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Thyroid में बाल झड़ रहे हैं—दवा से क्यों नहीं रुक रहे?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

बालों का झड़ना एक आम समस्या है, लेकिन जब यह थायरॉयड के कारण होता है, तो निराशा और भी बढ़ जाती है। कई लोग नियमित रूप से अपनी थायरॉयड की दवाएँ लेते हैं और उनके हार्मोन के स्तर भी ब्लड रिपोर्ट में सामान्य दिखाई देते हैं। फिर भी, जब कंघी करते समय या नहाते समय मुट्ठी भर बाल टूटकर गिरते हैं, तो यह सीधा मानसिक शांति पर प्रहार करता है।

यह स्थिति आपको यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि आखिर दवाएँ काम क्यों नहीं कर रही हैं। दरअसल, बालों का स्वास्थ्य केवल एक हार्मोन के स्तर पर निर्भर नहीं करता है; यह शरीर के भीतर चल रही कई सूक्ष्म प्रक्रियाओं का परिणाम है। दवाओं से केवल खून में हार्मोन का स्तर नियंत्रित हो सकता है, लेकिन बालों की जड़ों तक पोषण पहुँचाने वाली प्रणाली को ठीक करने के लिए एक बहुत ही अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।

थायरॉयड के कारण बालों का झड़ना क्या है?

आधुनिक विज्ञान के अनुसार, थायरॉयड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म और कोशिकाओं के विकास को नियंत्रित करती है। बालों के रोम (हेयर फॉलिकल्स) शरीर की उन कोशिकाओं में से हैं जो सबसे तेजी से बढ़ती हैं। जब थायरॉयड हार्मोन असंतुलित होते हैं, तो बालों के रोम का विकास चक्र (हेयर साइकिल) बिगड़ जाता है। इसके कारण नए बालों का उगना रुक जाता है और पुराने बाल समय से पहले ही झड़ने लगते हैं।

आयुर्वेद के दृष्टिकोण से, थायरॉयड ग्रंथि का काम शरीर की 'अग्नि' या मेटाबॉलिज्म से जुड़ा है। जब यह अग्नि मंद हो जाती है, तो शरीर में वात और कफ दोष बढ़ जाते हैं। बिगड़ी हुई अग्नि के कारण भोजन ठीक से नहीं पचता और 'आम' (विषाक्त पदार्थ) बनने लगता है। यह 'आम' शरीर की सूक्ष्म नाड़ियों को अवरुद्ध कर देता है, जिससे 'अस्थि धातु' तक पोषण नहीं पहुँच पाता है। आयुर्वेद में बालों को अस्थि धातु का ही उप-उत्पाद माना गया है। यही कारण है कि बाहरी दवाओं के बावजूद बाल लगातार झड़ते रहते हैं।

थायरॉयड से जुड़ा हेयर फॉल किन रूपों में प्रकट होता है?

थायरॉयड असंतुलन के कारण बालों का गिरना हर व्यक्ति में एक समान नहीं होता है। यह समस्या मुख्य रूप से निम्नलिखित अलग-अलग रूपों में सामने आ सकती है:

  • डिफ्यूज हेयर लॉस: इसमें सिर के किसी एक हिस्से से नहीं, बल्कि पूरे सिर से बाल समान रूप से पतले होकर गिरने लगते हैं।
  • बालों का रूखापन: बाल अपनी प्राकृतिक चमक खो देते हैं और बहुत अधिक बेजान तथा खुरदरे हो जाते हैं।
  • भंगुर बाल: बाल इतने कमजोर हो जाते हैं कि हल्का सा छूने या कंघी करने पर ही बीच से टूट जाते हैं।
  • भौहों का पतला होना: विशेष रूप से भौहों के बाहरी हिस्से (आउटर थर्ड) के बालों का झड़ना एक बहुत ही आम संकेत है।

थायरॉयड और बालों के झड़ने से जुड़े मुख्य संकेत कौन से हैं?

जब थायरॉयड ग्रंथि के कारण बालों की सेहत बिगड़ती है, तो शरीर कुछ खास संकेत देता है। इन लक्षणों को पहचान कर आप स्थिति की गंभीरता का अनुमान लगा सकते हैं:

  • गुच्छों में बाल गिरना: सुबह सोकर उठने पर तकिये पर या नहाते समय नाली के पास बालों का बड़ा गुच्छा दिखाई देना।
  • स्कैल्प का दिखना: बालों का घनत्व (डेंसिटी) इतना कम हो जाना कि सिर की त्वचा दूर से ही आसानी से नजर आने लगे।
  • नए बालों का न उगना: झड़े हुए बालों की जगह नए बालों (बेबी हेयर) का विकास पूरी तरह से रुक जाना।
  • रूखी और पपड़ीदार त्वचा: सिर की त्वचा (स्कैल्प) का बहुत अधिक सूखा हो जाना और डैंड्रफ जैसी पपड़ियाँ निकलना।

आगे चलकर यह समस्या क्या परेशानियाँ दे सकती है?

यदि बालों के झड़ने की इस समस्या को केवल बाहरी उत्पादों के भरोसे छोड़ दिया जाए और अंदरूनी कारणों को ठीक न किया जाए, तो भविष्य में कुछ बड़ी चुनौतियाँ खड़ी हो सकती हैं:

  • स्थायी गंजापन: हेयर फॉलिकल्स के लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से वे हमेशा के लिए नष्ट हो सकते हैं, जिससे गंजेपन का खतरा बढ़ता है।
  • मानसिक तनाव और अवसाद: बालों का लगातार झड़ना आत्मविश्वास को बुरी तरह से तोड़ सकता है, जिससे गंभीर मानसिक तनाव हो सकता है।
  • एलोपेसिया एरीटा: थायरॉयड अक्सर एक ऑटोइम्यून स्थिति होती है, जो आगे चलकर सिर पर गोल चकत्तों के रूप में बाल उड़ा सकती है।
  • पोषण की गंभीर कमी: यह इस बात का संकेत है कि शरीर की धातुएँ कमजोर हो रही हैं, जो आगे चलकर हड्डियों और जोड़ों को भी प्रभावित कर सकती हैं।

आयुर्वेद इस स्थिति को कैसे देखता है और सहायक उपाय

आयुर्वेद बालों की समस्या को कभी भी एक अलग बीमारी के रूप में नहीं देखता है, बल्कि इसे शरीर के भीतर पनप रहे गहरे असंतुलन का एक लक्षण मानता है। जब वात और पित्त दोष बढ़ जाते हैं, तो वे स्कैल्प की त्वचा को सुखा देते हैं और बालों की जड़ों को कमजोर कर देते हैं। इसके साथ ही, जठराग्नि (पाचन अग्नि) की कमजोरी के कारण जब रस (प्लाज्मा) और रक्त (खून) धातु शुद्ध नहीं बन पाते हैं, तो अस्थि धातु (हड्डियाँ) को उचित पोषण नहीं मिलता। चूंकि आयुर्वेद में बालों को अस्थि धातु का ही 'मल' या उप-उत्पाद माना गया है, इसलिए अस्थि धातु के कमजोर होने पर बाल स्वतः ही झड़ने लगते हैं। इसका उपाय केवल बालों पर तेल लगाना नहीं है, बल्कि पाचन को सुधारना, आम को पचाना और वात-पित्त को शांत करना है।

थायरॉयड में बाल झड़ने की समस्या के लिए विशेष आहार तालिका

सही पोषण बालों की जड़ों को फिर से जीवित करने का काम करता है। थायरॉयड के मरीजों के लिए यह विशेष आहार तालिका अग्नि को संतुलित करने में मदद कर सकती है:

भोजन का समय अनुशंसित आहार वर्जित आहार
सुबह (नाश्ता) मुनक्का, भीगे हुए बादाम, दलिया, लौकी का जूस, और अंकुरित मूंग डिब्बाबंद जूस, बासी भोजन, बहुत अधिक कैफीन या ठंडी चीजें
दोपहर (लंच) मूंग दाल, घी लगी हुई ज्वार या रागी की रोटी, उबली हुई हरी सब्जियाँ मैदा, सोया उत्पाद (सोयाबीन), पत्ता गोभी, फूलगोभी और कच्चा ब्रोकली
रात (डिनर) हल्की खिचड़ी, वेजिटेबल सूप, और आसानी से पचने वाली उबली हुई सब्जियाँ भारी डेयरी उत्पाद, लाल मांस, डीप फ्राई की हुई चीजें और जंक फूड

इस स्थिति में लाभकारी जड़ी-बूटियाँ कौन सी हैं?

प्रकृति ने हमें कई ऐसी शानदार जड़ी-बूटियाँ दी हैं। ये हमारे शरीर को अंदर से पोषण देती हैं। इससे बालों का झड़ना रुक सकता है। आइए, ऐसी ही कुछ खास जड़ी-बूटियों के बारे में जानते हैं:

  • अश्वगंधा: यह तनाव के हार्मोन को कम करता है और थायरॉयड ग्रंथि के कार्य को संतुलित करने में बहुत सहायक माना जाता है।
  • भृंगराज: इसे आयुर्वेद में 'केशराज' कहा गया है; यह बालों की जड़ों को सीधा पोषण देता है और नए बाल उगाने में मदद करता है।
  • आँवला: इसमें प्राकृतिक रूप से भरपूर विटामिन सी पाया जाता है। यह शरीर में बढ़े हुए पित्त को शांत करता है। इसके इस्तेमाल से बालों का झड़ना कम होता है। साथ ही, यह बालों को समय से पहले सफेद होने से भी रोकता है।
  • गिलोय: यह शरीर से विषैले पदार्थों (आम) को बाहर निकालकर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और चयापचय में सुधार लाता है।
  • शतावरी: यह असल में हमारे शरीर को अंदर ही अंदर एक गज़ब की ठंडक और सुकून देती है। आजकल जो हॉर्मोन्स के ऊपर-नीचे होने की इतनी दिक्कतें होती हैं यह उन सबको बिल्कुल प्राकृतिक तरीके से ठीक करने में हमारी बहुत मदद करती है।

बालों का झड़ना प्रबंधित करने वाली लाभकारी आयुर्वेदिक थेरेपी

सिर्फ जड़ी-बूटियाँ ही नहीं, आयुर्वेद में कुछ खास तरीके भी बताए गए हैं। ये तरीके शरीर में जमा हुए फालतू वात और पित्त को बाहर निकालते हैं। इससे बालों को घना और मज़बूत बनाने में काफी मदद मिलती है:

  • शिरोधारा: इसमें माथे पर औषधीय तेल या छाछ की एक लगातार धारा गिराई जाती है। इससे हमारी उलझी हुई नसों को एक बहुत ही गहरी शांति मिलती है।
  • नस्य कर्म: नाक के माध्यम से हर्बल तेल की बूँदें डाली जाती हैं, जो सिर के क्षेत्र से दोषों को निकालकर स्कैल्प का रक्त संचार बढ़ाती हैं।
  • शिरो अभ्यंग: इसमें जड़ी-बूटियों वाले तेल से सिर की हल्की-हल्की मालिश की जाती है। इसके लिए आमतौर पर भृंगराज या ब्राह्मी जैसे तेलों का इस्तेमाल होता है। इस मालिश से बालों की जड़ों को सीधा पोषण मिलता है।
  • बस्ती कर्म: यह पंचकर्म की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो आंतों को साफ कर पूरे शरीर में बढ़े हुए वात दोष को जड़ से शांत करती है।

आयुर्वेदिक उपचार से सुधार की समय सीमा क्या है?

आयुर्वेद हमेशा बीमारी की जड़ पर काम करता है। इसलिए यह कोई जादुई छड़ी नहीं है, जो रातों-रात कमाल कर दे। इसमें थोड़ा समय ज़रूर लगता है। लेकिन जो भी सुधार होता है, वह लंबे समय तक टिकने वाला होता है:

  • पहले 3 से 4 सप्ताह: पाचन में सुधार होने लगता है, ऊर्जा का स्तर बढ़ता है और स्कैल्प का रूखापन व खुजली कम होने लगती है।
  • 1 से 2 महीने: बालों का टूटना धीरे-धीरे कम होने लगता है और नींद की गुणवत्ता में भी स्पष्ट सुधार नजर आता है।
  • 3 से 4 महीने: इतने समय में सिर पर नए बाल (बेबी हेयर) उगने शुरू हो जाते हैं। इसके साथ ही, पुराने बालों की जड़ें भी पहले से ज़्यादा मज़बूत होने लगती हैं।
  • 6 महीने और उससे अधिक: बालों का घनत्व बढ़ने लगता है और थायरॉयड के समग्र लक्षणों में भारी कमी महसूस होती है।

बालों के झड़ने के लिए आयुर्वेद का दृष्टिकोण कैसे बेहतर है?

आधुनिक चिकित्सा मुख्य रूप से केवल थायरॉयड हार्मोन के स्तर को कृत्रिम रूप से बनाए रखने पर ध्यान देती है। यही कारण है कि दवाएँ लेने के बावजूद, यदि आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म और पोषण अवशोषण तंत्र (पाचन) खराब है, तो बाल झड़ते रहते हैं। आयुर्वेद केवल एक हार्मोन या एक लक्षण पर ध्यान केंद्रित नहीं करता है।

आयुर्वेद एक संपूर्ण (होलिस्टिक) तरीका अपनाता है। यह मानता है कि हर इंसान की प्रकृति अलग होती है। इसीलिए, इसमें सबसे ज़्यादा ज़ोर हमारे पाचन तंत्र (अग्नि) को ठीक करने पर दिया जाता है। यह शरीर से गंदगी बाहर निकालता है। साथ ही, वात और पित्त का संतुलन भी बनाता है। जब शरीर अंदर से पूरी तरह साफ़ हो जाता है, तो अंदरूनी काम-काज ठीक से होने लगता है। इसका सीधा असर हमारे बालों पर दिखता है और वे प्राकृतिक रूप से घने और मज़बूत हो जाते हैं।

डॉक्टर से परामर्श कब लें?

हमारे शरीर के कुछ इशारे ऐसे होते हैं, जिन्हें हमें कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर आपको भी ऐसे कुछ संकेत दिखें, तो समझ लीजिए कि अब किसी अच्छे विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना बहुत ज़रूरी हो गया है। जैसे कि:

  • अत्यधिक पैच बनना: यदि सिर पर अचानक गोल-गोल चकत्ते (पैचेस) बनने लगें और वहाँ से बाल पूरी तरह गायब हो जाएँ।
  • सिर में गंभीर सूजन: यदि स्कैल्प पर दर्दनाक दाने, लालिमा या पस वाले छाले दिखाई देने लगें।
  • वजन में अचानक बदलाव: आपके बाल तो झड़ ही रहे हैं, लेकिन इसके साथ-साथ, अगर आप ध्यान दें कि आपका वजन भी अचानक से बहुत तेज़ी से बढ़ने लगा है। या फिर ऐसा भी हो सकता है कि वजन एकदम से तेज़ी से गिरने लगा हो, तो ये एक बहुत बड़ा इशारा है।
  • दवाओं का टकराव: यदि आप पहले से ही थायरॉयड की उच्च खुराक ले रहे हैं, तो किसी भी नई जड़ी-बूटी को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से पूछना जरूरी है।

निष्कर्ष

अक्सर लोग सोचते हैं कि थायरॉयड की वजह से बाल झड़ रहे हैं, तो ये सिर्फ हमारी बाहरी खूबसूरती के खराब होने की बात है। लेकिन असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है। ये तो इस बात का एक बहुत बड़ा सबूत है कि आपके शरीर के अंदर कुछ तो ऐसा है जो सही से काम नहीं कर रहा है। उसका संतुलन पूरी तरह से बिगड़ चुका है।

यदि आप भी थायरॉयड के कारण बालों के झड़ने से परेशान हैं और एक स्थायी व प्राकृतिक समाधान खोज रहे हैं, तो इसे और अधिक बिगड़ने न दें। अपनी प्रकृति के अनुसार व्यक्तिगत मार्गदर्शन और सही उपचार के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद के विशेषज्ञों से +919266714040 पर संपर्क करें।

References

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https://www.nhs.uk/conditions/underactive-thyroid-hypothyroidism/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

रिपोर्ट नॉर्मल आने का मतलब केवल इतना है कि दवा ने रक्त में हार्मोन के स्तर को संतुलित कर दिया है। लेकिन, जब तक शरीर की चयापचय प्रक्रिया (मेटाबॉलिज्म) और पाचन तंत्र पूरी तरह से स्वस्थ नहीं होते, तब तक बालों के रोम को आवश्यक पोषण नहीं मिल पाता। ऐसे में बालों के झड़ने को रोकने के लिए आहार और दिनचर्या में सुधार करना बेहद आवश्यक है।

आयुर्वेद में भृंगराज और ब्राह्मी से युक्त तेलों को बालों की सेहत के लिए सबसे उत्तम माना गया है। ये तेल स्कैल्प के रक्त संचार को बढ़ाते हैं और बालों की जड़ों को शीतलता प्रदान कर वात-पित्त को शांत करते हैं। बेहतर परिणामों के लिए सप्ताह में दो बार हल्के गुनगुने तेल से सिर की मालिश करनी चाहिए।

बालों का झड़ना इन दोनों ही स्थितियों में देखा जा सकता है, लेकिन यह हाइपोथायरायडिज्म (अंडरएक्टिव थायरॉयड) में अधिक आम है। इसमें शरीर का मेटाबॉलिज्म बहुत धीमा हो जाता है, जिससे बालों की जड़ें सूखने लगती हैं और बाल बेजान होकर गिर जाते हैं। अपने डॉक्टर की सलाह पर सही डाइट फॉलो करके आप इस प्रभाव को कम कर सकते हैं।

थायरॉयड के साथ-साथ यदि शरीर में आयरन, जिंक, और विटामिन बी-12 की कमी हो जाए, तो बालों का गिरना कई गुना बढ़ सकता है। ये सभी पोषक तत्व बालों की वृद्धि और मजबूती के लिए बुनियादी ईंटों की तरह काम करते हैं। इसलिए अपने भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियाँ, नट्स और बीजों को शामिल करना बहुत फायदेमंद होता है।

तनाव शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन को बढ़ा देता है, जो थायरॉयड ग्रंथि के कार्य में और अधिक बाधा डालता है। इसके कारण बालों के विकास का चक्र समय से पहले ही रेस्टिंग फेज में चला जाता है और बाल तेजी से गिरने लगते हैं। ध्यान, योग और पर्याप्त नींद के जरिए तनाव को प्रबंधित करना इस स्थिति में बहुत जरूरी है।

सोयाबीन और उससे बनी चीजों में गोइट्रोजन (Goitrogens) नामक तत्व होते हैं, जो थायरॉयड ग्रंथि को आयोडीन सोखने से रोक सकते हैं। इससे ग्रंथि का कामकाज और धीमा हो सकता है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से बालों का गिरना बढ़ सकता है। यदि आपको सोया खाना ही है, तो उसे अच्छी तरह पकाकर और सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए।

विभिन्न योगासन और प्राणायाम सिर की ओर रक्त के प्रवाह को बढ़ाते हैं, जिससे बालों की जड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुँचते हैं। सर्वांगासन और अनुलोम-विलोम जैसे अभ्यास थायरॉयड ग्रंथि को प्राकृतिक रूप से उत्तेजित करते हैं। इन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करने से हार्मोनल संतुलन में काफी मदद मिल सकती है।

थायरॉयड के कारण बाल पहले से ही रूखे और कमजोर होते हैं, और सल्फेट युक्त शैम्पू स्कैल्प का बचा हुआ प्राकृतिक तेल भी छीन लेते हैं। इससे बाल और अधिक भंगुर (brittle) होकर बीच से टूटने लगते हैं। हमेशा माइल्ड, सल्फेट-मुक्त और हर्बल क्लींजर का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

अधिकांश मामलों में थायरॉयड की आधुनिक दवाओं के साथ आयुर्वेदिक औषधियाँ लेना सुरक्षित होता है, लेकिन दोनों के बीच एक निश्चित समय का अंतर रखना बहुत जरूरी है। कभी भी अपनी एलोपैथिक दवा को अचानक बंद नहीं करना चाहिए। किसी भी नई आयुर्वेदिक औषधि को शुरू करने से पहले एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।

शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेशन) से स्कैल्प की त्वचा सूख जाती है और बालों की जड़ें कमजोर पड़ जाती हैं। पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और पोषक तत्वों को कोशिकाओं तक पहुँचाने का काम करता है। दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास हल्का गुनगुना पानी पीना समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

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