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बार-बार बढ़ता uric acid आगे किन समस्याओं का कारण बन सकता है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 16 May, 2026
  • category-iconUpdated on 19 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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सुबह उठते ही आपके पैर के अंगूठे में अचानक सुई चुभने जैसा भयंकर दर्द हो। अंगूठा लाल और सूजा हुआ लगे। ज़्यादातर लोग इसे मामूली मोच या थकान समझकर तुरंत पेनकिलर खा लेते हैं और दर्द दबते ही इसे भूल जाते हैं। लेकिन यह कोई आम दर्द नहीं, बल्कि खून में यूरिक एसिड के ज़हरीले क्रिस्टल्स जमा होने का सबसे बड़ा अलार्म है। बार-बार बढ़ते यूरिक एसिड को सिर्फ दर्द की गोलियों से दबाना आपके गुर्दों (Kidneys) और दिल को हमेशा के लिए डैमेज कर सकता है। आइए जानते हैं इसके भयंकर परिणाम और आयुर्वेद कैसे इसका स्थायी समाधान करता है।

यूरिक एसिड का बार-बार बढ़ना असल में क्या है?

जब हम अपनी रोज़मर्रा की डाइट में प्यूरीन (Purine) से भरपूर चीज़ें (जैसे रेड मीट, बहुत भारी दालें, शराब या पैकेटबंद जंक फूड) खाते हैं, तो हमारा पाचन तंत्र उसे तोड़ने के बाद एक प्रकार का कचरा (Waste product) पैदा करता है, जिसे विज्ञान की भाषा में 'यूरिक एसिड' कहते हैं। एक स्वस्थ इंसान के शरीर में, किडनी इस कचरे को खून से फिल्टर करके पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती है।

लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब आपका लिवर (मेटाबॉलिज़्म) ज़रूरत से ज़्यादा यूरिक एसिड बनाने लगता है या आपकी कमज़ोर हो चुकी किडनी इसे फिल्टर करने में असमर्थ हो जाती है। यह अतिरिक्त यूरिक एसिड आपके खून में तैरने लगता है। जब खून में इसकी मात्रा बहुत ज़्यादा हो जाती है (Hyperuricemia), तो यह धीरे-धीरे छोटे-छोटे, नुकीले कांच जैसे क्रिस्टल (Monosodium Urate Crystals) का रूप ले लेता है। गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के कारण ये भारी क्रिस्टल्स शरीर के सबसे निचले हिस्सों, विशेषकर पैर के अंगूठे, टखनों और घुटनों के जोड़ों (Joints) में जाकर जमा होने लगते हैं और वहां भयंकर चुभन, सूजन और जलन पैदा करते हैं।

लोग इस भयंकर चेतावनी को नज़रअंदाज़ क्यों करते हैं?

पेनकिलर से तुरंत मिलने वाली झूठी राहत (The Painkiller Trap)

जब यूरिक एसिड का पहला दर्दनाक अटैक (Gout attack) आता है, तो इंसान दर्द से तड़प उठता है। ऐसे में वह तुरंत कोई भारी दर्द निवारक गोली (Painkiller) या सूजन कम करने वाली दवा खा लेता है। कुछ ही घंटों में सूजन उतर जाती है और दर्द गायब हो जाता है। लोग सोचते हैं कि "चलो, अब तो मैं बिल्कुल ठीक हूँ" और वे वापस अपने उसी खराब खान-पान और जीवनशैली में लौट जाते हैं। वे यह नहीं समझते कि पेनकिलर ने सिर्फ दिमाग को दर्द का एहसास होना बंद किया है, खून में तैर रहे यूरिक एसिड के उन नुकीले क्रिस्टल्स को खत्म नहीं किया है। अंदर ही अंदर बीमारी और विकराल रूप ले रही होती है।

क्या टमाटर और दाल छोड़ने से सब ठीक हो जाएगा? 

समाज में यूरिक एसिड को लेकर बहुत सी गलतफहमियां हैं। ज़्यादातर लोग मानते हैं कि सिर्फ टमाटर खाना छोड़ देने या एक-दो दिन दाल न खाने से यूरिक एसिड जड़ से खत्म हो जाएगा। वे अपनी कमज़ोर हो चुकी किडनी की फिल्टर करने की क्षमता और खराब लिवर (मेटाबॉलिज़्म) का इलाज नहीं कराते, जो इस बीमारी की असली जड़ है।

एक्शन न लेने के भयंकर परिणाम: बार-बार बढ़ता यूरिक एसिड किन समस्याओं का कारण बनता है?

अगर आप यह मानकर बैठे हैं कि यूरिक एसिड सिर्फ पैर के अंगूठे का एक साधारण सा दर्द है और जब दर्द होगा तब गोली खा लेंगे, तो आप अनजाने में अपने पूरे शरीर को बहुत बड़े और जानलेवा खतरे में डाल रहे हैं। भविष्य में यह निम्नलिखित भयंकर बीमारियों का कारण बनता है:

गंभीर गाउट (Severe Gout) और स्थायी अपंगता (Joint Deformity):

शुरुआत में यूरिक एसिड सिर्फ पैर के अंगूठे में दर्द करता है, लेकिन अगर इसे सालों तक इग्नोर किया जाए, तो यह टखनों, घुटनों, उंगलियों, कलाई और कोहनियों के जोड़ों में बुरी तरह भर जाता है। इसके नुकीले क्रिस्टल्स आपकी हड्डियों और कार्टिलेज (Cartilage) को अंदर ही अंदर रेत की तरह घिसने लगते हैं। अगर सही समय पर इलाज न हो, तो इंसान के हाथ और पैर हमेशा के लिए टेढ़े-मेढ़े (Deformed) हो सकते हैं और वह जीवन भर के लिए बिस्तर पर लाचार या अपाहिज हो सकता है।

टोफी (Tophi) का भयंकर रूप लेना:

जब यूरिक एसिड बहुत ज़्यादा मात्रा में और लंबे समय (सालों) तक बढ़ा रहता है, तो यह सिर्फ जोड़ों में नहीं रुकता, बल्कि त्वचा के ठीक नीचे बड़ी-बड़ी, कठोर और भद्दी गांठें बना लेता है। इन गांठों को मेडिकल भाषा में 'टोफी' (Tophi) कहते हैं। ये गांठें अक्सर कानों के पीछे, उंगलियों के पोरों, और कोहनियों के पास बन जाती हैं। कभी-कभी ये गांठें इतनी बड़ी हो जाती हैं कि फट जाती हैं और इनमें से सफेद चॉक या टूथपेस्ट जैसा गाढ़ा पदार्थ निकलता है, जो बहुत दर्दनाक होता है और इसमें भयंकर इन्फेक्शन का खतरा रहता है।

किडनी स्टोन (Uric Acid Kidney Stones):

यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स सिर्फ जोड़ों में ही नहीं जमते, बल्कि वे आपकी किडनी के अंदर भी जमा होने लगते हैं और पथरी (Stones) का रूप ले लेते हैं। कैल्शियम की पथरी के मुकाबले यूरिक एसिड की पथरी बहुत ज़्यादा नुकीली और खतरनाक होती है। जब यह पथरी मूत्र नली (Urinary tract) से गुज़रती है या वहां फंस जाती है, तो इंसान को पीठ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द (Renal Colic) होता है, पेशाब रुक जाता है और कई बार यूरिन में खून आने (Hematuria) की भयंकर समस्या हो जाती है।

क्रोनिक किडनी फेलियर (CKD - Chronic Kidney Disease):

यह यूरिक एसिड का सबसे खौफनाक और जानलेवा परिणाम है। जब आपके खून में यूरिक एसिड हमेशा बढ़ा रहता है (Hyperuricemia), तो आपकी किडनी उसे फिल्टर करते-करते थक जाती है। यूरिक एसिड के ज़हरीले क्रिस्टल्स किडनी के नाज़ुक नेफ्रॉन्स (फिल्टर करने वाली सूक्ष्म छलनियों) को अंदर से डैमेज कर देते हैं। इससे किडनी सिकुड़ने लगती है और धीरे-धीरे व्यक्ति किडनी फेलियर की तरफ चला जाता है। एक समय ऐसा आता है जब किडनी शरीर का कचरा बाहर निकालने में पूरी तरह असमर्थ हो जाती है और इंसान को ज़िंदा रहने के लिए डायलिसिस (Dialysis) मशीन का सहारा लेना पड़ता है।

हृदय रोग (Heart Disease) और हाई ब्लड प्रेशर:

हालिया वैज्ञानिक और मेडिकल शोध यह साफ बताते हैं कि बढ़ा हुआ यूरिक एसिड सिर्फ जोड़ों और किडनी को नहीं, बल्कि आपके दिल को भी भारी नुकसान पहुँचाता है। खून में तैरता यूरिक एसिड खून की नसों (Blood vessels की Endothelial lining) को अंदर से सख्त और संकरा कर देता है। नसों के सख्त होने से ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है (Hypertension)। नसों में ब्लॉकेज होने के कारण भविष्य में हार्ट अटैक (Heart Attack) या ब्रेन स्ट्रोक (Stroke) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

आयुर्वेद इस समस्या को कैसे समझता है? (वातरक्त / Vatarakta)

आयुर्वेद दुनिया की सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है। आयुर्वेद में बढ़े हुए यूरिक एसिड और गाउट की बीमारी को 'वातरक्त' (Vatarakta) या 'आढ्य वात' कहा जाता है। 'वात' का मतलब है हवा (जो शरीर में दर्द और सुन्नपन लाती है) और 'रक्त' का मतलब है खून।आयुर्वेद के गहराई से किए गए विश्लेषण के अनुसार, जब हम लगातार बहुत ज़्यादा खट्टा, तीखा, नमकीन, गरिष्ठ भोजन (जैसे बहुत ज़्यादा मांस, बासी खाना, गरिष्ठ दालें) खाते हैं और साथ ही शारीरिक मेहनत या व्यायाम बिल्कुल नहीं करते (Sedentary lifestyle), तो हमारे शरीर की 'जठराग्नि' (पाचन की आग) कमज़ोर पड़ जाती है। इसके कारण हमारा 'रक्त' (खून) दूषित हो जाता है और दूसरी तरफ 'वात' दोष अपनी जगह से कुपित हो जाता है।

यह बिगड़ा हुआ और ताकतवर वात दोष, दूषित खून के प्राकृतिक प्रवाह (Flow) को रोक देता है। खून के प्रवाह में रुकावट आने के कारण यह ज़हरीली गंदगी (टॉक्सिन्स) शरीर के जोड़ों, विशेषकर पैर के निचले हिस्सों (जहां गुरुत्वाकर्षण ज़्यादा होता है), में जाकर जमा हो जाती है और वहां भयंकर जलन, लालिमा, सुई चुभने जैसा दर्द और सूजन पैदा करती है। जब तक शरीर से इस दूषित रक्त को साफ नहीं किया जाएगा, वात को शांत नहीं किया जाएगा और लिवर-किडनी को अंदरूनी ताकत नहीं दी जाएगी, बीमारी ठीक नहीं होगी।

यूरिक एसिड से बचाव और राहत के लिए बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें यूरिक एसिड के ज़हर को शरीर से फ्लश आउट (Flush out) करने और जोड़ों की सूजन को जड़ से खत्म करने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं:

  • गिलोय : आयुर्वेद में गिलोय को वातरक्त (Uric Acid) के लिए 'अमृत' माना गया है। इसकी तासीर ऐसी होती है कि यह शरीर से अतिरिक्त यूरिक एसिड को तुरंत बाहर निकालती है, खून साफ करती है, इम्युनिटी बढ़ाती है और जोड़ों की भयंकर जलन व लालिमा को जादुई रूप से शांत करती है।
  • पुनर्नवा (Punarnava): जैसा इसका नाम है (पुनः नया करने वाली), यह कमज़ोर हो चुकी किडनी को नई ताकत देती है। यह प्रकृति का एक बेहतरीन डाययूरेटिक (Natural Diuretic) है जो यूरिन के प्रवाह को बढ़ाकर यूरिक एसिड को शरीर से बाहर बहा देती है और सूजन (Edema) कम करती है।
  • गुग्गुल : यह एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन है जो जोड़ों के अंदर जमे हुए सालों पुराने सख्त यूरिक एसिड क्रिस्टल्स (Tophi) को तोड़ता है और सूजन व दर्द को बिना किसी साइड-इफेक्ट के खत्म करता है।
  • गोखरू (Gokshura): यह यूरिक एसिड की वजह से बनने वाली किडनी स्टोन को रोकता है, मूत्र मार्ग की सफाई करता है और किडनी के नेफ्रॉन्स को सुरक्षा प्रदान करता है।

आयुर्वेदिक थेरेपी वातरक्त (Uric Acid) में कैसे काम करती है?

जब खून में यूरिक एसिड का ज़हर बहुत ज़्यादा बढ़ जाए, गाउट का अटैक भयंकर हो और गोलियों से बिल्कुल भी आराम न मिल रहा हो, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी गहराई में जाकर काम करती है और चमत्कारिक परिणाम देती है।

  • रक्तमोक्षण (Raktamokshana / Leech Therapy): वातरक्त के लिए यह आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली और चमत्कारी चिकित्सा है। इसमें प्रभावित, लाल और सूजे हुए जोड़ (जैसे पैर का अंगूठा या टखना) के पास विशेष रूप से पाली गई औषधीय जोंक (Medicinal Leech) लगाई जाती है। यह जोंक शरीर से सिर्फ दूषित खून और यूरिक एसिड के टॉक्सिन्स को चूस लेती है। इसके अलावा सिरावेध (Venesection) भी किया जाता है। रक्तमोक्षण के कुछ ही घंटों बाद मरीज़ को असहनीय दर्द और सूजन में जादुई रूप से आराम मिलता है।
  • बस्ती (Basti): यह वात दोष को जड़ से खत्म करने की सबसे उत्तम चिकित्सा (अर्ध-चिकित्सा) है। औषधीय काढ़ों और तेलों का एनीमा शरीर के कोष्ठ (पेट) और आंतों से सारी गंदगी को बाहर निकाल देता है।
  • लेप (Lepa) और अभ्यंग: गर्म और लाल हो चुके जोड़ों पर खास ठंडी और सूजन कम करने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों (जैसे दशांग लेप) का लेप लगाया जाता है, जो तुरंत आराम देता है।

यूरिक एसिड से बचने के लिए वात-रक्त शामक डाइट प्लान क्या हो?

यूरिक एसिड पूरी तरह से आपके खान-पान और जीवनशैली की बीमारी है। आप रोज़ाना जो खाते हैं, वही आपका दर्द तय करता है। अगर डाइट सही नहीं है, तो दुनिया की कोई भी दवा पूरी तरह काम नहीं करेगी।

  • क्या खाएँ (Foods to Include): अपनी डाइट में पुराना चावल, लौकी, परवल, तोरई, सेब, जामुन और ताज़ा धनिया का सेवन बढ़ाएँ। विटामिन C (जैसे ताज़ा आंवला या नींबू पानी) यूरिक एसिड को पेशाब के रास्ते बाहर निकालने में बहुत मदद करता है। दिन भर में कम से कम 3 से 4 लीटर गुनगुना या ताज़ा पानी पिएं ताकि किडनी कचरा फ्लश आउट कर सके।
  • किन चीज़ों से सख्त परहेज़ करें : रेड मीट, ऑर्गन मीट (कलेजी), सी-फूड, हर प्रकार की शराब (विशेषकर बीयर यूरिक एसिड का सबसे बड़ा दुश्मन है), पैकेटबंद सूप, और अत्यधिक चीनी (High Fructose Corn Syrup) वाले कोल्ड ड्रिंक्स व जूस तुरंत बंद कर दें। उड़द की दाल, राजमा, और छोले का सेवन बहुत कम कर दें या बंद कर दें।
  • दैनिक पेय: रोज़ाना सुबह खाली पेट गिलोय का ताज़ा रस या धनिया के बीजों का गुनगुना पानी पिएं। यह खून की गर्मी को शांत करता है, पाचन सुधारता है और जोड़ों की सूजन को रोकता है।

ठीक होने (Recovery) में लगने वाला समय कितना है?

यह समझना ज़रूरी है कि आयुर्वेद पेनकिलर की तरह शरीर को सुन्न नहीं करता, बल्कि यह आपके खून की गहराई से सफाई करता है और मेटाबॉलिज़्म को प्राकृतिक रूप से रिपेयर करता है। इस पूरी प्रक्रिया में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते (1-3 Weeks): आपके जोड़ों की भयंकर चुभन, लालिमा और सूजन में काफी हद तक आराम मिलने लगेगा। रात को अचानक आने वाले दर्द का अटैक कम हो जाएगा।
  • 1 से 3 महीने तक: आपके खून में यूरिक एसिड का स्तर (Serum Uric Acid Level) धीरे-धीरे कम होकर नॉर्मल रेंज में आने लगेगा। शरीर में एक नया हल्कापन और ऊर्जा महसूस होगी। किडनी की कार्यक्षमता में सुधार होगा।
  • 3 से 6 महीने तक: आपकी किडनी और लिवर की क्षमता काफी हद तक रिपेयर हो जाएँगी। जोड़ों में सालों से जमे हुए क्रिस्टल्स घुलने लगेंगे। आप एक वात-शामक अनुशासित जीवनशैली के साथ पूरी तरह दर्द-रहित और सामान्य ज़िंदगी जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

यूरिक एसिड बढ़ने पर हम अक्सर तुरंत राहत ढूँढते हैं, लेकिन सिर्फ पेनकिलर लेना और आयुर्वेद को अपनाना कितना अलग है, यह समझना हर मरीज़ के लिए बहुत ज़रूरी है।

तुलना का आधार आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक चिकित्सा
इलाज का मुख्य लक्ष्य Allopurinol/NSAIDs से यूरिक एसिड और दर्द कंट्रोल अग्नि सुधारकर यूरिक एसिड को प्राकृतिक रूप से बाहर निकालना
नज़रिया जीवनभर दवा पर निर्भरता रक्त शोधन से स्थायी समाधान
उपचार तरीका केमिकल्स से उत्पादन दबाना मेटाबॉलिज़्म सुधारना और डिटॉक्स
दवाएँ/जड़ी-बूटियाँ Allopurinol, पेनकिलर्स गिलोय, पुनर्नवा जैसी औषधियाँ
साइड इफेक्ट लिवर, पेट (अल्सर), किडनी पर असर सामान्यतः सुरक्षित, शरीर को मजबूती

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

यूरिक एसिड के दर्द को हमेशा मामूली मोच या खिंचाव समझकर घर पर इग्नोर नहीं करना चाहिए। अगर आपको ये गंभीर संकेत दिखें, तो यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • अगर आपके पैर के अंगूठे या टखने में दर्द इतना भयंकर और असहनीय हो कि उस पर चादर का हल्का सा कपड़ा छूने से भी इंसान चीख पड़े।
  • अगर दर्द वाले जोड़ की त्वचा बिल्कुल लाल (टमाटर जैसी), बहुत चमकदार और छूने पर भट्टी की तरह गर्म महसूस हो।
  • अगर जोड़ों के दर्द के साथ-साथ आपको तेज़ बुखार (Fever) और कंपकंपी (Chills) महसूस होने लगे (यह जोड़ में गंभीर इन्फेक्शन या सेप्टिक अर्थराइटिस का संकेत हो सकता है)।
  • अगर आपको पेशाब करने में भयंकर दर्द या जलन हो रही हो या यूरिन का रंग लाल/कोला जैसा हो जाए (यह किडनी स्टोन या किडनी डैमेज का सीधा लक्षण है)।

निष्कर्ष

बार-बार बढ़ता यूरिक एसिड और पैरों का दर्द कोई साधारण बात नहीं है; यह सीधा संकेत है कि आपका खून ज़हरीला हो रहा है और आपकी किडनी मदद मांग रही है। लगातार पेनकिलर्स खाना और सिर्फ कुछ दालें छोड़ना एक झूठा भ्रम है, जो आपको किडनी फेलियर और अपंगता की ओर धकेल रहा है। दर्द बर्दाश्त से बाहर होने पर आयुर्वेद अपनाएं। सही आयुर्वेदिक उपचार, पंचकर्म और वात-रक्त शामक डाइट से आप दर्द की गोलियों से आज़ाद हो सकते हैं। अपने शरीर के संकेतों को समझें और जीवा आयुर्वेद के साथ एक स्वस्थ, दर्द-मुक्त ज़िंदगी की ओर लौटें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, हालांकि रेड मीट में प्यूरीन ज़्यादा होता है, लेकिन अत्यधिक दालें, पनीर, मीठे ड्रिंक्स (Fructose) और शराब भी यूरिक एसिड को तेज़ी से बढ़ा सकते हैं।

पानी किडनी को एसिड फ्लश करने में मदद करता है, लेकिन यह केवल एक सहायक उपाय है। अगर मेटाबॉलिज्म खराब है, तो केवल पानी पीना काफी नहीं होगा।

एलोपैथी में अक्सर इसे दबाने की दवा दी जाती है, लेकिन आयुर्वेद में अगर आप 3-6 महीने का कोर्स पूरा करते हैं और लाइफस्टाइल सुधारते हैं, तो दवाइयाँ बंद की जा सकती हैं।

तेज़ दर्द (Acute Attack) के दौरान आराम करना चाहिए। दर्द कम होने पर हल्का व्यायाम और योग ज़रूरी है ताकि ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहे।

नींबू एसिडिक होता है लेकिन शरीर के अंदर जाकर यह एल्कलाइन प्रभाव छोड़ता है, जो यूरिक एसिड क्रिस्टल्स को घोलने में मदद कर सकता है।

हाँ, अगर आपके परिवार में किडनी की समस्या या गाउट का इतिहास है, तो आपको 30 की उम्र के बाद नियमित जांच करानी चाहिए।

गिलोय, नीम और कैशोर गुग्गुलु को वात-रक्त के लिए सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि ये खून को साफ करने और दर्द कम करने में माहिर हैं।

हाँ, जब क्रिस्टल्स जोड़ों के बीच जमा होते हैं, तो वे कार्टिलेज को नुकसान पहुँचाते हैं, जिससे जोड़ों के हिलने पर आवाज़ या रगड़ महसूस हो सकती है।

हाँ, शरीर का बढ़ा हुआ वजन (खासकर पेट की चर्बी) किडनी की कार्यक्षमता को कम करता है। वजन कम करने से यूरिक एसिड का स्तर खुद-ब-खुद गिरने लगता है।

आयुर्वेद के अनुसार, वात-रक्त की स्थिति में दही का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह अभिष्यंदी होता है, जो चैनल्स को ब्लॉक कर सूजन बढ़ा सकता है।

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