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Gym जाते हैं पर Recovery नहीं हो रही — Muscles नहीं, Vata बिगड़ रहा है

Information By Dr. Keshav Chauhan

आजकल हर कोई स्वस्थ दिखना और मजबूत बनना चाहता है। इसी चाहत में हम रोज़ाना Gym जाते हैं, भारी से भारी वज़न उठाते हैं, और पौष्टिक आहार भी लेते हैं। हम यह मानकर चलते हैं कि जितनी ज्यादा कसरत करेंगे, हमारा शरीर उतना ही ताकतवर बनेगा। लेकिन क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि हफ्तों और महीनों तक पसीना बहाने के बावजूद आपके शरीर में कोई सकारात्मक बदलाव नहीं आ रहा हो? इसके उलट, आप हर समय थका हुआ महसूस करते हैं, आपकी साँस जल्दी फूलने लगती है, और शरीर में हमेशा एक भारीपन या मीठा-मीठा दर्द बना रहता है। हम अक्सर सोचते हैं कि शायद हमारे आहार में कुछ कमी है या हम सही ढंग से कसरत नहीं कर रहे हैं।

लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा गहरी है। अगर इतनी मेहनत के बाद भी आपकी रिकवरी नहीं हो रही है और मसल्स बढ़ने का नाम ही नहीं ले रहे हैं, तो इसका सीधा सा मतलब यह है कि आपके शरीर में वात दोष बुरी तरह से बिगड़ चुका है। जब वात असंतुलित होता है, तो शरीर पोषण को ग्रहण करना बंद कर देता है और अंदर ही अंदर सूखने लगता है।

Gym के बाद रिकवरी न होने की समस्या असल में क्या है?

जब हम भारी कसरत करते हैं, तो हमारे शरीर के तंतु टूटते हैं। आधुनिक विज्ञान मानता है कि कसरत के बाद आराम करने से हमारा शरीर इन टूटे हुए तंतुओं की मरम्मत करता है, जिससे नई और मजबूत मसल्स बनती हैं। लेकिन जब हम शरीर की क्षमता से अधिक कसरत करने लगते हैं और उसे पर्याप्त आराम या सही पोषण नहीं देते, तो शरीर इस मरम्मत की प्रक्रिया को रोक देता है। इसे स्नायु तंत्र की अत्यधिक थकान कहा जाता है, जहाँ आपका दिमाग और शरीर दोनों पूरी तरह से हार मान चुके होते हैं।

आयुर्वेद इस स्थिति को एक अलग और बेहद सटीक नज़रिए से देखता है। आयुर्वेद के अनुसार, क्षमता से अधिक व्यायाम करने (जिसे 'अतिव्यायाम' कहा जाता है) से शरीर में वात दोष बहुत तेज़ी से भड़क उठता है। वात का स्वभाव रूखा, हल्का, चंचल और ठंडा होता है। जब आप लगातार भारी वज़न उठाते हैं, तो शरीर में यही रूखापन बढ़ने लगता है। यह बढ़ा हुआ वात आपके शरीर की उस प्राकृतिक नमी और स्निग्धता (कफ दोष) को पूरी तरह से सुखा देता है, जो असल में नई मसल्स के निर्माण के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी होती है। जब शरीर में नमी ही नहीं बचेगी, तो आप चाहे जितना पौष्टिक आहार खा लें, वह शरीर को लगेगा ही नहीं। आपका पाचन कमज़ोर हो जाएगा और खाया हुआ भोजन शरीर को ताकत देने की बजाय पेट में सड़कर 'आम' (ज़हरीले तत्व) बनाने लगेगा। यही कारण है कि आपकी रिकवरी पूरी तरह से रुक जाती है।

यह समस्या किन रूपों में प्रकट होती है?

जब वात बिगड़ता है और शरीर खुद को सुधारने में नाकाम रहता है, तो यह परेशानी केवल थकान तक सीमित नहीं रहती। यह कई अलग-अलग और गंभीर रूपों में सामने आने लगती है:

  • स्थायी और क्रोनिक थकान: आप रात भर अच्छी तरह सोने की कोशिश करते हैं, लेकिन सुबह उठने पर भी शरीर में ऊर्जा महसूस नहीं होती। पूरे दिन शरीर टूटता हुआ सा लगता है और किसी भी काम में मन नहीं लगता।
  • शारीरिक विकास का रुक जाना: आप महीनों से लगातार एक ही वज़न उठा रहे होते हैं और आपकी ताकत में ज़रा भी इज़ाफ़ा नहीं होता। आपके शरीर का आकार भी जस का तस रहता है।
  • नींद का उड़ जाना: दिन भर की थकावट के बावजूद, रात को जब आप बिस्तर पर जाते हैं तो आपको गहरी नींद नहीं आती। बार-बार आँख खुलना या बेचैनी महसूस होना, बेकाबू वात का एक बड़ा लक्षण है।
  • हड्डियों और जोड़ों में सूखापन: चूँकि बढ़ा हुआ वात शरीर के सारे तरल पदार्थों को सुखा देता है, इसलिए घुटनों, कोहनियों और कंधों से उठते-बैठते खट-खट की आवाज़ आने लगती है और उनमें एक अजीब सा दर्द रहने लगता है।

रिकवरी न होने की यह समस्या कौन से संकेत देती है?

आपका शरीर कभी भी अचानक से हार नहीं मानता, वह हमेशा आपको पहले से चेतावनी देता है। यदि Gym जाने के बाद आपकी रिकवरी नहीं हो पा रही है, तो आपका शरीर आपको ये खास संकेत देने लगता है:

  • मांसपेशियों में लंबे समय तक रहने वाला दर्द: कसरत के बाद एक या दो दिन दर्द होना आम बात है, लेकिन अगर आपकी टाँगें या बाँहें चार-पाँच दिनों तक लगातार दर्द करती रहें, तो यह खतरे की घंटी है।
  • कसरत करने की इच्छा का मर जाना: जब स्नायु तंत्र पूरी तरह से थक जाता है, तो आपका Gym जाने का बिल्कुल भी मन नहीं करता। आप अंदर से उत्साहहीन महसूस करते हैं।
  • पाचन तंत्र का बुरी तरह बिगड़ना: वात के बढ़ने से पेट फूलने लगता है, कब्ज़ की शिकायत रहने लगती है और भूख लगनी बिल्कुल बंद हो जाती है।
  • बिना कुछ किए धड़कन का तेज़ रहना: जब आप सुबह उठकर आराम कर रहे होते हैं, तब भी अगर आपके दिल की धड़कन सामान्य से बहुत तेज़ चल रही हो, तो यह बताता है कि आपका शरीर अत्यधिक तनाव में है।
  • नसों का फड़कना: आँखों के आसपास या शरीर के किसी भी हिस्से की नसों का अपने आप फड़कना (काँपना) इस बात का इशारा है कि नसें कमज़ोर पड़ रही हैं।

आगे चलकर यह क्या परेशानियाँ दे सकता है?

अगर आप इन सभी शुरुआती संकेतों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और कृत्रिम ऊर्जा देने वाले रसायनों के सहारे खुद को ज़बरदस्ती Gym में धकेलते रहते हैं, तो भविष्य में इसके बहुत भयंकर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं:

  • गंभीर शारीरिक चोटें: जब आपकी नसें और तंतु कमज़ोर हो जाते हैं, तो हल्का सा भी गलत वज़न उठाने पर वे पूरी तरह से टूट सकते हैं, जिससे आपको महीनों तक बिस्तर पर लेटना पड़ सकता है।
  • हार्मोन का संतुलन बिगड़ना: शरीर के लगातार तनाव में रहने से नुकसानदायक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है और पौरुष हार्मोन (जो मसल्स बनाता है) का स्तर एकदम गिर जाता है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता का खत्म होना: जब शरीर खुद की ही मरम्मत नहीं कर पाता, तो उसकी बाहरी बीमारियों से लड़ने की ताकत खत्म हो जाती है और इंसान बार-बार बीमार पड़ने लगता है।
  • मानसिक अवसाद: लगातार रहने वाली शारीरिक पीड़ा और थकान धीरे-धीरे आपके दिमाग पर हावी होने लगती है, जिससे आप अत्यधिक मानसिक तनाव और चिड़चिड़ेपन का शिकार हो जाते हैं।

आयुर्वेद इस परेशानी को कैसे देखता है और कौन से उपाय मदद कर सकते हैं?

महर्षि चरक और सुश्रुत ने अपनी संहिताओं में भली-भाँति समझाया है कि व्यायाम हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता के आधे हिस्से तक ही करना चाहिए। जब भी हम अपनी साँस फूलने और पसीना बहने की चरम सीमा को पार करके व्यायाम करते हैं, तो शरीर के अंदर आकाश और वायु तत्व बहुत तेज़ी से बढ़ जाते हैं। ये दोनों तत्व मिलकर वात दोष का निर्माण करते हैं। जब Gym में भारी वज़न उठाने से आपका वात बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह आपकी जठराग्नि (पाचन की आग) को अस्थिर कर देता है। अस्थिर पाचन का मतलब है कि आप चाहे जितना भी पौष्टिक खाना खाएँ, वह आपकी नसों और हड्डियों तक नहीं पहुँच पाएगा।

आयुर्वेद के अनुसार, इस बेकाबू वात को शांत करने के लिए शरीर को 'स्निग्धता' (चिकनाहट) और 'गुरुता' (भारीपन) की बहुत सख्त ज़रूरत होती है। जब तक आप अपने शरीर को अंदर और बाहर से सही पोषण नहीं देंगे, तब तक कोई भी कृत्रिम तरीका आपको स्वस्थ नहीं कर सकता। इसके लिए आपको सबसे पहले अपनी जठराग्नि को सुधारना होगा, ताकि भोजन पचकर सही जगह पर लगे। भरपूर विश्राम करना, सादा और सुपाच्य भोजन लेना, और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का सहारा लेना ही इस समस्या का एकमात्र और सबसे सटीक उपाय है।

रिकवरी में लाभदायक आयुर्वेदिक डाइट चार्ट

समय क्या खाएं कैसे लाभ मिलता है
सुबह उठते ही 1–2 गिलास हल्का गुनगुना पानी रातभर जमा अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने और शरीर को हाइड्रेट करने में मदद करता है
सुबह खाली पेट 5–6 भीगे बादाम, 2 अखरोट, 1 चम्मच किशमिश मांसपेशियों और नसों को पोषण देने वाले हेल्दी फैट्स व मिनरल्स प्रदान करता है
नाश्ता (7–9 AM) मूंग दाल चीला, दलिया, ओट्स, उपमा या घी के साथ पोहा वर्कआउट और रिकवरी के लिए स्थिर ऊर्जा प्रदान करता है
मिड-मॉर्निंग नारियल पानी या ताज़ा छाछ इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करता है और मांसपेशियों की थकान कम करने में मदद करता है
दोपहर का भोजन घी लगी रोटी, मूंग दाल, हरी सब्जियाँ, थोड़ा चावल प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और पोषण का संतुलित स्रोत प्रदान करता है
वर्कआउट के बाद केला, खजूर या भीगी किशमिश के साथ गुनगुना दूध ऊर्जा भंडार (ग्लाइकोजन) को भरने और रिकवरी को तेज़ करने में मदद करता है
शाम का नाश्ता भुना मखाना, भुना चना या फलों का छोटा भाग मांसपेशियों को निरंतर पोषण देता है और एनर्जी क्रैश से बचाता है
रात का भोजन (7–8 PM) मूंग दाल खिचड़ी, घी और हल्की सब्जियाँ पाचन पर कम भार डालते हुए रात की रिकवरी को सपोर्ट करता है
सोने से पहले हल्दी और घी वाला हल्का गर्म दूध मांसपेशियों की मरम्मत (Repair), सूजन कम करने और गहरी नींद में मदद करता

कौन सी जड़ी-बूटियाँ इस स्थिति में मदद करती हैं?

आयुर्वेद के खजाने में ऐसी कई दिव्य जड़ी-बूटियाँ मौजूद हैं जो शरीर में नमी वापस लाती हैं, नसों को ताकत देती हैं और बिना किसी दुष्प्रभाव के आपकी रिकवरी को कई गुना तेज़ कर देती हैं:

  • अश्वगंधा: यह एक चमत्कारी रसायन है जो शरीर के तनाव को जड़ से खत्म करता है। यह आपके स्नायु तंत्र को शांत करता है, जिससे आपको बहुत गहरी नींद आती है और रात भर में आपका शरीर खुद की पूरी तरह से मरम्मत कर लेता है।
  • बला: इस जड़ी-बूटी का नाम ही इसकी खासियत बताता है। यह शरीर में बल (ताकत) भरती है। यह कमज़ोर हो चुकी नसों को मज़बूती देती है और वात के कारण होने वाले हर तरह के दर्द को सोख लेती है।
  • शतावरी: कसरत करने वालों के लिए यह अमृत के समान है। यह शरीर के अंदरूनी रूखेपन को खत्म करके हर एक जोड़ और नस को चिकनाहट (नमी) प्रदान करती है, जो नई मसल्स बनने के लिए बहुत ज़रूरी है।
  • गोक्षुर: भारी कसरत के बाद जब शरीर पूरी तरह से टूट जाता है, तब गोक्षुर शरीर में दोबारा नई ऊर्जा का संचार करता है और प्राकृतिक रूप से पौरुष ताकत को बढ़ाता है।

इस समस्या के लिए बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरपीज़

केवल खाने वाली जड़ी-बूटियाँ ही नहीं, बल्कि बाहरी तौर पर शरीर को आराम देने वाली कुछ विशेष आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी भी इस रूखेपन को दूर करने में चमत्कारिक असर दिखाती हैं:

  • अभ्यंग: यह औषधीय तेलों (जैसे महानारायण तेल या तिल के तेल) से की जाने वाली पूरे शरीर की एक बहुत ही गहरी मालिश है। यह तेल त्वचा के रोमछिद्रों से होता हुआ सीधा नसों तक पहुँचता है, वात को शांत करता है और जकड़न को तुरंत खोल देता है।
  • पिंड स्वेद: इस प्रक्रिया में औषधीय चावल या विशेष जड़ी-बूटियों की एक पोटली बनाई जाती है। उस पोटली को गर्म दूध और औषधीय काढ़े में डुबोकर पूरे शरीर की सिकाई की जाती है। यह थके हुए शरीर को सीधा पोषण देने का सबसे बेहतरीन तरीका है।
  • बस्ति: चूंकि वात का मुख्य स्थान हमारी बड़ी आँत में होता है, इसलिए औषधीय तेल और काढ़े की बस्ति (एनिमा) देकर शरीर के अंदर गहराई में जमे हुए अत्यधिक वात को मल के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है।

आयुर्वेदिक इलाज से इस समस्या में सुधार का टाइमलाइन क्या है?

आयुर्वेद कभी भी रातों-रात चमत्कार करने का झूठा दावा नहीं करता। यह समस्या की जड़ पर काम करता है और शरीर को स्वाभाविक रूप से ठीक होने का पूरा मौका देता है। एक सही दिनचर्या और सटीक इलाज के साथ सुधार का क्रम कुछ इस तरह होता है:

  • शुरुआती 1 से 2 सप्ताह: सबसे पहले जड़ी-बूटियों और मालिश के प्रभाव से आपका बढ़ा हुआ वात शांत होना शुरू होगा। आपको अपनी नींद में बहुत बड़ा बदलाव नज़र आएगा। सुबह उठने पर शरीर का भारीपन और दर्द काफी हद तक कम हो जाएगा।
  • 3 से 4 सप्ताह (लगभग एक महीना): आपकी पाचन शक्ति पूरी तरह से सुधर जाएगी। अब आपका खाया हुआ भोजन पेट में गैस बनाने की बजाय पचना शुरू हो जाएगा। Gym में आपको एक नई ताजगी और ऊर्जा का अहसास होने लगेगा।
  • 2 से 3 महीने: यह वह समय होगा जब आपके शरीर की नसें और हड्डियाँ अंदर से मज़बूत हो चुकी होंगी। अब आपका शरीर सही मायनों में नई मसल्स का निर्माण शुरू करेगा। आपके जोड़ों से आवाज़ आना बिल्कुल बंद हो जाएगी और आपकी रुकी हुई शारीरिक ताकत दोबारा बढ़ने लगेगी।

रिकवरी और वात संतुलन के लिए आयुर्वेद कैसे बेहतर है?

आजकल के आधुनिक फिटनेस जगत में, जब किसी की रिकवरी नहीं होती है, तो उसे अक्सर और ज्यादा कृत्रिम रसायन खाने या कैफीन पीने की सलाह दे दी जाती है। ये चीजें कुछ पलों के लिए आपके दिमाग को धोखा देकर आपको ऊर्जा का झूठा अहसास तो कराती हैं, लेकिन असल में ये आपके शरीर को अंदर से और ज्यादा सुखा रही होती हैं, जिससे वात और भयानक रूप ले लेता है।

आयुर्वेद इसलिए सबसे बेहतर है क्योंकि यह आपकी समस्या को दबाता नहीं है, बल्कि उसे समझता है। आयुर्वेद यह भली-भाँति जानता है कि अगर आपका शरीर थका हुआ है, तो उसे किसी झूठी उत्तेजना की नहीं, बल्कि गहरे विश्राम और असली पोषण की ज़रूरत है। यह केवल यह नहीं देखता कि आप दिन भर में कितना पौष्टिक आहार खा रहे हैं, बल्कि यह देखता है कि क्या आपकी जठराग्नि उस आहार को पचाने के काबिल है भी या नहीं। आयुर्वेद की जड़ी-बूटियाँ पूरी तरह से प्राकृतिक होती हैं, जो न केवल आपके शरीर को बलवान बनाती हैं बल्कि आपके मन को भी शांत और स्थिर रखती हैं।

डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए?

हालाँकि कसरत के बाद का हल्का मीठा दर्द बिल्कुल सामान्य है और इसे आराम से ठीक किया जा सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो आपको तुरंत एक योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए:

  • जोड़ों में चुभने वाला तीखा दर्द: अगर कसरत करते समय किसी भी जोड़ में अचानक से कोई बहुत तेज़ और असहनीय दर्द उठे, जो विश्राम करने के बाद भी बिल्कुल न जाए।
  • मूत्र के रंग में भयंकर बदलाव: यदि आपके मूत्र का रंग अचानक से बहुत गहरा लाल या भूरा (कोला के रंग जैसा) हो जाए। यह इस बात का संकेत है कि आपकी कमज़ोर हो चुकी मसल्स टूटकर आपकी किडनी में जमा हो रही हैं, जो कि एक जानलेवा स्थिति हो सकती है।
  • चक्कर आना और बेहोशी छाना: कसरत के दौरान या उसके तुरंत बाद आँखों के सामने अँधेरा छा जाना, साँस का बहुत ज्यादा फूलना या चक्कर खाकर गिर पड़ना।
  • भूख का पूरी तरह मर जाना और तेज़ बुखार: अत्यधिक शारीरिक थकान के साथ शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाना और खाने के नाम से ही उल्टी आने का मन करना।

निष्कर्ष

अपने शरीर को स्वस्थ और मज़बूत बनाना एक बहुत ही खूबसूरत यात्रा है, इसे अपने लिए कोई सजा मत बनाइए। Gym जाने का मकसद शरीर को गढ़ना होता है, उसे अंदर से तोड़ना नहीं। अगर आपको भी ऐसा लग रहा है कि आपकी रिकवरी रुक गई है और आपकी मसल्स नहीं बढ़ रही हैं, तो यह बात अच्छी तरह समझ लीजिए कि आपका शरीर आपसे चीख-चीख कर कह रहा है कि उसका वात बिगड़ चुका है। अपने ही शरीर से जबरन लड़ना बंद कर दीजिए। जब तक आप अपने बढ़े हुए वात को शांत करके अपने पाचन तंत्र को दुरुस्त नहीं करेंगे, तब तक दुनिया की कोई भी कसरत आपको परिणाम नहीं दे सकती।

अगर आप भी लंबे समय से ऐसी ही पीड़ा और निराशा से गुज़र रहे हैं, तो अब इसे और ज्यादा न बिगड़ने दें। आपकी इस पूरी समस्या की सही जाँच करने और उसे जड़ से खत्म करने के लिए, आज ही जीवा आयुर्वेद के अनुभवी चिकित्सकों से संपर्क करें। अपने स्वास्थ्य को दोबारा सही दिशा देने के लिए अभी सीधे हमारे नंबर +919266714040 पर कॉल करें और अपने शरीर को आयुर्वेद की प्राकृतिक ताकत से जोड़ने की शुरुआत करें।

FAQs

हाँ, बिल्कुल। शुद्ध देसी घी वात को शांत करने और शरीर में स्निग्धता (चिकनाहट) लाने का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक साधन है। यह जोड़ों के सूखेपन को दूर करता है और पाचन की आग को मज़बूत करता है, जिससे खाया हुआ भोजन सीधे नसों तक पहुँचता है।

जी हाँ, आयुर्वेद के अनुसार वात का स्वभाव बहुत ठंडा होता है। जब आप पहले से ही कसरत करके अपना वात बढ़ा चुके होते हैं, तब अचानक से अत्यधिक ठंडे पानी के संपर्क में आने से नसें सिकुड़ जाती हैं और जकड़न व दर्द और भी तेज़ हो जाता है। हमेशा गुनगुने पानी का ही उपयोग करना चाहिए।

जिन लोगों का शरीर जन्म से ही दुबला-पतला और वात प्रधान होता है, उन्हें बहुत तेज़ गति वाली कसरत (जैसे बहुत ज्यादा दौड़ना या उछलना) कम करनी चाहिए। उन्हें धीमी गति से और स्थिर होकर वज़न उठाने वाले व्यायाम करने चाहिए, और बीच-बीच में भरपूर विश्राम लेना चाहिए।

अगर वनस्पति आधारित आहार में सही मात्रा में प्राकृतिक चिकनाहट (जैसे नट्स, बीज, और नारियल) शामिल न हो, तो शरीर में बहुत जल्दी रूखापन आ जाता है। रूखा आहार सीधा वात को भड़काता है, इसलिए ऐसे आहार में स्निग्ध चीज़ों का होना बहुत ज़रूरी है।

बाज़ार में मिलने वाले ऐसे अधिकतर उत्पादों में अत्यधिक मात्रा में कैफीन होता है, जो सीधा आपके स्नायु तंत्र को झटके से उत्तेजित करता है। यह शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा को निचोड़ लेता है और वात को बहुत भयानक तरीके से बढ़ा देता है, जिससे बाद में भारी थकावट होती है।

नहीं, आयुर्वेद ऐसा नहीं मानता। कसरत के तुरंत बाद शरीर का सारा रक्त नसों और बाहरी हिस्सों में होता है, पेट में नहीं। इसलिए तुरंत भारी भोजन करने से वह पचता नहीं है। कसरत के बाद कुछ देर विश्राम करें, साँसें सामान्य होने दें, फिर कुछ हल्का और सुपाच्य भोजन ही ग्रहण करें।

खाली पेट भारी कसरत करना वात को बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण है। जब शरीर में पहले से ही ऊर्जा खाली होती है, तब व्यायाम करने से शरीर खुद की ही धातुओं (हड्डियों और मांस) को जलाकर ऊर्जा लेने लगता है, जिससे शरीर अंदर से बेहद कमज़ोर हो जाता है।

वात को शांत करने के लिए हमेशा पके हुए, मीठे और रसदार फल खाने चाहिए। जैसे कि मीठा सेब (छिलका उतारकर या हल्का पकाकर), पका हुआ पपीता, चीकू और मीठे अंगूर। सूखे और अत्यधिक खट्टे फलों से पूरी तरह बचना चाहिए।

आयुर्वेद में दिन के समय सोने की मनाही है, लेकिन जो लोग बहुत अधिक शारीरिक श्रम करते हैं या बहुत थके हुए होते हैं, वे दिन में थोड़ी देर के लिए विश्राम कर सकते हैं। हालांकि, मुख्य और गहरी नींद रात के समय ही आनी चाहिए, तभी शरीर की सही मरम्मत हो पाती है।

सर्दियों का मौसम प्राकृतिक रूप से रूखा और ठंडा होता है, जो वात के गुणों से बिल्कुल मेल खाता है। इस मौसम में नसों में सिकुड़न ज्यादा होती है। इसलिए सर्दियों में कसरत से पहले तेल की मालिश करना और भी ज्यादा ज़रूरी हो जाता है, ताकि शरीर में गर्मी और लचीलापन बना रहे।

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