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Painkiller रोज़ खा रहे हैं — क्या यह आपकी किडनी को धीरे-धीरे खराब कर रहा है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह उठते ही सिर में हल्का सा भारीपन हो, ऑफिस में काम करते हुए कमर अकड़ जाए, या महिलाओं को पीरियड्स का दर्द सताए हमारा पहला कदम पानी के घूंट के साथ एक पेनकिलर Painkiller निगल लेना होता है। 15-20 मिनट में दर्द गायब हो जाता है और हम अपनी भागदौड़ भरी ज़िंदगी में वापस लौट आते हैं। इस जादुई राहत के बीच, हम यह सोचना ही भूल जाते हैं कि जिस दर्द को हमने एक छोटी सी गोली से 'सुन्न' कर दिया है, उस गोली की भारी कीमत हमारे शरीर का कौन सा अंग चुका रहा है?

यह साधारण राहत नहीं है; यह आपकी किडनी गुर्दे की उन नाज़ुक खून की नलियों और फिल्टर करने वाली इकाइयों Nephrons की खामोश चीख है, जो इन रसायनों के रोज़ाना हमले से कुचली जा रही हैं। जब पर्स या पॉकेट में पेनकिलर रखना आपकी रोज़ की आदत बन जाए, तो समझ लीजिए कि आपका शरीर 'एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी' Analgesic Nephropathy यानी दर्द निवारक दवाओं से होने वाले किडनी डैमेज की चपेट में आ रहा है, जिसे नज़रअंदाज़ करना आगे चलकर आपको डायलिसिस Dialysis के बिस्तर तक पहुँचा सकता है।

रोज़ाना पेनकिलर्स खाना शरीर और किडनी के लिए क्या संकेत देता है?

पेनकिलर्स विशेषकर NSAIDs जैसे Ibuprofen, Diclofenac, Naproxen आदि का लगातार इस्तेमाल शरीर के उस प्राकृतिक सिस्टम को बंद कर देता है, जो किडनी तक खून पहुँचाता है।

  • ब्लड फ्लो का रुकना Reduced Blood Flow: पेनकिलर्स शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिंस Prostaglandins नाम के रसायन को बनने से रोकते हैं। यह रसायन दर्द का अहसास तो कराता है, लेकिन यही किडनी तक खून का सही बहाव भी सुनिश्चित करता है। पेनकिलर खाने से किडनी की नसें सिकुड़ जाती हैं और उसे खून मिलना कम हो जाता है।
  • फिल्ट्रेशन सिस्टम का डैमेज: खून न पहुँचने से किडनी के अंदर मौजूद लाखों छोटे-छोटे फिल्टर नेफ्रॉन्स अंदर से सूखने और मरने लगते हैं। शरीर की गंदगी Toxins बाहर निकलने के बजाय खून में ही घूमने लगती है।
  • टिश्यू का मरना Papillary Necrosis: जब किडनी के अहम हिस्सों को लंबे समय तक ऑक्सीजन और खून नहीं मिलता, तो वहां के टिश्यू डैमेज होकर गलने लगते हैं, जो एक इरिवर्सिबल वापस ठीक न होने वाला डैमेज है।
  • दवाइयों का ज़हरीला प्रभाव Toxicity: किडनी हमारे शरीर का डस्टबिन है। जब आप रोज़ाना केमिकल वाली गोलियां खाते हैं, तो इन रसायनों को छानकर बाहर निकालने में किडनी को अपनी क्षमता से कई गुना ज़्यादा काम करना पड़ता है, जिससे वह थक कर कमज़ोर हो जाती है।

पेनकिलर का ओवरडोज़ और किडनी डैमेज किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति के शरीर की प्रकृति दोष और दर्द सहने की क्षमता अलग होती है। पेनकिलर्स से पड़ने वाला यह भारी दबाव आयुर्वेद के अनुसार शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान किडनी डैमेज: इस स्थिति में किडनी और 'मूत्रवह स्रोतस' Urinary channels में भयंकर रूखापन आ जाता है। यूरिन का फ्लो कम हो जाता है और पेट के निचले हिस्से या कमर में तेज़ सूखा दर्द रहता है। शरीर में पानी की कमी Dehydration होने से यह वात दोष और अधिक भड़क जाता है।
  • पित्त-प्रधान किडनी डैमेज: लगातार गर्म तासीर वाली रासायनिक गोलियां खाने से किडनी में भारी गर्मी Inflammation पैदा हो जाती है। यूरिन पास करते समय आग लगने जैसी जलन होती है, यूरिन का रंग गहरा पीला या लाल खून के अंश हो सकता है और शरीर में पित्त बढ़ने से यूरिन इन्फेक्शन UTI बार-बार होता है।
  • कफ-प्रधान किडनी डैमेज: जब किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक निकालने में पूरी तरह असमर्थ हो जाती है, तो शरीर में भयंकर कफ Water retention भर जाता है। आँखों के नीचे, पैरों के टखनों और कलाई में भारी सूजन Edema आ जाती है। इंसान हमेशा क्रोनिक फटीग Chronic fatigue और भारीपन से घिरा रहता है।

क्या आपकी किडनी में भी डैमेज के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

किडनी डैमेज रातों-रात नहीं होता। यह बहुत पहले से शरीर में अलार्म बजाती है, जिसे हम अक्सर सामान्य थकावट या उम्र का असर मानकर टाल देते हैं। अगर आप अक्सर पेनकिलर लेते हैं और रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • चेहरे और पैरों में अचानक सूजन Edema: सुबह उठने पर आँखों के नीचे भारी सूजन Puffiness या शाम तक पैरों के टखनों Ankles में सूजन आ जाना, क्योंकि किडनी शरीर का अतिरिक्त पानी बाहर नहीं निकाल पा रही है।
  • पेशाब की आदतों में बदलाव: यूरिन में बहुत ज़्यादा झाग आना प्रोटीन लीक होने का संकेत, रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना, या यूरिन की मात्रा का अचानक बहुत कम हो जाना।
  • मुँह में धातु जैसा स्वाद Metallic Taste और सांस में बदबू: जब खून में यूरिया और टॉक्सिन्स Uremia का स्तर बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, तो मुँह का स्वाद अजीब हो जाता है और भूख पूरी तरह खत्म हो जाती है।
  • कमर के पिछले हिस्से में भारी दर्द: पसलियों के ठीक नीचे कमर के दोनों तरफ Flank area एक लगातार मीठा-मीठा या तेज़ दर्द बना रहना, जो बताता है कि किडनी में सूजन या इंफेक्शन है।

पेनकिलर के इस्तेमाल में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

दर्द से तुरंत राहत पाने की जल्दबाज़ी में, मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो न केवल किडनी बल्कि लिवर और आंतों को भी स्थायी रूप से डैमेज कर देते हैं:

  • खाली पेट गोलियां खाना: दर्द होने पर बिना कुछ खाए पेनकिलर लेना पेट की परत Stomach lining को जला देता है और एसिडिटी भड़काकर सीधे किडनी के फंक्शन को धीमा करता है।
  • खुद ही डॉक्टर बनना Self-Medication: सिरदर्द की गोली के साथ बदन दर्द की गोली मिलाकर खाना, या बिना डॉक्टर से पूछे लगातार हफ्तों तक दर्द की दवाएं खाते रहना।
  • पानी कम पीना: दर्द की गोलियां खाते समय शरीर को हाइड्रेट न रखना। पानी की कमी के कारण दवाइयों का सारा केमिकल सीधा किडनी में जमा Crystallize होने लगता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर इस आदत को न रोका जाए, तो यह क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ CKD, पेट के अल्सर, और अंततः किडनी फेल्योर Renal Failure का भयंकर रूप ले लेती है, जहाँ जीवनरक्षक मशीनों के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

आयुर्वेद दर्द और पेनकिलर से होने वाले किडनी डैमेज को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी या रीनल डैमेज कहता है, आयुर्वेद उसे 'वृक्क दोष', 'मूत्रवह स्रोतस दुष्टि' और वात-पित्त के गंभीर प्रकोप के विज्ञान से गहराई से समझता है।

  • दर्द यानी वात का प्रकोप: आयुर्वेद का स्पष्ट सिद्धांत है "नास्ति रुजा विना वात" बिना वात के शरीर में कोई दर्द नहीं हो सकता। पेनकिलर वात को शांत नहीं करते, बल्कि नर्वस सिस्टम को सुन्न करके दर्द के एहसास को रोक देते हैं। अंदर ही अंदर वात बढ़ता रहता है।
  • वृक्क Kidney और ओज का क्षय: गोलियों के अत्यधिक 'उष्ण' गर्म और 'तीक्ष्ण' तेज़ स्वभाव के कारण शरीर का पित्त भड़क जाता है। यह बढ़ा हुआ पित्त किडनी के प्राकृतिक लचीलेपन और शरीर के 'ओज' Immunity and Vitality को जलाकर भस्म कर देता है।
  • आम Toxins का ज़हरीला प्रभाव: पेनकिलर जठराग्नि पाचन को मंद कर देते हैं। कमज़ोर पाचन से बनने वाला 'आम' ज़हरीला कचरा रक्त में घुलकर सीधे गुर्दों में जाकर जम जाता है, जिससे उनके फिल्टर करने वाले चैनल Srotas पूरी तरह ब्लॉक हो जाते हैं।

किडनी को डिटॉक्स करने और दर्द मिटाने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके शरीर का सबसे बड़ा पेनकिलर भी बन सकता है और किडनी को खराब करने वाला रसायन भी। किडनी को साफ रखने और दर्द को प्राकृतिक रूप से मिटाने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनाएं।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - किडनी को साफ़ करने वाले और वात-पित्त शामक क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - टॉक्सिन्स और दर्द बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, जौ Barley - किडनी के लिए बेहतरीन, मूंग दाल, दलिया। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, बहुत अधिक भारी दालें राजमा, छोले।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी वात को तुरंत शांत करता है, थोड़ा सा ऑलिव ऑयल। रिफाइंड तेल, डालडा, बहुत अधिक मक्खन या फैटी चीज़ें।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, कद्दू, परवल, मूली पत्ते सहित - यूरिन फ्लो सुधारने के लिए। पैकेटबंद फ्रोज़न सब्ज़ियाँ, बहुत अधिक टमाटर या पालक अगर यूरिक एसिड/पथरी की समस्या हो।
फल और मेवे Fruits & Nuts सेब, पपीता, तरबूज, क्रैनबेरी, रात भर भीगे हुए बादाम। डिब्बाबंद जूस, बाज़ार के रोस्टेड व हाई-सोडियम नमकीन नट्स, खट्टे फल।
पेय पदार्थ Beverages पुनर्नवा का पानी, ताज़े नारियल का पानी, जौ का पानी Barley water, सौंफ का पानी। रोज़ाना पेनकिलर के साथ चाय/कॉफी, पैकेटबंद सूप, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब।

किडनी को सुरक्षित रखने और दर्द निवारक चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किडनी को नुकसान पहुँचाए भारी से भारी दर्द को खींच लेते हैं और डैमेज हो चुकी किडनी को दोबारा ज़िंदा कर देते हैं:

  • पुनर्नवा Punarnava: नाम से ही स्पष्ट है—'पुनः नया करने वाला'। यह किडनी के डैमेज सेल्स को दोबारा ज़िंदा करने, यूरिन का फ्लो बढ़ाने और शरीर की सूजन Edema को जादुई तरीके से उतारने की सबसे बेहतरीन जड़ी-बूटी है।
  • गोक्षुर Gokshura: यह एक अद्भुत प्राकृतिक डाइयूरेटिक Diuretic और दर्द निवारक है। यह कमर दर्द को भी खींचता है और मूत्र मार्ग से सारे टॉक्सिन्स बाहर निकालकर किडनी को नई ऊर्जा देता है।
  • वरुण Varuna: यूरिनरी ट्रैक्ट और किडनी से जुड़ी किसी भी रुकावट, सूजन या डैमेज को खत्म करने के लिए वरुण की छाल का इस्तेमाल आयुर्वेद में सदियों से हो रहा है।
  • शल्लकी Shallaki और गुग्गुल Guggulu: जोड़ों के भारी दर्द, अर्थराइटिस और कमर दर्द के लिए पेनकिलर की जगह शल्लकी और गुग्गुल का प्रयोग किया जाता है। ये बिना आंतों और किडनी को डैमेज किए सूजन और दर्द को जड़ से मिटाते हैं।
  • गिलोय Giloy: गिलोय एक बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर है जो पेनकिलर्स से खून में पैदा हुई गर्मी और टॉक्सिन्स Uric Acid आदि को छानकर बाहर निकालती है और इम्युनिटी बढ़ाती है।

किडनी को साफ करने और दर्द से राहत देने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब शरीर में टॉक्सिन्स बहुत गहरे बैठ जाते हैं और दर्द गोलियों से भी ठीक नहीं होता, तो पंचकर्म की बाहरी और अंदरूनी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • बस्ती Basti - Medicated Enema: आयुर्वेद में बस्ती को 'अर्ध-चिकित्सा' कहा गया है। यह आंतों में सीधा जाकर वहां जमे वात को शांत करती है। दर्द चाहे घुटने का हो या सिर का, वात शांत होते ही दर्द गायब हो जाता है, और पेनकिलर की ज़रूरत खत्म हो जाती है।
  • विरेचन Virechana: शरीर में दवाइयों से पैदा हुई गर्मी और पित्त को पेट साफ करने की औषधियों के ज़रिए बाहर निकाला जाता है। इससे खून साफ होता है और किडनी पर फिल्टरिंग का लोड कम होता है।
  • अभ्यंग Abhyanga और पोटली मसाज: दर्द को मिटाने के लिए गोलियां खाने के बजाय, बाहर से गर्म वात-शामक औषधीय तेलों और पोटली से सिकाई की जाती है। यह सीधे दर्द वाली जगह का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाकर जकड़न को खत्म कर देती है।
  • स्वेदन Swedana: हर्बल जड़ी-बूटियों की भाप देकर पसीने के ज़रिए नसों और त्वचा में जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकाला जाता है, जिससे किडनी को आराम मिलता है।

किडनी के पूरी तरह रिपेयर होने और दर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

सालों तक पेनकिलर्स खाकर डैमेज हुई किडनी और शरीर के बिगड़े हुए दर्द निवारक तंत्र को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से शरीर का टॉक्सिन लेवल घटेगा। आपको अपने मूल दर्द Root cause में आराम मिलना शुरू होगा, जिससे आपकी पेनकिलर पर निर्भरता 70-80% तक कम हो जाएगी। सूजन घटने लगेगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और गोक्षुर-पुनर्नवा जैसे रसायनों के प्रभाव से यूरिन का फ्लो सुधरेगा। किडनी के डैमेज टिश्यू हील होने लगेंगे। आपका ब्लड प्रेशर और थकान सामान्य होने लगेगी।
  • 5-6 महीने: शरीर के अंदर ओज Vitality पूरी तरह पोषित हो जाएगा। आपका दर्द बिना किसी रासायनिक गोली के गायब रहेगा और किडनी अपने 100% प्राकृतिक रूप में बिना किसी दबाव के काम करने लगेगी।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

दर्द और किडनी के डैमेज के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के सिग्नल्स को ब्लॉक करने के लिए भारी NSAIDs पेनकिलर्स देना, और जब किडनी डैमेज हो जाए तो डायलिसिस की ओर बढ़ना। वात को शांत कर प्राकृतिक रूप से दर्द मिटाना, 'आम' को पचाना और पुनर्नवा जैसे रसायनों से किडनी की रक्षा करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया दर्द को केवल एक स्थानीय समस्या मानना और किडनी डैमेज को उसका एक बदकिस्मत 'साइड-इफेक्ट' मानना। इसे जठराग्नि की कमज़ोरी, बढ़े हुए वात दोष और विषैले रसायनों से ओज के नष्ट होने का संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल बीमारी बढ़ने तक डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं। केवल अंत में नमक और पानी कम करने की सलाह। वात-शामक डाइट, सही पोश्चर, जौ का पानी और औषधीय तेलों की मालिश को ही दर्द व किडनी इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर दर्द की गोली का असर कुछ घंटों में खत्म हो जाता है और ऑर्गन डैमेज Organ Damage का रिस्क लगातार बढ़ता रहता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है, नर्वस सिस्टम खुद को हील कर लेता है, और किडनी बिना किसी टॉक्सिन के सुरक्षित रहती है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद दर्द को प्राकृतिक रूप से मिटाकर किडनी को रिपेयर कर सकता है, लेकिन अगर आपको पेनकिलर्स के अत्यधिक इस्तेमाल के बाद अपने शरीर में ये कुछ गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • पेशाब का बिल्कुल रुक जाना या खून आना: अगर आपको यूरिन पास करने में भारी तकलीफ हो रही है या पेशाब में साफ तौर पर खून Hematuria दिखाई दे रहा है।
  • सांस लेने में भारी तकलीफ: जब किडनी पानी नहीं निकाल पाती, तो वह पानी फेफड़ों में भरने लगता है, जिससे बैठे-बैठे भी सांस फूलने लगती है।
  • पीठ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द: कमर के एक या दोनों तरफ इतना भयंकर दर्द होना कि बुखार आ जाए और उल्टी Vomiting होने लगे।
  • अत्यधिक बेहोशी या उनींदापन: शरीर में यूरिया Urea और ज़हर इतना बढ़ जाना कि मरीज़ को होश न रहे और हमेशा नींद आती रहे।

निष्कर्ष

शरीर में होने वाला कोई भी दर्द कोई बीमारी नहीं, बल्कि आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपका वात दोष भड़क चुका है और कुछ तो गलत है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना पेनकिलर्स की कृत्रिम गोलियों से दबाते हैं, तो आप अपनी समस्या को हील करने के बजाय, अपनी किडनी के उन लाखों नाज़ुक फिल्टरों को स्थायी रूप से मार रहे होते हैं। इस दर्द और ऑर्गन डैमेज के खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपने दर्द के मूल कारण को समझें, डाइट में घी और जौ का पानी शामिल करें। दर्द को सुन्न करने के बजाय अभ्यंग मालिश और शल्लकी, पुनर्नवा व गोक्षुर जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करके अपने शरीर को प्राकृतिक रूप से हील होने दें। दो पल की राहत के लिए अपनी किडनी की कुर्बानी न दें। अपने शरीर को स्थायी रूप से ताक़तवर और दर्द-मुक्त बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

पेनकिलर्स शरीर में उन रसायनों (Prostaglandins) को ब्लॉक कर देते हैं जो किडनी तक खून का सही बहाव बनाए रखते हैं। खून का बहाव रुकने से किडनी के टिश्यू सूखने लगते हैं और टॉक्सिन्स बाहर निकालने की क्षमता घट जाती है।

आमतौर पर डॉक्टर की सलाह से एक-दो दिन सही डोज़ में पेनकिलर लेने से स्थायी डैमेज नहीं होता। लेकिन खाली पेट भारी डोज़ लेना या बिना सोचे-समझे महीनों तक रोज़ाना गोली खाना एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी (किडनी डैमेज) को जन्म देता है।

आयुर्वेद स्पष्ट रूप से मानता है कि शरीर में कहीं भी होने वाले दर्द का मुख्य कारण बढ़ा हुआ वात दोष (Vata Dosha) है। वात के असंतुलन से स्रोतस (channels) में रूखापन और रुकावट आती है, जिससे दर्द पैदा होता है।

हाँ। सिरदर्द अक्सर पेट में गैस (अपान वात) या तनाव के कारण होता है। गोली खाने की जगह नाभि और माथे पर शुद्ध देसी घी या बादाम रोगन से मालिश करें, त्रिफला का सेवन करें और अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें।

पुनर्नवा किडनी के मरे हुए सेल्स को पुनः नया (Rejuvenate) करती है। यह एक बेहतरीन प्राकृतिक मूत्रल (Diuretic) है, जो किडनी की सूजन कम करती है और खून से यूरिया व यूरिक एसिड को छानकर बाहर निकालती है।

बिल्कुल। पेट में रसायन डालने से अच्छा है कि आप बाहरी मालिश करें। जोड़ों के दर्द के लिए महानारायण तेल, प्रसारिणी तेल या शुद्ध तिल के तेल से मालिश करके गर्म सिकाई (Swedana) करना सबसे सुरक्षित और असरदार तरीका है।

अगर आपको बिना किसी कारण भारी थकान रहती है, सुबह उठने पर आँखों के नीचे सूजन (Puffiness) दिखती है, पैरों के टखनों में सूजन रहती है और यूरिन में झाग आता है, तो यह कमज़ोर किडनी के स्पष्ट संकेत हैं।

नहीं। अगर इन्हें किसी योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह (सही अनुपान के साथ) से लिया जाए, तो ये बिल्कुल सुरक्षित हैं। ये केमिकल पेनकिलर्स की तरह किडनी का ब्लड फ्लो नहीं रोकते, बल्कि वात और सूजन को जड़ से प्राकृतिक रूप से खत्म करते हैं।

जौ (Barley) आयुर्वेद में किडनी और मूत्रवह स्रोतस के लिए सर्वोत्तम अनाज माना गया है। जौ का पानी शरीर से सारे टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है, यूरिन के फ्लो को साफ़ करता है और किडनी को ठंडी तासीर व पोषण देता है।

तुरंत पेनकिलर की ओर भागने के बजाय, अपने पाचन (जठराग्नि) की जाँच करें। अक्सर पेट साफ न होने से आम (टॉक्सिन्स) बनता है जो नसों में जाकर दर्द करता है। गर्म पानी पिएं, हल्का सुपाच्य भोजन लें और जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर से अपनी प्रकृति के अनुसार सही इलाज समझें।

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