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Alcohol से AVN — कितनी पीने पर खतरा? सच्चाई जानिए

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 12 May, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5082

वीकेंड की पार्टियाँ, दोस्तों के साथ महफिल, या दिन भर के तनाव को मिटाने के लिए बस एक-दो पेग का सहारा लेना आजकल यह लाइफस्टाइल का एक आम हिस्सा बन चुका है। शुरुआत में यह एक शौक लगता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह आदत आपकी हड्डियों को अंदर ही अंदर गला रही है? जब अचानक एक दिन कूल्हे Hip joint में हल्का दर्द शुरू होता है, या चलने में थोड़ी लंगड़ाहट आने लगती है, तो हम इसे थकान, मांसपेशियों का खिंचाव या गलत पॉश्चर का परिणाम समझकर इग्नोर कर देते हैं।

लेकिन यह महज़ थकान नहीं है; यह आपके शरीर का वह खतरनाक अलार्म है जो बता रहा है कि आपके कूल्हे की हड्डी Femoral Head की ब्लड सप्लाई रुक चुकी है। अत्यधिक शराब के सेवन से हड्डियाँ एवास्कुलर नेक्रोसिस Avascular Necrosis - AVN यानी हड्डियों के गलने की बीमारी की चपेट में आ जाती हैं। अगर इस बोन डेथ Bone Death को नज़रअंदाज़ किया गया, तो आगे चलकर आपकी हड्डियाँ पूरी तरह पिचक सकती हैं और आपको हमेशा के लिए व्हीलचेयर या हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी का मोहताज होना पड़ सकता है।

शराब पीने से हड्डियाँ कैसे गलने लगती हैं और यह शरीर में क्या संकेत देता है?

एवास्कुलर नेक्रोसिस AVN का सीधा अर्थ है रक्त संचार Blood supply रुकने के कारण हड्डियों के टिशू का मरना। शराब और AVN का बहुत गहरा और खतरनाक संबंध है।

  • रक्त नलिकाओं Blood Vessels में ब्लॉकेज: अत्यधिक शराब पीने से रक्त में फैट Lipids का स्तर तेज़ी से बढ़ जाता है। यह फैट कूल्हे की हड्डी Femoral Head तक खून ले जाने वाली बारीक नसों में जमने लगता है, जिससे खून का प्रवाह ब्लॉक हो जाता है।
  • हड्डी का खोखला होना: जब हड्डी को ऑक्सीजन और पोषण मिलना बंद हो जाता है, तो अंदर के सेल्स कोशिकाएं मरने लगते हैं। हड्डी अंदर से खोखली और कमज़ोर हो जाती है।
  • जोड़ों का ढहना Joint Collapse: जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कमज़ोर हो चुकी हड्डी शरीर का भार नहीं सह पाती और पिचक Collapse जाती है, जिससे असहनीय दर्द होता है।
  • लिवर की कमज़ोरी: शराब लिवर को डैमेज करती है, जिससे शरीर का फैट मेटाबॉलिज़्म बिगड़ता है और यही गंदगी टॉक्सिन्स रक्त के ज़रिए हड्डियों तक पहुँचकर उन्हें सड़ाने लगती है।

शराब से होने वाला AVN Avascular Necrosis किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति का शरीर और शराब पीने की मात्रा अलग होती है। आयुर्वेद के अनुसार, शराब के सेवन से शरीर के दोषों पर पड़ने वाला यह प्रभाव मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान AVN डैमेज: शराब शरीर में भारी रूखापन Dryness पैदा करती है। इस स्थिति में जोड़ों की चिकनाई Synovial fluid पूरी तरह सूख जाती है। कूल्हे और जांघों में सुई चुभने या हड्डी टूटने जैसा भयंकर दर्द होता है, खासकर चलते समय या पैर मोड़ते समय।
  • पित्त-प्रधान AVN डैमेज: शराब की तासीर अत्यधिक गर्म होती है, जो रक्त को दूषित कर देती है। इसमें कूल्हे के जोड़ में भारी जलन और सूजन Inflammation महसूस होती है। बीमारी बहुत तेज़ी से बढ़ती है और मरीज़ को आराम करते समय भी दर्द महसूस होता है।
  • कफ-प्रधान मेद नर्व डैमेज: शराब के कारण जब शरीर का मेटाबॉलिज़्म खराब होता है, तो अतिरिक्त फैट मेद धातु नसों में ब्लॉकेज पैदा करता है। इसमें कूल्हे और जांघों में भारीपन रहता है, ऐसा लगता है जैसे पैरों में जान ही नहीं है और लंगड़ाहट Limping बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है।

क्या आपके कूल्हे और पैरों में भी डैमेज के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

AVN रातों-रात आपकी हड्डी को नहीं गलाता। यह बहुत पहले से शरीर में अलार्म बजाता है, जिसे हम अक्सर साइटिका Sciatica या गैस का दर्द मानकर टाल देते हैं। अगर आपको ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • ग्रोइन Groin एरिया में दर्द: जांघ के अंदरूनी हिस्से कूल्हे के जोड़ के पास में एक मीठा-मीठा दर्द रहना, जो सीढ़ियां चढ़ते या चलते समय तेज़ हो जाता है।
  • चलने में लंगड़ाहट Limping: शरीर का सारा भार एक पैर पर डालने में दर्द होना, जिसके कारण अनजाने में ही आपकी चाल में लंगड़ाहट आ जाना।
  • आलती-पालती मारकर बैठने में असमर्थता: ज़मीन पर क्रॉस-लेग Cross-legged करके बैठने या बाइक पर बैठने के लिए पैर चौड़ा करने में कूल्हे में भयंकर जकड़न और दर्द महसूस होना।
  • घुटनों तक जाने वाला दर्द: अक्सर AVN का दर्द केवल कूल्हे में नहीं रहता, बल्कि यह जांघों से होता हुआ घुटनों तक रेडिएट Radiate करता है।

इस दर्द में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

इस दर्द से तुरंत राहत पाने और अपनी रोज़मर्रा की भागदौड़ चालू रखने की जल्दबाज़ी में, मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो हड्डी को हमेशा के लिए डैमेज कर देते हैं:

  • पेनकिलर्स का रोज़ाना सेवन और शराब जारी रखना: दर्द को दबाने के लिए रोज़ाना दर्द निवारक गोलियाँ खाना और अपनी शराब की आदत को न छोड़ना। इससे दर्द का अहसास तो दब जाता है, लेकिन हड्डी का गलना दोगुनी तेज़ी से अंदर ही अंदर चलता रहता है।
  • लक्षणों को साइटिका समझना: कूल्हे और पैर के दर्द को बिना किसी एक्स-रे या एमआरआई MRI के केवल नसों का दर्द Sciatica समझकर गलत इलाज करवाते रहना।
  • हड्डियों पर ज़बरदस्ती दबाव डालना: दर्द होने के बावजूद भारी वज़न उठाना, दौड़ना या गलत एक्सरसाइज़ करना, जिससे खोखली हो चुकी हड्डी पर और दबाव पड़ता है और वह जल्दी पिचक जाती है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर शुरुआती स्टेज में रक्त संचार को नहीं सुधारा गया, तो हड्डी का सिर Femoral head पूरी तरह चपटा हो जाता है। इसके बाद टोटल हिप रिप्लेसमेंट Total Hip Replacement - THR सर्जरी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

आयुर्वेद Alcohol से होने वाले AVN और हड्डियों के गलने को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे एवास्कुलर नेक्रोसिस Blood supply रुकना कहता है, आयुर्वेद उसे अस्थि धातु क्षय हड्डियों का कमज़ोर होना, वात दोष का प्रकोप और मेद धातु की दृष्टि के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है।

  • अस्थि धातु Bone Tissue का सूखना: शराब एक वात और पित्त वर्धक पदार्थ है। इसका लगातार सेवन शरीर की जठराग्नि Digestive fire को बिगाड़कर अस्थि धातु के पोषण को रोक देता है।
  • स्रोतस Channels में रुकावट: खराब लाइफस्टाइल और शराब के कारण बना हुआ दूषित मेद Fat और आम Toxins रक्त वाहिकाओं रक्तवह स्रोतस को ब्लॉक कर देते हैं। ब्लॉक नसों के कारण अस्थि धातु को पोषण खून नहीं मिलता और वे भूखी रहकर मरने लगती हैं।
  • लिवर की भूमिका: आयुर्वेद मानता है कि रक्त के निर्माण का मुख्य स्थान लिवर और प्लीहा Spleen है। शराब सबसे पहले लिवर को कमज़ोर करती है, जिससे हड्डियों तक जाने वाले रक्त की गुणवत्ता और मात्रा दोनों गिर जाती हैं।

हड्डियों को गलने से रोकने और वात-कफ शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपकी हड्डियों को सुखा भी सकता है और उन्हें दोबारा मज़बूत भी कर सकता है। AVN से बचने और रक्त संचार बढ़ाने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - हड्डियों को चिकनाई देने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - रूखापन और ब्लॉकेज बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, दलिया, ओट्स, ज्वार, रागी कैल्शियम से भरपूर, मूंग दाल। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद जंक फूड, रिफाइंड कार्ब्स।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी हड्डियों के लिए अमृत, तिल का तेल, ऑलिव ऑयल। शराब Alcohol, किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, डालडा, जंक फूड का फैट।
सब्ज़ियाँ Vegetables सहजन Drumstick/Moringa - हड्डियों के लिए वरदान, लौकी, पालक, मेथी, परवल। कच्चा सलाद वात बढ़ाता है, डिब्बाबंद और फ्रोज़न सब्ज़ियाँ, अत्यधिक आलू-बैंगन।
फल और मेवे Fruits & Nuts रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, सफेद तिल, मुनक्का, ताज़े मीठे फल। बहुत ज़्यादा खट्टे फल, डिब्बाबंद जूस, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ Beverages हल्दी और शिलाजीत वाला दूध रात में, ताज़े फलों का रस, अस्थिशृंखला हड़जोड़ का काढ़ा। अल्कोहल किसी भी रूप में, बहुत ज़्यादा कैफीन, कोल्ड ड्रिंक्स।

हड्डियों को फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के हड्डियों के दर्द को खींच लेते हैं और डैमेज हो चुकी हड्डी में नया रक्त संचार पैदा कर देते हैं:

  • गुग्गुल Guggulu: AVN के इलाज में गुग्गुल सबसे प्रमुख औषधि है। यह रक्त वाहिकाओं Blood vessels में जमे फैट और ब्लॉकेज को साफ करता है और जोड़ों के दर्द को गहराई से खींच लेता है।
  • अस्थिशृंखला हड़जोड़/Hadjod: जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह हड्डी को जोड़ने और नई हड्डी Bone regeneration के निर्माण में एक जादुई रसायन का काम करता है।
  • अश्वगंधा Ashwagandha: कमज़ोर हो चुकी जांघ की मांसपेशियों और हड्डियों को फौलादी ताकत देने के लिए अश्वगंधा एक अद्भुत रसायन है।
  • गिलोय Giloy: अत्यधिक शराब पीने से डैमेज हुए लिवर को सुधारने, रक्त को साफ करने और अंदरूनी सूजन Inflammation को खत्म करने के लिए यह बहुत ज़रूरी है।
  • लाक्षा Laksha: आयुर्वेद में लाक्षा का उपयोग टूटी हुई और गल रही हड्डियों को दोबारा मज़बूत करने Bone density बढ़ाने के लिए प्रमुखता से किया जाता है।

AVN मिटाने वाली और ब्लॉकेज खोलने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और ब्लॉकेज बहुत गहराई तक कूल्हे की हड्डियों में जम चुकी हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ ब्लॉक हुई ब्लड सप्लाई को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • तिक्त क्षीर बस्ती Tikta Kshira Basti: AVN के लिए यह गोल्ड स्टैण्डर्ड इलाज है। कड़वी जड़ी-बूटियों तिक्त रस और औषधीय दूध/घी से बनी यह एनिमा थेरेपी सीधे अस्थि धातु हड्डियों को पोषण देती है और वात को जड़ से खत्म करती है।
  • कटि/उरु बस्ती Kati/Uru Basti: कूल्हे और जांघ के जोड़ पर उड़द दाल का घेरा बनाकर उसमें गर्म वात-शामक औषधीय तेल भरा जाता है। यह सूखी हुई हड्डी को भारी चिकनाई देता है और दर्द तुरंत कम करता है।
  • पत्र पोटली स्वेद Patra Pinda Sweda: ताज़े औषधीय पत्तों की पोटली को गर्म तेल में डुबोकर कूल्हे की सिकाई की जाती है। यह सूजन को खत्म करता है और ब्लड सर्कुलेशन को तेज़ी से बढ़ाता है।
  • उद्वर्तन Udvartana: अगर शरीर में फैट और ब्लॉकेज कफ दोष बहुत ज़्यादा है, तो हर्बल पाउडर से सूखी मालिश की जाती है ताकि मेद धातु Fat पिघल सके और ब्लड वेसल्स खुलें।

हड्डियों के पूरी तरह रिपेयर होने और AVN रुकने में कितना समय लगता है?

हड्डी का गलना एक गंभीर स्थिति है और इसे रिवर्स करने में धैर्य और कठोर अनुशासन शराब पूरी तरह छोड़ना की ज़रूरत होती है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। कूल्हे के दर्द और जकड़न में कमी आएगी। रात की नींद बेहतर होगी और चलने में थोड़ा आराम महसूस होगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म बस्ती थेरेपी और रसायनों के प्रभाव से नसों का ब्लॉकेज खुलने लगेगा। ब्लड सप्लाई वापस शुरू होने से हड्डी का आगे गलना Necrosis रुक जाएगा। लंगड़ाहट में बहुत सुधार आएगा।
  • 6-12 महीने या अधिक: अस्थि धातु पूरी तरह पोषित हो जाएगी। शरीर में नया बोन टिशू बनने की प्रक्रिया मज़बूत होगी। आप बिना किसी पेनकिलर के और सर्जरी से बचकर एक सामान्य और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

एवास्कुलर नेक्रोसिस AVN के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Surgical/Symptomatic care आयुर्वेद Holistic & Preservative care
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द कम करने के लिए पेनकिलर्स और अंततः डैमेज हिस्से को काटकर आर्टिफिशियल जोड़ Hip Replacement लगाना। प्राकृतिक जोड़ को बचाना, रक्त संचार को फिर से चालू करना और नई हड्डी के निर्माण को बढ़ावा देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल एक हड्डी Bone की यांत्रिक Mechanical समस्या और टूट-फूट मानना। इसे कमज़ोर लिवर, बिगड़े हुए फैट मेटाबॉलिज़्म और अस्थि धातु के कुपोषण का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
सर्जरी और विकल्प शुरुआती स्टेज में 'कोर डीकंप्रेसन' Core Decompression सर्जरी, बाद में टोटल हिप रिप्लेसमेंट। बिना किसी चीर-फाड़ के बस्ती थेरेपी, गुग्गुल कल्प और लाइफस्टाइल सुधार शराब बंदी से प्राकृतिक इलाज।
लंबा असर आर्टिफिशियल जोड़ की एक सीमित लाइफ होती है 15-20 साल, जिसके बाद दोबारा सर्जरी Revision surgery की ज़रूरत पड़ सकती है। आपका अपना प्राकृतिक Original जोड़ सुरक्षित रहता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और इंसान स्थायी रूप से स्वस्थ रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद शुरुआती और मध्यम स्टेज के AVN को बेहतरीन तरीके से मैनेज और रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क और MRI जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • लंगड़ाहट का बहुत ज़्यादा बढ़ जाना: अगर आप बिना सहारे Stick/Walker के दो कदम भी चलने में पूरी तरह असमर्थ महसूस करने लगें।
  • पैरों की लंबाई में अंतर: अगर आपको महसूस हो कि आपका एक पैर जिसमें दर्द है दूसरे पैर के मुकाबले छोटा हो रहा है यह जॉइंट कोलैप्स का संकेत है।
  • रात में असहनीय तेज़ दर्द: अगर रात को सोते समय दर्द इतना भयंकर हो जाए कि आपकी नींद उड़ जाए और कोई भी पोज़िशन आराम न दे।
  • कूल्हे में कटकट की आवाज़ Crepitus: चलते समय या पैर मोड़ते समय कूल्हे के जोड़ से तेज़ घर्षण या हड्डियां रगड़ने की आवाज़ आना।

निष्कर्ष

वीकेंड पर पी गई शराब के कुछ पेग आपके लिवर से होते हुए कब आपकी हड्डियों को खोखला कर देंगे, आपको पता भी नहीं चलेगा। कूल्हे का दर्द या चलते समय लंगड़ाहट आपकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा नहीं है। यह आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपकी हड्डी की ब्लड सप्लाई कट चुकी है और वह भूखी रहकर दम तोड़ रही है Avascular Necrosis। जब आप इस दर्द को रोज़ाना पेनकिलर्स से दबाते हैं या अपनी शराब की आदत नहीं छोड़ते, तो आप अपनी हड्डी को हील करने के बजाय उसे स्थायी रूप से नष्ट कर रहे होते हैं और खुद को सर्जरी की तरफ धकेल रहे होते हैं।

इस जानलेवा चक्र से बाहर निकलें। तुरंत शराब को अपनी ज़िंदगी से निकाल फेंकें, अपना वज़न नियंत्रित करें और अपनी डाइट में शुद्ध गाय का घी, सहजन और कैल्शियम युक्त आहार शामिल करें। अस्थिशृंखला, गुग्गुल और अश्वगंधा जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और तिक्त क्षीर बस्ती जैसी पंचकर्म थेरेपी से अपनी सूखी और गल रही हड्डियों को नया जीवन दें। अपनी हड्डियों को समय से पहले कमज़ोर न पड़ने दें, और अपने प्राकृतिक जोड़ों को सर्जरी से बचाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हर शरीर की सहनक्षमता अलग होती है, लेकिन नियमित रूप से ज़्यादा शराब पीना (हफ्ते में कई बार) फैट मेटाबॉलिज़्म को बिगाड़ देता है। लगातार कुछ महीनों या सालों तक शराब का सेवन रक्त वाहिकाओं को ब्लॉक करके AVN का सबसे बड़ा कारण बनता है।

शराब छोड़ना सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे बीमारी का आगे बढ़ना रुकेगा। लेकिन जो हड्डी डैमेज हो चुकी है और जो ब्लॉकेज बन चुके हैं, उन्हें ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक औषधियों और पंचकर्म थेरेपी की आवश्यकता होती है।

साइटिका का दर्द कमर के निचले हिस्से से शुरू होकर पैर के पीछे के हिस्से तक करंट की तरह जाता है। जबकि AVN का दर्द मुख्य रूप से जांघ के आगे के हिस्से (Groin), कूल्हे के जोड़ में होता है और इसमें पैर को बाहर की तरफ मोड़ने या ज़मीन पर बैठने में भयंकर जकड़न होती है।

हाँ, अगर AVN अपनी शुरुआती स्टेजेस (Grade 1, 2, या early Grade 3) में है, तो आयुर्वेद इसे बेहतरीन तरीके से मैनेज कर सकता है। तिक्त क्षीर बस्ती और अस्थि-पोषक औषधियां रक्त संचार को दोबारा चालू करके हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की नौबत को टाल सकती हैं।

AVN कैल्शियम की कमी की बीमारी नहीं है, यह रक्त संचार (Blood supply) रुकने की बीमारी है। जब तक ब्लॉक हुई नसें नहीं खुलेंगी, अतिरिक्त कैल्शियम भी हड्डी तक नहीं पहुँच पाएगा। इसलिए आयुर्वेद पहले आम (ब्लॉकेज) को हटाता है।

लगातार एक जगह लेटे रहना भी वात दोष को बढ़ाता है। आपको भारी वज़न उठाना, सीढ़ियां चढ़ना और ज़मीन पर बैठना बंद करना चाहिए। लेकिन वॉकर या छड़ी के सहारे हल्का चलना और डॉक्टर द्वारा बताई गई फिजियोथेरेपी करना ज़रूरी है ताकि जोड़ जाम न हों।

हड़जोड़ आयुर्वेद की एक प्रमुख अस्थि-पोषक (Bone nourishing) औषधि है। यह हड्डियों के अंदर ऑस्टियोब्लास्ट्स (हड्डी बनाने वाले सेल्स) को उत्तेजित करता है और डैमेज हो चुके बोन टिशू की जगह नई हड्डी के निर्माण में तेज़ी लाता है।

बिल्कुल। शराब के अलावा स्टेरॉयड्स का भारी मात्रा में सेवन (किसी भी बीमारी के लिए) AVN का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। यह भी शरीर में फैट बढ़ाकर ब्लड वेसल्स को ब्लॉक कर देता है।

यह एक विशेष आयुर्वेदिक एनिमा है जिसमें दूध, घी और कड़वी जड़ी-बूटियों (गिलोय, नीम आदि) का प्रयोग किया जाता है। चूंकि हमारी बड़ी आंत (Colon) वात का मुख्य स्थान है, यह बस्ती सीधे आंतों के ज़रिए अवशोषित होकर पूरे शरीर की अस्थि धातु (हड्डियों) को पोषण देती है

नहीं। अगर आपको एक कूल्हे में AVN है, तो खड़े होते समय दर्द वाले पैर पर कम से कम वज़न डालें। छड़ी (Walking stick) का इस्तेमाल करें ताकि डैमेज हो रही हड्डी पर दबाव कम पड़े और वह जल्दी पिचकने (Collapse) से बच सके।

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