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रोज़ एंटासिड लेने के बाद भी एसिडिटी ख़त्म नहीं होती? पित्त असंतुलन का गहरा कारण और आयुर्वेद से जड़ से समाधान

Information By Dr. Keshav Chauhan

जीवा आयुर्वेद  में अक्सर ऐसे मरीज़ मिलते हैं जो लंबे समय से एसिडिटी या सीने में जलन की समस्या से जूझ रहे होते हैं और नियमित रूप से एंटासिड या अन्य दवाओं का उपयोग कर रहे होते हैं। शुरुआत में ये दवाएँ कुछ समय के लिए राहत दे सकती हैं, लेकिन कई लोगों को यह अनुभव होता है कि जैसे ही दवा का असर कम होता है, समस्या फिर से वापस आ जाती है।

ऐसी स्थिति में कई लोग वर्षों तक दवाओं पर निर्भर रह जाते हैं। कुछ मरीज़ों को दिन में कई बार एंटासिड लेने की आवश्यकता महसूस होती है, फिर भी सीने में जलन, खट्टी डकार या गले में जलन जैसी समस्याएँ बनी रहती हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि बार-बार होने वाली एसिडिटी केवल अम्लता की समस्या नहीं होती। कई मामलों में यह पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली, आहार, जीवनशैली और शरीर के अंदर मौजूद असंतुलन से जुड़ी हो सकती है। जब तक इन कारणों को समझकर संतुलित नहीं किया जाता, तब तक दवाओं से मिलने वाली राहत अक्सर अस्थायी ही रहती है।
जीवा आयुर्वेद  में मरीज़ की प्रकृति, पाचन की स्थिति, आहार और जीवनशैली को समझकर व्यक्तिगत आयुर्वेदिक मार्गदर्शन दिया जाता है, ताकि समस्या के मूल कारणों को संतुलित करने की दिशा में काम किया जा सके।

एसिडिटी क्या है?

बहुत लोग सोचते हैं कि सीने में जलन ही एसिडिटी है, लेकिन इसके कई अन्य संकेत भी हो सकते हैं:

  • सीने या गले में जलन
  • खट्टी डकार आना
  • भोजन के बाद भारीपन
  • मुँह में कड़वा या खट्टा स्वाद
  • पेट में जलन या असहजता

यदि ये लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो यह पाचन तंत्र के असंतुलन का संकेत हो सकता है।

एसिडिटी के प्रकार

एसिडिटी हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। इसके कुछ प्रमुख प्रकार इस प्रकार समझे जा सकते हैं:

1. Acute Acidity (अस्थायी एसिडिटी)

  • यह हल्की और अस्थायी होती है, जो कुछ दिनों तक रह सकती है।
  • यह अक्सर मसालेदार भोजन, देर रात खाना या अनियमित दिनचर्या के कारण हो सकती है।

2. Chronic Acidity (दीर्घकालिक एसिडिटी)

  • जब एसिडिटी लंबे समय तक बनी रहती है और बार-बार वापस आती है, तो इसे क्रॉनिक एसिडिटी कहा जाता है।
  • इसमें मरीज़ अक्सर दवाओं पर निर्भर हो सकता है।

3. Functional Acidity  (फंक्शनल एसिडिटी)

  • कुछ मामलों में जाँच सामान्य (Normal) होती है, फिर भी मरीज़ को जलन महसूस होती रहती है।
  • यह स्थिति पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता से जुड़ी हो सकती है।

एसिडिटी के सामान्य लक्षण

  • सीने में जलन
  • खट्टी डकार
  • पेट में जलन
  • भोजन के बाद भारीपन
  • मुँह का स्वाद खराब होना
  • गले में जलन

एसिडिटी के सामान्य कारण

  • अधिक मसालेदार और तला-भुना भोजन
  • देर रात खाना
  • अनियमित भोजन का समय
  • तनाव और चिंता
  • अधिक चाय या कॉफी
  • लंबे समय तक खाली पेट रहना

लंबे समय तक एसिडिटी रहने के संभावित प्रभाव

  • पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली प्रभावित होना
  • गले या अन्ननली में जलन
  • भोजन के प्रति असहजता
  • दवाओं पर निर्भरता

एसिडिटी की जाँच कैसे की जाती है?

यदि एसिडिटी की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर कुछ जाँचों की सलाह दे सकते हैं:

  • लक्षणों का मूल्यांकन
  • एंडोस्कोपी (यदि आवश्यक हो)
  • pH मॉनिटरिंग
  • अन्य जाँच (स्थिति के अनुसार)

आयुर्वेद के अनुसार एसिडिटी क्यों होती है?

आयुर्वेद के अनुसार एसिडिटी केवल पेट की समस्या नहीं है, बल्कि यह दोष संतुलन और पाचन शक्ति से जुड़ी होती है।

पित्त दोष का असंतुलन
पित्त शरीर की गर्मी और पाचन से जुड़ा होता है। इसके बढ़ने से शरीर में अम्लता बढ़ सकती है, जिससे सीने में जलन और खट्टी डकार जैसी समस्याएँ होती हैं।

वात दोष का प्रभाव
वात दोष के असंतुलन से पाचन तंत्र की गति प्रभावित हो सकती है, जिससे एसिडिटी के लक्षण बढ़ सकते हैं।

कमज़ोर अग्नि (पाचन शक्ति)
जब पाचन शक्ति असंतुलित हो जाती है, तो भोजन का सही पाचन नहीं हो पाता, जिससे अम्लता और जलन की समस्या बढ़ सकती है।

जीवा आयुर्वेद  में उपचार का दृष्टिकोण

जीवा आयुर्वेद  में एसिडिटी के उपचार का उद्देश्य केवल अस्थायी राहत देना नहीं बल्कि पाचन तंत्र और दोषों के संतुलन को बेहतर बनाना होता है।

पाचन शक्ति (अग्नि) को संतुलित करना
पाचन को सुधारकर अम्लता को नियंत्रित करने पर ध्यान दिया जाता है।

“आम” (टॉक्सिन्स) को कम करना
अपच से बनने वाले विषैले तत्वों को कम करने का प्रयास किया जाता है।

पित्त दोष को संतुलित करना
पित्त के असंतुलन को संतुलित कर शरीर की गर्मी को नियंत्रित किया जाता है।

जीवनशैली और तनाव प्रबंधन
नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार और तनाव प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

एसिडिटी के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

  • आँवला
  • मुलैठी
  • सौंफ
  • जीरा

एसिडिटी के लिए आयुर्वेदिक थेरेपी

  • पंचकर्म
  • अभ्यंग
  • स्वेदन

एसिडिटी के लिए सहायक आहार

  • हल्का और सुपाच्य भोजन
  • ठंडे प्रकृति के खाद्य पदार्थ
  • गुनगुना पानी
  • मसालेदार भोजन से परहेज़

जीवा आयुर्वेद  में मरीज़ों का मूल्यांकन कैसे किया जाता है?

जीवा आयुर्वेद  में सीने में जलन या एसिडिटी जैसी समस्या के उपचार से पहले मरीज़ की स्थिति को विस्तार से समझने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य समस्या के पीछे मौजूद संभावित कारणों को पहचानना और उसी के अनुसार एक व्यक्तिगत आयुर्वेदिक उपचार योजना तैयार करना होता है। इसके लिए आमतौर पर निम्न पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है:

  • लक्षणों और पाचन से जुड़ी समस्याओं का मूल्यांकन
    डॉक्टर यह समझने की कोशिश करते हैं कि सीने में जलन कब और किन परिस्थितियों में बढ़ती है, जैसे भोजन के बाद, खाली पेट या लेटने पर। साथ ही खट्टी डकार, गले में जलन, पेट भारी लगना या गैस जैसी समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली जाती है।
  • आहार और जीवनशैली का अध्ययन
    दैनिक खानपान, मसालेदार या तला-भुना भोजन का सेवन, भोजन का समय, देर रात खाना और पानी पीने की आदतों को समझा जाता है। इसके साथ ही शारीरिक गतिविधि, दिनचर्या और काम के पैटर्न का भी आकलन किया जाता है।
  • पाचन की स्थिति (अग्नि) का आकलन
    आयुर्वेद के अनुसार पाचन शक्ति शरीर के संतुलन का आधार होती है। इसलिए यह समझा जाता है कि पाचन तंत्र किस प्रकार कार्य कर रहा है और क्या उसमें कोई असंतुलन मौजूद है, जो एसिडिटी या जलन की समस्या को बढ़ा सकता है।
  • तनाव, नींद और मानसिक स्थिति का मूल्यांकन
    लंबे समय तक तनाव, चिंता और अनियमित नींद पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए मरीज़ की मानसिक स्थिति, नींद की गुणवत्ता और दैनिक तनाव के स्तर को भी समझना उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
  • चिकित्सा इतिहास और पिछले उपचारों की जानकारी
    मरीज़ ने पहले कौन-सी दवाएँ ली हैं, कितने समय से समस्या बनी हुई है और क्या बार-बार एंटासिड या अन्य दवाओं का उपयोग किया जा रहा है इन सभी पहलुओं की जानकारी ली जाती है।

हमारी चरण-दर-चरण देखभाल प्रक्रिया

जीवा आयुर्वेद में, इलाज की हर प्रक्रिया को एक बहुत ही व्यवस्थित और सुचारू तरीके से किया जाता है ताकि आपको आयुर्वेदिक इलाज का पूरी तरह से व्यक्तिगत और प्रभावी अनुभव मिल सके।

  • जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें: अपनी जानकारी देने के बाद, आप बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सीधे 0129 4264323 पर भी हमसे जुड़ सकते हैं।
  • क्लिनिक: जीवा आयुर्वेद के कई शहरों में 88 से ज़्यादा क्लिनिक हैं, जिससे आप हमारे सबसे पास वाले क्लिनिक में जाकर आमने-सामने बातचीत कर सकते हैं और इलाज पा सकते हैं।
  • वीडियो के ज़रिए बातचीत, केवल 49 रुपये में: अगर आपके शहर में जीवा आयुर्वेद का क्लिनिक नहीं है, तो भी आप डॉक्टर के साथ ऑनलाइन बातचीत कर सकते हैं। यह सुविधा भारी छूट के साथ सिर्फ 49 रुपये में उपलब्ध है, जबकि इसकी सामान्य कीमत 299 रुपये है। बस हमें 0129 4264323 पर कॉल करें और अपने घर बैठे आराम से हमारे अनुभवी और कुशल आयुर्वेदिक डॉक्टरों से जुड़ें।
  • गहराई से बीमारी की पहचान: हमारे अनुभवी और कुशल डॉक्टर आपसे बात करते हैं और परेशानी की मुख्य वज़ह का पता लगाने के लिए आपकी समस्या और उसके लक्षणों को समझने की पूरी कोशिश करते हैं।

आयुर्वेदिक उपचार में सुधार का संभावित समय

सीने में जलन या लंबे समय से बनी हुई एसिडिटी की समस्या में सुधार व्यक्ति की पाचन शक्ति, जीवनशैली, आहार और समस्या की अवधि पर निर्भर कर सकता है। आयुर्वेदिक देखभाल में सुधार आमतौर पर धीरे-धीरे दिखाई देता है, क्योंकि इसका उद्देश्य पाचन तंत्र के संतुलन को बेहतर बनाना होता है।

पहले 1–2 महीने
इस चरण में पाचन शक्ति (अग्नि) को संतुलित करने और अम्लता को नियंत्रित करने पर ध्यान दिया जाता है। मरीज़ को सीने में जलन, खट्टी डकार और पाचन से जुड़ी असहजता में हल्का सुधार महसूस हो सकता है।

2–3 महीने
नियमित उपचार और आहार सुधार के साथ एसिडिटी में कमी के संकेत दिखाई देने लग सकते हैं। गले में जलन और पेट के भारीपन में धीरे-धीरे राहत महसूस हो सकती है।

3–6 महीने
इस अवधि में पाचन तंत्र का संतुलन बेहतर होने लगता है। सीने में जलन की समस्या कम बार महसूस हो सकती है और समग्र स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे सकते हैं।

उपचार से किस प्रकार के परिणाम की उम्मीद की जा सकती है?

सीने में जलन या एसिडिटी जैसी समस्या में आयुर्वेदिक देखभाल का उद्देश्य केवल अस्थायी राहत देना नहीं बल्कि पाचन तंत्र के संतुलन को बेहतर बनाना होता है। सही परामर्श, संतुलित आहार और जीवनशैली में सुधार के साथ कई मरीज़ समय के साथ कुछ सकारात्मक बदलाव महसूस कर सकते हैं।

नियमित रूप से उपचार का पालन करने वाले कुछ मरीज़ों को निम्न प्रकार के लाभ महसूस हो सकते हैं:

  • जलन में कमी — सीने और गले में होने वाली जलन धीरे-धीरे कम महसूस हो सकती है।
  • पाचन बेहतर होना — भोजन का पाचन अधिक सहज हो सकता है और पेट की असहजता कम हो सकती है।
  • गैस और भारीपन में राहत — पेट फूलना और गैस बनने की समस्या में कमी आ सकती है।
  • दैनिक आराम में सुधार — दिनभर हल्कापन और आराम महसूस हो सकता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।

मरीज़ों के अनुभव

मेरा नाम मनोरमा है, मैं कानपुर से हूं और एक सोशल वर्कर हूं. समाज सेवा के काम की वजह से मेरे खाने-पीने का समय फिक्स नहीं रहता था, जिससे मुझे एसिडिटी और गैस की गंभीर समस्या हो गई थी और मानसिक तनाव (stress) भी बहुत रहता था।

मैंने जीवा आयुर्वेद (जीवा आयुर्वेद ) में अपना इलाज शुरू किया, जहाँ मुझे शिरोधारा और पंचकर्मा ट्रीटमेंट दिया गया। इससे मुझे बहुत आराम मिला है। यहाँ का शांत वातावरण, हरियाली और ऑक्सीजन लेवल इतना अच्छा हैं कि मानसिक तनाव अपने आप दूर हो जाता है। यहाँ न केवल इलाज होता है, बल्कि हमें पौष्टिक आहार, योग और जीवन जीने की नई कला भी सिखाई जाती है। मुझे यहाँ आकर बहुत सुकून मिला और अब मैं काफी बेहतर महसूस कर रही हूँ। मैं अपने सभी दोस्तों और रिश्तेदारों को यही सलाह दूंगी कि अगर उन्हें कोई भी समस्या है, तो एक बार यहाँ जरूर आएं।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद  वर्षों से ऐसे हज़ारों मरीज़ों की सहायता कर रहा है जो पाचन, एसिडिटी और अन्य दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए प्राकृतिक और व्यक्तिगत आयुर्वेदिक समाधान तलाशते हैं। यहाँ उपचार का उद्देश्य केवल लक्षणों को कम करना नहीं बल्कि शरीर के अंदर मौजूद असंतुलन को समझकर समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में काम करना होता है।

कुछ प्रमुख कारण जिनकी वज़ह से लोग जीवा आयुर्वेद  पर भरोसा करते हैं:

मूल कारण पर आधारित उपचार
जीवा आयुर्वेद  में उपचार केवल लक्षणों को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि समस्या के मूल कारण को समझकर उस पर काम किया जाता है। यह दृष्टिकोण पाचन तंत्र और शरीर के संतुलन को बेहतर बनाने पर केंद्रित होता है।

व्यक्तिगत “Ayunique” उपचार दृष्टिकोण
हर व्यक्ति की प्रकृति (Prakriti), जीवनशैली और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। जीवा आयुर्वेद  में इसी आधार पर व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाती है, जिससे प्रत्येक मरीज़ को उसकी आवश्यकता के अनुसार मार्गदर्शन मिल सके।

अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सकों की टीम
जीवा आयुर्वेद  के पास सैकड़ों प्रशिक्षित और अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों की टीम है, जो मरीज़ की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद उपचार की सलाह देते हैं।

समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण
यहाँ उपचार केवल औषधियों तक सीमित नहीं होता, बल्कि आहार, जीवनशैली, योग, प्राणायाम और मानसिक संतुलन को भी शामिल किया जाता है, ताकि शरीर और मन दोनों का संतुलन बेहतर हो सके।

पूरे भारत में मरीजों का भरोसा

कई वर्षों से देशभर के लोग जीवा आयुर्वेद  की उपचार योजनाओं और मार्गदर्शन पर भरोसा करते आ रहे हैं। नियमित रूप से दवाओं और सुझाए गए जीवनशैली बदलावों का पालन करने वाले कई मरीजों ने अपने स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव किए हैं।

  • लगभग 95% मरीजों ने 3 महीनों के भीतर अपने स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार महसूस किया
  • करीब 88% मरीजों ने समय के साथ अन्य दवाओं की आवश्यकता कम होते हुए देखी
  • प्रतिदिन हजारों लोग परामर्श के लिए जीवा आयुर्वेद  से जुड़ते हैं

जड़ से इलाज की योजना: बीमारी की पहचान के अनुसार, इलाज की एक योजना तैयार की जाती है, और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों वाली दवाओं का उपयोग करके आपके लिए पूरी तरह से एक विशेष इलाज दिया जाता है।

सुधार पर नज़र रखना: नियमित रूप से संपर्क में रहने से आपके स्वास्थ्य में हो रहे सुधार को देखने में मदद मिलती है और ज़रूरत पड़ने पर इलाज में बदलाव भी किया जा सकता है।

उपचार का अनुमानित ख़र्च

जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं की लागत में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं।

उपचार का ख़र्च: जो मरीज़ नियमित और मानक देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक ख़र्च आम तौर पर 3000 रुपये से 3500 रुपये के बीच होता है।

प्रोटोकॉल: अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रदान करते हैं। इसमें दवा, परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य सत्र, योग और आहार शामिल हैं। 3 से 4 महीने की पूरी उपचार अवधि के लिए इसका एकमुश्त ख़र्च 15000 रुपये से 40000 रुपये तक होता है।

जीवाग्राम: गहन देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, जीवाग्राम में 7 दिनों के एक गहन स्वास्थ्य प्रवास का ख़र्च लगभग 1 लाख रुपये है, जिसमें प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा और सात्विक भोजन शामिल है।

आधुनिक उपचार बनाम आयुर्वेदिक उपचार: कब्ज़ के लिए तुलना

पहलू

आधुनिक उपचार

आयुर्वेदिक उपचार

उद्देश्य

मुख्य रूप से लक्षणों जैसे एसिडिटी या जलन को नियंत्रित करना

पाचन तंत्र, दोष संतुलन और शरीर के समग्र संतुलन को बेहतर बनाना

उपचार के तरीके

एंटासिड, एसिड कम करने वाली दवाएँ (PPIs), अन्य औषधियाँ

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ, आहार सुधार, जीवनशैली में बदलाव

दृष्टिकोण

त्वरित राहत पर अधिक ध्यान

मूल कारणों को समझकर दीर्घकालिक संतुलन पर ध्यान

पाचन तंत्र पर प्रभाव

कुछ मामलों में अस्थायी राहत मिलती है, लेकिन दवाओं पर निर्भरता बन सकती है

पाचन शक्ति (अग्नि) को संतुलित करने और प्राकृतिक कार्यप्रणाली को सुधारने का प्रयास

दोष संतुलन

दोष संतुलन की अवधारणा शामिल नहीं होती

वात, पित्त और कफ दोष के संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जाता है

जीवनशैली की भूमिका

सीमित महत्व

आहार, दिनचर्या, योग और तनाव प्रबंधन को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है

समग्र स्वास्थ्य पर प्रभाव

मुख्य रूप से लक्षणों पर केंद्रित

पाचन, मानसिक स्थिति और शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान

किन स्थितियों में डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है?

  • बहुत तेज़ सीने में जलन
  • निगलने में कठिनाई
  • अचानक वज़न घटना
  • बार-बार उल्टी

निष्कर्ष

अगर रोज एंटासिड लेने के बाद भी एसिडिटी खत्म नहीं हो रही है, तो यह संकेत है कि समस्या गहरी है। केवल एसिड कम करना काफी नहीं है। पित्त असंतुलन, गलत दिनचर्या, तनाव और खान-पान — इन सब पर साथ-साथ काम करना ज़रूरी है। धैर्य रखें। धीरे-धीरे बदलाव करें। शरीर को संतुलन में आने का समय दें। जब जड़ कारण पर काम होता है, तभी असली और स्थायी राहत मिलती है।

FAQs

रोज़ एसिडिटी आमतौर पर गलत खान-पान, तनाव, अनियमित दिनचर्या और पित्त असंतुलन के कारण होती है।

लंबे समय तक रोज एंटासिड लेना बिना डॉक्टर की सलाह के सही नहीं माना जाता।

एसिडिटी पेट में जलन है, जबकि गैस्ट्रिक रिफ्लक्स में एसिड गले तक वापस आ जाता है।

 खाली पेट एसिड बनता रहता है और भोजन न होने पर जलन बढ़ सकती है।

 हाँ, ज़्यादा तनाव पाचन को बिगाड़कर एसिडिटी बढ़ा सकता है।

 लेटने पर पेट का एसिड ऊपर आ सकता है जिससे रात में जलन बढ़ जाती है।

 कुछ लोगों को ठंडा दूध राहत देता है, लेकिन हर किसी के लिए यह समान असर नहीं करता।

 बार-बार जलन, खट्टी डकार, मुँह में कड़वाहट और ज़्यादा गर्मी महसूस होना पित्त बढ़ने के संकेत हो सकते हैं।

 हाँ, संतुलित और समय पर भोजन लेने से एसिडिटी काफी हद तक कंट्रोल हो सकती है।

अगर वज़न  कम हो रहा हो, भोजन निगलने में दिक्कत हो या जलन लगातार बनी रहे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

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