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क्या आपका Reading Glasses Posture Cervical बिगाड़ रहा है — 40+ की एक छिपी समस्या

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 14 May, 2026
  • category-iconUpdated on 14 May, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5004

40 की उम्र के बाद पास की नज़र कमज़ोर होना और रीडिंग ग्लासेस (Reading Glasses) लगना एक बहुत ही आम बात है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पास का चश्मा लगाकर पढ़ने या स्क्रीन देखने का आपका गलत तरीका (Posture) आपकी गर्दन को भयंकर रूप से बर्बाद कर रहा है? इसे 'रीडिंग ग्लासेस पोस्चर' कहते हैं, जो 40+ की उम्र में सर्वाइकल (Cervical Spondylosis) की सबसे बड़ी और छिपी हुई वजह बन चुका है। एलोपैथी में इस दर्द को दबाने के लिए अक्सर भारी पेनकिलर्स (Painkillers) या सर्वाइकल कॉलर (Cervical Collar) दे दिए जाते हैं। ये तरीके कुछ समय के लिए दर्द को सुन्न ज़रूर करते हैं, लेकिन जड़ पर काम न करने से माँसपेशियाँ अंदर से कमज़ोर हो जाती हैं और नसों पर दबाव बढ़ता ही जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह भयंकर समस्या गलत पोस्चर के कारण 'वात' दोष के भड़कने और गर्दन (ग्रीवा) में जकड़न से जुड़ी है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और पंचकर्म से आपकी गर्दन की मांसपेशियों  को ताकत देकर इस समस्या को जड़ से मिटाता है, ताकि आपकी प्राकृतिक सेहत वापस लौट सके।

Reading Glasses Posture और Cervical का असली कनेक्शन क्या है?

जब 40 की उम्र के बाद पास का चश्मा (Bifocals या Progressives) लगता है, तो लोग अक्सर चश्मे के निचले हिस्से से पढ़ने के लिए अपनी ठुड्डी (Chin) को अजीब तरीके से ऊपर उठाते हैं या फोन/लैपटॉप देखने के लिए गर्दन को बहुत ज़्यादा आगे झुका लेते हैं। सिर का वज़न लगभग 5 से 6 किलो होता है। जब आप चश्मे से देखने के लिए सिर को आगे या पीछे गलत तरीके से झुकाते हैं, तो गर्दन (Cervical Spine) पर 20 से 25 किलो तक का भयंकर अतिरिक्त वज़न पड़ता है। लगातार ऐसा करने से गर्दन की डिस्क (Disc) घिसने लगती है, नसें दब जाती हैं और सर्वाइकल का भयंकर दर्द शुरू हो जाता है। पेनकिलर का इस्तेमाल सिर्फ बाहरी इलाज है, जबकि असली गड़बड़ी शरीर के अंदर वात के भड़कने और मांसपेशियों  के सूखने में चल रही होती है।

Reading Glasses Posture के भयंकर प्रकार

चश्मे के इस्तेमाल के दौरान लोग मुख्य रूप से तीन तरह के भयंकर पोस्चर अपनाते हैं, जो गर्दन को बर्बाद करते हैं:

  • चिन-अप पोस्चर (Chin-up Posture): प्रोग्रेसिव या बाइफोकल चश्मे के निचले हिस्से से बारीक चीज़ें पढ़ने के लिए लोग अक्सर अपनी ठुड्डी (Chin) को ऊपर उठा लेते हैं। यह स्थिति गर्दन के पीछे की नसों को भयंकर रूप से दबा देती है।
  • फॉरवर्ड हेड पोस्चर (Forward Head Posture): चश्मा लगाकर लैपटॉप या फोन स्क्रीन को साफ देखने के लिए सिर को आगे की तरफ झुकाना। इसे 'टेक्स्ट नेक' (Text neck) भी कहते हैं, जिससे गर्दन और कंधों पर कई गुना ज़्यादा वज़न पड़ता है।
  • बेड-रीडिंग पोस्चर (Bed-reading Posture): लेटकर सिर के नीचे ऊँचे तकिए रखकर चश्मे से मोबाइल देखना या किताब पढ़ना, जो सर्वाइकल स्पाइन के प्राकृतिक घुमाव (Curve) को पूरी तरह बिगाड़ कर उसे सीधा कर देता है।

Cervical में दिखने वाले इन शारीरिक लक्षणों के भयंकर संकेत

गलत पोस्चर के कारण जब नसें दबती हैं, तो शरीर द्वारा दिए जाने वाले भयंकर लक्षण इस प्रकार हैं:

  • भयंकर गर्दन दर्द और अकड़न: सुबह उठने पर गर्दन का पूरी तरह जाम हो जाना और उसे दाएँ-बाएँ मोड़ने में भयंकर तकलीफ होना।
  • हाथों और उँगलियों में सुन्नपन: नसों के दबने से दर्द का कंधों से होते हुए हाथों और उँगलियों तक जाना और सुई चुभने जैसी झुनझुनाहट (Numbness) महसूस होना।
  • चक्कर आना (Vertigo): जब गर्दन की नसें दिमाग तक पूरा खून नहीं पहुँचा पातीं, तो अचानक से भयंकर चक्कर आते हैं और आँखों के आगे अंधेरा छा जाता है।
  • सिर के पीछे दर्द: गर्दन से शुरू होकर भयंकर दर्द सिर के पिछले हिस्से (Occipital region) तक जाता है, जिससे सारा दिन सिर में भारीपन रहता है।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत अपनी जाँच कराएँ और चिकित्सक से परामर्श लें।

40+ में Cervical भड़कने के असली कारण

गर्दन की नसें दबने और दर्द के पीछे गहरे अंदरूनी कारण होते हैं:

  • वात दोष का भयंकर असंतुलन: गलत पोस्चर में घंटों बैठने से गर्दन की मांसपेशियों  का रक्त संचार रुक जाता है, जिससे वहाँ वात भड़क कर भयंकर जकड़न पैदा करता है।
  • हड्डियों का कमज़ोर होना (धातु क्षय): 40 की उम्र के बाद प्राकृतिक रूप से अस्थि धातु (हड्डियाँ) कमज़ोर होने लगती हैं, जिससे डिस्क जल्दी घिसती है।
  • कमज़ोर 'अग्नि' और 'आम' का संचय: पेट की खराबी और मंद अग्नि के कारण शरीर में बना 'आम' (Toxins) जोड़ों में जाकर बैठ जाता है और सर्वाइकल की सूजन को कई गुना बढ़ा देता है।
  • लगातार स्क्रीन टाइम: बिना पलक झपकाए गलत तरीके से चश्मा लगाकर फोन या लैपटॉप देखना गर्दन की मांसपेशियों  को पूरी तरह थका देता है।

Cervical को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

इस भयंकर स्थिति को अगर सिर्फ 'थोड़ी सी थकावट' मानकर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • स्लिप डिस्क (Slip Disc): लगातार गलत दबाव पड़ने से गर्दन की डिस्क अपनी जगह से खिसक कर भयंकर रूप से नसों को दबा सकती है, जिससे सर्जरी की नौबत आ जाती है।
  • हाथों का काम करना बंद कर देना: अगर नसें बहुत लंबे समय तक दबी रहें, तो हाथों की माँसपेशियाँ सूखने लगती हैं और हाथों से सामान छूटने लगता है।
  • क्रोनिक वर्टिगो (Chronic Vertigo): गर्दन से दिमाग को जाने वाली नसों के ब्लॉक होने से आपको कभी भी, कहीं भी भयंकर चक्कर आ सकता है, जो गिरने का खतरा बढ़ाता है।

Cervical पर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आयुर्वेद में सर्वाइकल की इस समस्या को 'ग्रीवा हुंडना' (गर्दन की जकड़न) और 'अपबाहुक' से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर का वात दोष जब दूषित होकर गर्दन (ग्रीवा) के हिस्से में जम जाता है, तो वह वहाँ की नसों (स्नायु) और मांसपेशियों  को सुखा देता है। जब इसके साथ 'आम' मिलता है, तो भयंकर सूजन आती है। जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि जकड़न वात की वजह से है या दूषित कफ की वजह से। आयुर्वेद में बस दर्द की गोली देकर नसों को सुन्न करना मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, गर्दन की मांसपेशियों  को ताकत मिले और नसें प्राकृतिक रूप से खुलें।

जीवा आयुर्वेद Cervical को संतुलित करने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को आ रहे चक्कर, हाथों में सुन्नपन और गर्दन मोड़ने में हो रही तकलीफ की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे चश्मे के प्रकार और खाई जा रही दर्द निवारक दवाओं का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित वात दोष को पकड़ने के बाद ही 'अग्नि' को तेज़ करने और नसों को खोलने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

नसों को प्राकृतिक रूप से खोलने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में गर्दन की सूजन कम करने, नसों को ताकत देने और वात को काटने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • रास्ना (Rasna): यह वात रोगों के लिए आयुर्वेद की सबसे अचूक जड़ी-बूटी है। यह सर्वाइकल के भयंकर दर्द और जकड़न को जड़ से खत्म करने में मदद करती है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): 40+ की उम्र में यह कमज़ोर पड़ी नसों और मांसपेशियों  को अंदरूनी ताकत देता है और सर्वाइकल के दर्द से तुरंत राहत दिलाता है।
  • गुग्गुल (Guggulu): यह शरीर से दूषित 'आम' को बाहर निकालता है और गर्दन की सूजी हुई डिस्क की सूजन को तेज़ी से सोख लेता है।
  • शल्लकी (Shallaki): यह एक बेहतरीन प्राकृतिक पेनकिलर है, जो बिना लिवर को नुकसान पहुँचाए जोड़ों और नसों के दर्द को कम करती है।

गर्दन को ताकत देने वाली पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, वात को 'रीसेट' (Reset) करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • ग्रीवा बस्ती (Greeva Basti): सर्वाइकल के लिए यह सबसे चमत्कारी इलाज है। गर्दन के पीछे उड़द की दाल का घेरा बनाकर उसमें गर्म औषधीय तेल भरा जाता है। यह तेल सीधे घिसी हुई डिस्क और सूखी नसों को पोषण देता है और भयंकर जकड़न तुरंत खोल देता है।
  • नस्य (Nasya): नाक में औषधीय तेल (अणु तैल) की बूँदें डालना गर्दन से ऊपर के सभी रोगों के लिए अचूक चिकित्सा है। यह सर्वाइकल के कारण आने वाले चक्कर और सिरदर्द को तुरंत रोकता है।

Cervical के ट्रिगर्स को खत्म करने वाला शुद्ध आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि इस बीमारी में आहार ही आपकी सबसे बड़ी दवा है:

क्या खाएँ?

  • गर्म और वात नाशक भोजन: मूंग की दाल, हल्का गर्म सूप और गाय का शुद्ध घी आहार में शामिल करें, जो शरीर में चिकनाहट बढ़ाते हैं।
  • लहसुन और हल्दी: लहसुन की कली और हल्दी वाला दूध नसों की भयंकर सूजन को तेज़ी से कम करता है।
  • बादाम और अखरोट: ये नसों को मज़बूत करते हैं और दिमाग की कमज़ोरी को दूर करते हैं।

क्या न खाएँ?

  • ठंडी और वात बढ़ाने वाली चीज़ें: फ्रिज का ठंडा पानी, दही, और आइसक्रीम का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, क्योंकि ये मांसपेशियों  को भयंकर रूप से सिकोड़ देते हैं।
  • बासी और रूखा भोजन: राजमा, चने और बासी खाना पेट में गैस (वात) बनाते हैं, जो सीधे गर्दन के दर्द को भड़का देता है।
  • मैदा और खट्टी चीज़ें: अचार और मैदे से बनी चीज़ें शरीर में भयंकर 'आम' पैदा करती हैं, जो रिकवरी को रोक देती हैं।

जीवा आयुर्वेद में गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ सर्वाइकल का एक्स-रे देखकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, चक्कर आने और उँगलियों के सुन्न होने को आराम से सुना जाता है।
  • आपके काम करने के तरीके (Posture) और चश्मे के इस्तेमाल की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, नींद और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर 'आम' और दूषित वात के स्तर का पता लगाया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर गर्दन में दर्द और जकड़न अभी शुरू हुई है, तो सही पोस्चर अपनाने और दवाइयों से 4 से 6 हफ्तों में ही सूजन और दर्द कम होने लगता है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर सर्वाइकल भयंकर है, उँगलियाँ सुन्न रहती हैं और चक्कर आते हैं, तो वात को शांत करने और नसों को खोलने में 3 से 6 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों (अश्वगंधा, रास्ना), ग्रीवा बस्ती और वात-नाशक आहार का कड़ाई से पालन करता है, तो दर्द हमेशा के लिए खत्म हो जाता है और कॉलर की ज़रूरत कभी नहीं पड़ती।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।

आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य पेनकिलर्स से दर्द को अस्थायी रूप से कम करना रास्ना और अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों से नसों और मांसपेशियों को प्राकृतिक ताकत देना
नज़रिया समस्या को केवल घिसी हुई डिस्क या सर्वाइकल बदलाव तक सीमित मानना इसे वात प्रकोप, गलत पोस्चर और धातु की कमजोरी से जोड़कर देखना
उपचार तरीका कॉलर, पेनकिलर्स और फिजियोथेरेपी पर ज़ोर शल्लकी, ग्रीवा बस्ती और आयुर्वेदिक थेरेपी से अंदरूनी पोषण व संतुलन पर ध्यान
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट और दिनचर्या पर सीमित फोकस घी, सूप और वात-शामक आहार को रिकवरी का महत्वपूर्ण आधार मानना
लंबा असर लंबे समय तक दवाओं से दुष्प्रभाव या कमजोरी की संभावना गर्दन की ताकत, लचीलापन और लंबे समय तक आराम बनाए रखने पर ज़ोर

डॉक्टर की सलाह कब लें?

सर्वाइकल में कुछ संकेत भयंकर खतरे को बताते हैं, ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • उँगलियों का सुन्नपन इतना बढ़ जाए कि हाथ से चाय का कप या सामान छूटने लगे।
  • अचानक से भयंकर चक्कर आएँ और उठते-बैठते संतुलन बिगड़ने लगे।
  • गर्दन का दर्द कंधों से होता हुआ सीने (Chest) की तरफ जाने लगे।
  • गर्दन को हल्का सा भी हिलाने पर बिजली के झटके (Electric shock) जैसा भयंकर दर्द महसूस हो।

निष्कर्ष:

आयुर्वेद के हिसाब से 40+ की उम्र में रीडिंग ग्लासेस के गलत पोस्चर से होने वाला सर्वाइकल दर्द मुख्य रूप से बिगड़े हुए 'वात' दोष और सूखी हुई नसों की समस्या है। सिर्फ पेनकिलर खाकर या कॉलर लगाकर दर्द को दबाने से आपकी नसें कभी ताकतवर नहीं बनेंगी और बीमारी स्लिप डिस्क में बदल सकती है। आयुर्वेदिक इलाज में नसों को अंदर से ताकत देना, अश्वगंधा और रास्ना जैसी चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ, ग्रीवा बस्ती और वात-नाशक आहार सबसे ज़्यादा आवश्यक है, जिससे आपकी गर्दन प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहे और आप बिना किसी दर्द के अपना काम कर सकें।

FAQs

चश्मे से बारीक अक्षर देखने के लिए लोग अक्सर अपनी ठुड्डी ऊपर उठाते हैं या सिर आगे झुकाते हैं। इस गलत पोस्चर से गर्दन पर 20-25 किलो का भयंकर दबाव पड़ता है, जिससे नसें दबने लगती हैं और दर्द शुरू हो जाता है।

हाँ, अगर इसे सही तरीके से एडजस्ट न किया गया हो। प्रोग्रेसिव चश्मे में नीचे के हिस्से से पढ़ना होता है, जिसके लिए लोग अपनी गर्दन को भयंकर रूप से पीछे की तरफ झुकाते हैं, जो सर्वाइकल का सीधा कारण है।

सामान्य नहीं, बल्कि यह एक भयंकर स्थिति है। जब गर्दन की दबी हुई नसें दिमाग तक खून और ऑक्सीजन नहीं पहुँचा पातीं, तब भयंकर चक्कर आते हैं। इसका नस्य पंचकर्म से बहुत अच्छा इलाज होता है।

बिल्कुल। आयुर्वेद में वात को शांत करने वाली जड़ी-बूटियों और 'ग्रीवा बस्ती' की मदद से गर्दन की जकड़न और नसों की सूजन को बिना किसी सर्जरी के प्राकृतिक रूप से खोला जा सकता है।

गर्दन से निकलने वाली नसें ही हमारे हाथों और उँगलियों तक जाती हैं। जब गर्दन की कोई डिस्क खिसक कर इन नसों को दबाती है, तो हाथों में सुई चुभने जैसी भयंकर झुनझुनाहट और सुन्नपन महसूस होता है।

सर्वाइकल के मरीज़ों को बहुत ऊँचा या कड़क तकिया बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। गर्दन के प्राकृतिक घुमाव को सपोर्ट करने वाला पतला और मुलायम तकिया ही इस्तेमाल करें।

यह आयुर्वेद की एक चमत्कारी पंचकर्म थेरेपी है। इसमें गर्दन के पीछे उड़द की दाल का घेरा बनाकर गर्म औषधीय तेल भरा जाता है। यह तेल वात को शांत करता है और सूखी नसों को पोषण देकर भयंकर जकड़न खोलता है।

इस उम्र में हड्डियों को अंदरूनी पोषण देने के लिए दूध, गाय का शुद्ध घी, और अश्वगंधा जैसी वात-नाशक जड़ी-बूटियों का रोज़ाना सेवन करना चाहिए। ठंडी चीज़ों से बचना चाहिए।

हाँ। फोन देखते समय लोग अक्सर 'फॉरवर्ड हेड पोस्चर' (टेक्स्ट नेक) में होते हैं। सिर का भारीपन गर्दन की मांसपेशियों  को खींच देता है, जिससे वात भड़कता है और दर्द कई गुना बढ़ जाता है।

जी हाँ। आयुर्वेद सिर्फ दर्द को नहीं दबाता, बल्कि खराब पोस्चर सुधारने, वात को जड़ से खत्म करने और मांसपेशियों  को ताकत देने का काम करता है, जिससे सर्वाइकल का पक्का इलाज संभव हो पाता है।

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