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Febuxostat लेना ज़रूरी है या आयुर्वेद से रिवर्स हो सकता है? Doctor की राय

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 14 May, 2026
  • category-iconUpdated on 14 May, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5004

रात के 2 बजे आपके पैर के अंगूठे में अचानक ऐसा दर्द उठता है मानो किसी ने हथौड़ा मार दिया हो। सुबह आप लंगड़ाते हुए पैथोलॉजी लैब जाते हैं। ब्लड रिपोर्ट आती है और उसमें यूरिक एसिड (Uric Acid) 8.5 mg/dL दिखता है। डॉक्टर बिना पलक झपकाए आपको 'फेबक्सोस्टैट' (Febuxostat 40mg या 80mg) या 'एलोप्यूरिनॉल' की गोली लिख देते हैं। आप रोज़ाना वह गोली खाते हैं, और कुछ ही दिनों में दर्द गायब हो जाता है। अगली रिपोर्ट में यूरिक एसिड भी 5.0 पर आ जाता है। आपको लगता है कि बीमारी जड़ से खत्म हो गई!

क्या 'फेबक्सोस्टैट' लेना सच में ज़रूरी है? क्या एक शुद्ध शाकाहारी, 'क्लीन ईटिंग' (Clean Eating) करने वाले शरीर को जीवन भर इस सिंथेटिक केमिकल की ज़रूरत है? सच्चाई यह है कि यह दवा आपके यूरिक एसिड को ठीक नहीं कर रही है, बल्कि वह उसे केवल खून में छिपा (Mask) रही है। आइए इस भ्रम को तोड़ें और आयुर्वेद के विज्ञान से समझें कि इस खतरनाक चक्रव्यूह से हमेशा के लिए बाहर कैसे निकला जाए।

Febuxostat आपके शरीर के साथ क्या 'खेल' कर रहा है?

फेबक्सोस्टैट (Febuxostat) कोई जादू की गोली नहीं है जो आपकी किडनी या लिवर को ठीक कर रही हो। यह एक 'ज़ैंथिन ऑक्सीडेस इन्हिबिटर' (Xanthine Oxidase Inhibitor) है। इसका सीधा सा मतलब है कि यह आपके लिवर में उस एंजाइम (Enzyme) को ज़बरदस्ती ब्लॉक कर देता है जो यूरिक एसिड बनाता है।

  • किडनी और लिवर पर कोई काम नहीं: यूरिक एसिड का असली कारण किडनी का सुस्त पड़ना और फिल्टर न कर पाना है। यह दवा किडनी को बिल्कुल नहीं सुधारती।
  • भयंकर साइड इफेक्ट्स: लंबे समय तक फेबक्सोस्टैट लेने से लिवर के एंजाइम्स बढ़ सकते हैं (Liver toxicity), और कई मेडिकल रिसर्च इसके हार्ट (Cardiovascular) पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों की चेतावनी देते हैं।
  • जीवन भर की लत: चूँकि मशीनरी (मेटाबॉलिज़्म) अभी भी खराब है, इसलिए जैसे ही आप एंजाइम को ब्लॉक करने वाली यह दवा हटाते हैं, यूरिक एसिड का बांध टूट जाता है।

दोषों के अनुसार यूरिक एसिड के लक्षण

  • वात-प्रधान वातरक्त: इसमें दर्द एक जगह नहीं टिकता (Migratory)। जोड़ों में रूखापन आता है, सुबह पीठ में जकड़न रहती है और एड़ियों में भयंकर चुभन होती है। इसके लिए वात दोष कम करने के उपाय ज़रूरी हैं।
  • पित्त-प्रधान वातरक्त: इसमें पैर का अंगूठा या टखना एकदम लाल और सूजा हुआ हो जाता है। छूने पर आग जैसा गर्म लगता है। मानसिक तनाव और गुस्सा इसे और भड़काता है।
  • कफ-प्रधान वातरक्त: इसमें दर्द से ज़्यादा जोड़ों में भारीपन और सुन्नपन महसूस होता है।

क्या आपका शरीर भी परमानेंट डैमेज के ये अलार्म बजा रहा है?

अगर आप फेबक्सोस्टैट खा रहे हैं और सोच रहे हैं कि सब ठीक है, तो शरीर के इन खामोश संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें। प्रोएक्टिव हेल्थ स्क्रीनिंग (Proactive health screening) बहुत ज़रूरी है:

  • यूरिन में झाग या जलन: किडनी में बन रहे छोटे यूरिक एसिड क्रिस्टल्स (Sludge) का सीधा संकेत।
  • एड़ियों का दर्द (Plantar Fasciitis): सुबह उठकर ज़मीन पर पैर रखते ही एड़ियों में भयंकर दर्द जो कुछ कदम चलते समय घुटने का दर्द तक फैल जाए।
  • मांसपेशियों की कमज़ोरी: गोलियों के कारण नर्वस सिस्टम का डैमेज होना और नसों की कमज़ोरी महसूस होना।
  • असहनीय थकावट: खून के अशुद्ध होने के कारण दिन भर एक क्रोनिक फटीग (Chronic fatigue) का हावी रहना।

यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के चक्कर में लोग क्या गलतियाँ करते हैं?

  • सारी दालें (Protein) छोड़ देना: डर के मारे शुद्ध शाकाहारी लोग भी मूंग की दाल और हर तरह का प्रोटीन खाना बंद कर देते हैं। इससे शरीर कुपोषण का शिकार होता है और वात और ज़्यादा भड़क जाता है।
  • दवा को अचानक छोड़ना (Cold Turkey): जब दर्द खत्म हो जाता है, तो लोग अचानक फेबक्सोस्टैट बंद कर देते हैं, जिससे 'रिबाउंड हाइपरयूरिसीमिया' (Rebound Hyperuricemia) होता है और भयंकर गाउट अटैक आता है।
  • फ्रुक्टोज़ (Fructose) को नज़रअंदाज़ करना: प्रोटीन तो छोड़ देते हैं, लेकिन पैकेटबंद जूस, कोल्ड ड्रिंक्स और बहुत मीठे फल खाते रहते हैं, जो लिवर में जाकर सबसे ज़्यादा यूरिक एसिड बनाते हैं।

आयुर्वेद यूरिक एसिड (वातरक्त) की जड़ को कैसे समझता है?

आयुर्वेद इसे केवल जोड़ों का दर्द नहीं मानता, बल्कि इसे 'वातरक्त' (Vatarakta) या गाउट (Gout) के रूप में एक संपूर्ण मेटाबॉलिक सिंड्रोम मानता है।

  • अशुद्ध रक्त (Toxified Blood): जब हमारी सुविधाजनक जीवनशैली और कमज़ोर जठराग्नि के कारण खाना ठीक से नहीं पचता, तो वह 'आम' (Toxins) बनाता है जो सीधे रक्त धातु को अशुद्ध कर देता है।
  • वात का भड़कना: शरीर में अशुद्ध रक्त और यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स जब प्राकृतिक रूप से बहने वाले वात का रास्ता रोक देते हैं, तो वात भड़क जाता है। यह भड़का हुआ वात जोड़ों में सुई चुभने जैसा भयंकर दर्द पैदा करता है।
  • मूत्रवह स्रोतस (Kidneys) का ब्लॉक होना: पाचन तंत्र की खराबी से जब शरीर का कचरा बाहर नहीं निकल पाता, तो किडनी यूरिक एसिड को फिल्टर करने में हार मान लेती है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण (The Middle Path)

जीवा आयुर्वेद में हम आपको एकदम से एलोपैथिक दवा छोड़ने को नहीं कहते, और न ही आपको जीवन भर के लिए उस पर निर्भर रहने देते हैं। हम 'टैपरिंग' (Tapering) और हीलिंग (Healing) का विज्ञान अपनाते हैं।

  • अग्नि दीपन और आम पाचन: सबसे पहले पाचन और आयुर्वेद के सिद्धांत से आपकी जठराग्नि को मज़बूत किया जाता है ताकि जो भी प्रोटीन आप खाएं, वह 'आम' के बजाय ऊर्जा में बदलें।
  • रक्त शोधन (Blood Purification): खून की अशुद्धि और एसिडिटी को प्राकृतिक रसायनों से साफ किया जाता है।
  • किडनी रिपेयर (Flushing the system): आपकी किडनी के चैनल्स को साफ किया जाता है ताकि वह खुद यूरिक एसिड को यूरिन के रास्ते बाहर फेंकना शुरू कर दे। जब ऐसा होने लगता है, तो फेबक्सोस्टैट की डोज़ धीरे-धीरे कम करवा दी जाती है।

यूरिक एसिड को फ्लश करने वाली आयुर्वेदिक 'क्लीन डाइट'

एक आयुर्वेदिक डाइट ही आपके शरीर को अंदर से साफ कर सकती है।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - यूरिक एसिड को फ्लश करने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - रक्त-पित्त और यूरिक एसिड बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना जौ (Barley सबसे श्रेष्ठ मूत्रल है), ज्वार, पुराना चावल। मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स।
प्रोटीन (Proteins) मूंग दाल, मसूर दाल (केवल दिन के समय, घी और जीरे के छौंक के साथ)। रात के समय भारी राजमा, छोले, उड़द दाल, सोयाबीन।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी (अमृत है), परवल, पेठा (Ash gourd), कद्दू। बीज वाले टमाटर, कच्चा पालक (ऑक्सालेट्स), भारी बैंगन।
फल (Fruits) आंवला, पपीता, चेरी (Cherries), ताज़ा सेब। पैकेटबंद फ्रूट जूस (Heavy Fructose), चीकू।
पेय पदार्थ (Beverages) जौ का पानी, धनिए का पानी, गिलोय का काढ़ा। कोल्ड ड्रिंक्स, शराब (Alcohol), बहुत ज़्यादा डार्क कॉफी।

इसके अलावा, भड़के हुए एसिड को शांत करने के लिए पित्त शांत करने वाले आहार को अपनी डाइट में ज़रूर शामिल करें।

यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को पिघलाने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

  • गिलोय (Giloy): आयुर्वेद में वातरक्त के लिए गिलोय (Giloy) से बड़ी कोई औषधि नहीं है। यह खून को साफ करती है, जोड़ों की सूजन मिटाती है और यूरिक एसिड को फ्लश कर देती है।
  • मंजिष्ठा (Manjistha): यह एक बेहद शक्तिशाली मंजिष्ठा (Manjistha) ब्लड प्यूरीफायर है जो लाल और गर्म जोड़ों को बर्फ जैसी ठंडक देता है।
  • धनिया (Coriander): रात भर पानी में भीगे हुए धनिया (Coriander) के बीजों का पानी पीने से खून की एसिडिटी तुरंत शांत होती है।
  • गोक्षुर (Gokshura): किडनी के चैनल्स को खोलने और रुके हुए यूरिक एसिड क्रिस्टल्स को यूरिन के रास्ते बाहर निकालने के लिए यह एक जादुई रसायन है।
  • त्रिफला (Triphala): पेट को साफ रखने और लगातार रहने वाली कब्ज़ को तोड़ने के लिए रोज़ रात को त्रिफला (Triphala) का सेवन बेहद ज़रूरी है।

रक्त की अशुद्धि को बाहर निकालने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

  • विरेचन (Virechana): लिवर और रक्त की डीप-क्लीनिंग के लिए की जाने वाली यह विरेचन थेरेपी (Virechana therapy) शरीर से अत्यधिक पित्त और एसिडिटी को मल के रास्ते बाहर निकालती है।
  • अभ्यंग मालिश (Abhyanga): शुद्ध वात-शामक तेलों से की जाने वाली अभ्यंग मालिश (Abhyanga massage) जोड़ों की जकड़न को खत्म करती है। (नोट: लाल और सूजे हुए एक्यूट गाउट जॉइंट पर मालिश न करें, वहां चंदन का लेप लगाएं।)

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

हम केवल आपकी ब्लड रिपोर्ट में 8.5 का नंबर देखकर आपको दवाइयाँ नहीं थमाते:

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले नाड़ी (Pulse) चेक करके यह समझना कि आपके अंदर रक्त-पित्त का स्तर क्या है और किडनी कितनी ब्लॉक है।
  • शारीरिक मूल्याँकन: आपके जोड़ों की सूजन, एड़ियों का दर्द, यूरिन का रंग और आपकी जठराग्नि की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • लाइफस्टाइल ऑडिट: आपकी नींद कैसी है? क्या आप अच्छी नींद की आदतें फॉलो करते हैं? इन सभी आदतों का गहराई से विश्लेषण किया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर +919266714040 पर कॉल करें और अपने यूरिक एसिड की रिपोर्ट व फेबक्सोस्टैट की डोज़ के बारे में बात करें।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर पैर में भयंकर दर्द के कारण घर से निकलना मुश्किल है, तो आप अपने घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात कर सकते हैं।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके दोषों के अनुसार खास जड़ी-बूटियाँ, रक्त-शोधक लेप, और एक 'प्यूरीन-फ्रेंडली' आयुर्वेदिक डाइट रूटीन तैयार किया जाता है।

यूरिक एसिड के प्राकृतिक रूप से नॉर्मल होने में कितना समय लगता है?

  • शुरुआती 1-2 महीने: आपकी जठराग्नि सुधरेगी। एड़ियों का दर्द और पैर के अंगूठे की सूजन व लालिमा में भारी कमी आएगी। डॉक्टर की देखरेख में फेबक्सोस्टैट की डोज़ कम की जाने लगेगी।
  • 3-4 महीने: गिलोय और गोक्षुर के प्रभाव से आपके ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट में नंबर प्राकृतिक रूप से नीचे आने लगेगा।
  • 5-6 महीने: आपका रक्त धातु पूरी तरह शुद्ध हो जाएगा और किडनी की फिल्टर करने की क्षमता रीबूट हो जाएगी। आप बिना किसी सिंथेटिक गोली के एक ऊर्जावान और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपको जीवन भर के लिए सिंथेटिक केमिकल का गुलाम नहीं बनाते, बल्कि आपके शरीर की अपनी प्राकृतिक 'फ्लश' (Flush) मशीनरी को वापस जगाते हैं:

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ ब्लड रिपोर्ट का नंबर ठीक नहीं करते; हम आपकी जठराग्नि को ठीक करते हैं और लिवर-किडनी को मज़बूत करके यूरिक एसिड का बनना रोकते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों युवाओं को यूरिक एसिड के इस 'साइलेंट ट्रैप' और जोड़ों के स्थायी डैमेज से सफलतापूर्वक बाहर निकाला है।
  • कस्टमाइज्ड केयर: आपका यूरिक एसिड रूखेपन (वात) के कारण बढ़ा है या लगातार एसिडिटी (पित्त) के कारण? हमारा इलाज बिल्कुल आपके मूल कारण पर आधारित होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: लगातार यूरिक एसिड की एलोपैथिक गोलियाँ लिवर पर भारी पड़ती हैं, जबकि हमारे आयुर्वेदिक रसायन (गिलोय, गोक्षुर) पूरी तरह सुरक्षित हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य यूरिक एसिड का बनना ब्लॉक करने के लिए 'Febuxostat' या 'Allopurinol' देना। जठराग्नि को बढ़ाना, रक्त को शुद्ध करना और गिलोय/गोक्षुर से एसिड को प्राकृतिक रूप से फ्लश करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल प्यूरीन (Purine) मेटाबॉलिज़्म की गड़बड़ी मानना। इसे कमज़ोर पाचन, 'आम' का संचय, अशुद्ध रक्त और वात दोष (वातरक्त) के भयंकर टकराव का सिंड्रोम मानना।
दवा छोड़ने का तरीका अक्सर दवा छोड़ते ही भयंकर 'रिबाउंड गाउट अटैक' आता है। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का सपोर्ट देकर एलोपैथिक दवा सुरक्षित रूप से कम (Tapering) करवाना।
लंबा असर गोलियाँ उम्र भर खानी पड़ती हैं। किडनी और लिवर अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि वे खुद यूरिक एसिड को फिल्टर करना सीख जाते हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

  • पैर के अंगूठे या घुटने का भयंकर लाल और गर्म होना: अगर अचानक रात को पैर का अंगूठा इस कदर सूज जाए, आग जैसा गर्म हो और चादर का एक धागा छूने पर भी असहनीय दर्द हो (एक्यूट गाउट अटैक)।
  • यूरिन में खून आना या भयंकर मरोड़: अगर यूरिन पास करते समय लाल खून आए और पीठ के निचले हिस्से से पेट तक ऐसा दर्द उठे कि खड़े रहना मुश्किल हो जाए (किडनी स्टोन का संकेत)।
  • तेज़ बुखार और ठंड लगना: अगर लाल और सूजे हुए जोड़ के साथ-साथ आपको तेज़ कंपकंपी वाला बुखार आ जाए।

निष्कर्ष

शरीर एक 'बाय इट फॉर लाइफ' (Buy It For Life) संपत्ति है, इसे यूं ही जीवन भर सिंथेटिक केमिकल्स के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। रिपोर्ट में यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ नंबर देखकर घबराहट में फेबक्सोस्टैट (Febuxostat) खाना शुरू कर देना आपके शरीर के अलार्म को म्यूट (Mute) करने जैसा है। यह दवा आपकी कमज़ोर हो चुकी जठराग्नि, अशुद्ध रक्त और सुस्त पड़ चुकी किडनी का इलाज नहीं करती।

ताकि भविष्य में जब आप अपने गृह राज्य झारखंड लौटकर अपना घर बनाएं और एक शांतिपूर्ण जीवन जिएं, तो ये घुटने और टखने आपका पूरा साथ दें, इसलिए इस केमिकल ट्रैप से बाहर निकलें। अपने छोटे भाई अनिकेत को भी शुरू से ही असली 'क्लीन ईटिंग' का विज्ञान समझाएं ताकि करियर की शुरुआत में उसे इस परेशानी का सामना न करना पड़े। अपने खाने में जौ का पानी, लौकी और शुद्ध गाय का घी शामिल करें। गिलोय, गोक्षुर और मंजिष्ठा जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें। फेबक्सोस्टैट की लत से सुरक्षित रूप से बाहर आने और अपनी किडनी को प्राकृतिक रूप से फौलादी बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

FAQs

बिल्कुल नहीं! इसे कोल्ड टर्की (अचानक) छोड़ने से खून में यूरिक एसिड का भयंकर तूफान (Rebound Spike) आता है जो बहुत दर्दनाक गाउट अटैक ला सकता है। इसे आयुर्वेदिक औषधियों (गिलोय/गोक्षुर) के सपोर्ट के साथ डॉक्टर की देखरेख में धीरे-धीरे (Tapering) कम किया जाता है।

शाकाहारियों में यूरिक एसिड बढ़ने का सबसे बड़ा कारण फ्रुक्टोज़ (Fructose) है, जो पैकेटबंद जूस, कोल्ड ड्रिंक्स और चीनी में होता है। लिवर जब इसे तोड़ता है, तो भारी मात्रा में यूरिक एसिड बनता है। इसके अलावा कमज़ोर पाचन के कारण साधारण दालें भी आम (Toxins) बनकर एसिड बढ़ाती हैं।

नहीं। सारी दालें बंद करने से शरीर में कमज़ोरी आएगी और वात भड़क जाएगा। आपको केवल रात के समय भारी दालें (राजमा, छोले, उड़द) बंद करनी हैं। दिन के समय छिलके वाली मूंग की दाल (हींग और जीरे के छौंक के साथ) खाना पूरी तरह सुरक्षित है।

शत-प्रतिशत। आयुर्वेद में जौ को सबसे बेहतरीन मूत्रल (Diuretic) माना गया है। यह किडनी पर बिना दबाव डाले यूरिन का फ्लो बढ़ाता है, जिससे जोड़ों में जमा यूरिक एसिड क्रिस्टल्स प्राकृतिक रूप से यूरिन के रास्ते फ्लश (Flush) हो जाते हैं।

यूरिक एसिड (वातरक्त) में अक्सर जोड़ों में आग जैसी जलन और लालिमा (पित्त) होती है। ऐसे लाल और सूजे हुए जोड़ पर गर्म सिकाई (Hot fomentation) बिल्कुल न करें, इससे दर्द भड़क जाएगा। ऐसे में बर्फ की हल्की सिकाई या चंदन का लेप तुरंत आराम देता है।

फेबक्सोस्टैट लिवर के एंजाइम को ब्लॉक करता है, जबकि गोक्षुर एक प्राकृतिक नेफ्रो-प्रोटेक्टिव जड़ी-बूटी है। यह आपकी किडनी के फिल्टर सिस्टम को मज़बूत करती है ताकि वह खून में घूम रहे फालतू यूरिक एसिड को खुद-ब-खुद बाहर फेंकना शुरू कर दे।

हाँ। जब शरीर आराम की स्थिति में होता है (जैसे रात को सोते समय), तो भारी होने के कारण यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स सबसे निचले हिस्से—यानी एड़ियों (Heels) और पैर के अंगूठे में जाकर जम जाते हैं। इसलिए सुबह उठकर ज़मीन पर पैर रखते ही भयंकर दर्द होता है।

टमाटर के बीजों में ऑक्सालेट्स (Oxalates) होते हैं। जब आपका यूरिक एसिड हाई हो और किडनी उसे फ्लश नहीं कर पा रही हो, तो टमाटर और पालक का सेवन (विशेषकर कच्चा) सीमित कर देना चाहिए।

बहुत गहरा संबंध है। क्रोनिक स्ट्रेस से शरीर का मेटाबॉलिज़्म और लिवर का फंक्शन धीमा हो जाता है। साथ ही, स्ट्रेस शरीर में एसिडिक माहौल (Acidic environment) पैदा करता है, जिससे यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स आसानी से जोड़ों में जमने लगते हैं।

बिल्कुल। यूरिक एसिड कोई लाइफटाइम बीमारी नहीं है। अगर आप आयुर्वेदिक डिटॉक्स, सही शाकाहारी डाइट (लो फ्रुक्टोज़) और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों का सेवन करते हैं, तो आपका मेटाबॉलिज़्म और किडनी पूरी तरह से नॉर्मल हो जाते हैं और आप इस बीमारी से हमेशा के लिए मुक्त हो सकते हैं।

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