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पैच बनकर बाल झड़ना और फिर रुक जाना क्यों होता है? क्या यह शरीर के असंतुलन का संकेत है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

बाल झड़ना तो आजकल हर घर की कहानी है, लेकिन कई बार ये बड़ा अजीब रूप ले लेता है। आपने शायद किसी को देखा हो, या खुद महसूस किया हो कि सिर के किसी हिस्से से अचानक बाल गायब हो गए और वहां एक या दो के सिक्के जैसा एकदम गोल और खाली निशान बन गया।

हम अक्सर इसे हल्के में ले लेते हैं कि चलो कोई बात नहीं, तेल बदल लेंगे तो अपने आप बाल आ जाएंगे। लेकिन ये सिर्फ बाहर की या बालों की बीमारी नहीं है। ये शरीर के अंदर की उस मशीनरी के बिगड़ने का अलार्म है जो हमें बीमारियों से बचाती है। 

बालों का जीवनचक्र (बालों की अपनी दुनिया)

बालों का उगना और टूटना कोई नई बात नहीं है, ये तो कुदरत का नियम है। इसे हम दो-तीन आसान बातों से समझ सकते हैं:

  • बढ़ने वाला वक्त: इस दौरान बाल अपनी जड़ों से एकदम कसकर जुड़े रहते हैं और लगातार लंबे होते हैं। यह वक्त जितना लंबा चलेगा, आपके बाल उतने ही घने और मजबूत होंगे।
  • आराम और टूटने का वक्त: एक टाइम ऐसा आता है जब बाल बढ़ना बंद कर देते हैं और मानो आराम करने लगते हैं। फिर धीरे-धीरे वो जड़ छोड़ देते हैं और टूट जाते हैं, ताकि नीचे से नया बाल अपनी जगह बना सके।
  • गड़बड़ी कब होती है?: जब शरीर में खुराक की कमी होती है या आप टेंशन में होते हैं, तो बाल 'बढ़ने वाले वक्त' को छोड़कर सीधा 'टूटने वाले वक्त' में पहुंच जाते हैं और सिर खाली होने लगता है।

चकत्तों में बाल उड़ना आखिर है क्या?

चकत्तों (पैच) में बाल उड़ना कोई आम बाल झड़ने जैसी बात नहीं है, यह सच में इंसान को डरा देती है। इसमें बाल धीरे-धीरे टूटकर या पतले होकर नहीं गिरते। बल्कि रातों-रात सिर या शरीर के किसी हिस्से से बाल एकदम गायब हो जाते हैं और वहां गोल सा खाली निशान बन जाता है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि वो जगह एकदम चिकनी और साफ हो जाती है, मानो वहां कभी बाल उगे ही न हों।

यह सब इतनी खामोशी से होता है कि इसमें न कोई दर्द होता है और न ही कोई खुजली। इंसान को पता ही तब चलता है जब वह शीशा देखता है या कोई दूसरा उसे टोकता है। सुबह उठने पर तकिये पर बालों का गुच्छा दिखना या अचानक एक खाली हिस्सा मिल जाना इसका सबसे बड़ा और डरावना इशारा है।

चकत्तों में बाल उड़ने के अलार्म और इशारे

यह बीमारी भले ही बिना बताए आती है, लेकिन शरीर पहले से ही कुछ इशारे देने लगता है। बस थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है:

शुरुआती अलार्म

  • गुच्छों में बालों का टूटना: अचानक से बहुत सारे बाल एक साथ गिरने लगते हैं। सुबह सोकर उठें तो तकिये पर बालों का ढेर मिलना या नहाते वक्त हाथों में गुच्छे आ जाना इसका पहला इशारा है।
  • कंघी करते ही बाल गिरना: जब आप कंघी करते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे बालों की जड़ें एकदम कमजोर पड़ गई हैं और वे एक साथ टूट रहे हैं।

बढ़ती हुई बीमारी के इशारे

  • सिक्के जैसे गोल पैच: सिर के किसी एक या कई हिस्सों पर सिक्के जितने बड़े गोल और एकदम खाली निशान साफ दिखने लगते हैं। वहां की खाल एकदम चिकनी और चमकीली हो जाती है।
  • दाढ़ी और भौंहों पर असर: बात सिर्फ सिर के बालों तक नहीं रुकती। कई बार आदमियों की दाढ़ी, या फिर भौंहों (आइब्रो) और पलकों के बाल भी गोल पैच में उड़ने लगते हैं।
  • नाखूनों का बिगड़ना: इसका एक बहुत बड़ा और बारीक इशारा नाखूनों पर भी दिखता है। नाखूनों पर छोटे-छोटे गड्ढे बन जाते हैं या वो खुरदरे होकर बार-बार टूटने लगते हैं। यह बताता है कि शरीर अंदर से बीमार है।

आखिर ये बाल गुच्छों में क्यों उड़ते हैं?

जब हमारे शरीर की अंदरूनी मशीनरी अपनी लाइन से भटक जाती है, तो इसका सीधा असर बालों की जड़ों पर पड़ता है। इसके पीछे ये बड़ी वजहें होती हैं:

  • सिक्योरिटी सिस्टम का भड़कना: यह इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह है। इसमें हमारे शरीर का वो सिस्टम जो हमें बीमारियों से बचाता है (इम्युनिटी), वो खुद ही कंफ्यूज हो जाता है। वह बालों की जड़ों को कोई बाहरी कीटाणु समझकर उन पर हमला बोल देता है। इसी मार-काट में बाल अपनी जड़ें छोड़ देते हैं।
  • हार्मोन्स का हिल जाना: हमारे शरीर के जरूरी रस बालों की ग्रोथ को कंट्रोल करते हैं। जब इनमें गड़बड़ी होती है, तो बाल उम्र से पहले ही पकने और गिरने लगते हैं।
  • दिमागी टेंशन और चिंता: महीनों तक चलने वाली दिमागी या शारीरिक टेंशन शरीर के अंदर एक तूफान ला देती है। टेंशन के वक्त शरीर में कुछ ऐसे गंदे केमिकल बनते हैं जो बालों की जड़ों तक खुराक पहुंचाने वाली नसों को सुखा देते हैं। खुराक न मिलने से जड़ें मर जाती हैं।

बीमारी को हल्के में लेने के गंभीर नुकसान

अगर वक्त रहते इन चकत्तों पर ध्यान न दिया जाए, तो बात बहुत बिगड़ सकती है। धीरे-धीरे ये छोटे-छोटे खाली हिस्से आपस में जुड़ जाते हैं और पूरे सिर के बाल उड़ सकते हैं। और सच पूछिए तो, बात सिर्फ बालों की नहीं है। इस तरह अचानक रूप-रंग बिगड़ने से इंसान का कॉन्फिडेंस पूरी तरह टूट जाता है। वो चार लोगों के बीच जाने से कतराने लगता है और धीरे-धीरे भारी डिप्रेशन, शर्मिंदगी और टेंशन का शिकार हो जाता है।

आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद साफ कहता है कि चकत्तों में बाल उड़ना सिर्फ सिर की खाल की बीमारी नहीं है। इसमें वात (गैस/रूखापन) और पित्त (गर्मी) का सबसे बड़ा हाथ होता है। जब शरीर में पित्त भड़कता है, तो सिर की खाल में इतनी गर्मी बढ़ जाती है कि बालों की जड़ें जलने और झुलसने लगती हैं। वहीं, वात बिगड़ने से सिर में इतना सूखापन आ जाता है कि जड़ें अपनी पकड़ ही छोड़ देती हैं और बाल आसानी से गिर जाते हैं।

इसके अलावा, सबसे बड़ी जड़ है हमारा पेट। जब पाचन अग्नि सुस्त पड़ जाती है, तो खाना पचता नहीं और पेट में सड़कर एक जहरीला कचरा (जिसे हम 'आम' कहते हैं) बनाने लगता है। यह कचरा शरीर की उन पतली-पतली नसों और रास्तों को ब्लॉक कर देता है जिनसे बालों की जड़ों को खून और खुराक मिलनी होती है। नतीजा क्या होता है? जड़ों को खाना-पानी नहीं मिलता, वे सूख जाती हैं और बाल पैच (चकत्तों) में उड़ने लगते हैं और नए बालों का उगना एकदम रुक जाता है।

चकत्तों में उड़ते बालों का आयुर्वेदिक इलाज

आयुर्वेद में इस चकत्ते वाले गंजेपन (इंद्रलुप्त) का इलाज सिर्फ ऊपर से कोई खुशबूदार तेल या लेप लगाना नहीं है। हमारा असली मकसद शरीर की अंदरूनी सफाई करना और उस 'भटके हुए' सिक्योरिटी सिस्टम (इम्युनिटी) को वापस लाइन पर लाना है ।

  1. वात-पित्त को शांत करना (शरीर का बैलेंस बनाना): चकत्तों में बाल उड़ने का असली कारण भड़की हुई गर्मी (पित्त) और सूखापन (वात) है, जबकि बढ़ा हुआ कफ नए बालों का रास्ता रोक कर बैठ जाता है। हमारी देसी दवाइयां इस गर्मी को एकदम बुझाती हैं और रूखेपन को खत्म करती हैं। इससे बालों की जड़ों को दोबारा पनपने के लिए एकदम सही और ठंडा माहौल मिल जाता है।
  2. आम बाहर निकालना और सिस्टम सुधारना: जब हाजमा खराब होता है, तो जो सड़ा हुआ कचरा शरीर में जमता है, वही हमारे शरीर के सिक्योरिटी सिस्टम का दिमाग घुमा देता है (जिसे ऑटोइम्यून कहते हैं)। हमारी दवाइयां पेट की आग तेज करके इस सारे कचरे को धोकर बाहर निकाल फेंकती हैं। जब अंदर की गंदगी साफ होती है, तो शरीर अपने ही बालों पर हमला करना बंद कर देता है।
  3. बंद रोमछिद्रों को खोलना और खून की दौड़ान बढ़ाना: जिन खाली चकत्तों में कफ जम गया है और रास्तों को जाम कर दिया है, वहां भृंगराज और आंवला जैसे खास देसी तेलों और लेप का इस्तेमाल किया जाता है। ये लेप बंद सुराखों को खोल देते हैं और सिर की खाल में खून का बहाव इतना तेज कर देते हैं कि सोई हुई जड़ों से नए बाल फूटने लगें।
  4. केशय रसायन: हम अश्वगंधा, शतावरी और आंवला जैसी उन ताकतवर जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते हैं जिन्हें बालों के लिए किसी अमृत से कम नहीं माना गया है। ये चीजें न सिर्फ आपकी दिमागी टेंशन को सोख लेती हैं, बल्कि सूखी हुई जड़ों को ऐसी फौलादी खुराक देती हैं कि बाल दोबारा लहलहा उठें।

Alopecia Areata (चकत्तों में बाल उड़ने) की प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियाँ और उनके फायदे

चकत्तों में बाल उड़ने (जिसे हमारे पुराने वैद्य 'इंद्रलुप्त' कहते हैं) का सीधा सा मतलब है कि शरीर में भड़की हुई गर्मी (पित्त) और रूखेपन (वात) ने बालों का सारा खेल बिगाड़ दिया है।आयुर्वेद में हम इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए कुछ बहुत ही असरदार जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में:

भृंगराज: पुराने समय से ही इसे 'केशराज' यानी बालों का राजा कहा गया है। यह सिर की खाल में खून की दौड़ान को एकदम तेज कर देता है और भड़की हुई गर्मी को बुझाता है। जहाँ से बाल उड़ चुके हैं और चकत्ते बन गए हैं, वहाँ सोई हुई जड़ों को जगाकर नए बाल उगाने में इसका कोई जवाब नहीं है।

आंवला (आमलकी): यह कुदरती विटामिन-सी का सबसे बड़ा खजाना है। शरीर की गर्मी (पित्त) को शांत करने के लिए आंवले से बेहतर कुछ नहीं। यह बालों की जड़ों को अंदर से एक ऐसा पक्का सुरक्षा कवच और खुराक देता है कि बाल न तो कमजोर पड़ते हैं और न ही टूटते हैं।

अश्वगंधा: आजकल चक्कों में बाल उड़ने की सबसे बड़ी वजह ही हर वक्त की दिमागी टेंशन है। अश्वगंधा शरीर के अंदर पल रही इस टेंशन, बेचैनी और घबराहट को जड़ से खत्म कर देता है। जब दिमाग शांत होता है, तो बालों का गिरना अपने आप रुक जाता है।

ब्राह्मी (दिमागी सुकून): यह दिमाग को एकदम पक्की ठंडक और शांति देती है। ब्राह्मी सिर्फ टेंशन ही दूर नहीं करती, बल्कि सिर की तनी हुई नसों को इतना रिलैक्स कर देती है कि नए बालों के उगने का पूरा सिस्टम वापस अपनी पुरानी और सही लाइन पर आ जाता है।

डाइट थेरेपी: क्या खाएं, क्या न खाएं

1. क्या खाएं (What to Eat)

अपने आहार में ऐसी चीजें शामिल करें जो पित्त को शांत करें और बालों की जड़ों को पोषण (Nutrients) दें:

  • ताजे फल: अनार, सेब, पपीता और मीठे अंगूर खाएं। ये रक्त को शुद्ध करते हैं और पित्त को कम करते हैं।
  • सब्जियां: लौकी, तोरई, कद्दू, परवल और करेला जैसी हल्की और ठंडी तासीर वाली सब्जियां खाएं।
  • प्रोटीन युक्त आहार: मूंग की दाल (सबसे सुपाच्य), काले चने और भिगोए हुए बादाम व अखरोट। बालों की संरचना (Keratin) के लिए प्रोटीन ज़रूरी है।
  • आंवला (Amala): यह बालों के लिए 'अमृत' है। आप ताज़ा आंवला, मुरब्बा या जूस के रूप में इसे रोज़ाना ले सकते हैं।
  • बीज (Seeds): कद्दू के बीज (Pumpkin seeds) और अलसी (Flaxseeds), जिनमें जिंक और ओमेगा-3 होते हैं, बालों के पुनर्जन्म में मदद करते हैं।
  • नारियल पानी: यह शरीर की गर्मी (Pitta) को कम करता है और स्कैल्प को हाइड्रेटेड रखता है।
  • देसी घी: खाने में थोड़ा गाय का घी शामिल करें, यह वात को शांत करता है और जड़ों में रूखापन आने से रोकता है।

2. क्या न खाएं (What Not to Eat)

इन चीजों से परहेज करें क्योंकि ये पित्त को बढ़ाकर बालों की जड़ों को 'जला' सकती हैं और 'आम' (Toxins) पैदा करती हैं:

  • अत्यधिक मिर्च-मसाले: लाल मिर्च, गरम मसाला और बहुत ज्यादा नमक का सेवन बंद कर दें। ये पित्त को भड़काते हैं।
  • खट्टी और किण्वित (Fermented) चीजें: अचार, सिरका, नींबू (अधिक मात्रा में), दही और खमीर वाली चीजें (जैसे इडली, डोसा) कम से कम खाएं।
  • कैफीन और शराब: चाय, कॉफी और शराब शरीर में गर्मी बढ़ाते हैं और तनाव पैदा करते हैं, जो एलोपेसिया को बढ़ा सकता है।
  • जंक और प्रोसेस्ड फूड: मैदा, पिज्जा, बर्गर और पैकेट बंद चिप्स शरीर में 'आम' (गंदगी) जमा करते हैं, जिससे रोमछिद्र बंद हो जाते हैं।
  • विरुद्ध आहार (Incompatible Food): दूध के साथ नमक वाली चीजें या मछली के साथ दूध का सेवन कभी न करें। आयुर्वेद में यह त्वचा और बालों की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है।
  • सफेद चीनी: चीनी शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ाती है, जो बालों के झड़ने की प्रक्रिया को तेज करती है।

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए? (पैच बनकर बाल झड़ना)

पैच में बाल झड़ने को “सिर्फ हेयर फॉल” समझकर नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है। कई बार यह शरीर के अंदर चल रहे गहरे असंतुलन का संकेत होता है। निम्न स्थितियों में तुरंत आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से संपर्क करना चाहिए:

  • लगातार नए पैच बनना: अगर एक के बाद एक नए खाली पैच बन रहे हैं और क्षेत्र बढ़ता जा रहा है।
  • बालों का तेजी से झड़ना: कुछ ही दिनों या हफ्तों में बड़े हिस्से में बाल गायब हो जाना।
  • भौंह या दाढ़ी पर असर: यदि सिर के अलावा भौंह, दाढ़ी या शरीर के अन्य हिस्सों में भी बाल झड़ने लगें।
  • स्कैल्प में बदलाव: त्वचा का अत्यधिक चिकना, लाल या संवेदनशील हो जाना।
  • बार-बार समस्या का लौटना: बाल उगने के बाद फिर से पैच बनना, यह पुनरावृत्ति का संकेत है।
  • नाखूनों में बदलाव: नाखूनों पर छोटे-छोटे गड्ढे या कमजोरी दिखना, जो ऑटोइम्यून संकेत हो सकता है।
  • तनाव या बीमारी के बाद शुरुआत: अगर समस्या किसी बड़े मानसिक तनाव, संक्रमण या हार्मोनल बदलाव के बाद शुरू हुई हो।
  • घरेलू उपायों का असर न होना: तेल, सप्लीमेंट या सामान्य उपायों के बावजूद सुधार न दिखना।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार, पैच बनकर बाल झड़ना केवल स्कैल्प की एक सतही समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के गहरे आंतरिक असंतुलन का स्पष्ट संकेत है।

इस स्थिति को केवल बाहरी उपायों से दबाना पर्याप्त नहीं होता। आवश्यक है कि शरीर के भीतर के संतुलन को पुनः स्थापित किया जाए, तभी बालों की जड़ों को स्थायी मजबूती मिलती है और समस्या दोबारा होने की संभावना कम होती है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

 हाँ, सही उपचार और संतुलन बनने पर बाल दोबारा उग सकते हैं।

हर मामले में नहीं। लेकिन बार-बार हो सकती है यदि कारण दूर न किया जाए।

 हाँ, तनाव एक बड़ा ट्रिगर है जो ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया को बढ़ा सकता है।

आयुर्वेद जड़ कारण पर काम करता है, इसलिए लंबे समय में बेहतर परिणाम दे सकता है।

 नहीं, आंतरिक उपचार भी उतना ही जरूरी है।

हाँ, गलत आहार दोषों को बढ़ाकर समस्या को गंभीर बना सकता है।

 हर केस में नहीं, लेकिन गंभीर या पुराने मामलों में यह बहुत मददगार होता है।

हाँ, लेकिन कारण और उपचार अलग हो सकते हैं।

कई मामलों में हार्मोनल असंतुलन भी एक कारण हो सकता है।

 संतुलित जीवनशैली और सही उपचार से इसकी पुनरावृत्ति को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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