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Migraine की दवा हर हफ़्ते — Permanent Solution क्यों नहीं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 15 May, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconMental Health
  • blog-view-icon5035

सुबह उठते ही सिर के एक हिस्से में हथौड़े बजने जैसा दर्द, आँखों के सामने अंधेरा छा जाना, रौशनी और आवाज़ से भयंकर चिड़चिड़ाहट होना, और फिर चुपचाप एक अंधेरे कमरे में जाकर लेट जाना। इसके बाद आप अपनी 'इमर्जेंसी' पेनकिलर Painkiller ढूँढते हैं और उसे निगलकर बस यह प्रार्थना करते हैं कि किसी तरह यह दर्द शांत हो जाए। जब दवा का असर होता है, तो आप राहत की सांस लेते हैं और अगले कुछ दिनों के लिए फिर से अपनी उसी भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लौट जाते हैं।

लेकिन ज़रा रुकिए और सोचिए क्या हर हफ़्ते, या हर दूसरे-तीसरे दिन पेनकिलर खाना इस दर्द का इलाज है? यह माइग्रेन Migraine का कोई स्थायी समाधान Permanent Solution नहीं है; यह सिर्फ आपके दिमाग को सुन्न करने और शरीर की उस अलार्म बेल को बंद करने का एक कृत्रिम तरीका है, जो आपको भीतर चल रही किसी बड़ी गड़बड़ी के बारे में आगाह कर रही है। जब माइग्रेन की दवा हर हफ़्ते आपकी आदत बन जाए, तो समझ लीजिए कि आप अपने शरीर के नर्वस सिस्टम Nervous System और पाचन तंत्र Digestive System को स्थायी रूप से डैमेज कर रहे हैं।

बार-बार होने वाला यह सिरदर्द शरीर में क्या संकेत देता है?

माइग्रेन केवल सिर का दर्द नहीं है; यह आपके शरीर के कई अंगों—खासकर आपके पेट, हॉर्मोन्स और नसों—की मिली-जुली चीख है। जब आप बार-बार दवा खाकर इसे दबाते हैं, तो शरीर के ये संकेत अनसुने रह जाते हैं:

  • पाचन की भयंकर गड़बड़ी Gut-Brain Axis: कब्ज़, एसिडिटी और गैस का सीधा असर आपके दिमाग पर पड़ता है। पेट में बनने वाला 'आम' Toxins और अम्लता Acidity जब खून के ज़रिए सिर तक पहुँचते हैं, तो वह माइग्रेन का भयंकर रूप ले लेते हैं।
  • हार्मोनल असंतुलन: महिलाओं में पीरियड्स के आस-पास यह दर्द इसलिए बढ़ता है क्योंकि शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर में तेज़ी से बदलाव होता है, जिसे कमज़ोर नर्वस सिस्टम संभाल नहीं पाता।
  • मानसिक तनाव और कॉर्टिसोल: लगातार स्ट्रेस और एंग्जायटी Anxiety दिमाग की रक्त वाहिकाओं Blood vessels को सिकोड़ देते हैं और फिर अचानक फैला देते हैं, जिससे धड़कने वाला Throbbing दर्द शुरू हो जाता है।
  • नींद की कमी और थकान: दिमाग को हील Heal होने के लिए गहरी नींद की ज़रूरत होती है। स्क्रीन टाइम और गलत रूटीन के कारण जब नींद पूरी नहीं होती, तो नसों में रूखापन आ जाता है।

माइग्रेन Migraine और सिरदर्द किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति के माइग्रेन का कारण और लक्षण अलग होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर के दोषों के आधार पर माइग्रेन मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान माइग्रेन: इस स्थिति में सिर में ऐसा दर्द होता है जैसे कोई हथौड़े मार रहा हो Pulsating pain। दर्द के साथ-साथ भयंकर रूखापन, घबराहट और एंग्जायटी महसूस होती है। ठंडी हवा या तनाव से यह वात दोष Vata dosha और अधिक भड़क जाता है।
  • पित्त-प्रधान माइग्रेन: इसमें सिरदर्द के साथ-साथ आँखों में भारी जलन, लालपन और उल्टी Nausea/Vomiting का अहसास होता है। यह अक्सर तेज़ धूप में निकलने, भूखे रहने या बहुत ज़्यादा मसालेदार खाना खाने से ट्रिगर होता है। मरीज़ को लगता है जैसे सिर में आग लग रही हो।
  • कफ-प्रधान माइग्रेन: इसमें तेज़ दर्द की बजाय सिर में बहुत भारीपन महसूस होता है। इंसान हमेशा क्रोनिक फटीग Chronic fatigue से घिरा रहता है। दर्द हल्का लेकिन लगातार बना रहता है और बहुत ज़्यादा सोने या ठंडे मौसम से यह बढ़ जाता है।

क्या आपके शरीर में भी माइग्रेन के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

माइग्रेन रातों-रात अपना भयंकर रूप नहीं लेता। यह बहुत पहले से शरीर में अलार्म बजाता है जिसे ऑरा या Aura भी कहते हैं। अगर आपको रोज़ाना या बार-बार ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • आँखों के सामने रौशनी के धब्बे: सिरदर्द शुरू होने से कुछ मिनट या घंटे पहले आँखों के सामने चमकती हुई लाइनें, धब्बे या अंधापन महसूस होना।
  • तेज़ रौशनी और आवाज़ बर्दाश्त न होना: अचानक टीवी की आवाज़, घर की लाइट्स या बाहर की धूप का बहुत ज़्यादा चुभना और चिड़चिड़ाहट होना।
  • सिर के एक हिस्से में धड़कन: पूरे सिर की बजाय किसी एक तरफ दाएं या बाएं नस के फड़कने जैसा तेज़ दर्द शुरू होना।
  • गले और कंधों में भारी जकड़न: दर्द शुरू होने से पहले गर्दन के पिछले हिस्से और कंधों का पूरी तरह से अकड़ जाना और उबकाई Nausea आना।

माइग्रेन में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

इस तेज़ सिरदर्द से तुरंत राहत पाने और अपना ऑफिस का काम या घर का रूटीन चालू रखने की जल्दबाज़ी में, मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो समस्या को जानलेवा बना देते हैं:

  • पेनकिलर्स का रोज़ाना सेवन Medication Overuse Headache: दर्द को दबाने के लिए हर हफ़्ते दर्द निवारक गोलियाँ Triptans/NSAIDs खाना आपकी किडनी और पेट की परत को डैमेज कर देता है। यही नहीं, जब दवा का असर खत्म होता है, तो माइग्रेन 'रिबाउंड' Rebound होकर पहले से भी अधिक भयंकर रूप में लौटता है।
  • चाय-कॉफी पर निर्भरता: दर्द उठने पर बहुत से लोग कड़क चाय या कॉफी पीते हैं। शुरुआत में कैफीन रक्त वाहिकाओं को सिकोड़कर आराम देता है, लेकिन बाद में यही कैफीन नसों को बुरी तरह सुखा देता है और माइग्रेन का परमानेंट ट्रिगर बन जाता है।
  • भूखे पेट रहना: काम के चक्कर में मील Meal स्किप करना या व्रत रखना पित्त को भड़काता है, जो सिर में एसिडिटी बनकर भयंकर दर्द पैदा करता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर इस दर्द के मूल कारण को ठीक न किया जाए, तो यह क्रोनिक माइग्रेन Chronic Migraine में बदल जाता है और मरीज़ डिप्रेशन, विज़न लॉस Vision Loss और लगातार नर्व कमज़ोरी का शिकार हो जाता है।

आयुर्वेद माइग्रेन और नसों के तनाव को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर Neurological disorder या माइग्रेन कहता है, आयुर्वेद उसे 'अर्धावभेदक' Ardhavabhedaka, 'सूर्यावर्त' Suryavarta और 'अनंतवात' के रूप में बहुत गहराई से समझता है।

  • त्रिदोष असंतुलन: जब गलत खान-पान और तनाव के कारण शरीर में वात और पित्त दोष एक साथ भड़कते हैं, तो वे दिमाग की रक्त वाहिकाओं Blood vessels में भारी दबाव पैदा करते हैं।
  • जठराग्नि और 'आम' Toxins: आयुर्वेद मानता है कि माइग्रेन का सीधा संबंध आपके पेट से है। जब जठराग्नि Digestive fire कमज़ोर होती है, तो बना हुआ ज़हरीला 'आम' रक्त के साथ मिलकर ऊपर की ओर Urdhvaga सिर तक पहुँचता है और नसों के चैनल Srotas को ब्लॉक कर देता है।
  • मज्जा धातु Nervous System की कमज़ोरी: लंबे समय तक तनाव और रुखा खान-पान सीधे मज्जा धातु को सुखा देता है, जिससे दिमाग ज़रा से भी ट्रिगर धूप, शोर, तनाव को बर्दाश्त नहीं कर पाता।

माइग्रेन को जड़ से खत्म करने वाली और नसों को शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपकी रसोई का खाना ही आपके माइग्रेन को ट्रिगर भी कर सकता है और उसे शांत भी कर सकता है। परमानेंट रिलीफ के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - नसों को शांत करने वाले और पित्त शामक क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - रूखापन, एसिड और गैस बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, दलिया, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, ज्वार। वाइट ब्रेड, मैदा, बासी खाना, पैकेटबंद नूडल्स।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी नसों के लिए और पित्त शांत करने के लिए अमृत, नारियल तेल। पुराना रखा हुआ पनीर Aged Cheese, पीनट बटर, डालडा, रिफाइंड तेल।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, पेठा Ash gourd, कद्दू, परवल सभी अच्छी तरह पकी हुई। कच्चा टमाटर, बैंगन, बहुत ज़्यादा प्याज़-लहसुन, शिमला मिर्च।
फल और मेवे Fruits & Nuts मीठे फल जैसे सेब, तरबूज़, पपीता, रात भर भीगे हुए बादाम, मुनक्का Raisins। खट्टे फल संतरा, नींबू का अधिक प्रयोग, डिब्बाबंद जूस, बाज़ार के नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ Beverages नारियल पानी, धनिया-सौंफ का पानी, ताज़ा मट्ठा दोपहर में। बहुत ज़्यादा चाय-कॉफी कैफीन, रेड वाइन, कोल्ड ड्रिंक्स।

नसों को फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के नसों के दर्द को खींच लेते हैं और माइग्रेन की जड़ पर प्रहार करते हैं:

  • ब्राह्मी Brahmi: तनाव के कारण जब दिमाग की नसें फटने को तैयार हो जाती हैं, तो ब्राह्मी नर्वस सिस्टम को जादुई शांति और फौलादी ठंडक प्रदान करती है।
  • शंखपुष्पी Shankhpushpi: यह जड़ी-बूटी दिमाग की रक्त वाहिकाओं के तनाव को कम करती है और दिमाग को शांत कर गहरी नींद लाने में मदद करती है।
  • गोदंती भस्म Godanti Bhasma: आयुर्वेद में यह माइग्रेन के भयंकर दर्द पित्त-प्रधान सिरदर्द को तेज़ी से उतारने और एसिडिटी को जड़ से खत्म करने के लिए बहुत अचूक मानी जाती है।
  • अश्वगंधा Ashwagandha: नर्वस सिस्टम की कमज़ोरी दूर करने और स्ट्रेस हॉर्मोन्स कॉर्टिसोल को गिराने के लिए अश्वगंधा एक अद्भुत रसायन है।
  • जटामांसी Jatamansi: यह दिमाग के हाइपर-एक्टिव सिग्नल्स को शांत करती है और घबराहट व ऑरा Aura के लक्षणों को रोकती है।

माइग्रेन का दर्द मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और पित्त बहुत गहराई तक नसों में जम चुके हों और दवाइयों का असर कम हो रहा हो, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ दिमाग को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • शिरोधारा Shirodhara: माथे के बीचों-बीच आज्ञा चक्र पर गुनगुने औषधीय तेल या काढ़े की लगातार धार गिराई जाती है। यह थेरेपी नर्वस सिस्टम को इतनी गहरी शांति देती है कि सालों पुराना माइग्रेन भी पिघलने लगता है।
  • नस्य Nasya: "नासा हि शिरसो द्वारम्" नाक सिर का दरवाज़ा है। नाक के ज़रिए गाय के शुद्ध घी या अणु तेल की कुछ बूंदें डालने से दिमाग की ब्लॉक नसें खुल जाती हैं और सिर का भारीपन तुरंत खिंच जाता है।
  • शिरो अभ्यंग Shiro Abhyanga: औषधीय तेलों से सिर, गर्दन और कंधों की गहरी मालिश, जो वात को शांत करती है और जकड़न को खत्म करती है।
  • विरेचन Virechana: पेट से पित्त और ज़हरीले 'आम' को जड़ से बाहर निकालने के लिए यह एक बहुत ही शक्तिशाली डिटॉक्स थेरेपी है, जो माइग्रेन के ट्रिगर्स को खत्म कर देती है।

माइग्रेन के पूरी तरह रिपेयर होने और सिरदर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों से बिगड़े हुए पाचन और डैमेज हो चुकी नसों को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। माइग्रेन के अटैक की फ्रीक्वेंसी Frequency यानी दर्द उठने के दिनों में भारी कमी आएगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से नसों का रूखापन खत्म होने लगेगा। दर्द की इंटेंसिटी Intensity कम हो जाएगी और तेज़ धूप या शोर जैसी चीज़ें आपको पहले की तरह ट्रिगर नहीं करेंगी।
  • 5-6 महीने: मज्जा धातु पूरी तरह पोषित हो जाएगी और आपका नर्वस सिस्टम रीबूट हो जाएगा। आप बिना किसी हफ़्ते भर के पेनकिलर के एक सामान्य, ऊर्जावान और माइग्रेन-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

माइग्रेन के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के सिग्नल्स को ब्लॉक करने के लिए पेनकिलर्स Triptans/NSAIDs और नसों को सुन्न करने वाली गोलियाँ देना। वात-पित्त को शांत करना, 'आम' को पचाना और दिमाग व नसों को प्राकृतिक रूप से पोषण देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल दिमाग की रक्त वाहिकाओं Blood vessels के फैलने-सिकुड़ने की समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए दोषों Gut-Brain link और मज्जा धातु के सूखने का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल ट्रिगर्स से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन जठराग्नि या पेट की एसिडिटी को ठीक करने पर खास ज़ोर नहीं दिया जाता। वात-पित्त शामक डाइट, नींद का रूटीन, कब्ज़ दूर करना और औषधीय नस्य/शिरोधारा को ही इलाज का आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर सिरदर्द रिबाउंड Rebound होकर तुरंत वापस आ जाता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और नर्वस सिस्टम खुद को हील कर लेता है, जिससे इंसान स्थायी रूप से माइग्रेन-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद माइग्रेन को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको सिरदर्द के साथ ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल एमरजेंसी की ज़रूरत होती है:

  • ज़िंदगी का सबसे भयंकर सिरदर्द Thunderclap Headache: अगर अचानक ऐसा दर्द उठे जो कुछ ही सेकंड्स में बर्दाश्त से बाहर हो जाए।
  • न्यूरोलॉजिकल लक्षण: सिरदर्द के साथ अचानक बोलने में लड़खड़ाहट, आँखों से डबल दिखना, या शरीर के किसी एक हिस्से में लकवा Paralysis या सुन्नपन महसूस होना।
  • बुखार और गर्दन में अकड़न: अगर सिरदर्द के साथ तेज़ बुखार हो और गर्दन इतनी अकड़ जाए कि ठुड्डी Chin सीने से न लगा पाएं यह मेनिन्जाइटिस का लक्षण हो सकता है।
  • 50 वर्ष की उम्र के बाद नया सिरदर्द: अगर आप 50 की उम्र पार कर चुके हैं और जीवन में पहली बार इस तरह का भयानक माइग्रेन महसूस कर रहे हैं।

निष्कर्ष

माइग्रेन केवल सिरदर्द नहीं है; यह एक क्रूर चक्र है जो आपकी प्रोडक्टिविटी, पारिवारिक जीवन और मानसिक शांति को छीन लेता है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना या हर हफ़्ते पेनकिलर्स से दबाते हैं, तो आप अपनी नसों और पेट को हील करने के बजाय उन्हें स्थायी रूप से अपाहिज कर रहे होते हैं। हर हफ़्ते दवा खाना कोई परमानेंट सलूशन नहीं है। इस खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपनी डाइट को सुधारें, मीठे और ठंडे फलों का सेवन करें, चाय-कॉफी को कम करें, और अपनी दिनचर्या में गाय के घी का प्रयोग बढ़ाएं। ब्राह्मी, शंखपुष्पी और गोदंती भस्म जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और नस्य व शिरोधारा से अपने थके हुए दिमाग को नया जीवन दें। पेनकिलर्स के साये में जीना छोड़ें, और माइग्रेन से हमेशा के लिए आज़ादी पाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जी हाँ। आधुनिक चिकित्सा इसे लाइलाज मानकर केवल मैनेज (Manage) करती है, लेकिन आयुर्वेद में जब पेट की जठराग्नि सुधारी जाती है और वात-पित्त दोषों को शांत किया जाता है, तो माइग्रेन के ट्रिगर्स पूरी तरह खत्म हो जाते हैं और आप परमानेंट रिलीफ पा सकते हैं।

पेनकिलर्स दर्द के कारण को ठीक नहीं करते, वे केवल दिमाग तक दर्द का सिग्नल ले जाने वाले केमिकल्स को ब्लॉक करते हैं। लगातार पेनकिलर्स खाने से पेट में अल्सर, किडनी डैमेज और "मेडिकेशन ओवरयूज़ हेडेक" (Medication Overuse Headache) हो जाता है, जिससे माइग्रेन और भी बदतर हो जाता है।

बिल्कुल। आयुर्वेद के अनुसार, 80% से ज़्यादा माइग्रेन के केस पेट से जुड़े होते हैं। जब पेट में एसिडिटी और गैस (आम) बढ़ती है, तो वह ऊर्ध्व गति (ऊपर की ओर) करके दिमाग की नसों में भारी दबाव और दर्द पैदा करती है।

दर्द शुरू होते ही शांत और अंधेरे कमरे में लेट जाएं। दोनों नाक के नथुनों में 2-2 बूंद गाय का हल्का गर्म शुद्ध घी (या अणु तेल) डालें। माथे और कनपटी (Temples) पर चंदन का लेप या पुदीने/नीलगिरी का तेल लगाएं, यह पित्त की गर्मी को तुरंत खींच लेता है।

लंबे समय के लिए नहीं। कैफीन (Caffeine) नर्वस सिस्टम को ओवर-एक्टिव कर देता है और शरीर में वात दोष (रूखापन) बढ़ाता है। एक बार को यह दर्द से अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन बाद में यह नसों को अंदर से सुखा देता है और माइग्रेन को और बढ़ा देता है।

हाँ। नींद के दौरान हमारा दिमाग खुद को रिपेयर (Heal) करता है। नींद की कमी से नर्वस सिस्टम में वात बढ़ जाता है और स्ट्रेस हॉर्मोन्स (कॉर्टिसोल) बढ़ जाते हैं, जो तुरंत सिरदर्द को ट्रिगर करते हैं।

शिरोधारा में माथे के आज्ञा चक्र पर लगातार औषधीय तेल गिराया जाता है। यह प्रक्रिया सीधे सेंट्रल नर्वस सिस्टम को शांत करती है, स्ट्रेस और एंग्जायटी को ख़त्म करती है, और दिमाग की रक्त वाहिकाओं के फैलाव/सिकुड़न (Spasms) को रोककर दर्द को जड़ से मिटाती है।

हाँ, इसे मेंस्ट्रुअल माइग्रेन (Menstrual Migraine) कहते हैं। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन और वात दोष में तेज़ी से बदलाव होता है। आयुर्वेद में इसके लिए हार्मोनल बैलेंसिंग जड़ी-बूटियाँ (जैसे शतावरी और अशोक) दी जाती हैं।

बिल्कुल। भूखे रहने से पेट में एसिड (पित्त) बहुत अधिक बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ पित्त जब खून में मिलता है, तो वह सीधे सिर में जाकर हथौड़े जैसा दर्द (Pitta-type Migraine) और उबकाई (Nausea) पैदा करता है। इसलिए थोड़ी-थोड़ी देर में हल्का भोजन करते रहना चाहिए।

माइग्रेन के मरीज़ों के लिए देसी गाय का शुद्ध घी (Cow Ghee) सर्वोत्तम है। यह वात और पित्त दोनों को शांत करता है, दिमाग को चिकनाई देता है और मज्जा धातु को ताक़त देता है। इसके अलावा खाने में नारियल या शुद्ध ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल भी अच्छा है।

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