Diseases Search
Close Button
 
 

Gut Imbalance Weight Gain का कारण बन सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan

वज़न कम करने के लिए हम घंटों पसीना बहाते हैं और सख्त डाइटिंग करते हैं, फिर भी वज़न टस से मस नहीं होता। हम इसे अपनी मेहनत की कमी मान लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके बढ़ते वज़न का असली कारण आपका जिम नहीं, बल्कि आपका पेट (Gut) हो सकता है? गट इम्बैलेंस (Gut Imbalance) यानी आँतों में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का बिगड़ता संतुलन आज मोटापे का सबसे बड़ा खामोश कारण है। जब आँतों का सिस्टम फेल होता है, तो शरीर खाने को ऊर्जा के बजाय ज़िद्दी चर्बी में बदलने लगता है। आइए समझें कि आपका पेट वज़न कैसे बढ़ा रहा है और आयुर्वेद से इसे कैसे ठीक करें।

आँतों का असंतुलन (Gut Imbalance) आपका वज़न कैसे बढ़ाता है?

हम सोचते हैं कि सिर्फ ज़्यादा खाने से वज़न बढ़ता है, लेकिन अगर आपका पेट खराब है, तो सादा खाना भी आपको मोटा कर सकता है। गट इम्बैलेंस खामोशी से आपके मेटाबॉलिज़्म को बर्बाद कर देता है।

  • कैलोरी का ज़्यादा सोखना (Absorbing extra calories): जब आँतों में बुरे बैक्टीरिया (Bad Bacteria) बढ़ जाते हैं, तो वे आपके द्वारा खाए गए सादे खाने से भी ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरी खींच लेते हैं और उसे चर्बी (Fat) के रूप में स्टोर कर देते हैं।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): खराब गट फ्लोरा शरीर में भयंकर अंदरूनी सूजन (Inflammation) पैदा करता है। इससे कोशिकाएँ इंसुलिन की बात सुनना बंद कर देती हैं, और खून की शुगर एनर्जी में बदलने के बजाय सीधे पेट की चर्बी (Belly Fat) बन जाती है।
  • भूख के हार्मोन्स का बिगड़ना: आपकी आँतें ही दिमाग को बताती हैं कि पेट भर गया है। गट इम्बैलेंस होने पर 'लेप्टिन' और 'ग्रेलिन' हार्मोन्स क्रैश हो जाते हैं, जिससे आपका पेट भरा होने पर भी आपको मीठा या जंक फूड खाने की भयंकर क्रेविंग (Craving) होती है।
  • सुस्त मेटाबॉलिज़्म और भारीपन: गुड बैक्टीरिया (Good Bacteria) की कमी से खाना पचने के बजाय आँतों में सड़ता है। इससे भयंकर गैस और ब्लोटिंग (Bloating) होती है, जो आपके मेटाबॉलिज़्म को पूरी तरह सुस्त कर देती है।

आयुर्वेद इस खामोशी को कैसे समझता है? (मंदाग्नि और आम का सिद्धांत)

आधुनिक विज्ञान जिसे गट माइक्रोबायोम (Gut Microbiome) का असंतुलन कहता है, आयुर्वेद ने उसे हज़ारों साल पहले ही 'अग्नि' के बुझने और 'मेद धातु' के बिगड़ने के रूप में बहुत गहराई से समझाया था।

  • अग्नि का मंद होना (Mandagni): आयुर्वेद मानता है कि पेट की 'पाचन अग्नि' ही सब कुछ है। जब खराब लाइफस्टाइल से अग्नि सुस्त पड़ जाती है, तो शरीर खाने को पचाने में फेल हो जाता है और कफ दोष बढ़ने लगता है, जो मोटापे की पहली सीढ़ी है।
  • आम (Toxins) का चर्बी में बदलना: बिना पचा हुआ खाना जब पेट में सड़ता है, तो वह 'आम' (ज़हरीला कचरा) बनाता है। यह आम खून में घुलकर फैट चैनल्स (मेद धातु) को ब्लॉक कर देता है, जिससे शरीर पर ज़िद्दी चर्बी जमने लगती है जो किसी भी डाइट से कम नहीं होती।
  • समान वात का प्रकोप: खाने को पचाने और रस बनाने का काम 'समान वात' का है। जब जंक फूड से यह वात बिगड़ता है, तो गट इम्बैलेंस पैदा होता है और शरीर में गैस व भारीपन का स्थायी घर बन जाता है।

जीवा आयुर्वेद का समग्र प्रबंधन क्या है?

हम आपको सिर्फ वज़न घटाने वाले शेक या स्लिमिंग पिल्स देकर इन चेतावनियों को दबाने का काम नहीं करते। हमारा लक्ष्य आपके आँतों के बैक्टीरिया को रीसेट कर असली जड़ को हमेशा के लिए ठीक करना है।

  • नाड़ी से बीमारी की पहचान: हम सिर्फ आपका वज़न नहीं तौलते, बल्कि नाड़ी परीक्षा से शरीर के अंदर चल रहे वात, पित्त और कफ के असली असंतुलन को पकड़ते हैं कि गट फ्लोरा क्यों बिगड़ा है।
  • अग्नि दीपन और डिटॉक्स: सबसे पहले आपकी मेटाबॉलिक अग्नि को मज़बूत किया जाता है और आँतों में सालों से चिपके हुए 'आम' (गंदगी) को जड़ी-बूटियों के ज़रिए बाहर निकाला जाता है।
  • धातु पोषण (Rejuvenation): जब आँतें साफ हो जाती हैं, तब गुड बैक्टीरिया को दोबारा बढ़ाने और 'मेद धातु' (फैट) को संतुलित करने के लिए विशेष रसायन औषधियाँ दी जाती हैं।

गट हेल्थ सुधारने और चर्बी पिघलाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें आँतों के बैक्टीरिया को संतुलित करने और रुके हुए वज़न को घटाने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं।

  • त्रिफला (Triphala): यह आँतों के लिए सबसे बेहतरीन प्राकृतिक 'प्रीबायोटिक' (Prebiotic) है। यह गुड बैक्टीरिया का खाना बनता है, कब्ज़ दूर करता है और पेट की ज़िद्दी चर्बी को काटता है।
  • गुग्गुल (Guggulu): बढ़ा हुआ वज़न, खराब कोलेस्ट्रॉल और फैट को मोम की तरह पिघलाने के लिए गुग्गुल एक बहुत ही शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि है।
  • चित्रक (Chitrak): यह शरीर की बुझी हुई 'पाचन अग्नि' को तुरंत तेज़ करता है। यह मेटाबॉलिज़्म की आग जलाकर खाने को सड़ाने के बजाय उसे ऊर्जा में बदल देता है।
  • अदरक / सोंठ (Ginger): यह गट की सूजन (Inflammation) को खत्म करने और इंसुलिन रेजिस्टेंस को तोड़ने का सबसे आसान और सुरक्षित उपाय है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी शरीर को कैसे नया बनाती है?

जब गट इम्बैलेंस के कारण शरीर में 'आम' बहुत ज़्यादा भर जाता है और वज़न कम होना बिल्कुल रुक जाता है, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी शरीर की डीप क्लीनिंग करती है।

  • विरेचन (Virechana): यह गट माइक्रोबायोम को रातों-रात रीसेट करने का सबसे अचूक इलाज है। इसमें दस्त लगाकर आँतों और लिवर की सारी एसिडिटी और गंदगी शरीर से बाहर निकाल दी जाती है।
  • उद्वर्तन (Udvartana): वज़न घटाने के लिए यह सबसे जादुई थेरेपी है। इसमें सूखी औषधीय जड़ी-बूटियों के पाउडर से शरीर की मालिश की जाती है, जो स्किन के नीचे जमे जिद्दी फैट (Cellulite) को तोड़ देती है।
  • बस्ती (Basti): आयुर्वेद में वात रोगों और ब्लोटिंग का आधा इलाज 'बस्ती' को माना गया है। औषधीय एनीमा देकर बड़ी आँत (Colon) से सारा फँसा हुआ ज़हरीला मल बाहर निकाल दिया जाता है।

गट हेल्थ और मेटाबॉलिज़्म को सुधारने के लिए डाइट प्लान

आप जो खाते हैं, वह सीधे आपके पेट के गुड बैक्टीरिया को बनाता या मारता है। गट इम्बैलेंस और बढ़ते वज़न को रोकने के लिए सही डाइट का पालन करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

आहार का सिद्धांत:

  • क्या अपनाएँ (अनुशंसित): सात्विक, सुपाच्य और प्राकृतिक फाइबर से भरपूर भोजन लें जो अग्नि को तेज़ करे और गुड बैक्टीरिया को बढ़ाए।
  • किनसे परहेज़ करें (वर्जित): बासी, फ्रिज में रखा ठंडा खाना, पैकेटबंद (Processed) भोजन और बहुत देर रात भारी भोजन।

प्राकृतिक पोषण:

  • क्या अपनाएँ (अनुशंसित): ताज़ा छाछ (मट्ठा), गाय का शुद्ध घी, मूंग की दाल, पपीता और अदरक।
  • किनसे परहेज़ करें (वर्जित): रिफाइंड चीनी (जो बुरे बैक्टीरिया का सबसे बड़ा खाना है), बहुत ज़्यादा मैदा, और बाज़ार के आर्टिफिशल फ्लेवर्ड दही।

विरुद्ध आहार से बचें:

  • क्या अपनाएँ (अनुशंसित): संतुलित और संगत (Compatible) खाद्य संयोजन अपनाएँ।
  • किनसे परहेज़ करें (वर्जित): दूध के साथ खट्टे फल, मछली या नमक का सेवन जो आँतों में सीधे ज़हर बनाता है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

जब आप पेट की गैस और बढ़ते वज़न को इग्नोर करके थायरॉयड या पीसीओडी का शिकार हो जाते हैं, तब हम आपकी परेशानी की जड़ तक पहुँचने के लिए गहराई से जाँच करते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह गहराई से समझना कि आपके अंदर 'वात', 'पित्त', और 'कफ' का स्तर कितना बिगड़ चुका है।
  • शारीरिक मूल्याँकन: डॉक्टर आपकी जीभ, आँखें, और त्वचा को बहुत बारीकी से चेक करते हैं। जीभ पर सफेद परत 'आम' (गंदगी) और गट इम्बैलेंस का सबसे बड़ा सबूत होती है।
  • पाचन का विश्लेषण: यह देखना कि आपका पेट साफ रहता है या नहीं, क्योंकि कब्ज़ और ब्लोटिंग ही खराब गट का सबसे पहला अलार्म होते हैं।
  • लाइफस्टाइल चेक: आपके सोने, तनाव और खाने की आदतों को बहुत गहराई से समझा जाता है, क्योंकि बीमारी का असली ट्रिगर यहीं छिपा है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद कोई ऐसी जादुई स्लिमिंग पिल नहीं है जो रातों-रात 5 किलो वज़न कम कर दे। गट फ्लोरा (Gut Flora) की अंदरूनी मशीनरी को दोबारा प्राकृतिक रूप से रिसेट होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपका पेट साफ होगा; भारीपन, मीठे की क्रेविंग और ब्लोटिंग काफी कम होने लगेंगे। शरीर की सुस्ती को छोड़ देगा।
  • 1 से 3 महीने तक: गुड बैक्टीरिया के बढ़ने से मेटाबॉलिज़्म सुधरेगा। बिना कारण वज़न का बढ़ना रुक जाएगा और ज़िद्दी चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगेगी।
  • 3 से 6 महीने और उससे अधिक: आपकी आँतें पूरी तरह डिटॉक्स हो जाएंगी। इंसुलिन और हार्मोन्स का संतुलन वापस आएगा और आप क्रैश डाइट के डर से मुक्त होकर एक फिट जीवन जी सकेंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

वज़न बढ़ने और पेट की खराबी के इलाज के लिए सही चिकित्सा पद्धति का चुनाव करना बहुत ज़रूरी है। आइए समझते हैं कि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को लेकर दोनों दृष्टिकोण कैसे अलग हैं।

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य फैट बर्नर या भूख कम करने वाली दवाओं से वज़न घटाना ‘अग्नि’ सुधारकर और गट हेल्थ को संतुलित कर प्राकृतिक रूप से वज़न नियंत्रित करना
शरीर को देखने का नजरिया मोटापे को केवल ज्यादा खाना और कम व्यायाम का परिणाम मानना ‘आम’ और कफ-मेद धातु के असंतुलन के रूप में देखना
डाइट और जीवनशैली क्रैश डाइट और भूखे रहने पर ज़ोर ‘दिनचर्या’ और संतुलित, अग्नि-अनुसार आहार को मुख्य आधार मानना
इलाज का तरीका दवाओं, सप्लीमेंट्स और एक्सट्रीम डाइट्स से त्वरित परिणाम आहार, जीवनशैली और जड़ी-बूटियों से अंदरूनी संतुलन
लंबा असर डाइट/दवा छोड़ते ही वज़न का बाउंस बैक और कमज़ोरी गट हेल्थ मज़बूत कर स्थायी फिटनेस और संतुलित शरीर

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

गट इम्बैलेंस और बढ़ते वज़न को सिर्फ 'मोटापा' मानकर इग्नोर न करें। अगर आपको शरीर में ये गंभीर संकेत दिखें, तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  • अचानक बहुत ज़्यादा वज़न बढ़ना: अगर आप कम खा रहे हैं फिर भी कुछ ही महीनों में आपका वज़न तेज़ी से बढ़ रहा है, तो यह थायरॉयड या हार्मोनल क्रैश का अलार्म है।
  • भयंकर कब्ज़ और मल में खून: अगर डाइट बदलने के बाद भी हफ्तों तक पेट साफ नहीं होता और दर्द रहता है, तो यह आँतों के डैमेज होने की निशानी है।
  • पैरों और चेहरे पर भारी सूजन: अगर वज़न बढ़ने के साथ आपके टखनों, आँखों के नीचे और चेहरे पर पानी भर रहा है (Edema), तो यह किडनी या लिवर के सही से काम न करने का संकेत है।
  • हर समय भयंकर थकान और चक्कर: मोटापे के साथ अगर आपको बिस्तर से उठने की हिम्मत नहीं होती और चक्कर आते हैं, तो यह भयंकर इंसुलिन रेजिस्टेंस और शुगर का संकेत है।

निष्कर्ष

हमारा शरीर एक बेहतरीन मशीन है, और आँतें इस मशीन का इंजन हैं। जब गट इम्बैलेंस से यह इंजन खराब होता है, तो शरीर खाने को ऊर्जा के बजाय चर्बी में बदलने लगता है। लगातार बढ़ता वज़न और गैस सिर्फ ज़्यादा खाने का नतीजा नहीं, बल्कि 'पाचन अग्नि' के बुझने और 'आम' (गंदगी) के जमा होने का स्पष्ट अलार्म है। क्रैश डाइट या स्लिमिंग पिल्स से इस समस्या को दबाकर शरीर को और कमज़ोर न करें। आयुर्वेद आपको आँतों के संतुलन को वापस लाने का सुरक्षित रास्ता दिखाता है। त्रिफला और गुग्गुल जैसी जड़ी-बूटियों के साथ अपने मेटाबॉ

FAQs

बिल्कुल! जब आँतों में बुरे बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं, तो वे खाने से ज़्यादा कैलोरी खींचते हैं। साथ ही, कमज़ोर पाचन के कारण खाना पचने के बजाय 'आम' (Toxins) बनाता है, जो सीधे फैट (चर्बी) के रूप में शरीर में जमा हो जाता है।

हमेशा पेट फूला रहना (Bloating), कब्ज़ या दस्त, मीठा खाने की बहुत ज़्यादा क्रेविंग, अचानक वज़न बढ़ना, चेहरे पर मुँहासे और हमेशा थकान रहना गट इम्बैलेंस के सबसे बड़े लक्षण हैं।

जी हाँ। जंक फूड, मैदा और रिफाइंड चीनी बुरे बैक्टीरिया का मनपसंद खाना हैं। इन्हें खाने से आँतों में भयंकर सूजन (Inflammation) होती है और हमारे शरीर की रक्षा करने वाले गुड बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म हो जाते हैं।

आयुर्वेद मोटापे को सिर्फ खाने की बीमारी नहीं मानता। यह 'मंदाग्नि' (सुस्त पाचन) से शुरू होता है। जब अग्नि बुझती है, तो शरीर में 'कफ दोष' और 'आम' बढ़ जाता है, जो मेटाबॉलिज़्म को जाम करके वज़न बढ़ाता है।

हाँ, इसे 'वाटर रिटेंशन' या गैस की सूजन कहते हैं। जब खाना आँतों में सड़ता है, तो भयंकर गैस और एसिडिटी बनती है, जिससे पेट हमेशा गुब्बारे की तरह फूला हुआ और वज़न ज़्यादा महसूस होता है।

त्रिफला आँतों के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक झाड़ू और प्रीबायोटिक है। यह आँतों में चिपके ज़हरीले कचरे को साफ करता है और गुड बैक्टीरिया को पनपने के लिए एक स्वस्थ माहौल देता है।

भूखे रहने से पेट की 'पाचन अग्नि' पूरी तरह बुझ जाती है और शरीर 'स्टार्वेशन मोड' (Starvation mode) में चला जाता है। इससे गट फ्लोरा और भी ज़्यादा खराब होता है और डाइट छोड़ते ही वज़न दोगुनी तेज़ी से बढ़ता है।

बिल्कुल! पेट और दिमाग 'वेगस नर्व' से जुड़े हैं। भयंकर तनाव से कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो गुड बैक्टीरिया को मार देता है और मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है, जिससे पेट की चर्बी (Belly Fat) बढ़ती है।

उद्वर्तन एक खास आयुर्वेदिक मालिश है जिसमें सूखी औषधियों का पाउडर इस्तेमाल होता है। यह मालिश स्किन के नीचे जमे ज़िद्दी फैट को तोड़ती है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है और शरीर को तुरंत हल्का करती है।

सबसे पहले बासी खाना, रिफाइंड चीनी और ठंडा पानी बंद करें। अपनी डाइट में ताज़ा छाछ (मट्ठा), गाय का घी और फाइबर वाली सब्ज़ियाँ शामिल करें। इससे अग्नि तेज़ होगी और आँतें खुद रिपेयर होने लगेंगी।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us