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Allopathy की दवा से Uric Acid कम तो होता है पर बंद करते ही फिर बढ़ जाता है — क्यों?

Information By Dr. Keshav Chauhan

रात को आप बिल्कुल ठीक सोते हैं, लेकिन सुबह उठते ही पैर के अंगूठे में इतना भयंकर दर्द और लालिमा होती है कि ज़मीन पर पैर रखना नामुमकिन हो जाता है। आप डॉक्टर के पास जाते हैं, ब्लड टेस्ट में यूरिक एसिड बढ़ा हुआ आता है, और आपको कुछ गोलियाँ थमा दी जाती हैं। गोलियाँ खाते ही जादू की तरह दो दिन में दर्द गायब हो जाता है और अगली रिपोर्ट बिल्कुल नॉर्मल आती है।

लेकिन असली खेल तब शुरू होता है जब आप सोचते हैं कि आप ठीक हो गए हैं और दवा बंद कर देते हैं। कुछ ही हफ्तों या महीनों में वह दर्द और भी भयानक रूप लेकर वापस लौटता है। आखिर ऐसा क्यों होता है कि जो दवा आपकी रिपोर्ट को रातों-रात नॉर्मल कर देती है, वह इस बीमारी को हमेशा के लिए जड़ से खत्म क्यों नहीं कर पाती?

यूरिक एसिड की यह गोलियाँ बंद करते ही दर्द वापस क्यों पलटता है?

खून में यूरिक एसिड का बढ़ना कोई स्वतंत्र बीमारी नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर के मेटाबॉलिज़्म और लिवर के फेल होने का अलार्म है। जब आप इसे केवल एलोपैथिक दवाइयों से दबाते हैं, तो आप बीमारी की जड़ को छुए बिना केवल अलार्म के तार काट रहे होते हैं।

  • लिवर और किडनी की कमज़ोरी: यूरिक एसिड प्यूरीन (Purine) नामक प्रोटीन के पचने से बनता है। जब लिवर इसे ठीक से नहीं पचा पाता और किडनी इसे फिल्टर नहीं कर पाती, तो यह खून में तैरने लगता है। गोलियाँ केवल खून से इसे साफ करती हैं, आपके कमज़ोर हो चुके पाचन तंत्र और किडनी को ताकत नहीं देतीं।
  • दवा का काम करने का तरीका: एलोपैथिक दवाइयाँ (जैसे Allopurinol) शरीर में यूरिक एसिड बनने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर देती हैं। जैसे ही दवा बंद होती है, आपका लिवर दोबारा उसी पुरानी गति से ज़हरीला एसिड बनाने लगता है।
  • जोड़ों में जमे हुए क्रिस्टल्स: खून में यूरिक एसिड कम होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपके घुटनों और अंगूठों में जो क्रिस्टल्स (Crystals) जम चुके हैं, वो पिघल गए। यही क्रिस्टल्स दवा बंद होते ही दोबारा जोड़ों की समस्याओं और भयंकर दर्द को ट्रिगर करते हैं।
  • शरीर का आदी होना: लगातार इन तेज़ दवाइयों के सेवन से शरीर का अपना प्राकृतिक सिस्टम सुस्त हो जाता है। धीरे-धीरे आपको डोज़ बढ़ानी पड़ती है और यह दवाइयाँ आपके शरीर की अपनी फिल्टर करने की क्षमता को खत्म कर देती हैं।

यूरिक एसिड और गठिया के कितने प्रकार हो सकते हैं?

यूरिक एसिड के कारण होने वाला दर्द हर इंसान में एक जैसा नहीं होता। शरीर में फैले हुए दोषों (वात, पित्त, कफ) के आधार पर, यह बीमारी मुख्य रूप से तीन अलग-अलग रूपों में हमला करती है:

  • वात-प्रधान यूरिक एसिड: इस स्थिति में जोड़ों के अंदर भयंकर रूखापन आ जाता है। दर्द ऐसा होता है मानो कोई सुई चुभो रहा हो। सर्दियाँ आते ही यह जकड़न बढ़ जाती है और वात दोष कम करने के उपाय न करने पर जोड़ धीरे-धीरे टेढ़े होने लगते हैं।
  • पित्त-प्रधान यूरिक एसिड: जब खून में बहुत अधिक गर्मी (पित्त) बढ़ जाती है, तो यूरिक एसिड का अटैक सीधा पैर के अंगूठे या एड़ी पर होता है। उस जगह पर भयंकर सूजन, लालिमा और ऐसी जलन होती है जैसे किसी ने आग लगा दी हो।
  • कफ-प्रधान यूरिक एसिड: इस प्रकार में दर्द से ज़्यादा जोड़ों में भारी सूजन और सुस्ती होती है। इंसान का वज़न बढ़ा हुआ होता है और पित्त शांत करने वाले आहार के साथ-साथ मेटाबॉलिज़्म को बूस्ट करना इसमें सबसे बड़ी चुनौती होती है।

क्या आपका शरीर यूरिक एसिड बढ़ने के ये शुरुआती संकेत दे रहा है?

यूरिक एसिड रातों-रात 8 या 9 के पार नहीं पहुँचता। यह शरीर में सालों तक धीरे-धीरे जमा होता है और हमें कुछ स्पष्ट चेतावनी संकेत देता है, जिन्हें हम अक्सर सामान्य थकावट मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं:

  • पैर के अंगूठे या एड़ी में अचानक चुभन: सुबह सोकर उठने पर पैर ज़मीन पर रखते ही एड़ी या अंगूठे में तेज़ दर्द होना, जो कुछ कदम चलने के बाद थोड़ा कम हो जाए।
  • उंगलियों के जोड़ों का सख्त होना: हाथों या पैरों की उंगलियों के बीच के जोड़ों में सूजन आना और उन्हें मोड़ने पर हल्का दर्द व लालिमा महसूस होना।
  • चलने-फिरने में अचानक थकावट: यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स जब शरीर में घूमते हैं, तो शरीर अंदर से भारी महसूस करता है। चलते समय घुटने का दर्द और बिना भारी काम किए पैरों में भारीपन रहना इसका बड़ा संकेत है।
  • लगातार एसिडिटी और यूरिन में जलन: अगर आपको लगातार भयंकर एसिडिटी रहती है और यूरिन पास करते समय जलन या भारीपन होता है, तो यह किडनी के फिल्टर न कर पाने का शुरुआती इशारा है।

यूरिक एसिड घटाने के चक्कर में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

दर्द से तुरंत छुटकारा पाने की जल्दबाज़ी में मरीज़ इंटरनेट से पढ़कर या सुनी-सुनाई बातों पर कुछ ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो शरीर के लिए धीमा ज़हर बन जाते हैं:

  • अचानक सारा प्रोटीन खाना छोड़ देना: लोग यूरिक एसिड बढ़ते ही दालें, पनीर और सारे बीज खाना बंद कर देते हैं। इससे शरीर में क्रोनिक फटीग (Chronic fatigue) और भयंकर कमज़ोरी आ जाती है, लेकिन यूरिक एसिड फिर भी कम नहीं होता।
  • दर्द की गोलियों (Painkillers) का अत्यधिक सेवन: यूरिक एसिड की सूजन कम करने के लिए रोज़ाना पेनकिलर खाना आपकी किडनी को सीधे तौर पर डैमेज करता है, जो यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने वाला मुख्य अंग है।
  • ठंडे पानी या बर्फ की गलत सिकाई: वात-प्रधान दर्द में अगर आप बर्फ की सिकाई कर लेते हैं, तो नसों का रूखापन बढ़ जाता है और दर्द अपनी जगह पक्की कर लेता है।
  • केवल लक्षणों को दबाना: बिना अपने पाचन और आयुर्वेद के विज्ञान को समझे केवल गोलियाँ खाने से यह बीमारी कुछ समय बाद जोड़ों के स्थायी डैमेज यानी पक्के गठिया (Gouty Arthritis) में बदल जाती है।

आयुर्वेद इस पलटने वाली बीमारी की जड़ को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे यूरिक एसिड (Hyperuricemia) या गाउट (Gout) कहता है, आयुर्वेद ने हज़ारों साल पहले उसे 'वातरक्त' (Vatarakta) के नाम से बहुत गहराई से समझाया है।

  • रक्त धातु की अशुद्धि: आयुर्वेद के अनुसार जब आप बहुत ज़्यादा मसालेदार, खट्टा और गरिष्ठ भोजन करते हैं, तो आपका रक्त (Blood) अशुद्ध हो जाता है। यह अशुद्ध रक्त त्वचा संबंधी समस्याओं और जोड़ों की गंभीर बीमारियों को जन्म देता है।
  • वात का रक्त के साथ मिलना: जब आपकी जठराग्नि कमज़ोर होती है, विशेषकर बढ़ती उम्र में पाचन के सुस्त पड़ने पर, तो शरीर में वात दोष बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ वात अशुद्ध रक्त के साथ मिलकर 'वातरक्त' बनाता है, जो जोड़ों की खाली जगहों में जाकर जम जाता है।
  • 'आम' (Toxins) का क्रिस्टल्स में बदलना: जो भोजन पचता नहीं है, वह 'आम' बन जाता है। यही ज़हरीला 'आम' जब रक्त के ज़रिए छोटे जोड़ों (जैसे पैर का अंगूठा) में पहुँचता है, तो वहां सूखकर नुकीले क्रिस्टल्स का रूप ले लेता है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण इस समस्या पर कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद में हम केवल आपको कुछ जड़ी-बूटियाँ थमाकर आपके यूरिक एसिड का नंबर कम नहीं करते। हमारा लक्ष्य आपके शरीर को उस अवस्था में लाना है जहां वह खुद इस एसिड को तोड़कर बाहर फेंक सके।

  • आम का पाचन और अग्नि दीपन: सबसे पहले हम आपकी सुविधाजनक जीवनशैली (Convenience lifestyle) के कारण बुझ चुकी जठराग्नि को प्राकृतिक औषधियों से तेज़ करते हैं ताकि शरीर में नया ज़हरीला कचरा बनना तुरंत बंद हो जाए।
  • रक्त शोधन (Blood Purification): हम ऐसे रसायनों का प्रयोग करते हैं जो आपके खून से अशुद्धियों और यूरिक एसिड को स्पंज की तरह सोखकर किडनी के रास्ते बाहर फ्लश (Flush) कर देते हैं।
  • वात का अनुलोमन और क्रिस्टल पिघलाना: जो नुकीले क्रिस्टल्स जोड़ों में जम चुके हैं, उन्हें वात-शामक औषधियों और पंचकर्म के माध्यम से पिघलाकर बाहर निकाला जाता है, जिससे दर्द दोबारा वापस नहीं पलटता और वज़न नियंत्रण भी सही रहता है।

यूरिक एसिड को जड़ से खत्म करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके शरीर में यूरिक एसिड बना रहा है। इसे हमेशा के लिए रोकने के लिए आपको अपनी डाइट में एक संतुलित और आयुर्वेदिक डाइट का नियम अपनाना ही होगा।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - यूरिक एसिड को बाहर निकालने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - प्यूरीन और रक्त अशुद्धि बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, दलिया, ओट्स, ज्वार, मूंग दाल की पतली खिचड़ी। नया चावल, मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, परवल, कद्दू, सहजन (Drumsticks), धनिया। टमाटर (विशेषकर बीज), बैंगन, मशरूम, पालक (अधिक मात्रा में)।
दालें और प्रोटीन (Pulses) छिलके वाली मूंग दाल (सीमित मात्रा में), मसूर दाल। भारी राजमा, छोले, उड़द की दाल, मटर, सोयाबीन और सोया चंक्स।
फल (Fruits) सेब, पपीता, चेरी (Cherries), जामुन, आंवला (अमृत समान)। अत्यधिक खट्टे फल (जैसे कच्चा संतरा), कोल्ड स्टोरेज के फल।
पेय पदार्थ (Beverages) धनिया और सौंफ का गर्म पानी, लौकी का रस, ताज़ा मट्ठा। शराब (Alcohol), बहुत अधिक चाय/कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेटबंद जूस।

जोड़ों में जमे क्रिस्टल्स को पिघलाने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई अद्भुत रसायन दिए हैं, जो बिना किडनी को नुकसान पहुँचाए खून से यूरिक एसिड को धो डालते हैं और जोड़ों की भयंकर सूजन को तुरंत शांत करते हैं:

  • गिलोय (Giloy): वातरक्त (Gout) के लिए आयुर्वेद में गिलोय (Giloy) से बड़ी कोई औषधि नहीं है। यह रक्त को गहराई से शुद्ध करती है और शरीर में यूरिक एसिड के उत्पादन को जड़ से कंट्रोल करती है।
  • पुनर्नवा (Punarnava): जब यूरिक एसिड के कारण जोड़ों में भारी सूजन और लालिमा आ जाती है, तो पुनर्नवा किडनी को ताकत देकर यूरिन के रास्ते उस सारे ज़हरीले फ्लूइड को बाहर निकाल देता है।
  • त्रिफला (Triphala): पेट को साफ रखने और आंतों से भयंकर वात (गैस) को बाहर निकालने के लिए रोज़ रात को त्रिफला (Triphala) का सेवन पुराने यूरिक एसिड के मरीज़ों के लिए एक जादुई रसायन है।
  • मंजिष्ठा (Manjistha): पित्त के भड़कने से होने वाली जोड़ों की गर्माहट और रक्त की अशुद्धि को शांत करने के लिए मंजिष्ठा (Manjistha) एक बेहतरीन और प्राकृतिक ब्लड प्यूरीफायर है।
  • कैशोर गुग्गुलु (Kaishore Guggulu): जोड़ों के अंदर जमे हुए ज़िद्दी और नुकीले क्रिस्टल्स को पिघलाने और भयंकर दर्द को जड़ से खींच लेने के लिए यह एक सबसे क्लासिकल और अचूक आयुर्वेदिक मिश्रण है।

शरीर से यूरिक एसिड का ज़हर बाहर निकालने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब यूरिक एसिड बहुत गहराई तक नसों और धातुओं में जम चुका हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ दर्द को तुरंत शांत करती हैं:

  • विरेचन थेरेपी (Virechana): यह लिवर और आंतों की डीप-क्लीनिंग प्रक्रिया है। विरेचन थेरेपी (Virechana) के ज़रिए शरीर से अत्यधिक पित्त, अशुद्ध रक्त और यूरिक एसिड को मल के रास्ते पूरी तरह बाहर निकाल दिया जाता है।
  • बस्ती (Basti / Enema): शरीर से भड़के हुए वात को शांत करने और जोड़ों की खुश्की दूर करने के लिए औषधीय तेल और काढ़े की बस्ती (Basti) दी जाती है, जो वातरक्त में बहुत ही असरदार है।
  • अभ्यंग मालिश (Abhyanga): जोड़ों की जकड़न को खत्म करने के लिए शुद्ध औषधीय तेलों (जैसे पिंड तैल) से की जाने वाली यह अभ्यंग मालिश (Abhyanga massage) सूजन और दर्द को जादुई रूप से खींच लेती है।
  • रक्तमोक्षण या लेपन (Raktamokshana / Lepana): जब अंगूठे या एड़ी में दर्द असहनीय हो, तो वहां जड़ी-बूटियों का विशेष लेप लगाया जाता है जो तुरंत उस जगह से गर्मी और सूजन को सोख लेता है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

हम आपको केवल ब्लड टेस्ट में यूरिक एसिड का नंबर देखकर दवाइयाँ नहीं थमाते। हम आपकी शारीरिक प्रकृति और बीमारी की गहराई का बारीकी से मूल्याँकन करते हैं:

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले नाड़ी (Pulse) चेक करके यह समझना कि आपके अंदर वात और पित्त का स्तर क्या है और आंतों में 'आम' (कचरा) कितना जमा है।
  • शारीरिक मूल्यांकन: आपके जोड़ों की सूजन, अंगूठे की लालिमा, जीभ पर जमी सफेद परत और आपकी लगातार रहने वाली कब्ज़ की बहुत बारीकी से जाँच की जाती है।
  • लाइफस्टाइल ऑडिट: आपकी डाइट में दालों की मात्रा कितनी है? आपके सोने-जागने का समय क्या है? इन सभी आदतों का गहराई से विश्लेषण करके ही इलाज शुरू किया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको इस दर्दनाक स्थिति में अकेला नहीं छोड़ते, बल्कि एक स्वस्थ और दर्द-मुक्त जीवन की ओर हर कदम पर आपका मार्गदर्शन करते हैं:

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर +919266714040 पर कॉल करें और अपने यूरिक एसिड व दर्द के बारे में बात करें।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर भयंकर दर्द के कारण घर से निकलना मुश्किल है, तो आप अपने घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात कर सकते हैं।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपकी प्रकृति के अनुसार खास जड़ी-बूटियाँ, मानसिक तनाव कम करने के उपाय, पंचकर्म थेरेपी और एक आयुर्वेदिक डाइट रूटीन तैयार किया जाता है।

यूरिक एसिड के पूरी तरह संतुलित होने में कितना समय लगता है?

बरसों पुराने अशुद्ध रक्त और बिगड़े हुए मेटाबॉलिज़्म को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: आपकी जठराग्नि सुधरेगी। पेट की कब्ज़ खत्म होगी और सुबह उठने पर अंगूठे और एड़ी में होने वाली भयंकर जकड़न व लालिमा में भारी कमी आएगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से खून की अशुद्धि दूर होने लगेगी। जोड़ों में जमे हुए क्रिस्टल्स पिघलना शुरू हो जाएंगे और आपको एक नया हल्कापन महसूस होगा।
  • 5-6 महीने: आपका मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह रीबूट हो जाएगा। आपका यूरिक एसिड लेवल बिना किसी एलोपैथिक गोली के प्राकृतिक रूप से कंट्रोल में रहेगा और दर्द वापस पलटकर नहीं आएगा।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपके दर्द को केवल पेनकिलर्स या यूरिक एसिड दबाने वाली गोलियों से कुछ दिनों के लिए सुन्न नहीं करते, बल्कि आपको एक स्थायी समाधान देते हैं:

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ ब्लड रिपोर्ट का नंबर ठीक नहीं करते; हम आपके लिवर और जठराग्नि को मज़बूत करते हैं ताकि शरीर यूरिक एसिड को खुद फिल्टर कर सके।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों लोगों को क्रोनिक यूरिक एसिड और गठिया के जाल से निकालकर वापस अपने पैरों पर चलाया है।
  • कस्टमाइज्ड केयर: आपका यूरिक एसिड वात बढ़ने के कारण है या पित्त भड़कने से? हमारा इलाज बिल्कुल आपके मूल कारण (Root Cause) पर आधारित होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: एलोपैथिक दवाइयाँ अक्सर किडनी और हृदय रोग (Cardio issues) का जोखिम बढ़ाती हैं, जबकि आयुर्वेदिक रसायन पूरी तरह सुरक्षित हैं और पूरे शरीर को डिटॉक्स करते हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

इस पलटने वाली बीमारी को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य यूरिक एसिड के उत्पादन को ब्लॉक करने के लिए उम्र भर गोलियाँ (जैसे Allopurinol) और दर्द के लिए पेनकिलर देना। जठराग्नि को बढ़ाना, रक्त को शुद्ध करना और लिवर/किडनी को अंदर से ताकत देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल प्यूरीन (Purine) मेटाबॉलिज़्म की खराबी और जोड़ों का दर्द मानना। इसे अशुद्ध रक्त, कमज़ोर पाचन और भड़के हुए वात दोष (वातरक्त) का सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल केवल प्रोटीन और दालें बंद करने पर ज़ोर, खाने की तासीर पर कोई खास ध्यान नहीं। वात-पित्त शामक आहार, कब्ज़ दूर करना और सही कुकिंग मेथड्स को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर गोलियाँ छोड़ने पर यूरिक एसिड तुरंत दोगुने स्तर पर वापस आ जाता है और क्रिस्टल्स जमते रहते हैं। शरीर का मेटाबॉलिज़्म इतना मज़बूत हो जाता है कि वह प्राकृतिक रूप से यूरिक एसिड को खून से बाहर फेंकना सीख जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद से यूरिक एसिड की इस जड़ को पूरी तरह काटा जा सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर संकेत दिखें, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें:

  • जोड़ों का पूरी तरह लॉक हो जाना: अगर सुबह उठते ही उँगलियाँ या अंगूठा बिल्कुल मुड़ न पाएं और उनमें भयंकर लालिमा व आग जैसी गर्माहट आ जाए।
  • असहनीय पेट या पीठ का दर्द: अगर यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स किडनी में पथरी (Kidney Stones) बन जाएं और आपकी पीठ के निचले हिस्से से पेट तक चुभने वाला भयंकर दर्द उठे।
  • यूरिन में खून आना: अगर आपको यूरिन पास करते समय असहनीय दर्द हो और यूरिन का रंग लाल या बहुत ज़्यादा गहरा (Dark) हो जाए।
  • त्वचा के नीचे सफेद गाठें बनना: अगर कान, उंगलियों या कोहनी के पास कठोर सफेद गाठें (Tophi) बन जाएं जो छूने पर दर्द दें।

निष्कर्ष

खून में यूरिक एसिड का बढ़ना और सुबह-सुबह अंगूठे में भयंकर दर्द होना कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो महज़ एक गोली खाने से हमेशा के लिए गायब हो जाएगी। यह आपके शरीर का चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपका लिवर और किडनी अंदरूनी ज़हर को बाहर निकालने में पूरी तरह फेल हो रहे हैं। जब आप इस अलार्म को केवल एलोपैथिक गोलियों से दबाते हैं, तो आप शरीर के सिस्टम को सुस्त कर देते हैं, जिससे दवा बंद होते ही दर्द दोगुनी ताकत से वापस लौटता है। इस खतरनाक और पलटने वाले चक्र से बाहर निकलें। आयुर्वेद आपको इस ज़हर को जड़ से मिटाने का विज्ञान देता है। अपने बिगड़े हुए पाचन को सुधारें, टमाटर के बीज और भारी राजमा-छोले को अपनी थाली से हटाएं। गिलोय, पुनर्नवा और त्रिफला जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की विरेचन व अभ्यंग मालिश से अपने रक्त को गहराई से शुद्ध करें। गोलियों के सहारे उम्र काटने से बचें और अपने शरीर को स्थायी रूप से डिटॉक्स करने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

FAQs

एलोपैथिक दवाइयाँ शरीर में यूरिक एसिड बनने की प्रक्रिया को कृत्रिम रूप से रोकती हैं। जब आप अचानक दवा छोड़ते हैं, तो शरीर का अपना सिस्टम रिबाउंड (Rebound) करता है और लिवर तेज़ी से एसिड बनाना शुरू कर देता है, जिससे खून में एसिड की बाढ़ आ जाती है और दर्द तुरंत भड़क जाता है।

नहीं, आयुर्वेद सभी दालों को बंद करने की सलाह नहीं देता। आपको भारी दालें जैसे राजमा, छोले, उड़द और सोयाबीन बंद करनी चाहिए। छिलके वाली मूंग दाल या मसूर की दाल को अच्छी तरह घी और जीरे का छौंक लगाकर सीमित मात्रा में खाना सुरक्षित है।

कच्चा टमाटर और विशेषकर टमाटर के बीज यूरिक एसिड के मरीजों के लिए बहुत नुकसानदायक होते हैं। इनमें प्यूरीन और यूरिक एसिड बढ़ाने वाले तत्व होते हैं। अगर टमाटर खाना हो, तो उसके बीज निकालकर और उसे अच्छी तरह पकाकर ही कम मात्रा में इस्तेमाल करें।

हाँ, नींबू स्वभाव से खट्टा होता है लेकिन शरीर में जाने के बाद यह एल्कलाइन (Alkaline) प्रभाव देता है। रोज़ाना सुबह हल्के गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीने से खून की एसिडिटी कम होती है और यूरिक एसिड यूरिन के रास्ते बाहर निकलने में मदद मिलती है।

अगर दर्द वाली जगह पर भयंकर सूजन, लालिमा और जलन (पित्त) है, तो उस पर तेज़ मालिश बिल्कुल न करें, इससे दर्द भड़क जाएगा। ऐसे में वहां चंदन या जड़ी-बूटियों का लेप लगाना चाहिए। अगर सिर्फ रूखा दर्द (वात) है, तो हल्के हाथों से औषधीय तेल लगा सकते हैं।

नहीं, शुद्ध देसी गाय का दूध यूरिक एसिड नहीं बढ़ाता। बल्कि दूध में मौजूद प्रोटीन प्यूरीन-फ्री होता है। लेकिन दूध हमेशा हल्दी या सोंठ डालकर पिएं और ध्यान रखें कि आपका पेट (पाचन) उसे आसानी से पचा सके।

शत-प्रतिशत। जब खून में यूरिक एसिड बहुत अधिक बढ़ जाता है और किडनी उसे फिल्टर नहीं कर पाती, तो वह किडनी के अंदर जमकर छोटे-छोटे नुकीले क्रिस्टल्स (पथरी) का रूप ले लेता है, जो बहुत भयंकर दर्द और यूरिन में रुकावट पैदा करता है।

सेब का सिरका शरीर में एल्कलाइन वातावरण बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार बहुत अधिक सिरका खाली पेट पीने से आंतों का पित्त भड़क सकता है। इसे हमेशा एक गिलास पानी में केवल एक चम्मच मिलाकर और आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही लें।

बिल्कुल। धनिया की तासीर ठंडी होती है और यह एक बेहतरीन मूत्रल (Diuretic) औषधि है। यह खून से गर्मी और यूरिक एसिड के ज़हर को सोखकर किडनी के ज़रिए बाहर निकाल देता है। यह यूरिक एसिड में बहुत जादुई असर करता है।

ज्यादातर यह सबसे पहले पैर के बड़े अंगूठे या एड़ी में हमला करता है क्योंकि यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स भारी होते हैं और शरीर के निचले व ठंडे हिस्सों में आसानी से जम जाते हैं। लेकिन अगर इसे न रोका जाए, तो यह घुटनों, कोहनियों और हाथों की उंगलियों को भी अपनी चपेट में ले लेता है।

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