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भूख कम लगना digestion weak होने का संकेत हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हम सोचते हैं कि अगर खाने का मन नहीं कर रहा है, तो शायद पेट भरा हुआ है या कोई खास वजह नहीं है। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि आपकी भूख का सीधा संबंध आपके पाचन तंत्र की ताकत से होता है? जब हाज़मा कमज़ोर पड़ जाता है, तो शरीर नया खाना माँगने से साफ इंकार कर देता है। दरअसल, यह हमारे शरीर का एक इशारा है कि अंदर की मशीनरी में कुछ गड़बड़ चल रही है। जब खाया हुआ खाना पेट में पड़ा-पड़ा सड़ने लगता है, तो भूख अपने आप मर जाती है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह सिर्फ अरुचि नहीं है, बल्कि आपके पेट की यह पुकार है कि उसे अब कुछ समय के लिए आराम और रिपेयरिंग की सख्त ज़रूरत है।

आखिर पेट में खाना पचता क्यों नहीं है? 

हमारे शरीर में जब हम खाना खाते हैं, तो पेट के अंदर पाचक रस बनते हैं जो खाने को गलाने और पचाने का काम करते हैं। अगर किसी वजह से आपकी आँतें सुस्त पड़ जाएँ या पाचक रस बनना कम हो जाए, तो पाचन की प्रक्रिया एकदम धीमी हो जाती है। ऐसे में जो भी आप खाते हैं, वह पेट में ही रखा रह जाता है और ऊर्जा में बदलने के बजाय सिर्फ भारीपन पैदा करता है। यही कारण है कि पेट हमेशा भरा-भरा सा महसूस होता है और कुछ भी नया खाने की इच्छा बिलकुल खत्म हो जाती है।

क्या सिर्फ बीमारी की वजह से ही खाने का मन नहीं करता?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार आप पूरी तरह स्वस्थ होते हैं, फिर भी खाने की थाली देखकर आपका मन पीछे हट जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी लाइफस्टाइल पर बहुत गहरा असर पड़ता है। बेवक्त सोना, पानी कम पीना, या लगातार बैठे रहना भी पाचन को धीमा कर देता है। जब शरीर में शारीरिक मेहनत की कमी होती है, तो उसे ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत नहीं पड़ती और नतीजतन भूख लगनी बंद हो जाती है।

मंदाग्नि (कमज़ोर पाचन) आपके शरीर के साथ क्या करती है?

जब हमारा हाज़मा बिगड़ने लगता है, तो शरीर के अंदर कई सारे बदलाव एक साथ देखने को मिलते हैं:

  • पोषक तत्वों की कमी: खाना ठीक से न पचने के कारण शरीर को ज़रूरी विटामिन्स और मिनरल्स नहीं मिल पाते।
  • पेट में भारीपन: खाने के बाद पेट में गैस का गोला सा बनना और अफारा या भारीपन महसूस होना।
  • थकान और सुस्ती: शरीर को खाने से नई ऊर्जा नहीं मिलती, जिससे हर समय कमज़ोरी और आलस बना रहता है।
  • कब्ज की शिकायत: आँतों की चाल धीमी होने से सुबह पेट ठीक से साफ नहीं होता।

लगातार भूख न लगना किन गंभीर खतरों की घंटी हो सकती है?

अगर आपको लंबे समय से भूख नहीं लग रही है और पेट हमेशा खराब रहता है, तो इसे नज़रअंदाज़ बिल्कुल न करें। यह शरीर में चल रही किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है:

  • फैटी लिवर: लिवर पर सूजन आ जाने से वह अपना काम ठीक से नहीं कर पाता, जिससे भूख पूरी तरह खत्म हो जाती है।
  • आँतों का इंफेक्शन: पेट या आँतों में कोई बैक्टीरियल इन्फेक्शन होने पर भी खाने की इच्छा मर जाती है।
  • एनीमिया: शरीर में खून की कमी होने से पूरा सिस्टम धीमा पड़ जाता है, जिसमें पाचन तंत्र भी शामिल है।
  • पीलिया (Jaundice): यह बीमारी सीधे लिवर पर वार करती है और इसका सबसे पहला लक्षण ही भूख का न लगना होता है।

भूख मिट जाने को लेकर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में पाचन की ज़िम्मेदारी 'जठराग्नि' (पेट की आग) की होती है। जब शरीर में कफ या वात दोष बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, तो यह जठराग्नि मंद (कमज़ोर) पड़ जाती है। इसी कमज़ोर आग को आयुर्वेद में 'मंदाग्नि' कहा जाता है। जैसे अगर चूल्हे की आग धीमी हो, तो खाना पकने के बजाय कच्चा रह जाता है, वैसे ही मंदाग्नि में खाना पचने के बजाय पेट में सड़ने लगता है। इसी सड़न की वजह से 'आम' (गंदगी) बनता है, जो भूख लगने के रास्तों को ब्लॉक कर देता है।

हाज़मा दुरुस्त करने और भूख खोलने वाली बेहतरीन जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसी कई बेहतरीन जड़ी-बूटियाँ दी हैं जो सुस्त पड़े पाचन तंत्र में जान फूँक देती हैं:

  • अदरक: इसे आयुर्वेद में बेहतरीन पाचक माना गया है। यह पेट की आग को तेज़ करता है और प्राकृतिक भूख बढ़ाता है।
  • त्रिफला: यह आँतों की गहराई से सफाई करके कब्ज को दूर करता है, जिससे नई और तेज़ भूख खुलकर लगती है।
  • जीरा: यह पेट की गैस को शांत करता है और हाज़मे वाले रसों को बढ़ाने में बहुत मदद करता है।
  • पुदीना: यह पेट को ठंडक देता है और अपच की वजह से होने वाले भारीपन को तुरंत खत्म करता है।

क्या शारीरिक सुस्ती (Physical Inactivity) भी भूख को मार देती है?

बिलकुल! आप जितनी कम शारीरिक मेहनत करते हैं, आपका शरीर उतनी ही कम कैलोरी जलाता है। जब पुरानी ऊर्जा ही इस्तेमाल नहीं हो रही, तो शरीर नया खाना क्यों माँगेगा? दिन भर बैठे रहने से या कोई भी मेहनत वाला काम न करने से आँतों की चाल एकदम सुस्त पड़ जाती है। जब पेट की मांसपेशियों काम ही नहीं करेंगी, तो खाना आगे कैसे खिसकेगा? इसी वजह से पेट में भारीपन रहता है और भूख का नाम-ओ-निशान मिट जाता है।

रोज़मर्रा की वो गलतियाँ जो आपकी भूख और हाज़मे को बर्बाद कर देती हैं

हम अक्सर जाने-अनजाने में कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो हमारी परेशानी को दोगुना कर देता है:

  • असमय खाना खाना: बिना भूख लगे सिर्फ टाइम देखकर या स्वाद के लिए खाने से पाचन तंत्र पर बोझ पड़ता है।
  • पानी पीने का गलत तरीका: खाना खाने के तुरंत बाद गट-गट बहुत सारा पानी पी लेने से पेट की पाचक अग्नि बुझ जाती है।
  • जंक फूड और बाहर का खाना: इनमें मौजूद खराब तेल और मैदा आँतों में चिपक जाते हैं और भूख को पूरी तरह मार देते हैं।
  • रात का भारी भोजन: सोने से ठीक पहले हैवी खाना खाने से वह पचता नहीं है और अगली सुबह पेट फूला हुआ रहता है।
  • चाय-कॉफी की लत: खाली पेट बहुत ज़्यादा कैफीन लेने से गैस बनती है और शरीर की प्राकृतिक भूख मर जाती है।

शरीर की वो कौन सी कमज़ोरियाँ हैं जो सीधा पाचन पर वार करती हैं?

कई बार आपकी डाइट बिल्कुल सही होती है, लेकिन शरीर के अंदर की कुछ दिक्कतें भूख को खत्म कर देती हैं:

  • हार्मोनल असंतुलन: शरीर में हार्मोन्स का बिगड़ना सीधे तौर पर मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है।
  • ज़िंक की कमी: ज़िंक हमारी स्वाद ग्रंथियों और पाचन के लिए बहुत ज़रूरी है, इसकी कमी से खाने का स्वाद और मन दोनों चले जाते हैं।
  • लंबे समय तक कब्ज: अगर पेट ठीक से साफ नहीं होगा और मल आँतों में जमा रहेगा, तो नया खाना खाने की इच्छा अपने आप खत्म हो जाएगी।
  • बुखार या कोई संक्रमण: जब शरीर किसी बीमारी से लड़ रहा होता है, तो उसका सारा फोकस ठीक होने पर होता है, पाचन पर नहीं।

भूख बढ़ाने वाले सिरप या चूरन का रोज़ाना इस्तेमाल कब नुकसानदायक बन जाता है?

जब भी भूख नहीं लगती, हम झट से मेडिकल स्टोर जाकर कोई न कोई भूख बढ़ाने वाला सीरप या हाज़मे की गोली ले आते हैं। शुरुआत में ये असर दिखाते हैं और भूख भी लगती है, लेकिन रोज़ाना इनके भरोसे बैठना बहुत खतरनाक है। हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से पाचक रस बनाता है। अगर आप हमेशा बाहर की दवाइयों के सहारे भूख बढ़ाएँगे, तो शरीर का अपना सिस्टम काम करना ही भूल जाएगा। एक वक्त ऐसा आएगा जब बिना दवाई के आपको एक रोटी खाने की भी इच्छा नहीं होगी।

बिना दवा के भूख बढ़ाने और पेट को हल्का रखने के आसान तरीके

आप कुछ बहुत ही आसान और घरेलू तरीके अपनाकर इस परेशानी से आराम पा सकते हैं:

  • खाना खाने से आधा घंटा पहले अदरक के छोटे से टुकड़े पर थोड़ा सा काला नमक लगाकर चूसें, इससे भूख खुलकर लगने लगेगी।
  • हल्का गुनगुना पानी पीने की आदत डालें, यह पेट की नसों में जमे हुए 'आम' (गंदगी) को पिघलाकर बाहर निकाल देता है।
  • दोपहर में छाछ (मट्ठा) में भुना हुआ जीरा और चुटकी भर हींग डालकर पिएँ, यह कमज़ोर पाचन तंत्र के लिए अमृत के समान है।
  • जब तक पहली बार खाया हुआ खाना पूरी तरह पच न जाए और पेट खाली महसूस न हो, तब तक दोबारा कुछ भी ठोस चीज़ न खाएँ।

एक तंदुरुस्त पेट और अच्छी भूख के लिए अपनाएँ ये आदतें

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके आप बहुत बड़ा फायदा देख सकते हैं:

  • भूख का सम्मान करें: जब सच में ज़ोरदार भूख लगे, तभी खाना खाएँ। बिना भूख के ज़बरदस्ती कभी भोजन न करें।
  • हल्का भोजन लें: जब हाज़मा खराब हो, तो शुरुआत में मूँग दाल की खिचड़ी या दलिया जैसे हल्के आहार लें, जो आसानी से पच जाएँ।
  • शारीरिक कसरत करें: रोज़ सुबह योगासन या हल्की स्ट्रेचिंग करने से पेट की नसों में खिंचाव आता है और पाचन सुधरता है।
  • खुश रहें: स्ट्रेस या तनाव को खुद पर हावी न होने दें, क्योंकि एक खुशहाल मन ही अच्छे हाज़मे की सबसे बड़ी निशानी है।

भूख न लगने पर डॉक्टर से मिलना कब ज़रूरी हो जाता है?

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर हाज़मा न सुधरे, तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

  • अगर भूख न लगने के साथ-साथ आपका वज़न बिना किसी कोशिश के बहुत तेज़ी से गिरने लगे।
  • जब खाना देखते ही आपको बहुत तेज़ उबकाई (Nausea) या उल्टी आने लगे।
  • अगर आपकी आँखों, नाखूनों और त्वचा का रंग पीला पड़ने लगे (यह सीधे तौर पर पीलिया या लिवर की खराबी का इशारा है)।
  • पेट में लगातार तेज़ दर्द या मरोड़ बनी रहे जो किसी चूरन या गोली से ठीक न हो रही हो।

आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) और आयुर्वेद के इलाज में फर्क

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य भूख की कमी के कारणों की पहचान कर उनका उपचार करना। शरीर के संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर जोर देना।
उपचार का तरीका दवाइयाँ, सप्लीमेंट्स, पोषण संबंधी सलाह और अन्य चिकित्सीय उपाय। जड़ी-बूटियाँ, आहार-विहार और पारंपरिक उपचार पद्धतियाँ।
पाचन पर ध्यान आवश्यकतानुसार एंजाइम्स या अन्य उपचार दिए जा सकते हैं। पाचन शक्ति (जठराग्नि) और भोजन संबंधी आदतों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
असर दिखने का समय कुछ उपचार अपेक्षाकृत जल्दी प्रभाव दिखा सकते हैं। प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है और जीवनशैली सुधार पर केंद्रित रहता है।
दीर्घकालिक परिणाम स्वास्थ्य समस्याओं के प्रबंधन और जटिलताओं की रोकथाम पर ध्यान। संतुलित दिनचर्या और स्वस्थ आदतों के माध्यम से दीर्घकालिक स्वास्थ्य का प्रयास।
जीवनशैली की भूमिका उपचार के साथ खानपान और दिनचर्या में सुधार की सलाह दी जाती है। उपचार का मुख्य आधार ही आहार, दिनचर्या और जीवनशैली को माना जाता है।

निष्कर्ष

हमेशा याद रखें कि आपका पाचन तंत्र आपकी पूरी सेहत का सबसे मुख्य 'इंजन' है। अगर इंजन में ही खराबी होगी, तो आप कितना भी पौष्टिक खाना खा लें, आपके शरीर को उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इसलिए भूख कम लगने और हाज़मा कमज़ोर होने को छोटी बात मानकर अनदेखा न करें। जब भी भूख मरे, तो समझ जाइए कि पेट आपसे रुकने और आराम करने के लिए कह रहा है। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में थोड़ा ठहरें, अपनी दिनचर्या को अनुशासित करें, और शरीर को उसकी प्राकृतिक लय में वापस आने का समय दें। जब हाज़मा दुरुस्त होगा, तो खुलकर भूख भी लगेगी और आप अंदर से तंदुरुस्त महसूस करेंगे।

References:

https://www.nhs.uk/live-well/eat-well/digestive-health/good-foods-to-help-your-digestion/

https://www.healthline.com/nutrition/ways-to-improve-digestion

https://www.healthline.com/health/digestive-health

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारा मेटाबॉलिज़्म धीमा होने लगता है और शारीरिक मेहनत कम हो जाती है। इसके अलावा, स्वाद और सूंघने की क्षमता भी कमज़ोर हो जाती है, जिससे बुढ़ापे में प्राकृतिक रूप से भूख कम लगने लगती है।

बिलकुल! सिगरेट में मौजूद निकोटीन भूख दबाने का काम करता है। वहीं, ज़्यादा शराब पीने से लिवर और पेट की अंदरूनी परत पर सूजन आ जाती है, जिससे पाचन तंत्र बुरी तरह डैमेज होता है और खाने की इच्छा खत्म हो जाती है।

अगर इसे सही तरीके से किया जाए, तो यह पाचन तंत्र को आराम देने और रिपेयर करने का बेहतरीन तरीका है। फास्टिंग के दौरान पेट को लगातार खाना पचाने से छुट्टी मिल जाती है, जिससे कमज़ोर जठराग्नि दोबारा मज़बूत होती है।

हाँ, जब आप लगातार च्युइंग गम चबाते हैं, तो आप बहुत सारी हवा भी निगल लेते हैं जो पेट में जाकर गैस और ब्लोटिंग पैदा करती है। इससे पेट भरा-भरा लगता है और असली खाने के समय भूख नहीं लगती।

गर्भावस्था के पहले ट्राइमेस्टर में शरीर में 'HCG' और एस्ट्रोजन हार्मोन्स बहुत तेज़ी से बढ़ते हैं। इन्हीं हार्मोन्स के उतार-चढ़ाव की वजह से महिलाओं को उबकाई (Morning Sickness) आती है और कुछ भी खाने का मन नहीं करता।

प्रोबायोटिक्स असल में हमारे पेट के 'अच्छे बैक्टीरिया' होते हैं (जो दही या छाछ में मिलते हैं)। जब पेट में अच्छे बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ती है, तो खाना जल्दी पचता है, गैस कम बनती है और भूख प्राकृतिक रूप से वापस आ जाती है।

एनोरेक्सिया नर्वोसा एक गंभीर मानसिक बीमारी (Eating Disorder) है। इसमें इंसान को भूख तो लगती है, लेकिन वज़न बढ़ने के डर से वह खाना ही छोड़ देता है। धीरे-धीरे शरीर का पाचन तंत्र इतना कमज़ोर हो जाता है कि वह असली भूख को ही खत्म कर देता है।

आयुर्वेद के अनुसार, हमारा पाचन गर्मी (अग्नि) से चलता है। जब आप लगातार बहुत ठंडे वातावरण में रहते हैं और पसीना नहीं बहाते, तो शरीर का तापमान गिरता है और जठराग्नि भी सुस्त पड़ जाती है, जिससे खाना देर से पचता है।

जब आपका ध्यान स्क्रीन पर होता है, तो दिमाग पेट को पाचक रस निकालने का सिग्नल ठीक से नहीं भेज पाता। ऐसे में आप या तो ज़रूरत से ज़्यादा खा लेते हैं (Overeating), या फिर खाना पेट में सही से पचता नहीं है, जिससे अगली मील (Meal) में भूख नहीं लगती।

हाँ, जब आप खाना खाने के आस-पास एकदम चिल्ड पानी पीते हैं, तो पेट की रक्त वाहिकाएँ (Blood vessels) सिकुड़ जाती हैं। इससे पाचन प्रक्रिया एकदम ठंडी पड़ जाती है और खाया हुआ खाना पचने के बजाय पेट में ही जमने लगता है।

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