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AVN Stage 1, 2, 3 - कौन से Stage तक आयुर्वेद से Reversible है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 20 May, 2026
  • category-iconUpdated on 11 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5057

अचानक कूल्हे Hip joint में हल्का दर्द शुरू होना, चलते समय थोड़ा लंगड़ापन महसूस होना और सीढ़ियां चढ़ते समय जांघों के आसपास एक अजीब सी जकड़न शुरुआत में हम इसे महज़ मांसपेशियों का खिंचाव या कैल्शियम की कमी समझकर दर्दनिवारक गोलियों Painkillers से दबाने की कोशिश करते हैं लेकिन जब यह दर्द असहनीय हो जाता है और एमआरआई MRI रिपोर्ट सामने आती है, तो एक भारी शब्द गूँजता है  Avascular Necrosis - AVN" और इसके साथ ही डॉक्टर की वह चेतावनी जो किसी भी इंसान को डरा सकती है  "आपको जल्द ही हिप रिप्लेसमेंट Hip Replacement सर्जरी करानी पड़ेगी।"

लेकिन क्या सच में सर्जरी ही एकमात्र विकल्प है? क्या आपके शरीर के प्राकृतिक जोड़ को बचाया नहीं जा सकता? आयुर्वेद का हज़ारों साल पुराना विज्ञान स्पष्ट कहता है कि अगर समय रहते सही उपचार मिल जाए, तो आपके कूल्हे की गल रही हड्डी को न सिर्फ बचाया जा सकता है, बल्कि उसे दोबारा जीवित Rejuvenate भी किया जा सकता है। आइए गहराई से समझते हैं कि AVN क्या है और यह किस स्टेज तक आयुर्वेद के माध्यम से पूरी तरह Reversible ठीक होने योग्य है।

AVN शरीर में क्या संकेत देता है और यह कैसे होता है?

एवैस्कुलर नेक्रोसिस AVN का सीधा अर्थ है रक्त की कमी से हड्डी की मृत्यु Avascular = बिना रक्त के, Necrosis = मृत्यु।

हमारे कूल्हे का जोड़ Femur bone का ऊपरी गोल हिस्सा एक बहुत ही नाज़ुक रक्त आपूर्ति Blood supply पर निर्भर करता है। जब किसी कारण जैसे स्टेरॉयड का अत्यधिक सेवन, शराब, चोट या शरीर में बहुत ज़्यादा वात का बढ़ना से कूल्हे की हड्डी तक खून ले जाने वाली नसें ब्लॉक हो जाती हैं, तो हड्डी को पोषण मिलना बंद हो जाता है। पोषण के अभाव में हड्डी अंदर ही अंदर खोखली होने लगती है और धीरे-धीरे गलकर ढहने Collapse लगती है। यह आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपकी 'अस्थि धातु' भूखी मर रही है।

AVN एवैस्कुलर नेक्रोसिस किन स्टेज में सामने आता है और क्या यह Reversible है?

हर मरीज़ अक्सर यही सवाल पूछता है कि क्या आयुर्वेद से मेरी हड्डी दोबारा पूरी तरह गोल हो जाएगी? इसका सीधा जवाब आपकी बीमारी की 'स्टेज' पर निर्भर करता है:

Stage 1 : पूरी तरह Reversible 100% रिकवरी की संभावना

  • क्या होता है: इस स्टेज में एक्स-रे X-Ray बिल्कुल नॉर्मल आता है, केवल एमआरआई MRI में हड्डी के अंदर सूजन Edema और रक्त की कमी दिखाई देती है। हड्डी का आकार बिल्कुल गोल और सुरक्षित होता है।
  • आयुर्वेदिक नज़रिया: अगर इस स्टेज में आयुर्वेद की पंचकर्म थेरेपी और जड़ी-बूटियाँ शुरू कर दी जाएं, तो ब्लॉक हुई नसों को खोलकर ब्लड सप्लाई दोबारा चालू की जा सकती है। यह स्टेज पूरी तरह से Reversible है और मरीज़ 100% स्वस्थ हो सकता है।

Stage 2 : अत्यधिक Reversible सर्जरी से बचाव संभव

  • क्या होता है: इस स्टेज में हड्डी के अंदर छोटे-छोटे गड्ढे Cystic changes और कड़ापन Sclerosis आने लगता है, जो एक्स-रे में भी दिख जाता है। लेकिन अभी भी फीमर हेड Femur Head का आकार गोल रहता है, वह पिचका नहीं होता।
  • आयुर्वेदिक नज़रिया: इस स्टेज में वात बहुत अधिक बढ़ चुका होता है। पंचकर्म विशेषकर बस्ती थेरेपी के माध्यम से हड्डी के गलने की प्रक्रिया को यहीं रोका जा सकता है। नई रक्त वाहिकाओं Angiogenesis का निर्माण करके हड्डी को दोबारा ताक़त दी जा सकती है। यह स्टेज भी बहुत हद तक Reversible है।

Stage 3 : आंशिक Reversible / मैनेजमेंट मैनेज करने योग्य

  • क्या होता है: यह वह खतरनाक स्टेज है जहाँ 'क्रेसेंट साइन' Crescent sign दिखता है। यानी हड्डी अंदर से इतनी खोखली हो चुकी है कि शरीर का वज़न पड़ने से उसका गोल आकार पिचकने Collapse लगता है।
  • आयुर्वेदिक नज़रिया: क्या पिचक चुकी हड्डी दोबारा पूरी तरह गोल हो सकती है? संरचनात्मक रूप से Structurally इसे पूरी तरह वापस गोल करना मुश्किल है। लेकिन 'क्लिनिकली' यह काफी हद तक Reversible है। आयुर्वेद हड्डी के और अधिक पिचकने को रोक देता है, दर्द को खत्म कर देता है और आसपास की मांसपेशियों को इतना मज़बूत कर देता है कि मरीज़ बिना लंगड़ाए, बिना दर्द के अपनी सामान्य ज़िंदगी जी सकता है। सर्जरी को सफलता से टाला जा सकता है।

Stage 4: क्रिटिकल गंभीर आर्थराइटिस

  • क्या होता है: हड्डी पूरी तरह पिचक चुकी होती है और जोड़ का कार्टिलेज नष्ट हो जाता है। इस स्टेज में अक्सर सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है, लेकिन आयुर्वेद सर्जरी से पहले और बाद की रिकवरी में दर्द कम करने में मदद करता है।

क्या आपके शरीर में भी AVN के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

हड्डी रातों-रात नहीं गलती। शरीर बहुत पहले से संकेत देता है:

  • जांघ के जोड़ Groin में दर्द: कूल्हे के आगे के हिस्से या जांघ के जोड़ में सुई चुभने जैसा या गहरा दर्द, जो चलते समय या सीढ़ियां चढ़ते समय बढ़ जाता है।
  • लंगड़ा कर चलना Limping: दर्द से बचने के लिए शरीर का वज़न एक पैर पर ज़्यादा डालना, जिससे चाल में लंगड़ापन आ जाता है।
  • मूवमेंट का रुकना: ज़मीन पर पालथी मारकर Cross-legged बैठने या उकड़ू Squat बैठने में भयंकर दर्द होना या बिल्कुल न बैठ पाना।
  • घुटने तक दर्द जाना Referred Pain: कूल्हे का दर्द नसों के ज़रिए जांघ के पीछे से होता हुआ सीधा घुटनों तक महसूस होना।

इस दर्द को में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

इस गंभीर बीमारी से राहत पाने की जल्दबाज़ी में, मरीज़ अक्सर ऐसी गलतियाँ करते हैं जो सर्जरी की नौबत ले आती हैं:

  • पेनकिलर्स का अंधाधुंध सेवन: दर्द को दबाने के लिए रोज़ाना दर्द निवारक गोलियाँ खाना आपकी किडनी को डैमेज करता है और बीमारी को चुपचाप स्टेज 1 से स्टेज 3 तक पहुँचा देता है, क्योंकि आप दर्द महसूस न होने पर क्षतिग्रस्त जोड़ पर वज़न डालते रहते हैं।
  • भारी व्यायाम और फिजियोथेरेपी: कमज़ोर और खोखली हो चुकी हड्डी पर भारी वज़न उठाना या गलत स्ट्रेचिंग करना हड्डी को तेज़ी से पिचकने Collapse पर मजबूर कर देता है।
  • कैल्शियम की गोलियों पर निर्भरता: AVN कैल्शियम की कमी से नहीं, बल्कि 'रक्त की कमी' से होता है। खून की नसें ब्लॉक होने पर आप जितना भी कैल्शियम खा लें, वह हड्डी तक पहुँचेगा ही नहीं।

आयुर्वेद AVN और हड्डियों के सूखने को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे Avascular Necrosis कहता है, आयुर्वेद उसे 'अस्थि-मज्जागत वात' और 'मार्ग आवरण' के सिद्धांत से गहराई से समझता है।

  • मार्ग आवरण ब्लॉकेज: शरीर में अत्यधिक स्टेरॉयड, शराब या जंक फूड के सेवन से वात और पित्त बिगड़ते हैं, जिससे 'रक्त वहा स्रोतस' Blood channels में रुकावट Blockage आ जाती है।
  • अस्थि धातु क्षय Bone Depletion: जब रक्त अस्थि हड्डी तक नहीं पहुँचता, तो अस्थि धातु का पोषण रुक जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, वात का गुण रूखा और खुरदरा है। जब अस्थि में रक्त की चिकनाई नहीं पहुँचती, तो वहां वात का रूखापन बढ़ जाता है, जिससे हड्डी सूखकर झड़ने लगती है।
  • आम Toxins का निर्माण: कमज़ोर पाचन के कारण बना 'आम' टॉक्सिन्स खून को गाढ़ा कर देता है, जिससे पतली नसों Micro-capillaries में थक्के Clots बनने लगते हैं और AVN तेज़ी से फैलता है।

हड्डियों की खुश्की मिटाने और वात शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके खून को गाढ़ा कर सकता है और वही ब्लॉक नसों को खोल सकता है। AVN से बचने और हड्डियों को शांत करने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - हड्डियों को चिकनाई देने वाले और वात शामक क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - रूखापन और ब्लॉकेज बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, दलिया, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, रागी। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, पिज़्ज़ा, रूखे बिस्कुट।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी हड्डियों के लिए अमृत, तिल का तेल, ऑलिव ऑयल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, डालडा, बहुत अधिक जंक फूड।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, कद्दू, परवल, सहजन Drumsticks - अस्थि के लिए बेहतरीन। कच्चा सलाद, अत्यधिक गोभी, कटहल, बैंगन, मटर वात बढ़ाने वाले।
फल और मेवे Fruits & Nuts रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, चिया सीड्स, पपीता, सेब, अंजीर। डिब्बाबंद फल, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स, खट्टे फल अधिक मात्रा में।
पेय पदार्थ Beverages हल्दी, अश्वगंधा और शिलाजीत वाला दूध, ताज़ा मट्ठा, जीरा-सौंफ का पानी। शराब AVN का सबसे बड़ा कारण, बहुत ज़्यादा कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स।

अस्थि और मज्जा को फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के नसों के दर्द को खींच लेते हैं और गल रही हड्डी को दोबारा ज़िंदा कर देते हैं:

  • अस्थिशृंखला हड़जोड़ - Asthishrinkhala: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह टूटी और गली हुई हड्डियों को जोड़ने का सबसे जादुई रसायन है। यह सीधे 'अस्थि धातु' का निर्माण करता है और कैल्शियम के अवशोषण को कई गुना बढ़ा देता है।
  • गुग्गुलु Guggulu: विशेष रूप से लाक्षादि गुग्गुलु और पंचतिक्त घृत गुग्गुलु हड्डियों के अंदर जाकर दर्द और सूजन Inflammation को खींच लेते हैं और नई रक्त वाहिकाओं को बनाते हैं।
  • अश्वगंधा Ashwagandha: नर्वस सिस्टम की कमज़ोरी दूर करने और जांघ की सिकुड़ रही मांसपेशियों Muscle atrophy को दोबारा फौलादी बनाने के लिए यह एक अद्भुत रसायन है।
  • गिलोय Giloy: रक्त की अशुद्धियों को दूर करने और शरीर के इम्यून सिस्टम को सही दिशा देने के लिए गिलोय बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर का काम करती है।

नसों को खोलने और ब्लड सप्लाई बढ़ाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

AVN के इलाज में केवल खाने वाली दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी और आंतरिक थेरेपीज़ कूल्हे के जोड़ को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • बस्ती Basti Treatment: आयुर्वेद में वात और हड्डियों के रोगों के लिए 'बस्ती' औषधीय एनिमा को आधा इलाज Half treatment माना गया है। विशेष रूप से 'तिक्त क्षीर बस्ती' कड़वी जड़ी-बूटियों और दूध-घी का एनिमा बड़ी आंत के ज़रिए सीधे हड्डियों तक पोषण पहुँचाती है और खोखली हड्डी को दोबारा भरती है।
  • कटि और जानु बस्ती Kati Basti: रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से और कूल्हे के जोड़ों पर आटे का घेरा बनाकर उसमें गुनगुना औषधीय तेल जैसे महानारायण या धन्वंतरम तेल रोका जाता है। यह सूखी हुई हड्डियों को भारी चिकनाई देता है।
  • पत्र पिंड स्वेद Patra Pinda Sweda: ताज़े वात-शामक पत्तों की पोटली बनाकर, उसे गर्म औषधीय तेल में डुबोकर पूरे कूल्हे और जांघों की सिकाई की जाती है, जिससे फंसी हुई नसें खुलती हैं और ब्लड सप्लाई दौड़ने लगती है।
  • अभ्यंग Abhyanga: संपूर्ण शारीरिक मालिश शरीर की जकड़न को खत्म करती है और ब्लड सर्कुलेशन तेज़ी से बढ़ाती है।

हड्डी के रिपेयर होने और दर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों की ब्लॉकेज के कारण गली हुई हड्डी को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और विषैले तत्वों के बाहर निकलने से आपका दर्द और जकड़न तेज़ी से कम होगी। रात की नींद बेहतर होगी और चाल का लंगड़ापन कम होने लगेगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म बस्ती और रसायनों के प्रभाव से नई ब्लड सप्लाई Blood supply चालू होने लगेगी। जांघ और कूल्हे की मांसपेशियां वापस मज़बूत होने लगेगी और आप काफी हद तक बिना सपोर्ट के चल सकेंगे।
  • 6-12 महीने: अस्थि धातु पोषित होने लगेगी। यदि आप स्टेज 1 या 2 में हैं, तो हड्डी की संरचना में सुधार दिखने लगेगा। स्टेज 3 में हड्डी का और अधिक गलना रुक जाएगा और आप बिना किसी पेनकिलर के एक सामान्य, ऊर्जावान और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

एवैस्कुलर नेक्रोसिस AVN के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Modern Medicine आयुर्वेद Ayurveda
इलाज का मुख्य लक्ष्य शुरुआत में केवल दर्द को दबाना और बाद में कोर डीकंप्रेशन Core Decompression या हिप रिप्लेसमेंट Joint Replacement सर्जरी करना। वात को शांत करना, ब्लड सप्लाई चालू करना और प्राकृतिक जोड़ को बचाना Joint Preservation।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल एक स्थानीय Local हड्डी के गलने की समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात, मार्ग में रुकावट और अस्थि धातु के सूखने का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल कैल्शियम और विटामिन डी सप्लीमेंट की सलाह, लेकिन जठराग्नि या वात-शामक डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। वात-शामक डाइट, सही पोश्चर, वज़न नियंत्रण और पंचकर्म बस्ती को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर कृत्रिम जोड़ Artificial joint की एक उम्र होती है 15-20 साल, जिसके बाद दोबारा सर्जरी Revision surgery का रिस्क रहता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और प्राकृतिक जोड़ अपनी जगह सुरक्षित रहता है, जिससे इंसान स्थायी रूप से स्वस्थ रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद हड्डी की इस खुश्की को रोक सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • चलने में पूरी तरह असमर्थ होना: अगर दर्द इतना भयंकर हो जाए कि आप ज़मीन पर पैर रखने या एक कदम भी चलने में पूरी तरह असमर्थ महसूस करने लगें।
  • पैर का छोटा होना: अगर कूल्हे की हड्डी इतनी ज़्यादा पिचक जाए Stage 4 कि आपका एक पैर दूसरे पैर की तुलना में स्पष्ट रूप से छोटा हो जाए।
  • आराम करते समय असहनीय दर्द: अगर लेटे रहने या सोते समय भी कूल्हे में करंट जैसा इतना तेज़ दर्द हो कि नींद न आए।

निष्कर्ष

AVN कोई साधारण जोड़ का दर्द नहीं है; यह आपके शरीर का वह आपातकालीन सायरन है जो बता रहा है कि आपकी 'अस्थि धातु' ऑक्सीजन और पोषण के लिए तड़प रही है। जब आप इस सायरन को रोज़ाना पेनकिलर्स से दबाते हैं, तो आप अपनी हड्डी को बचाने के बजाय उसे स्थायी रूप से नष्ट होने के लिए छोड़ रहे होते हैं हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी ही एकमात्र अंतिम रास्ता नहीं है। अगर स्टेज 1 या 2 में सही समय पर आयुर्वेद का हाथ थाम लिया जाए, तो इस बीमारी को 100% पलटा Reverse जा सकता है। अपनी डाइट में गाय का घी शामिल करें, वात बढ़ाने वाले जंक फूड और शराब से दूर रहें। अश्वगंधा, हड़जोड़ और गुग्गुलु जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की 'बस्ती' थेरेपी से अपनी सूखी हुई हड्डियों को प्राकृतिक जीवन दें। अपने शरीर के असली और प्राकृतिक जोड़ को कटने न दें, और बिना सर्जरी के अपने पैरों पर फिर से दौड़ने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें 

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

गठिया (Arthritis) उम्र के साथ जोड़ों के घिसने के कारण होता है, जबकि AVN किसी भी उम्र (अक्सर युवाओं) में रक्त की आपूर्ति रुकने से हड्डी के अंदर से गलने (Bone death) के कारण होता है।

बिल्कुल। अत्यधिक और बिना डॉक्टरी सलाह के स्टेरॉयड (Steroids) लेना (विशेषकर कोविड के दौरान) AVN का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। स्टेरॉयड खून में फैट (Lipids) बढ़ाकर रक्त वाहिकाओं को ब्लॉक कर देता है।

हाँ, यदि बीमारी स्टेज 1, स्टेज 2 या शुरुआती स्टेज 3 में पकड़ में आ जाए, तो आयुर्वेद की पंचकर्म (विशेषकर बस्ती) थेरेपी और रसायनों से ब्लड सप्लाई दोबारा चालू करके सर्जरी को 100% टाला जा सकता है।

AVN के मरीज़ों को कभी भी भारी वज़न उठाने वाले (Weight-bearing) या कूदने वाले व्यायाम नहीं करने चाहिए। इससे कमज़ोर हड्डी टूट सकती है। केवल डॉक्टर की सलाह से हल्की स्ट्रेचिंग, योग और पानी के अंदर व्यायाम (Swimming/Aqua therapy) करना सुरक्षित है।

हाँ। अत्यधिक शराब शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ाती है, जो रक्त की नलियों में थक्के (Clots) बनाते हैं। इससे हड्डी तक जाने वाला खून रुक जाता है और हड्डी तेज़ी से गलने लगती है।

ये पेनकिलर की तरह दर्द को सुन्न नहीं करते। हड़जोड़ अस्थि निर्माण को बढ़ावा देता है, और अश्वगंधा नर्वस सिस्टम व मांसपेशियों को ताक़त देकर सूजन को खत्म करता है, जिससे दर्द प्राकृतिक रूप से और हमेशा के लिए खत्म होता है।

AVN कैल्शियम की कमी की बीमारी नहीं है, यह ब्लड सप्लाई रुकने की बीमारी है। जब तक आयुर्वेदिक औषधियों से खून की नसें नहीं खोली जाएंगी, तब तक खाया हुआ कैल्शियम हड्डी तक पहुँचेगा ही नहीं।

बस्ती में जड़ी-बूटियों और घी-दूध का एनिमा दिया जाता है। बड़ी आंत (Colon) अस्थि धातु का मुख्य केंद्र है। बस्ती का औषधीय तत्व सीधे आंतों से अवशोषित होकर हड्डियों तक पहुँचता है, वात को शांत करता है और गली हुई हड्डी को अंदर से पोषण (Lubrication) देता है।

हड्डियों की खुश्की और दर्द के लिए हमेशा वात-शामक और अस्थि-पोषक तेल (जैसे महानारायण तेल, धन्वंतरम तेल या क्षीरबला तेल) का ही इस्तेमाल करना चाहिए। साधारण तेल हड्डी की गहराई तक जाकर वात को शांत करने में उतने असरदार नहीं होते।

हाँ, बहुत ज़रूरी है। शरीर का पूरा वज़न कूल्हे के जोड़ (Hip joint) पर पड़ता है। वज़न कम करने से कमज़ोर और पिचक रही हड्डी पर अतिरिक्त दबाव कम हो जाता है, जिससे हड्डी के तेज़ी से डैमेज होने (Collapse) का खतरा टल जाता है।

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