Diseases Search
Close Button
 
 

Antacid लेना बंद करें — जानें क्यों यह एसिडिटी को और गहरा बना रहा है

Information By Dr. Keshav Chauhan

एसिडिटी और भयंकर सीने की जलन से तुरंत राहत पाने के लिए एंटासिड (Antacids) का रोज़ाना इस्तेमाल आज बेहद आम हो गया है। ये दवाइयाँ कुछ समय के लिए पेट के एसिड को दबा देती हैं, जिससे लगता है कि परेशानी  खत्म हो गई। लेकिन सच तो यह है कि लगातार एंटासिड लेना आपकी एसिडिटी को जड़ से और ज़्यादा गहरा बना रहा है। ये दवाइयाँ पेट की प्राकृतिक 'पाचक अग्नि' को कमज़ोर कर देती हैं, जिससे खाना पचने के बजाय सड़ने लगता है और विषैले टॉक्सिन्स ('आम') बनते हैं। बिना इस मूल कारण पर काम किए, पेट को स्वस्थ रखना नामुमकिन है। आइए जानें कि आयुर्वेद कैसे इस  खतरनाक निर्भरता को  खत्म कर पाचन तंत्र को प्राकृतिक रूप से मज़बूत बनाता है।

एंटासिड की ज़रूरत क्यों पड़ती है? एसिडिटी का असली रूप

एसिडिटी (Acidity) या सीने की जलन एक ऐसी स्थिति है, जहाँ पेट में मौजूद पाचक रस (Stomach Acid) ज़रूरत से ज़्यादा बनने लगता है या उल्टी दिशा में भोजन नली (Esophagus) की तरफ आ जाता है। एक सामान्य इंसान में खाना पचना एक सहज प्रक्रिया है, लेकिन एसिडिटी के मरीज़ में खट्टी डकारें, सीने में भारी जलन और पेट फूलने की दिक्कतें होने लगती हैं। जब जलन बर्दाश्त से बाहर हो जाती है, तब तुरंत राहत के लिए लोग एंटासिड या गैस की गोली (PPIs/Antacids) खा लेते हैं। लेकिन ये दवाइयाँ बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार इस्तेमाल करने पर पेट के प्राकृतिक वातावरण (Gut Flora) और आंतों पर बहुत  खराब असर डालती हैं।

एसिडिटी और एंटासिड से जुड़ी पेट की बीमारियाँ कितनी तरह की होती हैं?

एंटासिड का अत्यधिक इस्तेमाल मुख्य रूप से पाचन तंत्र की इन गंभीर बीमारियों को जन्म देता है या छुपाता है:

  • गर्ड (GERD - Gastroesophageal Reflux Disease): यह एसिडिटी का सबसे भयंकर रूप है। इसमें पेट का एसिड बार-बार भोजन नली में वापस आता है, जिससे गले में घाव और छाले हो जाते हैं।
  • गैस्ट्राइटिस (Gastritis): इसमें पेट की अंदरूनी परत पर भारी सूजन आ जाती है, जिससे लगातार दर्द और मतली (Nausea) महसूस होती है।
  • पेप्टिक अल्सर (Peptic Ulcers): अत्यधिक एसिड और 'आम' के कारण पेट या छोटी आंत की सतह पर गहरे घाव हो जाते हैं।
  • आईबीएस (IBS - Irritable Bowel Syndrome): एंटासिड से पाचन कमज़ोर होने के कारण मल कभी बहुत सख्त (कब्ज़) तो कभी पानी जैसा (दस्त) आने लगता है।

एंटासिड का असर  खत्म होने पर दिखने वाले एसिडिटी के भयंकर लक्षण

एंटासिड से तुरंत आराम मिलने के बाद बीमारी का बार-बार लौट आना पाचन तंत्र की गहरी कमज़ोरी का संकेत है। इसे 'रिबाउंड एसिडिटी' (Rebound Acidity) कहते हैं। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • भयंकर सीने की जलन (Heartburn): सीने के बीचों-बीच और गले तक आग लगने जैसी चुभन महसूस होना।
  • खट्टी डकारें और मतली: मुँह में कड़वा या खट्टा पानी भर आना और उल्टी करने का मन करना।
  • पेट का भारीपन: थोड़ा सा खाना खाने पर ही पेट गुब्बारे की तरह फूल जाना और गैस पास न होना।
  • दवा पर शरीर की निर्भरता: एंटासिड की गोली का असर  खत्म होते ही कुछ ही घंटों में एसिडिटी का पहले से भी ज़्यादा भयंकर रूप में वापस आ जाना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

एंटासिड के बाद भी एसिडिटी लौटने और पाचन कमज़ोर होने के असली कारण

रोज़ाना गैस की गोली खाने के बाद भी एसिडिटी बढ़ने के पीछे गहरे अंदरूनी कारण होते हैं:

  • पाचक अग्नि का बुझ जाना: एंटासिड पेट के एसिड को बिल्कुल  खत्म कर देते हैं। एसिड के बिना खाना पचता नहीं, बल्कि सड़ता है, जिससे शरीर में भयंकर 'आम' (Toxins) बनता है। यह 'आम' ही पुरानी एसिडिटी का असली जनक है।
  • रिबाउंड एसिडिटी (Rebound Acidity): जब आप एंटासिड लेते हैं, तो शरीर को लगता है कि एसिड कम है, इसलिए दवा का असर  खत्म होते ही पेट दोगुने ज़ोर से और भी ज़्यादा एसिड बनाने लगता है।
  • गलत खान-पान: बहुत ज़्यादा तीखा, तला-भुना, खट्टी चीज़ें और रात को भारी खाना खाने से पित्त दोष भड़क जाता है।
  • मानसिक तनाव और नींद की कमी: स्ट्रेस और रात को जागने से शरीर का वात और पित्त दोनों बिगड़ जाते हैं, जो सीधे तौर पर पेट में जलन पैदा करते हैं।

कमज़ोर पाचन और एंटासिड को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

एसिडिटी और लगातार एंटासिड के इस्तेमाल को अगर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • पोषक तत्वों की कमी: पेट में एसिड न होने के कारण विटामिन B12, कैल्शियम और आयरन शरीर में जज़्ब (Absorb) नहीं हो पाते, जिससे हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं।
  • हड्डियों का भुरभुरा होना (Osteoporosis): लंबे समय तक गैस की गोलियां खाने से हड्डियों के फैक्चर का  खतरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है।
  • आंतों में इन्फेक्शन: पेट का एसिड  खराब बैक्टीरिया को मारता है। एंटासिड से एसिड कम होने पर पेट और आंतों में भयंकर इन्फेक्शन (Food Poisoning) का  खतरा रहता है।
  • अल्सर और कैंसर का  खतरा: सालों तक एसिडिटी को सिर्फ दवाओं से दबाने और जड़ से न मिटाने से भोजन नली में कैंसर (Esophageal Cancer) का जोखिम बढ़ जाता है।

एंटासिड की निर्भरता कम करने पर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आयुर्वेद के हिसाब से भयंकर एसिडिटी सिर्फ पेट में एसिड की अधिकता नहीं है। आयुर्वेद में इसे 'अम्लपित्त' (Amlapitta) कहा जाता है। यहाँ यह माना जाता है कि जब शरीर में पित्त दोष (गर्मी) बुरी तरह बिगड़ जाता है और पाचन अग्नि 'मन्द' (कमज़ोर) हो जाती है, तब पेट में 'विदग्ध अजीर्ण' (खट्टा अपच) होता है। डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं। आयुर्वेद में बस एसिड को एंटासिड से 'बुझाना' मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, पेट से अतिरिक्त विषैले पित्त की सफाई हो, 'आम'  खत्म हो, और पाचक अग्नि प्राकृतिक रूप से मज़बूत बने ताकि खाना सही से पचे।

जीवा आयुर्वेद पाचन की ताकत वापस लाने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके शरीर (प्रकृति) के अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को दिख रहे सभी लक्षणों, सीने की जलन के समय और डकारों की प्रकृति की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ की पिछली बीमारियाँ, रोज़ सुबह  खाली पेट ली जाने वाली एंटासिड गोलियों (PPIs) का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • जीवनशैली का विश्लेषण: आहार का पेट के रोगों पर गहरा असर होता है। मरीज़ के रोज़ाना के खान-पान, चाय-कॉफी की आदत और तनाव को परखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: इन सभी बातों का अच्छे से विश्लेषण करने और कुपित पित्त को पकड़ने के बाद ही मरीज़ के लिए पाचन सुधारने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

पेट को प्राकृतिक रूप से मज़बूत बनाने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में एसिडिटी को शांत करने, आंतों को शीतलता देने और एंटासिड छुड़ाने में ये 4 जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • आँवला (Amla): आयुर्वेद में इसे बेहतरीन पित्त-शामक माना गया है। यह पेट की गर्मी को तुरंत शांत करता है और पाचन को बिना एसिड बढ़ाए दुरुस्त करता है।
  • मुलेठी (Licorice): यह भोजन नली और पेट की अंदरूनी परत पर एक सुरक्षा कवच (Mucus layer) बनाती है, जिससे छालों और जलन में तुरंत आराम मिलता है।
  • धनिया (Coriander): धनिया का पानी पेट की भयंकर से भयंकर गर्मी को सोख लेता है और खट्टी डकारों को रोकता है।
  • सौंफ (Fennel): यह पेट की गैस को बाहर निकालती है, पाचक अग्नि को बढ़ाती है और भोजन को सड़ने (आम बनने) से रोकती है।

जमे हुए पित्त और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने की पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, जमे हुए पित्त और दोषों को बाहर निकालकर संपूर्ण स्वास्थ्य और मज़बूत पाचन पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • गहरी सफाई और पित्त शोधन: जब एसिडिटी सालों पुरानी हो, बार-बार लौट रही हो और व्यक्ति एंटासिड पर निर्भर हो चुका हो, तो जीवा आयुर्वेद में 'विरेचन' जैसी पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • टॉक्सिन्स बाहर निकालना: 'विरेचन' प्रक्रिया में मरीज़ को औषधीय जड़ी-बूटियाँ देकर पेट साफ कराया जाता है। इससे छोटी आंत में जमा पुराना सड़ा हुआ पित्त और गंदगी पूरी तरह बाहर निकल जाती है।
  • नतीजा: एक बार जब पुराना पित्त शरीर से बाहर हो जाता है, तो पेट में नया और स्वस्थ एसिड बनता है जो खाने को पचाता है, जलाता नहीं।

एंटासिड छुड़ाने और एसिडिटी को जड़ से  खत्म करने वाला आयुर्वेदिक आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि हमारे द्वारा चुने गए आहार का सीधा असर हमारे पित्त दोष पर पड़ता है। एसिडिटी की समस्या को दूर करने के लिए इन डाइट रूल्स का पालन करें:

क्या खाएँ?

  • ठंडा और सुपाच्य भोजन: घी, मूंग की दाल, लौकी और पेठे का इस्तेमाल बढ़ाएँ, यह पित्त को शांत करने में मदद करते हैं।
  • नारियल पानी और सौंफ: दिन में नारियल पानी पिएँ। खाने के बाद थोड़ी सी सौंफ और मिश्री चबाना पेट को साफ और ठंडा रखता है।
  • मीठे और रसीले फल: तरबूज, खरबूजा, और अनार जैसे फल शरीर को अंदर से शीतलता प्रदान करते हैं।

क्या न खाएँ?

  • तीखी और खट्टी चीज़ें: अचार, नींबू, सिरका, इमली और बहुत ज़्यादा मिर्च-मसालों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।
  • चाय और कॉफी:  खाली पेट चाय या कॉफी पीना पेट में तुरंत तेज़ाब (Acid) बनाता है, इसे पूरी तरह छोड़ दें।
  • मैदा और जंक फूड: पिज़्ज़ा, बर्गर, और तली हुई चीज़ों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, क्योंकि ये पचने में भारी होते हैं और एसिडिटी को और भयंकर बनाते हैं।

जीवा आयुर्वेद में एसिडिटी के रोगी की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ ऊपर-ऊपर से लक्षण देखकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, सीने में जलन के समय और लक्षणों को आराम से सुना जाता है।
  • आपकी पुरानी बीमारी और एंटासिड गोलियों की डोज़ के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके खाने-पीने, चाय की आदत और रात को खाने के समय को गहराई से समझा जाता है।
  • आपकी नींद, मानसिक तनाव और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति (विशेषकर पित्त प्रकृति) को जाना जाता है।

कमज़ोर पाचन के इलाज के लिए जीवा आयुर्वेद से कैसे जुड़ें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में एसिडिटी (अम्लपित्त) का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर जलन की शुरुआत है, तो आमतौर पर 3 से 4 हफ्तों में ही खट्टी डकारें कम होने लगती हैं और एंटासिड की ज़रूरत  खत्म होने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर बीमारी सालों पुरानी है और व्यक्ति रोज़  खाली पेट गैस की गोली लेता है, तो पेट की लाइनिंग को पूरी तरह स्वस्थ होने और दोषों को संतुलित होने में 4 से 6 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करता है, तो पाचन मज़बूत हो जाता है और भविष्य में एंटासिड के बिना भी एसिडिटी की संभावना  खत्म हो जाती है।

मरीज़ों का भरोसा

मुझे मुख्य रूप से हाइपरएसिडिटी की समस्या पिछले 21 सालों से थी। इसकी वजह से मुझे गैस फॉर्मेशन, जोड़ों में दर्द जैसी तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। जब एसिडिटी बहुत बढ़ गई थी, तो मेरे चेहरे पर ब्लैक पैचेज आ गए थे और चेहरा काला पड़ने लगा था। तभी मेरे एक साथी ने मुझे जीवा से इलाज कराने की सलाह दी। मैं न्यू बॉम्बे में जीवा आयुर्वेद क्लीनिक के डॉक्टर शिरोडकर से मिला। उन्होंने बताया कि मुझे मुख्य रूप से वात और पित्त की समस्या है। उन्होंने मेरे लिए एक पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट शुरू किया और साथ ही डाइट कंट्रोल करने के लिए कहा। शुरू में मैंने एलोपैथी और आयुर्वेद दोनों को साथ रखा, लेकिन डॉक्टर की सलाह से धीरे-धीरे एलोपैथी कम करना शुरू किया। लगभग एक महीने बाद मैं पूरी तरह से एलोपैथी दवाएं बंद कर चुका था। पिछले 3 महीने के ट्रीटमेंट से मुझे 90% से ज्यादा फायदा हुआ है। इतने वंडरफुल रिजल्ट्स आ सकते हैं, यह मुझे पहले पता नहीं था। थैंक्स टू जीवा पर्सनलाइज्ड आयुर्वेद।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य PPIs/सिरप से पेट के एसिड को ब्लॉक कर तुरंत राहत देना अग्नि को संतुलित कर और पित्त शांत करके पाचन को प्राकृतिक रूप से सुधारना
रोग को समझने का नज़रिया इसे केवल एसिड की अधिकता की समस्या मानना पित्त असंतुलन, ‘आम’ और कमज़ोर अग्नि का परिणाम
उपचार का तरीका एंटासिड/PPIs से लक्षण दबाना जड़ी-बूटियाँ, पाचन सुधार और डाइट से अंदर से संतुलन
असर की गति तुरंत राहत, लेकिन अस्थायी धीरे-धीरे असर, लेकिन गहरा और स्थायी
लंबा असर दवा बंद करते ही रिबाउंड एसिडिटी की संभावना पाचन मज़बूत होकर दीर्घकालिक राहत, दवाओं की ज़रूरत कम

डॉक्टर की सलाह कब लें?

एसिडिटी की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • सीने की जलन के साथ-साथ उल्टी में  खून आए या मल का रंग बिल्कुल काला (Black Stool) हो जाए।
  • बिना किसी कोशिश के वज़न तेज़ी से कम होने लगे।
  • खाना निगलने में भयंकर दर्द महसूस हो या खाना गले में अटकने लगे।
  • एंटासिड लेने के बाद भी सीने और पेट का दर्द कम न हो रहा हो।

निष्कर्ष: 

आयुर्वेद के हिसाब से एंटासिड पर बढ़ती निर्भरता और पुरानी एसिडिटी मुख्य रूप से पित्त दोष के बिगड़ने तथा पाचक अग्नि के कमज़ोर होने से जुड़ी होती है। गलत खान-पान, तनाव, तीखी-खट्टी चीज़ें खाने से शरीर में टॉक्सिन्स ('आम') बनते हैं जो पेट की अंदरूनी परत को जलाते हैं। सिर्फ बाहरी एंटासिड खाने से जलन कुछ देर के लिए दब जाती है लेकिन बीमारी अंदर ही रहती है और पाचन तंत्र काम करना छोड़ देता है। इलाज में पित्त शुद्धि और सही आहार (चाय-कॉफी छोड़ना) सबसे ज़्यादा आवश्यक है, जिससे बीमारी को जड़ से ठीक किया जा सके।

FAQs

हाँ, रोज़ एंटासिड खाने से पेट का प्राकृतिक एसिड कम हो जाता है, जिससे खाना पचना बंद हो जाता है और पेट में भयंकर गैस व टॉक्सिन्स ('आम') बनने लगते हैं।

ठंडा दूध कुछ देर के लिए जलन शांत कर सकता है, लेकिन पचने में भारी होने के कारण यह बाद में फिर से एसिड (Rebound Acidity) बना सकता है। गाय का घी ज़्यादा फायदेमंद है।

बिल्कुल, चाय और कॉफी में कैफीन होता है जो पेट की अंदरूनी परत (Lining) को नुकसान पहुँचाता है और पित्त दोष को तुरंत भड़काकर भयंकर एसिडिटी पैदा करता है।

हाँ, मानसिक तनाव से वात और पित्त दोनों बिगड़ते हैं, जिससे पेट में तेज़ाब का स्राव (Secretion) बढ़ जाता है और सीने में जलन होने लगती है।

हाँ, सौंफ की तासीर ठंडी होती है। इसका पानी पीने से पेट की भयंकर गर्मी शांत होती है और यह पाचक अग्नि को भी प्राकृतिक रूप से मज़बूत करता है।

हाँ, लंबे समय तक गैस की गोली खाने से पेट में एसिड कम हो जाता है, जिससे शरीर खाने में मौजूद कैल्शियम को जज़्ब (Absorb) नहीं कर पाता, नतीजतन हड्डियां कमज़ोर होने लगती हैं।

हाँ, खाना खाकर तुरंत लेटने से पेट का एसिड और अधपचा खाना ग्रैविटी (Gravity) के कारण उल्टी दिशा में भोजन नली (गले) की तरफ आ जाता है, जिससे जलन होती है।

कभी-कभी एसिडिटी का भयंकर दर्द सीने से लेकर बायें हाथ तक जा सकता है जो हार्ट अटैक जैसा लगता है, इसलिए ऐसे गंभीर दर्द में तुरंत डॉक्टर की जाँच करवानी चाहिए।

हाँ, पेट का बढ़ता वज़न (मोटापा) वाल्व पर दबाव डालता है जिससे एसिड ऊपर आता है। वज़न कंट्रोल करने से एसिडिटी की समस्या में काफी आराम मिलता है।

नहीं, सही आयुर्वेदिक आहार, पित्त-शामक जड़ी-बूटियों और तनाव कम करने वाले योगाभ्यास से पाचन तंत्र की ताकत वापस लौट आती है और एंटासिड पर निर्भरता पूरी तरह  खत्म की जा सकती है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us