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गर्मी में बाल रूखे और झड़ रहे - Sun, Sweat, Pitta का सीधा असर

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

गर्मियों का मौसम आते ही चिलचिलाती धूप और उमस हमारे शरीर को झुलसाने लगती है, लेकिन इसका सबसे बुरा और खामोश असर हमारे बालों पर पड़ता है। जब आप बाहर निकलते हैं, तो बालों में जमा होने वाला पसीना और सूरज की तेज़ अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें मिलकर एक ऐसा खतरनाक कॉम्बिनेशन बनाते हैं, जो बालों की प्राकृतिक नमी को पूरी तरह सोख लेता है। लोग अक्सर इसे मौसम की आम बात समझकर केवल बाहर से ठंडे पानी से सिर धो लेते हैं।

लेकिन यह केवल बाहरी धूल-मिट्टी या पसीने की चिपचिपाहट नहीं है। यह भयंकर गर्मी आपके स्कैल्प (Scalp) के अंदरूनी तापमान को इतना बढ़ा देती है कि बालों की जड़ें (Hair roots) सचमुच जलने और कमज़ोर पड़ने लगती हैं। जब तक आप अपने शरीर के इस 'कूलिंग सिस्टम' के फेल होने और बालों के टूटने के असली विज्ञान को नहीं समझेंगे, तब तक कोई भी महंगा शैम्पू या सीरम आपके गिरते बालों को नहीं बचा सकता।

गर्मियों की तेज़ धूप और पसीना बालों को कैसे बेजान कर देते हैं?

हम गर्मियों में त्वचा को बचाने के लिए सनस्क्रीन लगाते हैं, लेकिन बालों को अक्सर तेज़ धूप के रहमोकरम पर छोड़ देते हैं। जब धूप और पसीना सीधे आपके बालों पर हमला करते हैं, तो अंदर ही अंदर ये गतिविधियाँ आपके बालों को कमज़ोर कर रही होती हैं:

  • केराटिन (Keratin) का डैमेज होना: सूरज की तेज़ यूवी (UV) किरणें बालों के बाहरी कवच को भेदकर उनके अंदर मौजूद प्रोटीन (केराटिन) को तोड़ देती हैं। प्रोटीन के टूटने से बाल अपना लचीलापन खो देते हैं और झाड़ू की तरह कड़क हो जाते हैं।
  • पसीने से रोमछिद्रों (Pores) का ब्लॉक होना: स्कैल्प से निकलने वाला पसीना जब बाहर की धूल और प्रदूषण के साथ मिलता है, तो यह स्कैल्प के छोटे-छोटे रोमछिद्रों को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है। जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और बाल दम घुटने से टूट जाते हैं।
  • लैक्टिक एसिड (Lactic Acid) का भयंकर असर: पसीने में प्राकृतिक रूप से लैक्टिक एसिड होता है। जब पसीना लंबे समय तक स्कैल्प पर सूखता है, तो यह एसिड बालों की जड़ों को कमज़ोर कर देता है और उनका झड़ना कई गुना तेज़ हो जाता है।

पसीने और गर्मी से होने वाला हेयर फॉल किन प्रकारों में सामने आता है?

गर्मियों में बालों का झड़ना केवल एक तरह का नहीं होता। आपके शरीर की प्रकृति और बाहर के मौसम के अनुसार, यह हेयर फॉल इन भयंकर रूपों में आपको परेशान कर सकता है:

  • मिड-शाफ्ट ब्रेकेज (Mid-Shaft Breakage): यह तब होता है जब बाल जड़ों से नहीं, बल्कि बीच में से टूटते हैं। तेज़ धूप और गर्म हवाओं के कारण बाल इतने रूखे और बेजान हो जाते हैं कि कंघी करते ही वे बीच में से चटक कर टूट जाते हैं।
  • स्वेट-इंड्यूस्ड फॉलिक्यूलाइटिस (Sweat-Induced Folliculitis): बहुत ज़्यादा पसीना आने के कारण जब स्कैल्प की जड़ों (Follicles) में बैक्टीरिया या फंगस पनपने लगता है, तो जड़ों में छोटे-छोटे दाने हो जाते हैं, जिससे बाल गुच्छों में बाहर आते हैं।
  • रूट वीकनिंग (Root Weakening): लगातार स्कैल्प के गर्म रहने के कारण जड़ों की पकड़ कमज़ोर हो जाती है और नहाते या बाल धोते समय मुट्ठी भर बाल जड़ से उखड़ कर हाथ में आ जाते हैं।

शरीर के किन खामोश संकेतों से पहचानें कि गर्मी बालों को जला रही है?

बाल झड़ने से बहुत पहले आपका स्कैल्प आपको खतरे के संकेत देने लगता है। यदि आप गर्मी के मौसम में इन अलार्म्स को इग्नोर करते हैं, तो आप अपने बालों को भारी नुकसान पहुँचा रहे हैं:

  • स्कैल्प में भयंकर खुजली और जलन: धूप में निकलते ही या पसीना आते ही सिर में इतनी तेज़ खुजली मचना कि आप उसे रगड़-रगड़ कर छील लें। यह खुजली वाले इन्फेक्शन का साफ़ संकेत है।
  • गीला और चिपचिपा डैंड्रफ (Wet Dandruff): सर्दियों में डैंड्रफ सूखा होता है, लेकिन गर्मियों में पसीने और सीबम (Sebum) के मिलने से स्कैल्प पर एक चिपचिपी पीली परत जम जाती है, जो जड़ों को सड़ाने लगती है।
  • सिर से अजीब सी दुर्गंध आना: पसीना जब बैक्टीरिया के संपर्क में आता है, तो स्कैल्प से एक खट्टी और अजीब सी बदबू आने लगती है, जो साफ इशारा है कि अंदर फंगल इन्फेक्शन पनप रहा है।
  • थकावट और चिड़चिड़ापन: शरीर की गर्मी बढ़ने से न केवल बाल झड़ते हैं, बल्कि आपको पूरा दिन क्रोनिक फटीग और ब्रेन फॉग भी महसूस होता है, क्योंकि सिर का तापमान बढ़ा रहता है।

बालों को टूटने से बचाने के चक्कर में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

गर्मियों की चिपचिपाहट और बालों को साफ़ रखने की बेताबी में लोग अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो उनकी खराब जीवनशैली के साथ मिलकर बालों को तबाह कर देते हैं:

  • रोज़ाना केमिकल वाले शैम्पू से सिर धोना: पसीने से छुटकारा पाने के लिए लोग रोज़ाना सल्फेट (Sulphate) से भरे शैम्पू का इस्तेमाल करते हैं। यह स्कैल्प का बचा-खुचा प्राकृतिक तेल भी सोख लेता है और बालों को भूसे जैसा रूखा बना देता है।
  • गीले बालों को कसकर बांधना: गर्मी से बचने के लिए महिलाएं अक्सर पसीने से या नहाने के तुरंत बाद गीले बालों का कसकर जूड़ा बना लेती हैं। हवा न लगने से वहां भयंकर फंगस पैदा होती है और जड़ें सड़ने लगती हैं।
  • बाहर से ठंडे तेल (Cooling Oils) रगड़ना: सिर को ठंडा करने के लिए लोग मिंट या कपूर वाले तेज़ केमिकल तेल रगड़ते हैं। ये तेल कुछ मिनटों के लिए ठंडक का अहसास देते हैं, लेकिन बाद में स्कैल्प के रोमछिद्रों को ब्लॉक कर देते हैं।

आयुर्वेद 'धूप, पसीने और हेयर फॉल' के इस विज्ञान को कैसे समझता है?

आधुनिक चिकित्सा जिसे केवल बाहरी यूवी डैमेज (UV Damage) और बैक्टीरियल इन्फेक्शन मानती है, आयुर्वेद उसे शरीर में 'पित्त' के प्रकोप, दूषित 'स्वेद' (पसीना) और वात दोष के असंतुलन के रूप में गहराई से समझता है:

  • पित्त दोष का भयंकर रूप से भड़कना: बाल झड़ने का सबसे बड़ा कारण पित्त (गर्मी) का बढ़ना है। ग्रीष्म ऋतु (गर्मियों) में जब बाहर की गर्मी शरीर के अंदर के पित्त से मिलती है, तो यह बालों की जड़ों (Hair Follicles) को अंदर से जला देती है (खालित्य)।
  • स्वेद वह स्रोत (Sweat Channels) का दूषित होना: आयुर्वेद में पसीने को 'स्वेद' कहा गया है। जब पाचन तंत्र कमज़ोर होता है, तो शरीर के टॉक्सिन्स (आम) पसीने के ज़रिए स्कैल्प तक पहुँचते हैं और वहां भयंकर इन्फेक्शन पैदा कर देते हैं।
  • वात का रूखापन: पसीने से नमी खोने के बाद स्कैल्प पर बढ़ा हुआ वात हावी हो जाता है। यह वात बालों के सिरों (Ends) को फाड़कर उन्हें दोमुंहा (Split ends) बना देता है।

बालों की जड़ें मज़बूत करने वाली और शरीर को ठंडा रखने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने बालों को गर्मी की इस मार से बचाने के लिए आपको अपनी आयुर्वेदिक डाइट में ऐसे ठंडे (शीत-वीर्य) खाद्य पदार्थों को शामिल करना होगा, जो शरीर के तापमान को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित रखें:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - शरीर और स्कैल्प को ठंडा रखने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - पित्त और पसीना बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) जौ (Barley) का सत्तू, पुराना चावल, ओट्स, मूंग दाल। बहुत ज़्यादा मैदा, बासी और सूखे अनाज।
पेय पदार्थ (Beverages) नारियल पानी, धनिया-जीरे का पानी, पुदीने की छाछ, गन्ने का रस। अत्यधिक डार्क कॉफी, शराब, बर्फ का पानी, पैकेटबंद ड्रिंक्स।
फल (Fruits) तरबूज़, मीठे अंगूर, आँवला (बालों का अमृत), पपीता। बहुत ज़्यादा खट्टे फल, बिना मौसम के डिब्बाबंद फल।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, परवल (पानी से भरपूर सब्ज़ियाँ)। बहुत ज़्यादा तीखी लाल मिर्च, भारी लहसुन, गरम मसाला।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (पित्त शांत करने के लिए सर्वश्रेष्ठ), ताज़ा नारियल। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा डीप-फ्राइड और मसालेदार चीज़ें।

बालों को प्राकृतिक नमी और पोषण देने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई दिव्य 'केश्या' (बालों के लिए लाभकारी) और ठंडे रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के पसीने की गंदगी को साफ़ करते हैं और जड़ों को फौलादी बनाते हैं:

  • ब्राह्मी: यह सीधे तौर पर मस्तिष्क और स्कैल्प को ठंडक पहुँचाती है। गर्मियों में जब मानसिक तनाव और पसीने के कारण बाल झड़ते हैं, तो ब्राह्मी नर्वस सिस्टम को शांत करके हेयर फॉल को तुरंत रोकती है।
  • गिलोय: यह खून की गर्मी और दूषित पसीने के इन्फेक्शन को दूर करने की जादुई औषधि है। गिलोय इम्यूनिटी को बढ़ाती है और स्कैल्प पर होने वाले फंगल इन्फेक्शन को जड़ से खत्म करती है।
  • नीम: जब स्कैल्प पर चिपचिपा डैंड्रफ और पसीने के दाने (Folliculitis) हो जाएं, तो नीम की प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल खूबी स्कैल्प की डीप-क्लीनिंग करती है और खुजली को पूरी तरह शांत कर देती है।
  • अश्वगंधा: जब शरीर की गर्मी से अकारण एंग्जायटी हो और बाल कमज़ोर पड़ जाएं, तो अश्वगंधा बालों की जड़ों (Follicles) को अंदरूनी ताक़त और पोषण देता है।

स्कैल्प को धूप और गर्मी से बचाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब स्कैल्प के रोमछिद्रों में पसीना गहराई तक जम चुका हो और केवल शैम्पू से बात न बन रही हो, तो पंचकर्म की ये क्लासिकल थेरेपीज़ सिर को तुरंत डिकंप्रेस (Decompress) कर देती हैं:

  • शिरोधारा थेरेपी: गर्मियों में शरीर और दिमाग की भयंकर गर्मी को शांत करने के लिए यह सबसे बेहतरीन थेरेपी है। सिर पर चंदन या ब्राह्मी के औषधीय तेल/काढ़े की लगातार धार गिराने से स्कैल्प का तापमान तुरंत नीचे आता है और बाल गिरना रुकते हैं।
  • अभ्यंग मालिश (शिरो अभ्यंग): नारियल या भृंगराज के ठंडे तेलों से स्कैल्प की हल्की डीप-टिशू मालिश करने से ब्लॉक हो चुके रोमछिद्र खुल जाते हैं और ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है।
  • विरेचन थेरेपी: शरीर में गहराई तक जमे हुए दूषित पित्त और टॉक्सिन्स को मल के रास्ते बाहर निकालने के लिए लिवर और आंतों की डीप-क्लीनिंग की जाती है, जो बालों के स्वास्थ्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित होती है।

बालों के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

गर्मियों की तेज़ धूप और पसीने से डैमेज हुई बालों की जड़ों को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पित्त-नाशक डाइट से शरीर की भयंकर गर्मी शांत होगी। स्कैल्प की भयंकर खुजली, चिपचिपापन और डैंड्रफ काफी हद तक कम हो जाएंगे।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से स्कैल्प के रोमछिद्र (Pores) पूरी तरह साफ़ हो जाएंगे। बालों का बीच में से टूटना बंद हो जाएगा और कंघी करते समय बाल बहुत कम गिरेंगे।
  • 5-6 महीने: आपकी अस्थि और रस धातु पूरी तरह से पोषित हो जाएगी। आप बिना किसी आर्टिफिशियल कंडीशनर के, प्राकृतिक रूप से मज़बूत, मुलायम और घने बालों का अनुभव करेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

गर्मियों में बालों के झड़ने और स्कैल्प के डैमेज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य पसीने और फंगस को मारने के लिए कीटोकोनाज़ोल (Ketoconazole) या तेज़ एंटी-डैंड्रफ शैम्पू देना। पित्त को शांत करना, खून को साफ़ करना और 'शिरोधारा' द्वारा प्राकृतिक रूप से स्कैल्प का तापमान कम करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल बाहरी यूवी (UV) डैमेज और पसीने के कारण रोमछिद्रों के ब्लॉक होने की एक लोकल समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात-पित्त दोषों और दूषित 'स्वेद' (पसीने) का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल सिर को ढकने और रोज़ धोने की आम सलाह दी जाती है। डाइट में 'स्नेहन' (घी), पित्त-नाशक भोजन, और शरीर को ठंडा रखने वाले पेय पदार्थों पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर शैम्पू का असर खत्म होते ही धूप और पसीने के कारण बाल फिर से भयंकर रूप से झड़ने लगते हैं। शरीर का मेटाबॉलिज़्म और स्कैल्प अंदर से इतने मज़बूत व साफ़ हो जाते हैं कि वे गर्मी और पसीने को प्राकृतिक रूप से सहना सीख जाते हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद धूप और पसीने से हुए डैमेज को पूरी तरह रिवर्स कर बालों का गिरना रोक सकता है, लेकिन अगर आपको अपने स्कैल्प या शरीर में ये भयंकर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • स्कैल्प पर पस वाले बड़े दाने: अगर पसीने के कारण स्कैल्प पर इतने बड़े दाने (Boils) हो जाएं जिनमें भयंकर दर्द हो और मवाद (Pus) भर जाए (यह गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन है)।
  • पैचेस में अचानक बाल उड़ना: अगर सिर से अचानक गोल-गोल सिक्कों के आकार में बाल गायब होने लगें और त्वचा बिल्कुल चिकनी हो जाए।
  • बाल झड़ने के साथ तेज़ थकावट और थायराइड के लक्षण: अगर भारी हेयर फॉल के साथ-साथ आपका वज़न अचानक से बहुत तेज़ी से बदल रहा है और आपको अत्यधिक ठंड या गर्मी लग रही है।
  • स्कैल्प से भयंकर खून आना: अगर खुजली करते हुए स्कैल्प बुरी तरह छिल जाए, खून आने लगे और वहां पपड़ी (Crust) जम जाए (यह सीवियर सोरायसिस या एग्ज़िमा हो सकता है)।

निष्कर्ष

अपने बालों को एक ऐसे नाज़ुक पौधे की तरह समझें जिसे 45 डिग्री की भयंकर गर्मी में बिना किसी छांव के छोड़ दिया गया है। जब सूरज की सीधी किरणें और नमकीन पसीना रोज़ाना इन पर गिरता है, तो यह केवल धूल-मिट्टी का जमना नहीं है; यह उस पौधे की जड़ों (Hair follicles) का अंदरूनी रूप से झुलस जाना है। पसीने की बदबू आना, कंघी करते ही बालों का बीच में से टूट जाना और स्कैल्प पर चिपचिपा डैंड्रफ रहना, ये कोई सामान्य मौसम का असर नहीं है; यह एक अलार्म है कि आपका 'पित्त' बेकाबू हो चुका है और आपके स्कैल्प के रोमछिद्र बुरी तरह चोक (Choke) हो चुके हैं। केवल तेज़ केमिकल वाले शैम्पू रगड़कर या गीले बालों को बांधकर इस भयंकर डैमेज को टालने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपकी बालों की जड़ों को हमेशा के लिए मार रहा है।

गर्मियों के इस हेयर फॉल और केमिकल शैम्पू के चक्रव्यूह से बाहर निकलें। बाहर के तीखे और जंक फूड को छोड़कर हमेशा ठंडा, सुपाच्य और शरीर को शांत करने वाला भोजन खाएं। अपनी डाइट में जौ का सत्तू, लौकी और नारियल पानी शामिल करें। नीम, गिलोय और ब्राह्मी जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की शिरोधारा व अभ्यंग मालिश से अपनी झुलसी हुई स्कैल्प को प्राकृतिक ठंडक देकर नया जीवन दें। पसीने और धूप के इस खौफ को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा न बनने दें,आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

गर्मियों में पसीना साफ़ करना ज़रूरी है, लेकिन रोज़ाना केमिकल वाले शैम्पू से बाल धोने से स्कैल्प का प्राकृतिक तेल (सीबम) खत्म हो जाता है, जिससे बाल रूखे होकर टूटते हैं। आप पसीने को साफ़ करने के लिए केवल सादे पानी से सिर धो सकते हैं या हफ़्ते में 2-3 बार किसी हल्के आयुर्वेदिक क्लेंज़र (रीठा-आँवला) का इस्तेमाल करें।

नहीं। अगर आप बालों में तेल लगाकर तेज़ धूप और प्रदूषण में निकलते हैं, तो तेल बाहर की धूल और गंदगी को चुंबक की तरह खींच लेता है। पसीने और तेल का यह मिश्रण स्कैल्प के रोमछिद्रों को ब्लॉक कर देता है। तेल हमेशा रात को सोने से पहले लगाएं और सुबह धो लें।

हाँ, गर्मियों में होने वाले डैंड्रफ को मालासेज़िया (Malassezia) फंगस ट्रिगर करता है। यह फंगस पसीने और स्कैल्प के सीबम (तेल) पर ज़िंदा रहता है। गर्मी और नमी इसके पनपने के लिए सबसे अच्छी ज़मीन बनाते हैं, जिससे चिपचिपा डैंड्रफ और भयंकर हेयर फॉल होता है।

अगर आप बहुत लंबे समय तक टाइट कैप या हेलमेट पहनते हैं, तो सिर में हवा नहीं लग पाती। इससे भयंकर पसीना आता है और स्कैल्प का तापमान बढ़ जाता है। लगातार रगड़ (Friction) और पसीने के कारण जड़ों में इन्फेक्शन हो सकता है। हेलमेट के नीचे एक साफ़ सूती कपड़ा बांधना फायदेमंद है।

गर्मियों में लोग बहुत स्विमिंग करते हैं। पूल के पानी में भारी मात्रा में क्लोरीन (Chlorine) होता है, जो बालों के प्राकृतिक केराटिन (प्रोटीन) को पूरी तरह सुखा देता है। इससे बाल झाड़ू की तरह कड़क हो जाते हैं और टूटते हैं। पूल में जाने से पहले बालों को सादे पानी से गीला करें या स्विम कैप पहनें।

तेज़ धूप में निकलते समय हमेशा अपने बालों को एक सूती स्कार्फ (Scarf) या छाते से ढक कर रखें। आयुर्वेद के अनुसार, सिर को सीधे तेज़ धूप (आतप) से बचाना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह दिमाग और स्कैल्प के पित्त को तुरंत भड़का देती है।

शत-प्रतिशत। एलोवेरा में प्राकृतिक शीतवीर्य (ठंडक देने वाले) और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। नहाने से 30 मिनट पहले स्कैल्प पर ताज़ा एलोवेरा जेल लगाने से पसीने की जलन शांत होती है, पीएच (pH) बैलेंस होता है और बालों में प्राकृतिक चमक (Shine) आती है।

हाँ। जिस तरह एसी हमारी त्वचा को सुखाता है, उसी तरह वह बालों और स्कैल्प की प्राकृतिक नमी को भी खींच लेता है। अगर आप दिन भर एसी में बैठते हैं और बाहर तेज़ धूप में निकलते हैं, तो यह तापमान का अचानक बदलाव (Thermal Shock) बालों को बहुत कमज़ोर कर देता है।

पसीने की बदबू बैक्टीरिया के कारण आती है। नहाने के पानी में नीम के पत्ते उबालकर इस्तेमाल करने से या पानी में थोड़ा सा गुलाब जल/नींबू का रस मिलाने से स्कैल्प के बैक्टीरिया मर जाते हैं और पसीने की दुर्गंध दूर होती है।

गर्मियों में यह सबसे आम गलती है। बाल जब गीले होते हैं, तो वे अपनी सबसे नाज़ुक स्थिति में होते हैं। उन्हें कसकर बांधने से जड़ों पर खिंचाव पड़ता है (Traction alopecia) और बालों के अंदर की नमी फंगस पैदा कर सकती है। बालों को हमेशा प्राकृतिक हवा में सुखाने के बाद ही बांधें।

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