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Period से पहले Acne बढ़ जाते हैं — Hormonal Acne का इलाज

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 26 May, 2026
  • category-iconUpdated on 26 May, 2026
  • category-iconWomen's Health
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बर्थ कंट्रोल पिल्स और सैलिसिलिक एसिड का इस्तेमाल पीरियड से पहले निकलने वाले हार्मोनल एक्ने (Hormonal Acne) को दबाने के लिए काफी आम है। ये बाहरी क्रीम और दवाएँ त्वचा का तेल (Sebum) कम कर देती हैं या आर्टिफिशल हॉर्मोन्स से नेचुरल साइकिल बदल देती हैं, जिससे त्वचा साफ लगती है। लेकिन पिल्स छोड़ते ही फिर से दर्दनाक मुँहासे और दाग-धब्बे पहले से बड़े रूप में वापस आ जाते हैं। इसके मुख्य कारण पीसीओएस (PCOS), तनाव, या आयुर्वेद के अनुसार शरीर में मौजूद अशुद्ध रक्त और वात-पित्त का बिगड़ना है। इस बात को समझना ज़रूरी है, ताकि सही इलाज से चेहरे की चमक प्राकृतिक रूप से बनी रहे।

Period से पहले निकलने वाले Hormonal Acne क्या हैं?

हार्मोनल एक्ने एक ऐसी स्थिति है, जहाँ महिलाओं के शरीर में मासिक धर्म (Periods) शुरू होने से कुछ दिन पहले हॉर्मोन्स के उतार-चढ़ाव के कारण त्वचा के रोमछिद्र (Pores) ब्लॉक हो जाते हैं। एक सामान्य मासिक चक्र में पीरियड से लगभग एक हफ्ता पहले एस्ट्रोजन (Estrogen) का स्तर गिर जाता है और प्रोजेस्टेरोन या टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) का स्तर बढ़ जाता है। इस हार्मोनल बदलाव की वजह से त्वचा की ग्रंथियाँ (Sebaceous glands) बहुत ज़्यादा तेल बनाने लगती हैं। यह तेल त्वचा की मृत कोशिकाओं (Dead cells) और बैक्टीरिया के साथ मिलकर रोमछिद्रों को बंद कर देता है, जिससे त्वचा पर दर्दनाक सूजन और मुँहासे (Acne) निकलने लगते हैं। आमतौर पर लड़कियाँ और महिलाएँ इसका शिकार खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड, तनाव या जेनेटिक्स के कारण होती हैं। एंटीबायोटिक्स या क्रीम लगाने पर कुछ समय के लिए आराम मिल जाता है, लेकिन ये शरीर के अंदर मौजूद उस पित्त दोष और रक्त की अशुद्धि को ठीक नहीं करते जिसके कारण मुँहासे बार-बार लौटते हैं।

Period से पहले निकलने वाले Hormonal Acne के लक्षण और संकेत

आम मुँहासों और हार्मोनल एक्ने में काफी फर्क होता है। इसके मुख्य लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं:

  • जगह (Location): हार्मोनल एक्ने मुख्य रूप से चेहरे के निचले हिस्से यानी ठुड्डी (Chin), जॉलाइन (Jawline) और गर्दन के आसपास ज़्यादा निकलते हैं।
  • समय का चक्र: ये मुँहासे हर महीने पीरियड शुरू होने से ठीक 5 से 7 दिन पहले अचानक भड़क उठते हैं।
  • गहरे और दर्दनाक दाने (Cystic Acne): ये त्वचा की ऊपरी सतह पर छोटे दाने नहीं होते, बल्कि त्वचा के बहुत अंदर गहरी गाँठों (Cysts) के रूप में होते हैं, जिन्हें छूने पर भयंकर दर्द होता है।
  • चेहरे पर सूजन और लालिमा: दाने के आसपास की त्वचा काफी लाल और सूजी हुई रहती है।
  • दवा का असर खत्म होते ही वापसी: बाहरी क्रीम का असर खत्म होते ही अगले महीने पीरियड से पहले दाने फिर से उसी जगह पर लौट आते हैं।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

Period से पहले Hormonal Acne बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?

हार्मोनल एक्ने के पीछे सिर्फ बाहरी धूल-मिट्टी कारण नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रहे कई बड़े बदलाव ज़िम्मेदार होते हैं। मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

  • हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance): एण्ड्रोजन (Androgen) हॉर्मोन का बढ़ना त्वचा में सीबम (तेल) का उत्पादन बहुत ज़्यादा बढ़ा देता है।
  • पीसीओडी / पीसीओएस (PCOD/PCOS): जिन महिलाओं को पीसीओडी की समस्या होती है, उनके शरीर में पुरुष हॉर्मोन्स (Testosterone) बढ़ने लगते हैं, जिससे चेहरे पर बाल और गहरे मुँहासे आने लगते हैं।
  • रक्त और पित्त की अशुद्धि (Ayurvedic Cause): गलत खान-पान जैसे बहुत ज़्यादा मसालेदार और जंक फूड खाने से शरीर में टॉक्सिन्स (आम) बनता है और पित्त दोष बिगड़कर रक्त को अशुद्ध कर देता है।
  • अत्यधिक मानसिक तनाव (Stress): स्ट्रेस से शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) हॉर्मोन बढ़ता है, जो सीधे तौर पर मुँहासों को ट्रिगर करता है।
  • खराब पाचन और कब्ज़: पेट साफ न होना और पाचन कमज़ोर होने से शरीर की गंदगी बाहर नहीं निकल पाती और चेहरे पर दानों के रूप में दिखाई देती है।

Hormonal Acne के जोखिम और जटिलताएँ क्या हैं?

हार्मोनल एक्ने की बीमारी को अगर अनदेखा किया जाए या सिर्फ बाहरी क्रीम से दबाया जाए, तो यह कई जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • चेहरे पर स्थायी दाग-धब्बे (Hyperpigmentation): बड़े मुँहासे जब सूखते हैं, तो पीछे गहरे काले या भूरे दाग छोड़ जाते हैं जो आसानी से नहीं जाते।
  • त्वचा में गड्ढे पड़ना (Acne Scars/Pitting): सिस्टिक एक्ने त्वचा के अंदरूनी टिशू को डैमेज कर देता है, जिससे चेहरे पर हमेशा के लिए गड्ढे बन जाते हैं।
  • मानसिक तनाव और डिप्रेशन: चेहरे की खूबसूरती खराब होने के डर से लड़कियों का आत्मविश्वास कम हो जाता है और वे सोशल एंग्जायटी (Social Anxiety) का शिकार हो जाती हैं।
  • दवाओं के साइड इफेक्ट्स: लंबे समय तक बर्थ कंट्रोल पिल्स खाने से वज़न बढ़ना, मूड स्विंग्स और पीरियड साइकिल का हमेशा के लिए बिगड़ जाना जैसे भारी नुकसान होते हैं।

Period से पहले Hormonal Acne पर आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से हार्मोनल एक्ने सिर्फ चेहरे की बाहरी त्वचा की दिक्कत नहीं है। आयुर्वेद में इसे यौवन पिड़िका (Yauvan Pidika) या मुखदूषिका की श्रेणी में रखा जाता है। यहाँ यह माना जाता है कि जब शरीर में वात, कफ और विशेष रूप से पित्त दोष बुरी तरह बिगड़ जाते हैं और अशुद्ध रक्त (खून) के साथ मिल जाते हैं, तब ऐसी परेशानी आती है। डॉक्टर नाड़ी और त्वचा देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं। मासिक धर्म (Periods) का सीधा संबंध आयुर्वेद में आर्तव धातु और रक्त धातु से होता है। पीरियड से पहले शरीर में प्राकृतिक रूप से पित्त बढ़ता है। अगर पहले से ही रक्त में टॉक्सिन्स (आम) मौजूद हों, तो यह बढ़ा हुआ पित्त त्वचा पर मुँहासों के रूप में फूट पड़ता है। आयुर्वेद में बस पिंपल को सुखाना मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, रक्त की सफाई हो, हॉर्मोन्स संतुलित हों और त्वचा प्राकृतिक रूप से बेदाग बने।

Hormonal Acne के लिए जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण क्या है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर महिला का शरीर और हार्मोनल साइकिल अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके शरीर के अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: एक्ने के निकलने की जगह (जैसे जॉलाइन), दानों में दर्द और पीरियड के दर्द की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: पीसीओडी (PCOD), थायराइड, और पहले खायी गई एलोपैथिक दवाओं का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • जीवनशैली का विश्लेषण: मरीज़ के रोज़ाना के खान-पान, मसालेदार चीज़ें खाने की आदत और नींद को परखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: इन सभी बातों का अच्छे से विश्लेषण करने और बिगड़े हुए पित्त व रक्त को पकड़ने के बाद ही मरीज़ के लिए हॉर्मोन्स को प्राकृतिक रूप से बैलेंस करने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

Hormonal Acne के लिए महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में रक्त को साफ करने, पित्त शांत करने और हॉर्मोन्स को बैलेंस करने के लिए ये 4 जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • मंजिष्ठा (Manjistha): आयुर्वेद में इसे रक्त शोधन (Blood Purifier) के लिए सबसे बेहतरीन औषधि माना गया है। यह अंदर से खून साफ करती है और मुँहासों की लालिमा व सूजन कम करती है।
  • नीम (Neem): यह बेहतरीन एंटी-बैक्टीरियल है। इसका सेवन और लेप त्वचा के अंदर के इन्फेक्शन और सिस्टिक एक्ने को जड़ से खत्म करता है।
  • शतावरी (Shatavari): यह महिलाओं के हॉर्मोन्स को प्राकृतिक रूप से संतुलित करती है और पीसीओडी की वजह से होने वाले एक्ने को रोकती है।
  • अनंतमूल (Anantmool/Sarsaparilla): यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी (पित्त) को शांत करता है और त्वचा के पुराने दाग-धब्बों को हल्का करने में अचूक है।

Hormonal Acne के लिए आयुर्वेदिक पंचकर्म: शरीर की अंदरूनी सफाई और त्वचा का पोषण

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर बेदाग और निखरी त्वचा पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • गहरी सफाई और रक्त शोधन: जब हार्मोनल एक्ने बहुत गहरे हों, दाग छोड़ रहे हों और मरीज़ पिल्स पर निर्भर हो चुका हो, तो जीवा आयुर्वेद में विरेचन और रक्तमोक्षण जैसी पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • टॉक्सिन्स बाहर निकालना: विरेचन प्रक्रिया में आँतों और लिवर की गहरी सफाई की जाती है, जिससे शरीर का बढ़ा हुआ पित्त और गंदगी पूरी तरह बाहर निकल जाती है।
  • रक्तमोक्षण (Leech Therapy): चेहरे के सूजे हुए और दर्दनाक मुँहासों से अशुद्ध रक्त निकालने के लिए जोंक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे लालिमा तुरंत कम हो जाती है।
  • मुखलेप (Herbal Face Pack): चंदन, लोध्र और मंजिष्ठा जैसी ठंडी तासीर वाली जड़ी-बूटियों का लेप चेहरे पर लगाया जाता है जो दाग-धब्बों को मिटाता है।

Hormonal Acne के रोगी के लिए शुद्ध आहार

जीवा आयुर्वेद और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, मुँहासों की समस्या को दूर करने के लिए ठंडी तासीर वाला, हल्का और पित्त दोष को शांत करने वाला आहार चुनना महत्वपूर्ण है:

क्या खाएँ?

  • पानी और फाइबर से भरपूर भोजन: लौकी, तोरई, खीरा और तरबूज़ का इस्तेमाल बढ़ाएँ, यह पेट साफ रखते हैं और शरीर की गर्मी निकालते हैं।
  • विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स: आँवला, संतरा और अनार खाएँ, जो रक्त साफ करते हैं और स्किन को ग्लो देते हैं।
  • सौंफ और धनिया का पानी: सुबह खाली पेट धनिया या सौंफ का पानी पिएँ, यह हॉर्मोन्स और पित्त को बेहतरीन तरीके से बैलेंस करता है।

क्या न खाएँ?

  • तीखा और मसालेदार खाना: लाल मिर्च, बहुत ज़्यादा गरम मसाले और बाहर का तला हुआ खाना बिल्कुल बंद कर दें, यह पित्त और एक्ने को तुरंत भड़काता है।
  • डेयरी प्रोडक्ट्स (Dairy): बहुत ज़्यादा दूध, चीज़ (Cheese) और क्रीम वाले उत्पाद शरीर में सीबम का उत्पादन बढ़ाते हैं, इन्हें सीमित करें।
  • मैदा और रिफाइंड चीनी: पिज़्ज़ा, बर्गर, चॉकलेट्स और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, क्योंकि ये इन्सुलिन बढ़ाते हैं जो सीधे एण्ड्रोजन हॉर्मोन और मुँहासों को बढ़ाता है।

जीवा आयुर्वेद में Hormonal Acne के मरीज़ की जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ चेहरे को देखकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है। यहाँ कोशिश होती है कि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जाए।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, पीरियड के दौरान होने वाले बदलाव और मुँहासों के लक्षणों को आराम से सुना जाता है।
  • आपकी पुरानी बीमारी (जैसे PCOD/PCOS) और इस्तेमाल की गई क्रीम या पिल्स के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके खाने-पीने और मसालेदार चीज़ें लेने की आदतों को समझा जाता है।
  • आपकी नींद, मानसिक तनाव और पेट साफ होने की स्थिति पर ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की वात-पित्त प्रकृति को जाना जाता है।
  • पीरियड के चक्र (Menstrual cycle) की नियमितता को बारीकी से परखा जाता है।

इन सब चीज़ों को समझने के बाद आपके लिए एक ऐसा इलाज प्लान बनाया जाता है, जो आपके हॉर्मोन्स को पूरी तरह संतुलित करे।

इलाज के लिए जीवा आयुर्वेद से संपर्क कैसे करें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

Hormonal Acne ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में हार्मोनल एक्ने की समस्या का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है:

  • बीमारी और शरीर की स्थिति: ठीक होने का वक्त कई बातों से तय होता है जैसे मुँहासे कितने गहरे हैं, पीसीओडी की समस्या कितनी गंभीर है, और स्किन डैमेज कितना हुआ है।
  • हल्की समस्या में सुधार: अगर एक्ने की शुरुआत है, तो आमतौर पर 4 से 6 हफ्तों में ही शरीर की गर्मी कम होने लगती है और नए मुँहासे निकलना बंद हो जाते हैं।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर एक्ने सालों पुराने हैं, गड्ढे पड़ चुके हैं और हार्मोनल असंतुलन बहुत ज़्यादा है, तो हॉर्मोन्स को सेट होने और स्किन के दाग साफ होने में 4 से 6 महीने या उससे अधिक का समय लग सकता है।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर अपनी डाइट और आयुर्वेदिक दिनचर्या का कड़ाई से पालन करती है, तो भविष्य में पीरियड से पहले एक्ने निकलने की समस्या जड़ से खत्म हो जाती है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य क्रीम, एंटीबायोटिक्स और OCPs से दानों व हॉर्मोन्स को दबाना पित्त दोष और हॉर्मोन असंतुलन को भीतर से संतुलित करना
नज़रिया एक्ने को केवल स्किन और हॉर्मोन की बाहरी समस्या मानना दूषित रक्त, पित्त वृद्धि और ओवरी की कमजोरी को मूल कारण मानना
उपचार तरीका Retinoids, एंटीबायोटिक्स और हार्मोनल पिल्स पर निर्भरता जड़ी-बूटियाँ, रक्तशोधन और प्राकृतिक डाइट से त्वचा की हीलिंग
डाइट और लाइफस्टाइल बाहरी स्किन केयर और दवाओं पर मुख्य फोकस पित्त-शामक आहार, पर्याप्त पानी और संतुलित दिनचर्या पर ज़ोर
लंबा असर दवा छोड़ते ही दाने दोबारा बढ़ना और स्किन सेंसिटिव होना हॉर्मोन संतुलन और दीर्घकालिक प्राकृतिक साफ त्वचा मिलना

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

हार्मोनल एक्ने की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • मुँहासे बहुत गहरे, दर्दनाक (Cystic) हों और उनमें मवाद भर गया हो।
  • मुँहासे सूखने के बाद चेहरे पर गहरे काले दाग या गड्ढे छोड़ रहे हों।
  • एक्ने के साथ-साथ आपके पीरियड्स भी बहुत अनियमित (Irregular) हो गए हों।
  • चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल (Hirsutism) तेज़ी से बढ़ रहे हों।
  • मानसिक तनाव इतना बढ़ जाए कि आप घर से बाहर निकलना बंद कर दें।

समय पर सलाह लेने से चेहरे को स्थायी रूप से डैमेज होने और दाग-धब्बों से बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार पीरियड से पहले निकलने वाले हार्मोनल एक्ने मुख्य रूप से पित्त दोष के भड़कने, दूषित रक्त और हार्मोनल असंतुलन से जुड़े होते हैं। गलत खान-पान, ज़्यादा मीठा या तीखा खाना, भारी तनाव और खराब पाचन से शरीर में टॉक्सिन्स (आम) बनते हैं, जो चेहरे से मुँहासों के रूप में बाहर आते हैं। सिर्फ बाहरी क्रीम लगाने से त्वचा कुछ देर के लिए साफ लगती है, लेकिन बीमारी अंदर ही रहती है। इलाज के लिए रक्त शुद्धि सबसे ज़रूरी है। दोषों को संतुलित करके, नीम-मंजिष्ठा जैसी जड़ी-बूटियाँ और ठंडी तासीर वाला आहार अपनाकर हार्मोनल एक्ने को जड़ से ठीक किया जा सकता है।

डॉक्टर की सलाह सीधे अपने फोन पर — WhatsApp Channel से जुड़ें।

FAQs

हार्मोनल एक्ने आमतौर पर पीरियड शुरू होने से 7 से 10 दिन पहले निकलना शुरू होते हैं, जब शरीर में प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ता है।

पिल्स कुछ समय के लिए हॉर्मोन्स को कृत्रिम रूप से दबा देती हैं, लेकिन इसके बहुत से साइड इफेक्ट्स होते हैं और पिल्स छोड़ते ही एक्ने फिर से वापस आ जाते हैं।

हाँ, पीसीओडी में महिलाओं के शरीर में पुरुष हॉर्मोन बढ़ जाता है, जो अत्यधिक तेल बनाकर सीधे तौर पर भारी मुँहासों को जन्म देता है।

हाँ, रिफाइंड चीनी और मीठी चीज़ें खाने से शरीर में इन्सुलिन का स्तर तेज़ी से बढ़ता है, जो सूजन और एक्ने को तुरंत भड़काता है।

भरपूर पानी पीना पेट और शरीर की गंदगी साफ करने में बहुत मददगार है, जिससे खून साफ रहता है और एक्ने कम होने में काफी मदद मिलती है।

आम मुँहासे माथे या गालों पर होते हैं, जबकि हार्मोनल मुँहासे मुख्य रूप से चेहरे के निचले हिस्से यानी ठुड्डी और जॉलाइन पर निकलते हैं।

बिल्कुल नहीं! मुँहासों को फोड़ने या दबाने से इन्फेक्शन अंदर तक फैल जाता है और चेहरे पर गहरे गड्ढे व काले दाग हमेशा के लिए रह जाते हैं।

हाँ, बहुत ज़्यादा तनाव लेने से शरीर में कोर्टिसोल हॉर्मोन बढ़ता है, जो सीबम का उत्पादन बढ़ाकर रातों-रात एक्ने पैदा कर सकता है।

हाँ, नीम की तासीर ठंडी होती है और यह एंटी-बैक्टीरियल है। इसका लेप लगाने से मुँहासों की सूजन और लालिमा बहुत जल्दी कम हो जाती है।

हाँ, अगर सही आयुर्वेदिक इलाज, पंचकर्म और कस्टमाइज़्ड डाइट के ज़रिए हॉर्मोन्स और पित्त दोष को संतुलित किया जाए, तो इसे हमेशा के लिए ठीक किया जा सकता है।

हाँ, अगर सही आयुर्वेदिक इलाज, पंचकर्म और कस्टमाइज़्ड डाइट के ज़रिए हॉर्मोन्स और पित्त दोष को संतुलित किया जाए, तो इसे हमेशा के लिए ठीक किया जा सकता है।

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