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बार-बार पेट में आवाज आना क्या normal है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

कभी-कभी जब हम बिल्कुल शांत बैठे होते हैं या ऑफिस में लोगों के बीच होते हैं, तो अचानक पेट से गड़गड़ाहट की तेज़ आवाज़ आने लगती है। उस समय बड़ी शर्मिंदगी महसूस होती है। हम अक्सर यही सोचते हैं कि यह आवाज़ सिर्फ भूख लगने की वजह से आ रही है। लेकिन क्या सच में पेट हमेशा सिर्फ भूख की वजह से ही आवाज़ करता है? जब हमारा पेट और आँतें खाने को पचाने का काम कर रही होती हैं, तो अंदर हवा और पानी के मिलने से ऐसी आवाज़ें आना एक बहुत ही आम बात है। लेकिन अगर आपका पेट हर समय आवाज़ कर रहा है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। आइए आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि पेट की इन आवाज़ों का असली कारण क्या है।

पेट से गड़गड़ाहट की आवाज़ें आखिर क्यों आती हैं

जब हम खाना खाते हैं, तो वह सीधा हमारे पेट और फिर आंतों में जाता है। हमारी आँतें एक पाइप की तरह होती हैं, जो लगातार सिकुड़ती और फैलती रहती हैं ताकि खाना आसानी से आगे बढ़ सके। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पेट के अंदर पाचक रस, खाना और हवा आपस में मिलते हैं। जब यह सब चीज़ें आँतों के संकरे रास्ते से गुज़रती हैं, तो बिल्कुल वैसी ही आवाज़ आती है जैसे पानी के पाइप में हवा जा रही हो। इसलिए कभी-कभार पेट से आवाज़ आना पाचन तंत्र के स्वस्थ होने की एक बहुत अच्छी निशानी है।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

पेट के डॉक्टरों का मानना है कि पेट में आवाज़ आना एक ज़िंदा और स्वस्थ शरीर की बहुत अच्छी पहचान है। अगर पेट में बिल्कुल भी आवाज़ न हो, तो यह ज़्यादा खतरे की बात होती है, क्योंकि इसका मतलब है कि आँतों ने काम करना बंद कर दिया है। लेकिन डॉक्टर यह भी चेतावनी देते हैं कि अगर आवाज़ के साथ पेट में तेज़ दर्द उठ रहा है, उल्टी आ रही है, या पेट बहुत ज़्यादा फूल गया है, तो यह बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं है। यह आंतों में किसी भारी रुकावट या इन्फेक्शन का सीधा इशारा हो सकता है।

रोज़मर्रा की वो गलतियां जो पेट में हवा भरती हैं

हम अपनी रोज़ की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में जाने-अनजाने कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो पेट में बेवजह हवा भर देती हैं:

  • खाना बहुत जल्दी निगलना: बिना अच्छे से चबाए जल्दी-जल्दी खाना निगलने से बाहरी हवा भी पेट में चली जाती है।
  • स्ट्रॉ से पानी पीना: इस आदत से हम लगातार हवा को अंदर खींचते रहते हैं, जो सीधा गैस का गुब्बारा बनाती है।
  • खाली पेट चाय पीना: सुबह खाली पेट कड़क चाय पीने से एसिड बनता है, जिससे अंदर की हलचल बहुत तेज़ हो जाती है।
  • गैस बनाने वाला खाना: छोले, राजमा जैसी चीज़ें पचने में समय लेती हैं और काफी गैस छोड़ती हैं।

क्या सच में ज़्यादातर लोग इस समस्या से परेशान हैं

अगर आप सोच रहे हैं कि यह आवाज़ सिर्फ आपके पेट से आती है, तो आप बिल्कुल गलत हैं। नई रिसर्च बताती हैं कि साठ से सत्तर प्रतिशत लोग कभी न कभी पेट की इन आवाज़ों को लेकर शर्मिंदगी झेल चुके हैं। खासकर वे लोग जो ऑफिस में घंटों तक एक ही कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं, उन्हें यह समस्या सबसे ज़्यादा सताती है। आज की तेज़ रफ्तार वाली ज़िंदगी में किसी के पास आराम से बैठकर खाने का समय ही नहीं है, जिससे गैस और पेट फूलने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

बिना दवा के इस गड़गड़ाहट को कैसे शांत करें

इस गड़गड़ाहट को शांत करने का सबसे पहला तरीका है अपने खाने का सही समय तय करना। कभी भी बहुत ज़्यादा देर तक भूखे रहने की गलती न करें। जब पेट खाली होता है, तो अंदर की हवा को गूँजने के लिए ज़्यादा जगह मिल जाती है। इसलिए हर दो-तीन घंटे में कुछ हल्का खाते रहें। खाना खाते समय बात बिल्कुल न करें और हर निवाले को चबा-चबा कर खाएँ। खाने के तुरंत बाद बैठे न रहें, बल्कि दस से पंद्रह मिनट की हल्की वॉक ज़रूर करें। इससे गैस आसानी से बाहर निकल जाती है।

किन लोगों को पेट की यह हलचल ज़्यादा सताती है

कुछ खास तरह के लोगों में पेट से आवाज़ आने की समस्या आम लोगों के मुकाबले ज़्यादा देखने को मिलती है:

  • संवेदनशील आँतों वाले लोग: जिन लोगों की आँतें बहुत ज़्यादा नाज़ुक होती हैं, उन्हें पेट में मरोड़ और आवाज़ें लगातार आती रहती हैं।
  • दूध न पचा पाने वाले मरीज़: जिन लोगों को दूध नहीं पचता, उनके पेट में दूध जाते ही भयंकर गैस बनती है और गड़गड़ाहट शुरू हो जाती है।
  • ज़्यादा तनाव लेने वाले: जो लोग हर वक़्त चिंता में रहते हैं, उनके पेट का पूरा सिस्टम बुरी तरह बिगड़ जाता है।
  • लंबे समय तक भूखे रहने वाले: जो लोग खाना छोड़ देते हैं, उनका खाली पेट सबसे ज़्यादा शोर मचाता है।

क्या पेट को शांत रखने के लिए रूटीन बदलना होगा

जी हाँ, अगर आप इस समस्या को जड़ से खत्म करना चाहते हैं, तो आपको अपनी दिनचर्या बदलनी ही पड़ेगी। सारा दिन बिस्तर पर पड़े रहने या सोफे पर बैठकर टीवी देखने से आपकी आँतें भी सुस्त पड़ जाती हैं। जब आँतें सुस्त होंगी, तो खाना सड़ेगा और भयंकर गैस बनाएगा। इसलिए रोज़ सुबह थोड़ा योग या हल्की कसरत ज़रूर करें। इसके अलावा, रात को समय पर सोने की आदत डालें। अच्छी नींद न सिर्फ आपके दिमाग को आराम देती है, बल्कि आपके पेट को भी अंदर से एकदम नया जैसा बना देती है।

कैसे पहचानें कि यह किसी बड़ी बीमारी का इशारा है

पेट का हल्का-फुल्का आवाज़ करना एकदम नॉर्मल है, लेकिन अगर शरीर कुछ और भी इशारे दे रहा है, तो यह कोई बड़ी गड़बड़ हो सकती है:

  • लगातार तेज़ दर्द: आवाज़ के साथ-साथ अगर पेट में न सहने वाली मरोड़ उठ रही है, तो यह गहरा इन्फेक्शन हो सकता है।
  • उल्टी आना: खाना खाने के बाद तुरंत उल्टी जैसा लगना बताता है कि पेट खाने को नहीं पचा पा रहा है।
  • मल में खून आना: अगर टॉयलेट जाते समय खून आ रहा है, तो यह आंतों में घाव या अल्सर का पक्का इशारा है।
  • अचानक वज़न गिरना: बिना मेहनत के वज़न तेज़ी से गिरना किसी गंभीर बीमारी का संकेत है।

पेट को ठंडा और शांत रखने के लिए क्या खाएँ

आपका पेट कैसा रहेगा, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उसे रोज़ाना क्या खिला रहे हैं:

  • रेशेदार ताज़ा खाना खाएँ: ओट्स, सेब, पपीता खूब खाएँ। ये आँतों की पूरी सफाई करते हैं और खाने को आगे धकेलने में मदद करते हैं।
  • ज़्यादा तेल और मसाले से बचें: बाहर का तला-भुना खाना पेट में एसिड बनाता है, जिससे तेज़ जलन और गड़गड़ाहट पैदा होती है।
  • अजवाइन का पानी: खाना खाने के बाद थोड़ा सा अजवाइन का पानी पीने से फँसी हुई गैस तुरंत शांत हो जाती है।
  • कोल्ड ड्रिंक से दूरी: इन चीज़ों में बहुत ज़्यादा गैस होती है, जो पाचन को हमेशा के लिए खराब कर देती हैं।

डॉक्टर से कब मिलें

अगर आपने अपने रूटीन में सारे अच्छे सुधार कर लिए हैं, लेकिन फिर भी कोई फायदा नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर से मिलना बहुत ज़रूरी हो जाता है:

  • लगातार कब्ज़ या दस्त: अगर आपको कई दिनों तक टॉयलेट नहीं आता है या पानी जैसे दस्त लगे हुए हैं।
  • पेट का सख्त हो जाना: अगर आपका पेट छूने पर एकदम टाइट लगे और हल्का सा दबाने पर भी दर्द हो।
  • लगातार बुखार रहना: पेट की तेज़ आवाज़ के साथ अगर आपको हल्का बुखार भी अंदर से तोड़ रहा हो।
  • खाने का मन न करना: अगर भूख लगनी बिल्कुल बंद हो गई है और कुछ भी खाने का मन नहीं करता।

आधुनिक और आयुर्वेद के इलाज में क्या फर्क है

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य गैस बनने के कारण की पहचान कर लक्षणों से राहत देना। पाचन तंत्र के संतुलन और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देना।
उपचार का तरीका दवाइयाँ, आहार संबंधी सलाह और कारण के अनुसार चिकित्सकीय उपचार। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार।
पाचन पर दृष्टिकोण गैस के कारणों का मूल्यांकन कर उसी के अनुसार उपचार किया जाता है। पाचन शक्ति और भोजन की आदतों को बेहतर बनाने पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
असर होने की गति कई उपचार अपेक्षाकृत जल्दी राहत दे सकते हैं। नियमित पालन के साथ धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण दोबारा समस्या न हो, इसके लिए कारणों की पहचान और उचित देखभाल पर ध्यान। स्वस्थ खानपान और संतुलित जीवनशैली के माध्यम से लंबे समय तक पाचन स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल।

निष्कर्ष

पेट में आवाज़ आना हमारे शरीर की एक बहुत ही आम और स्वाभाविक प्रक्रिया है। आपको इससे घबराने या बेवजह शर्मिंदा होने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं है। आपका पेट कोई बेजान मशीन नहीं है, बल्कि एक जीता-जागता हिस्सा है जो हर पल अपना काम कर रहा है। बस अपने शरीर की छोटी-छोटी हरकतों पर ध्यान दें। थोड़ा सा समय निकालकर सही खाना खाएँ, चबा-चबा कर खाएँ और खूब पानी पिएँ। तनाव को खुद पर बिल्कुल हावी न होने दें। इन छोटी आदतों को सुधारकर आपका पाचन तंत्र हमेशा एकदम चुस्त-दुरुस्त और सेहतमंद रहेगा।

References

https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/digestive-system-how-it-works

https://training.seer.cancer.gov/anatomy/digestive/

https://www.exactsciences.com/news-events/articles/how-exactly-does-digestion-work-

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जब खाना, पानी और गैस हमारी आँतों से होकर गुज़रते हैं, तो उनके चलने की वजह से पेट में गड़गड़ाहट की आवाज़ पैदा होती है, जो बिल्कुल नॉर्मल है।

जी हाँ, जब पेट एकदम खाली होता है, तो आँतों में मौजूद हवा को गूँजने के लिए ज़्यादा जगह मिल जाती है, इसलिए खाली पेट ज़्यादा तेज़ आवाज़ करता है।

 बहुत ज़्यादा चीनी वाली चीज़ें खाने से पेट के अच्छे बैक्टीरिया उन्हें पचाने में ज़्यादा गैस बनाते हैं, जिससे पेट में आवाज़ और भारीपन बढ़ सकता है।

एक गिलास हल्का गुनगुना पानी पिएँ या थोड़ा सा हल्का खाना खा लें। खाने के बाद दस मिनट टहलने से भी यह आवाज़ तुरंत शांत हो जाती है।

बिल्कुल नहीं, रात को सोते समय हमारा शरीर खाने को पचाने का मुख्य काम करता है, इसलिए आँतों के चलने की वजह से हल्की आवाज़ आना बहुत आम बात है।

कई लोगों का पेट दूध को नहीं पचा पाता है, जिसकी वजह से दूध पेट में जाते ही गैस और गड़गड़ाहट पैदा करने लगता है।

पेट में कीड़े होने पर सीधा आवाज़ तो नहीं बढ़ती, लेकिन कीड़ों की वजह से पाचन बहुत खराब हो जाता है, जिससे बार-बार गैस बनती है और आवाज़ आती है।

चिंगम चबाते समय हम बहुत सारी बाहरी हवा अपने मुँह के रास्ते पेट में निगल लेते हैं। यही हवा जब आँतों में घूमती है, तो बहुत तेज़ आवाज़ करती है।

घर पर भुना हुआ जीरा और थोड़ा सा काला नमक हल्के गुनगुने पानी के साथ मिलाकर खाने से गैस और पेट की हलचल में बहुत जल्दी आराम मिल जाता है।

जी हाँ, बच्चों का पाचन तंत्र बड़ों के मुकाबले ज़्यादा तेज़ी से काम करता है। अगर बच्चा अच्छे से खा-पी रहा है और खेल रहा है, तो उसके पेट से आवाज़ आना बिल्कुल नॉर्मल है।

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