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Eczema और IBS साथ क्यों होते हैं? — आंत-त्वचा संबंध (Gut-Skin Axis)

Information By Dr. Keshav Chauhan

आपकी त्वचा पर लाल, सूखी और भयंकर खुजली वाली परतें (Eczema) उभर आई हैं। आप डर्मेटोलॉजिस्ट के पास जाते हैं और वह आपको स्टेरॉयड क्रीम दे देते हैं। दूसरी तरफ, आपका पेट लगातार खराब रहता है, कभी भयंकर कब्ज़ तो कभी दस्त (IBS - Irritable Bowel Syndrome), और पेट में हमेशा मरोड़ रहती है। इसके लिए आप गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के पास जाते हैं जो आपको हाज़मे की और नसों को शांत करने वाली गोलियाँ दे देते हैं। आप दो अलग-अलग बीमारियों का दो अलग-अलग डॉक्टरों से इलाज करवा रहे हैं।

लेकिन क्या हो अगर आपको पता चले कि आपकी त्वचा की बीमारी और आपके पेट की बीमारी दो अलग-अलग समस्याएं हैं ही नहीं?

आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद, दोनों इस बात की पुष्टि करते हैं कि आपकी त्वचा आपके पेट का आईना है। त्वचा पर उभरने वाला कोई भी रोग केवल 'स्किन' की बीमारी नहीं होता, वह आपकी आंतों (Gut) में चल रही तबाही का एक अलार्म होता है। 'गट-स्किन एक्सिस' (Gut-Skin Axis) वह सीधा रास्ता है जो आपके पेट के बैक्टीरिया को आपकी त्वचा की इम्युनिटी से जोड़ता है।

आंत और त्वचा का कनेक्शन क्या है?

हमारी आंतों (Intestines) में खरबों बैक्टीरिया रहते हैं जिन्हें 'गट माइक्रोबायोम' (Gut Microbiome) कहा जाता है। ये बैक्टीरिया न केवल खाना पचाते हैं, बल्कि हमारी 70% इम्युनिटी को भी कंट्रोल करते हैं।

  • डिस्बायोसिस: जब जंक फूड, भारी स्ट्रेस या बहुत ज़्यादा एंटीबायोटिक्स खाने से आंतों के 'अच्छे बैक्टीरिया' मर जाते हैं और 'बुरे बैक्टीरिया' बढ़ जाते हैं, तो इसे डिस्बायोसिस कहते हैं। यही असंतुलन IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) का मूल कारण है, जिसमें आंतों की सिकुड़ने की गति बिगड़ जाती है।
  • लीकी गट: बुरे बैक्टीरिया आंतों की अंदरूनी दीवार (Intestinal lining) को डैमेज कर देते हैं, जिससे आंतों में छोटे-छोटे छेद हो जाते हैं।
  • सिस्टमिक इन्फ्लेमेशन: इन छेदों से बिना पचा हुआ खाना, बैक्टीरिया और टॉक्सिन्स सीधे आपके खून में लीक हो जाते हैं। जब इम्यून सिस्टम इस 'कचरे' को खून में देखता है, तो वह भयंकर सूजन (Inflammation) पैदा करता है। खून के ज़रिए यह सूजन त्वचा तक पहुँचती है और Eczema (एक्जिमा), एक्ने या सोरायसिस के रूप में फूट पड़ती है।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे 'गट-स्किन एक्सिस' और 'लीकी गट' कहता है, आयुर्वेद ने उसे हज़ारों साल पहले 'अग्निमांद्य' और 'रक्त दुष्टि' के सिद्धांत से समझाया था।

  • अग्निमांद्य (कमज़ोर पाचन): आयुर्वेद के अनुसार, सभी रोगों की जड़ जठराग्नि (पाचन की आग) का कमज़ोर होना है। जब अग्नि कमज़ोर होती है, तो IBS (जिसे आयुर्वेद में 'ग्रहणी' कहा जाता है) जन्म लेता है।
  • आम का निर्माण: कमज़ोर अग्नि के कारण खाना पचने के बजाय आंतों में सड़ता है और 'आम' (ज़हरीला कचरा) बनाता है। यह वही कचरा है जिसे मॉडर्न साइंस लीकी गट से लीक होने वाले टॉक्सिन्स कहता है।
  • रक्त और त्वचा की दुष्टि: यह 'आम' जब पित्त दोष के साथ मिलकर खून (रक्त धातु) में प्रवेश करता है, तो खून अशुद्ध हो जाता है। शरीर इस अशुद्ध खून को त्वचा के रास्ते बाहर फेंकने की कोशिश करता है, जो Eczema (आयुर्वेद में 'विचर्चिका') के रूप में दिखाई देता है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

हम एक्जिमा के लिए स्टेरॉयड क्रीम और IBS के लिए केवल पेट दर्द की गोलियाँ देकर आपकी समस्या को नहीं दबाते। हम 'रूट कॉज़' (Root Cause) यानी आंतों की मरम्मत करते हैं।

  • अग्नि दीपन और आम पाचन: सबसे पहले जड़ी-बूटियों से पेट की अग्नि को सुधारा जाता है ताकि नया 'आम' बनना बंद हो और आंतों की दीवार (Gut lining) रिपेयर हो सके। इससे IBS के लक्षणों (गैस, मरोड़, दस्त/कब्ज़) में तुरंत कमी आती है।
  • रक्त शोधन: खून में मिल चुके टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और बढ़े हुए 'पित्त' को शांत करने के लिए रक्त-शोधक औषधियाँ दी जाती हैं, जिससे त्वचा की खुजली और लालिमा शांत होती है।
  • तनाव प्रबंधन: IBS और Eczema दोनों ही स्ट्रेस से बहुत तेज़ी से भड़कते हैं। इसलिए नर्वस सिस्टम को शांत करने की चिकित्सा भी साथ में दी जाती है।

Eczema और IBS को ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक डाइट टेबल

चूँकि दोनों बीमारियाँ आंतों से जुड़ी हैं, इसलिए आपका आहार ही आपकी सबसे बड़ी दवा है।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (हीलिंग फूड्स) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स)
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, परवल, पेठा (Ash gourd), उबली या भाप में पकी सब्ज़ियाँ। बैंगन, टमाटर, शिमला मिर्च, कच्चा प्याज (पित्त भड़काते हैं)।
अनाज (Grains) पुराना चावल, मूंग दाल की खिचड़ी, जौ, ओट्स। मैदा, वाइट ब्रेड, यीस्ट (खमीर) वाली चीज़ें, बासी रोटी।
डेयरी और पेय ताज़ा घर का बना मट्ठा (छाछ - IBS में अमृत है), गाय का घी। जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेटबंद जूस, अत्यधिक चाय/कॉफी, पनीर।
मसाले और हर्ब्स जीरा, धनिया, सौंफ, ताज़ा अदरक, हल्दी। लाल मिर्च, अत्यधिक गरम मसाले, खटाई, सिरका (Vinegar)।
फल (Fruits) सेब (उबाल कर या छीलकर), पपीता, अनार। खट्टे फल (संतरा, नींबू - Eczema की खुजली बढ़ा सकते हैं)।

आंतों और त्वचा को एक साथ हील करने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ

  • कुटकी: यह लिवर और आंतों का सबसे बेहतरीन डिटॉक्सिफायर है। यह 'लीकी गट' को रिपेयर करती है और शरीर से गहरे टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है।
  • मंजिष्ठा: यह आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली 'रक्त शोधक' (Blood Purifier) औषधि है। यह खून से पित्त की गर्मी को निकालकर Eczema की खुजली और घाव को तेज़ी से भरती है।
  • बिल्व: IBS के लिए यह एक जादुई फल है। यह आंतों की सूजन को कम करता है, मल को बांधता है और आंतों की सिकुड़ने की गति को सामान्य करता है।
  • नीम: यह प्राकृतिक एंटी-माइक्रोबियल है, जो त्वचा के इन्फेक्शन को रोकता है और गट-माइक्रोबायोम के बुरे बैक्टीरिया को खत्म करता है।

पंचकर्म थेरेपी: शरीर की डीप क्लींजिंग

जब शरीर में सालों का 'आम' और 'पित्त' भर चुका हो, तो केवल दवाइयाँ काम नहीं करतीं; पंचकर्म सिस्टम को 'हार्ड रिसेट' करता है।

  • विरेचन: Eczema और IBS दोनों के लिए यह मास्टर थेरेपी है। इसमें औषधीय दस्त कराकर लिवर, आंतों और खून से भड़के हुए पित्त और टॉक्सिन्स को जड़ से बाहर निकाल दिया जाता है।
  • तक्रधारा: छाछ (मट्ठे) को विशेष औषधियों के साथ मिलाकर माथे पर धारा के रूप में गिराया जाता है। यह तनाव को कम करता है, नर्वस सिस्टम को शांत करता है और IBS-Eczema के ट्रिगर्स को खत्म करता है।
  • बस्ती: आंतों (पक्वाशय) को अंदर से हील करने और वात दोष को संतुलित करने के लिए औषधीय काढ़े या तेल का एनिमा दिया जाता है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

हम केवल त्वचा के घाव को देखकर स्टेरॉयड नहीं लिखते; हम आपकी आंतों की 'चीख' को सुनते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि आपके पेट में 'आम' कितना है और खून में पित्त की गर्मी कितनी भड़क चुकी है।
  • पाचन का विश्लेषण: डॉक्टर आपसे आपके मल (Stool) की स्थिति, गैस, और पेट दर्द के पैटर्न के बारे में विस्तार से पूछते हैं।
  • लाइफस्टाइल ऑडिट: आपका स्ट्रेस लेवल, खान-पान (विरुद्ध आहार जैसे दूध के साथ नमक लेना) का गहराई से विश्लेषण किया जाता है, जो Eczema का बहुत बड़ा कारण है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको एक वैज्ञानिक, सुरक्षित और स्थायी समाधान देते हैं।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर 0129 4264323 पर कॉल करें।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर त्वचा की स्थिति के कारण बाहर जाना असुविधाजनक है, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपकी आंतों की स्थिति के अनुसार खास रक्त-शोधक जड़ी-बूटियाँ, अग्नि बढ़ाने वाले रसायन और 'गट-हीलिंग' डाइट का पूरा रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

लीकी गट (Leaky Gut) और खून की अशुद्धि को रिपेयर होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: सबसे पहले आपके पेट में सुधार आएगा। गैस, मरोड़ और दस्त/कब्ज़ कम होंगे। त्वचा की भयंकर खुजली शांत होनी शुरू होगी।
  • 1 से 3 महीने तक: आपकी आंतों की दीवार रिपेयर होने लगेगी। Eczema के लाल चकत्ते और पपड़ी (Flakes) साफ होने लगेंगे। त्वचा का प्राकृतिक रंग वापस आएगा।
  • 3 से 6 महीने तक: आपका 'गट-माइक्रोबायोम' पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा। आपकी इम्युनिटी इतनी मज़बूत हो जाएगी कि मौसम बदलने या हल्का तनाव होने पर भी Eczema या IBS लौटकर नहीं आएगा।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ों के अनुभव

मेरा नाम दक्ष मलिक है, मैं 23 वर्ष का हूँ और नोएडा का रहने वाला हूँ। कुछ समय पहले मुझे पेट से जुड़ी समस्या शुरू हुई, इंडाइजेशन, पेट में जलन और लंबे समय तक ठीक से मल न आना जैसी परेशानी होने लगी। मेरे कुछ टेस्ट भी हुए, जिनमें पता चला कि मेरे पेट में कुछ घाव (ulcers) हैं। मैंने एलोपैथिक दवाइयाँ लीं, लेकिन मुझे कोई खास फर्क नहीं पड़ा। इसके बाद मैंने टीवी पर डॉ. प्रताप चौहान का कार्यक्रम देखा और उनसे प्रेरित होकर जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया। मैंने डॉक्टर से फोन पर भी बात की और फिर वहाँ से दवाइयाँ व उपचार शुरू किया। धीरे-धीरे मेरी हालत में सुधार आने लगा और अब मैं पहले से काफी बेहतर महसूस करता हूँ। 

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपकी त्वचा पर क्रीम लगाकर आपकी आंतों की बीमारी को नहीं छिपाते।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ खुजली को नहीं दबाते; हम आपकी 'पाचन अग्नि' को ठीक करके टॉक्सिन्स को खून में जाने से रोकते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का बहुत ही शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों ऐसे केस देखे हैं जहाँ IBS और स्किन की समस्याएं एक साथ थीं।
  • कस्टमाइज्ड केयर: हर इंसान का गट-माइक्रोबायोम अलग होता है। हमारा इलाज बिल्कुल आपकी नाड़ी और 'दोषों' के अनुसार होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: हमारी औषधियाँ पूरी तरह प्राकृतिक हैं। स्टेरॉयड क्रीम की तरह ये त्वचा को पतला या कमज़ोर नहीं करतीं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य Eczema के लिए बाहरी स्टेरॉयड क्रीम और IBS के लिए गट-रिलैक्सेंट गोलियाँ। अग्नि' को सुधारकर और 'रक्त शोधन' के ज़रिए दोनों बीमारियों को एक साथ जड़ से मिटाना।
शरीर को देखने का नज़रिया त्वचा और आंतों को दो अलग-अलग सिस्टम मानकर अलग-अलग इलाज करता है। गट-स्किन एक्सिस' को मानता है, जहाँ पेट की खराबी त्वचा रोग का सीधा कारण है।
डाइट और जीवनशैली की भूमिका डाइट को बीमारी से ज़्यादा नहीं जोड़ा जाता। गट-हीलिंग' डाइट और विरुद्ध आहार से परहेज़ को इलाज का सबसे बड़ा हिस्सा मानता है।
लंबा असर स्टेरॉयड छोड़ने पर 'विड्रॉल' होता है और Eczema भयंकर रूप से वापस आता है। आंतों के रिपेयर होने से बीमारी स्थायी रूप से खत्म हो जाती है।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

अगर आपको Eczema और पेट की समस्या के साथ-साथ शरीर में ये गंभीर संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बहुत ज़रूरी है:

  • अगर आपके Eczema के घावों से पीला मवाद (Pus) आने लगे और साथ में तेज़ बुखार हो (यह गंभीर इन्फेक्शन का संकेत है)।
  • अगर मल (Stool) में ताज़ा या काला खून आने लगे (यह केवल IBS नहीं, IBD या अल्सर हो सकता है)।
  • अगर पेट में अचानक ऐसा भयंकर दर्द उठे जो बर्दाश्त से बाहर हो।
  • अगर बिना किसी कोशिश के आपका वज़न बहुत तेज़ी से गिर रहा हो और शरीर में भयंकर कमज़ोरी आ गई हो।

निष्कर्ष

Eczema और IBS कोई दुर्भाग्यपूर्ण संयोग (Coincidence) नहीं हैं कि आपको एक साथ दो बीमारियाँ लग गईं। ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब आपका पाचन तंत्र टूट जाता है, आपकी आंतें छलनी (Leaky Gut) हो जाती हैं और आपका गट-माइक्रोबायोम बर्बाद हो जाता है, तो शरीर के अंदर भयंकर सूजन (Inflammation) पैदा होती है। यही सूजन पेट में मरोड़ (IBS) और त्वचा पर खुजलीदार लाल चकत्ते (Eczema) पैदा करती है। बाहरी स्टेरॉयड क्रीम लगाकर आप अपनी त्वचा को तो थोड़ी देर के लिए शांत कर सकते हैं, लेकिन आप अपनी आंतों की उस चीख को अनसुना कर रहे हैं जो आपको असली डैमेज के बारे में बता रही है। आयुर्वेद आपको इस 'क्विक-फिक्स' के धोखे से बाहर निकालता है। अपनी आंतों को हील करें। कुटकी, मंजिष्ठा और बिल्व जैसी शक्तिशाली जड़ी-बूटियों, पंचकर्म के 'विरेचन' और एक सात्विक डाइट की मदद से अपने 'गट-स्किन एक्सिस' को रिपेयर करें। अपनी पाचन अग्नि का सम्मान करें, और जीवा आयुर्वेद के साथ पेट और त्वचा दोनों का स्थायी स्वास्थ्य पाएं।

FAQs

यह आंतों (Gut) और त्वचा के बीच का सीधा कनेक्शन है। आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया हमारी इम्युनिटी और शरीर की सूजन (Inflammation) को कंट्रोल करते हैं। जब आंतों के बैक्टीरिया बिगड़ते हैं, तो शरीर की इम्युनिटी त्वचा पर एक्ने, सोरायसिस या Eczema के रूप में प्रतिक्रिया देती है।

लीकी गट में आंतों की दीवार कमज़ोर होकर पारगम्य (Permeable) हो जाती है। इससे अनपचा खाना और टॉक्सिन्स खून में लीक होने लगते हैं। इम्यून सिस्टम इन टॉक्सिन्स पर हमला करता है, जिससे सिस्टमिक सूजन होती है, जो त्वचा पर Eczema बनकर उभरती है।

आयुर्वेद इन दोनों का कारण अग्निमांद्य (कमज़ोर पाचन) और आम (टॉक्सिन्स) के निर्माण को मानता है। जब यह आम आंतों में रहता है तो ग्रहणी (IBS) करता है, और जब खून (रक्त धातु) में मिलता है तो त्वचा रोग (Eczema) पैदा करता है।

बिल्कुल! तनाव शरीर में कॉर्टिसोल बढ़ाता है, जो आंतों की दीवार को कमज़ोर करता है और त्वचा की नमी को सुखाकर उसे अति-संवेदनशील (Hypersensitive) बना देता है। इसी कारण स्ट्रेस होते ही पेट में मरोड़ और त्वचा पर भयंकर खुजली शुरू हो जाती है।

स्टेरॉयड क्रीम खून में अवशोषित (Absorb) होकर लंबे समय में इम्युनिटी को कमज़ोर करती हैं। इससे गट-माइक्रोबायोम का संतुलन और बिगड़ सकता है, जो आंतों की समस्या (IBS) को अप्रत्यक्ष रूप से और गंभीर बना देता है।

ताज़ा घर की बनी छाछ (Takra) एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक है। आयुर्वेद में कहा गया है कि छाछ ग्रहणी (IBS) के लिए अमृत है। यह आंतों की सूजन को शांत करती है, अग्नि को बढ़ाती है और गट-फ्लोरा को रिपेयर करती है।

विरुद्ध आहार का मतलब है गलत चीज़ों को एक साथ खाना, जैसे दूध के साथ नमक, मछली, या खट्टे फल खाना। आयुर्वेद के अनुसार यह खून को तुरंत अशुद्ध करता है (रक्त दुष्टि) और Eczema का सबसे बड़ा कारण है।

विरेचन में जड़ी-बूटियों के ज़रिए औषधीय दस्त कराए जाते हैं। यह लिवर और आंतों में सालों से जमे हुए टॉक्सिन्स और पित्त (गर्मी) को फ्लश आउट कर देता है। गंदगी निकलते ही आंतें रिपेयर होने लगती हैं और खून साफ होकर त्वचा निखर जाती है।

यदि आपको लैक्टोज़ इंटॉलरेंस है या कफ बढ़ा हुआ है, तो भारी डेयरी (पनीर, मलाई, दूध) IBS और त्वचा की सूजन को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, घर का बना ताज़ा छाछ और गाय का शुद्ध घी आंतों को हील करने के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

खुजलाने से बचें क्योंकि यह त्वचा को फाड़कर इन्फेक्शन कर सकता है। खुजली होने पर नीम के पत्तों के उबले हुए ठंडे पानी से उस हिस्से को धोएं या शुद्ध नारियल के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर लगाएं। यह पित्त की गर्मी को तुरंत शांत करता है।

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