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Acne बार-बार लौटना सिर्फ oily skin की वजह नहीं हो सकता

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि चेहरे पर निकलने वाले मुहाँसे या पिंपल्स सिर्फ ऑयली स्किन (Oily Skin) या बाहर की धूल-मिट्टी की वजह से होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि आप दुनिया भर के महँगे फेसवॉश लगा लेते हैं, फिर भी कुछ दिनों बाद वही लाल दाने वापस लौट आते हैं? दरअसल, हमारी त्वचा और हमारे पेट (या अंदरूनी स्वास्थ्य) का बहुत ही गहरा कनेक्शन होता है। 

जब शरीर के अंदर हार्मोंस की उथल-पुथल या पेट में गंदगी का तूफान चलता है, तो इसका सीधा असर हमारे चेहरे पर पड़ता है। सिर्फ ऊपर से क्रीम पोत लेने या मुहाँसे को सुखा देने से यह समस्या जड़ से खत्म नहीं होती। जब तक आप अपने शरीर के अंदर की उलझन को नहीं सुलझाते, त्वचा की यह भड़ास शांत नहीं होगी। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह कोई आम स्किन प्रॉब्लम नहीं है, बल्कि आपके शरीर का आपको यह बताने का तरीका है कि अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है।

मुहाँसे बार-बार क्यों लौटते हैं? 

हमारे शरीर में पेट और त्वचा का एक बहुत ही खास रिश्ता होता है, जिसे विज्ञान में 'गट-स्किन एक्सिस' (Gut-Skin Axis) कहा जाता है। जब आपका पाचन तंत्र सही से काम नहीं करता या आँतों में अच्छे बैक्टीरिया कम हो जाते हैं, तो शरीर के अंदर विषैले तत्व (Toxins) बढ़ने लगते हैं। इस गंदगी को बाहर निकालने के लिए शरीर त्वचा के रोमछिद्रों (Pores) का सहारा लेता है। इसके अलावा, जब हार्मोंस का संतुलन बिगड़ता है, तो त्वचा की तेल ग्रंथियां (Sebaceous Glands) ज़रूरत से ज़्यादा सीबम (तेल) बनाने लगती हैं। यही तेल जब मृत कोशिकाओं (Dead Cells) के साथ मिल जाता है, तो रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और वहाँ बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जो सूजन और भयंकर मुहाँसों का रूप ले लेते हैं।

क्या सिर्फ बाहरी धूल-मिट्टी या सीबम ही असली मुज़रिम हैं?

 ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार आप दिन में तीन बार चेहरा धोते हैं, एकदम साफ माहौल में रहते हैं, फिर भी सुबह उठते ही चेहरे पर एक नया दाना नज़र आ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मुहाँसों की असली फैक्ट्री आपकी त्वचा के ऊपर नहीं, बल्कि आपके खून और ख्यालों के अंदर चल रही है। अगर आप लगातार गलत खानपान ले रहे हैं या आपका पेट ठीक से साफ नहीं हो रहा है, तो बाहर की सफाई कोई काम नहीं आएगी। शरीर के अंदर पनप रही गर्मी और टॉक्सिन्स जब बाहर निकलने का रास्ता ढूँढते हैं, तो वे स्किन ब्रेकआउट्स के रूप में ही चेहरे, पीठ या कंधों पर फूट पड़ते हैं।

आपके मानसिक तनाव का चेहरे की त्वचा पर क्या असर होता है? 

जब हम बहुत ज़्यादा परेशान या स्ट्रेस में होते हैं, तो हमारे शरीर के अंदर कई सारे रासायनिक बदलाव एक साथ होते हैं:

  • कॉर्टिसोल का बढ़ना: तनाव में यह स्ट्रेस हार्मोन काफी बढ़ जाता है, जो त्वचा की तेल ग्रंथियों को ओवरड्राइव (हद से ज़्यादा काम करने) में डाल देता है।
  • सूजन (Inflammation): घबराहट और स्ट्रेस शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन पैदा करते हैं, जिससे छोटे दाने भी बड़े और दर्दनाक मुहाँसों में बदल जाते हैं।
  • स्किन बैरियर का कमज़ोर होना: ज़्यादा तनाव आपकी त्वचा की अपनी रक्षा प्रणाली को कमज़ोर कर देता है, जिससे बाहरी बैक्टीरिया आसानी से हमला कर देते हैं।
  • हीलिंग प्रोसेस धीमा होना: स्ट्रेस के कारण पुराने मुहाँसों के दाग-धब्बे भरने या ठीक होने की रफ्तार एकदम धीमी पड़ जाती है।

क्या ज़िद्दी मुहाँसे शरीर के अंदर पनप रही किसी दूसरी बीमारी का संकेत हैं? 

अगर आपको लगातार बड़े और दर्दनाक मुहाँसे हो रहे हैं और कोई क्रीम काम नहीं कर रही, तो इसे नज़रअंदाज़ बिल्कुल न करें। यह शरीर में चल रही किसी बड़ी अंदरूनी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है:

  • पीसीओएस या पीसीओडी (PCOS/PCOD): महिलाओं में ओवरी के अंदर सिस्ट बनने और मेल हार्मोन (Testosterone) बढ़ने से जॉ-लाइन (जबड़े) पर भयंकर दाने निकलते हैं।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: जब शरीर शुगर को सही से नहीं पचा पाता, तो इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर मुहाँसों को ट्रिगर करता है।
  • गट डिस्बायोसिस: यह आँतों की वह स्थिति है जहाँ खराब बैक्टीरिया हावी हो जाते हैं, जिससे खाया-पिया शरीर को लगने के बजाय खून में ज़हर घोलने लगता है।
  • लिवर की कमज़ोरी: जब आपका लिवर शरीर की गंदगी को फिल्टर करने में धीमा पड़ जाता है, तो वह सारी गंदगी त्वचा के ज़रिए बाहर निकलने लगती है।

आयुर्वेद के चश्मे से त्वचा के रोगों और शरीर की गर्मी का रिश्ता 

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर का पूरा स्वास्थ्य वात, पित्त और कफ दोषों पर निर्भर करता है। मुहाँसे (जिसे आयुर्वेद में 'यौवन पिडिका' कहा गया है) मुख्य रूप से बिगड़े हुए 'पित्त' (गर्मी) और दूषित 'रक्त' (खून) का नतीजा होते हैं। जब आप बहुत ज़्यादा तीखा, तला-भुना या जंक फूड खाते हैं, तो शरीर में पित्त की गर्मी बेकाबू हो जाती है। यह बढ़ा हुआ पित्त जब खून के साथ मिलता है, तो रक्त दूषित हो जाता है और यही गर्मी चेहरे पर लाल, सूजे हुए दानों के रूप में फूटती है। इसका सीधा मतलब है कि जब तक आप अपने शरीर के पित्त (गर्मी) को शांत नहीं करेंगे और खून को साफ नहीं करेंगे, तब तक मुहाँसे आना बंद नहीं होंगे।

खून साफ करने और त्वचा को निखारने वाली प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ 

प्रकृति ने हमें ऐसी कई बेहतरीन जड़ी-बूटियाँ दी हैं जो खून की सफाई करने और हार्मोंस को संतुलित करने का काम एक साथ करती हैं:

  • नीम: यह खून को साफ करने और त्वचा के बैक्टीरिया को मारने के लिए प्रकृति का सबसे बड़ा एंटीबायोटिक है। यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को बाहर खींच लेता है।
  • मंजिष्ठा: यह जड़ी-बूटी खून में जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर रंगत को निखारती है और मुहाँसों के ज़िद्दी दाग-धब्बों को मिटाती है।
  • गिलोय: यह आपके इम्यून सिस्टम को अंदर से इतना मज़बूत कर देती है कि त्वचा खुद ही बैक्टीरिया से लड़ना सीख जाती है।
  • घृतकुमारी (एलोवेरा): यह त्वचा को बाहर से ठंडक देती है और अगर इसका जूस पिया जाए, तो यह आँतों की जलन को शांत करके पेट को एकदम साफ रखती है।

क्या रात-दिन की दिमागी उलझनें (Overthinking) भी चेहरे पर दाने निकाल सकती हैं? 

बिलकुल! आप जितना ज़्यादा सोचते हैं या रात-रात भर जागकर परेशान रहते हैं, आपका शरीर अंदर से उतना ही ज़्यादा थकता है। ज़्यादा सोचने पर इंसान की नींद खराब होती है और साँसें उथली हो जाती हैं। शरीर केवल गहरी नींद में ही अपनी त्वचा की मरम्मत (Repair) करता है। जब आप सोएंगे ही नहीं, तो स्किन के टिशू खुद को हील नहीं कर पाते। इसके अलावा, दिमागी उलझन से पाचन कमज़ोर होता है और खाया हुआ भोजन पेट में पड़ा-पड़ा सड़ने लगता है। इसी सड़न की वजह से खून गंदा होता है और सुबह चेहरे पर एक नया पिंपल आपका इंतज़ार कर रहा होता है।

हमारी रोज़मर्रा की वो गलतियाँ जो पिंपल्स को न्यौता देती हैं 

हम अक्सर जाने-अनजाने में कुछ ऐसा खा लेते हैं या ऐसी हरकतें करते हैं जो हमारी त्वचा की परेशानी को दोगुना कर देती हैं:

  • डेयरी और ज़्यादा मीठा खाना: बहुत ज़्यादा दूध, चीनी या चॉकलेट खाने से शरीर में एकदम से इंसुलिन बढ़ता है, जिससे तेल ग्रंथियां बौखला जाती हैं और मुहाँसे निकलते हैं।
  • चेहरे को बार-बार छूना या दाने फोड़ना: अपने गंदे हाथों से दानों को छूने या नोचने से उंगलियों के बैक्टीरिया रोमछिद्रों में चले जाते हैं और सूजन फैला देते हैं।
  • खाली पेट चाय-कॉफी पीना: सुबह उठते ही कैफीन लेने से पेट में भयंकर एसिड और गर्मी बनती है, जो सीधे तौर पर खून को दूषित करके पिंपल्स बढ़ाती है।
  • मेकअप के साथ सो जाना: रात में त्वचा साँस लेती है। अगर आप मेकअप नहीं हटाते, तो रोमछिद्र बुरी तरह बंद हो जाते हैं और मुहाँसों का घर बन जाते हैं।
  • मैदा और प्रोसेस्ड फूड खाना: पिज़्ज़ा, बर्गर और पैकेट वाले स्नैक्स आँतों में जाकर चिपक जाते हैं, जिससे कब्ज़ होती है और त्वचा मुरझा कर दानेदार हो जाती है।
  • गंदे तकिये के गिलाफ का इस्तेमाल: कई-कई दिनों तक पिलो कवर न धोने से उसमें फंगस और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, जो रात भर आपके गालों से रगड़ खाते हैं।

शरीर के अंदर चल रही वो कमज़ोरियाँ जो सीधे चेहरे पर दिखती हैं

 कई बार आप स्किन केयर रूटीन एकदम सही फॉलो करते हैं, फिर भी कुछ दूसरी अंदरूनी कमज़ोरियों की वजह से पिंपल्स और ऑयली स्किन की समस्या बनी रहती है:

  • विटामिन डी और जिंक की कमी: इन विटामिन्स की कमी से त्वचा की रोग प्रतिरोधक क्षमता गिर जाती है, जिससे मुहाँसे जल्दी ठीक नहीं होते।
  • कब्ज़ की पुरानी शिकायत: जिन लोगों का पेट सुबह ठीक से साफ नहीं होता, उनके शरीर की गंदगी खून में दोबारा घुलने लगती है, जिसका सीधा असर चेहरे पर दाने के रूप में दिखता है।
  • पानी की भारी कमी (Dehydration): जब आप कम पानी पीते हैं, तो शरीर टॉक्सिन्स को पेशाब के रास्ते बाहर नहीं निकाल पाता, फिर उसे पसीने और पिंपल्स के ज़रिए बाहर फेंकना पड़ता है।
  • दवाइयों का साइड इफेक्ट: कुछ खास तरह की स्टेरॉयड या हार्मोनल गोलियां शरीर में बहुत ज़्यादा गर्मी और बदलाव लाती हैं, जिससे अचानक एक्ने ब्रेकआउट होने लगता है।

क्रीम और फेसवॉश का इस्तेमाल कब त्वचा का दुश्मन बन जाता है?

जब भी चेहरे पर कोई दाना निकलता है, हम तुरंत बाज़ार से कोई महँगा फेसवॉश या सैलिसिलिक एसिड वाली क्रीम लाकर रगड़ना शुरू कर देते हैं। ये चीज़ें तुरंत दाने को सुखा तो देती हैं, लेकिन रोज़ाना इनका इस्तेमाल करना बहुत खतरनाक है। हमारी त्वचा पर एक प्राकृतिक तेल (बैरियर) होता है जो उसे सुरक्षित रखता है। अगर आप रोज़ हार्श केमिकल लगाकर त्वचा का सारा तेल खींच लेंगे, तो स्किन घबराकर और भी ज़्यादा तेल (Sebum) बनाने लगेगी। इससे चेहरा और ज़्यादा चिपचिपा हो जाएगा और धीरे-धीरे आपकी त्वचा बिना केमिकल के खुद को हील करना ही भूल जाएगी।

महँगे ट्रीटमेंट की जगह इन आसान और असरदार घरेलू तरीकों से पाएँ बेदाग त्वचा 

आप कुछ बहुत ही आसान और घरेलू तरीके अपनाकर इन ज़िद्दी मुहाँसों और दाग-धब्बों से हमेशा के लिए आराम पा सकते हैं:

  • सुबह खाली पेट एक गिलास हल्के गुनगुने पानी में थोड़ा सा नींबू निचोड़कर पिएँ, यह लिवर को साफ करता है और पेट की सारी गर्मी को बाहर निकाल देता है।
  • मुल्तानी मिट्टी में थोड़ा सा गुलाब जल और एक चुटकी हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाएँ। यह त्वचा के एक्स्ट्रा तेल को सोख लेती है और मुहाँसों की जलन शांत करती है।
  • जब भी पिंपल्स में बहुत दर्द हो, तो एक साफ सूती कपड़े में बर्फ का टुकड़ा लपेटकर दानों पर हल्की सिकाई करें, इससे सूजन और लालिमा तुरंत कम हो जाती है।
  • रात को सोने से पहले ताज़े नीम के पत्तों को पानी में उबाल लें और उस पानी के ठंडा होने पर उससे चेहरा धोएँ, यह बैक्टीरिया को जड़ से खत्म कर देगा।

चेहरे की चमक वापस लाने के लिए दिनचर्या में करें ये छोटे बदलाव 

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके आप अपनी त्वचा में एक बहुत बड़ा और जादुई फायदा देख सकते हैं:

  • अलग तौलिये का इस्तेमाल: अपने चेहरे को पोंछने के लिए हमेशा एक मुलायम और अलग तौलिया रखें और उसे रगड़ने के बजाय थपथपाकर (Pat dry) पोंछें।
  • भरपूर पानी पिएँ: दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी ज़रूर पिएँ। पानी खून को फिल्टर करता है और रोमछिद्रों की अंदर से सफाई करता है।
  • नींद से समझौता न करें: रोज़ाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें। सोते समय मोबाइल को दूर रखें ताकि शरीर सुकून से अपनी त्वचा की मरम्मत कर सके।
  • चेहरे पर हाथ न ले जाएँ: बार-बार आईने में देखकर मुहाँसों को छूने या उन्हें नाखूनों से खुरचने की आदत को आज ही छोड़ दें, यह काले दाग छोड़ देता है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति इस ज़िद्दी समस्या को जड़ से कैसे मिटाती है? 

आयुर्वेद सिर्फ चेहरे के दानों को ऊपर से नहीं सुखाता, बल्कि मुहाँसों के पैदा होने की जड़ तक जाता है। आयुर्वेद यह मानता है कि आपका स्किन ब्रेकआउट आपके बिगड़े हुए हाज़मे और गलत लाइफस्टाइल का ही नतीजा है। इसमें सबसे पहले वैद्य जी आपकी नाड़ी देखकर आपके शरीर के दोष (विशेषकर पित्त) को समझते हैं। 

फिर शरीर की अंदरूनी गंदगी बाहर निकालने के लिए पंचकर्म (जैसे विरेचन या रक्तमोक्षण) जैसी थेरेपी दी जाती है। इसके साथ ही, आपका आहार कुछ इस तरह सेट किया जाता है जो आपके पेट को ठंडा रखे और खून को साफ करे। इससे आपकी त्वचा खुद को प्राकृतिक रूप से हील (ठीक) करना सीख जाती है।

मुहाँसों के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) का दरवाज़ा कब खटखटाएँ? 

घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे या बिगड़ने लगे, तो आपको तुरंत किसी अच्छे स्किन डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए:

  • जब मुहाँसे बहुत बड़े, सख्त और गांठदार (Cystic Acne) होने लगें और उनमें भयानक दर्द रहने लगे।
  • जब दाने ठीक होने के बाद चेहरे पर गहरे गड्ढे या बहुत काले निशान (Scarring) छोड़ने लगें।
  • अगर मुहाँसों के साथ-साथ आपके बाल भी बहुत झड़ रहे हों और महिलाओं में पीरियड्स (मासिक धर्म) एकदम अनियमित हो गए हों।
  • जब एक्ने की वजह से आपका आत्मविश्वास इतना गिर जाए कि आपको लोगों का सामना करने में शर्म या डिप्रेशन महसूस होने लगे।

आधुनिक और प्राचीन आयुर्वेद के इलाज में क्या फर्क है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य मुहाँसों के कारण के अनुसार सूजन, बैक्टीरिया और अन्य चिकित्सीय कारणों का उपचार करना। शरीर के संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान देना।
उपचार का तरीका एंटीबायोटिक्स, रेटिनॉइड्स, बेंज़ॉयल पेरॉक्साइड, हार्मोनल उपचार (ज़रूरत अनुसार) और अन्य चिकित्सा उपाय। जड़ी-बूटियाँ, आहार-विहार, नाड़ी परीक्षण और पारंपरिक उपचार पद्धतियाँ।
त्वचा और पाचन आवश्यकतानुसार त्वचा और अन्य संबंधित कारणों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाता है। पाचन, आहार और शरीर के संतुलन को त्वचा के स्वास्थ्य से जुड़ा माना जाता है।
असर होने का समय कई उपचार अपेक्षाकृत जल्दी सुधार दिखा सकते हैं। प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है और नियमित पालन पर आधारित होता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण रोग नियंत्रण, दोबारा होने के जोखिम को कम करने और त्वचा की देखभाल पर ध्यान। संतुलित जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य बनाए रखने पर जोर।
जीवनशैली की भूमिका उपचार के साथ उचित स्किनकेयर, संतुलित आहार और नियमित देखभाल की सलाह दी जाती है। आहार, दिनचर्या और प्राकृतिक जीवनशैली को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

निष्कर्ष: 

हमेशा याद रखें कि आपका चेहरा आपके शरीर के अंदरूनी स्वास्थ्य का 'आईना' (Mirror) है। आप जो भी खाते हैं, सोचते हैं या महसूस करते हैं, वह सीधा आपकी त्वचा पर झलकता है। इसलिए मुहाँसों और पेट की खराबी को दो अलग-अलग बीमारियाँ मानकर इनका इलाज करने की गलती न करें। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अपनी सेहत के लिए थोड़ा सा समय निकालें। अपने खानपान को सुधारें, जंक फूड से दूरी बनाएँ और स्ट्रेस को खुद पर हावी न होने दें। जब आपका पेट साफ रहेगा और हार्मोंस संतुलित रहेंगे, तो यकीनन आपकी त्वचा भी पूरी तरह से बेदाग, दमकती हुई और खूबसूरत रहेगी।

References:

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC5605215/

https://www.healthline.com/health/oily-skin-causes

https://www.healthline.com/health/beauty-skin-care/skin-care-routine-for-oily-skin

https://www.healthline.com/health/home-remedies-for-oily-skin

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जी हाँ, डैंड्रफ एक तरह का फंगल इन्फेक्शन होता है। जब सिर की रूसी झड़कर माथे, कंधों या पीठ पर गिरती है, तो यह रोमछिद्रों को बंद कर देती है, जिससे वहाँ छोटे-छोटे और खुजली वाले पिंपल्स निकल आते हैं।

अगर आप अपनी त्वचा के प्रकार (Skin Type) के अनुसार सनस्क्रीन नहीं चुनते, तो दाने निकल सकते हैं। ऑयली या एक्ने-प्रोन स्किन वालों को हमेशा 'नॉन-कॉमेडोजेनिक' (Non-comedogenic) या जेल-बेस्ड सनस्क्रीन लगानी चाहिए, जो रोमछिद्रों को ब्लॉक नहीं करती।

फेस मैपिंग के अनुसार, माथे पर दाने खराब पाचन या नींद की कमी से आते हैं, गालों पर गंदे फोन या तकिये के बैक्टीरिया से, और जॉ-लाइन (जबड़े) या ठुड्डी पर निकलने वाले दाने अक्सर हार्मोनल असंतुलन (जैसे पीरियड्स के दौरान) का इशारा होते हैं।

बर्फ किसी भी मुहाँसे को रातों-रात खत्म नहीं कर सकती, लेकिन यह सूजन, लालिमा और दर्द को तुरंत कम करने में बहुत मदद करती है, जिससे दाना सिकुड़ कर छोटा और कम नज़र आने लगता है।

टूथपेस्ट में बेकिंग सोडा और मेन्थॉल होता है जो दाने को सुखा तो सकता है, लेकिन यह त्वचा के लिए बहुत ज़्यादा कठोर (Harsh) होता है। इससे स्किन जल सकती है, काली पड़ सकती है और एलर्जी का खतरा भी रहता है।

पीरियड्स से कुछ दिन पहले शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन कम हो जाता है और प्रोजेस्टेरोन बढ़ जाता है। यह बदलाव तेल ग्रंथियों को सक्रिय कर देता है, जिस वजह से ठुड्डी और जबड़े के आस-पास दाने निकल आते हैं।

बिल्कुल। पसीने में शरीर के टॉक्सिन्स होते हैं। अगर आप वर्कआउट के तुरंत बाद चेहरा नहीं धोते, तो वह पसीना धूल और बैक्टीरिया के साथ मिलकर वापस रोमछिद्रों में समा जाता है, जिससे भयंकर ब्रेकआउट होता है।

 हाँ, इसे आसानी से रोका जा सकता है। हमेशा अच्छी क्वालिटी का और तेल-रहित (Oil-free) मेकअप इस्तेमाल करें। सबसे ज़रूरी बात, रात को सोने से पहले डबल क्लीन्ज़िंग (Double Cleansing) करके मेकअप को पूरी तरह से हटाना कभी न भूलें।

हाँ, अगर आपके माता-पिता को उनकी जवानी में बहुत ज़्यादा मुहाँसों की शिकायत रही है, तो बहुत अधिक संभावना है कि जेनेटिक्स की वजह से आपकी तेल ग्रंथियां भी ज़्यादा सक्रिय हों और आपको भी एक्ने का सामना करना पड़े।

वे प्रोटीन गाय के दूध से बनता है और कुछ लोगों के शरीर में यह इंसुलिन के स्तर को तेज़ी से बढ़ाता है। अगर आपको दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स से एलर्जी है, तो वे प्रोटीन लेने से चेहरे, छाती और पीठ पर दाने निकल सकते हैं।

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