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सुबह पेट साफ नहीं होता — लाख उपाय कर लो, जब तक ये नहीं सुधारोगे

Information By Dr. Keshav Chauhan

आजकल का टाइम ऐसा हो गया है कि हम दुनिया भर की बीमारियों से घिरे हैं लेकिन सुबह पेट साफ ना होना एक आम बात सी हो गई है खासकर उन लोगों के लिए जो दिनचर्या में बहुत कम शारीरिक गतिविधियां करते हैं इसी के साथ-साथ जो ऑफिस गोइंग लोग हैं उनके साथ यह समस्या बहुत आम है इस समस्या का उपाय टेंपरेरी दवाइयां से, कैप्सूल से और चीजों से हो जाता है लेकिन परमानेंटली इसको सही करने के लिए हमें एक लाइफस्टाइल में सुधार करना पड़ेगा अपना रूटीन सेटअप करना पड़ेगा |

लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि वे रोज़ सुबह गर्म पानी पीते हैं महंगे चूर्ण, त्रिफला और दवाइयां भी खाते हैं। फिर भी सुबह पेट खुलकर साफ़ नहीं होता। दिनभर भारीपन और चिड़चिड़ापन बना रहता है।

असल में, जब तक आप अपनी रोज़मर्रा की कुछ बुनियादी आदतों को नहीं सुधारेंगे, तब तक कोई भी नुस्खा काम नहीं करेगा |

आइए बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है

आंतों की मूवमेंट का धीमा होना - हमारी आंतें मल को आगे धकेलने के लिए लगातार सिकुड़ती और फैलती हैं इसे आप एक लहर की तरह समझ सकते हैं जब हम दिनभर शारीरिक रूप से एक्टिव नहीं रहते या कम पानी पीते हैं, तो यह लहर बहुत धीमी हो जाती है इस वजह से कचरा आगे नहीं बढ़ पाता और वहीं ठहर जाता है।

बड़ी आंत का सारा पानी सोख लेना-जब पचा हुआ खाना हमारी बड़ी आंत (Colon) में पहुंचता है, तो आंत का काम उसमें से ज़रूरी पानी को सोखना होता है लेकिन अगर खाना आंतों में बहुत देर तक रुका रहे (जैसे रात को देर से खाने पर होता है), तो आंत उसमें से बहुत ज़्यादा पानी सोख लेती है नतीजा यह होता है कि मल बिल्कुल सूख और सख्त हो जाता है, जिसे पास करना मुश्किल हो जाता है।

बैठने का गलत तरीका- आजकल ज़्यादातर घरों में वेस्टर्न कमोड का इस्तेमाल होता है।इस पोजीशन में हमारे पेट की एक खास मांसपेशी ,मलाशय Rectum को कसकर खींच लेती है, जिससे रास्ता थोड़ा मुड़ जाता है। इसके उलट,उकड़ू (Squat Position) बैठने पर यह रास्ता पूरी तरह सीधा खुलता है और पेट आसानी से साफ़ होता है।

अच्छे बैक्टीरिया की कमी-हमारे पेट में करोड़ों अच्छे बैक्टीरिया होते हैं। इनका काम खाने को अच्छे से गलाना और आंतों को साफ़ रखना होता है। जब हम ज़्यादा मैदा, तली-भुनी चीज़ें या पैकेट वाला खाना खाते हैं, तो ये अच्छे बैक्टीरिया कम होने लगते हैं। इनके बिना आंतों की सफाई का नेचुरल सिस्टम बिगड़ जाता है।

दिमाग से सही सिग्नल न मिलना- सुबह जब हमारी आंतें कचरा बाहर निकालने के लिए तैयार होती हैं, तो वे दिमाग को एक प्रेशर सिग्नल भेजती हैं। लेकिन अगर हम उठते ही मोबाइल देखने लगें, काम की टेंशन ले लें या सुबह उठने में बहुत देरी कर दें, तो दिमाग उस सिग्नल को दबा देता है। धीरे-धीरे शरीर को सुबह प्रेशर बनाने की आदत ही भूल जाती है।

सुबह पेट साफ करने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय 

यदि सुबह उठने के बाद पेट ठीक से साफ नहीं होता, तो केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय अपनी दिनचर्या और खानपान में कुछ छोटे बदलाव करना फायदेमंद हो सकता है ये आसान उपाय पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और मल त्याग को नियमित रखने में मदद कर सकते हैं।

 सुबह उठते ही गुनगुना पानी पिएं—खाली पेट हल्का गर्म पानी पीने की आदत डालें। इससे हमारी आंतें सुबह-सुबह एक्टिव हो जाती हैं। नतीजा यह होता है कि पेट साफ़ करना बहुत आसान हो जाता है।

 एक तय समय पर टॉयलेट जाने की आदत बनाएं—रोज़ सुबह एक निश्चित समय तय कर लें। भले ही शुरू में आपको प्रेशर महसूस न हो, फिर भी उस समय पर कोशिश ज़रूर करें। धीरे-धीरे शरीर को इसकी आदत पड़ जाएगी।

 खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं- अपनी डाइट में रेशेदार चीज़ें शामिल करें। इसके लिए ताज़े फल, हरी सब्जियां, सलाद और अंकुरित अनाज बेहतरीन विकल्प हैं। यह सब पाचन को मज़बूत बनाने का काम करते हैं।

दिनभर भरपूर पानी पिएं- शरीर में पानी की कमी न होने दें। पर्याप्त पानी पीने से मल सख्त नहीं होता और वह नरम बना रहता है। इससे सुबह पेट बिना किसी तकलीफ के साफ़ हो जाता है।

 सुबह हल्की सैर ज़रूर करें- रोज़ सुबह उठकर 20 से 30 मिनट पैदल चलने का नियम बनाएं। सुबह की यह सैर आंतों की रफ़्तार को बढ़ाती है। इससे आपका पूरा डाइजेस्टिव सिस्टम जाग उठता है।

 देर रात भारी खाना खाने से बचें- रात का भोजन हमेशा समय पर कर लेना चाहिए। साथ ही, डिनर को जितना हो सके हल्का-फुल्का रखें। ऐसा करने से आपके पाचन तंत्र को रात में आराम करने का पूरा मौका मिलता है।

 तनाव और चिंता को कंट्रोल करें—मानसिक तनाव का सीधा असर हमारे पेट पर पड़ता है। इसलिए मन को शांत रखना बेहद ज़रूरी है। इसके लिए आप योग, प्राणायाम या ध्यान (Meditation) की मदद ले सकते हैं।

 नेचुरल प्रेशर को कभी न रोकें- जब भी पेट साफ़ करने की इच्छा हो, उसे बार-बार टालने की गलती बिलकुल न करें। प्रेशर को रोकने से आंतों का नेचुरल सिस्टम बिगड़ जाता है और कब्ज़ की समस्या बढ़ जाती है।

अपनी नींद पूरी करें- एक अच्छी और गहरी नींद सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है। जब आप पर्याप्त सोते हैं, तो आपका पाचन तंत्र अंदर से खुद को संतुलित रखता है। इसलिए सोने में लापरवाही न करें।

रोज़ाना थोड़ी कसरत करें- शरीर को एक्टिव रखना बेहद ज़रूरी है। जब आप कोई भी शारीरिक कसरत या व्यायाम करते हैं, तो आंतें बेहतर तरीके से काम करने लगती हैं। इससे कब्ज़ की समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है।

सुबह पेट साफ न होने की समस्या के लिए आयुर्वेदिक डाइट प्लान 

समय क्या खाएं/पिएं लाभ
सुबह उठते ही 1–2 गिलास गुनगुना पानी आंतों को सक्रिय करने और मल त्याग को आसान बनाने में सहायक
खाली पेट रातभर भिगोए हुए 4–5 मुनक्के या 2 अंजीर मल को नरम बनाने और कब्ज कम करने में मदद
नाश्ता दलिया, मूंग दाल चीला, पोहा या सब्जियों वाला उपमा पाचन पर हल्का और पौष्टिक
मध्याह्न (11 बजे) पपीता, अमरूद या नाशपाती रेशे से भरपूर, आंतों की सफाई में सहायक
दोपहर का भोजन रोटी, मूंग दाल, हरी सब्जी, सलाद और थोड़ा दही पाचन को संतुलित रखने में मदद
भोजन के बाद सौंफ या थोड़ा भुना हुआ जीरा पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक
शाम का नाश्ता अंकुरित अनाज, नारियल पानी या मौसमी फल ऊर्जा और रेशे की पूर्ति
रात का भोजन मूंग दाल खिचड़ी, लौकी-तोरी की सब्जी या हल्का भोजन आसानी से पचने वाला भोजन
सोने से पहले गुनगुना पानी पाचन तंत्र को सहयोग और मल को नरम रखने में मदद

क्या खाएं?

  • पपीता
  • अमरूद
  • नाशपाती
  • अंजीर
  • मुनक्का
  • हरी पत्तेदार सब्जियां
  • लौकी
  • तोरी
  • गाजर
  • सलाद
  • मूंग दाल
  • दलिया
  • साबुत अनाज

किन चीजों से बचें?

  • तला-भुना भोजन
  • अत्यधिक मिर्च-मसाले
  • पैकेट वाले खाद्य पदार्थ
  • अधिक चाय और कॉफी
  • देर रात भारी भोजन
  • लंबे समय तक भूखे रहना

अगर फिर भी सुबह पेट साफ न हो तो क्या करें? 

मान लीजिए कि आप खूब पानी पी रहे हैं। खाने में फाइबर भी भरपूर ले रहे हैं। रोज़ नियम से कसरत कर रहे हैं और अपना डेली रूटीन भी सुधार चुके हैं। इसके बाद भी अगर सुबह पेट साफ़ नहीं हो रहा है, तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें। लंबे समय तक इस समस्या को अनदेखा करना ठीक नहीं है।

आयुर्वेद की मानें तो यह सिर्फ मामूली कब्ज़ नहीं है। यह आपके शरीर में बढ़े हुए 'वात दोष' का साफ इशारा हो सकता है। मुमकिन है कि आपके पेट की पाचन शक्ति (अग्नि) बहुत कमज़ोर हो गई हो, या फिर आपकी आंतें अंदर से सुस्त पड़ चुकी हों।

ऐसी स्थिति में सबसे सही तरीका यही है कि आप किसी योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से मिलें। उनसे सलाह लेना आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा। असल में, आयुर्वेद में हर इंसान का इलाज एक जैसा नहीं होता। डॉक्टर सबसे पहले आपके शरीर की प्रकृति को समझते हैं। वे आपकी पाचन शक्ति, खान-पान और जीने के तरीके को बारीकी से देखते हैं। इस तरह वे समस्या की असली जड़ तक पहुंचते हैं। फिर इसी जांच के आधार पर वे आपको खास आपके शरीर के हिसाब से सही डाइट, रूटीन और ज़रूरी उपाय बताते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार सुबह पेट साफ न होने का कारण 

आयुर्वेद में 'मंद अग्नि' यानी कमज़ोर पाचन शक्ति को कब्ज़ की सबसे बड़ी वजह माना गया है जब पेट की यह अग्नि धीमी पड़ जाती है, तो भोजन पूरी तरह पच नहीं पाता। नतीजा यह होता है कि बिना पचाये हुए भोजन शरीर के अंदर जमा होने लगता है। इसी वजह से मल सख्त हो जाता है और सुबह शौच के समय परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसके कुछ और भी कारण हैं। जैसे देर रात तक जागना और समय पर खाना न खाना। कम पानी पीना और खाने में फाइबर यानी रेशेदार चीज़ों की कमी भी इस समस्या को बढ़ा देती है आजकल घंटों एक ही जगह बैठे रहना और मानसिक तनाव लेना भी बहुत आम है, जिसका सीधा असर पेट पर पड़ता है। इसके अलावा, जब भी शरीर से प्राकृतिक प्रेशर बने, तो उसे टालना नहीं चाहिए। बार-बार ऐसा करने से आंतों का नेचुरल सिस्टम पूरी तरह बिगड़ जाता है।

निष्कर्ष

अगर सीधे शब्दों में कहें, तो सुबह पेट साफ़ न होना सिर्फ एक वक्त की दिक्कत नहीं है। यह हमारे पूरे शरीर की सेहत को दिखाता है। यह हमारी बिगड़ती लाइफस्टाइल का एक साफ आईना है। हमारा पेट अंदर से कैसा काम कर रहा है, यह पूरी तरह हमारी रोज़ की आदतों पर निर्भर करता है। दोनों के बीच में सीधा कनेक्शन है।

बाज़ार का कोई भी चूर्ण, दवाई या घरेलू नुस्खा आज़माने से पहले हमें अपनी कुछ बुनियादी गलतियों को ठीक करना होगा। जब तक हम अपनी आदतें नहीं बदलेंगे, तब तक कोई उपाय काम नहीं करेगा। सही समय पर खाना खाना, दिनभर पर्याप्त पानी पीना, शरीर को एक्टिव रखना और मानसिक तनाव से दूर रहना ही इसका असली और पक्का इलाज है। आयुर्वेद भी हमें यही समझाता है। जब तक हमारे पेट की पाचन शक्ति यानी 'अग्नि' अंदर से मज़बूत नहीं होगी, तब तक कोई भी बाहरी दवा असर नहीं कर पाएगी।

एक ज़रूरी बात: अपने शरीर के इन इशारों को कभी भी छोटा समझकर अनदेखा न करें। अगर खान-पान और रूटीन में सुधार करने के बाद भी परेशानी वैसी ही बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेने में बिल्कुल न हिचकिचाएं। किसी एक्सपर्ट के पास जाना ही सबसे सही कदम है। जब आपका पेट दुरुस्त रहेगा, तभी आप दिनभर खुद को हल्का और तरोताज़ा महसूस कर पाएंगे। आखिर एक अच्छे और सेहतमंद दिन की शुरुआत एक साफ़ पेट से ही तो होती है।

FAQs

गलत खान-पान, कम पानी पीना और शारीरिक सुस्ती इसका सबसे मुख्य कारण है।

नहीं। रोज़ चूर्ण खाने से आंतें अंदर से कमज़ोर होती हैं। आदत भी बिगड़ जाती है।

सुबह खाली पेट हल्का गुनगुना पानी पिएं। इससे हमारी आंतें तुरंत सक्रिय हो जाती हैं।

हमेशा खुलकर भूख लगने पर ही खाएं। रात का भोजन हल्का और जल्दी करें।

अपनी डाइट में ताज़े फल, हरी सब्ज़ियां, सलाद और अंकुरित अनाज ज़रूर शामिल करें।

कम पानी से मल सूख जाता है। इससे सुबह पेट साफ़ होने में कठिनाई होती है।

हाँ, बिल्कुल। तनाव सीधे हमारे पेट के पाचन तंत्र की रफ़्तार को धीमा करता है।

देर से खाया भोजन रातभर पेट में सड़ता है और कब्ज़ को बहुत बढ़ाता है।

इस पोजीशन में पेट का रास्ता सीधा खुलता है। मल बहुत आसानी से बाहर आता है।

अपनी लाइफस्टाइल बदलें। आराम न मिलने पर तुरंत किसी योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से मिलें।

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