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Hives और allergy में फर्क कैसे समझें?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह उठे और आईने में देखा तो गर्दन या हाथ पर एक बड़ा सा लाल चकता। पहला ख्याल क्या आता है? "अरे यार! कल रात डिनर में कुछ गड़बड़ खा लिया क्या? कोई एलर्जी हो गई!" हम में से 90% लोग त्वचा पर कुछ भी लाल या खुजलीदार देखते ही उसे सीधे 'एलर्जी' का ठप्पा लगा देते हैं। लेकिन रुकिए। कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट है। त्वचा का हर लाल निशान सिर्फ एलर्जी नहीं होता।

कई बार यह हाइव्स (पित्ती) भी हो सकती है, जिसके कारण, लक्षण और देखभाल का तरीका बिल्कुल अलग हो सकता है। अब आप सोचेंगे कि क्या फर्क पड़ता है, खुजली तो दोनों में होती है! फर्क पड़ता है भाई। क्योंकि दोनों के पीछे की वजहें और उन्हें संभालने का तरीका एकदम जुदा है। ऐसे में दोनों के बीच का फर्क समझना ज़रूरी है, ताकि समय रहते सही कदम उठाया जा सके।  

क्या हाइव्स और एलर्जी एक ही बात हैं?

सीधा जवाब, नहीं, दोनों जुड़वां भाई नहीं हैं। हाँ, इनका आपस में एक गहरा रिश्ता ज़रूर है, लेकिन इन्हें एक ही समझने की गलती भारी पड़ सकती है। एलर्जी एक बहुत बड़ा छाता है। जब आपका शरीर किसी बाहरी विलेन (जैसे धूल, परागकण या कोई खास दवा) को देखकर ओवर-रिएक्ट करता है, तो उसे एलर्जी कहते हैं। अब, हाइव्स इस एलर्जी का एक साइड-इफेक्ट या लक्षण हो सकता है। लेकिन मजे की बात ये है कि हाइव्स बिना किसी बाहरी एलर्जी के भी अचानक आपकी स्किन पर धावा बोल सकता है।

शरीर कौन-से संकेत देकर फर्क बताने की कोशिश करता है?

हमारी बॉडी खुद ही हिंट देती है, बस हमें उसे डिकोड करना आना चाहिए। अगर आप ध्यान से देखेंगे, तो त्वचा खुद अपनी स्थिति बयां कर देगी:

  • चकत्तों का आकार और उभरना: हाइव्स वाले चकत्ते थोड़े उबड़-खाबड़ और त्वचा से ऊपर की ओर सूजे हुए होते हैं, जैसे किसी कीड़े ने काट लिया हो। इन्हें छूने पर बाकायदा मोटाई महसूस होती है। वहीं सामान्य एलर्जी वाले रैशेज अक्सर चपटे, छोटे लाल दाने या रूखे पैच जैसे दिखते हैं।
  • खुजली की तीव्रता: एलर्जी में खुजली नॉर्मल होती है। हाइव्स में? वहां तो मानो आग लग जाती है! भयंकर चुभन, तीव्र जलन और ऐसा लगेगा कि बस खुजाते ही रहो।
  • कितनी देर तक बने रहते हैं: हाइव्स की सबसे जादुई और अजीब बात ये टिकते नहीं हैं। एक जगह चकता उभरेगा, कुछ घंटों में गायब हो जाएगा और फिर अचानक पैर या पेट पर नया चकता आ जाएगा। ये अपनी जगह बदलते रहते हैं। सामान्य एलर्जी वाले रैश ढीठ होते हैं, एक ही जगह हफ्तों जमे रहते हैं।
  • शरीर के किस हिस्से में दिखाई देते हैं: एलर्जी आमतौर पर वहीं होती है जहां किसी चीज़ का सीधा संपर्क हुआ हो, जैसे नकली आभूषण पहनने पर कलाई या गर्दन। हाइव्स का कोई ठिकाना नहीं है, ये बिना किसी सीधे टच के पूरी बॉडी पर कहीं भी अचानक पॉप-अप हो सकते हैं।
  • बार-बार लौटते हैं या नहीं: सामान्य एलर्जी ट्रिगर हटते ही खत्म हो जाती है। लेकिन हाइव्स कई बार हफ्तों या महीनों तक बार-बार लौटकर आता है और आपको हैरान कर सकता है।

किन वजहों से यह परेशानी शुरू हो सकती है?

तो आखिर ये बला शुरू कहाँ से होती है? अगर हम बाहरी वजहों की बात करें, तो पुराना बासी खाना, कोई नई एंटीबायोटिक दवा, हवा में उड़ती धूल, मौसम का अचानक बदलना या किसी कीड़े का डंक मारना ये सब आपकी स्किन का कबाड़ा कर सकते हैं। ये सब क्लासिक एलर्जी के ट्रिगर्स हैं।

लेकिन हाइव्स के नखरे थोड़े अलग हैं। यह सिर्फ इन बाहरी चीज़ों से नहीं भड़कता। कभी ऑफिस का बहुत ज्यादा स्ट्रेस ले लिया, अचानक बहुत तेज़ गर्मी या कड़ाके की ठंड में निकल गए, जिम में बहुत हैवी वर्कआउट कर लिया जिससे शरीर गर्म हो गया, या फिर कोई पुराना वायरल बुखार था इन अंदरूनी कारणों से भी शरीर में 'हिस्टामाइन' नाम का केमिकल रिलीज हो जाता है, और लो भाई, आ गई पित्ती!

कब इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए?

वैसे तो ये चकत्ते आते-जाते रहते हैं, लेकिन कभी-कभी सिचुएशन सीरियस हो जाती है। अगर इन लक्षणों के साथ नीचे दी गई कोई भी बात महसूस हो, तो घरेलू नुस्खे छोड़िए और तुरंत डॉक्टर की तरफ भागिए। यह 'एनाफिलेक्सिस' नाम का खतरनाक रिएक्शन हो सकता है:

  • साँस लेने में कठिनाई: अगर चकत्तों के साथ छाती में भारीपन लगे, आवाज़ बदल जाए या सांस फूलने लगे।
  • होंठ, जीभ या गले में सूजन: यदि चेहरे पर, विशेषकर होंठों, आंखों के आसपास या जीभ के अंदर भारी सूजन आ जाए, जिससे थूक निगलने में भी दिक्कत हो।
  • पूरे शरीर में तेज़ी से चकत्ते फैलना: चकत्ते इतनी तेजी से फैलें कि देखते ही देखते कुछ ही मिनटों में पूरी बॉडी लाल हो जाए।
  • तेज़ चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस होना: अचानक से सिर घूमने लगे, ब्लड प्रेशर डाउन हो जाए या आंखों के आगे अंधेरा छाने लगे।
  • बार-बार बिना कारण परेशानी होना: अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के ये चकत्ते 6 हफ्ते से ज्यादा समय तक लगातार आते-जाते रहें।

क्या हर बार दवा लेना ज़रूरी होता है?

अब बात आती है कि क्या लाल निशान देखते ही एंटी-एलर्जी टैबलेट चटका लेनी चाहिए? सच कहें तो नहीं। हर स्थिति का इलाज एक जैसा नहीं होता। अगर आपको बहुत हल्की खुजली है और चकत्ते एक-दो घंटे में खुद ही शांत हो रहे हैं, तो बिना बात के गोलियां खाने की कोई जरूरत नहीं है। कई बार सिर्फ थोड़ी सी ठंडी सिकाई ही सारा दर्द सोख लेती है।

दवा की ज़रूरत तब होती है जब खुजली बर्दाश्त से बाहर हो जाए। डॉक्टर पहले यह देखते हैं कि इसके पीछे का असली विलेन कौन है, और सही कारण जानने के बाद ही उपचार तय किया जाता है। खुद से केमिस्ट बनकर दवाइयां खरीदना कभी-कभी शांत पड़ी बीमारी को और भड़का देता है।

रोज़मर्रा की कौन-सी सावधानियाँ मदद कर सकती हैं?

जब स्किन पहले से ही गुस्से में हो, तो उसे शांत रखने के लिए कुछ बेसिक बातें गाँठ बांध लीजिए:

  • संभावित कारणों पर ध्यान रखें: थोड़ा जासूस बनिए। एक डायरी में नोट करें कि क्या खाने, कौन सा साबुन लगाने या कहाँ जाने के बाद यह खुजली शुरू हुई, ताकि आप उस ट्रिगर से बच सकें।
  • त्वचा को ज़्यादा रगड़ने से बचें: खुजली होना लाजमी है, लेकिन नाखूनों से रगड़िए मत। जितना खुजाएंगे, वो केमिकल उतना फैलेगा और चकत्ते उतने ही बड़े होते जाएंगे।
  • बहुत गर्म पानी से बचें: नहाने के लिए खौलते या बहुत गर्म पानी का इस्तेमाल बंद करें। यह स्किन को ड्राई करके खुजली को 10 गुना बढ़ा देता है। गुनगुना या नॉर्मल पानी बेस्ट है।
  • हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें: तंग, टाइट जींस या सिंथेटिक कपड़े स्किन को दबाते हैं जिससे हाइव्स भड़कता है। ढीले सूती (कॉटन) कपड़े पहनें ताकि स्किन भी खुलकर सांस ले सके

आयुर्वेद त्वचा पर बार-बार होने वाली ऐसी समस्याओं को कैसे देखता है?

आयुर्वेद इस मामले में बहुत गहरी बात कहता है। वो कहता है कि त्वचा तो बस एक आईना है, असली गड़बड़ तो पेट के अंदर चल रही है। आयुर्वेद में हाइव्स को 'शीतपित्त' कहा जाता है। जब हम बहुत ज्यादा तीखा, चटपटा, खट्टा या प्रिजर्वेटिव वाला खाना खाते हैं, तो हमारे शरीर का 'पित्त' और 'वात' दोष पूरी तरह बिगड़ जाता है। यह दूषित पित्त जब खून में मिलता है, तो त्वचा पर लाल-लाल चकत्ते बनकर फूटता है।

इसलिए आयुर्वेद केवल ऊपर से कोई लेप लगाने को नहीं कहता। वो कहता है कि अपनी पाचन शक्ति (जठराग्नि) को ठीक करो और दिनचर्या बदलो। जब तक पेट साफ नहीं होगा और खून से टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकलेंगे, तब तक ये चकत्ते आते रहेंगे। नीम, हल्दी और गिलोय जैसी ठंडी तासीर वाली चीज़ें शरीर के इसी अंदरूनी कचरे को साफ करती हैं।

निष्कर्ष

तो लब्बोलुआब ये है कि त्वचा पर लाल चकत्ते दिखने का मतलब आंख बंद करके एलर्जी मान लेना सही नहीं है। कई बार यह हाइव्स का एक शॉर्ट-टर्म ड्रामा भी हो सकता है, जिसकी पहचान और देखभाल बिल्कुल अलग होती है। अगली बार जब ऐसा कुछ दिखे, तो घबराने के बजाय पहले निशानों के पैटर्न को गौर से देखें। केवल लक्षण देखकर खुद ही डॉक्टर बनने के बजाय सही कारण समझना और ज़रूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है। आखिर आपकी स्किन है, इसकी हिफाजत की ज़िम्मेदारी भी आपकी ही है!

संदर्भ लिंक्स (Reference Links)

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाइव्स का एक सिंगल चकत्ता या वेल्ट आमतौर पर 2 से 24 घंटे के भीतर अपने आप गायब हो जाता है, लेकिन शरीर के दूसरे हिस्सों पर नए चकत्ते लगातार निकलते रह सकते हैं। पूरी समस्या कुछ दिनों से लेकर 6 हफ़्तों तक चल सकती है।

बिल्कुल नहीं। हाइव्स पूरी तरह से गैर-संक्रामक है। यह आपके अपने शरीर के इम्यून सिस्टम और हिस्टामाइन केमिकल के रिलीज होने के कारण होता है, इसलिए यह छूने या साथ रहने से दूसरे व्यक्ति में कभी नहीं फैलता।

यदि हाइव्स की समस्या 6 हफ़्तों से कम समय में पूरी तरह ठीक हो जाती है, तो इसे एक्यूट हाइव्स कहते हैं। लेकिन यदि चकत्ते बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार 6 हफ़्तों से ज़्यादा समय तक रोज़ या हफ़्ते में कई बार आते रहें, तो इसे क्रोनिक हाइव्स कहा जाता है।

जी हाँ, अत्यधिक मानसिक या शारीरिक तनाव के समय हमारा शरीर स्ट्रेस हार्मोन (जैसे कोर्टिसोल) रिलीज़ करता है, जो इम्यून सिस्टम को ट्रिगर करके हिस्टामाइन का रिसाव बढ़ा सकते हैं। इसे 'स्ट्रेस हाइव्स' कहा जाता है।

तुरंत राहत के लिए प्रभावित हिस्से पर बर्फ या ठंडे पानी की पट्टी से सिकाई (Cold Compress) करें। इससे वहां की रक्त वाहिकाएं सुकड़ती हैं और खुजली व सूजन में तुरंत राहत मिलती है। गर्म सिकाई भूलकर भी न करें।

हाँ, अत्यधिक खुशबू वाले साबुन, परफ्यूम, बॉडी वॉश या कपड़ों को धोने वाले कड़े डिटर्जेंट त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं, जिससे संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस या हाइव्स की समस्या भड़क सकती है।

आयुर्वेद के अनुसार, शुद्ध देसी घी में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर उसे हल्के गुनगुने रूप में पूरे शरीर पर मालिश करने से शीतपित्त में तुरंत आराम मिलता है। इसके अलावा आधा चम्मच हल्दी का पानी पीना भी वात-पित्त को शांत करता है।

बिल्कुल। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि पेट में इन्फेक्शन, कब्ज, या आंतों के खराब स्वास्थ्य के कारण शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं, जो इम्यून सिस्टम को असंतुलित करके त्वचा पर हाइव्स के रूप में दिखाई दे सकते हैं।

इसके लिए डॉक्टर आमतौर पर कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC), एरिथ्रोसाइट सेडिमेंटेशन रेट (ESR), थायराइड फंक्शन टेस्ट (TFT), और कुछ मामलों में विशिष्ट एलर्जी की पहचान के लिए स्किन प्रिक टेस्ट या ब्लड आईजीई (IgE) टेस्ट की सलाह देते हैं।

जब तक पित्ती शांत न हो जाए, तब तक अत्यधिक मसालेदार, तला-भुना भोजन, बैंगन, टमाटर, खट्टे फल, फर्मेंटेड फूड (जैसे इडली, डोसा), डिब्बाबंद प्रिजर्वेटिव्स वाले खाद्य पदार्थ और शराब के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए क्योंकि ये हिस्टामाइन को बढ़ाते हैं।

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