Diseases Search
Close Button
 
 

Tophi (गाँठ ) उँगलियों में बनने लगी है — क्या अब Surgery ही रास्ता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 06 May, 2026
  • category-iconUpdated on 06 May, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5007

गाउट (Gout) के बिगड़ने पर उँगलियों और जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमा होकर सख्त गाँठ (Tophi) बना लेते हैं। लोग इसे निकालने के लिए सर्जरी या भारी पेनकिलर का सहारा लेते हैं, जो कुछ समय के लिए दर्द को दबा देते हैं। लेकिन दवा का असर खत्म होते ही जोड़ों का दर्द भयंकर रूप में वापस आता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह 'वातरक्त' का बिगड़ा हुआ रूप है जहाँ शरीर में वात दोष और अशुद्ध रक्त मिलकर जोड़ों में विषैले तत्त्व (यूरिक एसिड) जमा कर देते हैं। सर्जरी इसका स्थायी इलाज नहीं है।

Tophi और गाँठ का बनना क्या है?

टोफी (Tophi) एक ऐसी स्थिति है जहाँ शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बहुत ज़्यादा बढ़ जाने पर वह क्रिस्टल का रूप ले लेता है और जोड़ों, खासकर उँगलियों, पंजों और एड़ियों में जमा होकर सख्त गाँठ बना लेता है। एक सामान्य इंसान में यूरिक एसिड किडनी के ज़रिए बाहर निकल जाता है, लेकिन गाउट के मरीज़ में यह शरीर में ही रुकने लगता है। लंबे समय तक गाउट का सही इलाज न होने से ये क्रिस्टल त्वचा के नीचे जमा होकर भारी सूजन और असहनीय दर्द पैदा करते हैं। पेनकिलर लेने पर कुछ समय के लिए आराम मिल जाता है, लेकिन ये दवाएँ सिर्फ दर्द को सुन्न करती हैं, शरीर के अंदर मौजूद उस वात और रक्त दोष को ठीक नहीं करतीं। दवा का बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार इस्तेमाल करना लिवर और किडनी पर बुरा असर डालता है।

Tophi (गाँठ) और गाउट से जुड़ी मुख्य बीमारियाँ कौन सी हैं?

जोड़ों की तकलीफ और यूरिक एसिड से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये स्थितियाँ देखी जाती हैं:

  • एक्यूट गाउट (Acute Gout): यह शुरुआत है, जब अचानक रात में पैर के अँगूठे या उँगलियों में भारी सूजन और भयंकर दर्द होता है।
  • क्रोनिक गाउट (Chronic Gout): बार-बार गाउट के अटैक आने से जोड़ों में स्थायी सूजन और नुकसान होने लगता है।
  • टोफेशियस गाउट (Tophaceous Gout): यह सबसे गंभीर अवस्था है, जहाँ यूरिक एसिड के क्रिस्टल बड़े होकर त्वचा के नीचे सफेद या पीली सख्त गाँठ (Tophi) का रूप ले लेते हैं।
  • यूरिक एसिड किडनी स्टोन: जब बढ़ा हुआ यूरिक एसिड जोड़ों के बजाय किडनी में जमा होकर पथरी बना देता है।

Tophi (गाँठ) के लक्षण और संकेत

पेनकिलर से आराम मिलने के बाद दर्द का बार-बार लौट आना कई आंतरिक स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं:

  • त्वचा के नीचे सख्त गाँठें: उँगलियों, कोहनियों और कान के बाहरी हिस्से में सख्त, सफेद या पीले रंग की गाँठें दिखाई देना।
  • भयंकर दर्द और लालपन: जोड़ों को छूने पर भी असहनीय दर्द होना और त्वचा का लाल व गर्म हो जाना।
  • जोड़ों का टेढ़ा होना: गाँठ बड़ी होने पर उँगलियों के जोड़ों का आकार बिगड़ जाना और उनका मुड़ जाना।
  • जूते पहनने में दिक्कत: पैर के अँगूठे और एड़ी में सूजन के कारण सामान्य जूते या चप्पल न पहन पाना।
  • दवा का असर खत्म होते ही वापसी: पेनकिलर का असर खत्म होते ही कुछ ही घंटों के भीतर जोड़ों का फिर से जकड़ने लगना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

Tophi बनने और दर्द बार-बार लौटने के कारण (यूरिक एसिड और वात वृद्धि)

बार-बार गाउट का दर्द बढ़ने और गाँठ बनने के पीछे सिर्फ बाहरी कारण नहीं, बल्कि गहरे अंदरूनी कारण हो सकते हैं। मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

  • वात और रक्त की अशुद्धि: खराब पाचन और भारी खान-पान से शरीर में 'वात' बढ़ता है और रक्त दूषित होता है, जो जोड़ों में जाकर जमने लगता है।
  • प्यूरिन युक्त आहार: बहुत ज़्यादा रेड मीट, सीफूड, और शराब का सेवन करने से शरीर में भारी मात्रा में यूरिक एसिड बनता है।
  • कमज़ोर मेटाबॉलिज़्म और किडनी: पाचन और मेटाबॉलिज़्म धीमा होने से किडनी यूरिक एसिड को पूरी तरह छानकर बाहर नहीं निकाल पाती।
  • पेनकिलर पर निर्भरता: लंबे समय तक दर्द निवारक गोलियाँ लेने से किडनी कमज़ोर होती है और शरीर प्राकृतिक रूप से यूरिक एसिड बाहर निकालना भूल जाता है।
  • तनाव और चिंता: तनाव से वात दोष भड़कता है, जो शरीर के सर्कुलेशन को बिगाड़ता है।

Tophi (गाँठ) के जोखिम और गंभीर जटिलताएँ

इस गाँठ को अगर अनदेखा किया जाए या सही समय पर इलाज न मिले, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • जोड़ों का स्थायी नुकसान: गाँठें बढ़ने से कार्टिलेज और हड्डियाँ पूरी तरह नष्ट हो सकती हैं, जिससे उँगलियाँ हमेशा के लिए काम करना बंद कर देती हैं।
  • त्वचा का फटना और इन्फेक्शन: कई बार बड़ी गाँठें त्वचा फाड़कर बाहर आ जाती हैं, जिससे सफेद पाउडर जैसा पदार्थ निकलता है और भयंकर इन्फेक्शन हो सकता है।
  • किडनी फेलियर का खतरा: बढ़ा हुआ यूरिक एसिड किडनी में जमा होकर उसके काम करने की क्षमता को खत्म कर सकता है।
  • मानसिक तनाव और डिप्रेशन: लगातार दर्द के डर और उँगलियों के टेढ़े होने से इंसान का सामान्य काम करना मुश्किल हो जाता है, जिससे वह डिप्रेशन का शिकार हो जाता है।

समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

Tophi (वातरक्त) पर आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से यूरिक एसिड का बढ़ना और गाँठ बनना सिर्फ जोड़ों की दिक्कत नहीं है। आयुर्वेद में इसे 'वातरक्त' (Vatarakta) या 'आढ्य वात' की श्रेणी में रखा जाता है। यहाँ यह माना जाता है कि जब शरीर में बिगड़ा हुआ वात दोष और दूषित रक्त आपस में मिल जाते हैं, तो ये शरीर के छोटे जोड़ों (जैसे उँगलियों और पंजों) में जाकर जमा हो जाते हैं और सख्त क्रिस्टल बनाते हैं। डॉक्टर नाड़ी देखकर ढूँढते हैं कि बीमारी किस स्तर तक पहुँच चुकी है। जब तक यह दूषित रक्त और वात शरीर में रहेगा, दर्द की तकलीफ बार-बार लौटकर आती रहेगी। आयुर्वेद में बस दर्द को दबाना मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, खून साफ हो, मेटाबॉलिज़्म सुधरे और गाँठें प्राकृतिक रूप से पिघल कर बाहर आएँ।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण क्या है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके शरीर के अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: गाँठ का आकार, दर्द उठने के समय और सूजन की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: पिछली बीमारियाँ, यूरिक एसिड का स्तर और खायी गई भारी दर्द निवारक दवाओं का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • जीवनशैली का विश्लेषण: रोज़ाना के खान-पान, शराब का सेवन और पाचन की स्थिति को परखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: वात और दूषित रक्त को पकड़ने के बाद ही मेटाबॉलिज़्म सुधारने और रक्त शोधन का सबसे सटीक इलाज शुरू किया जाता है।

वात शांत करने और Tophi दूर करने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में यूरिक एसिड को बाहर निकालने, वात शांत करने और गाँठ पिघलाने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • गिलोय (Giloy): वातरक्त के लिए इसे सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है। यह खून को साफ करती है और जमे हुए यूरिक एसिड को बाहर निकालती है।
  • पुनर्नवा (Punarnava): यह किडनी को ताक़त देती है और शरीर से एक्स्ट्रा फ्लूइड और सूजन को तेज़ी से खत्म करती है।
  • गुग्गुल (Guggulu): यह जोड़ों की सूजन और दर्द को कम करती है। यह सख्त गाँठ (Tophi) को धीरे-धीरे पिघलाने में बेहद असरदार है।
  • मंजिष्ठा (Manjistha): यह एक बेहतरीन रक्त शोधक (Blood purifier) है, जो अशुद्ध रक्त को साफ कर जोड़ों का लालपन दूर करती है।

गाँठ को पिघलाने के लिए पंचकर्म: आम पाचन और वात शमन

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, दूषित रक्त को बाहर निकालकर लचीले जोड़ पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • विरेचन और वात शमन: जब गाँठ सालों पुरानी हो और व्यक्ति पेनकिलर पर निर्भर हो चुका हो, तो विरेचन (Virechana) जैसी पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • इलाज का समय: यह 7 से 21 दिनों तक चलने वाली वात और रक्त की गहरी सफाई की प्राकृतिक प्रक्रिया है।
  • रक्तमोक्षण (Raktamokshana): दूषित खून को निकालने के लिए लीच थेरेपी (जौंक) का प्रयोग किया जाता है, जिससे जोड़ों का भयंकर दर्द और लालपन तुरंत कम होता है।
  • जोड़ों को खोलने के लिए लेप: सूजन और गाँठ पर खास आयुर्वेदिक लेप लगाया जाता है, जिससे जकड़न पिघलती है और गाँठ नरम होती है।

Tophi और वात के रोगी के लिए सही और शुद्ध आहार

Tophi की समस्या को दूर करने के लिए वात दोष को शांत करने वाला, हल्का और प्यूरिन-फ्री आहार चुनना महत्वपूर्ण है:

क्या खाएँ?

  • पुराना चावल और परवल: भोजन में लौकी, परवल और मूंग की दाल का इस्तेमाल बढ़ाएँ, यह वात को शांत करने में मदद करते हैं।
  • पर्याप्त पानी: दिन भर ढेर सारा हल्का गुनगुना पानी और नारियल पानी पिएँ। यह यूरिक एसिड को यूरिन के ज़रिए बाहर निकालता है।
  • गर्म तासीर वाले मसाले: खाने में धनिया, जीरा और हल्दी का प्रयोग ज़रूर करें, ये सूजन को काटते हैं।

क्या न खाएँ?

  • हाई प्यूरिन (High Purine) फूड: रेड मीट, सीफूड, और ज़्यादा दालों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।
  • शराब और खमीर वाली चीज़ें: बीयर, शराब और ब्रेड जैसी चीज़ें यूरिक एसिड तुरंत बढ़ाती हैं, इनका सेवन न करें।
  • मैदा और खट्टी चीज़ें: टमाटर, पालक, पिज़्ज़ा और पैकेटबंद चीज़ों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, क्योंकि ये शरीर में वात और सूजन बढ़ाते हैं।

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच पूरी समझ के साथ की जाती है। यहाँ कोशिश होती है कि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जाए।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी और गाँठ के लक्षणों को आराम से सुना जाता है।
  • आपकी यूरिक एसिड की रिपोर्ट और पहले इस्तेमाल किए गए पेनकिलर के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके खाने-पीने और प्रोटीनयुक्त चीज़ें लेने की आदतों को समझा जाता है।
  • आपकी नींद, मानसिक तनाव और पेट साफ होने की स्थिति पर ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जाना जाता है।
  • जोड़ों की जकड़न और गाँठ की कठोरता को बारीकी से समझा जाता है।

इन सब चीज़ों को समझने के बाद आपके लिए एक ऐसा इलाज प्लान बनाया जाता है, जो मेटाबॉलिज़्म को सही करे।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

Tophi की समस्या का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय इन बातों पर निर्भर करता है:

  • बीमारी और शरीर की स्थिति: ठीक होने का वक्त कई बातों से तय होता है जैसे गाँठ कितनी पुरानी है और पेनकिलर पर निर्भरता कितनी ज़्यादा है।
  • हल्की समस्या में सुधार: अगर सूजन की शुरुआत है, तो आमतौर पर 4 से 6 हफ्तों में लालपन और दर्द कम होने लगता है।
  • पुरानी गाँठ का पिघलना: अगर गाँठें बड़ी और सख्त हो चुकी हैं (Tophi), तो उन्हें पूरी तरह पिघलने और यूरिक एसिड नॉर्मल होने में 6 महीने से 1 साल या उससे ज़्यादा लग सकता है।
  • स्थायी परिणाम: डाइट का कड़ाई से पालन करने पर यूरिक एसिड काबू में रहता है और भविष्य में सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक उपचार और वात-आधारित आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य यूरिक एसिड दबाना, दर्द कम करना और ज़रूरत पड़ने पर सर्जरी वात संतुलित कर, दूषित रक्त साफ कर जड़ से समस्या खत्म करना
नज़रिया समस्या को केवल यूरिक एसिड/गाँठ तक सीमित मानना मेटाबॉलिज़्म, रक्त शुद्धि और दोष असंतुलन को मूल कारण मानना
उपचार तरीका पेनकिलर, दवाएँ और सर्जरी से अस्थायी समाधान जड़ी-बूटियाँ, पंचकर्म और डिटॉक्स से प्राकृतिक हीलिंग
डाइट और लाइफस्टाइल सीमित डाइट सलाह, दवाओं पर निर्भरता अग्नि सुधार, संतुलित आहार और सही दिनचर्या पर ज़ोर
लंबा असर दोबारा यूरिक एसिड जमा, सर्जरी के बाद भी वापसी संभव गाँठ का प्राकृतिक निवारण और दीर्घकालिक स्थायी आराम

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • जोड़ों में असहनीय दर्द हो और त्वचा बिल्कुल लाल व गर्म हो जाए।
  • उँगलियों की गाँठों का आकार तेज़ी से बढ़ने लगे और वह फटने के कगार पर हों।
  • तेज़ दर्द के साथ बुखार या कंपकंपी छूटने लगे।
  • दर्द निवारक दवा लेने के बाद भी दर्द और सूजन में कोई कमी न आ रही हो।

समय पर सलाह लेने से शरीर को बड़ी जटिलताओं से बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार उँगलियों में Tophi (गाँठ) बनना 'वातरक्त' का बिगड़ा हुआ रूप है। खराब खान-पान, शराब और भारी भोजन से शरीर में वात दोष और यूरिक एसिड बढ़ता है, जो दूषित रक्त के साथ मिलकर जोड़ों में सख्त गाँठ बना लेता है। आधुनिक विज्ञान में सर्जरी से गाँठ निकाल दी जाती है, लेकिन जड़ में मौजूद वात और अशुद्ध रक्त वहीं रहता है। इलाज में वात का शमन और खून की सफाई सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। गिलोय, पुनर्नवा जैसी जड़ी-बूटियों और सही डाइट से गाँठ को प्राकृतिक रूप से पिघलाया जा सकता है।

FAQs

हाँ, आयुर्वेदिक औषधियों (जैसे गुग्गुल और गिलोय) और सख्त डाइट का पालन करने से यूरिक एसिड के क्रिस्टल को धीरे-धीरे पिघलाकर शरीर से बाहर निकाला जा सकता है, जिससे सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती।

हाँ, आयुर्वेद के अनुसार बढ़ा हुआ वात दोष शरीर के मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है, जिससे भोजन सही से पचता नहीं है और विषैले तत्त्व यूरिक एसिड के रूप में रक्त में मिलने लगते हैं।

बिल्कुल, शराब (खासकर बीयर) में प्यूरिन की मात्रा बहुत अधिक होती है और यह किडनी को यूरिक एसिड बाहर निकालने से रोकती है, जिससे गाँठ तेज़ी से बढ़ती है।

हाँ, टमाटर के बीज और पालक में ऑक्सालेट और प्यूरिन पाया जाता है, जो जोड़ों में जाकर जमा होने लगता है और वात दोष को भड़काकर सूजन पैदा करता है।

गाउट (वातरक्त) के तीव्र दर्द और लालपन में गर्म सिकाई करने से दर्द और जलन बढ़ सकती है। इसमें ठंडी बर्फ की सिकाई या कमरे के तापमान वाले आयुर्वेदिक लेप ज़्यादा फायदा करते हैं।

हाँ, ज़्यादातर मामलों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल सबसे पहले पैर के अँगूठे के जोड़ में जमा होते हैं, जहाँ अचानक भयंकर दर्द और भारी सूजन आ जाती है।

हाँ, लीच थेरेपी वातरक्त में बेहद कारगर है। यह जोड़ों में जमा दूषित और अशुद्ध खून को चूस लेती है, जिससे भयंकर लालपन और दर्द में जादुई तरीके से आराम मिलता है।

पानी सीधे गाँठ को नहीं पिघलाता, लेकिन ज़्यादा पानी पीने से किडनी को बढ़ा हुआ यूरिक एसिड यूरिन के रास्ते बाहर निकालने में बहुत मदद मिलती है, जिससे नई गाँठें नहीं बनतीं।

नहीं, पेनकिलर्स सिर्फ कुछ समय के लिए मस्तिष्क तक दर्द के सिग्नल को रोकती हैं, वे यूरिक एसिड के क्रिस्टल या वात दोष को खत्म नहीं करतीं।

नहीं, अगर यूरिक एसिड को शुरुआती दौर में ही सही खान-पान और आयुर्वेदिक दवाओं से कंट्रोल कर लिया जाए, तो यह गाँठ का रूप नहीं लेता। गाँठ तब बनती है जब बीमारी बहुत पुरानी हो जाए।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us