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Stress से बाल झड़ना, Acidity, Period बिगड़ना - एक जड़ की कई शाखाएँ

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 26 May, 2026
  • category-iconUpdated on 12 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
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Stress से बाल झड़ना, Acidity, Period बिगड़ना - एक जड़ की कई शाखाएँ

हम सबने अपनी ज़िंदगियों में कभी न कभी ऐसा महसूस किया होगा जब सब कुछ नियंत्रण से बाहर लगता है। ऑफिस का टारगेट, घर की जिम्मेदारियाँ, रिश्तों की उलझनें - ये सब मिलकर एक ऐसा बोझ बना देते हैं जिसे हम दिन-रात ढोते हैं। हम इस बोझ को 'स्ट्रेस' का नाम देकर अपनी रूटीन का हिस्सा मान लेते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब आपका दिमाग लगातार इस स्ट्रेस के अलार्म को बजाता रहता है, तो आपके शरीर के अंदर क्या गुज़र रही होती है? जब आप रात को चैन की नींद नहीं सो पाते, तो केवल आपकी आँखें ही नहीं थकतीं, बल्कि आपका पूरा सिस्टम एक साइलेंट शॉक में चला जाता है। अचानक से बालों का गिरना, खाना खाने के बाद जलन होना और पीरियड्स का साइकिल बिगड़ जाना - ये कोई अलग-अलग बीमारियाँ नहीं हैं, बल्कि ये आपके अंदर चल रहे उसी एक अलार्म की गूंज हैं जिसे आप 'स्ट्रेस' समझकर इग्नोर कर रहे हैं।

स्ट्रेस से शरीर के अलग-अलग हिस्सों में अचानक बीमारियाँ क्यों फूटने लगती हैं?

स्ट्रेस केवल एक मानसिक अवस्था नहीं है। जब आपका शरीर लगातार एक 'फाइट या फ्लाइट' (Fight or Flight) मोड में रहता है, तो आपके एँडोक्राइन और नर्वस सिस्टम में ये बदलाव होने लगते हैं:

  • कॉर्टिसोल (Cortisol) का अटैक: जब आप स्ट्रेस में होते हैं, तो शरीर कॉर्टिसोल नामक हॉर्मोन रिलीज़ करता है। यह हॉर्मोन शरीर के गैर-ज़रूरी फंक्शन्स (जैसे बालों का उगना और प्रजनन) को तुरंत रोक देता है। इसी वजह से स्ट्रेस में बाल अपनी ग्रोथ फेज़ से निकलकर झड़ने वाले फेज़ (Telogen Effluvium) में चले जाते हैं।
  • वेगस नर्व (Vagus Nerve) का शटडाउन: यह नस आपके दिमाग को आपके पाचन तंत्र से जोड़ती है। जब स्ट्रेस हावी होता है, तो यह नस पाचन की गति को रोक देती है। पेट में एसिड बनता रहता है लेकिन खाना आगे नहीं बढ़ता, जिससे एसिडिटी (Acidity) और गले में खराश होने लगती है।
  • हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी-ओवेरियन (HPO) एक्सिस का क्रैश: महिलाओं में स्ट्रेस सीधा दिमाग के उस हिस्से को हिट करता है जो ओवरीज़ (Ovaries) को कंट्रोल करता है। स्ट्रेस के कारण हॉर्मोन्स का सिग्नल टूट जाता है, जिससे मासिक धर्म की समस्याएँ शुरू हो जाती हैं और पीरियड्स या तो मिस हो जाते हैं या बहुत दर्दनाक होते हैं।

स्ट्रेस से होने वाली ये शारीरिक समस्याएँ किन प्रकारों की हो सकती हैं?

स्ट्रेस का असर हर इंसान के शरीर पर एक जैसा नहीं होता। आपका सबसे कमज़ोर अंग कौन सा है, उसके आधार पर यह स्ट्रेस आपको इन अलग-अलग रूपों में अपना शिकार बना सकता है:

  • मेटाबॉलिक और एँडोक्राइन स्ट्रेस: इसमें स्ट्रेस सीधे आपके हॉर्मोन्स को हिट करता है। वज़न का बढ़ना (खासकर पेट के आस-पास), थायराइड का काम धीमा होना और पीसीओडी (PCOD) जैसी समस्याएँ उभरने लगती हैं।
  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (GI) स्ट्रेस: इसमें इंसान का पेट ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है। उसे हर वक्त एसिडिटी, सूखी खाँसी (एसिड रिफ्लक्स के कारण) या बार-बार स्टूल जाने की समस्या (IBS) होने लगती है।
  • डर्मेटोलॉजिकल (Skin/Hair) स्ट्रेस: इसमें शरीर का अंदरूनी स्ट्रेस बाहर दिखाई देने लगता है। बालों का गुच्छों में झड़ना, त्वचा पर अचानक सोरियासिस या खुजली वाले चकत्ते आना इसके मुख्य लक्षण हैं।

शरीर के किन खामोश संकेतों से पहचानें कि स्ट्रेस आपकी मशीनरी को डैमेज कर रहा है?

स्ट्रेस एक खामोश हत्यारा (Silent Killer) है। जब यह आपके अंगों को खोखला कर रहा होता है, तो शरीर कुछ ऐसे अलार्म बजाता है जिन्हें कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए:

  • थकावट और नींद न आना: रात भर बिस्तर पर करवटें बदलना और सुबह उठने पर भी शरीर में क्रोनिक फटीग महसूस होना। यह दिखाता है कि आपका शरीर रेस्ट मोड में जा ही नहीं पा रहा है।
  • जबड़े और गर्दन में जकड़न: स्ट्रेस के कारण रात को दांत पीसना (Bruxism) और उठने पर गर्दन और कंधों में जकड़न महसूस होना।
  • अचानक दिल की धड़कन का तेज़ होना: बैठे-बैठे अचानक अकारण एँग्जायटी महसूस होना और दिल की धड़कन का इतनी तेज़ हो जाना मानो कोई पैनिक अटैक (Panic Attack) आने वाला हो।
  • लगातार सिर में भारीपन (Brain Fog): चीज़ों पर फोकस न कर पाना, छोटी-छोटी बातें भूल जाना और हमेशा दिमाग पर एक ब्रेन फॉग जैसी धुंध छाई रहना।

इन लक्षणों को दूर करने के चक्कर में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

स्ट्रेस से उपजी इन समस्याओं (बाल झड़ना, एसिडिटी) को देखकर लोग अक्सर ऐसी गलतियाँ करते हैं जो बीमारी को और उलझा देती हैं:

  • लक्षणों का अलग-अलग इलाज: बालों के लिए महंगा केमिकल लोशन, एसिडिटी के लिए एँटासिड (Antacid) और पीरियड्स के लिए हॉर्मोनल पिल्स (Hormonal Pills) खाना। इससे असल जड़ (स्ट्रेस) वहीं रहती है और गोलियों का साइड-इफेक्ट लिवर को डैमेज कर देता है।
  • नींद की गोलियों (Sleeping Pills) की लत: नींद न आने पर बिना डॉक्टर की सलाह के रोज़ाना नींद की गोलियाँ खाना। ये गोलियाँ नर्वस सिस्टम को कुछ देर के लिए 'सुन्न' कर देती हैं, जिससे शरीर का नेचुरल स्लीप साइकिल पूरी तरह तबाह हो जाता है।
  • कैफीन और स्मोकिंग का सहारा: स्ट्रेस और सुस्ती को कम करने के लिए दिन भर डार्क कॉफी पीना या सिगरेट का सहारा लेना। कैफीन एसिडिटी को बढ़ाता है और वात को भड़काकर नसों को सुखा देता है।

आयुर्वेद स्ट्रेस और इन 'मल्टीपल बीमारियों' के कनेक्शन को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे 'स्ट्रेस सिंड्रोम' कहता है, आयुर्वेद उसे शरीर में 'प्राण वात' के प्रकोप, जठराग्नि की विकृति और 'ओजस' के क्षय के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है:

  • प्राण वात का भड़कना: हमारे दिमाग और नर्वस सिस्टम को 'प्राण वात' कंट्रोल करता है। जब अत्यधिक स्ट्रेस के कारण वात दोष भड़कता है, तो यह शरीर के बाकी सभी दोषों को भी अपनी जगह से हिला देता है, जिससे पूरी मशीनरी डिस्टर्ब हो जाती है।
  • अग्निमांद्य और पित्त का प्रकोप: स्ट्रेस का सीधा असर जठराग्नि पर पड़ता है। जब वात के कारण पाचन रुकता है, तो पेट का एसिड (पित्त) ऊपर की ओर उछलता है (उर्ध्वग अम्लपित्त), जिससे एसिडिटी होती है।
  • रस और आर्तव धातु का सूखना: स्ट्रेस के कारण शरीर में 'रस धातु' (Plasma) सूखने लगती है। रस के सूखने से न तो बालों को पोषण मिलता है और न ही गर्भाशय (आर्तव धातु) को, जिससे बाल झड़ते हैं और पीरियड्स रुक जाते हैं।

स्ट्रेस को कम करने और वात-पित्त को शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने दिमाग और शरीर के इस अलार्म को बंद करने के लिए आपको अपनी डाइट से 'वात' (रूखापन) और 'पित्त' (गर्मी) बढ़ाने वाले पदार्थों को तुरंत हटाना होगा। यह आयुर्वेदिक डाइट आपके लिए एक प्राकृतिक रिलैक्सेंट (Relaxant) का काम करेगी:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - स्ट्रेस और एसिडिटी कम करने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - वात और एसिड बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, दलिया, ओट्स (दूध के साथ), मूंग दाल की खिचड़ी। मैदा, वाइट ब्रेड, बासी रोटियां, पैकेटबंद नूडल्स।
पेय पदार्थ (Beverages) रात को गुनगुना दूध (हल्दी या घी के साथ), धनिया-जीरे का पानी, सौंफ का पानी। अत्यधिक डार्क कॉफी, स्ट्रॉन्ग चाय, शराब, कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक्स।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (दिमाग और नसों के लिए सबसे बड़ा अमृत), बादाम रोगन। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा डीप-फ्राइड चीज़ें, बाज़ार के ट्रांस फैट्स।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, परवल (सभी अच्छी तरह पकी और घी में छौंकी हुई)। कच्चा सलाद भारी मात्रा में (विशेषकर रात में), खट्टे टमाटर, तीखी लाल मिर्च।
फल (Fruits) पपीता, उबला हुआ सेब (Stewed Apple), मीठे अनार, रात भर भीगी हुई मुनक्का। खट्टे फल (कच्चा नींबू, संतरा), बिना मौसम के कोल्ड स्टोरेज वाले फल।

हॉर्मोन्स को सुधारने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई दिव्य मेध्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के आपके दिमाग को शांत करते हैं और स्ट्रेस के कारण हुए शारीरिक डैमेज को रिवर्स करते हैं:

  • अश्वगंधा: यह दुनिया का सबसे बेहतरीन एडैप्टोजेन (Adaptogen) है। यह शरीर के स्ट्रेस हॉर्मोन (कॉर्टिसोल) को घटाता है, नर्वस सिस्टम को फौलादी बनाता है और नींद पूरी न होना जैसी समस्याओं को जड़ से मिटाता है।
  • ब्राह्मी: जब स्ट्रेस के कारण बाल भयंकर रूप से झड़ रहे हों और दिमाग में हर वक्त विचारों की आंधी चल रही हो, तो ब्राह्मी दिमाग को कूलिंग इफ़ेक्ट (Cooling effect) देती है और हेयर फॉल को तुरंत रोकती है।
  • शतावरी: स्ट्रेस के कारण जब महिलाओं के पीरियड्स रुक जाते हैं या हॉर्मोनल असंतुलन हो जाता है, तो शतावरी एक बेहतरीन प्राकृतिक फाइटोएस्ट्रोजन (Phytoestrogen) के रूप में गर्भाशय को पोषण देकर साइकिल को वापस पटरी पर लाती है।
  • गिलोय: यह शरीर से भारी टॉक्सिन्स (आम) को पिघलाने और लिवर को शांत करने के लिए लाभदायक  रसायन है। यह स्ट्रेस के कारण होने वाली एसिडिटी और सीने की जलन को खत्म करती है।

स्ट्रेस (Stress) और वात को जड़ से उखाड़ने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और स्ट्रेस शरीर में बहुत गहराई तक जम चुका हो और केवल डाइट से आराम न मिल रहा हो, तो पंचकर्म की ये क्लासिकल थेरेपीज़ शरीर को तुरंत डिकंप्रेस कर देती हैं:

  • शिरोधारा थेरेपी: स्ट्रेस और एँग्जायटी के लिए यह सबसे अचूक आयुर्वेदिक चिकित्सा है। सिर के मध्य भाग (आज्ञा चक्र) पर गुनगुने औषधीय तेल की लगातार धार गिराने से नर्वस सिस्टम तुरंत शांत होता है और कॉर्टिसोल का स्तर तेज़ी से नीचे आता है।
  • अभ्यंग मालिश: वात दोष को शांत करने और शरीर की जकड़न (खासकर गर्दन और कंधों) को खोलने के लिए शुद्ध औषधीय तेलों (जैसे क्षीरबला तेल) से पूरे शरीर की डीप-टिशू मालिश की जाती है।
  • विरेचन थेरेपी: शरीर से दूषित पित्त और स्ट्रेस के कारण बने एसिड को मल के रास्ते बाहर निकालने के लिए लिवर की यह डीप-क्लीनिंग की जाती है, जो एसिडिटी का स्थायी इलाज है।
  • नस्य थेरेपी: आयुर्वेद में नासिका को सिर का द्वार माना गया है। नाक में अणु तेल की बूंदें डालने से यह सीधे मस्तिष्क के केंद्रों को पोषण देता है और प्राण वात को तुरंत शांत करता है।

नर्वस सिस्टम और मेटाबॉलिज़्म के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

सालों के क्रोनिक स्ट्रेस से डैमेज हुए हॉर्मोन्स और जठराग्नि को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों (मेध्य रसायन) और डाइट से आपका भड़का हुआ वात शांत होगा। आपको एक गहरी और सुकून भरी नींद आनी शुरू होगी। बालों का गिरना कम होगा और एसिडिटी में गज़ब की राहत मिलेगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म (शिरोधारा) के प्रभाव से कॉर्टिसोल का स्तर बिल्कुल नॉर्मल हो जाएगा। महिलाओं में बिगड़े हुए पीरियड्स का साइकिल (Cycle) वापस अपनी प्राकृतिक लय में आ जाएगा।
  • 5-6 महीने: आपका ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम और जठराग्नि पूरी तरह फौलादी हो जाएगी। आप बिना किसी नींद की गोली या एँटासिड (Antacid) के, एक प्राकृतिक, ऊर्जावान और स्ट्रेस-फ्री जीवन (Stress-free life) का आनंद लेना शुरू कर देंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

स्ट्रेस और उससे जुड़ी इन मल्टीपल बीमारियों के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य लक्षणों को अलग-अलग दबाने के लिए एंटासिड (एसिडिटी), मिनॉक्सिडिल (बालों के लिए) और एंटी-एंग्जायटी गोलियां देना। प्राण वात को शांत करना, जठराग्नि को मज़बूत करना और 'शिरोधारा' द्वारा प्राकृतिक रूप से नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे गैस्ट्रिक, डर्मेटोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल (Psychological) जैसी अलग-अलग स्थानीय समस्याएं मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात दोष और कमज़ोर 'ओजस' का एक संपूर्ण सिंड्रोम (Syndrome) मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल जंक फूड छोड़ने और रेस्ट करने की आम सलाह दी जाती है। डाइट में 'स्नेहन' (घी/चिकनाई), वात-नाशक भोजन, और स्ट्रेस कम करने के लिए योग व सात्विक आहार पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर गोलियाँ छोड़ने पर एसिडिटी, हेयर फॉल और एंग्जायटी फिर से भयंकर रूप में वापस आ जाते हैं (Rebound effect)। शरीर का नर्वस सिस्टम और मेटाबॉलिज़्म अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि वे स्ट्रेस को प्राकृतिक रूप से सहना सीख जाते हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद आपके नर्वस सिस्टम को शांत करके इन सभी समस्याओं को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी में जाना ज़रूरी हो जाता है:

  • सीने में जकड़न (Chest Pain): अगर एसिडिटी या स्ट्रेस के साथ आपको सीने के बीचों-बीच भारी दबाव महसूस हो, जो आपके बाएँ हाथ या जबड़े की तरफ जा रहा हो (यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है, पैनिक अटैक का नहीं)।
  • डिप्रेशन (Severe Depression): अगर स्ट्रेस इतना बढ़ जाए कि आपके मन में खुद को नुकसान पहुँचाने (Suicidal thoughts) के विचार आने लगें और आप खुद को कमरे में बंद कर लें।
  • अचानक और भारी ब्लीडिंग: अगर स्ट्रेस के कारण पीरियड्स डिस्टर्ब होने के बाद अचानक इतनी भारी ब्लीडिंग शुरू हो जाए कि आपको हर घंटे पैड बदलना पड़े और कमज़ोरी आ जाए।
  • खून की उल्टी (Hematemesis): अगर लगातार एसिडिटी के कारण आपको उल्टी हो और उसमें ताज़ा लाल खून या कॉफी के रंग जैसा पदार्थ दिखाई दे (यह भोजन नली के फटने या अल्सर का अलार्म है)।

निष्कर्ष

अपने शरीर को एक आपस में जुड़े हुए (Interconnected) बेहद स्मार्ट नेटवर्क की तरह समझें। जब आप अपने दिमाग पर लगातार स्ट्रेस का भारी बोझ डालते हैं, तो यह नेटवर्क अपनी सुरक्षा (Survival) के लिए इमरजेंसी मोड में चला जाता है। ऐसे में शरीर बालों को पोषण देना बंद कर देता है, पेट की मशीनरी को रोक कर एसिड जमा करने लगता है, और महिलाओं में हॉर्मोन्स के सिग्नल को तोड़ देता है। मुट्ठी भर बालों का रोज़ाना गिरना, खाना खाते ही सीने में आग लगना और पीरियड्स का गायब हो जाना, ये कोई अलग-अलग बीमारियाँ नहीं हैं; यह एक अलार्म है कि आपका 'प्राण वात' बेकाबू हो चुका है और आपका नर्वस सिस्टम बुरी तरह थक गया है। केवल अलग-अलग डॉक्टरों के पास जाकर इन लक्षणों को दबाने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपके शरीर की असली जड़ (स्ट्रेस) को अंदर ही अंदर और भयंकर बना रहा है।

इस मल्टीपल पिल्स (Multiple pills) और स्ट्रेस के चक्रव्यूह से बाहर निकलें। बाहर के रूखे जंक फूड और डार्क कॉफी को छोड़कर हमेशा ठंडा, सुपाच्य और शुद्ध गाय के घी से बना भोजन खाएँ। अपनी डाइट में सौंफ का पानी, ओट्स और ताज़े फलों का रस शामिल करें। अश्वगंधा, ब्राह्मी और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की शिरोधारा व अभ्यंग मालिश से अपने थके हुए नर्वस सिस्टम को प्राकृतिक रिलैक्सेशन देकर नया जीवन दें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल। स्ट्रेस के कारण होने वाले हेयर फॉल को टेलोजेन एफ्लुवियम (Telogen Effluvium) कहते हैं। यह अस्थायी (Temporary) होता है। जैसे ही आप आयुर्वेद के माध्यम से अपने नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं और कॉर्टिसोल लेवल नीचे आता है, आपके बाल अपने प्राकृतिक विकास चक्र (Growth cycle) में वापस लौट आते हैं और नए बाल उगने लगते हैं।

हाँ। स्ट्रेस के कारण शरीर में कॉर्टिसोल बढ़ता है, जो सीधा ब्लड शुगर और इंसुलिन (Insulin) के स्तर को बिगाड़ देता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) पीसीओडी का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा, स्ट्रेस ब्रेन से ओवरीज़ तक जाने वाले हॉर्मोनल सिग्नल्स को भी ब्लॉक कर देता है।

आयुर्वेद में ऐसा नहीं होता। आयुर्वेद मानता है कि आपकी एसिडिटी (उर्ध्वग अम्लपित्त) आपके स्ट्रेस (वात) का ही एक लक्षण (Symptom) है। जब जड़ी-बूटियों (जैसे अश्वगंधा और गिलोय) से आपके नर्वस सिस्टम और जठराग्नि को एक साथ ठीक किया जाता है, तो ये दोनों समस्याएँ एक ही इलाज से दूर हो जाती हैं।

शत-प्रतिशत। आयुर्वेद के अनुसार, रात 10 बजे से 2 बजे का समय पित्त का समय होता है। अगर आप इस दौरान जागते हैं, तो शरीर में पित्त (गर्मी और एसिड) भयंकर रूप से बढ़ता है। साथ ही, नींद पूरी न होने से शरीर का स्ट्रेस हॉर्मोन भी हाई रहता है, जो पूरी मशीनरी को तबाह कर देता है।

हाँ, भ्रामरी प्राणायाम, अनुलोम-विलोम और शवासन (Shavasana) सीधे आपके पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम (Parasympathetic Nervous System) को एक्टिवेट करते हैं। यह रेस्ट एँड डाइजेस्ट (Rest and digest) मोड होता है, जो स्ट्रेस को कम करता है, पाचन सुधारता है और हॉर्मोन्स को बैलेंस करता है।

बिल्कुल। स्ट्रेस के दौरान कॉर्टिसोल हॉर्मोन शरीर को सर्वाइवल मोड में डाल देता है, जिससे शरीर फैट (विशेषकर पेट के आस-पास) को जमा करने लगता है। इसके अलावा, स्ट्रेस में लोग अक्सर इमोशनल ईटिंग (Emotional eating) करते हैं, जहाँ वे बहुत ज़्यादा मीठा या जंक फूड खाते हैं, जिससे वज़न तेज़ी से बढ़ता है।

नहीं। अश्वगंधा कोई सेडेटिव (Sedative) या नींद की गोली नहीं है जो दिमाग को सुन्न करे। यह एक प्राकृतिक एडैप्टोजेन (Adaptogen) है जो शरीर को स्ट्रेस सहने की ताक़त देता है। यह पूरी तरह सुरक्षित है और इसकी कोई लत (Dependency) नहीं लगती।

हाँ, इसे टेंशन हेडेक (Tension headache) या गैस्ट्रिक हेडेक कहते हैं। जब स्ट्रेस के कारण गर्दन और कंधों की नसें सिकुड़ जाती हैं, तो सिर में भारीपन होता है। वहीं, जब पेट की गैस और एसिड (पित्त) ऊपर की ओर उठता है, तो वह भी सिर में भयंकर दर्द (Migraine) पैदा कर सकता है।

कैफीन आपको कुछ देर के लिए अलर्ट (Alert) कर सकता है, लेकिन यह आपके नर्वस सिस्टम को ओवर-स्टिमुलेट (Over-stimulate) करता है और शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ा देता है। लंबे समय में यह आपकी एँग्जायटी और एसिडिटी दोनों को भयंकर रूप से बिगाड़ देता है।

हाँ, आयुर्वेद में त्वचा को वात का मुख्य स्थान माना गया है। जब आप शुद्ध औषधीय तेल (विशेषकर तिल का तेल या क्षीरबला) से शरीर की मालिश करते हैं, तो यह त्वचा के ज़रिए सीधे नसों तक पहुँचकर वात को शांत करता है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और गहरे स्ट्रेस को रिलीज़ (Release) करता है।

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