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Yoga में कौन से Asanas Joint Pain बढ़ाते हैं? सावधानी ज़रूरी

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 18 May, 2026
  • category-iconUpdated on 18 May, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5009

योग शरीर और मन को स्वस्थ रखने का एक अत्यंत प्राचीन और बेहतरीन माध्यम है लेकिन कई बार फिटनेस के जुनून में या अनजाने में हम कुछ ऐसे कठिन आसनों का अभ्यास करने लगते हैं, जो फायदा पहुँचाने के बजाय हमारे शरीर के लिए एक नई मुसीबत खड़ी कर देते हैं

 खासतौर पर जब कोई व्यक्ति पहले से ही घुटनों,कमर या गर्दन की समस्या से जूझ रहा हो, तो गलत तरीके से किया गया कोई भी खिंचाव स्थिति को गंभीर बना सकता है इसलिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि कौन से आसन शरीर के किस हिस्से पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं और उनसे कैसे बचा जाए।

जोड़ों के दर्द Joint Pain में योग करते समय शरीर के साथ क्या होता है?

जब आप पहले से मौजूद दर्द के बावजूद ज़बरदस्ती योग का अभ्यास करते हैं, तो शरीर के भीतर कई बायोमैकेनिकल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जो समस्या को और बढ़ा सकते हैं:

  • कार्टिलेज पर अत्यधिक घर्षण Cartilage Friction: जोड़ों के बीच मौजूद प्राकृतिक गद्दी Cartilage अतिरिक्त दबाव से घिसने लगती है, जिससे हड्डियाँ आपस में टकराकर जोड़ों का दर्द और बढ़ा देती हैं।
  • लिगामेंट्स में अत्यधिक खिंचाव Overstretching of Ligaments: ज़बरदस्ती आगे झुकने या शरीर को मोड़ने वाले आसनों से लिगामेंट्स पर उनकी क्षमता से अधिक दबाव पड़ता है, जिससे उनमें माइक्रो-टियर्स Micro-tears आ सकते हैं।
  • वात का प्रकोप: आयुर्वेद के अनुसार, अत्यधिक या गलत व्यायाम का तरीका शरीर में रूखापन बढ़ाता है, जो जोड़ों की प्राकृतिक चिकनाई को पूरी तरह सोख लेता है।
  • नसों पर दबाव: गलत अलाइनमेंट से रीढ़ की हड्डी और गर्दन की नसों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे दर्द केवल जोड़ों तक सीमित न रहकर हाथों और पैरों तक रेडिएट होने लगता है।

गलत योगासनों के कारण जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव के प्रकार क्या हैं?

हर आसन का प्रभाव शरीर के अलग-अलग हिस्सों और जोड़ों पर अलग तरह से होता है। जोड़ों के दर्द के प्रकार को हम इन मुख्य श्रेणियों में बाँट सकते हैं:

  • घुटनों पर पड़ने वाला दबाव Knee-centric stress: पद्मासन, वज्रासन या वीरभद्रासन जैसे पोज़, जिनमें घुटनों को तीव्रता से मोड़ना या उन पर शरीर का पूरा भार डालना पड़ता है, वे चलते समय घुटने का दर्द और गंभीर बना सकते हैं।
  • रीढ़ की हड्डी का अत्यधिक घुमाव Spinal compression: चक्रासन Wheel pose या भुजंगासन जैसे आसन जहाँ रीढ़ को अत्यधिक पीछे की ओर मोड़ा जाता है, कमर दर्द से जूझ रहे मरीज़ों में स्लिप डिस्क का खतरा बढ़ा सकते हैं।
  • गर्दन और कंधों पर भारी भार Cervical loading: शीर्षासन Headstand या सर्वांगासन जैसे आसनों में शरीर का पूरा भार संवेदनशील गर्दन पर आ जाता है, जो सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के मरीज़ों के लिए बेहद खतरनाक है।

कैसे पहचानें कि कोई योगासन आपके जोड़ों Joints को नुकसान पहुँचा रहा है?

हमारा शरीर हमेशा किसी भी खतरे या अंदरूनी टूट-फूट से पहले संकेत देता है। योग के दौरान या उसके तुरंत बाद इन अलार्मिंग लक्षणों को कभी भी नज़रअंदाज़ न करें:

  • तीखा और अचानक उठने वाला दर्द: आसन करते समय अगर किसी जोड़ में अचानक 'पॉप' Pop की आवाज़ आए या तीखी सुई चुभने जैसा दर्द उठे।
  • लंबे समय तक रहने वाली अकड़न: अभ्यास के अगले दिन सुबह पीठ में अकड़न या घुटनों में भयंकर कड़ापन महसूस होना, जो आसानी से खत्म न हो।
  • सूजन और लालिमा का उभरना: जिस जोड़ पर सबसे ज़्यादा ज़ोर पड़ा हो, वहाँ गर्माहट महसूस होना और सूजन का साफ तौर पर उभर आना।
  • कमज़ोरी और अस्थिरता: योग के बाद सीढ़ियाँ चढ़ते या उतरते समय घुटनों में ऐसा लगना जैसे वे शरीर का वज़न नहीं सह पाएंगे और क्या जोड़ हमेशा के लिए खराब हो गए हैं? जैसा गहरा डर मन में बैठना।
  • अत्यधिक थकान: योग से ऊर्जा मिलनी चाहिए, लेकिन अगर अभ्यास के बाद आपको भारी क्रोनिक फटीग महसूस होती है, तो यह ओवर-स्ट्रेनिंग का संकेत है।

योग के दौरान लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ क्या हैं?

फिटनेस और लचीलापन पाने के उत्साह में लोग अक्सर अपनी शारीरिक सीमाओं को लांघने की गलती कर बैठते हैं, जिसके गंभीर परिणाम उनके मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम Musculoskeletal system को भुगतने पड़ते हैं।

  • ज़बरदस्ती पोज़ होल्ड करना: दर्द होने के बावजूद यह सोचकर आसन में बने रहना कि "नो पेन, नो गेन" No pain, no gain एक बहुत बड़ी गलती है।
  • वार्मअप की कमी: सूखी और जकड़ी हुई मांसपेशियों के साथ बिना सूक्ष्म व्यायाम के अचानक कठिन आसन शुरू कर देना।
  • गलत एलाइनमेंट Alignment: कंप्यूटर के सामने बैठने से ऑफिस का पोस्चर खराब होने के बावजूद, बिना किसी प्रशिक्षित गुरु के मार्गदर्शन के कठिन आसनों का अभ्यास करना।
  • लिगामेंट का टूटना Ligament Tear: यह गलत योग की सबसे बड़ी जटिलता है, जिसे ठीक होने में कई महीने लग सकते हैं।
  • हड्डियों का कमज़ोर होना: गलत दबाव लगातार पड़ने से उन लोगों में हेयरलाइन फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है जो पहले से ही हड्डियों की कमज़ोरी Osteoporosis के शिकार हैं।

आयुर्वेद जोड़ों के दर्द और गलत योगासनों के इस विज्ञान को कैसे समझता है?

आयुर्वेद के अनुसार, योग शरीर के लिए एक बेहतरीन औषधि है, लेकिन अगर इसे शरीर के दोषों और शारीरिक प्रकृति के विपरीत किया जाए, तो यह भयंकर बीमारियों का कारण बन सकता है:

  • वात दोष का अत्यधिक भड़कना: जोड़ों में प्राकृतिक रूप से 'श्लेषक कफ' Lubricant मौजूद होता है। जब हम अपनी क्षमता से अधिक ज़ोर लगाकर आसन करते हैं, तो शरीर में वात दोष भड़क जाता है और जोड़ों की चिकनाई को सुखा देता है।
  • धातु क्षय Tissue Depletion: ज़बरदस्ती किए गए आसनों से रस और रक्त धातु का पोषण मांसपेशियों तक नहीं पहुँच पाता, जिससे हड्डियों अस्थि धातु का क्षय होने लगता है और वे कमज़ोर पड़ जाती हैं।
  • पाचन और अग्नि का प्रभाव: यदि आपकी जठराग्नि कमज़ोर है, तो शरीर में 'आम' टॉक्सिन्स बनता है। गलत योग इस आम को शरीर के विभिन्न हिस्सों में धकेल कर दर्द पैदा करता है, इसलिए पाचन तंत्र का मजबूत होना योग के लिए पहली शर्त है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण इस समस्या पर कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद में हम आपको केवल बाहर से दर्द निवारक लेप लगाकर नहीं छोड़ते। हमारा उद्देश्य आपके क्षतिग्रस्त जोड़ों को अंदर से रिपेयर करना और वात का शमन करना है:

  • दोषों का संतुलन: सबसे पहले प्राकृतिक औषधियों से बढ़े हुए वात को शांत करके जोड़ों के रूखेपन को खत्म किया जाता है ताकि हड्डियों का आपस में घर्षण Friction बंद हो।
  • श्लेषक कफ की वृद्धि: सही आहार और रसायनों के माध्यम से जोड़ों के बीच मौजूद प्राकृतिक चिकनाई Synovial fluid को दोबारा बनाया जाता है।
  • नसों और लिगामेंट्स का पोषण: नाड़ी तंत्र और कमज़ोर हो चुकी मांसपेशियों को बल देने के लिए विशेष रसायन चिकित्सा का प्रयोग किया जाता है, जिससे दर्द जड़ से खत्म होता है।

जोड़ों को अंदर से मजबूत और लचीला बनाने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने जोड़ों को योगासनों के लिए तैयार करने और क्षतिग्रस्त कार्टिलेज को रिपेयर करने के लिए आपको अपने खानपान में बदलाव करना होगा और इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनाना होगा:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - जोड़ों को चिकनाई देने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - वात और रूखापन बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, गेहूं, ओट्स (दूध/घी के साथ), मूंग दाल की खिचड़ी। मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, रूखे और सूखे बिस्कुट।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (जोड़ों के लिए सबसे बड़ा अमृत), तिल का तेल। रिफाइंड ऑयल, डालडा, बहुत ज़्यादा रूखा और बिना तेल-घी का खाना।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, परवल, कद्दू (सभी अच्छी तरह पकी और घी में छौंकी हुई)। कच्चा सलाद (विशेषकर रात में), भारी कटहल, बैंगन, अरबी।
फल (Fruits) पपीता, उबला हुआ सेब (Stewed Apple), रात भर भीगी हुई मुनक्का। कच्चे या बिना मौसम के ठंडे फल, बहुत ज़्यादा खट्टे फल।
पेय पदार्थ (Beverages) गुनगुना पानी, हल्दी वाला दूध (रात में), अदरक का पानी। बर्फ का ठंडा पानी (पाचन के लिए ज़हर है), बहुत ज़्यादा डार्क कॉफी।

जोड़ों की सूजन और दर्द Joint Pain को दूर करने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें कुछ ऐसे नायाब रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड इफ़ेक्ट या लत के क्षतिग्रस्त जोड़ों को प्राकृतिक ताक़त प्रदान करते हैं और नसों की सूजन को खींच लेते हैं:

  • अश्वगंधा Ashwagandha: यह केवल शरीर की कमज़ोरी दूर नहीं करता, बल्कि अश्वगंधा नसों और मांसपेशियों की जकड़न को खोलकर जोड़ों को लचीला और मजबूत बनाता है।
  • गिलोय Giloy: शरीर में सूजन और किसी भी तरह के टॉक्सिन्स को कम करने के लिए गिलोय एक बेहतरीन औषधि है। यह वात-रक्त विकारों को शांत कर कार्टिलेज को घिसने से बचाता है।
  • शल्लकी Shallaki: यह एक बेहद शक्तिशाली और प्राकृतिक दर्द निवारक है, जो जोड़ों के बीच रक्त संचार को सुधारता है और घुटनों व कमर की सूजन को तेजी से घटाता है।
  • निर्गुंडी Nirgundi: इसके पत्तों का लेप या तेल जोड़ों के तीखे दर्द, विशेषकर जब गलत आसन के कारण कोई मस्कुलर चोट लगी हो, उसे शांत करने के लिए जादू की तरह काम करता है।

क्षतिग्रस्त जोड़ों और नसों को रिपेयर करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब योग के दौरान किसी गलत खिंचाव के कारण दर्द और वात शरीर में बहुत गहराई तक बैठ जाए, तो पंचकर्म की ये एक्सटर्नल थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रिबूट कर देती हैं:

  • अभ्यंग मालिश Abhyanga: शुद्ध वातनाशक औषधीय तेलों से संपूर्ण शरीर की अभ्यंग मालिश करने से जकड़ी हुई मांसपेशियां पूरी तरह रिलैक्स होती हैं और फँसी हुई गैस व दर्द दूर होता है।
  • स्वेदन थेरेपी Swedana: तेल मालिश के तुरंत बाद दी जाने वाली हर्बल भाप Steam यानी स्वेदन थेरेपी नसों के गहरे ब्लॉकेज को खोलती है और दर्द पैदा करने वाले जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है।
  • कटि बस्ती Kati Basti: यदि गलत झुकने वाले आसन के कारण कमर में गहरी चोट लगी है, तो कमर पर हल्का गुनगुना औषधीय तेल रोकने की यह कटि बस्ती थेरेपी स्लिप डिस्क में अद्भुत लाभ देती है।
  • ग्रीवा बस्ती Greeva Basti: शीर्षासन के गलत अभ्यास से यदि गर्दन में अकड़न आ गई है, तो गर्दन का दर्द जड़ से शांत करने के लिए ग्रीवा बस्ती सबसे अचूक उपाय है।
  • मात्रा बस्ती Matra Basti: बड़ी आंत से वात को पूरी तरह खत्म करने के लिए तेल की मात्रा बस्ती दी जाती है, जो पूरे शरीर के जोड़ों को भीतर से चिकनाई देती है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

हम आपके दर्द और लक्षणों को केवल ऊपर-ऊपर से देखकर कोई जेनेरिक चूर्ण नहीं थमाते; जीवा आयुर्वेद में हमारी जाँच प्रक्रिया अत्यंत सूक्ष्म और मूल कारण पर आधारित होती है:

  • नाड़ी परीक्षा: विशेषज्ञ डॉक्टर सबसे पहले आपकी नाड़ी Pulse चेक करके यह जांचते हैं कि शरीर में वात, पित्त और कफ दोषों का संतुलन कितना बिगड़ा हुआ है।
  • शारीरिक मूल्याँकन: आपके प्रभावित जोड़ों की रेंज ऑफ मोशन Range of motion, वहाँ मौजूद सूजन, कड़ापन और त्वचा के तापमान की बहुत बारीकी से क्लिनिकल जाँच की जाती है।
  • लाइफस्टाइल ऑडिट: आप कौन से योगासनों का अभ्यास कर रहे हैं? क्या आप लगातार बैठे रहने वाला काम करते हैं? आपकी अच्छी नींद की आदतें कैसी हैं? इन सभी आदतों का गहराई से विश्लेषण किया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

दर्द और शारीरिक निराशा की इस स्थिति में हम आपको अकेला नहीं छोड़ते। एक स्वस्थ, दर्द-मुक्त और लचीले जीवन की ओर हर कदम पर हम आपका पूर्ण मार्गदर्शन करते हैं:

  • जीवा से संपर्क करें: आप बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर +919266714040 पर कॉल कर सकते हैं और अपनी योग से जुड़ी इंजरी या जोड़ों के दर्द के बारे में विस्तार से बात कर सकते हैं।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप भारत भर में स्थित हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिलकर परामर्श ले सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर काम की व्यस्तता के कारण क्लिनिक आना मुश्किल हो, तो आप अपने घर बैठे वीडियो कॉल के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टर से बात कर सकते हैं।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके दोषों के अनुसार खास जड़ी-बूटियाँ, वातशामक औषधियाँ, पंचकर्म थेरेपी और एक आपके अनुकूल आयुर्वेदिक डाइट रूटीन तैयार किया जाता है।

क्षतिग्रस्त जोड़ों के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

गलत योगाभ्यास और ज़बरदस्ती किए गए खिंचाव से कमज़ोर हुए लिगामेंट्स और कार्टिलेज को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: सही औषधियों और घी युक्त सात्विक खानपान के सेवन से आपकी सूजन कम होगी और जोड़ों में उठने वाला तीखा दर्द शांत होने लगेगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म चिकित्सा और आयुर्वेदिक रसायनों के निरंतर प्रभाव से जोड़ों का रूखापन खत्म होने लगेगा और चलने-फिरने या योग के बेसिक आसन करने में आत्मविश्वास लौटेगा।
  • 5-6 महीने: आपका मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम Musculoskeletal system पूरी तरह पोषित हो जाएगा और आप बिना किसी दर्द या मानसिक तनाव के अपनी सामान्य व एक्टिव दिनचर्या में लौट पाएंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग Rs.1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपको जीवन भर के लिए तेज़ पेनकिलर्स Painkillers का गुलाम नहीं बनाते, बल्कि आपके शरीर की उस अग्नि को जगाते हैं जो किसी भी शारीरिक टूट-फूट को प्राकृतिक रूप से हील कर सकती है:

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ दर्द को सुन्न करने वाली गोली नहीं देते; हम आपकी जठराग्नि को ठीक करते हैं और जोड़ों से भयंकर वात रूखेपन को जड़ से हटाते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों युवाओं और बुज़ुर्गों को क्रोनिक जोड़ों के दर्द और गलत व्यायाम से होने वाली इंजरी के खतरनाक जाल से निकालकर वापस प्राकृतिक जीवन दिया है।
  • कस्टमाइज्ड केयर: आपका दर्द वात रूखेपन के कारण बढ़ा है, लिगामेंट टियर के कारण है या कफ की कमी से? हमारा इलाज बिल्कुल आपके मूल कारण Root Cause पर आधारित होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: बाज़ार के तेज़ पेनकिलर्स और स्टेरॉयड्स लिवर व किडनी को मार देते हैं, जबकि हमारे आयुर्वेदिक रसायन अश्वगंधा, शल्लकी पूरी तरह सुरक्षित हैं और जोड़ों को प्राकृतिक ताक़त देते हैं।

आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

गलत योगाभ्यास से हुए जॉइंट पेन के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द को महसूस होने से रोकने के लिए पेनकिलर्स या मांसपेशियों को रिलैक्स करने वाली कृत्रिम दवाएं देना। बढ़े हुए वात को शांत करना, जठराग्नि को बढ़ाना और जोड़ों में प्राकृतिक रूप से 'श्लेषक कफ' (चिकनाई) पैदा करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल एक स्थानीय (Local) मस्कुलर या हड्डियों की इंजरी मानना। इसे बिगड़े हुए वात दोष, धातु क्षय और असंतुलित जीवनशैली का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल अक्सर डाइट को लेकर कोई विशेष दिशा-निर्देश नहीं होते, केवल आराम करने की सलाह दी जाती है। खाने में 'स्नेहन' (घी/तेल), वातशामक आहार, और शारीरिक प्रकृति के अनुसार सुरक्षित व्यायाम पर ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर गोलियाँ छोड़ने पर दर्द वापस आ जाता है और लगातार दवाओं से कार्टिलेज कमज़ोर पड़ने लगता है। शरीर की जठराग्नि और लिगामेंट्स अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि वे प्राकृतिक रूप से हील करना सीख जाते हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस वात और दर्द को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको योग के दौरान या बाद में अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • अचानक सुन्नपन या लकवा मार जाना: अगर आसन करने के बाद हाथ या पैर में अचानक भयंकर सुन्नपन आ जाए या वे पूरी तरह काम करना बंद कर दें यह नसों के गंभीर रूप से दबने का संकेत है।
  • जोड़ का अपनी जगह से खिसक जाना Dislocation: अगर अत्यधिक खिंचाव से कंधा या घुटने की कटोरी Patella अपनी जगह से खिसकती हुई महसूस हो और जोड़ का आकार विकृत दिखने लगे।
  • असहनीय दर्द जो लेटने पर भी कम न हो: अगर कमर या गर्दन में ऐसा भयंकर दर्द उठे जो किसी भी पोज़िशन में लेटने या आराम करने पर शांत न हो।
  • जोड़ों में अत्यधिक गर्माहट और बुखार: दर्द के साथ-साथ अगर जोड़ बहुत ज़्यादा लाल हो जाए, वहाँ गर्माहट हो और शरीर में तेज़ बुखार आने लगे यह अंदरूनी इन्फेक्शन या गंभीर चोट का अलार्म हो सकता है।

निष्कर्ष

योग एक संजीवनी है, लेकिन इसे बिना किसी मार्गदर्शक के और शरीर की क्षमता से बाहर जाकर करना इसे ज़हर भी बना सकता है। अपने शरीर और जोड़ों को एक जीवन भर साथ निभाने वाली संपत्ति मानें। यदि आप पहले से ही दर्द में हैं, तो ज़बरदस्ती आगे झुकने, घुटने मोड़ने या गर्दन पर भार डालने वाले आसनों को अपनी दिनचर्या से हटा दें। दर्द में योग करके शरीर के अलार्म को नज़रअंदाज़ करना कोई बहादुरी नहीं है; यह एक संकेत है कि आपका वात दोष भड़क चुका है और कार्टिलेज अपनी चिकनाई खो चुका है। दर्द निवारक गोलियों और स्टेरॉयड्स के चक्रव्यूह से बाहर निकलें। अपने जोड़ों को शुद्ध घी, अश्वगंधा और गिलोय का पोषण दें और पंचकर्म की कटि व ग्रीवा बस्ती थेरेपी से अपनी नसों को नया जीवन दें। गलत आसनों के इस बोझ को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा न बनने दें, और अपने जोड़ों को स्थायी रूप से मज़बूत बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

FAQs

नहीं, पूरी तरह से योग बंद करना ज़रूरी नहीं है। आपको केवल उन आसनों से बचना है जो प्रभावित जोड़ पर दबाव डालते हैं। इसके बजाय, आप सूक्ष्म व्यायाम हल्के जॉइंट रोटेशन्स कर सकते हैं जो रक्त संचार को बढ़ाते हैं और अकड़न कम करते हैं।

घुटने के दर्द में पद्मासन Lotus Pose, वज्रासन Diamond Pose, वीरासन Hero Pose और उत्कटासन Chair Pose जैसे आसन बिल्कुल नहीं करने चाहिए, क्योंकि ये घुटने के कार्टिलेज पर अत्यधिक दबाव डालते हैं।

शत-प्रतिशत। बिना वार्मअप के मांसपेशियां ठंडी और सख्त होती हैं। जब आप अचानक उन्हें स्ट्रेच करते हैं, तो टेंडन्स और लिगामेंट्स में खिंचाव या टियर Tear होने का खतरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है।

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस में शीर्षासन Headstand, सर्वांगासन Shoulder Stand, और हलासन Plow Pose से बिल्कुल बचना चाहिए। इन आसनों में शरीर का पूरा भार कमज़ोर सर्वाइकल वर्टिब्रा Cervical vertebrae पर आ जाता है, जो खतरनाक है।

बिल्कुल नहीं। यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। दर्द शरीर का तरीका है यह बताने का कि आप क्षमता से अधिक ज़ोर लगा रहे हैं। दर्द में पोज़ होल्ड करने से लचीलापन नहीं बढ़ता, बल्कि नसें और लिगामेंट्स डैमेज होते हैं।

नहीं। स्लिप डिस्क Lumbar Herniation के मरीज़ों को पश्चिमोत्तानासन Seated Forward Bend या पादहस्तासन जैसे आगे झुकने वाले आसनों से पूरी तरह बचना चाहिए। ये आसन डिस्क पर पीछे की ओर दबाव डालते हैं, जिससे नस दब सकती है।

आयुर्वेद में दर्द का मुख्य कारण वात माना गया है। जब आप क्षमता से अधिक स्ट्रेचिंग करते हैं, तो जोड़ों की प्राकृतिक चिकनाई सूख जाती है और रूखापन Vata बढ़ जाता है, जिससे जोड़ चटकने लगते हैं और दर्द होता है।

यदि आपके जोड़ कमज़ोर हैं, तो पावर योग Power Yoga जैसे तेज़ और झटके वाले अभ्यास सुरक्षित नहीं हैं। यह वात को तेज़ी से भड़काता है और जोड़ों पर अचानक झटके देकर लिगामेंट इंजरी का कारण बन सकता है।

हाँ, यह बहुत सुरक्षित और समझदारी भरा तरीका है। प्रॉप्स शरीर को अतिरिक्त सपोर्ट देते हैं, जिससे आप बिना ज़बरदस्ती किए और बिना जोड़ों पर फालतू दबाव डाले आसनों का सही लाभ ले सकते हैं।

कंधे में चोट लगने पर तुरंत कोई भी भारी वज़न उठाना या उस हाथ से योग करना बंद कर दें। आयुर्वेद के अनुसार, प्रभावित हिस्से पर महानारायण तेल या निर्गुंडी तेल का हल्का गुनगुना लेप लगाकर उसे आराम देना चाहिए और डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

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