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रोज़ 10,000 कदम चलना ज़रूरी है? नई Research कहती है — "ये नंबर गलत हो सकता है"

Information By Dr. Keshav Chauhan

फिटनेस घड़ियों (Smartwatches) के इस दौर में रोज़ाना '10,000 कदम' चलने का ट्रेंड तेज़ी से फैल गया है। लोग वज़न घटाने के चक्कर में अपनी क्षमता से ज़्यादा चलकर अपने घुटनों और जोड़ों को खराब कर रहे हैं। नई रिसर्च बताती है कि यह नंबर कोई वैज्ञानिक सच नहीं, बल्कि 1960 के दशक की एक पुरानी मार्केटिंग चाल है। आयुर्वेद के अनुसार, हर इंसान की शारीरिक क्षमता अलग होती है। बिना अपनी ताकत को जाने रोज़ाना इतना ज़्यादा चलना शरीर में भयंकर 'वात दोष' (रूखापन) पैदा करता है। इससे जोड़ों की चिकनाई सूखती है और दर्द शुरू हो जाता है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के ज़रिए शरीर की असली ताकत वापस लाता है, ताकि आप बिना डैमेज के सही तरीके से फिट रह सकें।

10,000 कदम चलने का ट्रेंड कैसे शुरू हुआ? फिटनेस का बदलता रूप

आधुनिक फिटनेस विज्ञान और हालिया रिसर्च से यह साफ हो चुका है कि 10,000 कदम का लक्ष्य स्वास्थ्य के लिए कोई जादुई आँकड़ा नहीं है। दरअसल, 1964 के टोक्यो ओलंपिक के दौरान एक जापानी कंपनी ने 'मैनपो-केई' (Manpo-kei) नाम का एक पीडोमीटर (कदम नापने वाला यंत्र) बनाया था, जिसका जापानी में अर्थ '10,000 कदमों का मीटर' होता है। यह सिर्फ एक विज्ञापन था, जो आज नियम बन गया है। आज लोग ऑफिस की थकान के बावजूद वज़न घटाने के लिए रात में भी सड़क पर कदम पूरे करते नज़र आते हैं। जब बिना शरीर की ताकत जाने शरीर को इतना ज़्यादा थकाया जाता है, तो यह माँसपेशियों और घुटनों की गद्दी (Cartilage) पर बहुत खराब असर डालता है। नई रिसर्च कहती है कि स्वस्थ रहने के लिए 7,000 से 8,000 कदम भी पर्याप्त हैं।

ज़रूरत से ज़्यादा चलने पर शरीर में कितनी तरह की बीमारियाँ हो सकती हैं?

लगातार शरीर की क्षमता से अधिक चलने और घुटनों को घिसने से मुख्य रूप से ये बीमारियाँ पैदा होती हैं:

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis): घुटनों का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करने से उनके बीच की गद्दी (Cartilage) घिस जाती है और हड्डियाँ आपस में रगड़ खाने लगती हैं।
  • प्लांटर फैसीसाइटिस (Plantar Fasciitis): रोज़ाना ज़्यादा चलने से पैर के तलवों की नसों में भयंकर सूजन आ जाती है, जिससे सुबह उठते ही एड़ी में ज़ोर का दर्द होता है।
  • शिन स्प्लिंट्स (Shin Splints): पिंडली की हड्डी (Tibia) के आस-पास की माँसपेशियों में सूजन और भयंकर दर्द होना।
  • क्रोनिक फटीग (Chronic Fatigue): नसों और माँसपेशियों के हमेशा थके रहने से शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा (Ojas) पूरी तरह खत्म हो जाती है।

ज़रूरत से ज़्यादा 10,000 कदम चलने पर शरीर द्वारा दिए जाने वाले भयंकर लक्षण

जब आप अपनी क्षमता से ज़्यादा चलते हैं, तो शरीर अंदर से कमज़ोर होने लगता है। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • घुटनों और टखनों में दर्द: सीढ़ियाँ चढ़ते या उतरते समय घुटनों में चुभन और कट-कट की आवाज़ आना।
  • पिंडलियों (Calves) में भयंकर ऐंठन: रात को सोते समय पैरों की नसों का चढ़ जाना और माँसपेशियों में ज़ोर का खिंचाव होना।
  • सुस्ती और नींद की कमी: शरीर इतना ज़्यादा थक जाता है कि रात को दर्द के मारे गहरी नींद नहीं आती और सुबह उठकर भी थकावट रहती है।
  • एड़ियों में भयंकर जलन: चलने के बाद एड़ियों और तलवों में ऐसी जलन होना जैसे आग लग गई हो।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत अपने कदमों की गिनती कम करें और चिकित्सक से परामर्श लें।

10,000 कदम से घुटने और हड्डियां कमज़ोर होने के असली कारण

रोज़ाना बहुत ज़्यादा चलने से शरीर अंदर से कमज़ोर क्यों हो जाता है? इसके मुख्य अंदरूनी कारण इस प्रकार हैं:

  • शरीर में वात का भयंकर प्रकोप: आयुर्वेद के अनुसार, अत्यधिक चलना (अति-व्यायाम) शरीर में वायु (वात दोष) को बहुत तेज़ी से बढ़ाता है। बढ़ा हुआ वात शरीर की नमी और जोड़ों की चिकनाई (Synovial Fluid) को सुखा देता है।
  • कार्टिलेज (Cartilage) का घिसना: वज़न ज़्यादा होने पर जब आप 10,000 कदम चलते हैं, तो घुटनों पर शरीर के वज़न का तीन गुना दबाव पड़ता है, जो कार्टिलेज को छील देता है।
  • पाचक अग्नि का प्रभावित होना: अत्यधिक थकान शरीर की ऊर्जा को सोख लेती है, जिससे मेटाबॉलिज़्म और पाचक अग्नि कमज़ोर पड़ जाती है।
  • विश्राम की कमी: माँसपेशियों को टूटने के बाद रिकवरी (Recovery) के लिए आराम की ज़रूरत होती है, लेकिन रोज़ाना का यह रूटीन उन्हें रिपेयर होने का मौका ही नहीं देता।

कमज़ोर जोड़ों और बढ़े हुए वात को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

घुटनों के घिसने और अति-व्यायाम के साइड इफेक्ट्स को अगर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • घुटने रिप्लेसमेंट (Knee Replacement) की नौबत: कार्टिलेज पूरी तरह खत्म होने पर घुटने स्थायी रूप से खराब हो सकते हैं, जिससे सर्जरी ही एकमात्र उपाय बचता है।
  • लिगामेंट फटना: माँसपेशियाँ कमज़ोर होने के कारण पैरों में मोच आने या लिगामेंट (ACL) फटने का खतरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है।
  • हड्डियों का भुरभुरा होना: वात बढ़ने से 'अस्थि धातु' (Bones) कमज़ोर हो जाती है और उनमें खालीपन (Osteoporosis) आने लगता है।

सही व्यायाम और पैदल चलने पर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आयुर्वेद रोज़ाना 10,000 कदम चलने जैसी किसी भी "वन साइज़ फिट्स ऑल" (One size fits all) थ्योरी को खारिज करता है। आयुर्वेद में व्यायाम का नियम है qa 'बलार्ध व्यायाम' (Balardha Vyayama)। इसका अर्थ है कि हर व्यक्ति को अपनी कुल शारीरिक क्षमता (बल) के केवल आधे हिस्से (अर्ध) तक ही व्यायाम या पैदल चलना चाहिए। जब माथे, काँख (Armpits) और नाक पर पसीना आ जाए और साँस फूलने लगे, तो वहीं रुक जाना चाहिए। आयुर्वेद मानता है कि स्वास्थ्य सिर्फ कदम गिनने से नहीं, बल्कि वात-पित्त-कफ के संतुलन, मज़बूत पाचक अग्नि और सही धातु (Tissues) के निर्माण से आता है।

जीवा आयुर्वेद जोड़ों की ताकत वापस लाने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को दिख रहे सभी लक्षणों, दर्द के समय, और घुटनों की सूजन की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • जीवनशैली का विश्लेषण: मरीज़ का वज़न, रोज़ाना चलने की आदत और आहार को परखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: इन सभी बातों का अच्छे से विश्लेषण करने और कुपित वात दोष को पकड़ने के बाद ही जोड़ों को चिकनाई देने और दर्द खत्म करने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

जोड़ों और हड्डियों को प्राकृतिक रूप से मज़बूत बनाने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में अत्यधिक चलने से पैदा हुए वात को काटने और जोड़ों में नई जान डालने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह थकी हुई माँसपेशियों को प्राकृतिक ताकत देती है और नसों के भयंकर दर्द व वात को शांत करती है।
  • निर्गुण्डी (Nirgundi): आयुर्वेद में इसे जोड़ों के दर्द और सूजन के लिए सबसे बेहतरीन औषधि माना गया है।
  • शल्लकी (Shallaki): यह जड़ी-बूटी घुटनों की घिसी हुई गद्दी (Cartilage) को पोषण देती है और हड्डियों की रगड़ को कम करती है।
  • गुग्गुल (Guggul): यह शरीर में जमे हुए 'आम' को पिघलाता है और हड्डियों (अस्थि धातु) को गहराई से मज़बूत बनाता है।

जमे हुए वात को बाहर निकालने की पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, घुटनों के दर्द और वात दोष को बाहर निकालकर संपूर्ण स्वास्थ्य पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • जानु बस्ती (Janu Basti): घुटनों के दर्द के लिए यह एक अचूक चिकित्सा है। इसमें घुटने के ऊपर उड़द की दाल का घेरा बनाकर उसमें हल्का गर्म औषधीय तेल भरा जाता है। यह तेल वात को शांत करता है और सूखी हुई गद्दी में चिकनाई भरता है।
  • अभ्यंग और स्वेदन: पूरे शरीर की औषधीय तेल से मालिश (अभ्यंग) और भाप (स्वेदन) माँसपेशियों की भयंकर जकड़न को खोलती है और दर्द को शरीर से बाहर खींच लेती है।

वात को शांत करने और जोड़ों को बचाने वाला शुद्ध आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि अत्यधिक चलने से शरीर रूखा होता है, इसलिए डाइट में चिकनाई (Healthy Fats) होना बहुत ज़रूरी है:

क्या खाएँ?

  • शुद्ध गाय का घी: रोज़ाना अपने खाने में गाय का घी ज़रूर शामिल करें। यह वात को कंट्रोल करता है और जोड़ों को ग्रीस (Lubrication) देता है।
  • गर्म और सुपाच्य भोजन: पुराने चावल, मूंग की दाल और हल्का गर्म खाना खाएँ। हल्दी और मेथी दाना का इस्तेमाल बढ़ाएँ।
  • दूध और बादाम: रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध और सुबह भीगे हुए बादाम हड्डियों को ताकत (कैल्शियम) देते हैं।

क्या न खाएँ?

  • रूखी और ठंडी चीज़ें: आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, और फ्रिज का ठंडा पानी बिल्कुल बंद कर दें, ये वात को भड़काते हैं।
  • गैस बनाने वाली दालें: राजमा, छोले, मटर और चने का अत्यधिक सेवन न करें, ये आँतों में गैस बनाकर जोड़ों का दर्द बढ़ाते हैं।
  • बासी और जंक फूड: पिज़्ज़ा, बर्गर, और बासी खाना शरीर में 'आम' (Toxins) बनाता है, जो जोड़ों में सूजन पैदा करता है।

जीवा आयुर्वेद में रोगी की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ ऊपर-ऊपर से दर्द पूछकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, थकान के स्तर और चलने पर होने वाले दर्द को आराम से सुना जाता है।
  • आपके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे पेनकिलर (Painkillers) की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके रोज़ाना कदम चलने की आदत और पानी पीने के तरीके को गहराई से समझा जाता है।
  • आपकी नींद, मानसिक तनाव और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति (विशेषकर वात प्रकृति) को जाना जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में जोड़ों के दर्द का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर घुटनों में दर्द की अभी शुरुआत है, तो सही विश्राम और वातनाशक दवाइयों से 4 से 6 हफ्तों में ही सूजन कम होने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर कार्टिलेज घिस चुका है और सालों से दर्द है, तो जोड़ों को पूरी तरह ताकतवर (Regenerate) होने में 4 से 8 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर वात-शामक आहार का कड़ाई से पालन करता है और अति-व्यायाम से बचता है, तो भविष्य में पेनकिलर के बिना भी घुटने मज़बूत रहते हैं।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक फिटनेस के नियम और आयुर्वेदिक व्यायाम में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक फिटनेस आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य एक जैसे फिटनेस टारगेट (जैसे 10,000 कदम) और अधिकतम थकान तक एक्सरसाइज़ ‘बलार्ध व्यायाम’ के सिद्धांत से शरीर को संतुलित और ऊर्जावान बनाना
नज़रिया शरीर को केवल कैलोरी, स्टेप्स और मसल्स के आंकड़ों से देखना शरीर की प्रकृति (वात-पित्त-कफ) के अनुसार व्यक्तिगत दृष्टिकोण अपनाना
उपचार तरीका “No pain, no gain” के आधार पर ओवर-एक्सर्शन (अत्यधिक मेहनत) संतुलित व्यायाम, पसीना निकालना और शरीर को हल्का व सक्रिय रखना
डाइट और लाइफस्टाइल जनरल फिटनेस रूटीन, जिसमें व्यक्तिगत प्रकृति का ध्यान कम दिनचर्या, ऋतुचर्या और प्रकृति के अनुसार एक्सरसाइज़ व जीवनशैली
लंबा असर ओवरट्रेनिंग से थकान, कमजोरी और समय से पहले एजिंग शरीर की ताकत को सुरक्षित रखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा और संतुलन

जोड़ों में दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह कब लें?

कदम गिनने के ट्रेंड के दौरान अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

निष्कर्ष: 

आयुर्वेद के हिसाब से रोज़ाना 10,000 कदम चलने की ज़िद शरीर में वात दोष बढ़ाने, कार्टिलेज को घिसने और पाचक अग्नि को कमज़ोर करने का सबसे बड़ा कारण है। अप्राकृतिक तरीके से अपनी क्षमता से ज़्यादा चलने से शरीर में रूखापन आता है जो भयंकर दर्द पैदा करता है। सिर्फ कदम गिन लेने से फिटनेस नहीं आती। इलाज में वात की शुद्धि, अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियाँ और व्यायाम के सही नियमों का पालन सबसे ज़्यादा आवश्यक है, जिससे आपके जोड़ों की असली ताकत बिना किसी पेनकिलर के जीवन भर बनी रहे।

FAQs

बिल्कुल नहीं। नई रिसर्च और आयुर्वेद के अनुसार, अगर आप सही डाइट (पाचक अग्नि के अनुसार) ले रहे हैं, तो 6,000 से 8,000 कदम चलना भी वज़न कम करने और फिट रहने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है।

हाँ, अगर आपका वज़न ज़्यादा है या आप बहुत सख्त सतह (Concrete road) पर रोज़ाना मीलों चलते हैं, तो घुटनों पर दबाव पड़ने से कार्टिलेज तेज़ी से घिसने लगता है।

आयुर्वेद 'बलार्ध व्यायाम' की सलाह देता है। जब आपके माथे, नाक और काँख (Armpits) में पसीना आ जाए और साँस भारी होने लगे, तो वहीं रुक जाना चाहिए। यही आपकी असली क्षमता है।

हाँ, आयुर्वेद के अनुसार ज़्यादा पैदल चलना 'रुक्ष' (रूखा) और 'चल' गुण वाला होता है, जो सीधे तौर पर शरीर में वायु (वात) को भड़काता है, जिससे दर्द और जकड़न होती है।

जोड़ों के दर्द में शुद्ध गाय का घी, मेथी दाना, लहसुन, और सोंठ का पानी बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि ये वात को शांत करते हैं और जोड़ों में चिकनाई लाते हैं।

नहीं, स्मार्टवॉच एक मशीन है जो आपकी शारीरिक प्रकृति (वात, पित्त, कफ) और कमज़ोरियों को नहीं जानती। अपनी सेहत का फैसला मशीन के नंबरों के बजाय शरीर के संकेतों पर छोड़ें।

ज़्यादा चलने से माँसपेशियों में लैक्टिक एसिड (Lactic Acid) जमा हो जाता है और वात बढ़ने से नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे पिंडलियों में भयंकर ऐंठन और दर्द होता है।

बिल्कुल नहीं। आयुर्वेद के अनुसार रात के खाने के बाद सिर्फ 100 कदम (शतपावली) चलना चाहिए। भारी व्यायाम या ज़्यादा चलने से वात बिगड़ता है और नींद उड़ जाती है।

आयुर्वेद में घुटनों के दर्द और वात को शांत करने के लिए 'महानारायण तेल' या 'तिल के तेल' की हल्की मालिश सबसे ज़्यादा असरदार मानी गई है।

हाँ, जीवा आयुर्वेद में जानु बस्ती, सही जड़ी-बूटियों (अश्वगंधा, निर्गुण्डी) और आहार के नियमों का पालन करके वात दोष को जड़ से संतुलित किया जा सकता है और दर्द पूरी तरह खत्म हो सकता है।

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