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Hair Transplant करवाने से पहले - आयुर्वेद से बाल वापस आ सकते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

जब आईने के सामने खड़े होकर आप अपने बालों में कंघी करते हैं और देखते हैं कि रोज़ाना मुट्ठी भर बाल टूट कर गिर रहे हैं, तो वह डर और हताशा किसी भी इंसान को मानसिक रूप से तोड़ सकती है। बालों का झड़ना और माथे का धीरे-धीरे चौड़ा होना एक ऐसा खौफ है, जिससे बचने के लिए लोग रातों-रात किसी चमत्कार की तलाश में लाखों रुपये खर्च करने को तैयार हो जाते हैं और हेयर ट्रांसप्लांट (Hair Transplant) क्लिनिक्स की लाइन में लग जाते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस ज़मीन (स्कैल्प) के अंदरूनी पोषक तत्व ही खत्म हो चुके हैं, वहाँ बाहर से बीज (हेयर फॉलिकल्स) बोने से क्या वाकई एक स्थायी और घना जंगल उग सकता है? ज़्यादातर लोग बालों के झड़ने को केवल एक बाहरी कॉस्मेटिक समस्या मानकर ऊपर से सीरम और केमिकल लगाते रहते हैं, जबकि हकीकत में यह आपके शरीर के अंदर चल रहे एक भयंकर असंतुलन और कमज़ोर धातु का अलार्म है, जिसे ठीक किए बिना कोई भी ट्रांसप्लांट लंबे समय तक नहीं टिक सकता।

बाल झड़ने पर सीधे ट्रांसप्लांट के बारे में क्यों सोचते हैं लोग?

आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली में किसी के पास भी अपनी सेहत को अंदर से सुधारने का धैर्य नहीं बचा है। लोग चाहते हैं कि उनकी समस्या बस एक सर्जरी या एक महंगे लोशन से तुरंत ठीक हो जाए, जिसके पीछे ये मुख्य कारण होते हैं:

  • तुरंत रिज़ल्ट की चाहत: लोगों को लगता है कि आयुर्वेद या प्राकृतिक तरीके बहुत धीमे हैं और वे जल्द से जल्द अपने सिर पर बाल देखना चाहते हैं, भले ही उसकी कीमत लाखों में हो।
  • विज्ञापन और सोशल मीडिया: हर जगह हेयर ट्रांसप्लांट के 100% सक्सेस रेट वाले विज्ञापनों ने यह भ्रम पैदा कर दिया है कि बालों का झड़ना अंदरूनी नहीं, बल्कि केवल बाहरी समस्या है।
  • मूल कारण (Root Cause) की अज्ञानता: ज़्यादातर लोगों को पता ही नहीं होता कि बाल क्यों झड़ रहे हैं। वे इसे केवल अनुवांशिक (Genetic) मानकर अपनी जीवनशैली और डाइट की कमियों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

बालों का झड़ना (Hair Loss) मुख्य रूप से किन प्रकारों का होता है?

बालों के झड़ने का पैटर्न हर व्यक्ति में अलग होता है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके शरीर के अंदर कौन सा सिस्टम क्रैश हो रहा है। गंजेपन की समस्या मुख्य रूप से इन प्रकारों में सामने आती है:

  • एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया (Androgenetic Alopecia): इसे मेल या फीमेल पैटर्न बाल्डनेस भी कहते हैं। इसमें थायराइड और एण्ड्रोजन हॉर्मोन्स के असंतुलन के कारण सिर के आगे (Hairline) या बीच के हिस्से (Crown) से बाल बहुत तेज़ी से गायब होने लगते हैं।
  • एलोपेसिया एरीटा (Alopecia Areata): यह एक ऑटोइम्यून (Autoimmune) स्थिति है जहाँ शरीर का ही डिफेंस सिस्टम बालों की जड़ों पर हमला कर देता है, जिससे सिर पर गोल-गोल सिक्कों के आकार में बाल उड़ जाते हैं।
  • टेलोजेन एफ्लुवियम (Telogen Effluvium): यह आमतौर पर किसी भयंकर बीमारी, भारी हॉर्मोनल असंतुलन या बहुत ज़्यादा तनाव के बाद होता है, जहाँ बाल अपनी ग्रोथ फेज़ से निकलकर अचानक झड़ने वाले फेज़ में चले जाते हैं।

शरीर के किन संकेतों से पहचानें कि गंजापन तेज़ी से बढ़ रहा है?

बालों का पूरी तरह उड़ जाना कोई रातों-रात होने वाली घटना नहीं है। आपका शरीर गंजापन आने से बहुत पहले कई खामोश अलार्म बजाता है, जिन्हें कभी भी इग्नोर नहीं करना चाहिए:

  • सिर की त्वचा का दिखने लगना (Scalp Visibility): जब आप बालों की मांग निकालते हैं और वह मांग पहले से ज़्यादा चौड़ी लगने लगे या तेज़ रोशनी में स्कैल्प साफ नज़र आने लगे।
  • तकिए और कंघी पर बालों का गुच्छा: सुबह उठने पर अगर आपके तकिए पर रोज़ाना दर्जनों बाल बिखरे मिलें और नहाते समय नाली (Drain) बालों से ब्लॉक होने लगे।
  • स्कैल्प में भयंकर रूखापन और डैंड्रफ: जब स्कैल्प की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है, तो वहाँ भयंकर डैंड्रफ या खुजली वाले इन्फेक्शन पैदा हो जाते हैं, जो बालों की जड़ों को पूरी तरह खोखला कर देते हैं।
  • बालों का बहुत पतला (Thinning) हो जाना: बाल झड़ने से पहले अपनी मोटाई और चमक खो देते हैं। वे इतने नाज़ुक हो जाते हैं कि हल्का सा खींचने पर ही टूटकर हाथ में आ जाते हैं।

बाल वापस पाने के चक्कर में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

गंजेपन के डर और शर्मिंदगी से बचने के लिए लोग अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो उनके बचे-खुचे बालों को भी हमेशा के लिए खत्म कर देते हैं:

  • मिनॉक्सिडिल (Minoxidil) की लत: मेडिकल स्टोर से लाकर केमिकल वाले लोशन सिर पर रगड़ना। जब तक आप इन्हें लगाते हैं, बाल टिके रहते हैं, लेकिन छोड़ते ही भयंकर रूप से झड़ते हैं और स्कैल्प पर भयंकर एलर्जी छोड़ जाते हैं।
  • कठोर केमिकल वाले शैम्पू: हेयर फॉल कंट्रोल के नाम पर बेचे जाने वाले सल्फेट और पैराबेंस (Sulphates & Parabens) से भरे शैम्पू, जो बालों की जड़ों को और ज़्यादा सुखा देते हैं।
  • बिना अंदरूनी स्वास्थ्य सुधारे ट्रांसप्लांट: अगर आपकी ज़मीन (स्कैल्प) बंजर है और शरीर में पोषण ही नहीं है, तो सर्जरी से लगाए गए नए बाल भी कुछ समय बाद क्रोनिक फटीग और कमज़ोरी के कारण झड़ जाएँगे।

आयुर्वेद बालों के झड़ने (Hair Fall) और गंजेपन को कैसे समझता है?

आधुनिक चिकित्सा जिसे केवल जेनेटिक्स और हॉर्मोन्स का खेल मानती है, आयुर्वेद उसे अस्थि धातु के क्षय, भड़के हुए पित्त और दूषित रक्त के गहरे विज्ञान से समझता है:

  • अस्थि धातु (Bone Tissue) का क्षय: आयुर्वेद के अनुसार, बाल हमारी हड्डियों (अस्थि धातु) का मल (By-product) हैं। जब आपका पाचन तंत्र कमज़ोर होता है और हड्डियों को पोषण नहीं मिलता, तो बाल अपने आप जड़ों से कमज़ोर होकर गिरने लगते हैं।
  • पित्त दोष का प्रकोप: बाल झड़ने का सबसे बड़ा कारण शरीर में अत्यधिक गर्मी (पित्त) का बढ़ना है। जब मानसिक तनाव या गलत खानपान से पित्त भड़कता है, तो वह बालों की जड़ों (Hair follicles) को अंदर से जला देता है (खालित्य)।
  • वात का भयंकर रूखापन: शरीर में जब वात दोष बढ़ता है, तो वह स्कैल्प का सारा प्राकृतिक तेल सोख लेता है। इससे बाल रूखे, बेजान और दोमुंहे होकर बीच में से टूटने लगते हैं।

बालों की जड़ें मज़बूत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने बालों को दोबारा उगाने के लिए आपको अपनी आयुर्वेदिक डाइट में ऐसे स्निग्ध (Lubricating) और ठंडे तत्वों को शामिल करना होगा, जो शरीर के पित्त को शांत करें और हड्डियों को फौलादी बनाएँ:

आहार की श्रेणी क्या खाएँ (फायदेमंद - बालों को पोषण देने वाले) क्या न खाएँ (ट्रिगर फूड्स - पित्त और रूखापन बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, ओट्स, जौ (Barley), मूंग दाल, रागी। मैदा, वाइट ब्रेड, बासी और बहुत ज़्यादा फर्मेंटेड (Fermented) अनाज।
वसा और मेवे (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी, सफेद तिल, बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा डीप-फ्राइड चीज़ें, बाज़ार के ट्रांस फैट।
फल (Fruits) आँवला (बालों का सबसे बड़ा अमृत), मीठे अंगूर, पपीता, उबला हुआ सेब। बहुत ज़्यादा खट्टे और कच्चे फल, डिब्बाबंद केमिकल वाले जूस।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, पालक, गाजर, परवल (कड़वी और पानी वाली सब्ज़ियाँ)। तीखी लाल मिर्च, कटहल, बैंगन, बहुत ज़्यादा खट्टे टमाटर।
पेय पदार्थ (Beverages) नारियल पानी, धनिया-जीरे का पानी, छाछ, गन्ने का ताज़ा रस। अत्यधिक डार्क कॉफी, शराब, बर्फ का ठंडा पानी, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स।

बालों को दोबारा उगाने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई दिव्य केश्या (बालों के लिए लाभकारी) रसायन दिए हैं, जो बिना किसी सर्जरी के बालों की जड़ों को दोबारा ज़िंदा कर सकते हैं:

  • भृंगराज (Bhringraj): आयुर्वेद में इसे बालों का राजा कहा गया है। यह स्कैल्प के ब्लड सर्कुलेशन को भयंकर तेज़ी देता है, सफेद बालों को काला करता है और सो चुके हेयर फॉलिकल्स (Hair follicles) को दोबारा एक्टिवेट करता है।
  • अश्वगंधा: जब बालों का झड़ना भयंकर तनाव और कॉर्टिसोल (Cortisol) हॉर्मोन के बढ़ने से हो, तो अश्वगंधा नर्वस सिस्टम को शांत करता है और बालों की झड़ने की गति को तुरंत रोक देता है।
  • ब्राह्मी: यह सीधे मस्तिष्क की नसों को ठंडा रखती है। ब्राह्मी स्कैल्प की नसों को रिलैक्स करती है और बढ़े हुए पित्त की गर्मी को शांत करके बालों को जड़ों से मज़बूत बनाती है।
  • गिलोय: जब शरीर में भारी टॉक्सिन्स (आम) के कारण ब्लड प्यूरीफाई नहीं हो पाता और बाल झड़ते हैं, तो गिलोय खून को साफ करती है और इम्यूनिटी बढ़ाकर स्कैल्प के इन्फेक्शन्स को रोकती है।

स्कैल्प और बालों की जड़ों को पोषण देने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब बालों की जड़ें पूरी तरह सूख चुकी हों और केवल तेल लगाने से काम न बन रहा हो, तो पंचकर्म की ये क्लासिकल थेरेपीज़ स्कैल्प को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • शिरोधारा थेरेपी: तनाव (Stress) हेयर फॉल का सबसे बड़ा साइलेंट कारण है। सिर पर औषधीय तेल (जैसे ब्राह्मी या भृंगराज तेल) की लगातार धार गिराने से नर्वस सिस्टम शांत होता है और स्कैल्प को डीप-हाइड्रेशन (Deep hydration) मिलता है।
  • नस्य थेरेपी: आयुर्वेद में नासिका को सिर का द्वार माना गया है। नाक के रास्ते अणु तेल या औषधीय घी डालने से यह सीधे मस्तिष्क के केंद्रों और बालों की जड़ों को गहरा पोषण (Nutrition) देता है।
  • अभ्यंग मालिश (शिरो अभ्यंग): वात दोष को शांत करने और स्कैल्प के सूखेपन को खत्म करने के लिए गुनगुने औषधीय तेलों से सिर की डीप-टिशू मालिश की जाती है, जिससे वहाँ खून का बहाव प्राकृतिक रूप से तेज़ हो जाता है।
  • विरेचन थेरेपी: शरीर से दूषित पित्त और बालों को झड़ाने वाले भयंकर टॉक्सिन्स को मल के रास्ते बाहर निकालने के लिए लिवर की डीप-क्लीनिंग की जाती है, जो बालों के लिए एक गेम-चेंजर साबित होती है।

बालों के प्राकृतिक रूप से वापस आने में कितना समय लगता है?

सालों से डैमेज हो रही बालों की जड़ों और कमज़ोर हो चुके फॉलिकल्स को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पित्त शांत करने वाले आहार से शरीर की गर्मी कम होगी। रोज़ाना नहाते या कंघी करते समय बालों का टूटना और गिरना काफी हद तक रुक जाएगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म (नस्य) और रसायनों के प्रभाव से स्कैल्प का ब्लड सर्कुलेशन सुधरेगा। जहाँ बाल हल्के हो गए थे, वहाँ आपको छोटे-छोटे नए बाल (Baby hair) उगते हुए दिखाई देने लगेंगे।
  • 5-6 महीने: आपकी अस्थि धातु और मज्जा पूरी तरह पोषित हो जाएँगी। आप बिना किसी सर्जरी या आर्टिफिशियल ट्रांसप्लांट के, प्राकृतिक रूप से घने और मज़बूत बालों का अनुभव करेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

बालों के झड़ने और गंजेपन के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य ब्लड सर्कुलेशन को ज़बरदस्ती बढ़ाने के लिए मिनॉक्सिडिल (Minoxidil) देना या सिर के पीछे से बाल निकालकर आगे लगाना (Transplant)। पित्त को शांत करना, अस्थि धातु को मज़बूत करना और 'नस्य' द्वारा प्राकृतिक रूप से स्कैल्प को खुद बाल उगाने के लिए पोषित करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल एक जेनेटिक (Genetic) या लोकल कॉस्मेटिक समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात-पित्त दोषों और कमज़ोर अस्थि धातु का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल बायोटिन (Biotin) सप्लीमेंट्स खाने की आम सलाह दी जाती है। डाइट में 'स्नेहन' (गाय का घी), पित्त-नाशक भोजन, और स्ट्रेस कम करने के लिए शिरोधारा पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर बाल तुरंत झड़ने लगते हैं, और ट्रांसप्लांट के बाल भी बिना अंदरूनी पोषण के पतले होकर गिर सकते हैं। शरीर का मेटाबॉलिज़्म और स्कैल्प अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि वे प्राकृतिक रूप से बालों को होल्ड (Hold) करना सीख जाते हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद आपके झड़ते बालों को रोककर नए बाल उगाने में प्राकृतिक रूप से गज़ब का काम कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने स्कैल्प या शरीर में ये भयंकर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • अचानक पैचेस में बाल उड़ना (Patchy Hair Loss): अगर कुछ ही दिनों में आपके सिर, दाढ़ी या भौंहों (Eyebrows) से गोल-गोल सिक्कों के आकार में बाल अचानक गायब हो जाएँ (यह गंभीर Alopecia Areata का संकेत है)।
  • स्कैल्प पर भयंकर घाव या खून आना: अगर सिर की त्वचा पर लाल रंग के बड़े-बड़े चकत्ते (Plaques) बन जाएँ, जिनमें से खून या पस निकलने लगे।
  • बालों के झड़ने के साथ भारी थकावट और वज़न बदलना: अगर भयंकर हेयर फॉल के साथ आपका वज़न अचानक से बहुत तेज़ी से गिर रहा है या बढ़ रहा है, और आपको पूरा दिन नींद आती है (यह गंभीर थायराइड का अलार्म हो सकता है)।
  • स्कैल्प का पत्थर जैसा कड़क हो जाना (Scarring Alopecia): अगर सिर की त्वचा इतनी कड़क और चिकनी हो जाए कि वहाँ रोम छिद्र (Pores) ही नज़र न आएँ (इस स्थिति में बाल वापस आना लगभग असंभव हो जाता है)।

निष्कर्ष

अपने बालों को एक हरे-भरे पेड़ की पत्तियों की तरह समझें। जब पेड़ की जड़ें (अस्थि धातु) कमज़ोर होती हैं और ज़मीन (स्कैल्प) में पानी नहीं होता, तो पत्तियाँ अपने आप पीली होकर झड़ने लगती हैं। आप बाहर से पत्तियों पर कितना भी हरा रंग कर लें या दूसरी जगह से पत्तियाँ लाकर चिपका (Transplant) लें, जब तक जड़ें मज़बूत नहीं होंगी, पेड़ हरा-भरा नहीं हो सकता। सुबह कंघी करते हुए मुट्ठी भर बालों का गिरना, मांग का चौड़ा होना और हर वक्त गंजे होने का डर रहना, ये कोई साधारण कॉस्मेटिक समस्या नहीं है; यह एक अलार्म है कि आपका पित्त ब्लॉक होकर आपके सिर की जड़ों को जला रहा है। केवल केमिकल वाले लोशन रगड़कर या जल्दबाज़ी में सर्जरी करवाकर इस भयंकर धातु-क्षय को टालने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपके शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को हमेशा के लिए अपाहिज कर देता है।

हेयर ट्रांसप्लांट के भ्रम और महंगे केमिकल्स की लत के चक्रव्यूह से बाहर निकलें। बाहर के जंक फूड को छोड़कर हमेशा ठंडा, सुपाच्य और शुद्ध गाय के घी से बना भोजन खाएँ। अपनी डाइट में आँवला, लौकी और नारियल पानी शामिल करें। भृंगराज, ब्राह्मी और अश्वगंधा जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की नस्य व शिरोधारा थेरेपी से अपनी सूखी हुई स्कैल्प को प्राकृतिक पोषण देकर नया जीवन दें। गंजेपन के इस खौफ को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा न बनने दें,आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

यह एक बहुत बड़ी भ्रांति है। ट्रांसप्लांट में आपके सिर के पिछले हिस्से से बाल निकालकर आगे लगाए जाते हैं। अगर आपके शरीर के अंदर पित्त बढ़ा हुआ है या पोषण की कमी है, तो कुछ सालों बाद ट्रांसप्लांट किए गए बाल भी पतले होकर झड़ने लगते हैं। जड़ की समस्या को ठीक करना अनिवार्य है।

अगर आप सल्फेट (Sulphate) और केमिकल वाले कठोर शैम्पू का रोज़ाना इस्तेमाल करते हैं, तो वे स्कैल्प का प्राकृतिक तेल (Sebum) छीन लेते हैं। इससे वात बढ़ता है, बाल रूखे हो जाते हैं और जल्दी टूटते हैं। आयुर्वेद में हफ़्ते में 2-3 बार हल्के हर्बल क्लेंज़र (जैसे रीठा, शिकाकाई) के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है।

प्याज के रस में सल्फर होता है, जो कुछ मामलों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ा सकता है। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार प्याज बहुत तीक्ष्ण (Tikhshna) और गर्म होता है। अगर आपका हेयर फॉल पित्त (गर्मी) के कारण है, तो सीधा प्याज का रस लगाने से स्कैल्प जल सकता है और बाल ज़्यादा गिर सकते हैं। इसे किसी ठंडे तेल में मिलाकर ही लगाना चाहिए।

लगातार टाइट टोपी या हेलमेट पहनने से स्कैल्प पर पसीना और गंदगी जमा हो जाती है, जिससे फंगल इन्फेक्शन हो सकता है। इसके अलावा, लगातार रगड़ (Traction) लगने से भी बालों की जड़ें कमज़ोर होती हैं। हेलमेट के नीचे एक साफ सूती कपड़ा पहनना एक अच्छा बचाव है।

पीआरपी में आपके ही खून से प्लेटलेट्स निकालकर स्कैल्प में इंजेक्ट किए जाते हैं। यह कुछ समय के लिए ग्रोथ दे सकता है, लेकिन अगर आपके खून (रक्त धातु) में ही आम या टॉक्सिन्स भरे हैं, तो अशुद्ध पीआरपी लंबे समय तक कोई फायदा नहीं देगा। आयुर्वेद से खून को अंदर से शुद्ध करना ज़्यादा स्थायी है।

भारी वज़न उठाने से शरीर में टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) और डीएचटी (DHT) हॉर्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जो जेनेटिक हेयर लॉस को तेज़ करता है। इसके अलावा, नकली या केमिकल वाले व्हे प्रोटीन (Whey Protein) से लिवर पर दबाव पड़ता है, जो शरीर में गर्मी बढ़ाकर बालों को गिरा सकता है।

यह एक मिथक है। एक सफेद बाल उखाड़ने से आसपास के बाल सफेद नहीं होते। लेकिन बाल उखाड़ने से हेयर फॉलिकल हमेशा के लिए डैमेज हो सकता है, जिससे वहाँ बाल आना ही बंद हो सकता है, जो आगे चलकर गंजेपन का कारण बनता है।

हाँ। आयुर्वेद आपके जेनेटिक्स को नहीं बदल सकता, लेकिन वह आपके शरीर के अंदरूनी माहौल (दोषों) को इतना बैलेंस कर सकता है कि जो गंजापन आपको 30 की उम्र में आना था, वह 50 या 60 की उम्र तक टल जाए। आयुर्वेद जेनेटिक ट्रिगर्स को शांत करने में बहुत असरदार है।

आयुर्वेद में बालों में स्नेहन (मालिश) को बहुत महत्व दिया गया है। रोज़ाना या हफ़्ते में कम से कम 3 बार भृंगराज या नारियल के तेल से स्कैल्प की मालिश करने से वात शांत होता है, जड़ें मज़बूत होती हैं और रूखेपन से होने वाला हेयर फॉल तुरंत रुक जाता है।

शत-प्रतिशत। जब आप वज़न कम करने के लिए अचानक खाना छोड़ देते हैं (Crash diet), तो शरीर को ज़रूरी विटामिन्स, प्रोटीन और मिनरल्स नहीं मिलते। शरीर बालों को गैर-ज़रूरी अंग मानकर उनकी सप्लाई काट देता है, जिससे टेलोजेन एफ्लुवियम (भारी हेयर फॉल) शुरू हो जाता है।

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