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Skin का pH गड़बड़ है — Acid Mantle और Pitta का आधुनिक नाम?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हम अपनी त्वचा को चमकाने के लिए हज़ारों रुपये के फेस वॉश, टोनर और सीरम (Serums) खरीद लाते हैं। हमें लगता है कि त्वचा को जितना रगड़ कर साफ़ करेंगे और उस पर जितने महँगे केमिकल्स लगाएंगे, वह उतनी ही बेदाग बनेगी। लेकिन इतनी देखभाल के बाद भी अचानक से भयंकर मुहांसे निकल आते हैं, या फिर त्वचा इतनी रूखी और खिंची हुई हो जाती है कि उस पर कुछ भी लगाओ तो आग जैसी जलन होती है।

आखिर ऐसा क्यों होता है? असल में, आप अपनी त्वचा की सफाई नहीं कर रहे हैं, बल्कि आप रोज़ाना उस अदृश्य सुरक्षा कवच को तेज़ाब और रसायनों से जला रहे हैं जिसे विज्ञान 'एसिड मेंटल' (Acid Mantle) कहता है और आयुर्वेद जिसे हज़ारों सालों से 'भ्राजक पित्त' (Bhrajaka Pitta) के नाम से जानता है। जब तक यह कवच डैमेज रहेगा, दुनिया की कोई भी क्रीम आपको बेदाग त्वचा नहीं दे सकती।

एसिड मेंटल (Acid Mantle) और त्वचा का pH क्या है?

हमारी त्वचा की सबसे ऊपरी परत पर पसीने (Sweat) और प्राकृतिक तेल (Sebum) से बनी एक बेहद पतली और पारदर्शी चादर होती है। इस परत का स्वभाव हल्का सा एसिडिक (Acidic) होता है, जिसका pH लेवल 4.5 से 5.5 के बीच होना चाहिए।

  • बैक्टीरिया का काल: यह हल्का एसिडिक माहौल त्वचा पर हमला करने वाले खतरनाक बैक्टीरिया, फंगस और प्रदूषण को वहीं मार देता है और उन्हें शरीर के अंदर घुसने नहीं देता।
  • नमी को लॉक करना: सही pH त्वचा के अंदर की प्राकृतिक नमी (Hydration) को उड़ने नहीं देता, जिससे त्वचा हमेशा मुलायम और जवां दिखती है।
  • भ्राजक पित्त (Bhrajaka Pitta) का आधुनिक नाम: आयुर्वेद के अनुसार त्वचा का रंग, चमक और उसका तापमान 'भ्राजक पित्त' तय करता है। जब यह पित्त संतुलित होता है, तो त्वचा चमकती है, और आधुनिक विज्ञान में इसी संतुलन को 'स्वस्थ एसिड मेंटल' कहा जाता है।

pH बिगड़ने पर त्वचा किन प्रकारों से बीमार होती है?

जब आप साबुन या गलत कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल करते हैं, तो त्वचा का pH या तो बहुत ज़्यादा गिर जाता है (Highly Acidic) या बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है (Alkaline)। दोषों के आधार पर यह डैमेज तीन रूपों में सामने आता है:

  • वात-प्रधान डैमेज (Alkaline pH): जब आप तेज़ झाग वाले साबुन (जिनका pH 8 या 9 होता है) से चेहरा धोते हैं, तो एसिड मेंटल पूरी तरह धुल जाता है। त्वचा भयंकर रूखी (Dry), खुरदरी और खिंची हुई हो जाती है। समय से पहले झुर्रियां आ जाती हैं। ऐसे में वात दोष कम करने के प्राकृतिक उपाय ज़रूरी होते हैं।
  • पित्त-प्रधान डैमेज (Highly Acidic pH): जब आप बहुत ज़्यादा केमिकल पील (AHA/BHA) या खट्टी चीज़ों (नींबू) का सीधा इस्तेमाल करते हैं, तो पित्त भड़क जाता है। त्वचा पर लालिमा, रोसैसिया (Rosacea) और छूने पर भयंकर जलन होती है।
  • कफ-प्रधान डैमेज (Impaired Sebum): जब एसिड मेंटल डैमेज होता है, तो शरीर घबराहट में त्वचा को रूखेपन से बचाने के लिए बहुत ज़्यादा तेल (Sebum) बनाने लगता है। इससे पोर्स ब्लॉक हो जाते हैं और त्वचा संबंधी समस्याओं (Skin issues) जैसे भयंकर सिस्टिक एक्ने (Cystic Acne) और ब्लैकहेड्स जन्म लेते हैं।

क्या आपकी त्वचा भी अपना 'सुरक्षा कवच' टूटने के ये अलार्म बजा रही है?

एसिड मेंटल रातों-रात गायब नहीं होता। जब यह कवच कमज़ोर पड़ने लगता है, तो त्वचा चीख-चीख कर कई संकेत देती है, जिन्हें हम अक्सर मौसम का बदलाव मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं:

  • चेहरा धोने के बाद भयंकर खिंचाव (Tightness): फेस वॉश करने के तुरंत बाद अगर आपकी त्वचा इतनी खिंची हुई लगती है कि मुस्कुराना भी मुश्किल हो जाए, तो समझ लें कि आपका क्लींज़र (Cleanser) आपका एसिड मेंटल नोच रहा है।
  • नई क्रीम लगाने पर जलन (Sensitivity): जो क्रीम या लोशन आपको पहले सूट करता था, अचानक उसे लगाने पर अगर चेहरे पर लालिमा या सुई चुभने जैसी जलन हो।
  • अत्यधिक चिपचिपाहट और मुहांसे: चेहरे को बार-बार धोने के बाद भी 1 घंटे में ही त्वचा का तेल की खदान बन जाना और दर्दनाक दाने निकलना।
  • त्वचा का अपनी चमक खो देना (Dullness): आप कितने भी विटामिन्स खा लें, लेकिन चेहरे पर एक मृत (Dead) और मुरझाई हुई परत का हमेशा छाए रहना।

त्वचा को बेदाग बनाने के चक्कर में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

इंटरनेट के नुस्खों और टीवी के विज्ञापनों के झांसे में आकर लोग अपनी त्वचा के साथ जो खिलवाड़ करते हैं, वह इस सुरक्षा कवच को हमेशा के लिए तबाह कर देता है:

  • चेहरे पर साबुन का इस्तेमाल: शरीर पर लगाने वाला कोई भी साबुन त्वचा के लिए ज़हर है। इसका अत्यधिक एल्कलाइन (Alkaline) स्वभाव त्वचा के प्राकृतिक एसिड को खत्म करके उसे बैक्टीरिया के लिए खुला मैदान बना देता है।
  • किचन के DIY नुस्खे (Baking Soda & Lemon): गोरा होने या दाग मिटाने के लिए चेहरे पर सीधा नींबू (pH 2) या बेकिंग सोडा (pH 9) रगड़ना त्वचा को 3rd डिग्री डैमेज देता है और भ्राजक पित्त को पूरी तरह जला देता है।
  • दिन में 4-5 बार चेहरा धोना: मुहांसों या तेल से परेशान होकर बार-बार झाग वाले फेस वॉश से चेहरा धोना। इससे शरीर घबराकर दोगुना तेल छोड़ता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर एसिड मेंटल को रिपेयर न किया जाए, तो त्वचा समय से पहले बूढ़ी हो जाती है और इंसान को गंभीर एक्जिमा (Eczema) या सोरायसिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

आयुर्वेद त्वचा के इस संतुलन (pH) को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे स्किन बैरियर (Skin Barrier) और pH कहता है, आयुर्वेद उसे 'रक्त धातु', 'भ्राजक पित्त' और 'ओजस' के विज्ञान से गहराई से समझता है।

  • रक्त धातु की अशुद्धि: त्वचा का सीधा संबंध आपके खून (रक्त धातु) से है। जब आपका पाचन तंत्र खराब होता है, तो 'आम' (Toxins) बनता है। यह अशुद्ध रक्त त्वचा के pH को अंदर से बिगाड़ देता है।
  • भ्राजक पित्त का असंतुलन: शरीर की गर्मी और चमक का नियंत्रण भ्राजक पित्त करता है। तेज़ धूप, गलत कॉस्मेटिक्स और जंक फूड इस पित्त को दूषित कर देते हैं, जिससे स्किन बैरियर टूट जाता है।
  • त्वचा के ओजस (Immunity) का क्षय: त्वचा की अपनी इम्युनिटी (ओजस) होती है। जब हम उसे बाहरी रसायनों से जलाते हैं, तो उसका ओजस सूख जाता है और वह अपना बचाव करने में असमर्थ हो जाती है।

त्वचा का pH सुधारने और भ्राजक पित्त को शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके खून और त्वचा का निर्माण करता है। अपने स्किन बैरियर को रिपेयर करने के लिए आपको इस आयुर्वेदिक डाइट को अनिवार्य रूप से अपनाना होगा।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - रक्त शोधक और पित्त शामक) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - गर्मी और pH बिगाड़ने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, दलिया, ओट्स, जौ, मूंग दाल की खिचड़ी। अत्यधिक मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, बासी खाना।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (त्वचा के लिए अमृत), ऑलिव ऑयल। रिफाइंड ऑयल, बहुत अधिक मक्खन, मेयोनेज़, डालडा।
सब्ज़ियां (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, परवल, पेठा (Ash gourd)। अत्यधिक टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च, बहुत ज़्यादा मिर्च-मसाले।
फल और मेवे (Fruits & Nuts) रात भर भीगे हुए बादाम, मुनक्का, पपीता, सेब, ताज़ा नारियल। अत्यधिक खट्टे फल (जैसे संतरा, कीवी), डिब्बाबंद जूस।
पेय पदार्थ (Beverages) धनिया और सौंफ का पानी, ताज़ा मट्ठा, पित्त शांत करने वाले आहार (Pitta pacifying foods) के रूप में नारियल पानी। बहुत ज़्यादा कॉफी, शराब (Alcohol), एनर्जी ड्रिंक्स और कोल्ड ड्रिंक्स।

डैमेज्ड स्किन बैरियर को रिपेयर करने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई जादुई रसायन दिए हैं, जो बिना किसी कठोर केमिकल के त्वचा के pH को वापस 5.5 पर ले आते हैं और भ्राजक पित्त को शांत करते हैं:

  • मंजिष्ठा (Manjistha): त्वचा की अंदरूनी लालिमा, सूजन और भद्दे दागों को मिटाकर रक्त को गहराई से शुद्ध करने के लिए मंजिष्ठा (Manjistha) दुनिया का सबसे बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर है।
  • नीम (Neem): डैमेज बैरियर के कारण त्वचा पर जो बैक्टीरिया और एक्ने (Acne) का हमला होता है, उसे प्राकृतिक रूप से खत्म करने के लिए नीम (Neem) से बड़ा कोई रक्षक नहीं है।
  • चंदन (Sandalwood): त्वचा की आग जैसी जलन और भड़के हुए भ्राजक पित्त को बर्फ जैसी ठंडक देने और एसिड मेंटल को रिपेयर करने के लिए चंदन का लेप अमृत समान है।
  • सारिवा (Sariva): यह ठंडी तासीर वाली जड़ी-बूटी शरीर से ज़हरीली गर्मी को यूरिन के रास्ते बाहर निकाल देती है और त्वचा को प्राकृतिक चमक (Glow) देती है।
  • एलोवेरा (Aloe Vera): त्वचा को बिना चिपचिपा बनाए उसे अंदर तक हाइड्रेट करने और रूखेपन से फटी हुई त्वचा (Micro-tears) को हील करने में एलोवेरा का कोई मुकाबला नहीं है।

त्वचा को अंदर से रीबूट करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब त्वचा का बैरियर पूरी तरह टूट चुका हो और केवल क्रीम लगाने से काम न चल रहा हो, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ त्वचा को नया जीवन देती हैं:

  • विरेचन (Virechana): लिवर और आंतों की डीप-क्लीनिंग के लिए यह प्रक्रिया की जाती है। विरेचन थेरेपी (Virechana therapy) के ज़रिए शरीर से अत्यधिक पित्त (Acid) और अशुद्ध रक्त को बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे त्वचा अंदर से शुद्ध हो जाती है।
  • लेपनम (Lepanam): त्वचा की प्रकृति के अनुसार विशेष ठंडी जड़ी-बूटियों (जैसे मुल्तानी मिट्टी, चंदन और गुलाब जल) का लेप चेहरे या प्रभावित हिस्से पर लगाया जाता है, जो तुरंत pH को संतुलित करता है।
  • तक्रधारा (Takradhara): माथे पर औषधीय मट्ठे की लगातार धारा गिराने की यह जादुई तक्रधारा (Takradhara) प्रक्रिया मानसिक तनाव और भयंकर पित्त को शांत कर देती है।

त्वचा के पूरी तरह रिपेयर (Heal) होने में कितना समय लगता है?

तेज़ाब और रसायनों से जले हुए एसिड मेंटल को दोबारा प्राकृतिक रूप से बनने में थोड़ा अनुशासित और लगातार समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: आपकी जठराग्नि सुधरेगी। त्वचा का लाल होना, भयंकर खिंचाव और जलन शांत होने लगेगी। नया 'आम' बनना बंद हो जाएगा।
  • 3-4 महीने: प्राकृतिक रसायनों और लेप के प्रभाव से एसिड मेंटल का निर्माण दोबारा शुरू होगा। मुहांसे और रैशेज़ सूखने लगेंगे और त्वचा अपनी नमी खुद लॉक (Lock) करना सीख जाएगी।
  • 5-6 महीने: रक्त धातु पूरी तरह शुद्ध हो जाएगी। आपका भ्राजक पित्त संतुलित हो जाएगा और त्वचा बिना किसी केमिकल क्रीम के प्राकृतिक रूप से चमकने लगेगी।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

स्किन बैरियर डैमेज और त्वचा के pH को लेकर आधुनिक डर्मेटोलॉजी (Dermatology) और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य बाहर से सेरामाइड्स (Ceramides) या कृत्रिम एसिड लगाकर बैरियर को आर्टिफिशल (Artificial) रूप से ठीक करना। भ्राजक पित्त को संतुलित करना, 'आम' को पचाना और शरीर को खुद अपना प्राकृतिक एसिड मेंटल बनाने के लिए प्रेरित करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल त्वचा की सबसे बाहरी परत (Stratum Corneum) का डैमेज मानना। इसे अशुद्ध रक्त, कमज़ोर पाचन और ओजस के सूखने का एक संपूर्ण शारीरिक सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल अक्सर डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल सनस्क्रीन और मॉइस्चराइज़र पर फोकस होता है। पित्त-शामक डाइट, कब्ज़ दूर करना और प्राकृतिक जीवनशैली को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर कृत्रिम बैरियर क्रीम्स छोड़ने पर त्वचा दोबारा रूखी और डैमेज हो जाती है (Dependency)। रक्त और धातुएं अंदर से मज़बूत होती हैं, जिससे त्वचा अपना प्राकृतिक सुरक्षा कवच जीवन भर बनाए रखती है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस डैमेज्ड एसिड मेंटल को पूरी तरह रिपेयर कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपनी त्वचा में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • त्वचा से पीला पानी (Oozing) या मवाद आना: अगर त्वचा इतनी डैमेज हो चुकी हो कि उससे लगातार चिपचिपा पानी या खून आने लगे, जो भयंकर बैक्टीरियल इन्फेक्शन (Staph infection) का संकेत है।
  • पूरे चेहरे और शरीर का अचानक सूज जाना: अगर कोई नई क्रीम लगाने के बाद पूरा चेहरा, आँखें और होंठ लाल होकर सूज जाएं और साँस लेने में दिक्कत होने लगे (Severe Allergic Reaction)।
  • चकत्तों का तेज़ी से पूरे शरीर पर फैलना: अगर लालिमा और दाने चेहरे से शुरू होकर रातों-रात पूरे शरीर पर फैल जाएं।
  • लगातार तेज़ बुखार: त्वचा के डैमेज होने के साथ-साथ अगर भयंकर बुखार और कंपकंपी आए, जो रक्त में इन्फेक्शन फैलने का अलार्म है।

निष्कर्ष

अपनी त्वचा को गोरा और बेदाग बनाने के लिए उसे रोज़ाना झाग वाले साबुनों और तेज़ रसायनों से रगड़ना, अपने घर के सबसे मज़बूत दरवाज़े (Acid Mantle) को तोड़कर बीमारियों को अंदर बुलाने जैसा है। यह एसिड मेंटल केवल तेल और पसीने की परत नहीं है, बल्कि यह आपके भ्राजक पित्त और शरीर के ओजस का वह प्राकृतिक सुरक्षा कवच है जो आपको हज़ारों इन्फेक्शन्स से बचाता है। जब आप इस कवच को लगातार डैमेज करते हैं, तो आप अपनी त्वचा को समय से पहले बूढ़ा और कमज़ोर कर रहे होते हैं। इस केमिकल के खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। साबुनों और DIY नुस्खों (नींबू/बेकिंग सोडा) को कूड़ेदान में डालें। अपनी डाइट में धनिया, ताज़ा मट्ठा और शुद्ध गाय का घी शामिल करें। नीम, मंजिष्ठा और चंदन जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और विरेचन व तक्रधारा थेरेपी से अपनी त्वचा की उस भयंकर आग और अशुद्धि को गहराई से शांत करें। अपनी त्वचा को रसायनों का गुलाम न बनने दें, और उसे वापस प्राकृतिक रूप से बेदाग व स्वस्थ बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

एक स्वस्थ क्लींज़र का pH 4.5 से 5.5 के बीच होना चाहिए। अगर चेहरा धोने के बाद आपकी त्वचा भयंकर रूखी (Squeaky clean) और खिंची हुई महसूस होती है, तो इसका मतलब है कि आपका क्लींज़र बहुत ज़्यादा एल्कलाइन (pH 8-9) है और वह आपका एसिड मेंटल नोच रहा है।

नारियल तेल तासीर में ठंडा और त्वचा को शांत करने वाला होता है, लेकिन यह कोमेडोजेनिक (Comedogenic) भी होता है, यानी यह पोर्स (Pores) को ब्लॉक कर सकता है। अगर आपकी त्वचा बहुत रूखी (वात-प्रधान) है, तो यह फायदेमंद है, लेकिन अगर आपको एक्ने (Acne) हैं, तो इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए।

बिल्कुल। शुद्ध गुलाब जल प्राकृतिक रूप से हल्का एसिडिक (pH लगभग 5.5) होता है। चेहरा धोने के बाद इसे टोनर के रूप में इस्तेमाल करने से यह त्वचा को तुरंत ठंडक देता है, भ्राजक पित्त को शांत करता है और एसिड मेंटल को वापस उसकी जगह पर ले आता है।

अगर आपकी त्वचा का बैरियर टूटा हुआ है, तो सुबह के समय किसी भी फेसवॉश या साबुन का इस्तेमाल न करें। केवल हल्के ताज़े पानी से चेहरा धोएं। अगर बहुत ज़रूरी हो, तो थोड़ा सा बेसन या जई (Oats) के पाउडर में दूध या पानी मिलाकर एक सौम्य (Gentle) उबटन की तरह इस्तेमाल करें।

हाँ। अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें त्वचा के प्राकृतिक लिपिड्स (Fats) और ओजस को सुखा देती हैं। यह भ्राजक पित्त को भड़काकर भयंकर सनबर्न और खुश्की पैदा करता है, जिससे एसिड मेंटल की सुरक्षा परत बुरी तरह टूट जाती है।

विटामिन सी बहुत ज़्यादा एसिडिक (pH 2-3) होता है। अगर आपका एसिड मेंटल पहले से ही डैमेज और संवेदनशील (Sensitive) है, तो विटामिन सी का सीधा इस्तेमाल भयंकर जलन, लालिमा और मुहांसे ट्रिगर कर सकता है। बैरियर ठीक होने के बाद ही ऐसे एक्टिव्स (Actives) का इस्तेमाल करना चाहिए।

शत-प्रतिशत। आयुर्वेद के अनुसार जो आम (Toxins) आंतों में बनता है, वह रक्त के ज़रिए त्वचा तक पहुँचता है। यह अशुद्ध रक्त अंदर से त्वचा को पोषण नहीं दे पाता, जिससे भ्राजक पित्त अपना प्राकृतिक तेल बनाना बंद कर देता है और बाहर से त्वचा फटने लगती है।

चंदन (Sandalwood) और एलोवेरा (Aloe Vera) दोनों ही जादुई हैं। ये तासीर में ठंडे होते हैं, त्वचा की जलन (Inflammation) को तुरंत बुझाते हैं और डैमेज हुई कोशिकाओं को प्राकृतिक रूप से रिपेयर करते हैं। इन्हें ताज़ा इस्तेमाल करना सबसे अच्छा है।

बिल्कुल नहीं। स्क्रब (Scrubbing) करने से त्वचा की सबसे ऊपरी मृत परत हटती है, लेकिन बार-बार और ज़ोर से रगड़ने से (Over-exfoliation) आप अपना ज़िंदा और स्वस्थ एसिड मेंटल भी खुरच कर बाहर निकाल देते हैं, जिससे त्वचा छिल जाती है।

त्वचा का प्राकृतिक टर्नओवर साइकिल (Cell turnover) 28 दिनों का होता है। अगर आप साबुन और रसायनों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दें और सही डाइट (पित्त-शामक) लें, तो हल्के डैमेज को रिपेयर होने में 3 से 4 हफ्ते और गंभीर डैमेज को ठीक होने में 2 से 3 महीने लग सकते हैं।

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