Diseases Search
Close Button
 
 

Femoral Head AVN — Cycling, Swimming Safe हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 16 May, 2026
  • category-iconUpdated on 12 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5040

कल्पना कीजिए, आप अभी जवान हैं, अपने करियर की उड़ान भर रहे हैं, लेकिन अचानक कूल्हे Hip joint या जांघ के आस-पास एक ऐसा दर्द उठता है जो आपको लंगड़ाने पर मजबूर कर देता है। आप डॉक्टर के पास जाते हैं, MRI होता है और एक भारी-भरकम शब्द आपके सामने फेंक दिया जाता है  "Avascular Necrosis" डॉक्टर तुरंत हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की सलाह दे देते हैं और आपकी दुनिया वहीं ठहर जाती है। AVN के मरीज़ों के मन में सबसे बड़ा डर यही होता है कि क्या अब वे कभी सामान्य जीवन जी पाएंगे? क्या वे दौड़ पाएंगे? और सबसे अहम सवाल जो ओपीडी OPD में अक्सर पूछा जाता है "क्या AVN में साइकिलिंग Cycling या स्विमिंग Swimming करना सुरक्षित है?"

यह लेख न सिर्फ इस सवाल का वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक जवाब देगा, बल्कि आपको बताएगा कि कैसे आप बिना सर्जरी के, आयुर्वेद की मदद से अपनी गल चुकी हड्डी को नई ज़िंदगी दे सकते हैं।

कूल्हे का यह दर्द AVN शरीर में क्या संकेत देता है?

फेमोरल हेड  हमारी जांघ की हड्डी Femur का ऊपरी गोल हिस्सा होता है, जो कूल्हे के सॉकेट में फिट होता है। जब इस गोल हिस्से तक खून की सप्लाई Blood Supply किसी कारण से रुक जाती है, तो हड्डी के टिशू अंदर ही अंदर मरने लगते हैं और हड्डी गलने लगती है।

  • ब्लड सप्लाई का रुकना Ischemia: स्टेरॉयड Steroids के भारी इस्तेमाल, बहुत अधिक शराब पीने, या किसी पुरानी चोट के कारण खून की नसें सिकुड़ जाती हैं और फेमोरल हेड तक पोषण नहीं पहुँच पाता।
  • हड्डी का खोखला होना Necrosis: बिना खून और ऑक्सीजन के हड्डी अंदर से भुरभुरी होने लगती है। इसका सीधा असर आपके चलने-फिरने पर पड़ता है।
  • कार्टिलेज का डैमेज: हड्डी गलने के कारण जोड़ की चिकनाई Cartilage खत्म हो जाती है, जिससे दोनों हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं और भयंकर दर्द होता है।
  • स्ट्रक्चर का गिरना Collapse: अगर समय रहते खून का दौरा वापस न लाया जाए, तो गोल हड्डी चपटी हो जाती है  जिसके बाद इंसान बिना सहारे के चल भी नहीं पाता।

क्या AVN में Cycling और Swimming सुरक्षित है?

इसका सीधा जवाब है  हाँ, लेकिन सही तरीके से।

AVN के मरीज़ों के लिए सबसे बड़ा नियम यह है कि उन्हें वजन सहने वाले व्यायाम जैसे दौड़ना, कूदना या भारी वजन उठाना बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। लेकिन जोड़ को पूरी तरह स्थिर कर देना भी नुकसानदायक है। यहीं पर साइकिलिंग और स्विमिंग का जादुई असर काम आता है:

  1. स्विमिंग Swimming ज़ीरो इम्पैक्ट थेरेपी: पानी के अंदर आपके शरीर का वज़न लगभग शून्य हो जाता है Buoyancy। स्विमिंग करने से फेमोरल हेड पर शरीर का कोई भारी दबाव Impact नहीं पड़ता, लेकिन जोड़ Joint की पूरी मूवमेंट होती है। इससे वहां रुका हुआ ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और मांसपेशियों को ताक़त मिलती है।
  2. साइकिलिंग Stationary Cycling: सड़क वाली साइकिल के बजाय घर में फिक्स साइकिल Static Cycle चलाना AVN में बहुत फायदेमंद है। जब आप गद्दी पर बैठते हैं, तो शरीर का वज़न कूल्हे के जोड़ के बजाय श्रोणि Pelvis और गद्दी पर होता है। पैडल मारने से बिना घर्षण के हिप जॉइंट की मोबिलिटी बनी रहती है और जोड़ जाम नहीं होता।

शरीर के दोषों के आधार पर AVN के प्रकार

आयुर्वेद के अनुसार, जब फेमोरल हेड में रक्त का प्रवाह रुकता है, तो यह शरीर के दोषों के बिगड़ने का स्पष्ट संकेत है:

  • वात-प्रधान AVN: इस स्थिति में जांघ और कूल्हे में सूई चुभने जैसा तीखा दर्द होता है। जोड़ में भयंकर रूखापन आ जाता है और चलने पर कट-कट की आवाज़ Crepitus आती है। दर्द अक्सर रात में या ठंडे मौसम में बढ़ जाता है।
  • पित्त-प्रधान AVN: जब रक्त में आम टॉक्सिन्स और गर्मी बढ़ जाती है, तो कूल्हे के जोड़ में भारी इन्फ्लेमेशन Inflammation होता है। मरीज़ को जोड़ में जलन और भारी गर्माहट महसूस होती है।
  • कफ-प्रधान AVN: इस अवस्था में दर्द तीखा न होकर मीठा-मीठा और भारी होता है। कूल्हे और जांघ के हिस्से में सूजन आ जाती है। मरीज़ को पैर उठाने में भारीपन लगता है और हिलने-डुलने का मन नहीं करता।

क्या आपके कूल्हे में भी AVN के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

AVN की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती स्टेज में यह X-Ray में भी पकड़ में नहीं आता। अगर आपको ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • जांघ के जोड़ Groin में दर्द: दर्द कूल्हे के पीछे से नहीं, बल्कि जांघ के बिल्कुल ऊपरी हिस्से V-area से शुरू होता है और घुटने तक जाता है।
  • लंगड़ाकर चलना Limping: शरीर दर्द से बचने के लिए अनजाने में ही आपका चलने का तरीका बदल देता है Antalgic gait, जिससे आप एक पैर पर कम वज़न डालते हैं।
  • आलथी-पालथी Cross-legged न मार पाना: ज़मीन पर बैठना या पैर को बाहर की तरफ मोड़ना External rotation लगभग असंभव और बेहद दर्दनाक हो जाता है।
  • सुबह की जकड़न Morning Stiffness: सुबह सोकर उठने पर कूल्हे में ऐसी जकड़न महसूस होना कि पहला कदम ज़मीन पर रखना मुश्किल हो जाए।

AVN को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

सर्जरी के डर और अज्ञानता के कारण मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो हड्डी को तेज़ी से गला देते हैं:

  • लगातार पेनकिलर्स खाना: दर्द कम करने के लिए स्टेरॉयड्स या भारी पेनकिलर्स खाना इस बीमारी की सबसे बड़ी विडंबना है। जो स्टेरॉयड बीमारी का कारण है, मरीज़ दर्द मिटाने के लिए उसी का सेवन करता है, जिससे बची-खुची ब्लड सप्लाई भी खत्म हो जाती है।
  • दर्द के बावजूद भारी एक्सरसाइज़: दर्द को एक्सरसाइज़ से भगा दूंगा ऐसा सोचकर कई युवा जिम में स्क्वैट्स Squats या ट्रेडमिल Treadmill पर दौड़ना जारी रखते हैं, जो फेमोरल हेड को तुरंत फ्रैक्चर Collapse कर सकता है।
  • गलत मालिश Vigorous Massage: बिना आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के जोड़ पर ज़ोर-ज़ोर से रगडकर मालिश करने से कमज़ोर हड्डी को और नुकसान पहुँचता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर इसका सही इलाज न हो, तो हड्डी पूरी तरह चपटी हो जाती है, पैर छोटा हो जाता है और 30 साल की उम्र में हिप रिप्लेसमेंट के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता, जिसकी लाइफ भी सिर्फ 15-20 साल ही होती है।

आयुर्वेद AVN और हड्डी के गलने को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे Avascular Necrosis कहता है, आयुर्वेद उसे अस्थि मज्जा धातु क्षय Asthi-Majja Dhatu Kshaya और वात रक्त के गंभीर प्रकोप के रूप में देखता है।

  • स्रोतस में रुकावट Blockage of Channels: जब हम विरुद्ध आहार, स्टेरॉयड्स या अत्यधिक ठंडी चीज़ों का सेवन करते हैं, तो वात दोष भड़क जाता है। यह बढ़ा हुआ वात रक्त-वाहिनियों Blood vessels को सिकोड़ देता है Srotorodha, जिससे फेमोरल हेड तक पोषण नहीं पहुँचता।
  • अस्थि धातु का सूखना: खून न पहुँचने से शरीर की अस्थि धातु Bone tissue को पोषण मिलना बंद हो जाता है। आयुर्वेद कहता है कि जहां वात वायु बढ़ता है, वहां रूखापन और खोखलापन आता है। यही खोखलापन हड्डी का गलना Necrosis है।
  • आम Toxins का संचय: कमज़ोर पाचन के कारण बना हुआ ज़हरीला आम रक्त के साथ कूल्हे के जोड़ में जमा हो जाता है, जो वहां कार्टिलेज को खाने लगता है और भयंकर दर्द पैदा करता है।

AVN में अस्थि धातु को ताक़त देने वाली आयुर्वेदिक डाइट

AVN के मरीज़ों के लिए भोजन ही सबसे बड़ी औषधि है। आपकी डाइट ऐसी होनी चाहिए जो वात को शांत करे, रूखापन मिटाए और कैल्शियम-मिनरल्स को हड्डी तक पहुँचाए।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - हड्डी जोड़ने वाले और वात शामक क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - रूखापन और रुकावट बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, रागी नैचुरल कैल्शियम, दलिया, मूंग दाल, गेहूं। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद जंक फूड, रूखे और सूखे स्नैक्स।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी हड्डियों की ग्रीसिंग के लिए, तिल का तेल। रिफाइंड तेल, डालडा, बहुत अधिक फ्राइड खाना।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, कद्दू, सहजन Drumstick - हड्डियों के लिए वरदान। कच्चा सलाद, अत्यधिक गोभी, मटर, भिंडी जो गैस बनाती हैं।
फल और मेवे Fruits & Nuts रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, अंजीर, सेब, पपीता। डिब्बाबंद जूस, ठंडे और खट्टे फल संतरा, नींबू का ज़्यादा उपयोग।
पेय पदार्थ Beverages हल्दी, शिलाजीत और अश्वगंधा वाला दूध, अस्थिशृंखला का रस। बहुत ज़्यादा कॉफी/चाय नसों को सुखाती है, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब AVN का मुख्य कारण।

हड्डी के खोखलेपन को भरने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो डेड Dead हो चुकी हड्डी में नई जान फूँक सकते हैं और सर्जरी की नौबत को टाल सकते हैं:

  • अस्थिशृंखला Hadjod: इसका नाम ही है हड्डी को जोड़ने वाला। यह फेमोरल हेड के टूटे हुए सेल्स को तेज़ी से जोड़ता है और नेचुरल कैल्शियम का सबसे बड़ा स्रोत है।
  • अश्वगंधा Ashwagandha: यह कूल्हे के आस-पास की मांसपेशियों को इतनी ताक़त दे देता है कि हड्डी पर पड़ने वाला शरीर का वज़न मांसपेशियाँ उठा लेती हैं, जिससे दर्द में भारी आराम मिलता है।
  • लाक्षा Laksha: आयुर्वेद में लाक्षा का उपयोग टूटी हुई और भुरभुरी हड्डियों को दोबारा सीमेंट की तरह जोड़ने के लिए किया जाता है।
  • गुग्गुल Guggulu: विशेषकर लाक्षादि गुग्गुल या त्रयोदशांग गुग्गुल कूल्हे के जोड़ में जमा सूजन Inflammation को खींच लेते हैं और वात को शांत करते हैं।
  • शिलाजीत Shilajit: यह अस्थि और मज्जा धातु को गहरा पोषण देता है और शरीर के बिगड़े हुए मेटाबॉलिज़्म को सुधार कर हीलिंग प्रोसेस को तेज़ करता है।

रुकी हुई नसों को खोलने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

AVN की एडवांस स्टेज में केवल खाने वाली दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी और अंदरूनी थेरेपीज़ खून के दौरे को तुरंत खोलती हैं:

  • बस्ती Basti Therapy: वात दोष का मुख्य स्थान पक्वाशय Large Intestine है। औषधीय तेलों और काढ़े की बस्ती एनिमा देने से शरीर का सारा बिगड़ा हुआ वात शांत हो जाता है। AVN में तिक्त क्षीर बस्ती Tikta Kshira Basti हड्डी को अंदर से मज़बूत करने का अचूक उपाय है।
  • कटि और जानु बस्ती: कूल्हे के ऊपर आटे का घेरा बनाकर उसमें लगातार गर्म औषधीय तेल जैसे धन्वंतरम या क्षीरबला तेल भरा जाता है। यह सूखी हुई कार्टिलेज को चिकनाई देता है।
  • पत्र पोटली स्वेदन Patra Pinda Sweda: ताज़े वात-शामक पत्तों जैसे निर्गुंडी, आक की पोटली बनाकर गर्म तेल में डुबोकर कूल्हे की सिकाई की जाती है। यह रुकी हुई नसों को खोलता है और भयंकर दर्द को तुरंत चूस लेता है।
  • अभ्यंग Abhyanga: महानारायण तेल से रोज़ाना हल्के हाथों से की गई मालिश पैरों की कमज़ोर हो चुकी मांसपेशियों Muscle Atrophy को दोबारा ताक़त देती है।

हड्डी के रिपेयर होने और दर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

AVN एक गंभीर बीमारी है, जहां हड्डी मर चुकी होती है। इसे दोबारा ज़िंदा करने में थोड़ा अनुशासित और लंबा समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और टॉक्सिन रिमूवल से आपकी जांघ और कूल्हे का भारी दर्द कम होने लगेगा। सुबह की जकड़न घटेगी और नींद बेहतर होगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से ब्लड सप्लाई वापस शुरू होने लगेगी। आपका लंगड़ापन Limping कम हो जाएगा और आप बिना ज़्यादा दर्द के चल-फिर सकेंगे।
  • 6-12 महीने: लगातार आयुर्वेदिक रसायनों के सेवन से ग्रेड 1 या 2 का AVN पूरी तरह रिवर्स हो सकता है। ग्रेड 3 में बीमारी वहीं रुक Arrest जाएगी और आपको सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

AVN के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में ज़मीन-आसमान का अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic & Surgical care आयुर्वेद Holistic Regenerative care
इलाज का मुख्य लक्ष्य शुरुआत में केवल भारी पेनकिलर देना और अंत में हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी Hip Replacement करना। ब्लड सप्लाई को वापस शुरू करना और अस्थि धातु Bone को नेचुरल तरीके से रीजनरेट करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल एक हड्डी के गलने Necrosis की स्थानीय Local समस्या मानना। इसे वात दोष के बढ़ने और रक्त-वाहिनियों के ब्लॉक होने का सिंड्रोम मानना।
एक्सरसाइज़ और मोबिलिटी सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी की सलाह, लेकिन हड्डी के पोषण पर कोई काम नहीं। स्विमिंग/स्टेटिक साइकिलिंग के साथ वात-शामक डाइट और पंचकर्म बस्ती थेरेपी पर पूरा ज़ोर।
लंबा असर कृत्रिम जोड़ Artificial Joint की लाइफ सीमित है, 15-20 साल बाद दोबारा सर्जरी का रिस्क। असली जोड़ Natural Hip बच जाता है, शरीर अंदर से मज़बूत होता है और बीमारी वहीं रुक जाती है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद ग्रेड 1 और 2 के AVN को बेहतरीन तरीके से रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • वज़न बिल्कुल न उठा पाना: अगर आप खड़े होने पर उस पैर पर ज़रा भी वज़न नहीं डाल पा रहे हैं और तुरंत गिर जाते हैं।
  • पैर का छोटा हो जाना: अगर आपको चलते समय महसूस हो कि आपका प्रभावित पैर दूसरे पैर की तुलना में छोटा हो गया है यह हड्डी के पूरी तरह कोलैप्स होने का लक्षण है।
  • असहनीय नाइट पेन Night Pain: रात को सोते समय दर्द इतना भयंकर हो जाए कि चीख निकल जाए और किसी भी पोज़िशन में आराम न मिले।
  • अचानक जोड़ का लॉक हो जाना: चलते-चलते अगर कूल्हा अचानक एक जगह लॉक Lock हो जाए और आगे-पीछे बिल्कुल न हिले।

निष्कर्ष

Femoral Head AVN कोई साधारण दर्द नहीं है; यह आपकी हड्डी के भूखे और प्यासे मर जाने की पुकार है। लेकिन याद रखिए, सर्जरी ही आपका इकलौता विकल्प नहीं है। अपनी दिनचर्या में वज़न उठाने वाले काम बंद करें और ज़ीरो-इम्पैक्ट वाली स्विमिंग या फिक्स साइकिलिंग Cycling को अपनाएं, ताकि जोड़ में मूवमेंट और ब्लड फ्लो बना रहे। दर्द को पेनकिलर्स से दबाना बंद करें और आयुर्वेद की ओर मुड़ें। शुद्ध घी, अश्वगंधा और अस्थिशृंखला जैसी औषधियों के साथ-साथ जीवा आयुर्वेद की तिक्त क्षीर बस्ती जैसी पावरफुल थेरेपीज़ आपकी गली हुई हड्डी में फिर से नई जान डाल सकती हैं। अपने असली जोड़ को कटने से बचाएं और एक प्राकृतिक, दर्द-मुक्त जीवन की शुरुआत करने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं। रोड पर साइकिल चलाने में झटके (Jerks), गड्ढे और अचानक ब्रेक लगाने का रिस्क होता है, जो कमज़ोर फेमोरल हेड पर भारी दबाव डाल सकता है। हमेशा घर के अंदर फिक्स (Stationary) साइकिल का ही इस्तेमाल करें जिस पर रेजिस्टेंस (Resistance) बहुत कम सेट हो।

स्विमिंग एक ज़ीरो वेट-बेयरिंग (Zero Weight-bearing) एक्सरसाइज़ है। पानी में आपके कूल्हे पर शरीर का वज़न नहीं पड़ता, लेकिन पानी के रेजिस्टेंस के कारण कूल्हे की मांसपेशियों की बेहतरीन कसरत हो जाती है और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है।

हाँ। सीढ़ियां चढ़ते और उतरते समय आपके कूल्हे के जोड़ पर शरीर के वज़न का 3 से 5 गुना ज़्यादा दबाव पड़ता है। इससे कमज़ोर हो चुकी हड्डी तेज़ी से कोलैप्स (Collapse) हो सकती है। जहाँ तक हो सके लिफ्ट का प्रयोग करें।

लंबे समय तक पैदल चलना या भारी कदम रखना ठीक नहीं है। आप घर के अंदर या समतल ज़मीन पर 15-20 मिनट की बहुत हल्की सैर कर सकते हैं, लेकिन अगर दर्द या लंगड़ापन बढ़ता है, तो तुरंत रुक जाना चाहिए।

कुछ हद तक, हाँ। लेकिन आपको ऐसे योगासन बिल्कुल नहीं करने चाहिए जिनमें कूल्हे को बहुत ज़्यादा स्ट्रेच करना पड़े (जैसे पद्मासन या बटरफ्लाई पोज़)। हल्के स्ट्रेचिंग वाले आसान किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें।

ग्रेड 3 और 4 में फेमोरल हेड चपटा (Collapse) हो चुका होता है। आयुर्वेद उस चपटी हड्डी को वापस गोल तो नहीं कर सकता, लेकिन दर्द और सूजन को पूरी तरह खत्म कर सकता है और बीमारी को आगे बढ़ने से (Arrest) रोक सकता है, जिससे मरीज़ बिना सर्जरी के अपना काम कर सके।

नहीं। ज़मीन पर आलथी-पालथी मारकर (Cross-legged) या उकड़ू (Squat) बैठने से फेमोरल हेड पर सबसे भयंकर दबाव पड़ता है। हमेशा ऊंची और आरामदायक कुर्सी का ही इस्तेमाल करें।

हाँ। बहुत अधिक शराब पीने से रक्त में फैट (Lipids) का स्तर बढ़ जाता है, जो कूल्हे तक खून ले जाने वाली पतली नसों को ब्लॉक (Blockage) कर देता है। स्टेरॉयड के बाद शराब AVN का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।

केवल गोलियां खाने से नहीं। जब तक उस जोड़ तक खून की नसों (Srotas) का रास्ता साफ नहीं होगा, कोई भी सप्लीमेंट वहां तक नहीं पहुँचेगा। इसलिए आयुर्वेद पहले पंचकर्म से रास्ता खोलता है, फिर औषधियां देता है।

बस्ती आंतों (Large intestine) में दी जाती है, जो वात दोष का मुख्य केंद्र है। आयुर्वेद में माना जाता है कि आंतों और हड्डियों (Asthi Dhatu) का सीधा संबंध है। जब औषधीय तेल आंतों से एब्जॉर्ब होता है, तो वह सीधा मज्जा और अस्थि धातु को पोषण देता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us