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पुराना गठिया जड़ से सुधर सकता है? वास्तविकता क्या है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 02 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 22 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5102

आप सुबह उठते हैं और अपने हाथों की उँगलियाँ देखते हैं, जो थोड़ी टेढ़ी हो चुकी हैं और उनमें भयंकर जकड़न है। आप पिछले दस या पंद्रह सालों से गठिया का दर्द झेल रहे हैं और हर तरह की एलोपैथिक गोलियाँ, भारी स्टेरॉयड खाकर देख चुके हैं। शुरुआत में इन दवाइयों ने जादू की तरह काम किया था, लेकिन अब वे भी बेअसर हो गई हैं और आपका शरीर अंदर से पूरी तरह खोखला और थका हुआ महसूस होता है। जब गठिया बहुत पुराना हो जाता है, तो डॉक्टर कह देते हैं कि अब इसका कोई इलाज नहीं है और बस दर्द को सहने की आदत डाल लें या सर्जरी करवा लें। 

लेकिन यह पूरी सच्चाई बिल्कुल नहीं है; शरीर को सिर्फ़ ऊपर से सुन्न कर देना कोई इलाज नहीं है। आपका शरीर अंदर से विषैले तत्वों और वात से भर चुका है। जब आप अपनी इस बिगड़ी हुई जीवनशैली को ठीक करते हैं और अपने पेट की गहराई से सफ़ाई करते हैं, तो आप अपनी एंग्ज़ायटी को मैनेज कर सकते हैं और ठीक वैसे ही इस पुराने दर्द को हमेशा के लिए जड़ से ख़त्म कर सकते हैं जैसे पुराने से पुराने माइग्रेन से राहत पाई जा सकती है।

पुराना गठिया आख़िर क्या है?

जब गठिया सालों पुराना हो जाता है, तो यह सिर्फ़ हड्डियों के घिसने की समस्या नहीं रह जाता। यह आपके पूरे शरीर के सिस्टम और इम्युनिटी का एक बहुत ही भयंकर और गहरा फेलियर है।

  • इम्यून सिस्टम की स्थायी कंफ्यूज़न: रुमेटाइड आर्थराइटिस में आपका इम्यून सिस्टम सालों से आपके ही जोड़ों को बाहरी दुश्मन समझकर खा रहा होता है। लगातार हमले से जोड़ अंदर से गल जाते हैं।
  • हड्डियों के बीच की गद्दी का ख़त्म होना: सालों तक वात बढ़ने और पोषण न मिलने से जोड़ों के बीच का कार्टिलेज पूरी तरह सूख जाता है। हड्डियाँ बिना किसी ग्रीस के आपस में रगड़ खाती हैं और भयंकर दर्द होता है।

गठिया कितने प्रकार का हो सकता है?

हर मरीज़ का पुराना गठिया एक जैसा नहीं होता है। शरीर में कौन सा दोष बिगड़ा है और कौन सी धातु कमज़ोर हुई है, इसके आधार पर यह बीमारी कई भयंकर रूप ले लेती है।

  • पुराना आमवात (Chronic Rheumatoid Arthritis): यह सबसे ज़्यादा दर्दनाक है। इसमें शरीर के सभी छोटे-बड़े जोड़ों में भारी सूजन, लालिमा और भयंकर गर्माहट रहती है। उँगलियाँ टेढ़ी होने लगती हैं।
  • पुराना संधिगत वात (Severe Osteoarthritis): यह उम्र और वात के साथ बढ़ता है। इसमें घुटने और कूल्हे की हड्डियाँ पूरी तरह घिस जाती हैं और कट-कट की तेज़ आवाज़ आती है।
  • क्रोनिक गाउट (Chronic Tophaceous Gout): इसमें यूरिक एसिड के बड़े-बड़े सफेद ढेले त्वचा और जोड़ों के अंदर स्थायी रूप से पत्थर की तरह जम जाते हैं।
  • एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस: इसमें रीढ़ की हड्डी के मनके आपस में जुड़ जाते हैं और इंसान की कमर बिल्कुल एक बाँस की तरह सख़्त और सीधी हो जाती है।

इसके लक्षण और संकेत कैसे पहचानें?

जब बीमारी पुरानी हो जाती है, तो शरीर दर्द के अलावा भी बहुत सारे डरावने संकेत देता है। आपकी हड्डियाँ चीख-चीख कर आपको अपनी अंदरूनी बर्बादी की कहानी बताती हैं।

  • सुबह उठने पर पूरे शरीर में घंटों तक रहने वाली ऐसी भयंकर जकड़न जो बिना गर्म पानी से नहाए या हिले-डुले न खुले।
  • जोड़ों का आकार हमेशा के लिए बदल जाना, जैसे उँगलियों का बाहर की तरफ़ मुड़ जाना।
  • जोड़ों के आस-पास की माँसपेशियाँ पूरी तरह सूख जाना और वहाँ सिर्फ़ हड्डियाँ ही हड्डियाँ दिखना।
  • लगातार रहने वाला हल्का बुख़ार, भयंकर थकावट और खून की भारी कमी महसूस होना।
  • चलते समय या उठते-बैठते समय घुटनों के लॉक हो जाने का डर हमेशा बना रहना।

यह बीमारी पुरानी और ज़िद्दी क्यों हो जाती है?

आपका गठिया अचानक से पुराना और लाइलाज नहीं हुआ है। आपकी रोज़मर्रा की कुछ बहुत बड़ी ग़लतियों और सिर्फ़ पेनकिलर पर निर्भर रहने की आदत ने इसे इतना ज़िद्दी बना दिया है।

  • लगातार ख़राब हाज़मा: जब आपकी पाचन अग्नि सालों तक कमज़ोर रहती है, तो पेट में 'आम' (टॉक्सिन) बनता रहता है। यही गंदगी सालों तक जोड़ों में जमकर पत्थर बन जाती है।
  • दवाइयों से दर्द को सुन्न करना: आपने बीमारी की जड़ को कभी ठीक नहीं किया, सिर्फ़ पेनकिलर खाकर दर्द को दबाया। अंदर ही अंदर वात आपकी हड्डियों को दीमक की तरह खाता रहा।
  • लगातार मानसिक तनाव: सालों तक दर्द में रहने से आप भयंकर डिप्रेशन में चले जाते हैं। तनाव के प्रभाव शरीर की हीलिंग प्रोसेस को पूरी तरह रोक देते हैं।
  • नींद का पूरा न होना: दर्द के कारण सालों से रात में नींद की कमी आपके शरीर को अपनी सूजन घटाने का और हड्डियों को रिपेयर करने का समय ही नहीं देती।

इसे नज़रअंदाज़ करने पर क्या जटिलताएँ हो सकती हैं?

अगर आप अब भी यह सोच रहे हैं कि सिर्फ़ कड़े स्टेरॉयड खाकर आप जीवन काट लेंगे, तो आप अपने शरीर को एक बहुत बड़े ख़तरे में डाल रहे हैं।

  • हमेशा के लिए बिस्तर पकड़ लेना: जब हड्डियाँ पूरी तरह गल जाती हैं और जोड़ लॉक हो जाते हैं, तो इंसान व्हीलचेयर या बिस्तर तक सीमित हो जाता है।
  • ऑर्गन डैमेज (Organ Failure): सालों तक गठिया की भारी दवाइयाँ खाने से आपका लिवर, किडनी और हृदय हमेशा के लिए काम करना बंद कर सकते हैं।
  • हड्डियों का खोखला होना (Osteoporosis): स्टेरॉयड आपकी हड्डियों को अंदर से स्पंज की तरह भुरभुरा बना देते हैं, जिससे हल्का सा झटका लगने पर भी फ्रैक्चर हो सकता है।
  • इम्युनिटी का पूरी तरह ख़त्म होना: दवाइयों से इम्युनिटी इतनी दब जाती है कि आपको बार-बार भयंकर इन्फेक्शन होने लगते हैं।

इसका निदान कैसे किया जाता है?

आधुनिक विज्ञान यह जानने के लिए कि सालों में हड्डियों का कितना नुक़सान हो चुका है, कई तरह के महँगे और गहरे टेस्ट करता है।

  • एडवांस एक्स-रे और एमआरआई: यह साफ़ देखने के लिए कि जोड़ों की गद्दी कितनी ख़त्म हो चुकी है और हड्डियाँ कितनी मुड़ गई हैं।
  • आरए फैक्टर और एंटी-सीसीपी: यह जानने के लिए कि रुमेटाइड आर्थराइटिस का स्तर शरीर में कितना गंभीर और पुराना है।
  • सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) और ईएसआर: सालों से खून में चल रही भयंकर सूजन को मापने के लिए।
  • डेक्सा स्कैन (DEXA Scan): यह टेस्ट हड्डियों की डेंसिटी नापता है, ताकि पता चले कि दवाइयों से हड्डियाँ कितनी खोखली हो चुकी हैं।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है?

आयुर्वेद पुराने गठिया को एक दिन की बीमारी नहीं, बल्कि 'धातु क्षय' (टिशू का पूरी तरह नष्ट होना) और 'आमवात' का सबसे गंभीर और पुराना स्तर मानता है।

  • आम (गंदगी) का हड्डियों में घुसना: जब आपका पाचन तंत्र कमज़ोर होता है, तो अधपचा भोजन (आम) बनता है। सालों में यह आम इतना ज़िद्दी हो जाता है कि वह हड्डियों के अंदर तक घुसकर उन्हें सड़ाने लगता है।
  • वात का भयंकर प्रकोप: शरीर में वात इतना ज़्यादा बढ़ जाता है कि वह जोड़ों की प्राकृतिक चिकनाई को पूरी तरह ख़त्म कर देता है और नसों को सिकोड़ देता है।
  • धातुओं की कमज़ोरी: आयुर्वेद मानता है कि जब तक शरीर की अंदरूनी अग्नि ठीक नहीं होगी, हड्डियों को पोषण नहीं मिलेगा। आयुर्वेद इसी गंदगी को पिघलाकर बाहर निकालता है।

पुराने गठिया के लिए 4 सबसे बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ कौन सी हैं?

प्रकृति ने हमें शरीर की अंदरूनी और पुरानी सूजन को जड़ से सुखाने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं जो बिना किडनी ख़राब किए काम करती हैं।

  • शल्लकी (Boswellia): यह प्रकृति का सबसे शक्तिशाली दर्द और सूजन-रोधी पौधा है। यह सालों पुरानी गर्माहट को खींच लेता है और घिसती हुई हड्डियों को बचाता है।
  • गुग्गुल (Guggul): यह जोड़ों के अंदर पत्थर की तरह जमे हुए विषैले टॉक्सिन्स को खुरच कर बाहर निकालने में सबसे ज़्यादा माहिर है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह घुटने और जोड़ों के आस-पास की सूख चुकी माँसपेशियों को दोबारा ताक़त देता है और शरीर की भयंकर कमज़ोरी दूर करता है।
  • निर्गुंडी (Nirgundi): यह आयुर्वेद में भयंकर वात और सुबह की जकड़न को ख़त्म करने वाली सबसे अचूक जड़ी-बूटी है। इसके पत्तों का लेप जादू-सा असर करता है।

आयुर्वेदिक थेरेपी कैसे काम करती है?

जब जोड़ों में दर्द सालों पुराना हो और हड्डियाँ सूख चुकी हों, तो खाने वाली दवाइयों के साथ-साथ ये प्राचीन पंचकर्म विधियाँ सीधे जोड़ के अंदर तक जाकर काम करती हैं।

  • वालुका स्वेद (Valuka Sweda): पुराने आमवात में गर्म तेल की मालिश मना होती है। इसमें गर्म रेत की पोटली बनाकर जोड़ों की गहरी सूखी सिकाई की जाती है। यह जमे हुए आम को तुरंत पिघलाती है।
  • जानु/ग्रीवा/कटि बस्ती: अगर दर्द ऑस्टियोआर्थराइटिस का है, तो जोड़ों पर ख़ास रिंग बनाकर औषधीय गर्म तेल रोककर रखा जाता है। यह सूखी हड्डियों को तुरंत नई ग्रीस देता है।
  • विरेचन (Virechana): आंतों और लिवर की सालों पुरानी गंदगी और एसिड को गहराई से साफ़ करने के लिए औषधीय दस्त लगाए जाते हैं।

हड्डियों और वात संतुलन के लिए डाइट प्लान क्या हो?

आप जो खाते हैं, वही आपके जोड़ों की सूजन और चिकनाई को तय करता है। पुराने 'आम' को ख़त्म करने के लिए एक बहुत ही अनुशासित, हल्की और वात-शामक डाइट लेना ज़रूरी है।

पावर फूड्स

  • लहसुन, अदरक और हल्दी: ये सालों पुरानी सूजन और वात को ख़त्म करने वाले सबसे ताक़तवर प्राकृतिक मसाले हैं।
  • गाय का शुद्ध घी: (केवल तब जब 'आम' पच जाए) यह सूखी और भुरभुरी हड्डियों को अंदर से तर करता है और नई गद्दी बनाता है।
  • गर्म पानी और जीरा: सुबह उठकर गर्म पानी पीने से आंतें साफ़ होती हैं और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं।
  • पाचन सहायक: पेट को बिल्कुल दुरुस्त रखना सबसे ज़रूरी है। त्रिफला के फ़ायदे जानकर आप अपने पेट को पूरी तरह साफ़ रख सकते हैं।

इन चीज़ों से बिल्कुल बचें

  • खट्टी और फर्मेंटेड चीज़ें: पुराना दही, इमली, सिरका और अचार। ये शरीर में पित्त और सूजन को एकदम से आग की तरह बढ़ा देते हैं।
  • भारी वातवर्धक दालें: राजमा, छोले और उड़द की दाल पचने में बहुत भारी होते हैं। इनसे गंभीर पाचन संबंधी समस्याएँ होती हैं जो पुराने जोड़ों को और ज़्यादा सुखाती हैं।
  • ठंडी और बासी चीज़ें: फ़्रिज का ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक या बासी खाना शरीर के वात को तुरंत भड़काकर जोड़ों को पत्थर जैसा सख़्त कर देते हैं।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद कोई स्टेरॉयड का इंजेक्शन नहीं है जो 1 घंटे में पुराने दर्द को सुन्न कर दे। 10-15 साल पुरानी बीमारी को शरीर की गहराई से साफ़ होने और हड्डियों को नई ताक़त मिलने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ़्ते: आपकी पाचन शक्ति मज़बूत होगी। पेट में गैस और भारीपन ख़त्म हो जाएगा। सुबह की घंटों वाली जकड़न का समय कम होने लगेगा।
  • 1 से 3 महीने तक: जोड़ों की सूजन और लालिमा काफ़ी कम हो जाएगी। शरीर का भारीपन कम होकर एक प्राकृतिक वज़न घटाने का हल्कापन भी महसूस होगा, जिससे घुटनों पर दबाव घटेगा।
  • 3 से 6 महीने (या अधिक) तक: आपके जोड़ अंदर से पूरी तरह साफ़ और ताक़तवर बन जाएँगे। रुकी हुई चाल फिर से शुरू होगी और आप अपनी भारी एलोपैथिक दवाइयों को धीरे-धीरे छोड़ सकेंगे।

आप किन परिणामों की उम्मीद कर सकते हैं?

अगर आप पूरी ईमानदारी और अनुशासन से हमारे आयुर्वेदिक इलाज और वात-शामक डाइट को फॉलो करते हैं, तो आप अपने शरीर में बहुत ही शानदार और स्थायी बदलाव महसूस करेंगे।

  • सालों पुराने उस भयंकर और चुभने वाले दर्द, सूजन और जकड़न से हमेशा के लिए पक्का छुटकारा।
  • जोड़ों के मुड़ने और चलने-फिरने में नई आज़ादी और खोया हुआ लचीलापन वापस आना।
  • रोज़ भारी स्टेरॉयड और पेनकिलर खाने के ख़ौफ़ और उनके साइड-इफेक्ट्स से हमेशा के लिए आज़ादी।
  • बिना किसी डर के एक तनाव से राहत भरा और बिल्कुल आत्मनिर्भर जीवन जीना।
  • बीमारी के कारण जोड़ों के और ज़्यादा टेढ़े होने और डरावनी सर्जरी के जोखिम का पूरी तरह टल जाना।

मरीज़ों के अनुभव

मेरे घुटनों और पीठ में बहुत तेज़ जोड़ों का दर्द था। मैं लंबे समय तक खड़ी नहीं रह पाती थी, और सीढ़ियाँ चढ़ना मेरे लिए बहुत मुश्किल होता जा रहा था। डॉक्टरों ने मुझे दर्द की दवाइयाँ दीं, लेकिन वे प्रभावी साबित नहीं हो रही थीं। इसलिए मैंने बेहतर विकल्पों की तलाश शुरू की, और एक दिन एक मित्र ने जिवा आयुर्वेद की सलाह दी। जिवा में उपचार शुरू करने के बाद जो बदलाव आया है, उसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। अब दर्द काफी कम हो गया है।

राज बाला शर्मा

फरीदाबाद

आधुनिक बनाम आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आप अपनी इस पुरानी बीमारी के साथ कैसा बर्ताव कर रहे हैं। भारी दवाइयाँ खाने और आयुर्वेद में ज़मीन-आसमान का अंतर है।

  • आधुनिक चिकित्सा: यह अक्सर सिर्फ़ इम्यून सिस्टम को दबाने और दर्द को स्टेरॉयड से सुन्न करने पर काम करती है। ये दवाइयाँ दर्द को कुछ समय के लिए धोखा देती हैं, लेकिन अंदर पेट में सालों से बन रही गंदगी को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करती हैं। दवा छोड़ते ही बीमारी दुगनी ताक़त से वापस आ जाती है और हड्डियाँ पूरी तरह खोखली हो जाती हैं।
  • आयुर्वेद: यह आपके शरीर को एक ऐसी मशीन मानता है जो ख़ुद की सफ़ाई कर सकती है। आयुर्वेद सबसे पहले बुझी हुई पेट की अग्नि को तेज़ करता है। फिर वात को शांत करता है और जोड़ों में सालों से जमी गंदगी को 'वालुका स्वेद' जैसी शक्तिशाली थेरेपी से बाहर खींच लेता है। इससे दर्द हमेशा के लिए चला जाता है और जोड़ फिर से लचीले हो जाते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

पुराने गठिया को अब और ज़्यादा नज़रअंदाज़ करना ख़तरनाक हो सकता है। शरीर के कुछ बहुत ही गंभीर संकेतों को तुरंत पहचानना ज़रूरी है।

  • सूजन और जकड़न इतनी ज़्यादा हो जाए कि आप बिना किसी सहारे के बिस्तर से उठ भी न पाएँ।
  • आपके जोड़ों का आकार पूरी तरह बदलने लगे और उँगलियाँ एकदम से टेढ़ी होने लगें।
  • गठिया के साथ-साथ आपको बार-बार तेज़ बुख़ार, भयंकर वज़न कम होना और छाती में दर्द रहने लगे।
  • गठिया का असर आपकी आँखों पर पड़ने लगे (आँखें लाल रहना और रोशनी कम होना)।
  • सालों से चल रहे स्टेरॉयड के कारण आपकी हड्डियाँ बहुत ज़्यादा कमज़ोर महसूस हों और हल्का सा गिरने पर फ्रैक्चर हो जाए।

निष्कर्ष

सालों पुराने गठिया के साथ जीना बहुत ही दर्दनाक, निराशाजनक और लाचारी से भरा अनुभव है। ऐसा लगता है जैसे आपने अपने ही शरीर में हार मान ली है और पेनकिलर्स को अपना भगवान मान लिया है। लेकिन रोज़ भारी स्टेरॉयड खाकर अपने लिवर और किडनी को बर्बाद करना इस बीमारी का कोई स्थायी समाधान नहीं है। आपका शरीर आपसे चीख कर कह रहा है कि आपका हाज़मा ख़राब है और जोड़ों में 'आम' (गंदगी) और वात पत्थर की तरह जम गया है। अगर आप सिर्फ़ दर्द को गोलियों से सुन्न करते रहेंगे, तो हड्डियाँ पूरी तरह से गलकर टेढ़ी हो जाएँगी। आयुर्वेद अपनाकर आप अपनी पाचन अग्नि को प्राकृतिक रूप से तेज़ कर सकते हैं। अपने शरीर को अंदर से डिटॉक्स करें और वात को शांत करें। जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें और हमेशा के लिए एक आत्मनिर्भर, स्वस्थ और दर्द-मुक्त शरीर का आनंद लें। यह बीमारी पुरानी ज़रूर है, लेकिन आयुर्वेद से इसे जड़ से ठीक करना पूरी तरह संभव है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, बिल्कुल संभव है। आयुर्वेद बीमारी को सिर्फ़ दर्द से नहीं आँकता, बल्कि शरीर में जमा 'आम' से मापता है। पंचकर्म और जड़ी-बूटियों के ज़रिए सालों पुरानी गंदगी को भी पिघलाकर बाहर निकाला जा सकता है, जिससे बीमारी जड़ से ख़त्म हो जाती है।

जो हड्डियाँ पूरी तरह गल कर अपनी जगह से हट चुकी हैं, उन्हें बिना सर्जरी के बिल्कुल सीधा करना मुश्किल होता है। लेकिन आयुर्वेद उस दर्द, सूजन और बीमारी के आगे बढ़ने की प्रक्रिया को पूरी तरह रोक देता है, जिससे बाक़ी शरीर सुरक्षित रहता है और आप सामान्य जीवन जी पाते हैं।

नहीं! सालों से खाए जा रहे स्टेरॉयड को अचानक छोड़ने से शरीर में भयंकर 'रिबाउंड फ्लेयर-अप' आ सकता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर जड़ी-बूटियों से शरीर को अंदर से मज़बूत करते हैं, और फिर धीरे-धीरे आपकी एलोपैथिक दवाओं की डोज़ कम कराते हैं जब तक वो पूरी तरह छूट न जाएँ।

आयुर्वेद के अनुसार पुराना दही, छाछ और खट्टी चीज़ें वात और पित्त को तुरंत भड़का देती हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह बंद करना चाहिए। लेकिन हल्दी या सोंठ डालकर उबाला हुआ गर्म दूध वात को शांत करता है और कैल्शियम देता है, इसलिए यह फ़ायदेमंद है।

यह एक मिथक है। जो बीमारी 15 साल पुरानी है, उसे शरीर से बाहर निकालने में 3 से 6 महीने का समय लगता है। लेकिन दर्द और सुबह की जकड़न में आपको आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से कुछ ही हफ़्तों में बहुत अच्छा आराम महसूस होने लगता है।

बिल्कुल नहीं! अगर आपका पुराना गठिया 'आमवात' है जिसमें जोड़ों में सूजन और गर्माहट है, तो तेल की मालिश दर्द को भयंकर रूप से बढ़ा देगी। ऐसे में सिर्फ़ सूखी रेत की पोटली से सिकाई करनी चाहिए।

सौ प्रतिशत। शरीर का हर एक किलो अतिरिक्त वज़न आपके कमज़ोर घुटनों और कूल्हों पर चार किलो का एक्स्ट्रा दबाव डालता है। प्राकृतिक रूप से वज़न कम करने से पुराने गठिया के दर्द में बहुत भारी राहत मिलती है।

हाँ, लेकिन बहुत सावधानी से। जब जोड़ों में भयंकर सूजन और लालिमा हो, तो आराम करना चाहिए। जब सूजन कम हो जाए, तो डॉक्टर की सलाह से बहुत हल्के सूक्ष्म व्यायाम करने चाहिए ताकि जोड़ हमेशा के लिए जाम न हो जाएँ।

गुग्गुल एक बहुत ही शक्तिशाली आयुर्वेदिक राल है। इसमें पुराने से पुराने पत्थर जैसे जमे हुए 'आम' को खुरच कर बाहर निकालने और जोड़ों की सूजन को पिघलाने की जादुई क्षमता होती है।

आयुर्वेद में इसे 'लंघन' कहा जाता है। आमवात के मरीज़ों में अगर बहुत ज़्यादा टॉक्सिन जमा हो, तो हल्का उपवास (जैसे गर्म पानी और सूप पर रहना) पाचन अग्नि को बढ़ाता है और शरीर ख़ुद अंदर की गंदगी को पचाने लगता है, जिससे दर्द में जादुई आराम मिलता है।

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