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सिर्फ गैस समझकर टालते रहे, बाद में IBS निकला

Information By Dr. Keshav Chauhan

कल्पना कीजिए, आप किसी पार्टी में जाने के लिए तैयार हैं या किसी ज़रूरी मीटिंग के बीच में हैं, और अचानक आपके पेट में एक अजीब सी गुड़गुड़ाहट शुरू होती है। एक ऐसा मरोड़, जो आपको पसीने-पसीने कर देता है और आपका पूरा ध्यान सिर्फ़ इस बात पर टिक जाता है कि 'नज़दीकी टॉयलेट कहाँ है?'

हम में से ज़्यादातर लोग इस स्थिति को 'ज़रा सी गैस' या 'शायद कुछ उल्टा-सीधा खा लिया होगा' कहकर टाल देते हैं। हम महीनों तक चूर्ण, ईनो और सोडा के सहारे अपनी आंतों को बहलाते रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर यह सिर्फ़ गैस है, तो यह हर बार आपके किसी तनावपूर्ण काम या बाहर निकलने से पहले ही क्यों शुरू होती है?

सच्चाई यह है कि आपका पेट सिर्फ़ गैस नहीं बना रहा, वह आपसे बात करने की कोशिश कर रहा है। वह आपको इशारा दे रहा है कि आपके दिमाग और आंतों के बीच का 'कनेक्शन' टूट चुका है। जब मामूली सी दिखने वाली गैस, बार-बार होने वाले दस्त या हफ़्तों की कब्ज़ में बदल जाए, तो समझ लीजिए कि आप IBS (Irritable Bowel Syndrome) के जाल में फंस चुके हैं।

इस ब्लॉग में हम उस पर्दे को उठाएंगे जिसे हम 'सिर्फ़ गैस' का नाम देते रहे हैं। हम जानेंगे कि कैसे जीवा आयुर्वेद आपकी आंतों की इस घबराहट को जड़ से शांत कर सकता है

क्या आप भी हर बार पेट फूलने पर इसे 'सिर्फ गैस' समझकर टाल देते हैं?

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी और बिगड़े हुए खान-पान के कारण पेट में गैस बनना एक आम बात हो गई है। हम में से ज़्यादातर लोग इसे सिर्फ़ 'बदहज़मी' मानकर एक गिलास सोडा पी लेते हैं या कोई चूर्ण खाकर काम चला लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि यह गैस बार-बार क्यों लौट आती है? जब पेट का फूलना, मरोड़ और बेचैनी आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाए, तो समझ लीजिए कि यह सिर्फ़ मामूली गैस नहीं है। यह आपकी आंतों की ओर से दी जा रही एक गंभीर चेतावनी हो सकती है जिसे मेडिकल भाषा में IBS कहा जाता है।

गैस और IBS के बीच का महीन अंतर: कैसे पहचानें कि ख़तरा बड़ा है?

लक्षण सामान्य गैस IBS (Irritable Bowel Syndrome)
दर्द का स्वरूप पेट के ऊपरी हिस्से में दबाव या भारीपन पेट के निचले हिस्से में तेज मरोड़ और ऐंठन
शौच का स्वभाव मल त्याग के बाद कोई खास बदलाव नहीं मल त्याग के बाद दर्द में तुरंत आराम
कब्ज/दस्त कभी-कभी कब्ज हो सकती है दस्त और कब्ज का बार-बार बारी-बारी से आना
अवधि कुछ घंटों में ठीक हो जाती है महीनों तक लगातार बनी रहती है
अन्य संकेत सिर्फ डकारें या गैस पास होना मल के साथ म्यूकस (आंव) आना और पेट फूलना

 IBS क्या है? जब आपके दिमाग और आंतों का तालमेल बिगड़ जाता है

IBS कोई संरचनात्मक बीमारी नहीं है, यानी इसमें आंतों में कोई ज़ख़्म या कैंसर नहीं होता, बल्कि यह एक 'फंक्शनल डिसऑर्डर' है। विज्ञान इसे 'गट-ब्रेन एक्सिस' (Gut-Brain Axis) की गड़बड़ी मानता है। सरल शब्दों में कहें तो, आपके दिमाग़ और आंतों के बीच होने वाली बातचीत का तालमेल बिगड़ जाता है। जब दिमाग़ आंतों को गलत सिग्नल भेजता है, तो वे या तो बहुत तेज़ चलने लगती हैं (दस्त) या बहुत धीरे (कब्ज़)।

सावधान! इन 5 संकेतों को नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है भारी

यदि आप नीचे दिए गए लक्षणों को महीनों से झेल रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

मल त्याग की आदतों में बदलाव: कभी अचानक दस्त लग जाना और कभी हफ़्तों कब्ज़ रहना।

पेट में लगातार मरोड़: खासकर खाना खाने के तुरंत बाद शौचालय भागना।

आंव (Mucus) आना: मल के साथ सफेद चिपचिपा पदार्थ निकलना।

अधूरा पेट साफ़ होना: मल त्याग के बाद भी ऐसा लगना कि पेट पूरी तरह साफ़ नहीं हुआ है।

पेट का फूलना (Bloating): सुबह पेट ठीक रहना लेकिन शाम होते-होते गुब्बारे की तरह फूल जाना।

IBS के विभिन्न प्रकार: कब्ज़, दस्त या दोनों का मिला-जुला हमला?

IBS हर व्यक्ति को अलग तरह से प्रभावित करता है, जिसे तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:

  IBS-C (Constipation): इसमें मरीज़ को मुख्य रूप से कब्ज़ रहती है और मल बहुत सख्त आता है।

  IBS-D (Diarrhea): इसमें मरीज़ को बार-बार दस्त लगते हैं और पेट में मरोड़ बनी रहती है।

  IBS-M (Mixed): यह सबसे कष्टकारी है, जिसमें कुछ दिन दस्त लगते हैं और फिर अचानक कब्ज़ हो जाती है।

क्या आपका स्ट्रेस (Stress) आपके पेट में तूफ़ान मचा रहा है?

क्या आपने महसूस किया है कि किसी इंटरव्यू या ज़रूरी मीटिंग से ठीक पहले आपका पेट ख़राब हो जाता है? यह इत्तेफ़ाक़ नहीं है। आपकी आंतों में लाखों न्यूरॉन्स होते हैं, जिसे 'दूसरा दिमाग़' कहा जाता है। जब आप तनाव, चिंता या ग़ुस्से में होते हैं, तो आंतों की मांसपेशियों में संकुचन बढ़ जाता है। लंबे समय तक तनाव में रहने वाले लोगों में IBS होने की संभावना 80% तक ज़्यादा होती है।

IBS का असली कारण: सिर्फ़ खान-पान नहीं, शरीर के 'दोषों' का खेल

आयुर्वेद में IBS को 'संग्रहणी' रोग के समान माना गया है। इसका असली कारण सिर्फ़ बाहर का खाना नहीं है, बल्कि:

मंद जठराग्नि: जब आपके पाचन की अग्नि कमज़ोर हो जाती है, तो भोजन पचने के बजाय सड़ने लगता है।

दोषों का असंतुलन: वात दोष बढ़ने से कब्ज़ और मरोड़ होती है, जबकि पित्त बढ़ने से दस्त की समस्या होती है।

आम (Toxins): अधपका भोजन शरीर में 'आम' (विष) बनाता है जो आंतों की दीवार पर चिपक जाता है।

जीवा आयुर्वेद का 'Ayunique' दृष्टिकोण: हम कैसे पहुँचते हैं आपकी आंतों की जड़ तक?

जीवा आयुर्वेद में हम सिर्फ़ दस्त रोकने या कब्ज़ खोलने की दवा नहीं देते। हमारे डॉक्टर आपकी 'Ayunique' प्रकृति का विश्लेषण करते हैं। हम यह देखते हैं कि आपकी 'संग्रहणी' का कारण मानसिक तनाव है, कमज़ोर पाचन है या फिर गलत लाइफस्टाइल। इसके बाद आपके लिए एक व्यक्तिगत डाइट प्लान और विशेष हर्बल औषधियां तैयार की जाती हैं जो आपकी आंतों के नर्वस सिस्टम को दोबारा संतुलित करती हैं।

जीवा आयुर्वेद में मरीज की जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज की जाँच सिर्फ ऊपर-ऊपर से नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है। यहां कोशिश होती है कि बीमारी की असली वज़ह  तक पहुँचा जाए।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी और लक्षणों को आराम से सुना जाता है
  • आपकी पुरानी बीमारी और पहले लिए गए इलाज के बारे में पूछा जाता है
  • आपके खाने-पीने और रोज की आदतों को समझा जाता है
  • आपकी नींद, तनाव और पाचन की स्थिति पर ध्यान दिया जाता है
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जाना जाता है
  • शरीर में जमा गंदगी (आम) के संकेत देखे जाते हैं
  • अगर कोई और बीमारी या दवा चल रही है, तो उसे भी ध्यान में रखा जाता है

इन सब चीजों को समझने के बाद आपके लिए एक ऐसा इलाज प्लान बनाया जाता है, जो आपके शरीर और जरूरत के अनुसार हो।

IBS के लिए चमत्कारिक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद की ये औषधियां आंतों के लिए अमृत के समान हैं:

बेल (Bilva): यह आंतों की सूजन को कम करता है और मल को बांधने में मदद करता है।

कुटज (Kutaj): दस्त और मरोड़ के इलाज के लिए यह दुनिया की सबसे बेहतरीन जड़ी-बूटी मानी जाती है।

अदरक और सोंठ: यह जठराग्नि को बढ़ाते हैं और पेट की गैस व भारीपन को ख़त्म करते हैं।

बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपी (आंतों की हीलिंग के लिए)

बस्ती चिकित्सा (Basti): इसे 'अर्ध-चिकित्सा' कहा जाता है, जिसमें औषधीय तेलों या काढ़े का एनिमा दिया जाता है। यह आंतों में जमा पुराने वात और टॉक्सिन्स (मल) को बाहर निकालकर उन्हें नई ताक़त देती है।

तक्र धारा (Takra Dhara): इसमें औषधीय छाछ की धारा सिर या पेट पर डाली जाती है। यह 'गट-ब्रेन एक्सिस' को शांत करती है और तनाव की वजह से होने वाले आईबीएस (IBS) में रामबाण है।

अग्निकर्म और अभ्यंग (Abhyangam): पेट की हल्की मालिश करने से जठराग्नि तेज़ होती है और आंतों की मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है।

उदर पिचु (Udar Pichu): पेट के नाभि वाले हिस्से पर औषधीय तेल की पट्टी रखी जाती है, जो पाचन तंत्र की नसों को गहराई से पोषण देती है।

दीपनीय और पाचनीय चिकित्सा: इसमें ऐसी जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है जो आंतों के ज़ख़्मों को भरती हैं और पाचक रसों के बहाव को संतुलित करती हैं।

IBS के लिए फायदेमंद और नुकसानदेह आहार 

क्या खाएं 

तक्र (ताज़ा छाछ): इसमें भुना हुआ जीरा और काला नमक डालकर पिएं; यह आंतों के 'गुड बैक्टीरिया' बढ़ाने के लिए सबसे बढ़िया है।

चावल और मूंग दाल:  ये पचाने में बहुत हल्के होते हैं और कमज़ोर आंतों पर बोझ नहीं डालते।

बेल का फल (Stone Apple):  बेल का शरबत या चूर्ण आंतों की सूजन को कम करने और मल को बांधने में मदद करता है।

लौकी और तोरई:  ये सब्ज़ियाँ सात्विक होती हैं और शरीर में वात या पित्त को नहीं बढ़ातीं।

अनार:  यह आंतों को मज़बूत करता है और बार-बार शौचालय जाने की हाज़त को रोकता है।

क्या न खाएं 

दूध और भारी डेयरी प्रोडक्ट्स:  आईबीएस (IBS) में दूध पचाना मुश्किल होता है, जिससे गैस और दस्त बढ़ सकते हैं।

मैदा और बासी खाना:  पिज़्ज़ा, समोसा या रखा हुआ खाना आंतों की दीवारों पर चिपक जाता है और 'आम' (टॉक्सिन्स) बनाता है।

कच्चा सलाद और गोभी: कच्ची सब्ज़ियां और फूलगोभी/पत्तागोभी पेट में भारी गैस पैदा करती हैं, जो मरोड़ बढ़ा सकती हैं।

मिर्च-मसाले और कैफीन: बहुत ज़्यादा चाय, कॉफ़ी और तीखा खाना आंतों की परत को इरिटेट (उत्तेजित) करता है।

राजमा, छोले और उड़द दाल: ये 'वात' बढ़ाने वाले भारी अनाज हैं जो आंतों में जकड़न और भारीपन पैदा करते हैं।

जीवा आयुर्वेद: इलाज का आसान स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक और असरदार समाधान मिल सके।

  1. अपनी जानकारी हमारे साथ साझा करें: सबसे पहले आपको अपनी सेहत से जुड़ी बुनियादी जानकारी हमें देनी होती है। इसके बाद, आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपने इलाज के सफर की शुरुआत कर सकते हैं।
  2. डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करना: आपकी सुविधा के अनुसार, हमारे अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर से बातचीत करने का समय तय किया जाता है। आप अपनी पसंद के हिसाब से नीचे दिए गए दो तरीकों में से कोई भी चुन सकते हैं:
  • क्लिनिक पर जाकर: अगर आप आमने-सामने बैठकर बात करना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी Jiva क्लिनिक पर जा सकते हैं।
  • वीडियो कंसल्टेशन (सिर्फ ₹49 में): अगर क्लिनिक आना मुमकिन न हो, तो आप घर बैठे ही वीडियो कॉल के जरिए डॉक्टर से जुड़ सकते हैं। यह खास सुविधा अभी सिर्फ ₹49 में उपलब्ध है।
  1. बीमारी को गहराई से समझना: हमारे डॉक्टर आपसे तसल्ली से बात करते हैं ताकि आपकी तकलीफों और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को अच्छे से समझ सकें। हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को ठीक करना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वज़ह  (Root Cause) तक पहुँचना है।
  2. आपके लिए खास इलाज की योजना: पूरीजाँच के बाद, डॉक्टर सिर्फ आपके लिए एक कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान तैयार करते हैं। इसमें शुद्ध जड़ी-बूटियों से बनी दवाइयां दी जाती हैं, जो आपके शरीर के दोषों को संतुलित करने और आपको अंदर से सेहतमंद बनाने में मदद करती हैं।

अपॉइंटमेंट के लिए अभी कॉल करें: 0129 4264323

IBS से राहत पाने की समय-सीमा 

15 दिन से 1 महीना: इस शुरुआती दौर में आपके पाचन में सुधार दिखने लगता है। खाना खाने के तुरंत बाद शौचालय भागने की आदत और पेट का भारीपन (Bloating) कम होने लगता है। शरीर में ऊर्जा का स्तर थोड़ा बढ़ने लगता है।

1 से 3 महीने: यह 'हीलिंग' का समय है। आपकी आंतों की सूजन कम होती है और मल का बंधकर आना शुरू हो जाता है। अगर आपको कब्ज़ या दस्त की बार-बार होने वाली समस्या थी, तो उसमें स्थिरता आने लगती है और मानसिक तनाव का पेट पर असर कम होने लगता है।

3 से 6 महीने: यह समय आंतों को मज़बूत बनाने और जड़ से बीमारी ख़त्म करने का है। आपकी जठराग्नि पूरी तरह सक्रिय हो जाती है और शरीर भोजन से पोषक तत्व सोखने लगता है। लंबे समय से चल रहा पुराना IBS इस दौरान पूरी तरह नियंत्रण में आ जाता है।

आयुर्वेदिक इलाज से होने वाले मुख्य फ़ायदे

जीवा आयुर्वेद का उपचार सिर्फ़ लक्षणों को नहीं दबाता, बल्कि आपको ये फ़ायदे देता है:

आंतों की मज़बूती: आयुर्वेदिक औषधियां आंतों की दीवारों (Intestinal Lining) को दोबारा मज़बूत बनाती हैं, जिससे 'आंव' (Mucus) आना बंद हो जाता है।

गट-ब्रेन बैलेंस: यह इलाज आपके नर्वस सिस्टम को शांत करता है, जिससे तनाव या घबराहट के समय आपका पेट ख़राब होना बंद हो जाता है।

प्राकृतिक पाचन: बिना किसी चूर्ण या लैक्सेटिव की आदत के आपका पेट अपने आप साफ़ होने लगता है।

स्थायी समाधान: चूंकि यह जड़ पर काम करता है, इसलिए कोर्स पूरा होने के बाद बीमारी के वापस लौटने की आशंका न के बराबर होती है।

मरीज़ों के अनुभव

नमस्कार, मेरा नाम दक्ष मलिक है। मैं 23 साल का हूँ और नोएडा (सेक्टर 56) का रहने वाला हूँ। कुछ साल पहले मुझे पेट की गंभीर समस्या शुरू हुई थी, जिसमें पेट में जलन होना, अनपचा मलआना और दिन में कई बार मोशन के लिए जाना पड़ता था। मैंने इसके लिए एलोपैथिक डॉक्टरों को दिखाया, जहाँ मेरी एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी जैसी जांचें हुईं। रिपोर्ट में पेट में कुछ घाव पाए गए। मैंने काफी समय तक उनकी दवाइयां लीं, लेकिन मुझे कोई खास फर्क महसूस नहीं हुआ।

फिर मैंने आयुर्वेद की ओर रुख करने का सोचा और जीवा को चुना क्योंकि मैंने टीवी पर डॉक्टर प्रताप चौहान जी को इस समस्या और इसके समाधान के बारे में बात करते देखा था। मैंने टेलीफोन के माध्यम से डॉक्टरों से परामर्श किया और लगभग 2 साल तक दवाइयां लीं।

बाद में मुझे जीवा के फरीदाबाद (सेक्टर 21B) स्थित पंचकर्म केंद्र में डॉक्टर राहुल त्यागी के पास रेफर किया गया। यहाँ 8 दिनों के ट्रीटमेंट के दौरान मुझे शिरोधारा और एनिमा जैसी थेरेपी दी गईं, जिससे मुझे बहुत आराम मिला। दवाओं और थेरेपी के साथ-साथ यहाँ मुझे एक प्रॉपर डाइट प्लान, योग और एक्सरसाइज के बारे में बताया गया, जो इस बीमारी में बहुत जरूरी है। अब मैं 70% तक बेहतर महसूस कर रहा हूँ और आशा करता हूँ कि आगे भी ऐसे ही स्वस्थ रहूँगा। इसके लिए मैं जीवा आयुर्वेद का धन्यवाद करता हूँ।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

अपने इलाज पर कितना खर्च आएगा, यह जानना हर मरीज़ के लिए जरूरी होता है। जीवा आयुर्वेद में हम खर्च की जानकारी साफ और आसान तरीके से देते हैं, ताकि आप बिना किसी उलझन के सही फैसला ले सकें।

इलाज का सामान्य खर्च

जो लोग अपनी बीमारी के लिए नियमित (regular) इलाज शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए दवाइयों और डॉक्टर की सलाह का महीने का खर्च लगभग ₹3,000 से ₹3,500 के बीच आता है।

यह एक औसत अंदाजा है। असल खर्च आपकी बीमारी कितनी पुरानी है और उसकी स्थिति कैसी है, इस पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल (स्पेशल पैकेज)

अगर आप अपनी बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए थोड़ा ज़्यादा गहराई और विस्तार से इलाज करना चाहते हैं, तो हमारे 'विशेष पैकेज' आपके लिए सबसे अच्छे हैं। इसमें हम सिर्फ बीमारी को नहीं दबाते, बल्कि आपकी पूरी लाइफस्टाइल को सुधारने पर काम करते हैं।

 इसमें शामिल हैं:

  • खास दवाइयाँ(Customized Medicines)
  • सीनियर डॉक्टर से कंसल्टेशन
  • मन को शांत रखने के सेशन्स (Stress Management)
  • योग और मेडिटेशन की ट्रेनिंग
  • पर्सनल डाइट प्लान (जो सिर्फ आपके लिए बना हो)

इन पैकेजेस का खर्च आमतौर पर ₹15,000 से ₹40,000 के बीच होता है, जो आपके 3 से 4 महीने के पूरे इलाज को कवर करता है।

जीवाग्राम  (24x7 देखभाल वाला इलाज)

जिन लोगों को बीमारी से लड़ने के लिए ज़्यादा ध्यान, शांति और आराम के साथ इलाज चाहिए, उनके लिए हमारा जीवाग्राम  सेंटर सबसे बेहतरीन विकल्प है। यह प्रकृति के करीब बना एक ऐसा सेंटर है जहाँ आपको घर जैसा सुकून और अस्पताल जैसी केयर मिलती है।

यहाँ आपको मिलता है:

  • पंचकर्म थेरेपी (शरीर की अंदरूनी सफाई)
  • सादा और पौष्टिक 'सात्विक' खाना
  • इलाज की आधुनिक और बेहतर सुविधाएं
  • आरामदायक रहने की व्यवस्था

यहाँ 7 दिन का प्रोग्राम लगभग ₹1 लाख का होता है। इसमें आपको हर समय विशेषज्ञों की देखभाल मिलती है, ताकि आपका शरीर और मन दोनों पूरी तरह से तरोताजा (rejuvenated) हो सकें।

लोग जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वज़हको जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वज़ह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • असली कारण पर आधारित इलाज: हमारा पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि बीमारी की जड़ (Root Cause) क्या है। हम सिर्फ ऊपरी लक्षणों को कम नहीं करते, बल्कि शरीर के अंदर जाकर उस समस्या को ठीक करते हैं जिससे बीमारी शुरू हुई है।
  • हर मरीज़ के लिए एक खास प्लान: आयुर्वेद मानता है कि हर इंसान का शरीर अलग होता है। इसलिए, हम सबको एक ही दवा नहीं देते। आपका इलाज आपकी अपनी प्रकृति, खान-पान और आपकी लाइफस्टाइल के हिसाब से खास आपके लिए तैयार किया जाता है।
  • जाँच और इलाज का सही तरीका: हम एक बहुत ही व्यवस्थित (systematic) प्रक्रिया का पालन करते हैं। इससे शरीर के हार्मोन्स, पाचन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याओं को गहराई से समझकर उन्हें बैलेंस करने में मदद मिलती है।
  • शुद्ध और सुरक्षित दवाईयां: जीवा की सभी आयुर्वेदिक दवाइयाँ पूरी तरह से शुद्ध जड़ी-बूटियों से बनी होती हैं। इनके बनाने में सुरक्षा और क्वालिटी के कड़े मानकों का पालन किया जाता है ताकि आपको कोई नुकसान न हो।
  • अनुभवी डॉक्टरों की टीम: हमारे पास ऐसे डॉक्टरों की एक बड़ी टीम है जिन्हें आयुर्वेद का सालों का अनुभव है। ये एक्सपर्ट्स हर दिन हजारों मरीज़ों की मुश्किल समस्याओं को सुलझाने में उनकी मदद करते हैं।
  • परिणाम जो सच में दिखते हैं: हमारे 90% से ज़्यादा मरीज़ों ने अपने स्वास्थ्य में बड़ा और सकारात्मक सुधार महसूस किया है।
  • दवाइयों पर निर्भरता में कमी: हमारा लक्ष्य आपको सेहतमंद बनाना है। हमारे 88% मरीज़ धीरे-धीरे दूसरी भारी-भरकम दवाइयों पर अपनी निर्भरता कम करने में सफल रहे हैं और एक नेचुरल लाइफस्टाइल की ओर बढ़े हैं।

डॉक्टर से कब दिखाना चाहिए ?

यदि आपके पेट की समस्या आपके काम, सामाजिक जीवन या मानसिक शांति को प्रभावित करने लगी है, तो यह आख़िरी समय है। बिना डॉक्टर की सलाह के चूर्ण लेना बंद करें, क्योंकि यह आंतों को और कमज़ोर कर सकता है। जीवा के डॉक्टर आपकी नाड़ी देखकर यह बता सकते हैं कि समस्या शारीरिक है या मानसिक, और तदनुसार आपका इलाज शुरू कर सकते हैं।

निष्कर्ष

पेट की समस्या को 'सिर्फ़ गैस' कहकर टालना अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करना है। IBS आपकी जीवनशैली और मानसिक स्थिति का आईना है। सही समय पर आयुर्वेद की शरण में आकर आप अपनी आंतों को दोबारा मज़बूत बना सकते हैं। याद रखें, एक सेहतमंद शरीर की शुरुआत एक सेहतमंद पेट से होती है। आज ही जीवा आयुर्वेद से जुड़ें और अपनी आंतों को दर्द और बेचैनी से आज़ादी दिलाएँ।

FAQs

जी हाँ, आयुर्वेद के सही अनुशासन और दवाओं से आंतों की कार्यप्रणाली को सामान्य किया जा सकता है।

पोषक तत्वों का अवशोषण न होने के कारण मरीज़ को कमज़ोरी और वज़न में गिरावट महसूस हो सकती है।

आयुर्वेद में तक्र (छाछ) को संग्रहणी की सबसे बड़ी दवा बताया गया है, यह आंतों के गुड बैक्टीरिया बढ़ाती है।

श्चित रूप से, योग और प्राणायाम से गट-ब्रेन एक्सिस संतुलित होता है जिससे लक्षणों में सुधार आता है।

नहीं, एक बार जब आपकी जठराग्नि मज़बूत हो जाती है, तो दवाएं धीरे-धीरे बंद की जा सकती हैं।

नहीं, IBS से कैंसर नहीं होता, लेकिन इसके लक्षण अन्य गंभीर बीमारियों जैसे ही हो सकते हैं, इसलिए जांच ज़रूरी है।

कुछ मरीज़ों में गेहूं से समस्या बढ़ती है, जीवा डॉक्टर आपकी जांच कर इसकी सही सलाह देंगे।

नहीं, लेकिन रात का खाना हल्का और सोने से कम से कम 3 घंटे पहले होना चाहिए।

पैदल चलना और हल्के योगासन बहुत फ़ायदेमंद हैं, लेकिन बहुत हैवी वर्कआउट से बचें।

पहले 15-20 दिनों में पाचन में सुधार महसूस होने लगता है, मुकम्मल आराम में समय लगता है।

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