Diseases Search
Close Button
 
 

Sugar Craving सिर्फ आदत नहीं - Gut, Stress और Hormones का Signal हो सकता है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

मीठा खाने की तीव्र इच्छा (Sugar Craving) को लोग अक्सर एक खराब आदत, लालच या कमज़ोर विल पावर मान लेते हैं। जब भी मन उदास होता है, तनाव होता है या ऊर्जा कम लगती है, तो हम तुरंत चॉकलेट, मिठाई या मीठी चाय की तरफ भागते हैं। मीठा खाने से दिमाग में तुरंत डोपामीन (Dopamine) रिलीज़ होता है, जिससे व्यक्ति को लगता है कि उसकी परेशानी खत्म हो गई है और उसे सुकून मिल गया है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि खाना खाने के तुरंत बाद या अचानक रात में फिर से भयंकर मीठा खाने की तलब लगने लगती है और यह क्रेविंग पहले से भी बड़े और बेकाबू रूप में वापस आ जाती है। इसके कारण कई हो सकते हैं जैसे शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ना, तनाव (Stress) का बढ़ना, नींद की कमी, या सबसे महत्वपूर्ण आपकी आँतों (Gut) में मौजूद खराब बैक्टीरिया और शरीर के अंदर मौजूद टॉक्सिन्स जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं। इस बात को समझना ज़रूरी है, ताकि वक्त रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सके और शरीर को गंभीर मेटाबॉलिक बीमारियों से बचाया जा सके।

शुगर क्रेविंग की समस्या क्या है?

शुगर क्रेविंग एक ऐसी स्थिति है, जहाँ आपके मस्तिष्क और शरीर को तुरंत मीठा खाने की एक बेकाबू तलब महसूस होती है। एक सामान्य इंसान में भूख लगना और खाना पचना एक सहज प्रक्रिया है, लेकिन शुगर क्रेविंग वाले व्यक्ति के खून में ग्लूकोज़ का स्तर तेज़ी से ऊपर-नीचे होता है। जब हम बहुत ज़्यादा रिफाइंड शुगर (सफेद चीनी) खाते हैं, तो शरीर में इंसुलिन तेज़ी से बढ़ता है और फिर अचानक गिर जाता है, जिससे शरीर फिर से मीठा माँगने लगता है। इसके अलावा, आँतों में मौजूद फंगस और खराब बैक्टीरिया भी मीठे पर ज़िंदा रहते हैं और दिमाग को मीठा खाने के सिग्नल भेजते हैं। इसके कारण चिड़चिड़ापन, लगातार थकान और बिना वजह वज़न बढ़ने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। आमतौर पर लोग इसका शिकार खराब जीवनशैली, मानसिक तनाव, हार्मोनल असंतुलन या गलत खानपान के कारण होते हैं। मीठा खाने पर कुछ समय के लिए आराम मिल जाता है, लेकिन यह सिर्फ लक्षणों को कुछ देर के लिए दबाता है, शरीर के अंदर मौजूद उस जड़ को ठीक नहीं करता जिसके कारण यह तलब बार-बार उठती है। मीठे का लगातार इस्तेमाल करना फेफड़ों, लिवर, हृदय और पूरे मेटाबॉलिज़्म पर बुरा असर डालता है।

शुगर क्रेविंग और मेटाबॉलिक बीमारियाँ कितने प्रकार की होती हैं?

पोषण और मेटाबॉलिज़्म की तकलीफ से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये स्थितियाँ देखी जाती हैं:

  • हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) आधारित क्रेविंग: इसमें खून में शुगर का स्तर अचानक गिर जाता है, जिससे हाथ-पैर काँपने लगते हैं और तुरंत मीठा खाने की भयंकर इच्छा होती है।
  • इमोशनल या स्ट्रेस ईटिंग (Emotional Eating): तनाव, चिंता या डिप्रेशन के समय शरीर कोर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन बनाता है, जिसे शांत करने के लिए दिमाग तुरंत मीठे की माँग करता है।
  • गट-डिस्बायोसिस (Gut Dysbiosis): आँतों में अच्छे बैक्टीरिया कम हो जाते हैं और कैंडिडा (Candida) फंगस बढ़ जाता है, जो मीठे के बिना ज़िंदा नहीं रह सकता।
  • हार्मोनल क्रेविंग (PMS/PCOS): महिलाओं में पीरियड्स से पहले या पीसीओएस (PCOS) में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के असंतुलन के कारण मीठा खाने की बहुत ज़्यादा तलब लगती है।

शुगर क्रेविंग के लक्षण और संकेत

मीठा खाकर कुछ देर की शांति मिलने के बाद यह तलब बार-बार लौट आना कई आंतरिक स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं:

  • हर मील के बाद मीठे की तलब: भरपेट खाना खाने के बाद भी मीठा खाए बिना संतुष्टि न मिलना।
  • चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स: मीठा न मिलने पर अचानक बहुत ज़्यादा गुस्सा आना या उदास महसूस करना।
  • एनर्जी क्रैश (Energy Crash): दोपहर के समय या मीठा खाने के कुछ घंटों बाद अचानक शरीर की पूरी ताकत खत्म हो जाना और थकान महसूस होना।
  • ब्रेन फॉग (Brain Fog): दिमाग का सुन्न पड़ जाना, किसी चीज़ पर फोकस न कर पाना और सोचने-समझने में दिक्कत होना।
  • अचानक वज़न बढ़ना: खासकर पेट और कमर के आसपास तेज़ी से चर्बी जमा होना।
  • मीठा देखते ही बेकाबू होना: सामने रखी मिठाई या चॉकलेट देखकर खुद को रोक न पाना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

बार-बार शुगर क्रेविंग होने के मुख्य कारण क्या हैं?

बार-बार मीठा खाने की इच्छा होने के पीछे सिर्फ जीभ का स्वाद नहीं, बल्कि कई गहरे अंदरूनी कारण हो सकते हैं। मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

  • आँतों (Gut) की गड़बड़ी और फंगस: गलत खान-पान से आँतों में खराब बैक्टीरिया और यीस्ट (Yeast) पनपने लगते हैं। ये परजीवी (Parasites) शुगर पर ज़िंदा रहते हैं और वेगस नर्व (Vagus Nerve) के ज़रिए दिमाग को मीठा खाने के लिए मजबूर करते हैं।
  • तनाव (Stress) और कोर्टिसोल: जब आप बहुत ज़्यादा स्ट्रेस में होते हैं, तो शरीर कोर्टिसोल हार्मोन निकालता है। यह शरीर को 'लड़ो या भागो' (Fight or Flight) मोड में डाल देता है, जिसके लिए तुरंत एनर्जी (ग्लूकोज़) की ज़रूरत होती है।
  • हार्मोनल असंतुलन (इंसुलिन रेजिस्टेंस): जब कोशिकाएँ इंसुलिन को ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पातीं, तो खून में शुगर होने के बावजूद कोशिकाओं तक ऊर्जा नहीं पहुँचती, और कोशिकाएँ भूखी रहकर मीठे की माँग करती हैं।
  • नींद की कमी: रात में ठीक से न सोने पर भूख को कंट्रोल करने वाले हार्मोन (लेप्टिन और घ्रेलिन) बिगड़ जाते हैं, जिससे अगले दिन मीठा खाने की इच्छा कई गुना बढ़ जाती है।
  • 'आम' और कमज़ोर पाचन: आयुर्वेद के अनुसार, पेट साफ न होना और पाचन कमज़ोर होने से शरीर में कच्चा रस (आम) बनता है। इससे शरीर को सही पोषण (रस धातु) नहीं मिलता और शरीर तुरंत ताकत के लिए मीठे रस (Madhura Rasa) की माँग करता है।

शुगर क्रेविंग के जोखिम और जटिलताएँ क्या हैं?

शुगर क्रेविंग को अगर अनदेखा किया जाए या सही समय पर इसका अंदरूनी इलाज न मिले, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा: लगातार मीठा खाने और इंसुलिन के बढ़ने से शरीर इंसुलिन रेजिस्टेंस का शिकार हो जाता है, जो सीधे डायबिटीज़ की तरफ ले जाता है।
  • फैटी लिवर (Fatty Liver): शरीर ज़रूरत से ज़्यादा शुगर को फैट में बदलकर लिवर पर जमा कर देता है, जिससे लिवर की कार्यक्षमता कमज़ोर हो जाती है।
  • हृदय रोग और कोलेस्ट्रॉल: ज़्यादा चीनी खून की नलियों में सूजन (Inflammation) पैदा करती है और खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
  • पीसीओएस (PCOS) और बांझपन: महिलाओं में ज़्यादा शुगर इंसुलिन को बिगाड़ती है, जिससे ओवरीज़ में सिस्ट बनने लगते हैं और हार्मोनल संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है।
  • समय से पहले बुढ़ापा (Aging): बहुत ज़्यादा चीनी त्वचा के कोलेजन को नष्ट कर देती है, जिससे चेहरे पर जल्दी झुर्रियाँ आने लगती हैं।

समय पर डॉक्टर से परामर्श और उचित आयुर्वेदिक इलाज लेने से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से शुगर क्रेविंग सिर्फ एक आदत नहीं है। आयुर्वेद में इसे 'अग्नि' (पाचन शक्ति) और 'दोषों' (विशेषकर वात और कफ) के असंतुलन के रूप में देखा जाता है। यहाँ यह माना जाता है कि जब शरीर में वात दोष बढ़ जाता है (तनाव, एंग्जायटी या नींद की कमी के कारण), तो वह शरीर को सुखाने लगता है। इस रूखेपन और घबराहट को शांत करने के लिए शरीर प्राकृतिक रूप से मीठे (मधुर रस) और भारीपन (कफ) की माँग करता है। डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं। वे ढूँढते हैं कि कहीं आँतों में 'आम' यानी टॉक्सिन्स तो नहीं जमा हो गए हैं, जिसने पाचन तंत्र को दूषित कर दिया है। जब तक यह आम शरीर में रहेगा और रस धातु सही से नहीं बनेगी, शरीर कोशिकाओं की भूख मिटाने के लिए बार-बार मीठा माँगता रहेगा। आयुर्वेद में बस मन मारना मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, आँतों की सफाई हो, तनाव खत्म हो और पाचन अग्नि प्राकृतिक रूप से मज़बूत बने।

इस समस्या के लिए लाभकारी जड़ी-बूटियाँ 

आयुर्वेद में मीठे की तलब को खत्म करने, इंसुलिन को बैलेंस करने और तनाव को कम करने के लिए ये  जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • गुड़मार: इसका नाम ही 'गुड़' को 'मारने' वाला है। यह जीभ पर मीठे के स्वाद को कुछ समय के लिए ब्लॉक कर देता है और खून में शुगर के स्तर को संतुलित करता है।
  • अश्वगंधा : यह तनाव और कोर्टिसोल हार्मोन को कम करने की सबसे बेहतरीन औषधि है। तनाव कम होने से मीठा खाने की इच्छा अपने आप खत्म हो जाती है।
  • दालचीनी : यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारती है। चुटकी भर दालचीनी का सेवन खून में अचानक शुगर को बढ़ने से रोकता है।
  • मुलेठी : इसमें प्राकृतिक मिठास होती है। मीठा खाने का मन होने पर मुलेठी का छोटा सा टुकड़ा मुँह में रखने से वात और पित्त शांत होते हैं और क्रेविंग खत्म हो जाती है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म: शरीर की अंदरूनी सफाई

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर संपूर्ण स्वास्थ्य और हार्मोनल बैलेंस पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • गहरी सफाई और मेटाबॉलिज़्म सुधार: जब वज़न लगातार बढ़ रहा हो, शुगर क्रेविंग बेकाबू हो और व्यक्ति प्री-डायबिटिक हो चुका हो, तो जीवा आयुर्वेद में वमन, विरेचन और शिरोधारा जैसी पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • इलाज का समय: यह 7 से 21 दिनों तक चलने वाली शरीर के अंदरूनी अंगों और पाचन मार्ग की गहरी सफाई की प्राकृतिक प्रक्रिया है।
  • आँतों की सफाई : इसमें औषधीय जड़ी-बूटियों से पेट साफ कराया जाता है, जिससे आँतों में जमा फंगस, खराब बैक्टीरिया और पित्त की गंदगी बाहर निकल जाती है।
  • तनाव मुक्ति के लिए शिरोधारा: माथे पर औषधीय तेल की लगातार धारा गिराई जाती है। यह नर्वस सिस्टम को गहरी शांति देता है, जिससे स्ट्रेस ईटिंग की आदत टूट जाती है।

शुगर क्रेविंग के रोगी के लिए शुद्ध आहार 

आयुर्वेदिक वेलनेस में शुगर क्रेविंग के इस खतरे में आहार ही आपकी सबसे बड़ी दवा है:

क्या खाएँ?

  • गाय का घी व प्रोटीन: पनीर, नट्स और गाय का घी लें। यह वात शांत कर दिमाग को चिकनाहट देता है।
  • कड़वे व सुपाच्य भोजन: करेला, मेथी और हल्का गर्म भोजन मीठे की इच्छा को प्राकृतिक रूप से काटते हैं।
  • सौंफ व गुनगुना पानी: खाने के बाद मीठे की जगह सौंफ खाएं और दिन भर गुनगुना पानी पिएं।

क्या न खाएँ?

  • सफेद चीनी व मीठा: मिठाइयाँ व चॉकलेट भयंकर क्रेविंग बनाते हैं, इन्हें तुरंत बंद कर दें।
  • ठंडी चीज़ें: फ्रिज का पानी व आइसक्रीम जठराग्नि को बुझाकर वात भड़काते हैं।
  • जंक फूड व मैदा: यह शरीर में भयंकर 'आम' बनाता है, जिससे दवाएँ काम नहीं करतीं।
  • आर्टिफिशियल स्वीटनर्स: ये दिमाग को धोखा देकर मीठे की भयंकर तलब भड़काते हैं।
  • कैफीन: खाली पेट चाय/कॉफी स्ट्रेस हार्मोन और वात बढ़ाते हैं।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

आयुर्वेद में मेटाबॉलिक समस्या और क्रेविंग का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है:

  • बीमारी और शरीर की स्थिति: ठीक होने का वक्त कई बातों से तय होता है जैसे यह समस्या कितनी पुरानी है, वज़न कितना ज़्यादा है, और मरीज़ का मानसिक तनाव का स्तर क्या है।
  • हल्की समस्या में सुधार: अगर परेशानी की शुरुआत है, तो आमतौर पर 3 से 4 हफ्तों में ही मीठे की तलब कम होने लगती है और ऊर्जा का स्तर सुधरने लगता है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर समस्या सालों पुरानी है और व्यक्ति प्री-डायबिटिक या पीसीओएस का शिकार है, तो शरीर को पूरी तरह साफ होने और दोषों को संतुलित होने में 4 से 6 महीने भी लग सकते हैं।
  • उपचार का तरीका: इस प्राकृतिक इलाज में मुख्य रूप से अग्नि को बढ़ाने वाली जड़ी-बूटियाँ, पंचकर्म, सही खानपान और योग शामिल होता है।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करता है, तो पाचन मज़बूत हो जाता है और भविष्य में बिना किसी संघर्ष के मीठा खाने की इच्छा जड़ से खत्म हो जाती है।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य शुगर क्रेविंग, भूख और मेटाबॉलिक लक्षणों को नियंत्रित करना पाचन संतुलन, मेटाबॉलिज़्म और समग्र स्वास्थ्य सुधार पर ध्यान देना
नज़रिया समस्या को हार्मोन, ब्लड शुगर, खानपान और व्यवहार से जुड़ी स्थिति के रूप में देखना इसे वात-कफ असंतुलन, ‘आम’ और पाचन कमजोरी से जोड़कर देखना
उपचार तरीका डाइट प्लान, व्यवहार सुधार, दवाएँ, सप्लीमेंट्स और आवश्यकता अनुसार मेडिकल सपोर्ट जड़ी-बूटियाँ, आयुर्वेदिक डाइट, दिनचर्या सुधार और पाचन संतुलन पर ज़ोर
डाइट और लाइफस्टाइल कैलोरी नियंत्रण, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और नींद सुधार की सलाह सुपाच्य भोजन, वात-कफ संतुलित आहार, योग और नियमित दिनचर्या पर ध्यान
लंबा असर लंबे समय तक स्वस्थ आदतें बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है जीवनशैली और पाचन संतुलन के माध्यम से दीर्घकालिक स्वास्थ्य सपोर्ट पर ध्यान

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

शुगर क्रेविंग होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • मीठा न मिलने पर हाथ-पैर कांपने लगें या बहुत ज़्यादा घबराहट हो।
  • अत्यधिक थकान महसूस हो और दिनभर नींद आती रहे।
  • वज़न तेज़ी से बढ़ रहा हो और किसी भी डाइट से कम न हो रहा हो।
  • मानसिक तनाव इतना बढ़ जाए कि आप सामान्य जीवन जीने में या सोने में असमर्थ महसूस करें।
  • महिलाओं में पीरियड्स पूरी तरह अनियमित हो जाएँ और चेहरे पर बाल आने लगें PCOS के संकेत।

समय पर सलाह लेने से रोग का सही निदान होता है और शरीर को बड़ी जटिलताओं से बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से बार-बार मीठा खाने की बेकाबू इच्छा मुख्य रूप से वात दोष के बिगड़ने, पाचन अग्नि के कमज़ोर होने और आँतों में 'आम' जमा होने से जुड़ी होती है। गलत खान-पान, भारी तनाव, नींद की कमी और खराब पाचन से शरीर के हार्मोन जैसे इंसुलिन और कोर्टिसोल बिगड़ जाते हैं। यही असंतुलन शरीर को झूठी भूख का संकेत देता है, जिससे व्यक्ति मीठे की तरफ भागता है। सिर्फ इच्छाशक्ति से इसे रोकना मुश्किल है क्योंकि बीमारी अंदर ही रहती है। इलाज में आँतों की शुद्धि और तनाव मुक्ति सबसे ज़्यादा आवश्यक है। इसमें दोषों को संतुलित करना, प्रोटीन युक्त खाना खाना, गुड़मार और अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियाँ इस्तेमाल करना, और तनाव मुक्त दिनचर्या अपनाना शामिल है जिससे इस समस्या को जड़ से ठीक किया जा सके।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, यह सिर्फ आदत नहीं है। यह अक्सर आँतों में फंगस, हार्मोनल असंतुलन (इंसुलिन), भारी तनाव या शरीर में ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी काशारीरिक संकेत होता है।

हाँ, जब आप तनाव में होते हैं, तो शरीर कोर्टिसोल हार्मोन निकालता है। दिमाग इस तनाव को शांत करने और तुरंत ऊर्जा पाने के लिए मीठे की ज़ोरदार माँग करता है।

आँतों में मौजूद खराब बैक्टीरिया और यीस्ट (जैसे कैंडिडा) मीठे पर ज़िंदा रहते हैं। जब उनकी संख्या बढ़ती है, तो वे दिमाग को मीठा खाने के लिए केमिकल सिग्नल भेजते हैं।

हाँ, नींद पूरी न होने पर भूख को कंट्रोल करने वाले हार्मोन बिगड़ जाते हैं, जिससे अगले दिन शरीर ऊर्जा की कमी महसूस करता है और तुरंत ताकत के लिए मीठा माँगता है।

माहवारी से ठीक पहले शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन तेज़ी से बदलते हैं, जिससे सेरोटोनिन (खुशी का हार्मोन) गिर जाता है। इसे बढ़ाने के लिए शरीर मीठे की माँग करता है।

शुरुआत के 3-4 दिन आपको चिड़चिड़ापन या कमज़ोरी महसूस हो सकती है (इसे शुगर विड्रॉल कहते हैं), लेकिन कुछ ही दिनों में आपका ऊर्जा स्तर पहले से कहीं ज़्यादा बेहतर और स्थिर हो जाता है।

क्रेविंग होने पर आप भुने हुए मखाने, बादाम, सौंफ, या एक छोटा टुकड़ा मुलेठी चबा सकते हैं। इसके अलावा भोजन में प्रोटीन और गाय का घी शामिल करना फायदेमंद होता है।

गुड़ और शहद चीनी से बेहतर विकल्प हैं, लेकिन ज़्यादा मात्रा में खाने पर ये भी खून में शुगर बढ़ाते हैं। असली इलाज पाचन अग्नि को ठीक करने में है, सिर्फ मीठे का रूप बदलने में नहीं।

हाँ, जब शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है, तो खून में शुगर होने के बावजूद वह कोशिकाओं तक नहीं पहुँच पाती, जिससे कोशिकाएँ भूखी रहकर बार-बार मीठे की माँग करती हैं।

हाँ, आयुर्वेद जड़ी-बूटियों (जैसे गुड़मार, अश्वगंधा) और सही आहार के ज़रिए आँतों की सफाई करता है और इंसुलिन को संतुलित करता है, जिससे मीठे की तलब जड़ से खत्म हो जाती है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us