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बालों का झड़ना: क्या महंगे शैम्पू से ज्यादा असरदार 'नस्य' (Nasal Oil) हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

महंगे केमिकल वाले शैम्पू Shampoos, हेयर मास्क और सीरम का इस्तेमाल बालों के झड़ने Hair Fall में काफ़ी आम है। ये उत्पाद बालों को ऊपर से मुलायम और चमकदार बना देते हैं, जिससे लगता है कि बाल स्वस्थ हो गए हैं। लेकिन शैम्पू बदलना छोड़ते ही बाल फिर से रूखे होकर गुच्छों में झड़ने लगते हैं। इसका सीधा कारण यह है कि बाहरी शैम्पू बालों की जड़ों Follicles और शरीर के अंदर चल रहे हार्मोनल या 'वात-पित्त' असंतुलन को ठीक नहीं कर सकते। आयुर्वेद के अनुसार, नाक के ज़रिए डाला जाने वाला 'नस्य' Nasal Oil सीधे मस्तिष्क और बालों की जड़ों तक पहुँचकर उन्हें ताक़त देता है, जो कोई शैम्पू नहीं कर सकता।

बालों का झड़ना Hair Loss और स्कैल्प क्या है?

बालों का गिरना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन जब सिर पर बाल तेज़ी से पतले होने लगें और जड़ों से उखड़ने लगें, तो यह शरीर के अंदरूनी तंत्र Internal system के कमज़ोर होने का संकेत है। बालों की जड़ें सिर की त्वचा Scalp की गहराई Dermis में होती हैं, जहाँ उन्हें ख़ून के ज़रिए पोषण Nutrition मिलता है। जब भारी तनाव, ख़राब पाचन या हार्मोनल गड़बड़ी के कारण शरीर में 'पित्त' गर्मी और 'वात' हवा/रूखापन भड़कता है, तो बालों की जड़ों तक ख़ून का दौरा और पोषण पहुँचना बंद हो जाता है। हम हज़ारों रुपये के शैम्पू लगाते हैं, लेकिन शैम्पू केवल 2 मिनट के लिए त्वचा के ऊपर रहता है। यह गंदगी साफ़ कर सकता है, लेकिन जड़ों के अंदर चल रहे 'सूखेपन' और 'गर्मी' को ख़त्म नहीं कर सकता।

बाल झड़ने की बीमारियाँ मुख्य रूप से कितने प्रकार की होती हैं?

आधुनिक चिकित्सा में बालों के झड़ने से जुड़ी मुख्य रूप से ये स्थितियाँ देखी जाती हैं

  • एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया  यह 'पैटर्न बाल्डनेस' है। इसमें पुरुष हार्मोन DHT बढ़ने के कारण माथे और सिर के बीच के बाल झड़ने लगते हैं।
  • टेलोजेन एफ्लुवियम  भयंकर मानसिक तनाव, लंबी बीमारी, टाइफाइड या गर्भावस्था के बाद अचानक बहुत ज़्यादा बालों का झड़ना।
  • एलोपेसिया एरीटा  यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जहाँ शरीर का इम्यून सिस्टम ही बालों की जड़ों पर हमला कर देता है और गोल सिक्कों के आकार में बाल उड़ जाते हैं।
  • डैंड्रफ और सिबोरहाइक डर्मेटाइटिस  सिर की त्वचा पर फंगल इन्फेक्शन और भयंकर रूसी होना, जिससे जड़ें कमज़ोर होकर टूटती हैं।

बाल झड़ने के मुख्य लक्षण और संकेत

जब शरीर अंदर से बालों को पोषण देना बंद कर देता है, तो ये ख़ास संकेत दिखाई देते हैं

  • गुच्छों में बाल टूटना सुबह तकिये पर, नहाते समय या कंघी करते समय बालों का भारी मात्रा में गिरना।
  • मांग का चौड़ा होना महिलाओं में सिर के बीच के हिस्से से बालों का पतला होना और स्कैल्प खोपड़ी का साफ़ दिखाई देना।
  • बालों का समय से पहले सफ़ेद होना बालों के प्राकृतिक रंग Melanin का ख़त्म होना, जो शरीर में भयंकर पित्त गर्मी बढ़ने का संकेत है।
  • स्कैल्प में दर्द या डैंड्रफ बालों की जड़ों में हल्का दर्द महसूस होना या बहुत ज़्यादा खुजली व पपड़ी छूटना।

महंगे शैम्पू असरदार क्यों नहीं होते? – मुख्य कारण

  • सतही असर Superficial Effect शैम्पू सिर्फ़ बाल के बाहरी आवरण Cuticle को साफ़ और चिकना करता है। यह रोमछिद्रों के अंदर 4 मिलीमीटर नीचे बैठी बालों की जड़ Hair bulb तक नहीं पहुँच पाता।
  • केमिकल्स का जाल ज़्यादा झाग बनाने वाले सल्फेट्स SLS/SLES और चमक देने वाले पैराबेंस Parabens असल में स्कैल्प की प्राकृतिक नमी को छीन लेते हैं, जिससे बाल और ज़्यादा रूखे व बेजान हो जाते हैं।
  • अंदरूनी कारण का इलाज नहीं अगर आपके बाल पीसीओडी PCOD, थायरॉइड या तनाव की वजह से झड़ रहे हैं, तो बाहर से लगाया गया कोई भी शैम्पू आपके हार्मोन्स को ठीक नहीं कर सकता।

बाल झड़ने के जोखिम और जटिलताएँ क्या हैं?

  • बालों की समस्या को अगर सिर्फ़ कॉस्मेटिक इलाज के सहारे छोड़ दिया जाए, तो यह कई जटिलताओं का कारण बन सकता है
  • स्थायी गंजापन Permanent Baldness बालों की जड़ें Follicles जब सालों तक बिना पोषण के रहती हैं, तो वे सिकुड़कर मर जाती हैं। इसके बाद वहाँ दोबारा बाल आना असंभव हो जाता है।
  • मानसिक अवसाद Depression कम उम्र में बाल झड़ने से इंसान का आत्मविश्वास पूरी तरह गिर जाता है, और वह गहरे डिप्रेशन का शिकार हो सकता है।
  • स्कैल्प का इन्फेक्शन तेज़ केमिकल वाले हेयर उत्पादों के ज़्यादा इस्तेमाल से भयंकर फंगल इन्फेक्शन हो सकता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण 'नस्य' Nasya क्या है और बालों के लिए कैसे काम करता है?

आयुर्वेद का एक बहुत ही प्रसिद्ध सिद्धांत है—नासा हि शिरसो द्वारम् यानी नाक, मस्तिष्क और सिर का मुख्य दरवाज़ा है।

जब आप कोई शैम्पू या तेल सिर पर लगाते हैं, तो खोपड़ी की मोटी हड्डी और त्वचा उसे आसानी से अंदर जाने नहीं देती। लेकिन नाक के अंदर की श्लेष्मा झिल्ली Mucous membrane और तंत्रिकाएं Olfactory nerves सीधे मस्तिष्क Brain और सिर की रक्त वाहिकाओं Blood vessels से जुड़ी होती हैं।

जब औषधीय तेल जैसे अणु तेल या षडबिंदु तेल की 2-2 बूँदें नाक में डाली जाती हैं जिसे 'नस्य' कहते हैं, तो यह तेल सीधे सिर के अंदरूनी हिस्से में पहुँचता है। आयुर्वेद के अनुसार बाल झड़ने खालित्य का मुख्य कारण सिर में भड़का हुआ 'पित्त' गर्मी और 'वात' सूखापन है। नस्य इस गर्मी को शांत करता है, मस्तिष्क की नसों में रक्त संचार Blood flow बढ़ाता है और बालों की जड़ों को अंदर से वह पोषण Nutrition देता है जो कोई शैम्पू नहीं दे सकता। इसके साथ ही, यह तनाव और नींद की कमी को दूर करता है जो बाल झड़ने का सबसे बड़ा कारण हैं।

बालों को जड़ से मज़बूत बनाने वाली महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में पित्त को शांत करने, 'रस धातु' को सुधारने और बालों की जड़ों में जान फूँकने के लिए ये 4 जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं

  • भृंगराज Bhringraj इसे 'केशराज' बालों का राजा कहा जाता है। यह लिवर को ताक़त देता है, रक्त को शुद्ध करता है और बालों को सफ़ेद होने व झड़ने से रोकता है।
  • आंवला Amalaki आंवला विटामिन सी का प्राकृतिक स्रोत है। यह शरीर की अत्यधिक गर्मी पित्त को तुरंत शांत करता है और बालों की जड़ों में ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ाता है।
  • अश्वगंधा Ashwagandha भयंकर तनाव Cortisol बालों का सबसे बड़ा दुश्मन है। अश्वगंधा नर्वस सिस्टम को शांत करती है और तनाव के कारण झड़ने वाले बालों को रोकती है।
  • शतावरी महिलाओं में पीसीओएस या मेनोपॉज़ के कारण होने वाले बाल झड़ने में शतावरी हार्मोन्स को प्राकृतिक रूप से संतुलित करती है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म शरीर की अंदरूनी सफ़ाई और नस्य

बालों को स्थाई समाधान देने के लिए पंचकर्म के ज़रिए शरीर और सिर की सफ़ाई सबसे ज़्यादा ज़रूरी है

  • नस्य Nasya बालों के लिए यह सबसे चमत्कारी चिकित्सा है। रोज़ाना या पंचकर्म के दौरान औषधीय तेल की बूँदें नाक में डाली जाती हैं। यह सीधे रोमछिद्रों को ताक़त देता है और बालों का गिरना तुरंत रोकता है।
  • शिरोधारा Shirodhara भयंकर तनाव, एंग्ज़ायटी और अनिद्रा Sleeplessness दूर करने के लिए माथे पर औषधीय तेल या छाछ की लगातार धारा गिराई जाती है। यह दिमाग़ को शांत करता है।
  • विरेचन Virechana शरीर में बढ़े हुए पित्त गर्मी को मल के ज़रिए बाहर निकालने की यह सबसे अच्छी प्रक्रिया है। इससे लिवर साफ़ होता है और रक्त की शुद्धि होती है, जिससे बालों को शुद्ध ख़ून मिलने लगता है।

बालों के रोगी के लिए शुद्ध आहार

रस धातु को मज़बूत करने और वात-पित्त को शांत करने के लिए हमेशा हल्का और पोषण से भरपूर आहार चुनना महत्वपूर्ण है

  1. क्या खाएँ?
  • करी पत्ता और आंवला रोज़ सुबह खाली पेट ताज़े आंवले का रस पिएं और भोजन में करी पत्ते Curry leaves का प्रयोग बहुत ज़्यादा करें। यह आयरन और कैल्शियम का बेहतरीन स्रोत है।
  • बीज और मेवे Seeds & Nuts रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, अलसी Flaxseeds और कद्दू के बीज खाएं। इनमें ओमेगा-3 और ज़रूरी मिनरल्स होते हैं।
  • लौकी, तरोई और नारियल पानी ये चीज़ें शरीर को ठंडक देती हैं, पित्त को शांत करती हैं और बालों की जड़ों को हाइड्रेटेड रखती हैं।

क्या न खाएँ?

  • अत्यधिक खट्टा और नमकीन बहुत ज़्यादा नमक, इमली, अचार और खट्टी चीज़ें पित्त को भड़काती हैं और बालों की जड़ों को कमज़ोर कर उन्हें सफ़ेद व बेजान बना देती हैं पालित्य।
  • जंक फ़ूड और मैदा पैकेटबंद चीज़ें और बिस्किट पेट में 'आम' गंदगी बनाते हैं, जिससे पोषण ख़ून तक नहीं पहुँच पाता।
  • कैफीन चाय-कॉफ़ी ज़्यादा कॉफ़ी या चाय पीने से शरीर में खुश्की वात और गर्मी पित्त दोनों बढ़ते हैं, जो बालों के लिए ज़हर के समान हैं।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में बाल झड़ने का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ की स्थिति और बालों की जड़ों के हिसाब से किया जाता है

  • बीमारी और शरीर की स्थिति ठीक होने का वक़्त इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितने सालों से केमिकल लगा रहे हैं, आपका तनाव स्तर क्या है और आपकी जठराग्नि कितनी कमज़ोर है।
  • हल्की समस्या में सुधार अगर बाल झड़ना हाल ही में शुरू हुआ है बुख़ार या तनाव के बाद, तो नस्य और आयुर्वेदिक दवाओं से आमतौर पर 4 से 6 हफ़्तों में ही बालों का गिरना 80-90% तक रुक जाता है।
  • पुरानी बीमारी का समय अगर हार्मोनल असंतुलन सालों पुराना है और जड़ें बहुत कमज़ोर हो गई हैं, तो शरीर के हार्मोन्स को संतुलित होने और नए बालों की ग्रोथ शुरू होने में 3 से 6 महीने या उससे ज़्यादा समय भी लग सकता है।
  • स्थायी परिणाम मरीज़ अगर 'नस्य' की आदत डाल लेता है, अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करता है और तनाव कम रखता है, तो बालों की जड़ें प्राकृतिक रूप से मज़बूत हो जाती हैं और उम्र भर महंगे शैम्पू या लोशन लगाने की मजबूरी ख़त्म हो जाती है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मुझे वर्षों तक गंभीर बाल झड़ने की समस्या रही। शैम्पू और तेल कुछ भी नहीं कर पाए। मैंने आयुर्वेदिक उपचार लेने का सोचा लेकिन मैं इसके बारे में निश्चित नहीं था। फिर एक दिन मैंने डॉ. चौहान का टीवी प्रोग्राम देखा जो बालों की समस्याओं पर था और मुझे लगा कि आयुर्वेद वास्तव में फर्क डाल सकता है, और वास्तव में उसने किया! अब मैं हर सुबह अपने तकिए पर बाल नहीं देखती। जिवा का धन्यवाद।

सुनीता तंवर

फरीदाबाद

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

तुलना का आधार आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक चिकित्सा
उपचार का दृष्टिकोण शैम्पू, सीरम Minoxidil और विटामिन से लक्षणों को नियंत्रित करना बीमारी की जड़ पर काम करना
कार्य करने का तरीका स्कैल्प को ऊपर से साफ़ करना और बालों की ग्रोथ को अस्थायी रूप से बढ़ाना शरीर को अंदर से पोषण और संतुलन देना
मूल कारण पर प्रभाव हार्मोनल असंतुलन, तनाव और पित्त को नहीं सुधारता पित्त-वात, रस धातु और ग्रंथियों को संतुलित करता है
उपचार विधियाँ केमिकल शैम्पू, सीरम और सप्लीमेंट्स नस्य नाक में तेल और आयुर्वेदिक उपचार
दुष्प्रभाव उपयोग बंद करते ही बालों का तेज़ी से झड़ना सामान्यतः सुरक्षित और प्राकृतिक सुधार
परिणाम अस्थायी सुधार बालों की जड़ें प्राकृतिक रूप से मज़बूत
समय जल्दी असर थोड़ा समय लगता है, लेकिन स्थायी लाभ

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

बाल झड़ने की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि

  • सिर पर अचानक गोल सिक्कों के आकार में बाल ग़ायब होने लगें Alopecia Areata।
  • बाल झड़ने के साथ-साथ स्कैल्प पर भयंकर लालिमा, खुजली या मवाद वाले दाने हो जाएँ।
  • बालों के साथ-साथ भौंहों Eyebrows या पलकों के बाल भी गिरने लगें।
  • बाल झड़ने के साथ अचानक वज़न तेज़ी से बढ़ने लगे और बहुत ज़्यादा थकान रहे हार्मोनल संकेत।
  • 10 अलग-अलग शैम्पू बदलने के बाद भी बाल झड़ना बिल्कुल कम न हो रहा हो।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से हज़ारों रुपये के शैम्पू और सीरम लगाने के बाद भी बालों का लगातार झड़ना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि समस्या स्कैल्प के बाहर नहीं, बल्कि आपके शरीर के अंदर है। भारी मानसिक तनाव, जंक फ़ूड और रात में जागने से शरीर की गर्मी पित्त बढ़ जाती है जो बालों की जड़ों को जला देती है। सिर्फ़ बाहरी झाग शैम्पू बनाने से जड़ें अंदर से खोखली ही रहती हैं। इलाज में 'नस्य' नाक में तेल डालना सबसे अहम है, जो मस्तिष्क का दरवाज़ा खोलकर सीधा जड़ों को पोषण देता है। इसके साथ ही जठराग्नि को बढ़ाना, पित्त को शांत करना और रक्त की सफाई आवश्यक है। इसमें तनाव मुक्त रहना, आंवला खाना, भृंगराज व अश्वगंधा का इस्तेमाल करना और शिरोधारा जैसी दिनचर्या अपनाना शामिल है, जिससे हार्मोन्स को प्राकृतिक रूप से संतुलित कर बालों को हमेशा के लिए ताक़त दी जा सके।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नस्य एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जिसमें नाक के ज़रिए औषधीय तेल की बूँदें डाली जाती हैं। चूँकि नाक मस्तिष्क का द्वार है, यह तेल सीधे सिर के अंदरूनी हिस्से में जाकर बालों की जड़ों में रक्त संचार बढ़ाता है और वात-पित्त को शांत करता है।

नहीं। शैम्पू केवल सिर की त्वचा से धूल और बाहरी तेल (गंदगी) को साफ़ करने का काम करते हैं। वे बालों की गहराई (Follicles) में जाकर हार्मोनल या पोषण की कमी को दूर नहीं कर सकते।

आयुर्वेद में 'अणु तेल', 'षडबिंदु तेल' या घर का शुद्ध हल्का गुनगुना गाय का घी नस्य के लिए सबसे उत्तम माना गया है।

हाँ, रोज़ाना केमिकल वाले तेज़ शैम्पू लगाने से स्कैल्प की प्राकृतिक नमी और तेल (Sebum) ख़त्म हो जाता है, जिससे बाल रूखे होकर और ज़्यादा टूटते हैं।

बिल्कुल। नींद की कमी और तनाव से शरीर में वात और पित्त दोनों भड़कते हैं, जो सीधा सिर की ओर जाकर बालों की जड़ों को सुखा देते हैं।

हाँ, आयुर्वेद स्पष्ट कहता है कि अत्यधिक नमक (लवण रस) खाने से शरीर में पित्त दोष बढ़ता है, जो समय से पहले बालों के झड़ने और सफ़ेद होने (खालित्य-पालित्य) का बड़ा कारण है।

थायरॉइड में मेटाबॉलिज़्म धीमा होने से बालों को पोषण नहीं मिलता। लेकिन अगर थायरॉइड को आयुर्वेदिक औषधियों और नस्य से संतुलित कर लिया जाए, तो बाल वापस घने हो जाते हैं।

हाँ, डैंड्रफ स्कैल्प के रोमछिद्रों को बंद कर देता है और फंगल इन्फेक्शन पैदा करता है, जिससे बालों की जड़ें कमज़ोर होकर टूटने लगती हैं।

हाँ, रोज़ाना बालों को बहुत कसकर (Tight ponytail) बाँधने से जड़ों पर लगातार खिंचाव पड़ता है, जिससे ट्रैक्शन एलोपेसिया (Traction Alopecia) हो जाता है और बाल हमेशा के लिए जड़ से उखड़ जाते हैं।

नस्य दिमाग़ को शांत कर हार्मोन्स को संतुलित करने में बहुत मदद करता है। इसके साथ शतावरी और कांचनार जैसी औषधियाँ लेने से पीसीओडी में बाल झड़ना पूरी तरह रुक जाता है।

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