकलीफ होने लगती है।

अर्थराइटिस के विभिन्न प्रकार

अर्थराइटिस केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि कई स्थितियों का समूह है:

  • Osteoarthritis (OA): यह सबसे आम है, जो उम्र बढ़ने या जोड़ों के ज्यादा इस्तेमाल से कार्टिलेज घिसने के कारण होता है।
  • Rheumatoid Arthritis (RA): यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, जिसमें इम्यून सिस्टम जोड़ों की परत पर हमला करता है।
  • Gout (गाउट): खून में यूरिक एसिड बढ़ने से जोड़ों में क्रिस्टल जमा हो जाते हैं, जिससे अचानक तेज दर्द होता है।

शरीर के ये संकेत बताते हैं कि सब ठीक नहीं है

अगर शरीर बार-बार कुछ खास लक्षण दिखा रहा है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि जोड़ों और शरीर के अंदर संतुलन बिगड़ रहा है।

  • सुबह उठते ही जोड़ों में लंबे समय तक जकड़न रहना, जिससे शरीर ढीला महसूस होता है।
  • सीढ़ियाँ चढ़ते या नीचे बैठते समय घुटनों से आवाज आना और असहजता महसूस होना।
  • जोड़ों के आसपास हल्की लाली, गर्माहट या सूजन जैसा महसूस होना।
  • हाथों या उंगलियों के जोड़ों में धीरे-धीरे आकार बदलना या टेढ़ापन दिखना।

इन संकेतों को नजरअंदाज करना आगे चलकर समस्या को बढ़ा सकता है, इसलिए समय रहते ध्यान देना जरूरी होता है।

जोड़ों की समस्या क्यों बढ़ रही है? (मुख्य कारण)

जोड़ों की कमजोरी और दर्द आजकल तेजी से बढ़ती समस्या बन गई है, जिसके पीछे कई जीवनशैली और शरीर से जुड़े कारण जिम्मेदार होते हैं।

  • लंबे समय तक ठंडा वातावरण या एसी में रहना: लगातार ठंडी हवा में रहने से शरीर में जकड़न बढ़ सकती है और जोड़ों में रक्त संचार धीमा हो जाता है, जिससे stiffness महसूस होती है।
  • शरीर का बढ़ा हुआ वजन: अतिरिक्त वजन घुटनों और जोड़ों पर लगातार दबाव डालता है, जिससे समय के साथ घिसाव और दर्द बढ़ने लगता है।
  • शारीरिक गतिविधि की कमी: कम चलना-फिरना और व्यायाम न करना जोड़ों को कमजोर बनाता है और उनकी लचीलापन कम कर देता है।
  • पोषण की कमी: शरीर में कैल्शियम, विटामिन D और जरूरी पोषक तत्वों की कमी से हड्डियाँ और जोड़ धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं।
  • पुरानी चोट का असर: अगर किसी जोड़ में पहले चोट लगी हो और वह पूरी तरह ठीक न हुई हो, तो समय के साथ वही जगह दर्द और समस्या का कारण बन सकती है।

इन कारणों की वजह से जोड़ों पर धीरे-धीरे असर पड़ता है और दर्द, जकड़न व कमजोरी महसूस होने लगती है।

आयुर्वेद में अर्थराइटिस की जड़: आम और वात का असंतुलन

आयुर्वेद के अनुसार अर्थराइटिस केवल जोड़ों का दर्द नहीं है, बल्कि शरीर के अंदर गहराई में होने वाले असंतुलन का परिणाम है। इसका मुख्य कारण “आम” यानी अधपचे और विषैले पदार्थों का बनना माना जाता है, जो कमजोर पाचन शक्ति के कारण शरीर में जमा होने लगते हैं।

जब शरीर की पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है, तो भोजन पूरी तरह नहीं पच पाता और यह अधपचा पदार्थ शरीर में विष के रूप में फैलने लगता है। यही “आम” धीरे-धीरे रक्त के माध्यम से जोड़ों तक पहुँच जाता है और वहाँ चिपकने लगता है। इसके बाद जब शरीर में वात दोष असंतुलित हो जाता है, तो यह सूखापन, जकड़न और दर्द को और बढ़ा देता है। आम और वात का यह संयोजन जोड़ों में सूजन, भारीपन और तेज दर्द का कारण बनता है।

आयुर्वेद में उपचार का उद्देश्य केवल दर्द को दबाना नहीं होता, बल्कि पाचन शक्ति को मजबूत करके शरीर से आम को बाहर निकालना और वात को संतुलित करना होता है, ताकि समस्या की जड़ से सुधार हो सके।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण 

जीवा आयुर्वेद में हर व्यक्ति को एक जैसा उपचार नहीं दिया जाता, बल्कि शरीर की प्रकृति और समस्या की जड़ को समझकर व्यक्तिगत उपचार किया जाता है। यहाँ लक्ष्य केवल दर्द कम करना नहीं, बल्कि शरीर के अंदर संतुलन बनाकर दीर्घकालिक सुधार लाना होता है।

  • व्यक्तिगत उपचार योजना (Personalized Approach): हर व्यक्ति की प्रकृति, दोष असंतुलन और लक्षणों के अनुसार जड़ी-बूटियों और उपचार का संयोजन तय किया जाता है, ताकि शरीर को सही दिशा में संतुलित किया जा सके।
  • पाचन और आंतों की मजबूती: चूंकि अर्थराइटिस की शुरुआत अक्सर पाचन कमजोरी और “आम” बनने से मानी जाती है, इसलिए पाचन तंत्र को मजबूत करने और शरीर को अंदर से साफ करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • जीवनशैली में सुधार: रोजमर्रा की आदतों जैसे बैठने का तरीका, नींद की स्थिति, हल्का व्यायाम और सही दिनचर्या पर मार्गदर्शन दिया जाता है ताकि जोड़ों पर दबाव कम हो सके।
  • शरीर के मार्गों की सफाई (Srotas Shuddhi): शरीर के सूक्ष्म मार्गों को साफ और सक्रिय करने पर ध्यान दिया जाता है ताकि पोषण सही तरीके से जोड़ों तक पहुँच सके और उनकी मजबूती बनी रहे।

अर्थराइटिस के लिए प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ 

आयुर्वेद में ऐसी कई औषधियां हैं जो स्टेरॉयड के बिना सूजन को कम करने की शक्ति रखती हैं:

  • शल्लकी (Shallaki): इसे 'इंडियन फ्रैंकिसेंस' कहते हैं। यह जोड़ों के बीच के घर्षण को कम करती है और सूजन मिटाने में आधुनिक दवाओं से भी तेज काम कर सकती है, बिना किसी साइड-इफेक्ट के।
  • निर्गुंडी (Nirgundi): इसे "वात-नाशक" जड़ी-बूटी माना जाता है। इसके पत्तों का तेल लगाने और सेवन करने से नसों का दर्द तुरंत शांत होता है।
  • हल्दी (Curcumin): हल्दी में मौजूद करक्यूमिन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो जोड़ों की कोशिका को नष्ट होने से बचाता है।
  • लहसुन (Garlic): यह शरीर की वायु को संतुलित करता है और बंद नसों को खोलने में मदद करता है।

अर्थराइटिस के लिए आयुर्वेदिक थेरेपी

जब दवाएं धीमी लगने लगें, तो समझ लीजिए कि शरीर को 'डीप क्लीनिंग' की जरूरत है। आयुर्वेद की पंचकर्म थैरेपी जोड़ों के भीतर तक जाकर जमा हुई गंदगी (टॉक्सिन्स) को पिघलाकर बाहर निकाल देती है। जोड़ों के दर्द के लिए ये तीन उपचार किसी वरदान से कम नहीं हैं:

  • बस्ती (Basti) - वात रोगों का काल: इसे आयुर्वेद में 'अर्ध-चिकित्सा' यानी आधी बीमारी का अकेला इलाज माना जाता है। इसमें औषधीय तेलों या काढ़ों का उपयोग किया जाता है। यह सीधे शरीर के मुख्य वात केंद्र (कोलोन) पर काम करता है, जिससे जोड़ों का दर्द और पुरानी अकड़न जड़ से खत्म होने लगती है।
  • जानु बस्ती (Janu Basti) - घुटनों का अपना 'ऑयल बाथ': अगर घुटनों में गैप कम हो गया है या ग्रीस सूख गई है, तो यह थैरेपी चमत्कार कर सकती है। घुटने के चारों ओर उड़द की दाल के आटे से घेरा बनाकर उसमें गुनगुना औषधीय तेल भरा जाता है। यह तेल जोड़ों की हड्डियों और कार्टिलेज को भीतर तक पोषण (Lubrication) देता है।
  • पोटली स्वेद (Potli Massage) - गर्माहट भरी राहत: ताजी जड़ी-बूटियों, रेत या औषधीय चूर्ण को एक मलमल के कपड़े में बांधकर पोटली बनाई जाती है। इसे गर्म तेल में डुबोकर जोड़ों पर सिकाई की जाती है। AC की ठंडक से जो नसें और मांसपेशियां पत्थर जैसी सख्त हो जाती हैं, उन्हें यह थैरेपी मक्खन की तरह नरम बना देती है।

क्या खाएं और क्या बचाएं: आपकी डाइट ही आपकी दवा है

अर्थराइटिस में खानपान बहुत बड़ा रोल निभाता है क्योंकि सही भोजन शरीर में सूजन कम करता है और जोड़ों को मजबूती देता है।

क्या खाएं:

  • हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन जैसे मूंग दाल, खिचड़ी और सूप
  • हरी सब्जियाँ जैसे पालक, मेथी और लौकी
  • हल्दी और अदरक जैसे प्राकृतिक मसाले जो सूजन कम करने में मदद करते हैं
  • गुनगुना पानी जो शरीर को अंदर से साफ रखने में मदद करता है
  • सीमित मात्रा में देसी घी जो जोड़ों को चिकनाई देता है

किन चीजों से बचें:

  • ज्यादा तला-भुना और जंक फूड
  • अधिक चीनी और मैदा वाले खाद्य पदार्थ
  • बहुत ठंडी चीजें जैसे कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम
  • प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड

सही डाइट अपनाने से शरीर में सूजन कम होती है, पाचन बेहतर होता है और जोड़ों की ताकत धीरे-धीरे बढ़ने लगती है।

जीवा आयुर्वेद में आपकी जाँच कैसे होती है? (Assessment Process)

जीवा में हम केवल बीमारी का इलाज नहीं करते, बल्कि बीमार व्यक्ति का इलाज करते हैं। जब आप हमारे विशेषज्ञ डॉक्टरों से मिलते हैं, तो जाँच की प्रक्रिया बहुत गहरी और व्यक्तिगत होती है:

  • प्रकृति विश्लेषण (Prakriti Analysis): हर इंसान का शरीर वात, पित्त और कफ के एक विशेष मेल से बना होता है। हम यह पहचानते हैं कि आपकी मूल प्रकृति क्या है और वर्तमान में कौन सा दोष बिगड़ा हुआ है।
  • नाड़ी परीक्षण (Pulse Diagnosis): डॉक्टर आपकी कलाई की धड़कन (Pulse) के जरिए शरीर के आंतरिक अंगों की स्थिति और दोषों के असंतुलन का सटीक पता लगाते हैं।
  • विस्तृत परामर्श: हम आपकी लाइफस्टाइल, मानसिक तनाव, नींद के पैटर्न और पुरानी बीमारियों के इतिहास पर लंबी चर्चा करते हैं ताकि दर्द की असली जड़ तक पहुँचा जा सके।

जीवा आयुर्वेद से संपर्क कैसे करें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

आयुर्वेद में रातों-रात चमत्कार नहीं होता, बल्कि यह धीरे-धीरे शरीर को भीतर से रिपेयर करता है।

  • शुरुआती 15-30 दिन: दर्द की तीव्रता में कमी आती है और शरीर हल्का महसूस होने लगता है।
  • 2-4 महीने: जोड़ों की सूजन कम होती है और लचीलापन (Flexibility) वापस आने लगता है।
  • 6 महीने और उससे अधिक: पुरानी स्थितियों में जोड़ों को मजबूती मिलती है और आप एक सक्रिय जीवन जीने लगते हैं।

इलाज से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं?

अर्थराइटिस सिर्फ जोड़ों का दर्द नहीं है, बल्कि शरीर में सूजन और असंतुलन का संकेत भी होता है। आयुर्वेद में इसका उद्देश्य शरीर को अंदर से संतुलित करके जोड़ों की ताकत और लचीलापन वापस लाना होता है।

  • दर्द और जकड़न में कमी: शरीर में सूजन कम होने और वात संतुलित होने से धीरे-धीरे दर्द और जकड़न में राहत मिलने लगती है।
  • जोड़ों की गतिशीलता में सुधार: घुटनों और जोड़ों की stiffness कम होने से चलना-फिरना और रोजमर्रा के काम आसान होने लगते हैं।
  • सूजन में कमी: शरीर के अंदर की सूजन कम होने से जोड़ों में भारीपन और गर्माहट की समस्या घटती है।
  • ऊर्जा और सक्रियता में बढ़ोतरी: शरीर हल्का और अधिक सक्रिय महसूस होने लगता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम अनिल कुमारी वर्मा है, मेरी उम्र 60 वर्ष है और मैं दिल्ली से हूँ। साल 2008 में मुझे अर्थराइटिस हो गया था। मेरे पैरों में अचानक सूजन आ गई और बहुत तेज दर्द रहने लगा। हम डॉक्टर के पास गए, एक्स-रे करवाया गया तो ऑपरेशन की सलाह दी गई। मैंने कई दवाइयाँ भी लीं, लेकिन कोई खास आराम नहीं मिला। धीरे-धीरे मेरा आयुर्वेद पर विश्वास बढ़ा। फिर मेरी एक दोस्त ने मुझे जीवा आयुर्वेद के बारे में बताया। इसके बाद मैं जीवाग्राम गई और वहाँ से इलाज शुरू कराया। यहाँ मुझे सही मार्गदर्शन, थेरेपी और आयुर्वेदिक उपचार मिला, जिससे मेरी स्थिति में सुधार आने लगा।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

अपने इलाज पर कितना खर्च आएगा, यह जानना हर मरीज़ के लिए ज़रूरी होता है। जीवा आयुर्वेद में हम खर्च की जानकारी साफ और आसान तरीके से देते हैं, ताकि आप बिना किसी उलझन के सही फैसला ले सकें।

इलाज का सामान्य खर्च:

जो लोग अपनी बीमारी के लिए नियमित (regular) इलाज शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए दवाइयों और डॉक्टर की सलाह का महीने का खर्च लगभग ₹3,000 से ₹3,500 के बीच आता है। यह एक औसत अंदाज़ा है। असल खर्च आपकी बीमारी कितनी पुरानी है और उसकी स्थिति कैसी है, इस पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल (स्पेशल पैकेज):

अगर आप अपनी बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए थोड़ा ज़्यादा गहराई और विस्तार से इलाज करना चाहते हैं, तो हमारे 'विशेष पैकेज' आपके लिए सबसे अच्छे हैं। इसमें हम सिर्फ बीमारी को नहीं दबाते, बल्कि आपकी पूरी लाइफस्टाइल को सुधारने पर काम करते हैं। इसमें शामिल हैं:

  • खास दवाइयाँ (Customized Medicines)
  • सीनियर डॉक्टर से कंसल्टेशन
  • मन को शांत रखने के सेशन्स (Stress Management)
  • योग और एक्सरसाइज़ की ट्रेनिंग
  • पर्सनल डाइट प्लान (जो सिर्फ आपके लिए बना हो)

इन पैकेजेस का खर्च आमतौर पर ₹15,000 से ₹40,000 के बीच होता है, जो आपके 3 से 4 महीने के पूरे इलाज को कवर करता है।

जीवाग्राम (24x7 देखभाल वाला इलाज):

जिन लोगों को बीमारी से लड़ने के लिए ज़्यादा ध्यान, शांति और आराम के साथ इलाज (पंचकर्म व शोधन) चाहिए, उनके लिए हमारा जीवाग्राम सेंटर सबसे बेहतरीन विकल्प है। यह प्रकृति के करीब बना एक ऐसा सेंटर है जहाँ आपको घर जैसा सुकून और अस्पताल जैसी केयर मिलती है। यहाँ आपको मिलता है:

  • पंचकर्म थेरेपी (उत्तर बस्ती, विरेचन और अंदरूनी सफाई)
  • सादा और पौष्टिक 'सात्विक' खाना
  • इलाज की आधुनिक और बेहतर सुविधाएँ
  • आरामदायक रहने की व्यवस्था

यहाँ 7 दिन का प्रोग्राम लगभग ₹1 लाख का होता है। इसमें आपको हर समय विशेषज्ञों की देखभाल मिलती है, ताकि आपका शरीर और मन दोनों पूरी तरह से तरोताज़ा (rejuvenated) होकर स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए तैयार हो सकें।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।
  • दवाइयों पर निर्भरता कम: 88% मरीजों ने धीरे-धीरे एलोपैथिक दवाओं और हार्मोनल सपोर्ट पर निर्भरता कम की है।

आयुर्वेदिक और मॉडर्न उपचार में अंतर

विशेषता मॉडर्न ट्रीटमेंट जीवा आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट
दृष्टिकोण केवल लक्षणों (Symptoms) को दबाना। बीमारी की जड़ (Root Cause) को खत्म करना।
साइड इफेक्ट्स पेनकिलर्स से लिवर और किडनी पर असर हो सकता है। प्राकृतिक औषधियां और कोई हानिकारक प्रभाव नहीं।
उपचार का तरीका स्टेरॉयड या सर्जरी की संभावना। आहार, योग और जड़ी-बूटियों से उपचार।
स्थायित्व दवा छोड़ने पर दर्द वापस आने का डर। जीवनशैली में बदलाव के साथ स्थायी राहत।

डॉक्टर से कब सलाह लें? 

अगर आप इनमें से कुछ भी महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत संपर्क करें:

  1. जोड़ों में असहनीय दर्द जो रात की नींद खराब कर दे।
  2. जोड़ों का आकार बदलना या हड्डी बढ़ना।
  3. दर्द के साथ हल्का बुखार महसूस होना।
  4. चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ होना।

निष्कर्ष

AC की ठंडक का आनंद लें, लेकिन अपने स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं। जोड़ों का दर्द केवल एक शारीरिक कष्ट नहीं है, यह आपकी आजादी छीन लेता है। आयुर्वेद आपको वह आजादी वापस दिलाने की ताकत रखता है। देरी न करें, क्योंकि समस्या जितनी पुरानी होगी, उसे ठीक करने में उतना ही समय लगेगा। आज ही अपना पहला परामर्श बुक करें।

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