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रात 3 बजे नींद टूटती है, फिर नहीं आती - Liver Detox Time या Stress?

Information By Dr. Keshav Chauhan

अक्सर ऐसा होता है कि आप रात को गहरी नींद में सो रहे होते हैं, लेकिन अचानक रात के 2:30 या 3:00 बजे आपकी आँख खुल जाती है। शुरुआत में आप इसे एक सामान्य बात मानकर करवट बदल लेते हैं, लेकिन जब यह आपकी रोज़मर्रा की आदत बन जाए और एक बार नींद टूटने के बाद घंटों तक दोबारा नींद न आए, तो यह कोई सामान्य बात नहीं है।

आधुनिक विज्ञान और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में इस 3 AM Wake-up Call को शरीर का एक महत्वपूर्ण संकेत माना गया है। कई लोग असमंजस में रहते हैं कि क्या यह अत्यधिक तनाव का परिणाम है, या फिर यह शरीर के लिवर डिटॉक्स का समय है, जिसमें कोई बाधा आ रही है? सच्चाई यह है कि यह इन दोनों का या किसी एक का परिणाम हो सकता है।

यदि आप भी हर रात एक ही समय पर जाग जाते हैं और फिर विचारों के भंवर में फंसकर करवटें बदलते रहते हैं, तो आपके लिए यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आपका शरीर आपको क्या बताने की कोशिश कर रहा है।

आयुर्वेद इस समस्या को कैसे समझता है?

आधुनिक चिकित्सा जिसे केवल स्लीप साइकिल का टूटना मानती है, आयुर्वेद उसे शरीर में भड़के हुए वात दोष, 'पाचक पित्त' की विकृति और लिवर में जमे भारी 'आम' के विज्ञान से गहराई से समझता है:

वात का समय: आयुर्वेद के अनुसार, रात के 2 बजे से सुबह 6 बजे तक का समय वात दोष का होता है। वात गति और विचारों का प्रतीक है। जब आप भारी तनाव में होते हैं, तो यह बढ़ा हुआ वात आपको 3 बजे अचानक जगा देता है और दिमाग में विचारों की रेलगाड़ी चला देता है।

रंजक पित्त और लिवर का संबंध: लिवर शरीर का मुख्य डिटॉक्स ऑर्गन है और 'पित्त' का स्थान है। जब रात में भारी भोजन या खराब जीवनशैली के कारण लिवर पित्त को साफ़ करने में संघर्ष करता है, तो शरीर में उष्मा (गर्मी) बढ़ती है, जो सीधे नींद को तोड़ देती है।

अग्निमांद्य और 'आम': जब आपका पाचन तंत्र सुस्त होता है, तो पेट में 'आम' (Toxins) बनता है। यह 'आम' लिवर के रास्तों को ब्लॉक कर देता है, जिससे रात के समय शरीर सही से डिटॉक्स नहीं हो पाता।

कौन-कौन से लक्षणों पर नज़र रखने की ज़रूरत है?

जब रात 3 बजे नींद खुलती है, तो शरीर कुछ अन्य संकेत भी देता है जिन पर ध्यान देने की ज़रूरत है:

  • दिल की धड़कन का तेज़ होना: नींद खुलने पर अक्सर ऐसा महसूस होता है कि दिल बहुत तेज़ी से धड़क रहा है या छाती में घबराहट हो रही है। यह तनाव और बढ़े हुए Cortisol हार्मोन का सीधा संकेत है।
  • पसीना आना या शरीर का गर्म होना: रात के समय अचानक पसीने से भीग जाना या शरीर में अत्यधिक गर्मी महसूस होना लिवर की बढ़ी हुई गर्मी या मेनोपॉज़ का लक्षण हो सकता है।
  • विचारों का न रुकना: आँख खुलते ही अगले दिन के कामों की चिंता, अतीत की बातें या बिना किसी कारण के एंग्जायटी होना, जो वात दोष के असंतुलन को दर्शाता है।
  • सुबह उठने पर अत्यधिक थकान: क्योंकि आपकी नींद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा टूट चुका होता है, इसलिए सुबह उठने पर आप तरोताज़ा महसूस करने के बजाय थका हुआ और चिड़चिड़ा महसूस करते हैं।
  • अगले दिन पाचन में गड़बड़ी: नींद पूरी न होने और लिवर के ठीक से डिटॉक्स न कर पाने के कारण अगले दिन गैस, ब्लोटिंग या कब्ज़ जैसी समस्याएँ सतह पर आने लगती हैं।

नींद टूटने की जड़: किन कारणों से होता है ऐसा?

यह समस्या रातोंरात उत्पन्न नहीं होती। यह हमारी लंबे समय की गलत जीवनशैली, खान-पान और मानसिक तनाव का मिला-जुला परिणाम है।

  • अत्यधिक मानसिक तनाव: जब आप बहुत ज्यादा तनाव में होते हैं, तो आपके शरीर की 'फाइट और फ्लाइट' (Fight or Flight) प्रतिक्रिया हमेशा सक्रिय रहती है। रात 3 बजे के आसपास शरीर प्राकृतिक रूप से कोर्टिसोल को थोड़ा बढ़ाता है ताकि सुबह उठने की तैयारी हो सके। लेकिन अगर आप पहले से ही तनाव में हैं, तो यह कोर्टिसोल का स्तर अचानक बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है और आपको झटके से जगा देता है।
  • लिवर पर अत्यधिक बोझ: रात को बहुत देर से खाना खाना, गरिष्ठ भोजन करना, जंक फूड, या सोने से पहले शराब पीने की आदत आपके लिवर को आराम नहीं करने देती। जब लिवर रात 1-3 बजे के बीच डिटॉक्स की प्रक्रिया शुरू करता है, तो उसे टॉक्सिन्स से लड़ने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, और यह शारीरिक संघर्ष आपकी नींद में खलल डालता है।
  • ब्लड शुगर का अचानक गिरना: अगर आपने रात का भोजन बहुत जल्दी कर लिया है या आपके भोजन में सही पोषण नहीं था, तो रात 2-3 बजे के आसपास आपका ब्लड शुगर लेवल बहुत नीचे गिर सकता है। ब्लड शुगर को वापस सामान्य करने के लिए शरीर Adrenaline रिलीज़ करता है, जो आपको तुरंत जगा देता है।
  • सोने से पहले स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग: मोबाइल या लैपटॉप से निकलने वाली ब्लू लाइट आपके मस्तिष्क को यह संकेत देती है कि अभी दिन है। इससे Melatonin का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे नींद बहुत कच्ची रहती है और आसानी से टूट जाती है।
  • दबी हुई भावनाएँ: आयुर्वेद और कई पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ मानती हैं कि क्रोध, हताशा और दबी हुई भावनाएँ सीधे तौर पर लिवर और पित्त को प्रभावित करती हैं। यदि आप किसी बात को लेकर अंदर ही अंदर घुट रहे हैं, तो यह मानसिक ऊर्जा रात के सन्नाटे में आपको जगा देती है।

इस समस्या का आयुर्वेद कैसे निवारण करता है?

अनिद्रा और बार-बार नींद टूटने की समस्या का इलाज करने के लिए आयुर्वेद नर्वस सिस्टम को शांत करने और लिवर को डिटॉक्स करने वाली प्राकृतिक सामग्रियों का सहारा लेता है।

नींद और नर्वस सिस्टम में सुधार करने वाली जड़ी-बूटियाँ

  • जटामांसी: यह आयुर्वेद में मस्तिष्क को शांत करने वाली सबसे शक्तिशाली जड़ी-बूटियों में से एक है। यह विचारों की गति को धीमा करती है और नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करके गहरी नींद लाने में मदद करती है।
  • ब्राह्मी: ब्राह्मी तनाव और एंग्जायटी को कम करने के लिए जानी जाती है। यह मस्तिष्क की नसों को शीतलता प्रदान करती है और वात दोष को संतुलित करती है।
  • अश्वगंधा: यह एक बेहतरीन एडाप्टोजेन (Adaptogen) है जो शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को कम करता है और तनाव से लड़ने की शारीरिक और मानसिक क्षमता को बढ़ाता है।
  • कुटकी और भूमि आँवला: यदि आपकी नींद टूटने का कारण लिवर का ओवरलोड होना है, तो ये दोनों जड़ी-बूटियाँ लिवर की कार्यक्षमता को सुधारने और पित्त को संतुलित करने में अचूक हैं।

इस परेशानी में कौन-कौन सी पंचकर्म therapies मदद करती हैं?

लंबे समय के तनाव और शरीर में जमे टॉक्सिन्स को बाहर निकालने के लिए पंचकर्म थेरेपी बहुत प्रभावी साबित होती है:

  • शिरोधारा: इस थेरेपी में माथे के बीचों-बीच गुनगुने औषधीय तेल या काढ़े की निरंतर धारा गिराई जाती है। यह थेरेपी सीधे आपके नर्वस सिस्टम पर काम करती है, एंग्जायटी को जड़ से खत्म करती है और Pineal Gland को उत्तेजित करके मेलाटोनिन के स्राव को बढ़ाती है।
  • पादाभ्यंग: सोने से पहले पैरों के तलवों की औषधीय तेल या गाय के घी से मालिश करने से शरीर का बढ़ा हुआ वात तुरंत शांत होता है। यह पैरों से सिर तक एक रिलैक्सिंग सिग्नल भेजता है जिससे नींद गहरी होती है।
  • नस्य: नाक में औषधीय तेल की कुछ बूंदें डालना मस्तिष्क के तनाव को कम करता है और प्राण वायु को संतुलित करता है।

रात को अच्छी नींद और लिवर डिटॉक्स के लिए आहार कैसा होना चाहिए?
क्या खाएँ क्या न खाएँ
रात का भोजन हल्का और सुपाच्य रखें (जैसे लौकी, तोरई, मूंग दाल, दलिया या खिचड़ी)। रात को भारी और गरिष्ठ भोजन (जैसे राजमा, छोले, उड़द दाल, या पनीर के भारी व्यंजन)।
सोने से पहले एक चुटकी जायफल (Nutmeg) या अश्वगंधा के साथ हल्का गुनगुना दूध। शाम 4 बजे के बाद कैफीन (चाय, कॉफी) या सोने से पहले शराब (Alcohol) का सेवन।
कैमोमाइल टी (Chamomile Tea) या सौंफ-जीरे का पानी जो पित्त को शांत करे। अत्यधिक तीखा, मिर्च-मसालेदार और प्रोसेस्ड जंक फूड जो लिवर की गर्मी बढ़ाता है।
शाम के समय ताजे फल या मुट्ठी भर भिगोए हुए नट्स (बादाम, अखरोट) ताकि ब्लड शुगर न गिरे। रात को बहुत अधिक मीठा या रिफाइंड चीनी (Sugar) जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल आए।

क्या सालों पुरानी अनिद्रा में भी सुधार संभव है?

सालों पुरानी नींद न आने या बार-बार नींद टूटने की समस्या में भी सुधार किया जा सकता है। आयुर्वेद में इस समस्या का इलाज केवल नींद की गोलियाँ देकर नहीं, बल्कि उसकी मुख्य जड़ को समझकर किया जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टर हर मरीज की शारीरिक प्रकृति के आधार पर कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट और डाइट प्लान तैयार करते हैं। सही आयुर्वेदिक मार्गदर्शन, शुद्ध औषधियों और अपनी जीवनशैली में थोड़े से अनुशासन के साथ आप दोबारा एक गहरी और सुकून भरी नींद का आनंद ले सकते हैं।

दिनचर्या का क्या महत्व है?

आयुर्वेद में सही दिनचर्या को ही आधी दवा माना गया है। हमारे शरीर की अपनी एक जैविक घड़ी होती है, जिसे सही रूटीन से ही सेट किया जा सकता है।

  • भोजन का निश्चित समय: रात का खाना सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले खा लें। इससे आपके लिवर को भोजन पचाने का पूरा समय मिल जाता है और रात 1-3 बजे के बीच वह सिर्फ डिटॉक्स पर फोकस कर पाता है, जिससे नींद नहीं टूटती।
  • डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप बंद कर दें। इसकी जगह कोई अच्छी किताब पढ़ें, हल्का संगीत सुनें या ध्यान करें।
  • एक ही समय पर सोएँ: रोज़ रात को एक ही समय पर बिस्तर पर जाने की आदत डालें। इससे शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक सेट हो जाती है और वात काल (रात 2 बजे) शुरू होने तक आप गहरी नींद के चरण में पहुंच चुके होते हैं।

आयुर्वेदिक इलाज आधुनिक उपचार से कैसे अलग है?

मॉडर्न मेडिसिन और आयुर्वेद, दोनों ही चिकित्सा पद्धतियाँ बीमारी को ठीक करने के लिए अलग-अलग रास्ते अपनाती हैं। जहाँ आधुनिक चिकित्सा में नींद न आने पर स्लीपिंग पिल्स या एँटी-एंग्जायटी दवाएँ दी जाती हैं, वे दवाएँ आपके दिमाग को कृत्रिम रूप से सुन्न कर देती हैं। इनके लंबे इस्तेमाल से शरीर इनका आदी हो जाता है, सुबह उठने पर भारीपन रहता है, और जैसे ही आप दवा छोड़ते हैं, समस्या फिर से वापस आ जाती है।

इसके विपरीत, आयुर्वेद पूरी तरह से सौम्य और Holistic दृष्टिकोण रखता है। यह केवल लक्षणों को दबाता नहीं, बल्कि शरीर के तनाव हार्मोन को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करता है और लिवर की सफाई करता है। आयुर्वेद आपके शरीर को सिखाता है कि प्राकृतिक रूप से कैसे सोया जाए, ताकि बीमारी दोबारा न लौटे और आपको किसी बाहरी दवा की निर्भरता न रहे।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको रात-रात भर जागने की इस तकलीफ, तनाव और नींद की गोलियों के कन्फ्यूजन में अकेला नहीं छोड़ते। एक स्वस्थ, तनाव-मुक्त और गहरी नींद वाले जीवन की ओर हर कदम पर हम आपका पूर्ण मार्गदर्शन करते हैं:

  • संपर्क करें: बेझिझक होकर हमारे हेल्थ एक्सपर्ट्स से +919266714040 पर संपर्क करें और अपनी नींद के पैटर्न, मानसिक तनाव और पेट से जुड़ी समस्याओं के बारे में विस्तार से बात करें।
  • कंसल्टेशन और नाड़ी परीक्षण: हमारे अनुभवी डॉक्टर आपकी शारीरिक और मानसिक स्थिति का आकलन करते हैं, नाड़ी परीक्षण करते हैं और यह पता लगाते हैं कि नींद टूटने की असली वजह बढ़ा हुआ वात है या कमज़ोर लिवर।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके शरीर के बिगड़े हुए दोषों के अनुसार आपके लिए खास जड़ी-बूटियाँ, विशेष पंचकर्म थेरेपी और एक असरदार डाइट रूटीन तैयार किया जाता है।

शरीर और मन को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स होने में कितना समय लगता है?

सालों से बिगड़ी हुई Sleep Cycle, ओवरलोडेड लिवर और तनावग्रस्त नर्वस सिस्टम को दोबारा प्राकृतिक व शांत अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 2-3 हफ्ते: मेध्य रसायन और हल्के आहार के प्रभाव से आपको मन में शांति महसूस होने लगेगी। रात 3 बजे नींद टूटने की फ्रीक्वेंसी कम होने लगेगी और अगर नींद टूट भी गई, तो दोबारा आसानी से आ जाएगी।
  • 1-2 महीने: आपके शरीर का बढ़ा हुआ कोर्टिसोल लेवल काफी हद तक सामान्य हो जाएगा। लिवर के डिटॉक्स होने से पाचन में सुधार होगा, सुबह उठने पर भारीपन की जगह ताजगी महसूस होगी।
  • 3-4 महीने: आपकी बायोलॉजिकल क्लॉक पूरी तरह से रीसेट हो जाएगी। आप बिना किसी नींद की गोली या सप्लीमेंट के, एक गहरी, गहरी और सुकूनभरी नींद का अनुभव करेंगे।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

वैसे तो रात में नींद का टूटना तनाव या लाइफस्टाइल का परिणाम होता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये गंभीर बदलाव या 'रेड फ्लैग्स' दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • सांस रुकना या खर्राटे: यदि रात में अचानक सांस उखड़ने के कारण, हाँफते हुए या गले में घुटन महसूस होने के कारण आपकी नींद टूटती है। यह स्लीप एप्निया का लक्षण हो सकता है जो हृदय के लिए खतरनाक है।
  • अत्यधिक डिप्रेशन: यदि नींद न आने के साथ-साथ आपको बहुत अधिक निराशा, जीवन के प्रति अरुचि या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आते हैं।
  • सीने या शरीर में तेज़ दर्द: यदि नींद टूटने का कारण सीने में भारीपन, बायीं बांह में दर्द या शरीर के किसी भी हिस्से में असहनीय दर्द है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण अनिद्रा और स्ट्रेस की समस्या पर कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद में रात 3 बजे नींद टूटने जैसी गंभीर समस्याओं का इलाज केवल नींद की गोलियाँ देकर नहीं, बल्कि एक समग्र चिकित्सा दृष्टिकोण (Holistic Healing) से किया जाता है। यहाँ डॉक्टर प्रत्येक मरीज की प्रकृति (विशेषकर लिवर से जुड़े पित्त और स्ट्रेस से जुड़े वात दोष) के मूल कारण को समझने के बाद विशेष हर्बल दवाएँ, व्यक्तिगत आहार योजना और कस्टमाइज्ड जीवनशैली में बदलावों को उपचार में शामिल करते हैं। इस त्रिकोणीय चिकित्सा पद्धति से शरीर में कोई भी कमज़ोरी नहीं बचती, जो लिवर की विषाक्तता या एंग्जायटी को दोबारा पनपने का कारण बन सके। आज ही +919266714040 पर कॉल करके जीवा आयुर्वेद के डॉक्टरों से अपनी कंसल्टेशन बुक करें और पूरी तरह प्राकृतिक और प्रामाणिक तरीके से इस बीमारी से मुक्ति पाएँ।

डॉक्टर की सलाह सीधे अपने फोन पर — WhatsApp Channel से जुड़ें।

FAQs

हाँ, अगर आपकी आँख खुलती है और आपको प्यास या घबराहट महसूस होती है, तो आप आधा गिलास सामान्य तापमान (Room Temperature) या हल्का गुनगुना पानी पी सकते हैं। एक साथ बहुत सारा या फ्रिज का ठंडा पानी पीने से बचें, क्योंकि यह आपके शरीर को पूरी तरह जगा देगा और फिर से सोना मुश्किल कर देगा।

यदि नींद टूट जाए, तो घड़ी या मोबाइल की स्क्रीन बिल्कुल न देखें। सीधे लेटकर 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक (4 सेकंड सांस लें, 7 सेकंड रोकें, 8 सेकंड में धीरे-धीरे छोड़ें) या अनुलोम-विलोम प्राणायाम का अभ्यास करें। यह आपके नर्वस सिस्टम को तुरंत शांत करके वापस नींद की ओर ले जाएगा।

हाँ, इसे हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) कहते हैं। यदि आप रात का खाना बहुत जल्दी खा लेते हैं या उसमें पर्याप्त प्रोटीन और हेल्दी फैट नहीं है, तो रात 2-3 बजे के बीच ब्लड शुगर लेवल गिर सकता है, जो आपको जगा देता है। इससे बचने के लिए शाम के समय कुछ नट्स या सोने से पहले थोड़ा हल्दी वाला दूध लें।

यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। शराब शुरुआत में आपको जल्दी सुला सकती है, लेकिन यह आपके लिवर पर बहुत भारी दबाव डालती है। जब लिवर रात 1-3 बजे के बीच इसे प्रोसेस करता है, तो आपकी नींद का गहरा चरण (Deep Sleep) बाधित होता है और आपकी आँख अचानक खुल जाती है।

नाइट शिफ्ट में काम करने वालों की बायोलॉजिकल क्लॉक (जैविक घड़ी) उलटी हो जाती है, जिससे वात और पित्त दोनों असंतुलित हो सकते हैं। आपके लिए यह अत्यधिक ज़रूरी है कि आप दिन में जब भी सोएँ, कमरा पूरी तरह से अंधेरा (Pitch Dark) और शांत हो। साथ ही, आपको अपने पाचन को दुरुस्त रखने के लिए बहुत हल्का और सुपाच्य आहार लेना चाहिए।

नहीं। सोने से ठीक पहले इंटेंस वर्कआउट (Heavy Exercise) करने से शरीर में एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, साथ ही शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है, जिससे नींद आने में बहुत मुश्किल होती है। व्यायाम हमेशा सुबह या शाम 6 बजे से पहले कर लेना चाहिए। सोने से पहले केवल हल्की स्ट्रेचिंग या योग निद्रा ही फायदेमंद है।

मेलाटोनिन स्लीप साइकिल को सेट करने या जेट लैग (Jet lag) के लिए कुछ समय के लिए मददगार हो सकता है, लेकिन इसका रोज़ाना इस्तेमाल सही नहीं है। लंबे समय तक इसे लेने से शरीर का प्राकृतिक मेलाटोनिन उत्पादन धीमा हो सकता है। समस्या की जड़ (तनाव या लिवर) पर प्राकृतिक रूप से काम करना अधिक स्थायी समाधान है।

हाँ, दिन में बहुत देर तक सोने से रात की नींद का दबाव (Sleep Drive) कम हो जाता है। अगर आपको बहुत थकान है, तो दोपहर में 20-30 मिनट की एक छोटी झपकी (Power Nap) लेना ठीक है। लेकिन शाम के समय या 1 घंटे से ज्यादा सोने से रात में नींद टूटने की समस्या निश्चित रूप से बढ़ सकती है।

बढ़ती उम्र (विशेषकर 50 के बाद) के साथ शरीर में मेलाटोनिन का स्तर प्राकृतिक रूप से कम होने लगता है और आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात दोष बढ़ने लगता है, जिससे नींद हल्की हो जाती है। हालांकि यह एक हद तक सामान्य है, लेकिन अगर यह आपकी रोज़मर्रा की ऊर्जा को प्रभावित कर रहा है, तो आयुर्वेदिक दिनचर्या (जैसे सोने से पहले पादाभ्यंग) से इसमें बहुत सुधार किया जा सकता है।

बिना विशेषज्ञ की सलाह के कोई भी लिवर डिटॉक्स सप्लीमेंट न लें। आप पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके से अपने लिवर को आराम दे सकते हैं, जैसे रात का खाना जल्दी व हल्का खाना, जंक फूड और रिफाइंड शुगर से बचना, और दिन के समय नींबू पानी, गन्ने का रस या ताज़ा छाछ का सेवन करना।

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