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बैठने में दर्द, खड़े होने में दर्द — Sciatica में कौन सी Position सही है?

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 03 Jun, 2026
  • category-iconUpdated on 03 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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साइटिका कोई आम दर्द नहीं है; यह एक ऐसी पीड़ा है जो इंसान की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को पूरी तरह से थका देती है। यह परेशानी तब शुरू होती है जब रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में मौजूद सबसे लंबी नस, जिसे साइटिक नर्व कहते हैं, किसी कारण से दबने या सूजने लगती है। इसका दर्द कमर के निचले हिस्से से उठता है और कूल्हों से होता हुआ सीधे पैरों की उँगलियों तक बिजली के करंट की तरह दौड़ता है।

कई बार यह दर्द इतना तेज़ होता है कि इंसान का बैठना या एक जगह पर खड़ा रहना भी बेहद मुश्किल हो जाता है। जब हम कुर्सी पर झुककर बैठते हैं, तो शरीर का ऊपरी भार रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से पर आ जाता है, जिससे दबी हुई नस पर दबाव और बढ़ जाता है। इसी तरह, लंबे समय तक बिना हिले-डुले खड़े रहने से भी नस पर ज़ोर पड़ता है और पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या सुई चुभने जैसा अहसास होने लगता है। शरीर का सही संतुलन और उठने-बैठने की बिल्कुल सही स्थिति ही नसों के इस भारी दबाव को कम करने में मदद करती है।

साइटिका क्या है और क्यों होता है?

हमारे शरीर में एक बहुत लंबी नस होती है, जिसे 'साइटिक नर्व' (Sciatic Nerve) कहा जाता है। यह नस हमारी रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से (Lower Back) से शुरू होती है, हमारे कूल्हों (Hips) से होते हुए जाँघों के पीछे से गुज़रती है और हमारे पाँव की उँगलियों तक जाती है।

जब हमारी रीढ़ की हड्डी की गद्दियों (Discs) में कोई दिक्कत आ जाती है, या कोई हड्डी इस नस को दबाने लगती है, तो इस नस में सूजन आ जाती है। इसी सूजन और नस के दबने को साइटिका कहते हैं। क्योंकि यह नस कमर से लेकर पाँव तक जाती है, इसलिए दर्द भी कमर से शुरू होकर पूरे पैर में बिजली के करंट की तरह दौड़ता है।

साइटिका कितने प्रकार का होता है?

साइटिका को उसके होने के समय और प्रभाव के आधार पर मुख्य रूप से चार भागों में बाँटा जाता है:

  • एक्यूट साइटिका: यह दर्द अचानक शुरू होता है और 4 से 8 हफ्ते तक रहता है। आराम और सही पोज़िशन से यह जल्दी ठीक हो जाता है।
  • क्रॉनिक साइटिका: जब दर्द 8 हफ्ते से ज़्यादा समय तक लगातार बना रहे हैं। इसे ठीक करने के लिए लंबे इलाज की ज़रूरत पड़ती है।
  • ऑल्टरनेटिंग साइटिका: इसमें दर्द अपनी जगह बदलता रहता है; कभी दाएँ पैर में तो कभी बाएँ पैर में।
  • बाइलेटरल साइटिका: यह बहुत कम लोगों में होता है लेकिन बेहद गंभीर है। इसमें दर्द एक ही समय पर दोनों पैरों में होता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ।

बैठने पर दर्द क्यों बढ़ता है?

अक्सर साइटिका के मरीज़ शिकायत करते हैं कि जब वे कुर्सी पर बैठते हैं, तो उनका दर्द बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है। इसके पीछे एक सीधा सा विज्ञान है। जब हम खड़े होते हैं या लेटे होते हैं, तो हमारे शरीर का वज़न पूरी रीढ़ की हड्डी पर बँट जाता है। लेकिन, जब हम बैठते हैं, तो शरीर के ऊपरी हिस्से का पूरा भार हमारी रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से (L4, L5, S1) पर आ जाता है।

अगर आप गलत तरीके से बैठते हैं (जैसे कुर्सी पर आगे की तरफ झुककर या कमर को गोल करके), तो रीढ़ की हड्डी की गद्दियों पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है। यह दबाव सीधे आपकी साइटिक नस को दबाता है, जिससे दर्द आपकी जाँघ और पाँव तक पहुँचने लगता है।

साइटिका में बैठने का सही तरीका क्या है?   

बैठना अगर ज़रूरी है, तो आपको अपनी पोज़िशन को बहुत ध्यान से चुनना होगा। यहाँ कुछ ऐसे तरीके बताए जा रहे हैं जो आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होंगे:

  • 90-90-90 का नियम अपनाएँ: कुर्सी पर बैठते समय यह ध्यान रखें कि आपके कूल्हे , आपके घुटने (Knees) और आपके टखने 90 डिग्री के कोण पर हों।
  • पाँव ज़मीन पर सीधे रखें: हवा में पैर लटकाकर न बैठें। आपके दोनों पाँव ज़मीन पर अच्छी तरह टिके होने चाहिए। अगर आपकी कुर्सी ऊँची है और पाँव ज़मीन तक नहीं पहुँच रहे हैं, तो पैरों के नीचे कोई छोटा स्टूल या किताबों का बंडल रख लें।
  • कमर को सपोर्ट दें: कुर्सी पर बैठते समय अपनी लोअर बैक (कमर के निचले हिस्से) और कुर्सी के बीच में एक छोटा कुशन या तौलिया रोल करके रखें। इससे आपकी रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक घुमाव (Curve) बना रहेगा और नस पर दबाव कम पड़ेगा।
  • वज़न दोनों तरफ बराबर रखें: कुर्सी पर बैठते समय एक तरफ झुककर न बैठें। अपना वज़न दोनों कूल्हों पर बराबर बाँटें।
  • बटुआ (Wallet) पीछे की जेब से निकालें: अगर आप अपनी पीछे की जेब में मोटा पर्स या मोबाइल रखकर बैठते हैं, तो आपका शरीर तिरछा हो जाता है और साइटिक नस पर सीधा दबाव पड़ता है। बैठते समय हमेशा अपनी जेबें खाली रखें।
  • हर 30 मिनट में उठें: कोई भी पोज़िशन, चाहे वह कितनी भी सही क्यों न हो, अगर आप उसमें बहुत देर तक बैठे रहेंगे तो दर्द बढ़ेगा। इसलिए, हर आधे घंटे में अलार्म लगाएँ, उठें, थोड़ा चलें और फिर वापस बैठें।

खड़े होने पर दर्द क्यों होता है?

कुछ लोगों को बैठने से ज़्यादा खड़े होने में परेशानी होती है। जब हम लंबे समय तक एक ही जगह पर खड़े रहते हैं, तो हमारी रीढ़ की हड्डी सिकुड़ने लगती है। गुरुत्वाकर्षण (Gravity) की वजह से शरीर का पूरा भार नीचे की तरफ जाता है। अगर आपकी कमर की मांसपेशियाँ कमज़ोर हैं, तो यह सारा भार आपकी साइटिक नस पर आ जाता है, जिससे पाँव में झनझनाहट, सूनापन या सुई चुभने जैसा अहसास होने लगता है।

साइटिका में खड़े होने का सही तरीका क्या है?  

अगर आपका काम ऐसा है जहाँ आपको लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता है (जैसे किचन में खाना बनाना, या किसी मशीन के पास खड़े होना), तो इन बातों का खास खयाल रखें:

  • वज़न को शिफ्ट करते रहें: एक ही जगह पर बैठकर न खड़े रहें। थोड़ी-थोड़ी देर में अपना वज़न दाएँ पाँव से बाएँ पाँव पर और बाएँ से दाएँ पाँव पर शिफ्ट करते रहें।
  • एक छोटा स्टूल पास रखें: खड़े होते समय एक छोटा स्टूल या ईंट अपने पैरों के पास रखें। बारी-बारी से अपना एक पाँव उस स्टूल पर रखें। जब आप एक पाँव थोड़ा ऊँचाई पर रखते हैं, तो आपकी कमर के निचले हिस्से से बहुत सारा दबाव अचानक कम हो जाता है। यह साइटिका के दर्द में तुरंत राहत देने वाला एक जादुई तरीका है।
  • सीना थोड़ा तानकर रखें: आगे की तरफ कंधे झुकाकर खड़े होने से बचें। अपने कंधों को हल्का सा पीछे की तरफ खींचें और सीना तानकर खड़े हों। इससे रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है।
  • सही जूतों का चुनाव करें: बिल्कुल सपाट (Flat) या बहुत ऊँची एड़ी (High Heels) वाले जूते चप्पल पहनने से बचें। ऐसे जूते पहनें जिनके अंदर एक अच्छा कुशन (Cushion) हो और जो आपके पाँव के आर्च (Arch) को सपोर्ट करते हों।

लेटने या सोने का सही तरीका क्या है?   

रात का समय साइटिका के मरीज़ों के लिए सबसे ज़्यादा खौफनाक हो सकता है। दिन भर की थकान के बाद जब इंसान बिस्तर पर जाता है, तो दर्द और ज़्यादा महसूस होने लगता है। सही पोज़िशन में न सोने से सुबह उठते ही कमर और पैरों में भयंकर अकड़न हो सकती है।

रात को अच्छी और बिना दर्द वाली नींद के लिए आपको अपनी सोने की पोज़िशन बदलनी होगी:

  • पीठ के बल सोना (सबसे बेहतरीन पोज़िशन): बिस्तर पर सीधे पीठ के बल लेट जाएँ। अब अपने दोनों घुटनों के ठीक नीचे एक या दो मोटे तकिए रख लें। ऐसा करने से आपके घुटने थोड़े मुड़ जाएँगे और आपकी कमर बिल्कुल सपाट होकर बिस्तर से चिपक जाएगी। यह पोज़िशन आपकी साइटिक नस को पूरी तरह से रिलैक्स कर देती है।
  • करवट लेकर सोना (Side Sleeping): अगर आपको सीधे सोने की आदत नहीं है, तो आप उस करवट पर लेट जाएँ जिस पैर में दर्द नहीं है। अब अपने दोनों घुटनों को हल्का सा अपनी छाती की तरफ मोड़ें। इसके बाद, अपने दोनों घुटनों के बीच में एक मोटा तकिया फँसा लें। यह तकिया आपके कूल्हों को सीधा रखेगा और आपकी रीढ़ की हड्डी को मुड़ने से बचाएगी।
  • पेट के बल सोना बिल्कुल बंद कर दें: पेट के बल सोना (उल्टा सोना) कमर के दर्द के लिए सबसे खराब पोज़िशन मानी जाती है। इससे रीढ़ की हड्डी का घुमाव बिगड़ जाता है और नस पर दबाव बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है।

खान-पान और साइटिका का गहरा संबंध क्या है?  

आपको शायद यह जानकर हैरानी हो, लेकिन आपका खान-पान भी आपके दर्द को कम या ज़्यादा कर सकता है। साइटिका मूल रूप से एक नस की 'सूजन' (Inflammation) है। अगर आप ऐसा खाना खाते हैं जो शरीर में सूजन बढ़ाता है, तो आपका दर्द भी बढ़ जाएगा।

  • क्या खाएँ: अपने भोजन में ऐसी चीज़ें शामिल करें जो सूजन कम करती हैं। हल्दी वाला दूध, अदरक, लहसुन, ओमेगा-3 से भरपूर चीज़ें (जैसे अखरोट, अलसी के बीज), और हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ। ताज़े फल खाएँ क्योंकि इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो नस को जल्दी ठीक करने में मदद करते हैं।
  • क्या न खाएँ: बहुत ज़्यादा तली-भुनी चीज़ें, मैदे से बनी चीज़ें (जैसे बिस्किट, ब्रेड, समोसे), बहुत ज़्यादा चीनी और जंक फूड शरीर में सूजन को बढ़ाते हैं। जब तक आप साइटिका से जूझ रहे हैं, इन चीज़ों से दूरी बनाकर रखें।
  • पानी खूब पिएँ: हमारी रीढ़ की हड्डी की गद्दियों (Discs) में ज़्यादातर हिस्सा पानी का होता है। अगर शरीर में पानी की कमी होगी, तो ये हड्डियाँ सूखने लगेंगी और नसों पर दबाव बढ़ाएँगी। इसलिए दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी ज़रूर पिएँ।

 साइटिका के असहनीय दर्द में राहत पहुंचाने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ 

साइटिका के असहनीय दर्द को कम करने के लिए आयुर्वेद में कई असरदार जड़ी-बूटियाँ मौजूद हैं:

  • निर्गुंडी: इसकी पत्तियाँ दर्द और सूजन को खींचने में बहुत कारगर हैं। इसका तेल या काढ़ा साइटिक नस को आराम पहुँचाता है।
  • हरसिंगार (पारिजात): इसके पत्तों का काढ़ा साइटिका का रामबाण इलाज माना जाता है। यह दबी हुई नस की सूजन घटाता है।
  • अश्वगंधा: यह कमज़ोर नसों को अंदरूनी ताकत देता है और तनाव कम करके दर्द से राहत दिलाता है।
  • गुग्गुल: कमर और पैरों की सूजन और जकड़न को खत्म करने के लिए यह जड़ी-बूटी बहुत फायदेमंद है।
  • शल्लकी: यह जोड़ों और नसों के दर्द को जड़ से कम करने में बेहतरीन मदद करती है।

साइटिका के लिए आधुनिक और आयुर्वेदिक उपचार में मुख्य अंतर

पहलू आधुनिक उपचार आयुर्वेदिक उपचार 
मुख्य उद्देश्य दर्द, सूजन और अन्य लक्षणों को नियंत्रित करना तथा कार्यक्षमता में सुधार लाना शरीर के संतुलन, जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ज़ोर
नज़रिया रोग के कारण, प्रभावित अंग और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर उपचार व्यक्ति की प्रकृति, दोषों के संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर दृष्टिकोण
उपचार तरीका दवाइयाँ, फिजियोथेरेपी, इंजेक्शन और आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी जड़ी-बूटियाँ, आहार-विहार, तेल मालिश और पंचकर्म जैसी पारंपरिक विधियाँ
असर की गति कई मामलों में अपेक्षाकृत जल्दी राहत मिल सकती है सुधार आमतौर पर धीरे-धीरे और नियमित पालन से होता है
डाइट और लाइफस्टाइल रोग के अनुसार व्यायाम, वजन नियंत्रण और जीवनशैली सुधार की सलाह आहार, दिनचर्या, योग और जीवनशैली को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है
लंबी अवधि का लक्ष्य रोग नियंत्रण, जटिलताओं की रोकथाम और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाना शरीर के संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखना

डॉक्टर के पास कब जाना ज़रूरी है? 

ज़्यादातर मामलों में साइटिका का दर्द सही पोज़िशन, आराम, सिकाई और हल्के व्यायाम से कुछ हफ्तों में ठीक होने लगता है। लेकिन कुछ स्थितियाँ ऐसी होती हैं जहाँ आपको घरेलू नुस्खे छोड़कर तुरंत किसी अच्छे आर्थोपेडिक या न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर से मिलना चाहिए।

अगर आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी नज़र आए, तो बिल्कुल भी इंतज़ार न करें:

  • पेशाब या मल पर से नियंत्रण खो देना: अगर आपको यह पता ही न चले कि कब पेशाब निकल गया, या मल रोक पाने में दिक्कत हो रही हो, तो यह एक बहुत ही गंभीर मेडिकल एमरजेंसी है इसे Cauda Equina Syndrome कहते हैं। इसमें तुरंत सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।
  • पैर का सुन्न हो जाना या कमज़ोरी आना: अगर आपका पैर बिल्कुल बेजान महसूस होने लगे, या चलते समय आपका पंजा ज़मीन पर घिसटने लगे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ।
  • दर्द का बहुत तेज़ी से बढ़ना: अगर सही पोज़िशन और आराम के बावजूद दर्द दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है और आप दर्द की वजह से रात भर सो नहीं पा रहे हैं।
  • बुखार के साथ दर्द: अगर आपको कमर और पैर में दर्द के साथ-साथ तेज़ बुखार भी आ रहा है, तो यह रीढ़ की हड्डी में किसी तरह के इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है।

निष्कर्ष 

साइटिका कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो अचानक हवा से आ गई हो। यह सालों से गलत पोज़िशन में बैठने, गलत तरीके से खड़े होने, या भारी वज़न उठाने का नतीजा होती है। इसलिए, इसका इलाज भी कोई रातों-रात होने वाला चमत्कार नहीं है। आपको अपने शरीर को समय देना होगा।बैठते समय हमेशा कुर्सी पर सीधे बैठें, कमर को सपोर्ट दें और पैरों को ज़मीन पर टिकाकर रखें। खड़े होते समय एक पाँव को छोटे स्टूल पर रखने की आदत डालें। सोते समय घुटनों के नीचे या बीच में तकिया लगाना कभी न भूलें। आगे झुककर भारी सामान उठाने की गलती भूलकर भी न करें।

आपका शरीर एक बहुत ही बेहतरीन मशीन है, जिसमें खुद को ठीक करने की गज़ब की ताकत होती है। आपको बस उसे सही पोज़िशन और सही माहौल देना है। शुरुआत में अपनी पुरानी आदतों को बदलना थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन जब आप देखेंगे कि इन छोटे-छोटे बदलावों से आपके दर्द में कितना बड़ा फर्क आ रहा है, तो आप खुद इन आदतों को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लेंगे।धैर्य रखें, सकारात्मक रहें और अपने शरीर के इशारों को समझें। सही पोज़िशन और थोड़ी सी सावधानी से आप निश्चित रूप से इस साइटिका के दर्द को हरा सकते हैं और एक बार फिर से अपनी सामान्य और दर्द-मुक्त ज़िंदगी में लौट सकते हैं।

डॉक्टर की सलाह सीधे अपने फोन पर — WhatsApp Channel से जुड़ें।

FAQs

नहीं, बहुत ज़्यादा लेटने से कमर की मांसपेशियाँ जकड़ जाती हैं, जिससे दर्द बढ़ सकता है। अपनी क्षमता के अनुसार हल्का-फुल्का चलना और सही पोज़िशन में बैठना ज़्यादा बेहतर है।

दर्द शुरू होने के शुरुआती 2-3 दिन बर्फ से ठंडी सिकाई करनी चाहिए। इसके बाद गर्म पानी की थैली (हीटिंग पैड) से सिकाई करने से नसों की सूजन में काफी आराम मिलता है।

हाँ, आयुर्वेदिक तेलों से हल्के हाथों की मालिश दर्द और जकड़न को कम करती है। लेकिन यह ध्यान रखें कि रीढ़ की हड्डी पर बहुत ज़्यादा ज़ोर या दबाव बिल्कुल न डालें।

ऐसी कुर्सी चुनें जिसकी पीठ सीधी हो। बैठते समय आपके दोनों पाँव ज़मीन पर पूरी तरह टिके होने चाहिए। कमर को सपोर्ट देने के लिए पीछे एक छोटा कुशन ज़रूर लगाएँ।

आगे की तरफ झुककर पैर की उँगलियाँ (Toe touch) छूने की कोशिश बिल्कुल न करें। इसके अलावा भारी वज़न उठाने वाले और झटके वाले व्यायाम से पूरी तरह दूर रहें।

हाँ, बहुत ज़्यादा तली-भुनी चीज़ें, बासी खाना और जंक फूड शरीर में सूजन बढ़ाते हैं। ताज़े फल, हरी सब्ज़ियाँ और हल्दी वाला दूध लेना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा।

अगर दर्द बहुत हल्का है, तो उठने-बैठने की सही पोज़िशन में रहने, थोड़ा आराम करने और हल्के स्ट्रेच करने से यह कुछ हफ्तों में अपने आप ठीक हो सकता है।

अगर तेज़ दर्द है, तो सीढ़ियाँ चढ़ने से बचना चाहिए। अगर चढ़ना बहुत ज़रूरी हो, तो रेलिंग का सहारा लें और बहुत धीरे-धीरे एक-एक कदम बढ़ाएँ।

पीठ के बल सीधे लेटें और अपने घुटनों के नीचे एक तकिया रख लें। अगर आप करवट लेकर सोते हैं, तो अपने दोनों पैरों के बीच एक मोटा तकिया फँसा लें। इससे नस पर दबाव कम पड़ता है।

बिल्कुल नहीं। ज़्यादातर लोगों को सही पोज़िशन, दवाइयों और व्यायाम से आराम मिल जाता है। सर्जरी की नौबत केवल तभी आती है जब दर्द असहनीय हो जाए, दवाइयों से आराम न मिले या पैर बिल्कुल सुन्न पड़ने लगें।

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