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गर्मी और AC से Dry Eyes - Eye Drops के बिना उपाय

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

गर्मियों की चिलचिलाती धूप से बचने के लिए जैसे ही हम अपने घर या ऑफिस के एयर कंडीशनर (AC) वाले कमरे में कदम रखते हैं, तो शरीर को एक बड़ी राहत मिलती है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि इस ठंडी हवा के बीच आपकी आँखें धीरे-धीरे भारी होने लगती हैं, उनमें किरकिरापन आ जाता है और ऐसा लगता है जैसे किसी ने आँखों में रेत डाल दी हो?

ज़्यादातर लोग इसे महज़ स्क्रीन की थकान या नींद की कमी मानकर बार-बार पानी के छींटे मारते हैं या बाज़ार से आई ड्रॉप्स (Eye drops) लाकर डालना शुरू कर देते हैं। लेकिन यह आँखों का सूखना कोई छोटी समस्या नहीं है, बल्कि यह आपकी नाज़ुक आँखों की प्राकृतिक नमी छिन जाने का एक गंभीर अलार्म है, जिसे केवल केमिकल वाले ड्रॉप्स से हमेशा के लिए नहीं भरा जा सकता।

गर्मियों में AC और तेज़ धूप आपकी आँखों को कैसे सुखा रहे हैं?

गर्मी का मौसम और एयर कंडीशनर की कृत्रिम ठंडी हवा का कॉम्बिनेशन हमारी आँखों की नमी (Tear film) का सबसे बड़ा दुश्मन है। जब आप इन दोनों के बीच अपना ज़्यादातर समय बिताते हैं, तो आपकी आँखों के अंदर ये गतिविधियाँ ज़िम्मेदार होती हैं:

  • AC की सूखी हवा (Dehumidification): एयर कंडीशनर कमरे को ठंडा करने के लिए हवा की सारी नमी (Moisture) खींच लेता है। इस सूखी हवा में लगातार बैठने से आँखों की बाहरी सतह से आंसू बहुत तेज़ी से वाष्पीकृत (Evaporate) होने लगते हैं, जिससे भयंकर रूखापन आता है।
  • तेज़ धूप और यूवी किरणें (UV Rays): जब आप बिना चश्मे के चिलचिलाती धूप में निकलते हैं, तो गर्म हवा के थपेड़े और तेज़ यूवी किरणें आँखों के प्राकृतिक टीयर फिल्म (Tear film) को झुलसा देती हैं।
  • पलकें कम झपकाना (Reduced Blinking): ऑफिस में लगातार कुर्सी पर बैठे रहने और कंप्यूटर स्क्रीन को लगातार घूरने के कारण आप सामान्य से 60% कम पलकें झपकाते हैं। पलक झपकाने से ही आँखों में तेल (Lipid) और पानी फैलता है, जो रुक जाने से आँखें सूख जाती हैं।

Dry Eyes के ये खतरनाक प्रकार आपको कैसे परेशान कर सकते हैं?

ड्राई आइज़ (Dry Eyes) केवल एक तरह की नहीं होती। नमी खोने के कारण आपकी आँखें इसे अलग-अलग तरह से महसूस करती हैं और यह बीमारी मुख्य रूप से इन प्रकारों में बँटी होती है:

  • इवेपोरेटिव ड्राई आई (Evaporative Dry Eye): यह सबसे आम प्रकार है। इसमें आँखों में पानी तो बनता है, लेकिन पलकों के किनारों पर मौजूद तेल ग्रंथियाँ (Meibomian glands) ब्लॉक हो जाती हैं। तेल की परत न होने के कारण आँसू हवा और AC के संपर्क में आते ही तुरंत उड़ जाते हैं।
  • एक्वियस टियर डेफिशियेंसी (Aqueous Tear Deficiency): इस स्थिति में आपकी टियर ग्लैंड्स (Tear glands) पर्याप्त मात्रा में पानी (Aqueous fluid) ही नहीं बना पातीं। यह अक्सर बढ़ती उम्र या किसी ऑटोइम्यून बीमारी के कारण होता है।
  • मिक्स्ड ड्राई आई: जब एसी की सूखी हवा और भयंकर स्क्रीन टाइम एक साथ मिलते हैं, तो आँखों में तेल और पानी दोनों की ही कमी हो जाती है, जो सबसे ज़्यादा दर्दनाक स्थिति पैदा करती है।

आँखों की नमी खत्म होने पर शरीर क्या गंभीर संकेत देता है?

जब आँखों की प्राकृतिक लुब्रिकेशन खत्म हो जाती है, तो शरीर कुछ ऐसे खामोश अलार्म बजाता है जिन्हें केवल आई ड्रॉप्स से नहीं दबाना चाहिए। इन संकेतों को कभी नज़रअंदाज़ न करें:

  • भयंकर किरकिरापन और जलन: आँखों में हमेशा ऐसा महसूस होना मानो कोई धूल का कण या पलक का बाल अंदर फँस गया हो, जो बार-बार रगड़ने पर भी नहीं निकलता।
  • लगातार आँखों से पानी बहना (Reflex Tearing): यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन जब आँखें बहुत ज़्यादा सूख जाती हैं, तो दिमाग इमरजेंसी में एक्स्ट्रा आंसू भेजता है। लेकिन इन आंसुओं में तेल नहीं होता, इसलिए ये गालों पर बह जाते हैं और आँखें फिर सूखी रह जाती हैं।
  • रोशनी के प्रति अतिसंवेदनशीलता: सूरज की तेज़ रोशनी या लैपटॉप की स्क्रीन आँखों में भयंकर रूप से चुभने लगती है, जिससे पूरा दिन ब्रेन फॉग और सिर में भारीपन महसूस होता है।
  • धुंधला दिखना (Blurred Vision): दिन के अंत तक आँखों में इतना क्रोनिक फटीग आ जाता है कि चीज़ें साफ दिखना बंद हो जाती हैं और फोकस करने में दिक्कत आती है।

आँखों की जलन से बचने के लिए लोग क्या बड़ी गलतियाँ करते हैं?

आँखों की जलन से तुरंत राहत पाने की बेताबी में लोग अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो आगे चलकर उनकी आँखों की रोशनी और नसों को स्थायी नुकसान पहुँचाते हैं:

  • आर्टिफिशियल टीयर्स (Eye Drops) की लत: बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से केमिकल वाले आई ड्रॉप्स लाकर रोज़ डालना। लंबे समय तक प्रिजर्वेटिव्स (Preservatives) वाले ड्रॉप्स इस्तेमाल करने से आँखों के अपने आँसू बनाने की क्षमता (Natural tear production) हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।
  • आँखों को ज़ोर से मलना (Rubbing): खुजली होने पर लोग आँखों को भयंकर रूप से रगड़ते हैं। सूखी आँखों को रगड़ने से कॉर्निया (Cornea) छिल सकता है और वहाँ खुजली वाले इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
  • ठंडे पानी के भयंकर छींटे मारना: लोग मानते हैं कि आँखों में ठंडे पानी के तेज़ छींटे मारने से आँखें साफ होती हैं, लेकिन यह प्राकृतिक टियर फिल्म (Tear film) को पूरी तरह धो देता है, जिससे आँखें और ज़्यादा सूखी और लाल हो जाती हैं।

आयुर्वेद आँखों के सूखने (Dry Eyes) को कैसे समझता है?

आधुनिक चिकित्सा जिसे केवल टियर फिल्म का सूखना मानती है, आयुर्वेद उसे शुष्कअक्षिपाक कहता है और इसे शरीर में बढ़े हुए वात और पित्त के भयंकर असंतुलन के रूप में समझता है:

  • वात दोष का प्रकोप: आँखों में प्राकृतिक स्निग्धता (नमी/चिकनाई) बनाए रखना कफ का काम है, लेकिन जब AC और तेज़ हवाओं के कारण वात दोष भड़कता है, तो वह कफ को सुखाकर आँखों की नसों में भयंकर रूखापन और नसों की कमज़ोरी पैदा कर देता है।
  • आलोचक पित्त का भड़कना: हमारी आँखों में आलोचक पित्त निवास करता है जो दृष्टि (Vision) के लिए ज़िम्मेदार है। जब स्क्रीन की नीली रोशनी और गर्मियों की गर्मी शरीर पर हावी होती है, तो यह पित्त भड़क कर आँखों में भयंकर जलन पैदा करता है।
  • मज्जा धातु और स्ट्रेस: आँखें सीधे मस्तिष्क और मज्जा धातु (Nervous tissue) से जुड़ी हैं। अत्यधिक मानसिक तनाव और खराब पोश्चर में बैठकर काम करने से नर्वस सिस्टम थक जाता है, जो सीधे आँखों की नमी को खत्म कर देता है।

आँखों को प्राकृतिक नमी देने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आँखों की नमी वापस लाने के लिए आपको अपनी आयुर्वेदिक डाइट में ऐसे स्निग्ध (Lubricating) और विटामिन-ए से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना होगा, जो आँखों को अंदर से हाइड्रेट करें:

आहार की श्रेणी क्या खाएँ (फायदेमंद - आँखों को चिकनाई देने वाले) क्या न खाएँ (ट्रिगर फूड्स - रूखापन और वात बढ़ाने वाले)
वसा और मेवे (Fats & Nuts) देसी गाय का शुद्ध घी (आँखों के लिए सबसे बड़ा अमृत), भीगे हुए बादाम, अखरोट। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा बाज़ार का रूखा और पैकेटबंद नमकीन।
फल (Fruits) पपीता, उबला हुआ सेब, मीठे अंगूर, आँवला (Vitamin C और रसायन)। खट्टे और कच्चे फल, बहुत ज़्यादा ठंडे फ्रिज के फल।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) गाजर, लौकी, कद्दू, परवल, पालक (अच्छी तरह पकी हुई)। कच्चा सलाद भारी मात्रा में (वात बढ़ाता है), बहुत ज़्यादा आलू या सूखी सब्ज़ियाँ।
अनाज (Grains) पुराना चावल, मूंग दाल, जौ (Barley), ओट्स। मैदा, वाइट ब्रेड, बासी और सूखे बिस्कुट।
पेय पदार्थ (Beverages) गुनगुना पानी, रात को दूध (घी के साथ), धनिए और सौंफ का पानी। अत्यधिक डार्क कॉफी, बर्फ का ठंडा पानी, शराब और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स।

आँखों की रोशनी और नमी बढ़ाने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई चक्षुष्य (आँखों के लिए लाभकारी) रसायन दिए हैं, जो बिना किसी कृत्रिम ड्रॉप के आँखों की जलन को शांत करते हैं और नमी को रोक कर रखते हैं:

  • त्रिफला: यह आँखों के लिए आयुर्वेद का सबसे बड़ा वरदान है। त्रिफला का पानी (रात में भिगोकर सुबह छानकर) आँखों को धोने के लिए इस्तेमाल करने से पलकों की रुकी हुई तेल ग्रंथियाँ खुल जाती हैं और आँखों का पित्त तुरंत शांत होता है।
  • अश्वगंधा: जब स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण आँखों की नसें और दिमाग थक जाता है, तो अश्वगंधा मज्जा धातु को ताक़त देता है और अकारण एँग्जायटी को कम करके नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करता है।
  • गिलोय: यह खून से गर्मी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है। अगर आपकी आँखें एलर्जी या रूखेपन के कारण अक्सर लाल रहती हैं, तो गिलोय इम्यूनिटी को बढ़ाकर सूजन को कम करती है।
  • शतावरी: आँखों में जब वात भड़क कर भयंकर खुश्की पैदा कर देता है, तो शतावरी शरीर के प्राकृतिक द्रव्यों (Fluids) को रिस्टोर करती है और आँखों को अंदरूनी ठंडक देती है।

आँखों की खुश्की दूर करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब आई ड्रॉप्स असर करना बंद कर दें और ड्राई आइज़ भयंकर रूप ले लें, तो पंचकर्म की ये क्लासिकल थेरेपीज़ आँखों की नसों को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • नेत्र तर्पण (Netra Tarpana): यह ड्राई आइज़ का सबसे अचूक इलाज है। इसमें आँखों के चारों ओर उड़द की दाल का एक घेरा बनाकर उसमें गुनगुना औषधीय त्रिफला घृत (घी) भरा जाता है। यह आँखों को भयंकर खुश्की से निकालकर उन्हें गहरा पोषण (Deep lubrication) देता है।
  • नस्य थेरेपी: आयुर्वेद में नासिका को सिर का द्वार माना गया है। नाक में अणु तेल या बादाम रोगन की बूंदें डालने से यह सीधे मस्तिष्क और आँखों की नसों को स्निग्धता (नमी) देता है और वात को शांत करता है।
  • शिरोधारा थेरेपी: सिर पर औषधीय तेल या ठंडे काढ़े की लगातार धार गिराने से नर्वस सिस्टम और आँखों का तनाव तुरंत शांत होता है। यह स्क्रीन फटीग को मिटाने के लिए जादुई असर दिखाती है।
  • अभ्यंग मालिश (विशेषकर पादभ्यंग): रात को सोने से पहले पैरों के तलवों (Soles) पर शुद्ध गाय के घी या कांसा वटी से मालिश करने से शरीर की भयंकर गर्मी (पित्त) नीचे आती है और आँखों को गज़ब की ठंडक व नींद पूरी न होना जैसी समस्याओं से आराम मिलता है।

आँखों के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

महीनों या सालों के स्क्रीन टाइम और AC की हवा से डैमेज हुई टियर ग्लैंड्स को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: आयुर्वेदिक औषधियों और स्नेहन डाइट से आपका भड़का हुआ वात शांत होगा। आँखों का किरकिरापन और हर वक्त चुभने वाली जलन काफी हद तक कम हो जाएगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म (नेत्र तर्पण) और मेध्य रसायनों के प्रभाव से आँखों की मेइबोमियन (Meibomian) ग्रंथियाँ दोबारा तेल बनाना शुरू कर देंगी। आपको बार-बार ड्रॉप डालने की ज़रूरत महसूस नहीं होगी।
  • 5-6 महीने: आपकी आँखों की प्राकृतिक टियर फिल्म (Tear film) पूरी तरह से रिपेयर और पोषित हो जाएगी। आप बिना किसी आर्टिफिशियल टीयर (Artificial tears) के सहारे एक प्राकृतिक, स्पष्ट और कॉन्फिडेंट दृष्टि का आनंद लेना शुरू कर देंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

आँखों के सूखने (Dry Eyes) के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य आँखों की सतह को गीला रखने के लिए केवल आर्टिफिशियल टियर्स (Artificial Tears) या जेल (Gel) देना। वात-पित्त को शांत करना, जठराग्नि सुधारना और 'नेत्र तर्पण' द्वारा आँखों को खुद आंसू बनाने के लिए पोषित करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल पलकों की ग्रंथियों (Meibomian glands) और टियर फिल्म की एक स्थानीय समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात और अत्यधिक मानसिक तनाव से जुड़ी मज्जा धातु का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल स्क्रीन पर पलक झपकाने की आम सलाह दी जाती है। डाइट में 'स्नेहन' (गाय का घी), वात-नाशक भोजन, और स्क्रीन टाइम के बीच 'त्राटक' या योग पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर आई ड्रॉप्स का असर कुछ घंटों में खत्म हो जाता है, और व्यक्ति जीवन भर उनका आदी (Dependent) बन जाता है। आँखों की नसें और ग्रंथियाँ अंदर से इतनी मज़बूत हो जाती हैं कि वे प्राकृतिक रूप से आँखों को हाइड्रेट (Hydrate) रखना सीख जाती हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद आपकी सूखी आँखों को प्राकृतिक रूप से पूरी तरह हाइड्रेट और रिपेयर कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपनी आँखों में ये गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी में जाना ज़रूरी हो जाता है:

  • दृष्टि का अचानक धुंधला होना या जाना: अगर आँखों के रूखेपन के साथ अचानक से आपको दिखाई देना बहुत कम हो जाए या विज़न (Vision) बिल्कुल धुंधला पड़ जाए।
  • आँखों में असहनीय दर्द: अगर आँखों के अंदर बहुत गहरा और चुभने वाला दर्द उठे जो सिरदर्द और उल्टी के साथ हो (यह ग्लूकोमा का संकेत हो सकता है)।
  • आँखों का भयंकर रूप से लाल होना और पस (Pus) आना: अगर ड्राई आइज़ के कारण कॉर्निया में कोई इन्फेक्शन हो गया है और आँख से पीला या हरा गाढ़ा पानी (Discharge) निकलने लगे।
  • तेज़ बुख़ार के साथ आँखों में सूजन: अगर आँखों के आस-पास की पलकें भयंकर सूज जाएँ, आँखें लाल हो जाएँ और साथ में बुखार आ जाए (यह गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन का अलार्म हो सकता है)।

निष्कर्ष

अपनी आँखों को एक बहुत ही संवेदनशील कैमरे के लेंस की तरह समझें, जिसे सही से काम करने के लिए प्राकृतिक सफाई और नमी की ज़रूरत होती है। जब आप अपनी जीवनशैली के कारण एसी की सूखी हवा और स्क्रीन की नीली रोशनी के बीच घिरे रहते हैं, तो यह उस लेंस पर पड़ने वाली सीधी मार है। आँखों में हर वक्त किरकिरापन रहना, पलकें भारी महसूस होना और तेज़ रोशनी का चुभना, ये कोई सामान्य थकान नहीं है; यह एक अलार्म है कि आपका आलोचक पित्त ब्लॉक हो चुका है और आँखों की ग्रंथियाँ सूख चुकी हैं। केवल आर्टिफिशियल ड्रॉप्स के सहारे इस भयंकर रूखेपन को टालने की कोशिश न करें, क्योंकि ये आपके शरीर की खुद आंसू बनाने की क्षमता को हमेशा के लिए अपाहिज कर देते हैं।

केमिकल ड्रॉप्स की लत और भयंकर जलन के इस चक्रव्यूह से बाहर निकलें। बाहर के रूखे जंक फूड को छोड़कर हमेशा हल्का और शुद्ध गाय के घी से बना भोजन खाएँ। अपनी डाइट में गाजर, पपीता और त्रिफला का पानी शामिल करें। अश्वगंधा, गिलोय और शतावरी जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की नेत्र तर्पण व शिरोधारा थेरेपी से अपनी सूखी आँखों को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। आँखों की इस खुश्की को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा न बनने दें, और अपनी दृष्टि को स्थायी रूप से फौलादी बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

पानी पीना शरीर को हाइड्रेट करता है और आंसू बनाने के लिए आवश्यक है, लेकिन केवल पानी पीने से समस्या हल नहीं होती। अगर आँखों की तेल ग्रंथियाँ (Meibomian glands) ब्लॉक हैं, तो पानी (आंसू) आँख पर टिकेगा नहीं और वाष्पीकृत (Evaporate) हो जाएगा। इसके लिए घी (Healthy fats) का सेवन भी ज़रूरी है।

हाँ, AC का तापमान जितना कम (ठंडा) होगा, वह हवा से उतनी ही ज़्यादा नमी (Moisture) सोखेगा। तापमान को 24-26 डिग्री के बीच रखने और हवा के सीधे बहाव (Direct airflow) से बचने से आँखों पर पड़ने वाला रूखापन काफी हद तक कम हो जाता है।

शुद्ध और ऑर्गेनिक गुलाब जल आँखों को ठंडक पहुंचा सकता है, लेकिन बाज़ार में मिलने वाले ज़्यादातर गुलाब जल में केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। सूखी और नाज़ुक आँखों में इन्हें डालने से जलन और खुश्की और ज़्यादा बढ़ सकती हैं।

बिल्कुल। जब आँखें सूखती हैं तो भयंकर थकावट होती है। आँखों को बार-बार रगड़ने और नसों में तनाव (Eye strain) बढ़ने के कारण आँखों के आस-पास का ब्लड सर्कुलेशन खराब हो जाता है, जो डार्क सर्कल्स और पफीनेस (Puffiness) का बड़ा कारण बनता है।

यह स्क्रीन टाइम के दौरान आँखों को आराम देने का एक नियम है। हर 20 मिनट के बाद, अपनी स्क्रीन से नज़र हटाएँ और 20 फीट दूर किसी चीज़ को 20 सेकंड तक देखें। इससे आँखों की फोकस करने वाली मांसपेशियाँ रिलैक्स होती हैं और आप नेचुरली पलकें (Blink) झपकाते हैं।

हाँ, कॉन्टैक्ट लेंस आँखों की सतह (Cornea) को ढक लेते हैं, जिससे आँखों तक ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है और टियर फिल्म (Tear film) का फैलाव बाधित होता है। अगर आपको पहले से ड्राई आइज़ हैं, तो लेंस पहनना स्थिति को भयंकर बना सकता है।

अगर ड्राई आइज़ का कारण ब्लॉक हुई तेल ग्रंथियाँ (Evaporative dry eye) हैं, तो पलकों पर हल्की गर्म सिकाई करने से जमा हुआ तेल पिघल जाता है। इसके बाद पलकों की हल्की मालिश करने से आँखों को उनका प्राकृतिक लुब्रिकेशन वापस मिलने में बहुत मदद मिलती है।

आयुर्वेद में त्रिफला घृत (औषधीय घी) का इस्तेमाल आँखों में किया जाता है, लेकिन इसे घर पर खुद अपनी मर्जी से नहीं डालना चाहिए। आँखों में कोई भी औषधीय चीज़ आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह और पंचकर्म क्लिनिक की साफ-सुथरी (Sterile) देखरेख में ही होनी चाहिए।

हाँ, अगर आप एसी वाले कमरे में या सर्दियों में हीटर के सामने बहुत समय बिताते हैं, तो एक ह्यूमिडिफायर हवा में कृत्रिम रूप से नमी (Moisture) वापस जोड़ देता है। यह नमी आँखों से आंसुओं के जल्दी सूखने (Evaporation) को काफी हद तक रोकती है।

शत-प्रतिशत। नींद के दौरान ही आपकी आँखें खुद को रिपेयर करती हैं और टियर फिल्म को दोबारा बनाती हैं। अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं, तो आँखों को रेस्ट नहीं मिलता और अगले दिन वे भयंकर रूप से सूखी, लाल और थकी हुई महसूस होती हैं।

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