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गर्मी में Prickly Heat (घमौरी) — Calamine से ज़्यादा Effective Ayurvedic

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

चिलचिलाती धूप, उमस भरी गर्मी और पसीने से तर-बतर कपड़े। जैसे ही गर्मियाँ अपने चरम पर पहुँचती हैं, हमारी त्वचा पर लाल, दानेदार और भयंकर खुजली वाली घमौरियों या Miliaria का हमला शुरू हो जाता है। घमौरियों से राहत पाने के लिए सबसे पहली प्रतिक्रिया क्या होती है? टीवी विज्ञापनों में दिखने वाले गुलाबी रंग के कैलेमाइन Calamine लोशन या 'बर्फ जैसी ठंडक' देने वाले केमिकल टेलकम पाउडर का अंधाधुंध इस्तेमाल। हम इन्हें अपनी त्वचा पर थोप लेते हैं और सोचते हैं कि समस्या खत्म हो गई।

लेकिन क्या सच में ऐसा है? कैलेमाइन लोशन या केमिकल पाउडर्स आपको कुछ पलों की ठंडक तो दे सकते हैं, लेकिन ये त्वचा के रोमछिद्रों Pores को और भी ज़्यादा ब्लॉक कर देते हैं। यह केवल लक्षणों को दबाने वाला एक बैंड-एड Band-aid समाधान है। असली समस्या त्वचा के ऊपर नहीं, बल्कि शरीर के अंदर भड़के हुए 'पित्त' और बंद हो चुके पसीने के चैनलों में है। जब यह भयंकर जलन और सुई चुभने जैसी खुजली आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी और रातों की नींद हराम करने लगे, तो समझ लीजिए कि आपकी त्वचा को केवल बाहरी लेप की नहीं, बल्कि अंदरूनी आयुर्वेदिक क्लींजिंग और गहराई से पित्त शमन की ज़रूरत है।

घमौरियां Prickly Heat शरीर में क्या संकेत देती हैं?

घमौरियां महज़ त्वचा की ऊपरी परत की समस्या नहीं हैं; यह आपके शरीर का एक डिफेंस मैकेनिज्म Defense Mechanism है जो बता रहा है कि शरीर का तापमान नियंत्रण सिस्टम Thermoregulation फेल हो रहा है।

  • स्वेदवह स्रोतस Sweat Ducts का ब्लॉक होना: गर्मी और उमस में जब शरीर बहुत ज़्यादा पसीना बनाता है, लेकिन डेड स्किन सेल्स और धूल के कारण पसीने की नलिकाएं ब्लॉक हो जाती हैं, तो पसीना बाहर निकलने के बजाय त्वचा के अंदर ही रिसने लगता है। इससे लाल दाने और भयंकर जलन पैदा होती है।
  • भ्राजक पित्त का प्रकोप: आयुर्वेद के अनुसार त्वचा का रंग और तापमान 'भ्राजक पित्त' द्वारा नियंत्रित होता है। जब मसालेदार भोजन, तनाव और बाहरी गर्मी से पित्त भड़कता है, तो यह खून रक्त धातु को दूषित कर देता है, जो घमौरियों के रूप में फूटकर बाहर आता है।
  • बैक्टीरियल और फंगल ओवरग्रोथ: पसीने से चिपचिपी त्वचा पर जब कैलेमाइन या गाढ़े लोशन की परत लगा दी जाती है, तो वहां हवा का संचार बंद हो जाता है, जिससे बैक्टीरिया को पनपने के लिए एकदम सही माहौल मिल जाता है और साधारण घमौरियां एक गहरे स्किन इन्फेक्शन में बदल जाती हैं।

घमौरियों और स्किन डैमेज किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति की त्वचा की प्रकृति अलग होती है। गर्मी का असर और पसीने से होने वाला डैमेज शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान घमौरियां Miliaria Crystallina: इस स्थिति में दाने पानी के छोटे-छोटे बुलबुले जैसे होते हैं। इनमें लालिमा कम होती है लेकिन त्वचा बहुत रूखी Dry और खुरदरी हो जाती है। जब ये दाने फूटते हैं तो त्वचा पर पपड़ी Scales बनने लगती है। इसमें खुजली हल्की लेकिन चुभन ज़्यादा होती है।
  • पित्त-प्रधान घमौरियां Miliaria Rubra: यह सबसे आम और भयंकर रूप है। इसमें दाने गहरे लाल रंग के होते हैं और ऐसा लगता है जैसे त्वचा पर किसी ने आग लगा दी हो या हज़ारों सुइयां चुभो दी हों। पसीना आते ही इसमें असहनीय जलन होती है और व्यक्ति लगातार खुजलाने पर मजबूर हो जाता है।
  • कफ-प्रधान घमौरियां Miliaria Profunda / Pustulosa: जब समस्या बहुत पुरानी हो जाती है या इन्फेक्शन गहरा हो जाता है, तो दानों के अंदर सफेद मवाद Pus या पानी भर जाता है। त्वचा में सूजन आ जाती है और दाने बड़े, कठोर और दर्दनाक हो जाते हैं। यह स्थिति तब आती है जब रोमछिद्र पूरी तरह से चोक हो जाते हैं।

क्या आपकी त्वचा पर भी घमौरियों के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

घमौरियां अचानक रातों-रात पूरे शरीर पर नहीं फैलतीं। शरीर पहले चेतावनी देता है, जिसे हम अक्सर सामान्य पसीना मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। अगर आपको ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • पसीना आते ही सुई जैसी चुभन: धूप में निकलते ही या थोड़ा सा शारीरिक काम करते ही पीठ, गर्दन या छाती पर अचानक हज़ारों सुइयां चुभने जैसा अहसास Prickling sensation होना।
  • कपड़ों की रगड़ से जलन: जब कपड़े त्वचा से रगड़ खाते हैं, तो वहां की त्वचा का लाल हो जाना और छिलने जैसा दर्द महसूस होना, खासकर कॉलर, अंडरआर्म्स और कमर के आस-पास।
  • रात में खुजली के कारण नींद टूटना: रात को सोते समय अचानक भयंकर खुजली उठना, जिसके कारण नींद टूट जाए और आप बेतहाशा खुजलाने पर मजबूर हो जाएं।
  • त्वचा का खुरदरापन Sandpaper Skin: त्वचा पर हाथ फेरने पर वह चिकनी महसूस होने के बजाय रेगमाल Sandpaper जैसी खुरदरी और दानेदार महसूस होना।

इस खुजली और जलन को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

इस भयंकर जलन से तुरंत राहत पाने के लिए, लोग अक्सर टीवी विज्ञापनों से प्रभावित होकर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो त्वचा को स्थायी रूप से डैमेज कर देते हैं:

  • कैलेमाइन Calamine का अत्यधिक लेप: कैलेमाइन लोशन त्वचा को कुछ देर के लिए सुन्न Soothe ज़रूर करता है, लेकिन इसके गाढ़ेपन के कारण त्वचा के रोमछिद्र Pores पूरी तरह ब्लॉक हो जाते हैं। इससे अंदर फंसा हुआ पसीना और गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे दाने बड़े और मवाद वाले हो जाते हैं।
  • केमिकल टेलकम पाउडर का इस्तेमाल: कूलिंग पाउडर्स में मौजूद भारी केमिकल्स और एस्बेस्टस Asbestos जैसी अशुद्धियां पसीने के साथ मिलकर एक पेस्ट बना लेती हैं, जो त्वचा के नेचुरल डिटॉक्सिफिकेशन को रोक देता है।
  • लगातार खुजलाना और छीलना: नाखूनों से खुजलाने पर त्वचा छिल जाती है, जिससे स्टेफिलोकोकस Staphylococcus जैसे खतरनाक बैक्टीरिया अंदर प्रवेश कर जाते हैं और साधारण घमौरियां भयंकर फोड़े-फुंसियों Boils का रूप ले लेती हैं।
  • टाइट और सिंथेटिक कपड़े पहनना: पसीने से भीगे हुए नायलॉन या पॉलिएस्टर के कपड़े पहनना, जो त्वचा को सांस Breathe नहीं लेने देते और घर्षण Friction पैदा करते हैं।

आयुर्वेद घमौरियों Prickly Heat और स्किन इन्फेक्शन को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे मिलियारिया Miliaria या स्वेट ग्लैंड ब्लॉकेज कहता है, आयुर्वेद उसे 'रक्त धातु दृष्टि' Blood impurity, 'स्वेदवह स्रोतस' Sweat channels की रुकावट और 'पित्त दोष' के गंभीर प्रकोप के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है।

  • भ्राजक पित्त और रक्त का दूषित होना: आयुर्वेद में त्वचा 'रस' और 'रक्त' धातु का आईना है। जब शरीर में गर्मी उष्णता और तीक्ष्णता बढ़ती है, तो भ्राजक पित्त खून को दूषित Toxins कर देता है। यही दूषित गर्मी त्वचा के माध्यम से घमौरियों के रूप में बाहर फेंकने की कोशिश की जाती है।
  • स्वेदवह स्रोतस में आम Toxins का जमाव: खराब पाचन जठराग्नि की मंदता के कारण जो 'आम' Toxins बनता है, वह पसीने की नलिकाओं Srotas में जाकर फंस जाता है। जब प्राकृतिक पसीना बाहर नहीं निकल पाता, तो वह सूजन और लालिमा पैदा करता है।
  • वात और कफ का अनुबंधन: जब खुजली के साथ-साथ सूखापन आता है तो उसमें वात का प्रभाव होता है, और जब मवाद या भारी सूजन आती है, तो कफ दोष भी पित्त के साथ मिल चुका होता है।

त्वचा की गर्मी मिटाने और पित्त शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आप त्वचा पर चाहे कितनी भी दवा लगा लें, अगर आपका खाना शरीर के अंदर 'आग' पित्त लगा रहा है, तो घमौरियां कभी खत्म नहीं होंगी। त्वचा को अंदर से ठंडक देने और पित्त को शांत करने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - पित्त शामक और ठंडक देने वाले क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - गर्मी और पित्त बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, जौ Barley, ओट्स, मूंग दाल, ज्वार। वाइट ब्रेड, मैदा, अत्यधिक गर्म तासीर वाला बाजरा या मक्का।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी पित्त का नाश करने के लिए सर्वश्रेष्ठ, नारियल का तेल। भारी डीप-फ्राइड भोजन, रिफाइंड तेल, डालडा, अत्यधिक सरसों का तेल।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, कद्दू, परवल, खीरा, पुदीना, धनिया पानी वाली सब्ज़ियाँ। बहुत ज़्यादा लहसुन, हरी और लाल मिर्च, बैंगन, टमाटर, शिमला मिर्च।
फल Fruits तरबूज, खरबूजा, मीठे अंगूर, अनार, नारियल पानी, पका हुआ मीठा सेब। खट्टे फल कच्चा आम, संतरा, पपीता गर्म तासीर, अनानास।
पेय पदार्थ Beverages सौंफ और मिश्री का पानी, जीरा-धनिया का पानी, ताज़ा छाछ मट्ठा, गुलाब का शर्बत। बहुत ज़्यादा कॉफी और चाय, शराब, कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक्स।

त्वचा को फौलादी ताक़त और ठंडक देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य आयुर्वेदिक रसायन दिए हैं, जो बिना किसी रोमछिद्र को ब्लॉक किए, कैलेमाइन से दस गुना ज़्यादा असरदार और स्थायी ठंडक प्रदान करते हैं:

  • नीम Neem: यह आयुर्वेद का सबसे शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल और रक्त शोधक Blood purifier है। यह त्वचा के अंदर बैठे इन्फेक्शन को मारता है और भयंकर खुजली को तुरंत रोकता है।
  • चंदन Sandalwood: चंदन की तासीर अत्यधिक ठंडी होती है। यह भ्राजक पित्त को तुरंत शांत करता है, जलन को खींच लेता है और घमौरियों के लालपन को खत्म कर त्वचा को जादुई ठंडक देता है।
  • अनंतमूल Sariva/Anantmool: यह एक बेहतरीन कूलिंग हर्ब है जो शरीर की अंदरूनी गर्मी को मूत्र Urine और पसीने के ज़रिए बाहर निकाल देती है, जिससे खून पूरी तरह साफ हो जाता है।
  • उशीर Khus/Vetiver: खस की जड़ें पसीने की बदबू को खत्म करती हैं, रोमछिद्रों की सूजन घटाती हैं और त्वचा को अंदरूनी रूप से हाइड्रेट करती हैं।
  • गिलोय Giloy: बार-बार होने वाले स्किन इन्फेक्शन और शरीर की इम्यूनिटी को मज़बूत करने के लिए गिलोय एक अचूक रसायन है, जो पित्त को समभाव में लाता है।

रोमछिद्रों को खोलने और खुजली मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब गर्मी और पित्त बहुत गहराई तक त्वचा और खून में जम चुके हों, तो पंचकर्म और आयुर्वेदिक बाहरी लेप जादू की तरह काम करते हैं:

  • हर्बल लेप Herbal Lepam: कैलेमाइन की जगह मुल्तानी मिट्टी, चंदन, गुलाब जल और धनिया पाउडर का प्राकृतिक लेप त्वचा पर लगाया जाता है। यह पोरस को ब्लॉक किए बिना त्वचा की गर्मी को सोख लेता है और रोमछिद्रों को खोलता है।
  • परिषेक Parisheka / Medicated Bath: नीम, खस और त्रिफला के उबले हुए पानी की धार से स्नान Bath कराया जाता है। यह पूरे शरीर से पसीने के टॉक्सिन्स को धो डालता है और भयंकर खुजली में मिनटों में आराम देता है।
  • विरेचन Virechana: अगर पित्त और रक्त दोष बहुत भयंकर है, तो विरेचन मेडिकेटेड लूज़ मोशन के ज़रिए आंतों और लिवर से सारी दूषित गर्मी को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। इसके बाद त्वचा एकदम साफ और नई जैसी हो जाती है।

त्वचा के पूरी तरह रिपेयर होने और घमौरियां खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों से केमिकल पाउडर्स और लोशन के इस्तेमाल से ब्लॉक हुई त्वचा को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 हफ्ते: प्राकृतिक लेप और शीत-वीर्य औषधियों से घमौरियों का लालपन, भयंकर खुजली और सुई चुभने जैसी जलन में तुरंत भारी कमी आएगी। नींद बेहतर होगी।
  • 1-2 महीने: रक्त शोधक Blood purifiers जड़ी-बूटियों के प्रभाव से खून की अशुद्धियां खत्म होने लगेंगी। बंद रोमछिद्र पूरी तरह खुल जाएंगे और त्वचा अपनी प्राकृतिक नमी वापस पा लेगी।
  • 3 महीने: आपका भ्राजक पित्त और लिवर पूरी तरह संतुलित हो जाएगा। शरीर का थर्मोरेगुलेशन गर्मी सहने की क्षमता इतना मज़बूत हो जाएगा कि अगली गर्मियों में आपको घमौरियों की समस्या छुएगी भी नहीं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

गर्मी के मौसम में स्किन केयर और घमौरियों के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य लक्षणों को दबाने के लिए कैलेमाइन लोशन, एंटी-हिस्टामाइन और कूलिंग पाउडर्स देना। पित्त को शांत करना, खून रक्त धातु को साफ करना और रोमछिद्रों को प्राकृतिक रूप से खोलना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल पसीने की ग्रंथि के ब्लॉक होने की एक बाहरी Local समस्या मानना। इसे बिगड़े हुए पित्त, अशुद्ध रक्त और कमज़ोर पाचन तंत्र का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल क्रीम्स लगाने की सलाह, लेकिन जठराग्नि या पित्त-शामक भोजन पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। पित्त-शामक डाइट, सूती कपड़े पहनना, और ठंडे हर्बल लेप को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर पसीना आते ही या लोशन का असर खत्म होते ही घमौरियां और खुजली तुरंत वापस आ जाती है। शरीर अंदर से ठंडा होता है और रोमछिद्र स्वस्थ हो जाते हैं, जिससे इंसान स्थायी रूप से इन्फेक्शन-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद घमौरियों और पित्त की इस खुश्की को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपनी त्वचा पर ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • दानों में मवाद Pus भर जाना: अगर घमौरियों के लाल दाने बड़े होकर पीले या सफेद मवाद से भर जाएं, जो भयंकर इन्फेक्शन Secondary Infection का संकेत है।
  • बुखार और कंपकंपी आना: अगर भयंकर घमौरियों के साथ-साथ आपको तेज़ बुखार आने लगे या लिम्फ नोड्स Lymph nodes में सूजन आ जाए।
  • त्वचा का लगातार गर्म और लाल रहना: अगर छाती या पीठ की त्वचा छूने पर आग की तरह गर्म लगे और लालिमा तेज़ी से फैल रही हो।
  • चक्कर आना या हीट स्ट्रोक के लक्षण: अगर पसीना आना बिल्कुल बंद हो जाए जो खतरनाक है और तेज़ सिरदर्द, मतली या चक्कर आने की समस्या हो।

निष्कर्ष

गर्मियों में पसीना आना एक प्राकृतिक और ज़रूरी प्रक्रिया है, लेकिन इस पसीने के कारण त्वचा पर होने वाली सुई जैसी चुभन, लाल दाने और असहनीय जलन आपकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा नहीं होनी चाहिए। यह आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपका पित्त दोष भड़क चुका है, खून दूषित हो रहा है और आपकी त्वचा के रोमछिद्र भारी दबाव में दम तोड़ रहे हैं। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना कैलेमाइन लोशन, स्टेरॉयड क्रीम या केमिकल वाले ठंडे पाउडर्स से दबाते हैं, तो आप अपनी त्वचा को हील करने के बजाय उसे स्थायी रूप से डैमेज कर रहे होते हैं। इस बाहरी लिपा-पोती के खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। सूती Cotton और ढीले कपड़े पहनें, जंक फूड और मिर्च-मसालों से ब्रेक लें और अपनी डाइट में नारियल पानी, खीरा और ताज़ा मट्ठा शामिल करें। नीम, चंदन और गिलोय जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और हर्बल लेप व परिषेक स्नान से अपनी झुलसी हुई त्वचा को प्राकृतिक ठंडक देकर नया जीवन दें। केमिकल पाउडर्स के कारण अपनी त्वचा को कमज़ोर और बीमार न पड़ने दें, और अपने शरीर व त्वचा को स्थायी रूप से निखारने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

कैलेमाइन लोशन खुजली से अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह बहुत गाढ़ा (Heavy) होता है। इसके लगातार इस्तेमाल से त्वचा के रोमछिद्र (Sweat ducts) पूरी तरह चोक हो जाते हैं, जिससे अंदर फंसा पसीना गंभीर इन्फेक्शन या फोड़े-फुंसियों का रूप ले सकता है।

कैलेमाइन एक केमिकल बेस्ड फॉर्मूलेशन है जो पोर्स को ब्लॉक करता है। इसके विपरीत, चंदन और मुल्तानी मिट्टी का आयुर्वेदिक लेप प्राकृतिक रूप से अतिरिक्त तेल और गर्मी को सोखता है, त्वचा को ठंडक देता है, और सबसे महत्वपूर्ण बात—यह रोमछिद्रों को खुला रखकर त्वचा को सांस लेने देता है।

बर्फ रगड़ने से तुरंत सुन्नपन (Numbness) आता है और खुजली रुक जाती है, लेकिन आयुर्वेद मानता है कि सीधा बर्फ रगड़ने से वात दोष भड़क सकता है और ब्लड सर्कुलेशन रुक सकता है। इसके बजाय ठंडे पानी में गुलाब जल या चंदन का पाउडर मिलाकर सिकाई करना ज़्यादा फायदेमंद और सुरक्षित है।

बिल्कुल। लाल मिर्च, ज़्यादा लहसुन, तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन (Spicy food) सीधे शरीर में पित्त दोष (अंदरूनी गर्मी) को भड़काता है। यह गर्मी खून को दूषित करती है और पसीने के ज़रिए त्वचा पर घमौरियों के रूप में फूट पड़ती है।

हाँ, यह आयुर्वेद का सबसे अचूक और आज़माया हुआ नुस्खा है। नीम में शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल और कंडूघ्न (खुजली नाशक) गुण होते हैं। नीम के पानी से नहाने (परिषेक) से त्वचा के सारे बैक्टीरिया मर जाते हैं और बंद रोमछिद्र खुल जाते हैं।

हमेशा ढीले, हल्के रंग के और 100% सूती (Cotton) कपड़े पहनें। सिंथेटिक, नायलॉन या पॉलिएस्टर कपड़े पसीने को सोखते नहीं हैं और त्वचा के साथ रगड़ (Friction) पैदा करते हैं, जो घमौरियों और जलन को कई गुना बढ़ा देते हैं।

हाँ। गिलोय एक बेहतरीन रक्त शोधक (Blood purifier) और इम्यूनिटी बूस्टर है। यह लिवर की गर्मी को शांत करता है और शरीर के अंदर जमे हुए आम (Toxins) को बाहर निकालता है, जिससे त्वचा साफ होती है और बार-बार घमौरियां निकलने की टेंडेंसी खत्म हो जाती है।

नहीं। बाज़ार में मिलने वाले कूलिंग टेलकम पाउडर पसीने के साथ मिलकर त्वचा पर एक मोटी, चिपचिपी परत बना देते हैं। यह परत बैक्टीरिया पनपने के लिए बेहतरीन जगह बन जाती है। लंबे समय तक इनका प्रयोग फेफड़ों (सांस के ज़रिए) और त्वचा दोनों के लिए हानिकारक है।

नारियल तेल की तासीर ठंडी (शीत वीर्य) होती है और यह वात-पित्त को शांत करता है। अगर घमौरियां सूखकर खुरदरी हो गई हैं (वात-प्रधान), तो हल्का नारियल तेल लगाने से आराम मिलता है। लेकिन अगर मवाद या बहुत ज़्यादा चिपचिपाहट है (कफ-प्रधान), तो तेल लगाने से बचना चाहिए।

ताज़ा एलोवेरा (Aloe Vera) जेल या चंदन के पाउडर में गुलाब जल मिलाकर घमौरियों पर लगाएं। इसे 15-20 मिनट सूखने दें और फिर सादे ठंडे पानी से धो लें। इसके साथ ही दिन में 2-3 बार सौंफ और मिश्री का पानी पिएं। यह बाहर और अंदर दोनों तरफ से पित्त को तुरंत शांत कर देगा।

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