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घर के बने Buttermilk vs Probiotic Drink — गर्मी में कौन Best?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

मई-जून की तपती गर्मी में जब लू के थपेड़े शरीर को झुलसाने लगते हैं, तो गला सूखना और पेट में भारी गर्मी (Acidity) महसूस होना बेहद आम है। ऐसे में प्यास बुझाने और पेट को ठंडा रखने के लिए हम फ्रिज की तरफ भागते हैं। टीवी और सोशल मीडिया के विज्ञापनों ने हमें यह समझा दिया है कि छोटी-सी प्लास्टिक की बोतल में मिलने वाला महँगा प्रोबायोटिक ड्रिंक (Probiotic Drink) हमारी गट हेल्थ (Gut Health) और इम्युनिटी के लिए किसी जादुई अमृत से कम नहीं है।

लेकिन ज़रा रुकिए। क्या आपने कभी उस छोटी सी बोतल के पीछे लिखे इंग्रेडिएंट्स (Ingredients) पढ़े हैं? जिसे आप गुड बैक्टीरिया (Good Bacteria) का खजाना मानकर पी रहे हैं, वह असल में रिफाइंड चीनी, प्रिजर्वेटिव्स और कृत्रिम स्वादों (Artificial flavors) का एक ऐसा कॉकटेल है, जो फायदे से ज़्यादा आपके पाचन तंत्र (Digestive system) को डैमेज कर रहा है। दूसरी तरफ, हमारी भारतीय रसोई में हज़ारों सालों से मौजूद मिट्टी के बर्तन में मथी हुई ताज़ा छाछ या तक्र (Homemade Buttermilk) है, जिसे आयुर्वेद में देवताओं का पेय (Amrit) कहा गया है। आइए समझते हैं कि इस भयंकर गर्मी में आपकी आंतों को कृत्रिम प्रोबायोटिक्स की ज़रूरत है या उस प्राचीन आयुर्वेदिक छाछ की, जिसे हमने ओल्ड फैशन (Old fashion) मानकर छोड़ दिया है।

बाज़ार के Probiotic Drinks का हेल्दी धोखा क्या है?

आधुनिक प्रोबायोटिक ड्रिंक्स दावा करते हैं कि उनमें अरबों जीवित बैक्टीरिया हैं जो आपके पाचन को सुधारेंगे। लेकिन इसकी खौफनाक सच्चाई कुछ और ही है:

  • चीनी का भयंकर भंडार: स्वाद को बेहतर बनाने के लिए इन छोटी बोतलों में 10 से 15 ग्राम तक रिफाइंड चीनी (Liquid Sugar) होती है। यह चीनी आपके ब्लड शुगर को तेज़ी से बढ़ाती है और पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को मारकर बुरे बैक्टीरिया (Candida/Yeast) को भोजन देती है।
  • डेड बैक्टीरिया (Dead Bacteria): प्रोबायोटिक्स को जीवित रहने के लिए एक निश्चित ठंडे तापमान (Cold Chain) की ज़रूरत होती है। फैक्ट्री से लेकर आपके फ्रिज तक पहुँचने के बीच तापमान में होने वाले बदलावों से ज़्यादातर बैक्टीरिया बोतल में ही मर चुके होते हैं।
  • प्लास्टिक पैकेजिंग का ज़हर: भयंकर गर्मी में जब ये प्लास्टिक की बोतलें ट्रकों में सफर करती हैं, तो प्लास्टिक के माइक्रो-कण (Microplastics) ड्रिंक में घुल जाते हैं, जो हार्मोनल इम्बैलेंस और पेट में भयंकर आम (Toxins) बनाते हैं।

आयुर्वेद तक्र (Buttermilk) को धरती का अमृत क्यों मानता है?

आयुर्वेद का एक बहुत प्रसिद्ध श्लोक है: यथा सुराणाममृतं सुखाय, तथा नराणां भुवि तक्रमाहुः (जिस तरह देवताओं के लिए अमृत सुखदायी है, उसी तरह मनुष्यों के लिए धरती पर तक्र या छाछ है)।

  • लघु और सुपाच्य (Light to Digest): दही (Curd) तासीर में भारी (गुरु) और कफ बढ़ाने वाला होता है। लेकिन जब दही में पानी मिलाकर उसे मथा (Churning) जाता है और उसका सारा मक्खन (फैट) निकाल लिया जाता है, तो वह तक्र बन जाता है। यह पचने में बेहद हल्का और जठराग्नि को भड़काने वाला होता है।
  • प्राकृतिक प्रोबायोटिक (Natural Microbiome): ताज़ा मथे हुए तक्र में जो लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) बैक्टीरिया होते हैं, वे 100% जीवित और आपके पेट के प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल (Bio-compatible) होते हैं।
  • स्रोतस की सफाई: छाछ आंतों (Intestines) की दीवारों पर जमे हुए ज़िद्दी आम और चिपचिपे कफ को खुरच कर बाहर निकाल देती है (Scraping action), जो कोई भी बाज़ार का ड्रिंक नहीं कर सकता।

घर की छाछ (Homemade Buttermilk) बनाम बाज़ार के Probiotic Drinks

जब हम अपनी सुविधाजनक जीवनशैली के कारण घर पर छाछ मथने के बजाय बाज़ार की बोतलें चुनते हैं, तो हम अपनी गट हेल्थ के साथ भारी समझौता करते हैं।

विशेषता ताज़ा घर की छाछ (Ayurvedic Takra) बाज़ार के Probiotic Drinks
बैक्टीरिया की स्थिति 100% जीवित और प्राकृतिक फर्मेंटेशन से बने। ज़्यादातर बैक्टीरिया ट्रांसपोर्टेशन और गर्मी के कारण मर चुके होते हैं।
चीनी की मात्रा (Sugar) बिल्कुल शून्य (Zero)। इसमें प्राकृतिक मिठास होती है। अत्यधिक (Highly loaded with refined sugar/Artificial sweeteners)।
तासीर (Potency) पेट को ठंडक देती है (Cooling) और जठराग्नि को बढ़ाती है। कृत्रिम मिठास और प्रिजर्वेटिव्स के कारण पेट में एसिडिटी (पित्त) बढ़ाते हैं।
पाचन पर असर आईबीएस (IBS), कब्ज़ और गैस को जड़ से मिटाती है। चीनी के कारण आंतों में भयंकर फर्मेंटेशन और ब्लोटिंग (Bloating) पैदा करते हैं।
लागत और पैकेजिंग बेहद सस्ती और मिट्टी/स्टील के बर्तन में सुरक्षित। बेहद महँगी और खतरनाक सिंगल-यूज़ प्लास्टिक में बंद।

क्या आपका पेट भी कमज़ोर डाइजेशन के ये अलार्म बजा रहा है?

गर्मियों में गलत खानपान और डिहाइड्रेशन के कारण आंतों का माइक्रोबायोम (Microbiome) सबसे पहले डैमेज होता है। शरीर ये खामोश संकेत देता है:

  • खाना खाने के बाद भयंकर ब्लोटिंग (Bloating): थोड़ा सा खाने के बाद ही पेट का गुब्बारे की तरह फूल जाना और लोअर एब्डोमिनल पेन व गैस महसूस होना।
  • मल का बंधकर न आना: कभी कब्ज़ होना और कभी पतले दस्त लग जाना (Alternating Bowel Habits), जो कमज़ोर आंतों का सीधा इशारा है।
  • दिमाग पर हमेशा धुंध छाना (Brain Fog): पाचन और मस्तिष्क का संबंध बिगड़ने से पेट की गैस दिमाग तक चढ़ती है, जिससे हर वक्त सुस्ती, चिड़चिड़ापन और भारीपन रहता है।
  • सीने में खट्टी डकारें (Acid Reflux): गर्मियों में जठराग्नि स्वभाव से कमज़ोर होती है। पचे हुए खाने के बजाय जब खाना सड़ता है, तो खट्टा पानी गले तक आता है।

पेट ठंडा करने के चक्कर में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

गर्मियों की प्यास और पेट की जलन को शांत करने के लिए लोग अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो आंतों के लिए धीमा ज़हर बन जाते हैं:

  • फ्रिज का बर्फ वाला पानी और कोल्ड ड्रिंक्स: धूप से आकर तुरंत बर्फ का पानी या कोल्ड ड्रिंक गटकना। यह जठराग्नि को पूरी तरह बुझा देता है और नसों को सिकोड़कर पाचन को सुन्न कर देता है।
  • बाज़ार की मीठी लस्सी (Lassi) को छाछ समझना: बाज़ार में मिलने वाली लस्सी में भयंकर मलाई और चीनी होती है। यह कफ बढ़ाती है और पचने में बहुत भारी (गुरु) होती है। इसे छाछ (Takra) समझकर पीने से वज़न बढ़ता है और सुस्ती आती है।
  • खाने के तुरंत बाद मीठे फल खाना: डेज़र्ट की तरह भारी खाने के बाद मीठे फल खाना, जो पेट में जाकर भयंकर फर्मेंटेशन पैदा करता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएं: अगर गट हेल्थ को प्राकृतिक रूप से न सुधारा जाए, तो यह लगातार रहने वाली कब्ज़, क्रोनिक आईबीएस (IBS) और ऑटोइम्यून (Autoimmune) बीमारियों का रूप ले लेता है।

आयुर्वेद गट हेल्थ (Gut Health) और माइक्रोबायोम को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे गट माइक्रोबायोम (Gut Microbiome) कहता है, आयुर्वेद उसे हज़ारों सालों से जठराग्नि, समान वात और पक्वाशय के विज्ञान से गहराई से समझता है।

  • जठराग्नि का महत्व: आयुर्वेद मानता है कि आपकी इम्यूनिटी (ओजस) और स्वास्थ्य आपकी जठराग्नि (Digestive Fire) पर निर्भर है। अगर अग्नि तेज़ है, तो वह बैक्टीरिया को भी पचा सकती है; अगर अग्नि कमज़ोर है, तो अमृत भी पेट में ज़हर (आम) बन जाता है।
  • पक्वाशय में वात का संचय: हमारी बड़ी आंत (Colon) वात दोष का मुख्य स्थान है। गर्मियों में जब डिहाइड्रेशन बढ़ता है, तो आंतें सूख जाती हैं और वात भड़क जाता है। छाछ (Takra) स्निग्ध (हल्की चिकनाई युक्त) होने के कारण इस रूखेपन को खत्म करती है।
  • विरुद्ध आहार से आम का निर्माण: जब आप दही को फलों के साथ मिलाते हैं या चीनी वाले ड्रिंक्स पीते हैं, तो शरीर में ज़हरीला कचरा (आम) बनता है जो अच्छे बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है।

पेट को ठंडा बनाने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने पेट की अग्नि को बुझाए बिना उसे ठंडक देने के लिए अपनी थाली में ये बदलाव करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - जठराग्नि बढ़ाने और पेट शांत करने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - फर्मेंटेशन और गैस बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, जौ का पानी (Barley water), ओट्स, मूंग दाल। मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, नया और भारी चावल।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (आंतों के लिए अमृत)। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, डालडा, बाज़ार का तला हुआ खाना।
पेय पदार्थ (Beverages) ताज़ा मथा हुआ तक्र (Buttermilk), धनिए का पानी, पुदीना पानी। बाज़ार के Probiotic Drinks, एनर्जी ड्रिंक्स, बर्फ का पानी, कोल्ड ड्रिंक्स।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, परवल, कद्दू, पेठा (Ash gourd)। कच्चा सलाद, अत्यधिक टमाटर, भारी बैंगन, शिमला मिर्च।
फल (Fruits) पपीता, उबला हुआ सेब, ताज़ा नारियल पानी। भोजन के तुरंत बाद खट्टे फल, फलों के जूस (फाइबर रहित)।

छाछ (Buttermilk) को अमृत बनाने के लिए जड़ी-बूटियाँ

सादी छाछ पचने में हल्की होती है, लेकिन अगर आप इसमें आयुर्वेद के ये जादुई मसाले मिला दें, तो यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली गट-हीलिंग ड्रिंक (Gut-healing drink) बन जाती है:

  • भुना हुआ जीरा (Roasted Cumin): यह जठराग्नि को तुरंत तेज़ करता है और पेट की गैस (वात) को शांत करके ब्लोटिंग खत्म करता है।
  • धनिया (Coriander): गर्मियों में पेट की भयंकर जलन और एसिडिटी (पित्त) को बर्फ की तरह शांत करने के लिए धनिया (Coriander) का पाउडर छाछ में मिलाना बेहद असरदार है।
  • पुदीना (Mint): ताज़े पुदीने के पत्ते छाछ में मिलाने से यह पाचक रसों का स्राव बढ़ाता है और गर्मियों की थकावट मिटाकर शरीर को तुरंत रिफ्रेश (Refresh) करता है।
  • सेंधा नमक (Rock Salt): बाज़ार के सफेद नमक के बजाय छाछ में सेंधा नमक मिलाएं। यह वात को अनुलोमित (नीचे की ओर गति) करता है और मल को बांधता है।
  • कुटज (Kutaja): अगर आपको गर्मियों में बार-बार पतले दस्त लग जाते हैं, तो छाछ के साथ कुटज (Kutaja) का सेवन करने से आंतों का इन्फेक्शन तुरंत रुक जाता है।

गट हेल्थ को रीबूट करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब पेट की खराबी बहुत पुरानी हो चुकी हो और केवल डाइट से बात न बन रही हो, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ आंतों को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • तक्रधारा (Takradhara): गर्मियों में औषधीय छाछ (तक्र) की लगातार धारा माथे पर गिराने की यह जादुई तक्रधारा (Takradhara) प्रक्रिया मानसिक तनाव को खत्म करती है और गट-ब्रेन एक्सिस को शांत करके आईबीएस (IBS) में भारी राहत देती है।
  • मात्रा बस्ती (Matra Basti): बड़ी आंत से भयंकर वात (गैस और रूखेपन) को पूरी तरह खत्म करने के लिए मेडिकेटेड ऑयल की बस्ती थेरेपी दी जाती है, जो आंतों को अंदर से रिपेयर करती है।
  • विरेचन (Virechana): लिवर और आंतों की डीप-क्लीनिंग के लिए की जाने वाली यह विरेचन थेरेपी (Virechana therapy) शरीर से अत्यधिक पित्त (Acid) और सड़े हुए भोजन के ज़हर को मल के रास्ते बाहर निकालती है।

पाचन तंत्र को पूरी तरह रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

विरुद्ध आहार और डिहाइड्रेशन से डैमेज हुई आंतों और जठराग्नि को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित और लगातार समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: आपकी जठराग्नि सुधरेगी। पेट की भारी गैस, डकारें और सीने की जलन शांत होगी। मल का बंधकर आना शुरू हो जाएगा।
  • 3-4 महीने: आंतों की परत (Gut lining) रिपेयर होने लगेगी। शरीर के अंदर से आम पूरी तरह साफ हो जाएगा और गट-ब्रेन कनेक्शन सुधरने से नींद गहरी आएगी।
  • 5-6 महीने: आपका मेटाबॉलिज़्म और पाचन तंत्र पूरी तरह से रीबूट हो जाएगा। आप सामान्य और सुपाच्य भोजन को बिना किसी मरोड़ या एसिडिटी के पचाने में सक्षम हो जाएंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

गट हेल्थ और माइक्रोबायोम के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने के लिए बाज़ार के Probiotic Drinks और कैप्सूल्स (Capsules) देना। जठराग्नि को बढ़ाना, 'आम' को पचाना और ताज़ा 'तक्र' (छाछ) देकर प्राकृतिक रूप से माइक्रोबायोम बनाना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल आंतों के फ्लोरा (Flora) का असंतुलन या एसिडिटी की समस्या मानना। इसे जठराग्नि की कमज़ोरी, बिगड़े हुए वात-पित्त और 'आम' के निर्माण का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल अक्सर कृत्रिम फाइबर और प्रोबायोटिक्स पर ज़ोर दिया जाता है, भोजन की तासीर पर नहीं। वात-शामक डाइट, सही फूड कॉम्बिनेशन (विरुद्ध आहार से बचाव) और घर के बने ताज़े भोजन को ही इलाज माना जाता है।
लंबा असर सप्लीमेंट्स और कृत्रिम ड्रिंक्स छोड़ने पर गैस और ब्लोटिंग तुरंत वापस आ जाती है। आंतें अंदर से इतनी मज़बूत हो जाती हैं कि जठराग्नि खुद को हील कर लेती है, जिससे इंसान स्थायी रूप से स्वस्थ रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस पेट की खराबी को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • मल या उल्टियों में ताज़ा खून आना: अगर बार-बार उल्टियाँ होने लगें और उनमें लाल खून या मल का रंग बिल्कुल डामर (Tar) जैसा काला हो जाए (यह अंदरूनी ब्लीडिंग का संकेत है)।
  • लगातार और असहनीय पेट दर्द: अगर पेट में ऐसी भयंकर मरोड़ उठे जो किसी भी पोज़िशन में लेटने पर शांत न हो और पेट छूने पर बहुत कड़ा (Hard) लगे।
  • भयंकर डिहाइड्रेशन और चक्कर आना: अगर लगातार दस्त के कारण शरीर का पानी इतना सूख जाए कि चक्कर आने लगें, आँखें धंस जाएं और यूरिन आना बंद हो जाए।
  • बिना वजह अचानक तेज़ी से वज़न गिरना: अगर आप सामान्य खाना खा रहे हैं, फिर भी आपका वज़न तेज़ी से गिर रहा हो और शरीर में भयंकर कमज़ोरी आ जाए।

निष्कर्ष

अपनी गट हेल्थ (Gut Health) को सुधारने के लिए बाज़ार से महँगे, चीनी से भरे और प्लास्टिक की बोतलों में बंद प्रोबायोटिक ड्रिंक्स (Probiotic Drinks) खरीदना न केवल आपके पैसे की बर्बादी है, बल्कि यह आपके प्राकृतिक पाचन तंत्र के साथ एक भयंकर खिलवाड़ है। यह कृत्रिम मिठास और डेड बैक्टीरिया (Dead Bacteria) का कॉकटेल आपकी आंतों में भयंकर आम और ब्लोटिंग पैदा करता है। असली प्रोबायोटिक कोई नई वैज्ञानिक खोज नहीं है; यह हमारी भारतीय रसोई में हज़ारों सालों से मौजूद ताज़ा मथी हुई छाछ (Takra) है। जब आप इस प्राकृतिक अमृत को छोड़कर विज्ञापनों के पीछे भागते हैं, तो आप अपनी जठराग्नि को हमेशा के लिए कमज़ोर कर रहे होते हैं। इस मार्केटिंग के खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। कोल्ड ड्रिंक्स और बाज़ार की मीठी लस्सी को कूड़ेदान में डालें। अपने घर में ताज़ा दही जमाएं, उसे मथकर मक्खन निकालें और उस छाछ में जीरा, पुदीना और सेंधा नमक मिलाकर पिएं। धनिए का पानी और कुटज जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और तक्रधारा व मात्रा बस्ती थेरेपी से अपनी सूखी हुई आंतों को नया जीवन दें। अपनी गट हेल्थ को प्लास्टिक की बोतलों का गुलाम न बनने दें, और अपने पाचन तंत्र को स्थायी रूप से फौलादी बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल नहीं। आयुर्वेद के अनुसार दही तासीर में भारी (गुरु), कफ बढ़ाने वाला और पचने में मुश्किल होता है (इसे रात में खाना वर्जित है)। लेकिन जब दही में पानी मिलाकर उसे मथकर (Churning) मक्खन निकाल लिया जाता है, तो वह छाछ (तक्र) बन जाती है। छाछ पचने में बेहद हल्की (लघु), जठराग्नि बढ़ाने वाली और त्रिदोष नाशक होती है।

बाज़ार की छाछ में अक्सर प्रिजर्वेटिव्स और बहुत ज़्यादा कृत्रिम नमक होता है, और लस्सी में भयंकर चीनी होती है। ये दोनों आंतों में फर्मेंटेशन और आम (Toxins) पैदा करते हैं। ताज़ा घर की मथी हुई छाछ ही असली प्रोबायोटिक है जिसमें बैक्टीरिया जीवित और प्राकृतिक होते हैं।

छाछ पीने का सबसे उत्तम समय दोपहर के भोजन (Lunch) के तुरंत बाद या साथ में है। यह भोजन को पचाने (Digestion) में मदद करती है। इसे सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले पीने से बचना चाहिए, क्योंकि रात में यह कफ बढ़ा सकती है।

शत-प्रतिशत। कमर्शियल प्रोबायोटिक ड्रिंक्स में 10-15 ग्राम लिक्विड शुगर होती है। यह चीनी आंतों में मौजूद बुरे बैक्टीरिया (Bad Bacteria/Yeast) का भोजन बनती है, जिससे अच्छे बैक्टीरिया मर जाते हैं और आपको भयंकर गैस व ब्लोटिंग (Bloating) की समस्या होने लगती है।

नहीं। छाछ बनाने की प्रक्रिया में दही का सारा भारी फैट (मक्खन) निकाल लिया जाता है। इसलिए छाछ वज़न नहीं बढ़ाती, बल्कि यह आपके सुस्त मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करती है, आंतों को साफ करती है और वज़न घटाने में जादुई मदद करती है।

अगर आपको भयंकर एसिडिटी (पित्त प्रकोप) है, तो बहुत खट्टी (Sour) छाछ न पिएं। ताज़े (मीठे) दही से बनी छाछ में थोड़ा सा धनिया पाउडर और मिश्री (रॉक शुगर) मिलाकर पीने से यह पित्त को बर्फ की तरह शांत कर देती है।

जीरा और पुदीना छाछ के गुणों को 10 गुना बढ़ा देते हैं। जीरा जठराग्नि को तेज़ करता है और गैस (वात) को शांत करता है, जबकि पुदीना पाचक रसों का स्राव बढ़ाता है और गर्मियों की थकावट मिटाकर शरीर को तुरंत रिफ्रेश करता है।

हाँ, आयुर्वेद में आईबीएस (ग्रहणी) के इलाज के लिए तक्र (छाछ) को सबसे मुख्य औषधि माना गया है। यह आंतों की नाज़ुक परत को रिपेयर करती है, मल को बांधती है (कब्ज़ और दस्त दोनों में फायदेमंद) और आंतों की सूजन को पूरी तरह खत्म करती है।

लगातार कृत्रिम प्रोबायोटिक कैप्सूल्स खाने से शरीर उन पर निर्भर हो जाता है (Dependency)। जैसे ही आप कैप्सूल छोड़ते हैं, पाचन फिर से क्रैश हो जाता है। इसके बजाय, छाछ, फर्मेंटेड फूड्स और सही जठराग्नि से शरीर को अपना प्राकृतिक माइक्रोबायोम खुद बनाने दें।

बिल्कुल। मिट्टी के बर्तन की तासीर ठंडी और अल्कलाइन (Alkaline) होती है। जब आप इसमें दही जमाते या छाछ मथते हैं, तो यह छाछ की अतिरिक्त खटास (Acidity) को सोख लेता है और उसमें प्राकृतिक मिनरल्स (Minerals) भर देता है, जो शरीर के लिए एक महा-औषधि का काम करते है।

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