आपने अक्सर अपने आस-पास के लोगों या शायद घर के बुजुर्गों को यह कहते सुना होगा कि उनके पैरों में सुइयां जैसी चुभती हैं। कई बार लोग बताते हैं कि उन्हें पैरों में चींटियां चलने जैसा अहसास होता है,या फिर पैर अचानक सुन्न पड़ जाते हैं ,आम बोलचाल में हम इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन मेडिकल भाषा में इसे 'नर्व पेन' (Nerve Pain) या न्यूरोपैथी कहा जाता है।
जब यह समस्या लगातार बनी रहती है और आप डॉक्टर के पास जाते हैं, तो आमतौर पर डॉक्टर आपको दो टेस्ट करवाने के लिए कहते हैं। पहला, ब्लड शुगर (Diabetes) की जाँच और दूसरा, शरीर में विटामिन B12 (Vitamin B12) का स्तर। अब सवाल यह उठता है कि नसों के दर्द से इन दोनों चीजों का क्या लेना-देना है? डायबिटीज तो शुगर की बीमारी है और B12 एक विटामिन है, तो ये दोनों नसों के दर्द में एक साथ कैसे जुड़ जाते हैं? सच्चाई यह है कि इन दोनों का एक-दूसरे से और हमारी नसों से बहुत गहरा रिश्ता है। आइए इस पूरे फंडे को बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।
नसों का दर्द (Nerve Pain)
हमारे शरीर में नसों (Nerves) का एक बहुत बड़ा और बारीक जाल बिछा हुआ है। आप इसे अपने घर की बिजली की वायरिंग की तरह समझ सकते हैं। इनका काम है दिमाग से मैसेज लेकर शरीर के हर हिस्से तक पहुँचाना और वहां से सिग्नल वापस दिमाग तक लाना।
सोचिए अगर किसी बिजली के तार के ऊपर की प्लास्टिक की कोटिंग (इंसुलेशन) छिल जाए या तार अंदर से कमज़ोर हो जाए, तो क्या होगा? उसमें स्पार्किंग होने लगेगी या करंट गलत जगह पास होगा। बिल्कुल ऐसा ही हमारी नसों के साथ होता है। जब नसें अंदर से डैमेज हो जाती हैं, तो वो दिमाग को गलत सिग्नल भेजने लगती हैं। इसी वजह से बिना किसी चोट या कारण के भी हमें तेज़ दर्द, जलन, झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होता है।
डायबिटीज कैसे बन जाता है नसों का दुश्मन?
अब बात करते हैं डायबिटीज की, जिसे हम आम तौर पर शुगर कहते हैं। जब किसी व्यक्ति के खून में शुगर का लेवल लंबे समय तक कंट्रोल से बाहर रहता है, तो यह नसों के लिए एक तरह के धीमे जहर का काम करता है।
नसों को सही तरीके से काम करने के लिए लगातार ऑक्सीजन और पोषण की ज़रूरत होती है। यह पोषण उन्हें बहुत ही बारीक खून की नलियों (blood vessels) के जरिए मिलता है। हाई ब्लड शुगर इन छोटी-छोटी नलियों को अंदर से डैमेज कर देता है। जब नसों तक खून और ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुँच पाता, तो वे कमज़ोर पड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे डैमेज होने लगती हैं। मेडिकल की भाषा में इसे 'डायबिटिक न्यूरोपैथी' (Diabetic Neuropathy) कहते हैं। अक्सर इसकी शुरुआत पैरों के निचले हिस्से से होती है और यह धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ती है।
विटामिन B12: हमारी नसों का 'सुरक्षा कवच'
अब कहानी में एंट्री होती है विटामिन B12 की। यह एक ऐसा जरूरी पोषक तत्व है जो हमारा शरीर खुद नहीं बना सकता, इसलिए हमें इसे अपने खान-पान (जैसे दूध, दही, अंडे, मांस) या सप्लीमेंट्स के जरिए लेना पड़ता है।
हमारी नसों की सुरक्षा के लिए विटामिन B12 सबसे अहम है। नसों के ऊपर एक परत होती है, जिसे 'मायलीन शीथ' (Myelin sheath) कहा जाता है। यह बिल्कुल उसी तरह काम करती है जैसे तार पर प्लास्टिक का कवर। विटामिन B12 का मुख्य काम इसी मायलीन शीथ को मज़बूत बनाए रखना है।
अगर शरीर में विटामिन B12 की कमी हो जाए, तो नसों के ऊपर का यह सुरक्षा कवच कमज़ोर होकर हटने लगता है। बिना इस कवर के नसें ठीक से काम नहीं कर पातीं और डैमेज होने लगती हैं, जिससे भयंकर नर्व पेन शुरू हो जाता है।
शुगर की दवा और B12 का सीधा कनेक्शन
डायबिटीज से नसें खराब होती हैं और B12 की कमी से भी। लेकिन इन दोनों के बीच एक और कड़ी है, जो इस समस्या को कई गुना बढ़ा देती है।
अगर किसी को टाइप-2 डायबिटीज है, तो दुनिया भर में सबसे पहली और आम दवा जो डॉक्टर लिखते हैं, वह है मेटफॉर्मिन (Metformin)। यह दवा ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए बेहतरीन और सुरक्षित मानी जाती है। लेकिन इसका एक पहलू ऐसा है जिस पर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता।
जब कोई मरीज़ कई सालों तक लगातार मेटफॉर्मिन दवा खाता है, तो यह दवा हमारे पेट और आंतों में विटामिन B12 के सोखने (Absorption) की प्रक्रिया को धीमा कर देती है। इसका मतलब यह है कि अगर आप अच्छा खाना खा भी रहे हैं, तब भी आपके शरीर को पूरा विटामिन B12 नहीं मिल पाता। कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि लंबे समय तक मेटफॉर्मिन लेने वाले मरीज़ों में विटामिन B12 की भारी कमी हो जाती है।
जब डायबिटीज और B12 की कमी एक साथ हमला करें (The Double Impact)
अब आप खुद सोचिए कि एक डायबिटीज के मरीज़ पर क्या बीतती होगी। एक तो पहले से ही हाई शुगर उसकी नसों को कमज़ोर कर रहा है, और ऊपर से दवा की वजह से शरीर में B12 कम हो गया है, जिससे नसों का सुरक्षा कवच भी छिन गया। यह नसों पर एक दोहरी मार है।
जब ये दोनों स्थितियां एक साथ मिलती हैं, तो शरीर में कुछ ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं जिन्हें बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए
- भयंकर जलन और दर्द: पैरों के तलवों में लगातार ऐसी जलन महसूस होना जैसे पैर आग के पास रखे हों। यह दर्द अक्सर रात के समय ज्यादा बढ़ जाता है और नींद हराम कर देता है।
- सुन्नपन (Numbness): पैरों का सुन्न हो जाना। मरीज़ को ऐसा लगता है जैसे उसने मोटे मोजे पहने हुए हैं। कई बार पैर जमीन पर रखने का अहसास तक नहीं होता।
- घाव का पता न चलना: डायबिटीज के मरीज़ों के लिए यह सुन्नपन बहुत खतरनाक है। अगर पैर में कंकड़ चुभ जाए या जूता काट ले, तो दर्द महसूस नहीं होता। बाद में यही छोटा सा घाव एक भयंकर इन्फेक्शन (Ulcer) का रूप ले लेता है।
- बैलेंस बिगड़ना: नसों के डैमेज होने से शरीर का बैलेंस बिगड़ने लगता है। चलते-चलते अचानक लड़खड़ा जाना या चक्कर आना आम हो जाता है।
- हद से ज्यादा थकान: विटामिन B12 की कमी सिर्फ नसों को ही नहीं, बल्कि खून को भी प्रभावित करती है, जिससे हर समय कमज़ोरी और थकान छाई रहती है।
इस दोहरी मार से बचने के असरदार तरीके
क्या नसों का डैमेज होना तय है? बिल्कुल नहीं। अगर सही समय पर कुछ जरूरी कदम उठाए जाएं, तो आप अपनी नसों को डैमेज होने से बचा सकते हैं और नर्व पेन से छुटकारा पा सकते हैं। इसके लिए आपको ये सावधानियां बरतनी होंगी:
- समय-समय पर टेस्ट करवाएं: अगर आपको डायबिटीज है और आप मेटफॉर्मिन (Metformin) ले रहे हैं, तो साल में कम से कम एक बार अपना 'विटामिन B12' और 'HbA1c' (पिछले 3 महीने का शुगर लेवल) जरूर चेक करवाएं।
- डॉक्टर से खुलकर बात करें: अगर टेस्ट में B12 कम आता है, तो घबराएं नहीं और न ही अपनी शुगर की दवा खुद बंद करें। डॉक्टर आपको इसके साथ विटामिन B12 की गोलियाँ या ज़रूरत पड़ने पर इसके इंजेक्शन दे सकते हैं।
- शुगर को कंट्रोल में रखें: नसों को बचाने का सबसे पक्का इलाज यही है कि आपका ब्लड शुगर हमेशा कंट्रोल में रहे। इसके लिए अपनी डाइट सही रखें, रोज वॉक करें और दवाइयाँ समय पर लें।
- डाइट पर फोकस करें: अपने खाने में B12 वाली चीजें शामिल करें। चूंकि शाकाहारी खाने में B12 कम होता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह पर फोर्टिफाइड फूड (जिनमें अलग से विटामिन मिलाए जाते हैं) या सप्लीमेंट्स का सहारा लेना एक समझदारी भरा कदम है।
- पैरों की खास देखभाल (Foot Care): डायबिटीज के मरीज़ों को अपने पैरों की देखभाल अपने चेहरे से भी ज्यादा करनी चाहिए। रोज रात को पैर धोएं, उन्हें अच्छे से सुखाएं और चेक करें कि कहीं कोई खरोंच या घाव तो नहीं है। हमेशा आरामदायक जूते पहनें।
Nerve Pain में Diabetes और B12 का कनेक्शन: क्या कहता है आयुर्वेद?
मॉडर्न साइंस जिसे 'डायबिटिक न्यूरोपैथी' और 'विटामिन B12 की कमी' के कारण होने वाला नसों का दर्द (Nerve Pain) कहता है, हमारा प्राचीन आयुर्वेद उसे 'वात व्याधि' और 'मज्जा धातु क्षय' के नज़रिए से देखता है। आइए समझते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार पैरों की झनझनाहट और इस दर्द के पीछे का असली खेल क्या है।
वात दोष और नसों का दर्द
आयुर्वेद में 'वात दोष' को हमारे नर्वस सिस्टम का राजा माना गया है। शरीर में सिग्नल्स का आना-जाना वात के कारण ही होता है। वात का स्वभाव रूक्ष (सूखा) होता है। जब शरीर में वात असंतुलित होकर बढ़ जाता है, तो यह नसों में भयंकर सूखापन पैदा कर देता है। इसी वजह से पैरों में सुई चुभने जैसा दर्द, जलन और सुन्नपन महसूस होता है।
मधुमेह (Diabetes) और धातु क्षय
आयुर्वेद के अनुसार, लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर शरीर की धातुओं (विशेषकर नसों को पोषण देने वाली मज्जा धातु) को अंदर से खोखला करने लगता है। इसे 'धातु क्षय' कहा जाता है। जैसे ही धातुएं कमज़ोर होती हैं, नसों के सूक्ष्म रास्तों में रुकावट आती है, जहां बढ़ा हुआ वात कब्ज़ा कर लेता है और दर्द को कई गुना बढ़ा देता है।
B12 की कमी: मंद जठराग्नि का परिणाम
मॉडर्न साइंस के मुताबिक नसों के ऊपर 'मायलीन शीथ' नाम का सुरक्षा कवच होता है, जिसे विटामिन B12 मज़बूत रखता है। आयुर्वेद में इसे मज्जा धातु की स्निग्धता (चिकनाई) कहते हैं। जब डायबिटीज के मरीज़ सालों तक शुगर की भारी दवाएं (जैसे मेटफॉर्मिन) खाते हैं, तो उनकी 'जठराग्नि' (पाचन अग्नि) कमज़ोर हो जाती है। नतीजा यह होता है कि शरीर भोजन से विटामिन B12 सोख नहीं पाता, जिससे नसों का सुरक्षा कवच गायब हो जाता है।
आयुर्वेद के आसान और सटीक उपाय
इस दर्द को केवल दबाने के बजाय, आयुर्वेद नसों को अंदर से दोबारा जिंदा करने के लिए ये उपाय बताता है:
- शुद्ध देसी गाय का घी: खाने में घी का इस्तेमाल नसों के सूखेपन को दूर कर B12 के अवशोषण को बेहतर बनाता है।
- पैरों की मालिश (अभ्यंग): रोज रात को तलवों की गुनगुने तिल के तेल या महानारायण तेल से मालिश करने से बढ़ा हुआ वात तुरंत शांत होता है।
- दिव्य औषधियां: डॉक्टर की सलाह से अश्वगंधा और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों का सेवन करें, जो नसों को सीधा पोषण और बल देती हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है कि (Nerve Pain) को सिर्फ दर्द निवारक गोलियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। आधुनिक विज्ञान हमें आगाह करता है कि शुगर की दवाएं शरीर से विटामिन B12 को सोख रही हैं, और हमारा आयुर्वेद समझाता है कि इसी कारण नसों का 'वात' बिगड़ रहा है और उनकी प्राकृतिक नमी खत्म हो रही है।
समाधान बहुत सीधा है अगर आप अपनी नसों को हमेशा के लिए डैमेज होने से बचाना चाहते हैं, तो दोनों पैथियों (Modern Science और Ayurveda) का बेहतरीन तालमेल अपनाएं। अपनी शुगर को कंट्रोल में रखें, समय-समय पर B12 की जाँच करवाएं और साथ ही अपनी दिनचर्या में कुछ साधारण आयुर्वेदिक बदलाव करें।
References
https://www.who.int/india/health-topics/diabetes?utm_source
















