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कोहनी और घुटनों पर सफेद पपड़ी बनना: सोरायसिस का संकेत, आयुर्वेद में इसे कैसे समझते हैं

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

कोहनी और घुटनों पर सफेद पपड़ी बनना सोरायसिस का संकेत, आयुर्वेद में इसे कैसे समझते हैं

स्टेरॉयड क्रीम Steroid creams और भारी इम्यूनोसप्रेसेंट दवाओं का इस्तेमाल कोहनी, घुटनों पर बनने वाली सफेद पपड़ी यानी सोरायसिस Psoriasis में काफी आम है। ये दवाएं त्वचा की ऊपरी सूजन को कुछ समय के लिए दबा देती हैं, जिससे मरीज़ को लगता है कि वह ठीक हो गया है। लेकिन क्रीम छोड़ते ही सफेद पपड़ी और भयंकर खुजली पहले से भी बड़े रूप में वापस आ जाती है। इसका मुख्य कारण सिर्फ ऊपरी लेप लगाना और शरीर के अंदर जमे 'दूषित रक्त' व 'वात-कफ दोष' को साफ न करना है। संपूर्ण आयुर्वेदिक उपचार के बिना यह स्थायी रूप से नहीं रुक सकता।

सोरायसिस Psoriasis क्या है?

सोरायसिस त्वचा की एक बेहद ज़िद्दी और क्रोनिक Chronic ऑटोइम्यून बीमारी है। एक सामान्य इंसान की त्वचा की कोशिकाएं Skin cells 28 से 30 दिनों में बनकर ऊपरी सतह तक आती हैं और झड़ जाती हैं। लेकिन सोरायसिस के मरीज़ों में, इम्यून सिस्टम के भ्रमित हो जाने के कारण, ये कोशिकाएं महज़ 3 से 4 दिनों में ही तेज़ी से बनने लगती हैं।

इतनी तेज़ी से बनने के कारण मृत कोशिकाएं Dead cells त्वचा से झड़ नहीं पातीं और कोहनी, घुटनों, पीठ या सिर की त्वचा Scalp पर एक के ऊपर एक जमा होने लगती हैं। यही जमाव मोटी, लाल और सफेद या चाँदी के रंग की पपड़ी Silvery scales का रूप ले लेता है। स्टेरॉयड क्रीम लगाने पर यह पपड़ी कुछ समय के लिए साफ हो जाती है, लेकिन ये दवाएं सिर्फ बाहरी सतह को साफ करती हैं, शरीर के अंदर मौजूद उस 'ऑटोइम्यून' प्रतिक्रिया और रक्त की अशुद्धि को ठीक नहीं करतीं जिसमें सोरायसिस बार-बार पनपता है।

सोरायसिस की बीमारियाँ मुख्य रूप से कितने प्रकार की होती हैं?

आधुनिक चिकित्सा में सोरायसिस को इसके लक्षणों और फैलने के आधार पर इन प्रकारों में बांटा गया है

  • प्लैक सोरायसिस Plaque Psoriasis यह सबसे आम है लगभग 80% मामले। इसमें कोहनी, घुटनों और सिर पर लाल चकत्ते और सफेद मोटी पपड़ी जम जाती है।
  • गट्टेट सोरायसिस Guttate Psoriasis यह अक्सर बच्चों या युवाओं में गले के इन्फेक्शन Strep throat के बाद होता है। इसमें शरीर पर पानी की बूंदों जैसे छोटे-छोटे लाल दाने उभर आते हैं।
  • इन्वर्स सोरायसिस Inverse Psoriasis यह पपड़ीदार नहीं होता, बल्कि शरीर की सिलवटों जाँघों के बीच, स्तनों के नीचे, काँख में गहरा लाल और चिकना चकत्ता बनाता है।
  • पस्टुलर सोरायसिस Pustular Psoriasis इसमें लाल त्वचा के ऊपर मवाद Pus से भरे दर्दनाक दाने निकल आते हैं।
  • एरिथ्रोडर्मिक सोरायसिस Erythrodermic Psoriasis यह सबसे खतरनाक रूप है, जिसमें पूरा शरीर भयंकर लाल हो जाता है और त्वचा छिलने लगती है, मानो शरीर जल गया हो।

सफेद पपड़ी और सोरायसिस के मुख्य लक्षण और संकेत

कोहनी और घुटनों पर बार-बार पपड़ी बनना शरीर की अंदरूनी गंदगी और ऑटोइम्यून समस्या का संकेत है। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं

  • चाँदी जैसी सफेद पपड़ी Silvery Scales लाल और उभरे हुए चकत्तों के ऊपर मोटी, सूखी और सफेद रंग की पपड़ी का जमना।
  • भयंकर खुजली और जलन पपड़ी वाली जगह पर असहनीय खुजली मचना; खुजलाने पर सफेद पाउडर सा झड़ना और खून निकल आना।
  • त्वचा का फटना और खून रिसना त्वचा इतनी ज़्यादा रूखी हो जाती है कि उसमें दरारें Cracks पड़ जाती हैं और खून रिसने लगता है।
  • नाखूनों में बदलाव हाथों और पैरों के नाखूनों में छोटे-छोटे गड्ढे पड़ जाना Pitting या उनका रंग पीला-भूरा हो जाना।
  • जोड़ों में दर्द Psoriatic Arthritis बीमारी पुरानी होने पर जोड़ों में भयंकर दर्द और सूजन आना।

दवा छोड़ने के बाद सोरायसिस क्यों लौटता है? – मुख्य कारण

  • स्टेरॉयड विड्रॉल Topical Steroid Withdrawal लगातार स्टेरॉयड क्रीम लगाने से त्वचा की रोग प्रतिरोधक क्षमता नष्ट हो जाती है। क्रीम छोड़ते ही बीमारी 'रिबाउंड' Rebound करती है और पहले से 10 गुना ज़्यादा भड़क जाती है।
  • रक्त की अशुद्धि Rakta Dushti ग़लत खान-पान से शरीर में जो टॉक्सिन्स आम बनते हैं, वे खून को दूषित कर देते हैं। जब तक खून साफ नहीं होगा, त्वचा साफ नहीं हो सकती।
  • विरुद्ध आहार Incompatible Food दूध के साथ नमक, मछली या खट्टी चीज़ें खाने से खून तुरंत ज़हरीला होता है, जो सोरायसिस का सबसे बड़ा ट्रिगर है।
  • मानसिक तनाव तनाव से शरीर में सूजन Inflammation बढ़ती है, जिससे इम्यून सिस्टम और ज़्यादा भ्रमित होकर सोरायसिस को भड़काता है।

सोरायसिस के जोखिम और  जटिलताएँ क्या हैं?

सोरायसिस को अगर अनदेखा किया जाए या सिर्फ क्रीम से दबाया जाए, तो यह कई जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकता है

  • सोरायटिक आर्थराइटिस Psoriatic Arthritis लगभग 30% सोरायसिस के मरीज़ों में यह बीमारी जोड़ों की हड्डियों को गलाने लगती है, जिससे उँगलियां टेढ़ी हो जाती हैं और इंसान अपाहिज हो सकता है।
  • हृदय रोग का खतरा शरीर में लगातार सूजन बने रहने से खून की नसें सख्त हो जाती हैं, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
  • टाइप-2 डायबिटीज़ और मोटापा सोरायसिस मेटाबॉलिक सिंड्रोम को जन्म देता है, जिससे वज़न बढ़ता है और शुगर की बीमारी हो जाती है।
  • मानसिक अवसाद Depression शरीर पर भद्दे दाग़ों और झड़ती हुई पपड़ी के कारण मरीज़ डिप्रेशन, शर्मिंदगी और हीन भावना का शिकार हो जाता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण जड़ कारण क्या है?

आयुर्वेद में सोरायसिस को 'एककुष्ठ' या 'किटिभ कुष्ठ' Kitibha के रूप में देखा जाता है। आयुर्वेद मानता है कि यह सिर्फ त्वचा का रोग नहीं है, बल्कि यह तीनों दोषों वात, पित्त, कफ के बिगड़ने और रक्त खून व मांस धातु के दूषित होने का परिणाम है।

जब हम लगातार 'विरुद्ध आहार' ग़लत भोजन का मेल खाते हैं, बहुत ज़्यादा तनाव लेते हैं या हमारा पाचन कमज़ोर होता है, तो पेट में ज़हरीला 'आम' Toxins बनता है। यह 'आम' और बढ़ा हुआ वात-कफ दोष खून को दूषित कर देते हैं। बढ़ा हुआ 'वात' त्वचा में भयंकर रूखापन और सफेद पपड़ी पैदा करता है। बढ़ा हुआ 'कफ' चकत्तों को मोटा करता है और 'पित्त' उसमें लालिमा व खुजली पैदा करता है। जब तक यह दूषित खून शरीर में घूमता रहेगा, पपड़ी बनती रहेगी। आयुर्वेद का मकसद सिर्फ क्रीम लगाना नहीं है, बल्कि रक्त की गहरी शुद्धि करना रक्त शोधन, 'आम' को बाहर निकालना और इम्यून सिस्टम को प्राकृतिक रूप से रीसेट करना है।

सोरायसिस मिटाने वाली महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में रक्त की शुद्धि करने, वात-कफ को शांत करने और त्वचा को अंदर से नया जीवन देने के लिए ये 4 जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं

  • मंजिष्ठा आयुर्वेद में इसे सबसे शक्तिशाली रक्त शोधक Blood purifier माना गया है। यह खून से गहरे टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है और लालिमा व पपड़ी को कम करती है।
  • नीम इसका कड़वा रस खून की अशुद्धि को साफ करता है, इन्फेक्शन को रोकता है और भयंकर खुजली को तुरंत शांत करता है।
  • खदिर  सभी प्रकार के कुष्ठ त्वचा रोगों के लिए खदिर बहुत ताक़तवर है। यह त्वचा की गहराई में जाकर नई और स्वस्थ कोशिकाओं Cells के निर्माण में मदद करता है।
  • गिलोय सोरायसिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, इसलिए इम्युनिटी को सुधारना सबसे ज़रूरी है। गिलोय इम्यून सिस्टम को शांत कर उसे शरीर पर हमला करने से रोकती है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म शरीर की अंदरूनी सफाई

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, दूषित रक्त और 'आम' को बाहर निकालकर सोरायसिस को जड़ से मिटाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया।

  • विरेचन Virechana सोरायसिस में खून की सफाई सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। विरेचन में औषधीय दस्त के ज़रिए लिवर और खून में घुली हुई सारी गंदगी मल के रास्ते बाहर निकाल दी जाती है। इससे खुजली और पपड़ी में जादुई आराम मिलता है।
  • वमन Vamana कफ दोष के बढ़ने के कारण चकत्ते बहुत मोटे हो जाते हैं। औषधीय उल्टी Vamana के ज़रिए शरीर का पुराना कफ और 'आम' एक ही झटके में बाहर निकाला जाता है।
  • तक्रधारा Takradhara भयंकर मानसिक तनाव और एंग्ज़ायटी जो सोरायसिस भड़काते हैं को दूर करने के लिए माथे पर औषधीय छाछ Takra की धारा गिराई जाती है।
  • रक्तमोक्षण जोंक थेरेपी बहुत ज़िद्दी और लाल चकत्तों वाली जगह पर औषधीय जोंक Leeches लगाई जाती हैं। ये अशुद्ध खून को चूस लेती हैं, जिससे खुजली तुरंत बंद हो जाती है।

सोरायसिस के रोगी के लिए शुद्ध आहार

रक्त को शुद्ध रखने और बीमारी को दोबारा पनपने से रोकने के लिए हमेशा हल्का, पचने में आसान और 'विरुद्ध आहार' से मुक्त भोजन चुनना महत्वपूर्ण है

क्या खाएँ?

  • कड़वी और हल्की सब्ज़ियाँ करेला, परवल, लौकी और तरोई खाएँ। कड़वा रस Bitter taste खून को साफ करता है और त्वचा के रोगों को जड़ से मिटाता है।
  • पुराना अनाज और मूंग दाल पचने में हल्के अनाज और छिलके वाली हरी मूंग की दाल खाएं।
  • पर्याप्त पानी और घी दिन भर गुनगुना पानी पिएं। त्वचा के भयंकर रूखेपन वात को अंदर से खत्म करने के लिए भोजन में 1-2 चम्मच शुद्ध गाय का घी ज़रूर शामिल करें।

क्या न खाएँ?

  • विरुद्ध आहार सख्त मनाही दूध के साथ खट्टे फल, नमक, मूली, प्याज़, लहसुन या मछली भूलकर भी न खाएं। आयुर्वेद में इसे सोरायसिस का सबसे बड़ा कारण माना गया है।
  • खट्टा और तीखा टमाटर, इमली, अचार, दही और बहुत ज़्यादा मिर्ची बिल्कुल बंद कर दें। ये शरीर में पित्त और लालिमा बढ़ाते हैं।
  • चीनी और जंक फूड मिठाइयां, मैदे से बनी चीज़ें और पैकेटबंद भोजन पेट में 'आम' बनाते हैं, जो सीधा खून को ज़हरीला कर देता है। इन्हें न खाएं।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में सोरायसिस का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ की स्थिति के हिसाब से किया जाता है

  • बीमारी और शरीर की स्थिति ठीक होने का वक़्त इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी शरीर के कितने हिस्से पर फैल चुकी है, आपने कितने सालों तक स्टेरॉयड या इंजेक्शन Biologics का इस्तेमाल किया है, और आपका खून कितना अशुद्ध है।
  • स्टेरॉयड विड्रॉल फेज़  जब आप स्टेरॉयड क्रीम बंद करते हैं और आयुर्वेदिक दवा शुरू करते हैं, तो शुरुआत के 15-20 दिन बीमारी थोड़ी बढ़ सकती है यह शरीर से ज़हर बाहर आने का संकेत है। इससे घबराना नहीं चाहिए।
  • हल्की समस्या में सुधार अगर बीमारी कोहनी और घुटनों तक सीमित है, तो 2 से 3 महीने में पपड़ी बनना काफी कम हो जाती है और खुजली शांत हो जाती है।
  • पुरानी बीमारी का समय अगर बीमारी पूरे शरीर में है और सालों पुरानी है, तो खून को पूरी तरह शुद्ध होने और त्वचा को नया रंग पाने में 6 महीने से 1 साल या उससे ज़्यादा समय भी लग सकता है।
  • स्थायी परिणाम मरीज़ अगर 'विरुद्ध आहार' छोड़ दे और सात्विक दिनचर्या का पालन करे, तो सोरायसिस का दोबारा लौटकर आना लगभग बंद हो जाता है और जीवन भर क्रीम लगाने की ज़रूरत खत्म हो जाती है।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

तुलना का आधार आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक चिकित्सा
उपचार का दृष्टिकोण स्टेरॉयड और एंटी-फंगल क्रीम से लक्षण दबाना बीमारी की जड़ पर काम करना
कार्य करने का तरीका त्वचा की सतह से फंगस को अस्थायी रूप से हटाना शरीर को अंदर से शुद्ध और संतुलित करना
मूल कारण पर प्रभाव दूषित रक्त' और कमज़ोर इम्युनिटी को नहीं सुधारता पित्त-कफ, जठराग्नि और रक्त अशुद्धि को संतुलित करता है
उपचार विधियाँ क्रीम और एंटी-फंगल गोलियाँ जड़ी-बूटियों द्वारा अंदरूनी शुद्धि
दुष्प्रभाव क्रीम छोड़ते ही दाद दोबारा आना, दवाओं से लिवर पर असर सामान्यतः सुरक्षित, शरीर के अनुरूप सुधार
परिणाम अस्थायी राहत, बार-बार संक्रमण त्वचा की प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत
समय जल्दी असर थोड़ा समय लगता है, लेकिन स्थायी लाभ

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

सोरायसिस की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि

  • पपड़ीदार चकत्ते शरीर के बड़े हिस्से छाती, पेट, पीठ पर तेज़ी से फैलने लगें।
  • घुटनों और उँगलियों के जोड़ों में सुबह-सुबह भयंकर जकड़न और दर्द महसूस हो Psoriatic Arthritis के संकेत।
  • लगातार खुजलाने की वजह से त्वचा छिल गई हो और उसमें से पीला मवाद Pus रिसने लगा हो।
  • त्वचा पर चकत्ते इतने दर्दनाक हो जाएं कि कपड़े पहनना या रोज़मर्रा के काम करना मुश्किल हो जाए।
  • पूरा शरीर लाल हो जाए और त्वचा की परत उतरने लगे Erythrodermic Psoriasis।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से कोहनी और घुटनों पर सफेद पपड़ी बनना सोरायसिस इस बात का स्पष्ट संकेत है कि शरीर का खून रक्त धातु और मांस धातु बहुत गहराई तक दूषित हो चुके हैं, और शरीर का वात-कफ दोष भड़का हुआ है। विरुद्ध आहार खाने जैसे दूध के साथ नमक, जंक फूड, भारी तनाव और कमज़ोर पाचन से शरीर में 'आम' Toxins बनता है, जो त्वचा के रास्ते बाहर आने की कोशिश करता है और पपड़ी बनाता है। सिर्फ बाहरी स्टेरॉयड क्रीम लगाने से यह गंदगी अंदर ही दब जाती है, लेकिन खत्म नहीं होती। इलाज में रक्त शुद्धि सबसे ज़्यादा आवश्यक है। इसमें जठराग्नि को मज़बूत करना, विरुद्ध आहार छोड़ना, नीम व मंजिष्ठा जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करना और सात्विक दिनचर्या अपनाना शामिल है, जिससे सोरायसिस को हमेशा के लिए जड़ से खत्म किया जा सके।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, सोरायसिस बिल्कुल भी छुआछूत की बीमारी नहीं है। यह किसी मरीज़ को छूने, उसके साथ खाने या कपड़े साझा करने से कभी नहीं फैलती। यह शरीर की अंदरूनी (ऑटोइम्यून) समस्या है।

स्टेरॉयड त्वचा की इम्युनिटी को सुन्न कर इन्फेक्शन और चकत्तों को अंदर दबा देते हैं। क्रीम छोड़ते ही वो दबी हुई बीमारी 'रिबाउंड' करती है और भयंकर रूप में त्वचा पर फूट पड़ती है।

सादा दूध पीना सुरक्षित है, लेकिन दूध पीने के आसपास नमक या खट्टी चीज़ें बिल्कुल न खाएं। आयुर्वेद में दूध और नमक के एक साथ सेवन को सोरायसिस का सबसे बड़ा कारण माना गया है।

बिल्कुल। बहुत ज़्यादा तनाव लेने से शरीर में कोर्टिसोल बढ़ता है और भयंकर सूजन (Inflammation) पैदा होती है, जिससे इम्यून सिस्टम भ्रमित होकर सोरायसिस को भड़का देता है।

सोरायसिस में वात दोष के कारण त्वचा में भयंकर रूखापन आ जाता है। भोजन में 1-2 चम्मच गाय का घी खाने से शरीर को अंदर से 'स्नेहन' (चिकनाई) मिलता है, जो रूखेपन को जड़ से खत्म करता है।

आयुर्वेद के अनुसार, दही (विशेषकर खट्टा और रात के समय) कफ और पित्त दोष को बढ़ाता है, जो त्वचा के रोगों को भड़काने का काम करता है। सोरायसिस में दही से परहेज़ करना चाहिए।

हां, गिलोय एक प्राकृतिक 'इम्यूनोमोडुलेटर' और रक्त शोधक है। यह भ्रमित इम्यून सिस्टम को शांत करती है और खून की अशुद्धि को साफ कर बीमारी को रोकती है।

विरेचन औषधीय दस्त के ज़रिए लिवर और खून में जमा पित्त और टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालता है, जो सोरायसिस को जड़ से ठीक करने की सबसे असरदार प्रक्रिया है।

हां, लगभग 30% मरीज़ों में यह बीमारी जोड़ों तक पहुँच जाती है जिसे 'सोरायटिक आर्थराइटिस' (Psoriatic Arthritis) कहते हैं। इसमें जोड़ों में भयंकर सूजन आ जाती है और उँगलियां टेढ़ी हो सकती हैं।

हां, करेले का कड़वा रस (Bitter taste) आयुर्वेद में खून को साफ करने और त्वचा की लालिमा व पित्त को शांत करने का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक उपाय माना गया है।

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