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दवा लेने के बाद भी बाल झड़ना बंद नहीं? अंतःस्रावी (रसस्राव) असंतुलन का आयुर्वेदिक समाधान

Information By Dr. Keshav Chauhan

अगर आप बाल झड़ने से रोकने के लिए तरह-तरह के तेल, शैम्पू और दवाइयां आज़मा कर थक चुके हैं और फिर भी कोई फायदा नहीं हो रहा है, तो अब इस पर थोड़ा गहराई से सोचने का वक्त आ गया है। दरअसल, यह सिर्फ स्कैल्प या बालों के ऊपरी पोषण की कमी का मामला नहीं है। जब सारे बाहरी उपाय फेल हो जाएं, तो समझ लीजिए कि असली वजह शरीर के अंदर चल रहा हॉर्मोनल (रसस्राव) असंतुलन है। आयुर्वेद मानता है कि शरीर के अंदरूनी दोष बिगड़ने से बालों की जड़ें कमज़ोर हो जाती हैं। बाहरी चीजें सिर्फ सतह पर काम करती हैं, लेकिन पक्के इलाज के लिए शरीर के अंदर के इस असंतुलन को जड़ से ठीक करना बहुत ज़रूरी है।

लगातार बाल क्यों नहीं झड़ना रुकते: अंतःस्रावी असंतुलन का संबंध

हमारे शरीर में कई तरह की ग्रंथियां हैं, जो खास रस तैयार करती हैं। जब इन रसों का संतुलन गड़बड़ा जाता है, तो बालों की बढ़त का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है। चाहे महिला हों या पुरुष, इन रसों की ज्यादा या कम मात्रा बालों की जड़ों को कमजोर बना देती है। फिर बाल पतले और कमज़ोर हो जाते हैं, उनकी उम्र भी कम हो जाती है। सिर पर कितनी भी महंगी दवाएं या तेल लगा लो, अगर शरीर के अंदर खून के जरिए जड़ों तक इन रसों का सही प्रवाह नहीं पहुंचा, तो बालों का झड़ना नहीं रुकेगा।

बाल झड़ने के प्रकार 

पैटर्न बाल्डनेस – धीरे-धीरे बाल पतले होकर कम होना

एलोपेसिया एरीटा – गोल पैच में अचानक बाल गिरना

टेलोजन एफ्लुवियम स्ट्रेस या कमजोरी से ज़्यादा बाल झड़ना

एनाजेन एफ्लुवियम – दवाइयों के कारण तेज़ी से बाल गिरना

स्कारिंग एलोपेसिया – जड़ें खराब होकर बाल वापस न आना

ट्रैक्शन एलोपेसिया – टाइट हेयरस्टाइल से बाल झड़ना

आयुर्वेद में इसे मुख्य रूप से वात-पित्त असंतुलन से जोड़ा जाता है।

बाल झड़ने के लक्षण और संकेत

 अत्यधिक बालों का गिरना – कंघी करते समय या स्नान के समय गुच्छों में बालों का टूटना।

  बालों का पतला होना – सिर के मध्य भाग या सामने से बालों का घनत्व बहुत कम हो जाना।

 सिर की त्वचा में विकार – खोपड़ी में अत्यधिक रूखापन, रूसी या खुजली का लगातार बने रहना।

  शारीरिक थकान – बिना किसी परिश्रम के हर समय सुस्ती और ऊर्जा का अभाव लगना।

  मासिक चक्र में विकार – महिलाओं में समय पर मासिक धर्म न आना या अत्यधिक पीड़ा होना।

स्वभाव में परिवर्तन – छोटी-छोटी बातों पर क्रोध आना, चिड़चिड़ापन और अकारण चिंता में डूबे रहना।

 नींद में बाधा – रातों की नींद उड़ जाना या बार-बार आंख खुलना।

बाल झड़ने के मुख्य कारण

 अनुचित आहार – अत्यधिक तीखा, खट्टा, नमकीन और बासी भोजन ग्रहण

 करने से पित्त दोष भड़कता है जो बालों को जलाता है।

अत्यधिक मानसिक तनाव – हर समय चिंता और भय में रहने से शरीर के भीतर के रस सूख जाते हैं और ग्रंथियों का कार्य बाधित होता है।

 दूषित जीवनशैली – रात में देर तक जागना और दिनचर्या का अनियमित होना वात दोष को बढ़ाकर बालों की जड़ों को कमज़ोर करता है।

 रसायनों का प्रयोग – बालों पर अत्यधिक कृत्रिम और कठोर रसायनों का लेप करने से रोम छिद्र बंद हो जाते हैं।

  पोषण का अभाव – रक्त में लौह तत्व और अन्य आवश्यक खनिजों की भारी कमी के कारण बालों को भोजन नहीं मिल पाता।

रसस्राव असंतुलन और केश पतन के जोखिम और जटिलताएं

गंजापन - समय रहते उपचार न होने पर सिर के बड़े हिस्से से बालों का पूरी तरह समाप्त हो जाना।

 मानसिक अवसाद – बालों के कम होने से आत्मविश्वास में भारी कमी आती है, जो व्यक्ति को गहरे दुख और चिंता में धकेल देती है।

 प्रजनन क्षमता पर प्रभाव – रसस्राव का यह बिगाड़ केवल बालों तक सीमित नहीं रहता, यह महिलाओं और पुरुषों की संतान उत्पन्न करने की क्षमता को भी क्षीण कर सकता है।

  त्वचा के गंभीर रोग – शरीर में गर्मी और पित्त बढ़ने से मुख पर मुहांसे और त्वचा पर गहरे दाग उत्पन्न होने लगते हैं।

शारीरिक दुर्बलता – आंतरिक तंत्र के बिगड़ने से शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति अत्यंत क्षीण हो जाती है।

आधुनिक चिकित्सा में इस असंतुलन की पहचान कैसे करते हैं?

मॉडर्न मेडिसिन में डॉक्टर सबसे पहले ब्लड टेस्ट करवाते हैं। इन टेस्ट के ज़रिए शरीर के अलग-अलग हॉर्मोन्स, मिनरल्स, आयरन और बाकी ज़रूरी तत्वों की जांच होती है। अगर कोई कमी मिलती है, तो डॉक्टर बाहरी तौर पर सिंथेटिक दवाइयां या गोलियां देना शुरू कर देते हैं। सिर पर लगाने के लिए लोशन भी दिए जाते हैं। लेकिन ये चीजें अक्सर तभी तक असर दिखाती हैं जब तक इनका इस्तेमाल किया जाए, और कई बार इनके साइड इफेक्ट्स भी होते हैं।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार, बाल गिरना मुख्य रूप से हड्डियों (अस्थि धातु) की कमज़ोरी और 'पित्त' दोष बिगड़ने का नतीजा है। बाल हमारी अस्थि धातु का ही बाय-प्रोडक्ट (मल) माने जाते हैं। जब शरीर में पित्त बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह स्कैल्प के रोम छिद्रों को पका देता है, जिससे बाल अपनी जड़ें छोड़ देते हैं। इसके अलावा, वात दोष बढ़ने से बाल रूखे होकर बीच से टूटने लगते हैं। आयुर्वेद सिर्फ बालों पर फोकस नहीं करता, बल्कि यह डाइजेशन (जठराग्नि) को सुधार कर और शरीर के तीनों दोषों (वात, पित्त, कफ) को बैलेंस करके इस समस्या को जड़ से खत्म करने पर जोर देता है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

जीवा आयुर्वेद में बालों के झड़ने को सिर्फ सतही तौर पर नहीं देखा जाता। यहां के वैद्य पहले मरीज की नाड़ी, उसकी प्रकृति और दोषों को ध्यान से जांचते हैं। वो ये समझने की कोशिश करते हैं कि असली वजह क्या है—खराब पाचन, ज्यादा तनाव या गलत खानपान। इसके बाद ऐसी आयुर्वेदिक दवाएं दी जाती हैं जो शरीर के अंदर से रसस्राव को ठीक करें, खून साफ करें और अस्थि धातु को मज़बूत बनाएं। जीवा आयुर्वेद का असली मकसद ये है कि बालों की सेहत के लिए किसी तरह के कृत्रिम इलाज के बजाय, शरीर की अपनी अंदरूनी ताकत को बढ़ाया जाए और बालों की जड़ों को फिर से मजबूत किया जाए।

 बालों के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

  भृंगराज – यह केशों के लिए सर्वोत्तम औषधि है। यह बढ़े हुए पित्त को शांत करता है और बालों को काला तथा घना बनाता है।

  आंवला – इसमें प्रचुर मात्रा में शीतलता और पोषण होता है। यह रक्त को शुद्ध करके बालों की जड़ों को अपार शक्ति देता है।

  ब्राह्मी – यह मानसिक तनाव को पूर्ण रूप से नष्ट करती है और मस्तिष्क को शांति प्रदान कर रसस्राव को संतुलित करती है।

 शतावरी- यह विशेषकर महिलाओं के आंतरिक रसों को समान अवस्था में लाने और शरीर को भीतर से पोषित करने में अत्यंत लाभकारी है।

  जटामांसी - यह निद्रा के विकारों को दूर करती है और मन को स्थिर करके बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकती है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी

जब समस्या बहुत सालों पुरानी हो और खून तक में गर्मी घुल चुकी हो, तो जीवा आयुर्वेद में विरेचन नामक पंचकर्म चिकित्सा की जाती है। यह शरीर की गहरी अंदरूनी सफ़ाई की प्रक्रिया है। इसमें विशेष औषधियों के माध्यम से पेट को साफ़ किया जाता है, जिससे लीवर और आंतों में गहराई तक जमा हुआ सारा खट्टा और दूषित पित्त दस्त के माध्यम से शरीर से हमेशा के लिए बाहर निकल जाता है। इसके अलावा तनाव कम करने के लिए माथे पर तेल की धारा गिराने वाली विधि और शरीर की गर्मी निकालने के लिए विशेष मालिश का भी प्रयोग किया जाता है।

रोगी के लिए सही आहार

  शीतल और मधुर भोजन – पित्त को शांत करने वाले आहार जैसे घृत (घी), दूध और ताज़े फलों का सेवन बढ़ाना चाहिए।

 लौकी और कुष्मांड (पेठा) – ये सब्जियां शरीर की अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालती हैं और पाचन तंत्र को स्निग्धता प्रदान करती हैं।

  नारियल का जल और गिरी – यह बालों के लिए अत्यंत उत्तम है। यह शरीर में शीतलता लाता है और आवश्यक खनिज प्रदान करता है।

  काले तिल और बादाम – इनको रात भर भिगोकर प्रातः चबाकर खाने से अस्थि धातु मज़बूत होती है जिससे बालों को बल मिलता है।

  उष्ण और तीखे पदार्थों का त्याग – अत्यधिक मिर्च-मसाले, अचार, खट्टे फल और बासी भोजन का पूर्ण रूप से त्याग कर देना चाहिए क्योंकि ये पित्त को भड़काते हैं।

जीवा आयुर्वेद में बाल रोगियों की जांच कैसे करते हैं?

जीवा आयुर्वेद के चिकित्सालयों में जांच की प्रक्रिया अत्यंत सघन होती है। वैद्य जी रोगी की संपूर्ण दिनचर्या, खान-पान की आदतों और मानसिक अवस्था की गहन पूछताछ करते हैं। इसके पश्चात नाड़ी परीक्षा के माध्यम से यह ज्ञात किया जाता है कि वात, पित्त या कफ में से कौन सा दोष प्रकुपित है। जिह्वा और नेत्रों की जांच की जाती है। वैद्य यह भी देखते हैं कि रोगी का पाचन कैसा है और उसका मल-मूत्र विसर्जन सुचारू है या नहीं। इसी विस्तृत परीक्षण के पश्चात ही रोग का सही कारण निर्धारित कर व्यक्तिगत रूप से औषधि और आहार का निर्णय लिया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय 

बाल झड़ने की समस्या में ठीक होने का समय हर व्यक्ति के शरीर और समस्या की वजह पर निर्भर करता है। अगर कारण हल्का है, जैसे डाइट या स्ट्रेस, तो 4–6 हफ्तों में बाल झड़ना कम होने लगता है।

अगर हॉर्मोनल असंतुलन या लंबे समय से चल रही समस्या है, तो 2–3 महीने में सुधार दिखता है और 4–6 महीने में अच्छे रिज़ल्ट आने लगते हैं।

आयुर्वेद में इलाज धीरे-धीरे लेकिन जड़ से असर करता है, इसलिए नियमित दवा, सही डाइट और लाइफस्टाइल फॉलो करना बहुत जरूरी है।अगर आप बीच में इलाज छोड़ देते हैं या परहेज नहीं रखते, तो समय और बढ़ सकता है। लगातार देखभाल से बाल फिर से मजबूत और घने बन सकते हैं।

मरीज़ों के अनुभव 

मुझे सालों से बालों के झड़ने की गंभीर समस्या थी। शैम्पू और तेलों से कोई फ़ायदा नहीं हुआ। मैंने आयुर्वेद इलाज लेने के बारे में सोचा, लेकिन मुझे इस पर पूरा भरोसा नहीं था। फिर एक दिन मैंने बालों की समस्याओं पर डॉ. चौहान का टीवी प्रोग्राम देखा और मुझे लगा कि आयुर्वेद सच में फ़र्क ला सकता है—और ऐसा हुआ भी! अब हर सुबह मुझे अपने तकिये पर बाल नहीं दिखते। जीवा को धन्यवाद।

सुनीता तंवर

फ़रीदाबाद

जीवा आयुर्वेद में उपचार और देखभाल की प्रक्रिया

जीवा आयुर्वेद में इलाज बिल्कुल व्यवस्थित और आसान तरीके से होता है, जिससे आपको पूरी तरह निजी और असरदार आयुर्वेदिक अनुभव मिलता है।

पहला कदम—अपनी जानकारी दें: आप हमें कॉल कर सकते हैं, बातचीत की शुरुआत के लिए 0129 4264323 पर सीधे संपर्क करें।

मिलने का समय तय करें: हमारे अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों के साथ अपॉइंटमेंट तय होता है। बातचीत का तरीका आप खुद चुन सकते हैं—

क्लिनिक: जीवा आयुर्वेद के 88 से ज़्यादा क्लिनिक अलग-अलग शहरों में हैं। आपके सबसे नज़दीकी क्लिनिक में जाइये और आमने-सामने डॉक्टर से मिलिये।

वीडियो कॉल—सिर्फ 49 रुपये में: अगर आपके शहर में क्लिनिक नहीं है, तो घर बैठे डॉक्टर से ऑनलाइन वीडियो कॉल पर बात कर सकते हैं। ये सेवा भारी छूट के साथ सिर्फ 49 रुपये में मिलती है (पहले कीमत 299 रुपये थी)। बस 0129 4264323 पर फोन करें और आरा __ म से डॉक्टर से जुड़िए।

मस्या की गहराई से पहचान: हमारे डॉक्टर आपके लक्षण और परेशानी को पूरी तरह समझने की कोशिश करते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुंचा जा सके।

जड़ से इलाज: समस्या पता चलने के बाद, आपके लिए खास इलाज की योजना बनती है, जिसमें प्राकृतिक जड़ी-बूटियों वाली दवाएं दी जाती हैं।

नज़र रखते हैं सुधार पर: हम लगातार संपर्क में रहते हैं और आपके बदलते स्वास्थ्य के हिसाब से इलाज में ज़रूरी बदलाव भी करते हैं।

लोग जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

लोग Jiva Ayurveda पर इस वजह से भरोसा करते हैं, क्योंकि यहाँ सिर्फ लक्षण दबाने का नहीं, बल्कि बीमारी की जड़ तक पहुंच कर इलाज करने का नज़रिया है। सालों से Jiva अपनी अनुभवी डाक्टरों की टीम और व्यक्तिगत इलाज के कारण हज़ारो लोगों की मदद कर रहा है, खासकर श्वसन समस्याओं, बार-बार होने वाली ब्रोंकाइटिस जैसी परेशानियों में।

यहां आयुर्वेद के उस मुख्य सिद्धांत को अपनाया जाता है, जिसमें बीमारी का मूल कारण समझा जाता है। मरीज़ की प्रकृति, उसकी लाइफस्टाइल और उसकी सेहत—हर चीज़ को ध्यान में रखते हुए ही इलाज तय किया जाता है। Jiva का “Ayunique” तरीका यही है कि हर इंसान की ज़रूरत अलग होती है, तो इलाज भी अलग होना चाहिए।

Jiva की थेरेपी सिर्फ दवा देने तक सीमित नहीं रहती। यहां खाने-पीने की सलाह, श्वसन के अभ्यास, लाइफस्टाइल में ज़रूरी बदलाव, और तनाव कम करने के लिए अलग तकनीकें दी जाती हैं। इससे पूरे शरीर और मन का संतुलन बेहतर होता है। यही वजह है कि देश भर के हजारों मरीज़ Jiva Ayurveda की सलाह और इलाज को सबसे ज़्यादा भरोसेमंद मानते आए हैं।

कई मरीज़ों ने खुद माना है कि सिर्फ तीन महीने में ही उन्होंने सेहत में बड़ा बदलाव महसूस किया। लगभग 95% मरीज़ों को इतनी जल्दी फर्क नजर आया, और करीब 88% लोगों को समय के साथ दूसरी दवाएं कम करनी पड़ीं। यही भरोसा Jiva Ayurveda को अलग बनाता है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

अपना इलाज करवाने से पहले खर्च की बात तो हर किसी को जानना चाहिए जीवा आयुर्वेद में, हम सब कुछ साफ-साफ बताते हैं, ताकि आप बिना किसी झंझट के अपने लिए सही इलाज चुन सकें.अगर आपको रेगुलर दवा और डॉक्टर से सलाह चाहिए, तो महीने भर का खर्च करीब ₹3,000 से ₹3,500 के बीच आता है. यह बस एक औसत है — असली रकम आपके केस की गंभीरता और ज़रूरतों पर निर्भर करती है.

अब अगर आप थोड़ा ज़्यादा गहराई से इलाज करवाना चाहते हैं, तो हमारे पास खास पैकेज प्रोटोकॉल मिलते हैं. इनमें सिर्फ दवा और परामर्श ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य सेशन, योग-ध्यान और खानपान सब शामिल रहता है. ऐसे पैकेज का खर्च ₹15,000 से ₹40,000 तक है, जो पूरे 3 से 4 महीने के इलाज को कवर करता है.

कुछ लोगों को तो और भी ज़्यादा ध्यान और देखभाल चाहिए होती है. ऐसे में हमारा जीवाग्राम सेंटर आगे आता है. यहाँ आपको असली पंचकर्म थेरेपी, सात्विक खाना, मॉडर्न ट्रीटमेंट, आरामदायक जगह और और भी कई सुविधाएँ मिलती हैं. सात दिन का स्टे करीब ₹1 लाख का होता है — और आपका बॉडी-माइंड दोनों एकदम रिफ्रेश हो जाता है.

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

  •  जब सिर से बाल गुच्छों के रूप में गिरने लगें और सिर की त्वचा दिखाई देने लगे।
  •  जब बालों का गिरना किसी भी साधारण तेल या लेप से बिल्कुल न रुक रहा हो।
  •  बालों के झड़ने के साथ-साथ अत्यधिक थकान और शरीर में दुर्बलता का अनुभव हो रहा हो।
  •  जब सिर की त्वचा में अत्यधिक खुजली, दाने या किसी प्रकार का संक्रमण उत्पन्न हो गया हो।
  •  महिलाओं में जब बालों के झड़ने के साथ मासिक धर्म में अत्यधिक अनियमितता आ जाए।
  •  जब बालों के गिरने के कारण व्यक्ति गहरे मानसिक तनाव और दुख में डूबने लगे। 

इन अवस्थाओं में विलंब न करते हुए तुरंत योग्य वैद्य से परामर्श लेना चाहिए।

निष्कर्ष

महंगी दवाइयों के बाद भी अगर बाल गिर रहे हैं, तो यह साफ इशारा है कि दिक्कत बाहर नहीं, आपके शरीर के अंदर है। हॉर्मोनल इंबैलेंस, बढ़ा हुआ पित्त और दूषित खून इसके मुख्य कारण हैं। आयुर्वेद के पास इस समस्या का स्थायी और जड़ से इलाज मौजूद है। भृंगराज और आंवला जैसी बेहतरीन जड़ी-बूटियां अपनाकर, सात्विक खाना खाकर और स्ट्रेस-फ्री लाइफस्टाइल जीकर आप अपने शरीर के अंदरूनी सिस्टम को फिर से हेल्दी बना सकते हैं। बाहरी लेप और तेलों पर पैसा बर्बाद करने के बजाय शरीर के अंदर के दोषों को बैलेंस कीजिए, आपके बाल फिर से घने, काले और मज़बूत हो जाएंगे।

FAQs

नहीं, लेकिन अगर लंबे समय तक बाल गिरते रहें तो हॉर्मोनल कारण हो सकता है।

नहीं, शैम्पू सिर्फ बाहर काम करता है, अंदर की समस्या पर असर नहीं करता।

पित्त और वात दोष का बिगड़ना मुख्य कारण माना जाता है।

थोड़ा फर्क हो सकता है, लेकिन हॉर्मोनल असंतुलन दोनों में आम कारण है।

स्ट्रेस से शरीर का बैलेंस बिगड़ता है और बाल गिरने लगते हैं।

भृंगराज, आंवला, ब्राह्मी और शतावरी बहुत मदद करती हैं।

आमतौर पर 2–3 महीने में फर्क दिखने लगता है, लेकिन यह व्यक्ति पर निर्भर करता है।

हाँ, सही खाना बालों की जड़ों को ताकत देता है और झड़ना कम करता है।

नहीं, इससे बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और समस्या बढ़ सकती है।

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