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Ayurveda में skin problems को blood और digestion से क्यों जोड़ा जाता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम चेहरे पर दाने या मुहाँसे निकलने पर तरह-तरह की क्रीम और लोशन लगाने लगते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि महंगी से महंगी क्रीम लगाने के बाद भी यह समस्या बार-बार क्यों लौट आती है? दरअसल, आयुर्वेद के अनुसार हमारी त्वचा हमारे शरीर के अंदर का आईना है। जब पेट में खाना सही से पचता नहीं है और खून में गंदगी जमा होने लगती है, तो उसका सीधा असर हमारी त्वचा पर दाने, खुजली या रूखेपन के रूप में दिखाई देता है। जब तक आप अपने पेट और खून की सफाई नहीं करते, तब तक ऊपर से लगाई गई कोई भी क्रीम आपको हमेशा के लिए गोरा या बेदाग नहीं बना सकती। त्वचा की कोई भी परेशानी दरअसल शरीर की एक पुकार है कि अंदर से सफाई की ज़रूरत है।

पेट की गड़बड़ी चेहरे पर कैसे नज़र आती है?

हमारे शरीर में खाए गए भोजन से ही रस और खून बनता है। जब आपका पाचन तंत्र कमज़ोर होता है या आप कब्ज़ के शिकार रहते हैं, तो खाया हुआ खाना पेट में ही पड़ा-पड़ा सड़ने लगता है। इस सड़न से शरीर में एक तरह का ज़हर बनता है, जिसे आयुर्वेद में 'आम' (टॉक्सिन्स) कहा जाता है। यह ज़हर धीरे-धीरे हमारे खून में मिल जाता है और जब शरीर इस गंदगी को मल-मूत्र से बाहर नहीं निकाल पाता, तो वह इसे त्वचा के रोमछिद्रों (Pores) से बाहर फेंकने की कोशिश करता है। इसी वजह से हमें पिंपल्स, एक्ने, और एलर्जी जैसी परेशानियाँ झेलनी पड़ती हैं।

क्या महज़ धूल-मिट्टी से ही त्वचा खराब होती है?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार आप दिन भर घर में रहते हैं, चेहरे को रोज़ फेसवॉश से धोते हैं, फिर भी दाने निकल आते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि खराबी बाहर की हवा में नहीं, बल्कि आपके खून में चल रही है। अगर आप लगातार जंक फूड, बहुत ज़्यादा तला-भुना या बासी खाना खा रहे हैं, तो आपका खून अशुद्ध हो जाएगा। खून में बढ़ी हुई यह गर्मी और अशुद्धि ही त्वचा के रंग को काला करती है और तरह-तरह के इन्फेक्शन को बुलावा देती है। इसलिए दाग-धब्बे सिर्फ बाहरी गंदगी का नहीं, बल्कि खराब खून का भी नतीजा हैं।

कमज़ोर हाज़मा आपकी स्किन को किस तरह नुकसान पहुँचाता है?

जब हमारा हाज़मा बिगड़ा हुआ होता है, तो शरीर के अंदर कई ऐसी चीज़ें होती हैं जो त्वचा की चमक छीन लेती हैं:

  • पोषक तत्वों की कमी: खाना सही से न पचने पर त्वचा को ज़रूरी विटामिन्स और मिनरल्स नहीं मिल पाते, जिससे वह बेजान हो जाती है।
  • टॉक्सिन्स का बढ़ना: पेट साफ न होने से खून में गंदगी भर जाती है और स्किन पोर्स ब्लॉक हो जाते हैं।
  • हार्मोनल असंतुलन: खराब पाचन शरीर के हार्मोंस को बिगाड़ देता है, जो पिंपल्स का एक बहुत बड़ा कारण है।
  • कोलेजन का टूटना: पेट की गर्मी बढ़ने से स्किन ढीली पड़ने लगती है और झुर्रियाँ जल्दी आने लगती हैं।

क्या बार-बार दाने निकलना किसी गंभीर बीमारी की घंटी है?

अगर आपकी स्किन पर रोज़ नए दाने, चकत्ते या खुजली हो रही है, तो इसे सिर्फ एक आम एलर्जी मानकर नज़रअंदाज़ न करें। यह शरीर के अंदर पल रही किसी बड़ी दिक्कत का इशारा हो सकता है:

  • लिवर की कमज़ोरी: लिवर हमारे खून को साफ करता है। जब लिवर फैटी या कमज़ोर होता है, तो स्किन पीली और दागदार होने लगती है।
  • हार्मोनल डिसऑर्डर: महिलाओं में यह समस्या चेहरे पर भारी मुँहासों का कारण बनती है।
  • डायबिटीज़ की शुरुआत: खून में शुगर बढ़ने पर फंगल इन्फेक्शन और त्वचा का काला पड़ना शुरू हो जाता है।
  • आंतों में सूजन: आंतें साफ न होने से सोरायसिस या एक्जिमा जैसी भयंकर बीमारियाँ पनपने लगती हैं।

त्रिदोष का सिद्धांत: पित्त के बेकाबू होने से क्यों जलती है त्वचा?

आयुर्वेद के मुताबिक, हमारा शरीर वात, पित्त और कफ से चलता है। त्वचा की रंगत और खून की सफाई पूरी तरह से 'पित्त' (अग्नि तत्व) पर निर्भर करती है। जब आप बहुत ज़्यादा तीखा, मसालेदार या खट्टा खाना खाते हैं, तो शरीर का पित्त भड़क जाता है। बढ़ा हुआ पित्त खून को बहुत ज़्यादा गर्म कर देता है। यही खौलता हुआ खून जब त्वचा की नसों में दौड़ता है, तो चेहरे पर लाल दाने, जलन, झाइयां और खुजली पैदा करता है। आयुर्वेद कहता है कि जब तक आप पेट की आग और खून की गर्मी को शांत नहीं करेंगे, त्वचा को ठंडक और निखार कभी नहीं मिल सकता।

खून साफ करके रूप निखारने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसी कई बेहतरीन जड़ी-बूटियाँ दी हैं जो लिवर को ताकत देकर खून की एक-एक बूंद को साफ कर देती हैं:

  • मंजिष्ठा: यह जड़ी-बूटी खून को अंदर से साफ करने और त्वचा का रंग गोरा करने में सबसे दमदार मानी जाती है।
  • नीम: यह खून की गर्मी और फंगल इन्फेक्शन को खत्म करने का सबसे पुराना और असरदार तरीका है।
  • गिलोय: यह पेट के टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है और स्किन की इम्युनिटी बढ़ाकर दानों को रोकती है।
  • खदिर (कत्था): यह पुरानी से पुरानी खुजली और त्वचा रोगों को जड़ से उखाड़ फेंकने में बहुत कारगर है।

क्या बिना भूख के खाने से भी चेहरे की रौनक छिन जाती है?

बिलकुल! आप बिना भूख के या बार-बार जितना ज़्यादा खाते हैं, आपका पाचन तंत्र उतना ही ज़्यादा थकता है। जब पहले का खाया हुआ पचा नहीं होता और आप ऊपर से और खा लेते हैं, तो वह नया खाना सीधे तौर पर ज़हर (टॉक्सिन्स) बन जाता है। इस ज़हर की वजह से शरीर का खून गाढ़ा और अशुद्ध हो जाता है। जब खून साफ होकर चेहरे की नसों तक नहीं पहुँच पाता, तो त्वचा की चमक बिल्कुल गायब हो जाती है। आँखों के नीचे काले घेरे और बेजान चेहरा इसी खराब दिनचर्या की देन हैं। इसलिए कहते हैं कि खूबसूरत दिखने का रास्ता आपके पेट से ही होकर जाता है।

शरीर की किन दूसरी कमज़ोरियों के कारण चमक फीकी पड़ जाती है?

कई बार आप अपनी डाइट का पूरा ख्याल रखते हैं, फिर भी कुछ दूसरी अंदरूनी दिक्कतों की वजह से खून खराब हो सकता है:

  • लगातार रहने वाला कब्ज़: पेट साफ न होना त्वचा की बीमारियों का सबसे बड़ा दुश्मन है, क्योंकि सारी गंदगी शरीर में ही रह जाती है।
  • स्ट्रेस और कम नींद: जो लोग रात को ठीक से नहीं सोते या ज़्यादा टेंशन लेते हैं, उनका खून साफ करने वाला सिस्टम (लिवर) धीमा पड़ जाता है।
  • पानी कम पीना: पानी की कमी से शरीर अपने अंदर का कचरा पसीने या यूरिन के ज़रिए बाहर नहीं निकाल पाता।
  • हार्मोनल बदलाव: उम्र के साथ या पीरियड्स के दौरान होने वाले बदलाव भी चेहरे पर दाग-धब्बे ले आते हैं।

महंगी क्रीम और स्टेरॉयड का रोज़ाना इस्तेमाल कब बन जाता है खतरा?

जब भी चेहरे पर कोई दाना निकलता है, हम तुरंत मेडिकल स्टोर से कोई तेज़ केमिकल वाली क्रीम या स्टेरॉयड मल लेते हैं। ये चीज़ें रातों-रात दाने को दबा तो देती हैं, लेकिन रोज़ाना इनका इस्तेमाल करना बहुत खतरनाक है। हमारी त्वचा को सांस लेने की ज़रूरत होती है। अगर आप रोज़ केमिकल थोपकर पोर्स को बंद कर देंगे, तो गंदगी खून के रास्ते शरीर के अंदर ही फैलने लगेगी। इससे स्किन पतली हो जाएगी, धूप में जाते ही लाल पड़ जाएगी और धीरे-धीरे बिना क्रीम के आपका चेहरा एकदम काला और बेजान दिखने लगेगा।

बिना दवाई के प्राकृतिक रूप से गोरापन और निखार पाने के आसान तरीके

आप बहुत ही आसान और घरेलू तरीके अपनाकर अपनी त्वचा को अंदर से चमका सकते हैं:

  • सुबह उठकर खाली पेट तांबे के बर्तन का रखा पानी पिएं, यह खून को फिल्टर करने का सबसे बेहतरीन तरीका है।
  • रोज़ाना मुट्ठी भर नीम या तुलसी की पत्तियां चबा लें, यह खून की गर्मी और फंगल इन्फेक्शन को जड़ से खत्म कर देता है।
  • खाना खाने के तुरंत बाद नहाने या भारी कसरत करने से बचें, इससे पाचन धीमा होता है और खून अशुद्ध होने लगता है।
  • चेहरे पर केमिकल वाले साबुन की जगह बेसन और हल्दी का लेप लगाएं, यह रोमछिद्रों से सारी गंदगी खींच निकालता है।

पेट और त्वचा को हमेशा स्वस्थ बनाए रखने वाली रोज़मर्रा की आदतें

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके आप अपनी स्किन में बहुत बड़ा बदलाव देख सकते हैं:

  • सही समय पर सोएं : रात 10 बजे से 2 बजे के बीच हमारा लिवर खून को साफ करता है, इसलिए इस समय गहरी नींद लेना बहुत ज़रूरी है।
  • पसीने को बाहर निकालें: रोज़ाना इतनी कसरत या योग ज़रूर करें कि पसीना आए, पसीना त्वचा की सबसे अच्छी कुदरती सफाई है।
  • हल्का डिनर करें: रात का खाना हमेशा हल्का और जल्दी खाएं ताकि पेट को उसे पचाने का पूरा समय मिल सके।
  • ताज़े फल और सब्ज़ियां खाएं: अपनी डाइट में खीरा, गाजर और लौकी जैसी चीज़ें शामिल करें जो पेट को ठंडा रखती हैं।

आयुर्वेद दाने और दाग-धब्बों को जड़ से कैसे मिटाता है?

आयुर्वेद सिर्फ दाने पर लेप लगाकर बीमारी को नहीं छिपाता, बल्कि उसके पैदा होने की जड़ को ठीक करता है। आयुर्वेद यह मानता है कि आपकी खराब त्वचा आपके गलत खानपान का ही नतीजा है। इसमें सबसे पहले वैद्य आपकी नाड़ी देखकर आपके दोष को पकड़ते हैं। फिर खून की गहरी सफाई या विरेचन जैसी पंचकर्म थेरेपी दी जाती है। इसके साथ ही, आपका खाना-पीना ऐसा सेट किया जाता है जो लिवर को ताक़त दे। इससे शरीर खुद को अंदर से साफ करना सीख जाता है।

डॉक्टर के पास कब  जाना चाहिए?

घरेलू नुस्खे अपनाने के बाद भी अगर समस्या टस से मस न हो, तो आपको डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए:

  • जब चेहरे या शरीर के दाने पकने लगें, उनमें से खून या पीब निकलने लगे और तेज़ दर्द हो।
  • खुजली इतनी भयंकर हो जाए कि रात को नींद ही न आए और त्वचा छिल जाए।
  • स्किन पर अचानक से सफेद या लाल रंग के बड़े-बड़े चकत्ते पड़ने लगें जो सुन्न महसूस हों।
  • चेहरे या शरीर के किसी हिस्से की त्वचा एकदम से मोटी, काली और खुरदरी होने लगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक इलाज में क्या फर्क है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य मुहाँसों, दाग-धब्बों और सूजन को नियंत्रित करने पर ध्यान। शरीर के संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान।
उपचार का तरीका एंटीबायोटिक्स, रेटिनॉइड्स, लेज़र, दवाइयाँ और अन्य आधुनिक उपचार। जड़ी-बूटियाँ, नाड़ी परीक्षा, पंचकर्म, आहार-विहार और प्राकृतिक उपचार।
त्वचा और पाचन का संबंध आवश्यकतानुसार त्वचा और अन्य चिकित्सीय कारणों का अलग-अलग मूल्यांकन। पाचन, आहार और शरीर के संतुलन को त्वचा के स्वास्थ्य से जुड़ा माना जाता है।
असर होने का समय कई उपचार अपेक्षाकृत जल्दी सुधार दिखा सकते हैं। प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई देता है और समग्र स्वास्थ्य पर केंद्रित रहता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण रोग नियंत्रण, दोबारा होने के जोखिम को कम करने और नियमित स्किन केयर पर जोर। संतुलित आहार, जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य बनाए रखने पर विशेष जोर।

निष्कर्ष: 

हमेशा याद रखें कि आपकी त्वचा आपके शरीर के अंदर का 'डिस्प्ले बोर्ड' है। आप जो भी खाते हैं या जैसा भी आपका हाज़मा रहता है, वह सीधा आपके चेहरे पर झलकने लगता है। इसलिए महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और बाहर से चमकने को ही असली इलाज मानने की गलती न करें। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अपने शरीर की अंदरूनी सफाई के लिए थोड़ा सा समय निकालें। अपने खानपान को सुधारें, खूब सारा पानी पिएं और कब्ज़ को खुद पर हावी न होने दें। जब आपका पेट साफ और खून एकदम शुद्ध रहेगा, तो यकीनन आपकी त्वचा भी शीशे की तरह चमकेगी और हमेशा बेदाग रहेगी।

References:

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC10982215/

https://www.niddk.nih.gov/health-information/digestive-diseases/digestive-system-how-it-works

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK544242/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

मेकअप सीधे तौर पर खून खराब नहीं करता, लेकिन यह त्वचा के रोमछिद्रों को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है। इससे शरीर के अंदर की गंदगी पसीने के ज़रिए बाहर नहीं आ पाती और वापस खून में मिलकर मुहाँसों का रूप ले लेती है।

बिल्कुल! आयुर्वेद के अनुसार डैंड्रफ सिर्फ स्कैल्प की खुश्की नहीं है, बल्कि यह खून में बड़े हुए कफ और वात दोष का परिणाम है जो खराब पाचन की वजह से सिर की त्वचा पर पपड़ी के रूप में जमता है।

मांसाहार पचने में बहुत भारी होता है। अगर आपका पाचन पहले से कमज़ोर है और आप रोज़ाना हेवी मीट खाते हैं, तो यह पेट में सड़कर खून को तेज़ी से अशुद्ध करता है जिससे त्वचा की प्राकृतिक चमक फीकी पड़ने लगती है।

उपवास के दौरान शरीर को खाना पचाने से आराम मिल जाता है। इस खाली समय में शरीर की ऊर्जा खून में मौजूद पुरानी गंदगी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में लग जाती है, जिससे त्वचा अंदर से साफ होने लगती है।

ऋतु परिवर्तन के दौरान शरीर के अंदर दोष (खासकर कफ और पित्त) पिघलते और बदलते हैं। अगर हाज़मा सही न हो तो यह बदलता हुआ मौसम खून में एकदम से गर्मी पैदा कर देता है, जिससे एलर्जी या दाने निकल आते हैं।

दूध और मछली का कॉम्बिनेशन एक बड़ा कारण है क्योंकि यह खून को बहुत बुरी तरह बिगाड़ता है। लेकिन इसके अलावा बहुत ज़्यादा स्ट्रेस, जेनेटिक्स और ऑटो-इम्यून बीमारियाँ भी सफेद दाग का कारण बन सकती हैं।

ऐसा बिल्कुल नहीं है। पसीना आना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिससे शरीर अपनी गंदगी बाहर निकालता है। हालांकि, अगर पसीने से बहुत तेज़ दुर्गंध आती है, तो यह इस बात का संकेत है कि खून और पेट में टॉक्सिन्स की मात्रा ज़्यादा है।

 काले घेरों का सीधा कनेक्शन आपके लिवर और किडनी की थकान से होता है। जब पेट ठीक से साफ नहीं होता और खून में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, तो आँखों के नीचे की नाज़ुक त्वचा सबसे पहले काली पड़ने लगती है।

जी नहीं, जन्म के निशान (Birthmarks) या तिल जेनेटिक होते हैं और स्किन के पिगमेंटेशन का हिस्सा होते हैं। इनका आपके वर्तमान पाचन तंत्र या खून की गंदगी से कोई संबंध नहीं होता है।

हाँ, इस तरह की हार्मोनल गोलियाँ शरीर के प्राकृतिक हार्मोंस को बदलती हैं जिससे लिवर पर दबाव पड़ता है। लिवर पर दबाव पड़ने से शरीर का पित्त (गर्मी) बढ़ जाता है, जो चेहरे पर गहरी झाइयां (Pigmentation) पैदा कर सकता है।

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