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IBS & Anxiety साथ क्यों आते हैं? Gut-Mind Connection

Information By Dr. Keshav Chauhan

क्या आपको याद है जब किसी ज़रूरी इंटरव्यू या परीक्षा से ठीक पहले आपके पेट में अचानक मरोड़ उठने लगी थी और आपको तुरंत वॉशरूम भागना पड़ा था? या जब आप लगातार कई दिनों तक मानसिक तनाव (Stress) में रहते हैं, तो आपका पेट खराब हो जाता है, भयंकर गैस बनती है या कब्ज़ हो जाती है? ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि उनका दिमाग और उनका पेट दो अलग-अलग अंग हैं, लेकिन हकीकत में ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

आजकल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (पेट के डॉक्टर) के पास आने वाले लगभग 60-70% IBS (Irritable Bowel Syndrome) के मरीज़ भयंकर एंग्जायटी (Anxiety) और डिप्रेशन के भी शिकार होते हैं। जब मरीज़ पेट की दवाई खाता है, तो पेट ठीक नहीं होता, और जब दिमाग शांत करने की गोली खाता है, तो पेट और ज़्यादा खराब हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम उस 'हाईवे' (Highway) को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं जो इन दोनों को जोड़ता है—जिसे 'गट-ब्रेन एक्सिस' (Gut-Brain Axis) कहा जाता है। 

आंत और मस्तिष्क का कनेक्शन क्या है?

आपका पेट सिर्फ खाना पचाने की मशीन नहीं है; इसे विज्ञान की भाषा में 'दूसरा दिमाग' (Second Brain / Enteric Nervous System) कहा जाता है।

  • वेगस नर्व (Vagus Nerve) का हाईवे: आपका दिमाग और आपकी आंतें एक बहुत ही लंबी और महत्वपूर्ण नस के ज़रिए एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं, जिसे 'वेगस नर्व' कहते हैं। जब दिमाग में तनाव या एंग्जायटी होती है, तो यह नस सीधे पेट को सिग्नल भेजती है, जिससे आंतों की सिकुड़ने की प्राकृतिक गति (Motility) बिगड़ जाती है। यही बिगड़ी हुई गति IBS (मरोड़, दस्त या कब्ज़) पैदा करती है।
  • सेरोटोनिन (Serotonin) का खेल: आपको जानकर हैरानी होगी कि शरीर का 90% 'सेरोटोनिन' (ख़ुशी और शांति का हार्मोन) दिमाग में नहीं, बल्कि आंतों (Gut) में बनता है। जब IBS के कारण आंतों के बैक्टीरिया बिगड़ते हैं, तो सेरोटोनिन का बनना कम हो जाता है। इसकी कमी से सीधा डिप्रेशन और एंग्जायटी (Anxiety) होती है।
  • इम्यूनिटी और सूजन (Inflammation): तनाव के कारण आंतों की परत (Gut lining) कमज़ोर हो जाती है (Leaky Gut)। इससे टॉक्सिन्स खून में मिलते हैं, जिससे शरीर और दिमाग दोनों में सूजन (Neuro-inflammation) होती है, जो एंग्जायटी को और ज़्यादा भड़काती है।

संक्षेप में: तनाव पेट को खराब करता है, और खराब पेट वापस दिमाग को तनाव देता है। यह एक दुष्चक्र है।

आयुर्वेद इस मन-शरीर संबंध को कैसे समझता है? (ग्रहणी और वात प्रकोप)

आधुनिक विज्ञान जिसे आज 'गट-ब्रेन एक्सिस' कह रहा है, आयुर्वेद ने उसे हज़ारों साल पहले 'ग्रहणी' (IBS) और 'मनोवह स्रोतस' (Mind channels) के गहरे संबंध के रूप में समझाया था।

  • वात दोष का सीधा हमला: आयुर्वेद के अनुसार, एंग्जायटी 'प्राण वात' (दिमाग की वायु) के बिगड़ने का परिणाम है, और IBS 'अपान वात' (आंतों की वायु) के बिगड़ने का परिणाम है। जब इंसान लगातार चिंता करता है, तो भड़का हुआ 'प्राण वात' नीचे जाकर पेट की 'पाचन अग्नि' को बुझा देता है और 'अपान वात' को डिस्टर्ब कर देता है।
  • अग्निमांद्य और आम: एंग्जायटी में खाया हुआ खाना पचता नहीं है। वह पेट में सड़कर 'आम' (Toxins) बनाता है। यह आम नसों के रास्ते वापस दिमाग तक पहुँचता है और सोचने-समझने की क्षमता को भारी कर देता है, जिससे डिप्रेशन और डर (Panic) पैदा होता है।
  • ग्रहणी रोग: आयुर्वेद में IBS को 'ग्रहणी' कहा गया है। महर्षि चरक ने स्पष्ट लिखा है कि शोक, क्रोध और चिंता (Grief, Anger, and Anxiety) से ग्रहणी रोग तुरंत भड़कता है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

हम आपको IBS के लिए हाज़मे की गोली और Anxiety के लिए नींद की गोली देकर आपके शरीर को सुन्न नहीं करते। हमारा लक्ष्य इस दुष्चक्र (Cycle) को बीच से तोड़ना है।

  • अग्नि दीपन: सबसे पहले पेट की रुकी हुई 'अग्नि' को जड़ी-बूटियों से जलाया जाता है ताकि आंतों की अंदरूनी परत रिपेयर हो सके और सेरोटोनिन का निर्माण दोबारा शुरू हो सके।
  • मेध्य रसायन: दिमाग की नसों को शांत करने और एंग्जायटी के तूफ़ान को रोकने के लिए शक्तिशाली ब्रेन टॉनिक्स दिए जाते हैं।
  • वात अनुलोमन: आंतों और दिमाग में भटकी हुई वायु (वात) को सही दिशा में लाया जाता है ताकि पेट में मरोड़ और दिमाग में ओवरथिंकिंग दोनों एक साथ बंद हों।

IBS और Anxiety के लिए विशेष आयुर्वेदिक डाइट (Gut-Mind Diet Plan)

चूँकि आपका पेट और दिमाग आपस में जुड़े हैं, इसलिए आपका भोजन ही सबसे बड़ा 'मूड स्टेबलाइज़र' और 'गट हीलर' है।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (शांत करने वाले हीलिंग फूड्स) क्या न खाएं (ट्रिगर करने वाले फूड्स)
पेय पदार्थ (Beverages) ताज़ा घर का बना मट्ठा (छाछ) IBS के लिए अमृत है, जीरा-सौंफ का पानी, नारियल पानी। कॉफी, चाय, कैफीन (ये एंग्जायटी भड़काते हैं), कोल्ड ड्रिंक्स, शराब।
अनाज (Grains) पुराना चावल, मूंग दाल की खिचड़ी, ओट्स, जौ। मैदा, वाइट ब्रेड, पास्ता, खमीर (Yeast) वाली चीज़ें।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, उबली या भाप में पकी हुई हल्की सब्ज़ियाँ। कच्चा सलाद, पत्तागोभी, ब्रोकोली (कच्ची सब्ज़ियाँ IBS में भयंकर गैस करती हैं)।
डेयरी (Dairy) गाय का शुद्ध घी (नसों को ताक़त देता है), ताज़ा छाछ। भारी दूध, पनीर, चीज़ (लैक्टोज़ IBS को ट्रिगर कर सकता है)।
मसाले (Spices) जीरा, धनिया, सौंफ, पुदीना (पेट को ठंडक देते हैं)। लाल मिर्च, गरम मसाला, सिरका, अत्यधिक लहसुन (पित्त और एंग्जायटी बढ़ाते हैं)।

पेट और दिमाग दोनों को एक साथ हील करने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ

  • बिल्व: यह IBS (विशेषकर दस्त वाले IBS) के लिए एक जादुई फल है। यह आंतों की सूजन को कम करता है, मल को बांधता है और आंतों की सिकुड़ने की गति को सामान्य करता है।
  • ब्राह्मी: यह 'ब्रेन फॉग' और एंग्जायटी को दूर करने की सबसे अचूक मेध्य औषधि है। यह वेगस नर्व को रिलैक्स करती है।
  • अश्वगंधा: यह कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) को तेज़ी से गिराता है, नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करता है और शरीर की खोई हुई ऊर्जा वापस लाता है।
  • कुटज: जब एंग्जायटी के कारण बार-बार वॉशरूम जाना पड़े, तो कुटज आंतों की अति-सक्रियता (Hyperactivity) को तुरंत शांत करता है।

पंचकर्म थेरेपी: नर्वस सिस्टम और आंतों की डीप क्लींजिंग (Deep Cleaning)

जब बीमारी पुरानी हो जाए और दिमाग में डर बैठ जाए, तो पंचकर्म शरीर और दिमाग की 'हार्ड रिसेट' (Hard Reset) करता है।

  • शिरोधारा: एंग्जायटी और मानसिक तनाव का यह सबसे बड़ा और अचूक इलाज है। माथे पर औषधीय तेल या छाछ (तक्रधारा) की लगातार धारा गिराकर नर्वस सिस्टम को रिलैक्स किया जाता है। इससे गट-ब्रेन एक्सिस शांत होता है और आंतों की मरोड़ बंद हो जाती है।
  • बस्ती: वात का मुख्य घर आंतें हैं। औषधीय तेल और काढ़े का एनिमा (बस्ती) देकर आंतों को साफ और हील किया जाता है, जिससे सेरोटोनिन का निर्माण दोबारा शुरू हो सके।
  • नाभि बस्ती: नाभि के ऊपर औषधीय तेल रोककर 'समान वात' को शांत किया जाता है, जो पेट दर्द और मरोड़ में जादुई असर करता है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

हम केवल आपके दस्त या कब्ज़ की दवा नहीं देते; हम आपके दिमाग का डर (Fear of symptoms) भी समझते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह गहराई से समझना कि एंग्जायटी (वात) ने पेट को कितना खराब किया है या पेट की खराबी (आम) ने दिमाग को कितना उदास किया है।
  • पाचन का विश्लेषण: मल की प्रकृति, गैस, और खाने के बाद पेट फूलने के पैटर्न को विस्तार से समझा जाता है।
  • मनोवैज्ञानिक ऑडिट: क्या आपको घर से बाहर निकलते ही वॉशरूम ढूँढ़ने का डर (Toilet Mapping) रहता है? आपका स्ट्रेस लेवल कितना है? इसका पूरा विश्लेषण किया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको एक वैज्ञानिक, सुरक्षित और स्थायी समाधान देते हैं।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर 0129 4264323 पर कॉल करें।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर IBS के कारण घर से बाहर निकलने में डर लगता है, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपकी आंतों की स्थिति के अनुसार खास गट-हीलिंग जड़ी-बूटियाँ, ब्रेन टॉनिक्स और एक 'गट-माइंड डाइट' का पूरा रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

नर्वस सिस्टम और आंतों के इस नाज़ुक कनेक्शन को रिपेयर होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: पेट की मरोड़ और गैस कम होंगी। एंग्जायटी अटैक की तीव्रता में कमी आएगी और रात की नींद बेहतर होगी।
  • 1 से 3 महीने तक: बार-बार वॉशरूम भागने की आदत (Bowel urgency) कंट्रोल में आ जाएगी। दिमाग में एक प्राकृतिक शांति और फोकस वापस आएगा।
  • 3 से 6 महीने तक: आपका 'गट-माइक्रोबायोम' और 'वेगस नर्व' पूरी तरह हील हो जाएंगे। आप बिना किसी डर या एंग्जायटी के अपनी सामान्य ज़िंदगी जी सकेंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ों के अनुभव

मेरा नाम दक्ष मलिक है, मैं 23 वर्ष का हूँ और नोएडा का रहने वाला हूँ। कुछ समय पहले मुझे पेट से जुड़ी समस्या शुरू हुई, इंडाइजेशन, पेट में जलन और लंबे समय तक ठीक से मल न आना जैसी परेशानी होने लगी। मेरे कुछ टेस्ट भी हुए, जिनमें पता चला कि मेरे पेट में कुछ घाव (ulcers) हैं। मैंने एलोपैथिक दवाइयाँ लीं, लेकिन मुझे कोई खास फर्क नहीं पड़ा। इसके बाद मैंने टीवी पर डॉ. प्रताप चौहान का कार्यक्रम देखा और उनसे प्रेरित होकर जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया। मैंने डॉक्टर से फोन पर भी बात की और फिर वहाँ से दवाइयाँ व उपचार शुरू किया। धीरे-धीरे मेरी हालत में सुधार आने लगा और अब मैं पहले से काफी बेहतर महसूस करता हूँ। 

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपकी आंतों की बीमारी को हाज़मे की गोलियों से और एंग्जायटी को नींद की गोलियों से नहीं छिपाते।

  • जड़ से इलाज: हम दुष्चक्र को तोड़ते हैं। पेट की 'अग्नि' को ठीक करके दिमाग को शांत करते हैं, और दिमाग को रिलैक्स करके आंतों को हील करते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का बहुत ही शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों ऐसे केस देखे हैं जहाँ IBS और एंग्जायटी ने इंसान को घर में कैद कर दिया था।
  • कस्टमाइज्ड केयर: कुछ लोगों को कब्ज़ (IBS-C) होता है, कुछ को दस्त (IBS-D)। हमारा इलाज आपकी नाड़ी और आपकी विशेष स्थिति पर आधारित होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: हमारी औषधियाँ पूरी तरह प्राकृतिक हैं। ये एंटी-डिप्रेसेंट की तरह आपको सुन्न (Numb) या नशे में नहीं रखती हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य आंतों की गति रोकने के लिए एंटी-स्पास्मोडिक (Anti-spasmodic) और दिमाग के लिए एंटी-डिप्रेसेंट (SSRIs) गोलियाँ। गट-ब्रेन एक्सिस' को रिपेयर करना। अग्नि को जगाकर और वात को शांत करके दोनों को एक साथ हील करना।
शरीर को देखने का नज़रिया पेट और दिमाग को दो अलग-अलग सिस्टम मानकर अलग-अलग इलाज करता है। ग्रहणी' और 'मनोवह स्रोतस' को गहराई से जुड़ा हुआ मानता है।
डाइट और जीवनशैली की भूमिका केवल फाइबर बढ़ाने या कम करने पर ज़ोर, कैफीन को अक्सर इग्नोर किया जाता है। गट-हीलिंग' डाइट (जैसे छाछ), योग (प्राणायाम) और कच्चे सलाद से परहेज़ को इलाज का आधार मानता है।
लंबा असर दवाएं छोड़ने पर एंग्जायटी और मरोड़ तुरंत भयंकर रूप से वापस (Rebound) आते हैं। नर्वस सिस्टम और आंतों के रिपेयर होने से बीमारी स्थायी रूप से खत्म हो जाती है।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

अगर आपको IBS और एंग्जायटी के साथ-साथ शरीर में ये गंभीर संकेत दिखें, तो यह केवल स्ट्रेस नहीं, किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है:

  • अगर मल (Stool) में ताज़ा लाल खून या बिल्कुल काला खून आने लगे (यह IBD या कैंसर का संकेत हो सकता है)।
  • अगर आपको बिना कोशिश किए बहुत तेज़ी से वज़न गिरने की समस्या हो रही हो।
  • अगर आपको रात को गहरी नींद से पेट दर्द या दस्त के कारण उठना पड़े (IBS आमतौर पर सोते समय परेशान नहीं करता)।
  • अगर आपको लगातार बुखार रहने लगे और भयंकर कमज़ोरी आ जाए।

निष्कर्ष

IBS और Anxiety का साथ आना कोई इत्तेफाक नहीं है; यह इस बात का सबूत है कि आपके शरीर का कम्युनिकेशन सिस्टम ('गट-ब्रेन एक्सिस') पूरी तरह क्रैश हो चुका है। जब आपका दिमाग डरता है, तो आपकी आंतें सिकुड़ जाती हैं, और जब आपकी आंतें रोती हैं, तो आपका दिमाग डिप्रेशन में चला जाता है। इन दोनों बीमारियों का अलग-अलग डॉक्टरों से इलाज कराना, और केवल गोलियों के सहारे शरीर को सुन्न कर लेना इस समस्या का कोई समाधान नहीं है। जब तक आप इस दुष्चक्र को नहीं तोड़ेंगे, आप हमेशा डर और दर्द में जिएंगे। आयुर्वेद आपको इस तार्किक भूल से बाहर निकालता है। समस्या को समग्रता (Holistically) से देखें। बिल्व, कुटज, ब्राह्मी और अश्वगंधा जैसी जादुई जड़ी-बूटियों, 'शिरोधारा' पंचकर्म और छाछ (मट्ठा) आधारित डाइट की मदद से अपने पेट और दिमाग के तार दोबारा सही से जोड़ें। अपनी 'पाचन अग्नि' को शांत करें, अपने दिमाग के डर को निकालें, और जीवा आयुर्वेद के साथ एक निडर और ऊर्जावान जीवन पाएं।

FAQs

यह दिमाग और आंतों (Gut) के बीच का एक डायरेक्ट कम्युनिकेशन हाईवे है जो वेगस नर्व (Vagus nerve) के ज़रिए काम करता है। यही कारण है कि स्ट्रेस होते ही पेट खराब हो जाता है और पेट खराब रहने से इंसान डिप्रेशन में चला जाता है।

बिल्कुल। एंग्जायटी के दौरान शरीर फाइट या फ्लाइट मोड में होता है। इससे शरीर आंतों की गति (Motility) को बहुत तेज़ी से बढ़ा देता है ताकि पेट तुरंत खाली हो सके। यही IBS-D (दस्त) का मुख्य कारण बनता है।

आयुर्वेद मानता है कि एंग्जायटी प्राण वात के बिगड़ने से होती है। जब यह भड़का हुआ वात पेट की तरफ जाता है, तो यह पाचन अग्नि को बिगाड़ देता है और अपान वात को असंतुलित करके ग्रहणी (IBS) रोग पैदा करता है।

शरीर का लगभग 90% सेरोटोनिन आंतों में रहने वाले गट माइक्रोबायोम (बैक्टीरिया) द्वारा बनाया जाता है। जब IBS में आंतों का संतुलन बिगड़ता है, तो सेरोटोनिन कम हो जाता है, जिससे सीधे तौर पर डिप्रेशन और एंग्जायटी होती है।

बिल्कुल नहीं! कैफीन नर्वस सिस्टम को उत्तेजित (Stimulate) करता है, जिससे एंग्जायटी तुरंत भड़क जाती है। इसके साथ ही यह आंतों की गति को भी तेज़ करता है, जिससे IBS में मरोड़ और दस्त की समस्या भयंकर रूप ले लेती है।

ताज़ा घर की बनी छाछ (Takra) एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक है। आयुर्वेद में कहा गया है कि छाछ ग्रहणी (IBS) के लिए अमृत है। यह आंतों की सूजन को शांत करती है, मल को बांधती है और खराब गट-फ्लोरा को रिपेयर करती है।

नहीं। हालांकि फाइबर सेहत के लिए अच्छा है, लेकिन IBS में आंतें (अग्नि) बहुत कमज़ोर होती हैं। कच्चा सलाद (Raw veggies) पचाने में बहुत भारी होता है और यह आंतों में भयंकर गैस, ब्लोटिंग और मरोड़ पैदा करता है। सब्ज़ियाँ हमेशा उबालकर या भाप में पकाकर ही खानी चाहिए।

शिरोधारा माथे पर तेल या छाछ गिराने की प्रक्रिया है। यह वेगस नर्व को तुरंत रिलैक्स करती है, स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) को घटाती है और फाइट या फ्लाइट मोड को बंद करती है। दिमाग शांत होते ही आंतों की मरोड़ अपने आप बंद हो जाती है।

हाँ, अश्वगंधा एक एडाप्टोजेन (Adaptogen) है जो एंग्जायटी और स्ट्रेस को जड़ से कम करता है। जब दिमाग का स्ट्रेस कम होता है, तो पेट की तरफ रक्त संचार (Blood flow) सामान्य हो जाता है, जिससे IBS के लक्षणों में भारी राहत मिलती है।

बिल्कुल। यह डर IBS के मरीज़ों में बहुत आम है। जब आयुर्वेद के ज़रिए आपकी आंतों की दीवार रिपेयर होगी और ब्राह्मी जैसी जड़ी-बूटियों से आपका नर्वस सिस्टम मज़बूत होगा, तो आपकी Bowel Urgency खत्म हो जाएगी और यह डर अपने आप निकल जाएगा।

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